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अब मुझे ध्यान में रखकर किरदार लिखे जा रहे हैं : पंकज त्रिपाठी

बिहार के ग्रामीण इलाके से आकर मुंबई के बौलीवुड में अपनी पताका फहराने के बीच पंकज त्रिपाठी ने लंबा संघर्ष किया है. पर अब वह काफी खुश हैं. लोग उनकी प्रतिभा का लोहा मानने लगे हैं. कुछ समय पहले उन्हे फिल्म ‘‘न्यूटन’’ के लिए ‘स्पेशल मेंशन राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया. इन दिनों वह ‘स्त्री’ सहित कई फिल्मों को लेकर उत्साहित हैं.

प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के अंश.

राष्ट्रीय पुरस्कार की वजह से करियर व जिंदगी में क्या बदलाव आए?

करियर में काफी बदलाव आया है. फिल्मकारों की सोच भी मेरे प्रति बदली है. मगर इसमें सिर्फ राष्ट्रीय पुरस्कार का ही योगदान नहीं है. इसी के साथ पिछले वर्ष बाक्स आफिस पर मेरी फिल्मों ‘बरेली की बर्फी’, ‘न्यूटन’, ‘फुकरे रिटर्न’ को काफी पसंद किया गया. मुझे पसंद करने वाले दर्शकों की संख्या बढ़ी है. तो इन दोनों का योगदान है. यह कमर्शियल नगरी है. जब फिल्मकारों को अहसास होता है कि इस लड़के को दर्शक पसंद कर रहे हैं, तो वह उसे अपनी फिल्म से जोड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं. फिर उस कलाकार को अच्छा मेहनताना भी मिलता है, उसकी शर्ते भी मान ली जाती हैं. मगर जैसे ही लगेगा कि अब इसका बाजार नहीं है, तो फिर वही ‘तुम कौन और हम कौन’ वाला मसला आ जाएगा. अब मुझे अच्छे किरदार मिल रहे हैं. अब लोग मेरी तारीखों के अनुसार एडजस्ट करने को तैयार हो जाते हैं.

आपके अनुसार आपको किन फिल्मों से पहचान मिली?

‘न्यूटन’. ‘गुड़गांव’ बाक्स आफिस पर नहीं चली, मगर इसे संजीदा फिल्म देखने के शौकीन दर्शकों ने काफी पसंद किया. इसके अलावा एक फिल्म थी-‘अंग्रेजी में कहते हैं’ इसे कुछ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कार मिले. लोगों ने काफी पसंद किया. इसमें मेरा किरदार काफी छोटा था, पर लोगों की नजर में आया. ‘अंग्रेजी में कहते हैं’ में संजय मिश्रा नायक बनकर आ रहे थे, इसलिए मैंने छोटा सा किरदार भी कर लिया. उन्होंने हमारी फिल्म ‘न्यूटन’ में एक छोटा सा किरदार निभाया था. इसे सही ढंग से प्रसारित नहीं किया गया.

‘‘फुकरे रिर्टन’’ के पंडित जी को पसंद किया गया. इस फिल्म की सफलता पर फिल्म के निर्माता ने एक बड़ा चेक उपहार में दिया. ‘बरेली की बर्फी’ भी पसंद की गयी. अब तो अश्विनी अय्यर तिवारी की हर फिल्म में मैं रहूंगा. उनके साथ दो फिल्में की और अब तीसरी फिल्म भी करने जा रहा हूं. फिलहाल मैं 31 अगस्त को प्रदर्शित हो रही  फिल्म ‘‘स्त्री’’ को लेकर काफी उत्साहित हूं.

फिल्म ‘‘स्त्री’’ में क्या किया है?

यह हौरर कौमेडी फिल्म है. छोटे शहर चंदेरी की कहानी है. वहां कई किवंदतियां प्रचलित हैं. कुछ कहानियां प्रचलित हैं. कुछ लोग इन्हे सच मानते हैं, कुछ लोग सच नहीं मानते हैं. मेरा किरदार एक पुस्तकालय चलाने वाले का है. वह खुद को शहर का ज्ञानी इंसान मानते हैं. वह लोगों के भ्रम को दूर करता रहता है. दूसरों को ज्ञान देने में मजा आता है. जबकि रात में वह खुद भी भूत प्रेत से डरता है. मेरे किरदार की वजह से कहानी आगे बढ़ती है. फिल्म के निर्देशक बेहतरीन हैं. उनकी पिछली लघु फिल्म ‘आभा’ को बर्लिन फेस्टिवल में पुरस्कृत भी किया गया था. वह डराता भी है और न डरने का संदेश भी देता है. खुद भी डरता है. फिल्म में सच कुछ नहीं है. फिल्म में भूत प्रेत को लेकर जो कहानियां प्रचलित हैं, उन सबका मिश्रण है. मैंने भी अपनी तरफ से कुछ जोड़ दिया है.

राज कुमार राव व रिचा चड्ढा के साथ आपकी कई फिल्में हो गयी?

जी हां! यह महज संयोग हैं. रिचा चड्ढा के साथ मेरी पांच फिल्में और राज कुमार राव के साथ चार हो गयी. यह अच्छे अभिनेता हैं. इनके साथ काम करने में मजा आता है. मैं सिर्फ ईमानदारी से अपने काम को करता रहता हूं. समयाभाव के चलते राज कुमार राव के साथ दो फिल्में ठुकरानी पड़ी.

इसके अलावा कौन कौन सी फिल्में आने वाली हैं?

सबसे पहले 31 अगस्त को ‘स्त्री’ प्रदर्शित होगी, जिसमें मेरे साथ राज कुमार राव और श्रद्धा कपूर हैं. फिर ‘एक्सेल इंटरटेनमेंट’ की वेब सीरीज ‘‘मिर्जापुर’’ है. धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म ‘डाइव’ में बहुत अलग तरह का किरदार निभाया है. हाईफाई पोशाक पहनी हैं. इसके अलावा कदनेश वीजन की फिल्म ‘‘लुका छिपी’’ कर रहा हूं. इसमें मेरे साथ कार्तिक आर्यन व कृति सैनन हैं. मेरा मथुरा के स्टेट एजेंट का किरदार है, जो कि लोगों को किराए पर घर दिलवाता है. वह दूसरों को घर दिखाने के चक्कर में अपना घर भी बसाना चाहता है. वह संभावित प्रेमिका/पत्नी की तलाश कर रहा है.

इसके बाद मै रिचा चड्ढा के साथ मलयालम फिल्मों की स्टार रही शकीला की बायोपिक फिल्म ‘शकीला’ करने वाला हूं. इसमें मेरा दक्षिण भारत के एक चर्चित हीरो का किरदार है. वेब सीरीज ‘क्रिमिनल जस्टिस’ कर रहा हूं, बीबीसी बना रहा है. यह सीरीज न्यायिक प्रक्रिया पर है. हमारे देश में अपराध व सजा की न्यायिक प्रक्रिया कितनी जटिल है, पर काल्पनिक कहानी है. अनुभव सिन्हा के निर्देशन में फिल्म ‘अभी तो पार्टी शुरू हुई है’ कर रहा हूं. इसके अलावा कई पटकथाएं पढ़ रहा हूं. लोगों से मिल रहा हूं. ‘न्यूटन’ जैसी कुछ अच्छी पटकथाओं की तलाश है. अब लोग मुझे केंद्र में रखकर फिल्में लिख रहे हैं. एक फिल्म में मैं मेनलीड में हूं.

वेब सीरीज का भविष्य?

अच्छा है. इसके दर्शक बढ़ रहे हैं. इंटरनेट की वजह से युवा पीढ़ी यात्राएं करते हुए वेब सीरीज देख रही है. सेंसर बोर्ड की बंदिशें नहीं है. आप अपनी कहानी अपने हिसाब से पेश कर सकते हैं. मगर सेंसर न होने की वजह से कुछ गलत चीजें भी परोसी जा रही हैं. सेक्स भी परोसा जा रहा है. मगर दर्शक खुद ही इन पर रोक लगा देगा. संजीदा दर्शक कटेंट न होने पर ठुकरा देगा.

आप साहित्यिक इंसान हैं. साहित्य सिनेमा में कैसे योगदान दे सकता है?

सिनेमा भी बदल रहा है. कईयों के लिए सिनेमा सिर्फ व्यवसाय नहीं है. मगर यह ऐसा माध्यम है, जिसमें बहुत बड़ी पूंजी लगती है. सिनेमा के माध्यम से यदि आप समाज के लिए कोई जरुरी व अच्छा संदेश देना चाहते हैं, तो उसके लिए भी फिल्म का पांच लाख स्क्रीन तक पहुंचना और वहां दर्शकों का आना जरुरी है. ऐसे में आपको फिल्म में ऐसा कुछ रखना पड़ेगा कि दर्शक खींचा चला आए. यदि फिल्म देखने दर्शक नहीं आया, तो आप सिनेमा में चाहे जितनी बड़ी बात कर लें, कोई मायने नहीं रखता. मैं अपनी तरफ से अपने हर करदार में कोई न कोई सामाजिक संदेश ला ही देता हूं.

श्रिया पिलगांवकर कर रही हैं हौलीवुड अभिनेता टौम बेटमन के साथ सीरियल

शाहरूख के साथ फिल्म ‘‘फैन’’ में अपने अभिनय का जलवा दिखा चुकी अभिनेत्री श्रिया पिलगांवकर ने एक बड़ा हाथ मारा है. वह इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर की निर्देशक गुरींदर चड्ढा के निर्देशन में हौलीवुड अभिनेता टौम बेटमन के साथ आईटीवी के ब्रिटिश टीवी सीरीज ‘‘बीचम हाउस’’ में अभिनय कर रही हैं. इस सीरयल में श्रिया पिलगांवकर और टौम बेटमन की समानांतर भूमिकाएं हैं. सीरियल में वह टौम के बच्चे की रहस्यात्मक देखभाल करने वाली चंचल के किरदार में नजर आएंगी. छह भागों की इस सीरीज की शूटिंग फिलहाल लंदन में चल रही है.

इस सीरीज की चर्चा करते हुए श्रिया पिलगांवकर कहती हैं- ’‘गुरिंदर चड्ढा, टौम व अन्य अति प्रतिभाशाली कलाकारों व टीम के साथ काम करने को लेकर मैं काफी रोमांचित हूं. इसके अलावा मुझे हमेशा पीरियड ड्रामा का आकर्षण रहा है और यह सीरीज भी पीरियड ड्रामा ही है. मैंने इसमें चंचल का किरदार निभाया है, जिसके व्यक्तित्व में कई परतें हैं. वह अतिमहत्वाकांक्षी, रहस्य, अबोध और पैशिनेट है.’’

सीरीज ‘‘बीचम हाउस’’ की चर्चा करते हुए श्रिया पिलगांवकर कहती हैं- ‘‘यह 19 वीं सदी की कहानी है. इसमें टौम के अलावा लेसली निकोल, बेस्सी कार्टर और मार्क वारेन भी हैं.’’

रुपये में हुई ऐतिहासिक गिरावट, आम आदमी को होंगे ये 4 बड़े नुकसान

इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. रुपया में 42 पैसे की बड़ी गिरावट आई और यह 70.82 के स्तर पर फिसल गया. करेंसी मार्केट में ट्रेड के दौरान में रुपया पहली बार 70.50 के स्तर के पार हुआ है. डालर के मुकाबले रुपया बुधवार को 22 पैसे की कमजोरी के साथ 70.32 के स्तर पर खुला था. बाजार के जानकारों के मुताबिक, रुपये में आगे भी गिरावट जारी रह सकती है. हालांकि, कल के कारोबार में रुपये में मामूली रिकवरी देखने को मिली थी. रुपया कल 6 पैसे की बढ़त के साथ 70.10 के स्तर पर बंद हुआ था. लेकिन, बुधवार को एक बार फिर रुपये में गिरावट गहरा गई. रुपया का अब तक का सबसे निचला स्तर 70.40 प्रति डालर था, 16 अगस्त को रुपया इस स्तर पर पहुंचा था. लेकिन, आज यह इस स्तर पर भी टूट गया.

क्रूड और डालर पर नजर

रुपये में आगे भी गिरावट जारी रह सकती है. दरअसल, डालर के लगातार मजबूत होने से रुपया कमजोर हो रहा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड के दामों में पिछले कुछ सेशन में तेजी देखने को मिल रही है. हालांकि, मंगलवार को क्रूड की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली थी. वहीं, मार्केट के दिग्गजों की नजर अमेरिका और कनाडा के बीच होने वाली NAFTA डील पर है.

अमेरिका के GDP नंबर पर नजर

रुपये की चाल के लिए अमेरिका के GDP नंबर पर भी नजर रहेगी. उम्मीद की जा रही है कि ग्रोथ 4.1 फीसदी के मुकाबले 4 फीसदी रह सकती है. उम्मीद से बेहतर ग्रोथ आने पर आगे भी डालर के मजबूती मिलने के आसार हैं.

रुपए की ट्रेडिंग रेंज

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, औयल इम्पोर्टर्स और विदेशी बैंकों की तरफ से सरकारी बैंकों द्वारा बिक्री से रुपया गिर रहा है. डालर के मुकाबले रुपया आज 70.10 से 70.60 की रेंज में ट्रेड कर सकता है. लेकिन, रुपये ने अगर 70.50 का स्तर तोड़ा तो गिरावट और गहरा सकती है.

रुपए में गिरावट से आम आदमी के लिए ये हैं 4 बड़े खतरे

पेट्रोल-डीजल हो सकता है महंगा

डालर के मुकाबले रुपए के 70 के स्तर पार पहुंचने का असर क्रूड के इंपोर्ट पर पड़ेगा. इंपोर्ट्स को तेल की ज्यादा कीमत चुकानी होगी. इसकी वजह से तेल कंपनियां रोजाना होने वाली पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हो सकता है. भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड आयात करता है. ऐसे में डालर की कीमतें बढ़ने से इनके इंपोर्ट के लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी. इंपोर्ट महंगा होगा तो औयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं.

बढ़ सकती है महंगाई

देश में खाने-पीने की चीजों और दूसरे जरूरी सामानों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए डीजल का इस्तेमाल होता है. ऐसे में डीजल महंगा होते ही इन सारी जरूरी चीजों के दाम बढ़ेगा. वहीं, एडिबल औयल भी महंगे होगे.

जरूरत की होगी महंगाई

अगर पेट्रोलियम उत्पाद महंगे हुए तो पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ साबुन, शैंपू, पेंट इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, जिससे इन प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ने की संभावना है.

औटो की बढ़ेंगी कीमतें

औटो इंडस्ट्री की लागत बढ़ेगी, साथ ही डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ने का डर रहता है. रुपए में गिरावट बनी रही तो कार कंपनियां आगे कीमतें बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं.

किसे होगा फायदा

रुपए के मुकाबले डालर के मजबूत होने का सबसे ज्यादा फायदा आईटी, फौर्मा के साथ औटोमोबाइल सेक्टर को होगा. इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों की ज्यादा कमाई एक्सपोर्ट बेस है. ऐसे में डालर की मजबूती से टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कंपनियों के साथ यूएस मार्केट में कारोबार करने वाली फार्मा कंपनियों को होगा. इसके अलासवा ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, औयल इंडिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स को डालर में तेजी का फायदा मिलेगा क्योंकि ये कंपनियां डालर में फ्यूल बेचती हैं.

यूथ फ्रैंडली ऐप्स, जो बना देंगे जिंदगी आसान

यदि स्मार्टफोन पास हो तो लाइफ बड़ी आसान और रोमांचक हो सकती है, लेकिन इस के लिए सिर्फ फोन का ही नहीं आप का भी स्मार्ट होना जरूरी है. यदि आप मौजूदा दौर के उपयोगी ऐप्लिकेशंस से परिचित नहीं हैं तो आप इस का पूरा फायदा नहीं उठा सकते. अगर आप लाइफ में कुछ फन चाहते हैं, स्मार्ट और तेजतर्रार बनना चाहते हैं, तकनीक का भरपूर इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो निम्न ऐप्स आप के काम आ सकते हैं :

गूगल डौक्स
कई बार जब क्लास नोट्स खो जाते हैं, तो दोस्तों से नोट्स लेने के लिए उन को मनाना पड़ता है, लेकिन अगर गूगल डौक्स हो तो आप को किसी को मनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इस की मदद से आप जब चाहें अपने नोट्स किसी भी डिवाइस से हासिल कर सकते हैं. नए डौक्यूमैंट्स बनाना, उन्हें ऐडिट करना, किसी के साथ शेयर करना, कमैंट्स देना आदि इस ऐप के विशेष फीचर्स हैं. इस की मदद से आप फोल्डर में नोट्स सेव भी कर सकते हैं. हां, सब से बड़ा फायदा यह है कि अगर आप औफलाइन भी हो जाते हैं, तो भी इस में नोट्स सेव कर सकते हैं.

वेयर इज माई ड्रौयड
कई बार हम फोन को कहीं और रख कर भूल जाते हैं लेकिन तब और मुश्किल हो जाती है जब फोन स्विच औफ या साइलैंट मोड में हो. ऐसे में रिंग बजा कर भी उसे खोजना मुश्किल हो जाता है. ऐसे समय में काम आता है, वेयर इज माई ड्रौयड. यदि हम अपने स्मार्टफोन में इस ऐप की मदद से एक कोड सैट कर दें और फोन मिसप्लेस होने पर यह कोड किसी भी दूसरे मोबाइल से मैसेज की तरह अपने ऐंड्रौयड फोन में भेजें, तो फोन चाहे साइलैंट हो या स्विच औफ, इस के बावजूद उस में तेज आवाज में रिंग बजने लगेगी जिस से आप उसे आसानी से ढूंढ़ सकेंगे.

रेस्क्यू टाइम
गैजेट्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए हैल्थ ऐक्सपर्ट से ले कर पेरैंट्स तक सभी मना करते हैं. इस के अधिक प्रयोग से आप की सेहत पर बुरा असर पड़ने के साथसाथ समय भी काफी बरबाद होता है, इसलिए टैक्नोलौजी के इस्तेमाल पर अंकुश लगना भी जरूरी है लेकिन इस काम में आप की मदद करेगा, रेस्क्यू टाइम. इस ऐप की मदद से आप इस बात का रिकौर्ड रख सकते हैं कि आप ने इंटरनैट या सोशल मीडिया पर कितना समय बिताया. जैसे ही आप को लगे कि आप चैटिंग और सर्चिंग में जरूरत से ज्यादा वक्त बरबाद कर रहे हैं, आप तुरंत अलर्ट हो कर इस में कटौती कर सकते हैं ताकि आप की पढ़ाई का नुकसान न हो. यह ऐप डैस्कटौप वर्जन और ऐंड्रौयड डिवाइस पर उपलब्ध है. आप अलार्म सैट कर दें तो यह आप के द्वारा बताई गई साइट्स को तय वक्त के बाद ब्लौक कर देगा.

आई कांट वेकअप अलार्म क्लौक
अपने मोबाइल की अलार्म घड़ी को तो आप नींद में ही स्नूज मोड में डाल कर दोबारा सो जाते होंगे और इस वजह से आप को देर भी हो जाती होगी, लेकिन अपने स्मार्टफोन में आप आई कांट वेकअप अलार्म क्लौक को डाउनलोड कर लें तो यह आप को तय समय के बाद चैन की नींद नहीं सोने देगा. इस में स्नूज कर के सोने की गुंजाइश नहीं है, क्योंकि इस से अलार्म बजते ही 8 अलगअलग टास्क पूरे करने होते हैं. इस के बाद ही अलार्म बंद होता है. आप चाहें तो मल्टीपल अलार्म भी लगा सकते हैं और अपनी पसंदीदा रिंगटोन को भी अलार्म टोन में बदल सकते हैं ताकि सुबह की नींद अच्छे म्यूजिक के साथ खुले.

माई फिटनैसपाल
फिटनैस के प्रति जागरूक रहने वाले युवाओं का सच्चा दोस्त है, माई फिटनैसपाल नामक यह ऐप. यह ऐप एक हितैषी की तरह आप के वेट लौस प्रोग्राम की प्रोग्रैस की पूरी खबर रखेगा. यह आप के द्वारा खाए गए भोजन से मिलने वाली कैलोरी गिन कर उस का हिसाब रखने में सक्षम है. इतना ही नहीं इस की मदद से आप दुनिया भर के फूड और फिटनैस ब्लौगर्स से भी कनैक्ट हो सकते हैं और सेहत से जुड़े महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर उन की राय से वाकिफ हो सकते हैं.

इंस्टासाइज
अकसर इंस्टाग्राम में स्क्वैयर फ्रेम होता है, जिस में मजबूर हो कर यूजर को अपनी तसवीरें आधे साइज में क्रौप करनी पड़ती हैं. लेकिन आप अगर अपनी पूरी तसवीर इंस्टाग्राम में लगाना चाहते हैं, तो आप के स्मार्टफोन में इंस्टासाइज नामक यह ऐप जरूर होना चाहिए. यह कई तरह के फिल्टर और आकर्षक बैकग्राउंड औप्शंस भी देता है, जिस से आप अपनी तसवीरों को अपने अंदाज में सजा कर पेश कर सकते हैं.

ऐप लौक
अधिकतर यूथ अपनी गर्लफैं्रड या बौयफ्रैंड की एक आदत से परेशान रहते हैं कि वे उन का फोन हाथ में लेते ही उन के तमाम मैसेज, चैटिंग, कौल लिस्ट आदि देखने लगते हैं. आखिर, प्राइवेसी भी कोई चीज होती है. कई बीवियां और पति भी ऐसे होते हैं. ऐसे में ऐप लौक बड़े काम की चीज है. यह आप के स्मार्टफोन में एक पासवर्ड सैट कर के उसे लौक करने में आप की मदद करेगा.

फै्रंडीनीड
यह एक उपयोगी सोशल मीडिया ऐप है, जो उपयोगकर्ता की लोकेशन को देख कर उसे दोस्तों से कनैक्ट कर सकता है, जिस से आप उन से चैट कर सकते हैं. आपातस्थिति में यह ऐप आप के दोस्तों को मैसेज भी कर सकता  है. इस का इस्तेमाल और रजिस्ट्रेशन करना भी बेहद आसान है. इस के लिए आप को फेसबुक अकाउंट और फोन नंबर की जरूरत पड़ेगी. दोस्तों से जुड़े रहने के लिए इस का उपयोग करें ताकि उन से प्रेम बना रहे.

ट्रूकौलर
अगर कोई व्यक्ति आप को किसी अनजान नंबर से भी फोन कर रहा है, तो यह ऐप उसे पहचानने में आप की मदद करेगा. कभीकभी इस की मदद से कौल करने वाले व्यक्ति की तसवीर भी स्क्रीन पर आ जाती है. अगर आप व्यस्त हैं या मूड औफ होने के कारण हर किसी की कौल रिसीव नहीं करना चाहते, तो यह ऐप आप के लिए काफी काम का साबित हो सकता है.

ऐन्की
ऐन्की एक जापानी शब्द है. इस का मतलब है मन लगा कर पढ़ना. ऐन्की एक डैस्कटौप, ऐंड्रौयड और आईओएस ऐप है. आप इस की मदद से नोट्स के छोटेछोटे बुकनोट्स बना कर एक फ्लैशकार्ड में रख सकते हैं. आप के पढ़ाई के तरीके को इम्प्रूव करने से ले कर चीजों को याद करने के स्टाइल तक को समझाने में यह बेहद मददगार साबित होगा. यह आप के बनाए बुकनोट्स को पढ़ने और याद करने का तरीका, एक बार में कितना पढ़ना चाहिए और अब तक आप कहां तक पढ़ चुके हैं आदि बातें आप को बताएगा. अगर आप दूसरों को भी अपनी पढ़ाई के बारे में बताना चाहें तो ट्वीट भी कर सकते हैं.

जैंडर
इस ऐप की मदद से आप यूएसबी की मदद लिए बिना ही किसी फाइल को आराम से ट्रांसफर कर सकते हैं. इस की कार्यप्रणाली बहुत कुछ ब्लूटूथ जैसी ही है, लेकिन स्पीड उस से काफी ज्यादा है. जिन युवाओं को कोई फाइल शीघ्र ट्रांसफर करनी हो उन के लिए यह बेहद उपयोगी ऐप है.

फेक कौल या एसएमएस
कई बार ऐसा होता है कि आप बहुत जरूरी काम से कहीं जाना चाहते हैं, लेकिन कुछ परिचित घर पर आए हुए होते हैं या किसी मीटिंग से बारबार उठना चाहते हैं, लेकिन संकोचवश नहीं उठ पा रहे, ऐसे में आप की मदद करेगा यह शानदार ऐप, फेक कौल या एसएमएस. इसे इंस्टौल कर आप किसी भी कौलर का नाम और टाइम सैट कर लें. तय समय पर आप का मोबाइल बज उठेगा. जिसे उठा कर आप झूठमूठ हांहूं अच्छा…अच्छा मैं अभी आया…कहते हुए इमरजैंसी काम का बहाना बना कर वहां से निकल सकते हैं. बोलिए, है कि नहीं काम की चीज?           

भोगनाथ का भोग : क्या पूरे हो पाए भोगनाथ के अरमान

कड़ाके की सर्दी हो और ऊपर से बरसात हो जाए तो सर्दी के तेवर और भी भयावह हो जाते हैं. रोज की तरह दोपहर को भोगनाथ बिट्टू के घर पहुंचा तो वह रजाई में लिपटी बैठी थी. दोनों एकदूसरे को देख कर मुसकराए, फिर हथेलियां रगड़ते हुए भोगनाथ बोला, ‘‘आज तो गजब की सर्दी है.’’

‘‘इसीलिए तो रजाई में दुबकी बैठी हूं,’’ बिट्टू बोली, ‘‘रजाई छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा, लेकिन तुम इतनी ठंड में कहां घूम रहे हो?’’

‘‘घूम नहीं रहा, सुबह से तुम्हें देखा नहीं था, इसलिए रोज की तरह तुम से मिलने चला आया,’’ भोलानाथ ने जवाब दिया, ‘‘सोचा था, तुम आग ताप रही होगी तो मैं भी हाथ सेंक लूंगा, लेकिन यहां तो हालात दूसरे ही है. लगता है मुझ से ज्यादा तुम्हें गर्मी की जरूरत है. दूसरे तरीके से हाथ सेंक कर मुझे तुम्हारी ठंड दूर करनी होगी.’’  कहने के बाद भोगनाथ ने बिट्टू का चेहरा अपने हाथों में ले लिया.

बिट्टू ने एक झटके से अपना चेहरा अलग कर लिया और ठंडे हो गए गालों पर हथेलियां मलते हुए बोली, ‘‘हटो भी, कितने ठंडे हैं तुम्हारे हाथ, एकदम बर्फ जैसे.’’

‘‘बिट्टू, कुछ चीजें ठंडी जरूर लगती हैं, लेकिन उन की तासीर बड़ी गर्म होती है,’’ भोगनाथ ने चुहल की, ‘‘मेरी बात पर विश्वास न हो तो आजमा कर देख लो. 2 मिनट में मेरे हाथ तुम्हें गर्म तो लगने ही लगेंगे, खुद भी इतनी गर्म हो जाओगी कि रजाई शरीर से उतार फेंकोगी.’’

भोगनाथ के कथन का आशय समझ कर बिट्टू के गाल सुर्ख हो गए. वह उसे मीठी फटकार लगाते हुए बोली, ‘‘मैं तुम से कई बार कह चुकी हूं कि इस तरह की बातें मत किया करो. लेकिन तुम हो कि मानते ही नहीं.’’

भोगनाथ ने थोड़ा आगे की ओर झुक कर बिट्टू की आंखों में झांका, ‘‘तो फिर कैसी बातें किया करूं?’’

‘‘वैसी ही अच्छीअच्छी बातें, जैसे दूसरे प्रेमी करते हैं.’’

‘‘प्रेमियों की बात कहीं से भी शुरू हो, जिस्म पर ही पहुंच कर खत्म होती है.’’

‘‘भोग, अभी हमारी शादी नहीं हुई है.’’

‘‘शादी भी जल्दी हो जाएगी.’’

‘‘तब जो मन में आए, बातें कर लेना.’’

‘‘बातें तो अभी भी कर रहा हूं. शादी के बाद तो कुछ और करूंगा.’’

बिट्टू को उस की बातों में रस आने लगा. मुसकरा कर उस ने पूछा, ‘‘शादी के बाद क्या करोगे?’’

‘‘कह कर बताऊं या कर के?’’

‘‘फिर शुरू हो गए.’’

‘‘उकसा तो तुम ही रही हो,’’ भोगनाथ मुसकराया, ‘‘लगता है तुम्हारा मन डोल रहा है.’’

जवाब में मुंह खोलने के लिए बिट्टू ने मुंह खोला ही था कि तभी हवा का तेज झोंका बरसात की ठंडी फुहारों को खुले दरवाजे के भीतर तक ले आया. ठंड से बिट्टू और भोगनाथ दोनों के बदन सिहर उठे. बिट्टू ने रजाई को और मजबूती से लपेट लिया, ‘‘उफ! यह बारिश और यह ठंड आज किसी की जान ले कर ही मानेगी.’’

‘‘किसी की क्या, फिलहाल तो मेरी जान पर ही बनी हुई है.’’

‘‘वो कैसे?’’

‘‘तुम ने तो सर्दी से अपना बचाव कर रखा है, मैं खुले दरवाजे के सामने खड़ा ठंड से कांप रह हूं.’’

‘‘तो दरवाजा भेड़ कर तुम भी रजाई ओढ़ लो.’’ बिट्टू के मुंह से अनायास निकल गया. यह बात उस ने कैसे कह दी. वह खुद ही नहीं समझ पाई.

भोगनाथ को शायद इसी पल की प्रतीक्षा थी. बिट्टू ने उस से दरवाजा भेड़ने को कहा था, पर उस ने दरवाजा बंद कर के सिटकनी लगा दी. उस के पास आ कर बिटटू की रजाई में घुसने लगा, ‘‘बिट्टू, तुम कितनी गर्म हो. अपने जैसा मुझे भी गर्म कर दो न?’’

‘‘मेरी रजाई में तुम कहां घुसे आ रहे हो,’’ बिट्टू ने हड़बड़ा कर कहा, ‘‘कोई आ जाए तो मैं मुफ्त में बदनाम हो जाऊंगी.’’

‘‘इश्क की दुनिया में उन का ही नाम होता है, जो बदनाम होते हैं.’’

‘‘समझने की कोशिश करो भोग,’’ बिट्टू ने प्रतिरोध किया, ‘‘तुम लड़के हो, तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ेगा लेकिन मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी.’’

‘‘मैं चाहता भी नहीं हूं कि कोई तुम्हारा मुंह देखे. तुम्हारा मुंह देखने के लिए मैं हूं न.’’ भोगनाथ ने रजाई के साथसाथ बिट्टू को भी जकड़ लिया. बिट्टू के बदन में ठंड की सिहरन दौड़ी तो पुरुष स्पर्श की मादक अनुभूति भी हुई.

गर्म रजाई और बिट्टू के तन की गरमी से भोगनाथ का शरीर सुलगने लगा. रजाई के भीतर से ही उस ने बिट्टू की कमर में हाथ डाल दिया. बिट्टू के तनमन में चिंगारियां सी चटखने लगीं. आनंद की उठती लहरों से उस की पलकें मुंदने लगीं और सांसों की रफ्तार तेज हो गई.

दोनों चुप थे, लेकिन उन की शारीरिक गतिविधियां एकदूसरे से बहुत कुछ कह रही थीं. मस्ती में भर कर वह भोगनाथ को अपने ऊपर खींचने लगी. बिट्टू की देह को मस्त और बहकते देख कर भोगनाथ ने उसे निर्वस्त्र किया, फिर स्वयं भी निर्वस्त्र हो गया. इस के बाद दोनों एकदूसरे में समा गए.

कुछ देर में जब दोनों के तन की आग ठंडी हुई तो दोनों एकदूसरे की बांहों से आजाद हुए. उस के बाद ही बिट्टू को पता चला कि पुरुष संसर्ग कितना आनंददायक होता है.

उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर के पिसावां थाना क्षेत्र के गांव सरवाडीह में भगौती रहता था. उस के परिवार में उस की पत्नी रामश्री और 2 बेटियां बिट्टू, सीमा और एक बेटा शोभित था. भगौती पिसावां कस्बे में एक दुकान पर लोहे की ग्रिल बनाने का काम करता था. भगौती को मिलने वाली मजदूरी से घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चल पाता था. घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी.

घर में बिट्टू भाईबहनों में सब से बड़ी थी. बात उस समय की है, जब बिट्टू की उम्र 16 साल थी. यौवन की दहलीज पर बिट्टू की खूबसूरती निखर गई थी.

भगौती के मकान से कुछ दूरी पर केदार रहता था. उस के परिवार में पत्नी जयरानी और 3 बेटों भोगनाथ, पिंटू और शिवा के अलावा 1 बेटी सविता थी. केदार मेहनतमजदूरी कर के  परिवार का भरणपोषण करता था. दोनों के घरों में काफी मेलजोल था और एकदूसरे के घर भी आनाजाना था.

आनेजाने के दौरान जवान होती बिट्टू पर भोगनाथ की नजर पड़ी तो उस की मदमस्त काया देख कर उस की नजरें उस पर जम गईं. जैसी लड़की की चाहत उस के दिल में थी, बिट्टू ठीक वैसी थी. बिट्टू का हसीन चेहरा उस की आंखों के रास्ते उस के दिल में उतरता चला गया.

घर के रास्ते पहले से खुले हुए थे. भोगनाथ की बिट्टू से खूब पटती थी. उस का कारण भी था, बिट्टू भी दिल ही दिल में भोगनाथ को पसंद करने लगी थी. धीरेधीरे वह भी उस की तरफ खिंचती चली गई. दोनों एकदूसरे से दिल ही दिल में प्यार करते थे. अपने प्यार का इजहार करने के लिए उन के पास पर्याप्त अवसर थे. इसलिए उन्हें न मोहब्बत के इजहार में वक्त लगा न इश्क के इकरार में.

गांव में मकान एक लाइन से बने थे. उन की छतें भी आपस में मिली हुई थीं. भोगनाथ अपने मकान से कई मकानों की छत फांद कर बिट्टू के पास पहुंच जाता था और छत पर बने कमरे में उस के साथ घंटों प्यार की मीठीमीठी बातें करता था.

प्रेम के हिंडोले में झूमती हुई बिट्टू कहती, ‘‘भोग, दिल तो मैं ने तुम्हें दे दिया है, पर तुम भी उस की लाज रखना. देखना कभी भूले से मेरा दिल न टूटे.’’

‘‘कैसी बात करती हो बिट्टू, तुम्हारा दिल अब मेरी जान है और कोई अपनी जान को यूं ही जाने देता है क्या?’’

‘‘इसी भरोसे पर तो मैं ने तुम से प्यार किया है. मनआत्मा से तुम्हें वरण कर के मैं 7 जन्मों के लिए तुम्हारी हो चुकी. देखना है कि तुम किस हद तक प्यार निभाओगे.’’

‘‘प्यार निभाने की मेरी कोई हद नहीं है. प्यार निभाने के लिए मैं किसी भी हद तक जा सकता हूं.’’

बिट्टू ने इत्मीनान से सांस ली, ‘‘पता नहीं, वह दिन कब आएगा, जब मैं तुम्हारी पत्नी बनूंगी.’’

‘‘विश्वास रखो बिट्टू, हमारे प्यार को मंजिल मिलेगी.’’ बिट्टू का हाथ अपने हाथों में ले कर भोगनाथ बोला, ‘‘वैसे भी हमारी शादी में कोई अड़चन तो है नहीं, हमारा धर्म और जाति एक है. हमारा सामाजिकआर्थिक स्तर एक जैसा है. सब से बड़ी बात यह कि हम दोनों प्यार करते हैं.’’

भोगनाथ की बात तो बिट्टू को यकीन दिलाती ही थी, उसे खुद भी पूरा भरोसा था कि दोनों की शादी कोई अड़चन नहीं आएगी. इसलिए उसे अपने प्रेम व भविष्य के प्रति कभी नकारात्मक विचार नहीं आते थे. उसे पलपल भोगनाथ का इंतजार रहता था. भोगनाथ के आते ही वह खुली आंखों से भविष्य के सुनहरे सपने देखने लगती थी.

तन्हाई, दो जवां जिस्म और किसी के आने का कोई डर नहीं. यही भावनाओं के बहकने का पूरा वातावरण होता था. कभीकभी बिट्टू और भोगनाथ के दिल बहकने लगते थे, लेकिन बिट्टू जल्द ही संभल जाती और भोगनाथ को भी बहकने से रोक लेती थी. लेकिन एक वर्ष पूर्व कड़कड़ाती ठंड में वह सब तनहाई में हो गया, जो बिट्टू नहीं चाहती थी.

उस दिन दोपहर को बने शारीरिक संबंध में बिट्टू को ऐसा आनंद आया कि वह बारबार उस आनंद को पाने के लिए उतावली रहने लगी. भोगनाथ भी कम मतवाला नहीं था.

इसी दौरान एक दिन इत्तफाक से बिट्टू की अनस नाम के एक युवक से बात हुई. उस के बाद इन दोनों की प्रेम कहानी में एक नया मोड़ आ गया.

सीतापुर की सीमा से सटे हरदोई जनपद के टडि़यावां थाना क्षेत्र के कस्बा गोपामऊ में नवी हसन रहते थे. नवी हसन के परिवार में पत्नी नाजिमा के अलावा 3 बेटे थे- साबिर, अनस और असलम.

नबी हसन की कस्बे में ही खाद की दुकान थी, जिस पर उस के साथ उस के बेटे अनस और असलम बैठते थे. साबिर किसी फैक्ट्री में काम करता था. अनस काफी खूबसूरत नौजवान था, साथ ही अविवाहित भी. उसे दोस्तों के साथ मौजमस्ती करने में काफी मजा आता था.

एक दिन सुहानी सुबह अनस उठ कर छत पर चला आया. छत की मुंडेर पर बैठ कर वह आसमान की तरफ निहार रहा था कि अचानक उस का मोबाइल बज उठा इतनी सुबह फोन करने वाला कोई दोस्त ही होगा, सोच कर अनस मोबाइल स्क्रीन पर बिना नंबर देखे ही बोला, ‘‘हां बोल?’’

‘‘जी, आप कौन बोल रहे हैं?’’ दूसरी ओर से किसी युवती की आवाज सुनाई दी तो अनस चौंक पड़ा. उसे अपनी गलती का एहसास हुआ. उस ने तुरंत ‘सौरी’ कहते हुए कहा, ‘‘माफ करना, दरअसल मैं समझा इतनी सुबह कोई दोस्त ही फोन कर सकता है, इसलिए… वैसे आप को किस से बात करनी है, आप कौन बोल रही हैं?’’

‘‘मैं बिट्टू बोल रही हूं. मुझे भी अपनी दोस्त से बात करनी थी, लेकिन गलत नंबर डायल हो गया.’’

‘‘कोई बात नहीं, आप को अपनी दोस्त का नंबर सेव कर के रखना चाहिए. ऐसा करने से दोबारा गलती नहीं होगी.’’

‘‘आप पुलिस में हैं क्या?’’

‘‘नहीं तो, क्यों?’’

‘‘पूछताछ तो पुलिस वालों की तरह कर रहे हैं. 25 सवाल और सलाह भी.’’ कह कर बिट्टू जोर से हंसी.

‘‘अरे नहीं, मैं ने तो वैसे ही बोल दिया. दोस्त आप की, फोन भी आप का. आप चाहें नंबर सेव करें या न करें.’’

‘‘तो आप दार्शनिक भी हैं?’’ बिट्टू ने फिर छेड़ा.

‘‘नहीं नहीं, आम आदमी हूं.’’

‘‘किसी के लिए तो खास होंगे?’’

‘‘आप बहुत बातें करती हैं.’’

‘‘अच्छी या बुरी?’’

‘‘अच्छी.’’

‘‘क्या अच्छा है मेरी बातों में?’’

अब हंसने की बारी अनस की थी. वह जोर से हंसा, फिर बोला, ‘‘माफ करना, मैं आप से नहीं जीत सकता.’’

‘‘और मैं माफ न करूं तो?’’

‘‘तो आप ही बताएं, मैं क्या करूं?’’ अनस ने हथियार डाल दिए.

‘‘अच्छा जाओ, माफ किया.’’

दरअसल बिट्टू ने अपनी सहेली से बात करने के लिए नंबर मिलाया था, लेकिन गलत नंबर डायल होने से अनस का नंबर मिल गया था. लेकिन अनस की आवाज उसे भा गई थी. इस के बाद उस के दिल में फिर से अनस से बात करने की इच्छा हुई, लेकिन संकोचवश वह अपने आप को रोक लेती थी.

फिर एक दिन उस से रहा नहीं गया तो उस ने अनस का नंबर फिर मिला दिया. इस बार अनस भी जैसे उस के फोन का इंतजार कर रहा था. उसे इस बात का एहसास था कि बिट्टू उसे फिर से फोन जरूर करेगी. इस बार जब दोनों की बात हुई तो काफी देर तक चली.

बिट्टू ने अपने बारे में बताया तो अनस ने भी अपने बारे में सब कुछ बता दिया. दोनों के बीच कुछ ऐसी बातें हुईं कि दोनों एकदूसरे के प्रति अपनापन सा महसूस करने लगे. यह दिसंबर 2017 की बात है.

फिर उन के बीच बराबर बातें होने लगीं. एक दिन दोनों ने रूबरू मिलने का फैसला कर लिया. दोनों मिले तो एकदूसरे को सामने पा कर काफी खुश हुए. बिट्टू काफी खुश थी.

उस ने भोगनाथ और अनस की तुलना की तो पाया कि भोगनाथ और अनस का कोई मुकाबला नहीं है. अनस भोगनाथ से ज्यादा खूबसूरत था और उस की आर्थिक स्थिति भी भोगनाथ से लाख गुना अच्छी थी. इसलिए वह भोगनाथ से दूरी बना कर अनस से नजदीकियां बढ़ाने लगी.

अनस अपने आप चल कर आए मौके को भला कैसे गंवा देता. उसे भी बैठेबिठाए एक खूबसूरत युवती का साथ मिला तो वह भी बिट्टू का हो गया. समय के साथ दोनों की नजदीकियां इतनी बढ़ीं कि तन की दूरियां भी खत्म हो गईं. एक दिन दोनों के बीच शारीरिक रिश्ता भी कायम हो गया.

13 मई की शाम साढ़े 7 बजे भोगनाथ घर में बैठा खाना खा रहा था कि तभी उस के मोबाइल पर किसी की काल आई. वह पूरा खाना खाए बिना घर से चला गया. काफी रात होने पर भी वह नहीं लौटा तो घर वाले चिंता में पड़ गए. सुबह होने पर उस की काफी तलाश की गई लेकिन उस का कहीं पता नहीं चला.

16 मई की सुबह किसी राहगीर ने पिसावां थाने में डीह कबीरा बाबा के जंगल में किसी अज्ञात युवक की लाश पड़ी होने की सूचना दी. सूचना पा कर थानाप्रभारी दिनेश सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

मृतक की उम्र 24-25 वर्ष रही होगी. उस के मुंह व गले पर कस कर अंगौछा बांधा गया था, जिस से दम घुटने से उस की मृत्यु हो गई थी. घटनास्थल पर काफी भीड़ एकत्र थी. थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने उस की शिनाख्त कराई तो पता चला वह गांव सरवाडीह का भोगनाथ है.

घटनास्थल सरवाडीह गांव के बाहर ही था. इसलिए गांव के लोग भी वहां पहुंच गए थे. उन्होंने ही लाश की शिनाख्त की थी. पता चलते ही भोगनाथ का पिता केदार भी घर के अन्य सदस्यों के साथ वहां आ गया. भोगनाथ की लाश देख कर सब रोनेबिलखने लगे.

थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने केदार से कुछ आवश्यक पूछताछ की और फिर लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दी. केदार को साथ ले कर वह थाने आ गए. केदार की लिखित तहरीर पर उन्होंने अज्ञात के विरुद्ध भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया.

भोगनाथ के पास मोबाइल था, जो उस के पास से नहीं मिला था. केदार से भोगनाथ का मोबाइल नंबर ले कर थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने उसे सर्विलांस पर लगा दिया. इस के अलावा भोगनाथ के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स भी निकलवाई.

भोगनाथ को बुलाने के लिए जिस नंबर से काल की गई थी, उस नंबर की जब विस्तृत जानकारी जुटाई गई तो वह नंबर सरवाडीह निवासी बिट्टू का निकला.

इस के बाद थानाप्रभारी दिनेश सिंह ने बिट्टू को हिरासत में ले कर महिला सिपाही की उपस्थिति में उस से सख्ती से पूछताछ की. उस ने भोगनाथ की हत्या का जुर्म स्वीकार करते हुए अपने 3 साथियों के नाम भी बता दिए.

इस के बाद बिट्टू के प्रेमी अनस को गिरफ्तार कर लिया गया. अनस के 2 दोस्त गोपामऊ निवासी विपिन और मोनू भी इस अपराध में शामिल थे. इस के बाद एसपी महेंद्र चौहान ने प्रैसवार्ता कर बिट्टू और अनस को मीडिया के सामने पेश किया.

जब भोगनाथ ने बिट्टू को अपने से दूरी बनाते देखा तो उस ने पता किया. जल्द ही उसे पता चल गया कि बिट्टू उस से किए गए सारे वादे, रिश्तेनाते तोड़ कर उस से दूर होना चाहती है तो वह तिलमिला गया. ऐसे मौके के लिए ही उस ने अपने मोबाइल से बिट्टू के साथ अंतरंग पलों के फोटो खींच रखे थे.

भोगनाथ ने बिट्टू से मिल कर उसे धमकाया कि वह उस से दूर हुई तो उस के अश्लील फोटो सब को भेज देगा. फोटो के बल पर भोगनाथ उसे ब्लैकमेल कर के उस के साथ संबंध बनाने लगा. बिट्टू उस के हाथ का खिलौना बनने के लिए मजबूर थी. इसी बीच उस के घर वालों ने हरदोई जनपद के पिहानी थाना क्षेत्र के एक युवक से उस की शादी तय कर दी. शादी 29 जून को होनी थी.

भोगनाथ की हरकतों से आजिज आ कर बिट्टू ने अनस से बात की. उस से कहा कि उस की जिंदगी में आने से पहले उस का एक दोस्त भोगनाथ था. भोगनाथ के पास उस के कुछ अश्लील फोटो हैं, जिन के सहारे वह उसे ब्लैकमेल करता है.

वैसे भी उस की शादी तय हो गई है. वह उस की शादी में अड़चन डाल सकता है. बिट्टू ने अनस से कहा कि भोगनाथ को ठिकाने लगाना पड़ेगा. इस के लिए मैं तुम्हारी हर बात मानने को तैयार हूं.

बिट्टू ने अनस से यह भी कहा कि भले ही उस की शादी हो रही हो, लेकिन उस के साथ संबंध हमेशा बने रहेंगे. अनस ने बिट्टू की परेशानी को हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला कर लिया. उस ने अपने जिगरी दोस्तों विपिन और मोनू से मदद मांगी तो दोस्ती की खातिर दोनों अनस का साथ देने को तैयार हो गए. इस के बाद भोगनाथ को मारने की योजना बनाई गई.

योजनानुसार 13 मई को अनस ने एक मारुति वैगनआर कार बुक की. कार मालिक को उस ने बताया कि उसे दोस्तों के साथ एक तिलक समारोह में जाना है. कार में बैठ कर अनस अपने दोस्तों के साथ चल दिया.

दूसरी ओर बिट्टू ने शाम साढ़े 7 बजे के करीब भोगनाथ को मिलने के लिए डीह कबीरा बाबा के जंगल में बुलाया. भोगनाथ उस समय खाना खा रहा था, लेकिन अपनी प्रेमिका के बुलाने पर वह खाना बीच में छोड़ कर तुरंत वहां पहुंच गया. वहां उसे बिट्टू मिली. योजना के अनुसार बिट्टू उसे अपनी प्यार भरी बातों में उलझाए रही.

दूसरी ओर अनस ने चुनी गई जगह से कुछ पहले हडियापुर गांव के पास ड्राइवर से यह कह कर कार रुकवा दी कि आगे का रास्ता खराब है. वह वहीं खड़ा हो कर उन के आने का इंतजार करे. इस के बाद अनस और उस के दोस्त पैदल ही कबीरा बाबा के जंगल पहुंचे. वहां पहुंच कर उन्होंने बिट्टू के साथ मौजूद भोगनाथ को दबोच लिया.

फिर उस के गले में पड़े अंगौछे को रस्सी की तरह बना कर उस के मुंह में दबाते हुए उस के गले में फंदा बना कर कस दिया, इस से भोगनाथ चिल्ला न सका और गले पर कसाव बढ़ते ही उस का दम घुटने लगा. वह कुछ देर छटपटाया, फिर उस का शरीर शिथिल पड़ गया.

भोगनाथ को मौत के घाट उतारने के बाद बिट्टू छिपतेछिपाते हुए घर चली गई. अनस भी दोनों दोस्तों के साथ भागते हुए कार तक पहुंचा और ड्राइवर से बोला कि वह तेजी से कार चलाए जहां वह लोग गए थे, वहां उन का झगड़ा हो गया है. ड्राइवर ने यह सुन कर कार की गति बढ़ा दी. गोपामऊ पहुंच कर सब लोग अपने घर चले गए.

लेकिन अपने आप को ये लोग कानून की गिरफ्त में आने से नहीं बचा सके. उन के पास से भोगनाथ का मोबाइल और हत्या की साजिश में प्रयुक्त 2 मोबाइल फोन पुलिस ने उन से बरामद कर लिए.

29 मई, 2018 को पुलिस ने विपिन और मोनू को भी गिरफ्तार कर लिया. सभी अभियुक्तों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया.

– साथ में मोहित शुक्ला

सौतिया डाह में : 30 साल बाद पत्नी ने लिया बदला

62 वर्षीय रामविलास साह जिला सीतामढ़ी के डुमरा थाना क्षेत्र में आने वाले गांव बनचौरी में अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में दूसरी पत्नी सुनीता के अलावा 2 बेटे थे. पहली पत्नी मनतोरिया से उस के 6 बच्चे थे. लेकिन मनतोरिया अपने बच्चों के साथ दूसरे मकान में रहती थी.

एक तरह से उस का पति रामविलास से कोई संबंध नहीं था. रामविलास के पास खेती की अच्छीखासी जमीन थी. डुमरा इलाके में वह बड़े काश्तकारों में शुमार था. रामविलास के दिन बड़ी खुशहाली में कट रहे थे. अपने नियमानुसार वह सुबह 5 बजे बिस्तर त्याग देता था.

4 जून, 2018 को सुबह के 9 बजे गए थे. उस दिन न तो रामविलास उठा और न ही उस की पत्नी सुनीता और न ही उस के दोनों बेटे. घर में भी कोई हलचल नहीं हो रही थी. यह देख कर पड़ोस में रहने वाले रामविलास के भतीजे श्रवण को बड़ा अजीब लगा. इस के पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था कि चाचा या चाची इतनी देर तक सोते रहे हों.

यह देख कर श्रवण से नहीं रहा गया तो वह चाचाचाची को आवाज लगाते हुए उन के घर के अंदर दाखिल हो गया. घर का मुख्य दरवाजा यूं ही भिड़ा हुआ था, हलका सा धक्का देते ही किवाड़ खुल गई. श्रवण आवाज देते हुए चाचाचाची के कमरे में पहुंच गया.

कमरे में जा कर उस की नजर बिस्तर पर पड़ी तो उस का दिल दहल गया. बिस्तर पर रामविलास साह और उस की पत्नी सुनीता देवी की रक्तरंजित लाशें पड़ी थीं. श्रवण चिल्लाते हुए उलटे पांव बाहर आ गया.

उस के चीखने की आवाज सुन कर आसपड़ोस के लोग भी वहां आ गए. जब वे लोग रामविलास के घर में गए तो पतिपत्नी की लाशें देख कर हैरत में रह गए. उन के दोनों बच्चे घर में दिखाई नहीं दे रहे थे. लोगों ने जब दूसरे कमरे में देखा तो उन के दोनों बेटों नवल और राहुल की लाशें भी खून से लथपथ पड़ी मिलीं.

हत्यारों ने चारों की हत्या बड़ी बेरहमी से गला रेत कर की थी. थोड़ी देर में ही 4-4 लाशें पाए जाने की खबर बनचौरी गांव में ही नहीं बल्कि पूरे डुमरा क्षेत्र में फैल गई. जिस ने भी सुना दौड़ा चला आया.

देखतेदेखते वहां भारी भीड़ जमा हो गई थी. इसी बीच किसी ने घटना की सूचना थाना डुमरा को दे दी थी. एक ही परिवार के 4 लोगों की हत्या की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी विकास कुमार सिंह तुरंत पुलिस टीम के साथ बनचौरा के लिए रवाना हो गए. जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो रामविलास के घर के बाहर लोगों का हुजूम लगा था.

उच्चाधिकारियों को घटना की सूचना देने के बाद थानाप्रभारी घटनास्थल का निरीक्षण करने लगे. घटना की सूचना मिलते ही एसपी विकास बर्मन, एएसपी संदीप कुमार नीरज, डीएसपी (सदर) कुमार वीर वीरेंद्र, डीएसपी राजवंश सिंह, नगर थाने के इंसपेक्टर मुकेश चंद कुंवर, एसआई शशि भूषण सिंह आदि घटनास्थल पर पहुंच गए.

छानबीन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने पाया कि हत्यारों ने चारों को गोली मारी थी. बाद में उन्होंने सब के गले रेते थे. ऐसा काम वही कर सकता था, जो उन से सख्त नफरत करता हो. मतलब यह कि हत्यारा नहीं चाहता था कि उन में से कोई भी जिंदा बचे. वह उन्हें आखिरी सांस तक मरते देखना चाहता था.

छानबीन के दौरान पुलिस ने मौके से 4 खोखे बरामद किए. हत्यारों ने घर में रखे किसी भी सामान को हाथ नहीं लगाया था, कमरे का सारा सामान अपनी जगह रखा था. इस से साफ जाहिर हो रहा था कि हत्यारों का मकसद सिर्फ हत्या करना था.

इस का मतलब रामविलास साह और उस के परिवार की हत्या किसी साजिश के तहत की गई थी. निश्चित रूप से हत्यारे परिचित रहे होंगे, जिन्हें घर के कोने की जानकारी थी. तभी वह बड़ी आसानी से अपना काम कर के निकल गए और किसी को कानोंकान भनक तक नहीं लगी.

घटना की सूचना मृतक रामविलास के साले यानी सुनीता के भाई बिरजू साह को मिली तो वह भी बनचौरी पहुंच गया. बहनोई और भांजों की लाशें देख वह दहाड़ मार कर रोने लगा. उस की बहन के घर में कोई दीया जलाने वाला तक नहीं बचा था.

पड़ोसियों, गांव वालों आदि से बात करने के बाद पुलिस ने मौके की काररवाई निपटा कर चारों लाशें पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दीं. पुलिस ने मृतका सुनीता के भाई बिरजू को थाने बुलवा कर पूछताछ की तो उस ने इस सामूहिक नरसंहार के लिए अपने बहनोई की पहली बीवी मनतोरिया देवी और उस के 3 बेटों बिटटू कुमार, विक्रम कुमार उर्फ पप्पू और रोहित कुमार को जिम्मेदार मानते हुए नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी.

बिरजू साह की तहरीर पर पुलिस ने नामजद लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 120बी, 34 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया.

घटना की मौनिटरिंग एसपी विकास बर्मन खुद कर रहे थे. उन्होंने सदर डीएसपी कुमार वीर वीरेंद्र को निर्देश दिया कि पुलिस की एक टीम बना कर आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करें ताकि वे भाग न सकें.

डीएसपी कुमार वीर वीरेंद्र ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक स्पैशल टीम गठित की, जिस में तेजतर्रार और विश्वासपात्र पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया. नामजद चारों आरोपी गांव बनचौरी के ही रहने वाले थे. पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली कि आरोपी गांव में ही छिपे हैं और भाग निकलने का मौका ढूंढ रहे हैं.

मुखबिर की सूचना पर पुलिस अविलंब बनचौरी पहुंची और रामविलास की पत्नी मनतोरिया के घर दबिश दी. घर खुला हुआ था लेकिन वहां कोई नहीं मिला. तभी पुलिस को पता चला कि चारों आरोपी अभीअभी घर छोड़ कर फरार हुए हैं.

आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस गांव के बाहर पहुंची. पुलिस को देखते ही आरोपी बिट्टू, विक्रम और रोहित भागने लगे. पुलिस ने दौड़ कर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया. ये तीनों भाई थे.

इन की मां मनतोरिया उन के साथ नहीं थी. शायद वह किसी दूसरे रास्ते से निकल गई थी. पुलिस तीनों आरोपियों को थाने ले आई. थानाप्रभारी विकास कुमार सिंह ने आरोपियों की गिरफ्तारी की सूचना डीएसपी कुमार वीर वीरेंद्र सिंह और एसपी विकास बर्मन को दे दी.

दोनों अधिकारी थाने पहुंच गए. एसपी और डीएसपी के समक्ष थानाप्रभारी ने तीनों आरोपियों से चौहरे हत्याकांड के संबंध में पूछताछ की तो उन्होंने बिना किसी झिझक के अपना जुर्म कबूल कर लिया. चारों की हत्या किए जाने का उन्हें कोई मलाल नहीं था.

उन के चेहरों पर कोई अफसोस नहीं दिख रहा था बल्कि उन की आंखों में मृतकों के प्रति नफरत की चिंगारी फूट रही थी. पुलिस ने जब उन से हत्याओं की वजह पूछी तो उन्होंने विस्तार से कहानी सुनाई. पता चला कि इस खूनी कहानी की काली दास्तान पारिवारिक रंजिश की बुनियाद पर लिखी जा गई थी.

तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद एसपी विकास वर्मन ने पुलिस लाइंस में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया. तीनों आरोपियों ने पत्रकारों के सामने अपने पिता, सौतेली मां और दोनों सौतेले भाइयों की हत्या किए जाने का जुर्म कबूल किया.

इस के बाद पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया. इस खूनी कहानी को विस्तार से जानने के लिए हमें 30 साल पीछे जाना होगा, जब इस कहानी की बुनियाद रखी गई.

रामविलास साह अपने पिता के साथ खेतीकिसानी का काम करता था. करीब 40 साल पहले उस के पिता ने उस का विवाह मनतोरिया के साथ कर दिया था. रामविलास की जिंदगी में मनतोरिया बहार बन कर छा गई. समय के साथ मनतोरिया 6 बच्चों की मां बनी. जिन में 3 बेटे और 3 बेटियां थीं.

करीब 30 साल पहले रामविलास साह ने सुनीता से दूसरी शादी रचा ली थी. पति के इस फैसले पर मनतोरिया आगबबूला हो गई. बच्चे भी पिता की दूसरी शादी से खुश नहीं थे, उन्होंने सुनीता को मां मानने से इनकार कर दिया. यहीं से रामविलास साह के जीवन में महाभारत की शुरुआत हो गई. रामविलास ने सुनीता से किस विवशता अथवा मजबूरी के तहत शादी की थी, इसे रामविलास ही जानता होगा.

हालांकि रामविलास दोनों पत्नियों को बराबर प्यार देता था. पहली पत्नी के बच्चों को वही दुलार देता था जो उन्हें देता आया था. बच्चों के साथ उस ने कभी भेदभाव नहीं किया. लेकिन बच्चे पिता से नाखुश रहते थे और अपनी मां का ही साथ देते थे.

खैर, आगे चल कर सुनीता भी 2 बच्चों नवल कुमार उर्फ भोलू और राहुल कुमार की मां बन गई. नवल और राहुल के पैदा होने के बाद तो घर में कलह और बढ़ गई. पहली पत्नी मनतोरिया और उस के बच्चे रामविलास पर दबाव बना रहे थे कि वह सुनीता से संबंध तोड़ दे. लेकिन रामविलास ने मनतोरिया और बच्चों से दो टूक कह दिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए वह सुनीता से कभी अलग नहीं हो सकता. पति का यह जवाब सुन कर मनतोरिया मन मसोस कर रह गई.

आखिर रामविलास ने इस कलह से निबटने के लिए अपनी संपत्ति 2 बराबर भागों में बांट दी. एक हिस्सा मनतोरिया के नाम लिख दिया और दूसरा हिस्सा सुनीता के नाम. यही नहीं उस ने पुस्तैनी मकान भी पहली पत्नी को दे दिया और उसी गांव में घर से थोड़ी दूरी पर एक नया घर बना कर सुनीता और दोनों बच्चों के साथ रहने लगा.

लेकिन उस का यह पूरा खेल उल्टा पड़ गया. मनतोरिया और उस के तीनों बच्चों को ये सब इसलिए नागवारा गुजरा कि रामविलास ने सौतेली मां को अपनी जायदाद में से हिस्सा क्यों दिया. उन्होंने पिता से कहा कि वह सौतेली मां का हिस्सा उन्हें दे दें, नहीं तो इस का अंजाम बुरा हो सकता है. लेकिन रामविलास ने पत्नी और बच्चों की बातों पर ध्यान नहीं दिया.

बात इसी साल मार्चअप्रैल महीने की है. मनतोरिया और उस के तीनों बेटों बिट्टू, विक्रम और रोहित के मन में लालच आ गया. उन्होंने धोखे से सुनीता के हिस्से की 12 कट्ठे जमीन में से 4 कट्ठा जमीन 4 लाख रुपए में बनचौरी गांव के पवन साह को बेच  दी. पवन साह के नाम जमीन का बैनामा होने तक सुनीता या रामविलास को कानोंकान खबर तक नहीं हुई.

लेकिन यह बात छिपने वाली नहीं थी. आखिरकार रामविलास को पता चल ही गया कि मनतोरिया ने धोखे से सुनीता के हिस्से की 4 कट्ठा जमीन गांव के पवन साह को बेच दी है. इस बात को ले कर मनतोरिया और सुनीता के बीच विवाद छिड़ गया.

रामविलास सुनीता का ही साथ दे रहा था. उस ने मनतोरिया को इस के लिए खूब खरीखोटी सुनाई. इस पर मनतोरिया के सब से छोटे बेटे रोहित ने पिता को भलाबुरा कह दिया. बेटे की बात रामविलास के दिल में चुभ गई. उस ने आव देखा न ताव, उस के गाल पर 2 थप्पड़ रसीद कर दिया.

बेटे पर हाथ उठाने वाली बात न तो मनतोरिया को अच्छी लगी और न ही बिट्टू और विक्रम को. 2 थप्पड़ों से उस के सीने में धधक रही नफरत की आग ज्वाला बन गई. यह बात तीनों बेटों को नागवार गुजरी कि पिता ने कैसे हाथ उठाया. उन्होंने ठान लिया कि इस का परिणाम उन्हें भुगतना ही होगा. सुनीता जब तक जिंदा रहेगी तब तक उन्हें चैन नहीं मिलेगा.

उस रोज के बाद से तीनों भाइयों के सिर पर खून सवार हो गया. वह पिता, सौतेली मां और उस के दोनों बेटों को मौत के घाट उतारने की योजना बनाने लगे. बिट्टू और विक्रम ने रुपयों का बंदोबस्त कर के आर्म्स सप्लायर वीरेंद्र ठाकुर से 25 हजार रुपए में 2 पिस्टल और कारतूस खरीद लिए. उस के बाद बेटों ने मां को बता कर उसे भी अपनी योजना में शामिल कर लिया.

मनतोरिया तो चाहती ही थी कि उस की सौतन सुनीता उस के रास्ते से हट जाए. उस ने बच्चों को डांटने के बजाए उन की पीठ थपथपाई. मां के योजना में शामिल हो जाने से बेटों के हौसले बुलंद हो गए. बिट्टू और रोहित ने साथ देने के लिए खोया गांव में रहने वाले ममेरे भाई रामकृत साह और सियाराम साह को भी योजना में शामिल कर लिया.

अब वह जल्द से जल्द अपनी योजना को अंजाम देना चाहते थे. आखिर इस के लिए उन्होंने 3 जून, 2018 की रात तय की. योजना को अंजाम देने से पहले तीनों भाइयों ने रात में शराब पी. 3-4 जून, 2018 की रात करीब 12 बजे बिट्टू, विक्रम और रोहित हथियार ले कर अपने पिता रामविलास साह के घर की ओर बढ़े. बिट्टू और विक्रम ने खिड़की से भीतर झांक कर देखा तो रामविलास और सुनीता गहरी नींद में सोए थे. दूसरे कमरे में नवल और राहुल भी सो रहे थे.

बिट्टू और विक्रम के मुख्य शिकार नवल और राहुल ही थे. उन्होंने पहले उन्हीं की हत्या करने की योजना बनाई थी. विक्रम ने खिड़की से ही नवल और राहुल के सीने में 1-1 गोली उतार दी, जबकि बिट्टू ने पिता रामविलास और सौतेली मां सुनीता को गोली मारी, रोहित बाहर खड़ा पहरा दे रहा था.

गोली मारने के बाद बिट्टू और विक्रम घर में घुस गए और दोनों ने फलदार चाकू से चारों के गले रेत दिए. इस के बाद इन लोगों ने सीने पर ताबड़तोड़ वार कर अपने आक्रोश को ठंडा किया. जब उन्हें विश्वास हो गया कि चारों के जिस्म ठंडे पड़ गए हैं, तो उन्हें तसल्ली हुई.

इस खूनी खेल को अंजाम देने में उन्हें केवल आधा घंटा लगा. इस के बाद वे अपने घर पहुंचे और खून से सने अपने हाथपैर धोए. फिर मां को बता दिया कि उन्होंने उन चारों को मौत के घाट उतार दिया. अब उन के रास्ते का कांटा सदा के लिए हट गया है.

उसी रात उन्होंने अपनी मां को ममेरे भाई रामकृत साह और सियाराम साह के साथ भेज दिया. वहां से दोनों मनतोरिया को कहां ले गए अब तक पता नहीं चला. 4 जून, 2018 को ही तीन आरोपी गिरफ्तार कर लिए. मनतोरिया कथा लिखने तक पुलिस की गिरफ्त से दूर थी.

पुलिस ने बिट्टू कुमार, विक्रम और रोहित की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पिस्टल और चाकू भी बरामद कर लिए. इस के अलावा उन्हें पिस्टल और कारतूस उपलब्ध कराने वाले बिट्टू के ममेरे भाई रामकृत साह और सियाराम साह को 6 जून, 2018 को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने तीनों आरोपियों से पूछताछ कर के उन्हें जेल भेज दिया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

अपहरण का नया स्टाइल : जेल में बनाई मोटी कमाई की योजना

राजीव कुमार नोएडा स्थित एचसीएल कंपनी में सौफ्टवेयर इंजीनियर थे. वैसे वह हरिद्वार के अंतर्गत नंदग्राम के मूल निवासी थे. उन की नौकरी नोएडा में थी इसलिए वह पत्नी और बच्चों के साथ नोएडा में ही रह रहे थे. उन के बच्चों के स्कूल की छुट्टियां चल रही थीं. पत्नी और बच्चे नंदग्राम (हरिद्वार) गए हुए थे.

बीवीबच्चों के चले जाने के बाद राजीव नोएडा स्थित अपने फ्लैट पर अकेले रह गए थे. 24 मई को राजीव कुमार का जन्मदिन था. उन्होंने जन्मदिन अपने बीवीबच्चों के साथ नंदग्राम में मनाने का प्रोग्राम बनाया. उन्होंने सोचा कि 23 मई को ड्यूटी करने के बाद वह सीधे हरिद्वार के लिए निकल जाएंगे.

उन्होंने यही किया भी. 23 मई को ड्यूटी खत्म होने के बाद वह कंपनी की कैब से नोएडा से गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन पहुंच गए. यहां से उन्हें बस द्वारा हरिद्वार जाना था. लिहाजा वह वहीं पर खड़े हो कर हरिद्वार जाने वाली बस का इंतजार करने लगे.

वहां खड़ेखडे़ उन्हें काफी देर हो गई लेकिन हरिद्वार जाने वाली कोई बस नहीं आई. वह परेशान थे कि घर कैसे पहुंचेंगे. रात करीब सवा 12 बजे उन के सामने एक कार आ कर रुकी. कार का चालक हरिद्वार जाने की आवाज लगाने लगा. साथ ही वह वहां मौजूद लोगों से हरिद्वार जाने के बारे में पूछने भी लगा.

ड्राइवर ने जब राजीव से हरिद्वार जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने पहले तो मना कर दिया. लेकिन जब कार की तरफ देखा तो उन्हें पहले से ही कुछ सवारियां बैठी दिखाई दीं. इस से राजीव को तसल्ली हो गई कि यदि वह कार से जाएं तो वह अकेली सवारी नहीं होंगे. साथ में दूसरी सवारी भी रहेंगी. इस के बाद वह उस कार में बैठ गए.

राजीव कार की पिछली सीट पर बैठे थे. उन के अगलबगल भी सवारियां थीं. कार चलने के बाद राजीव ने सोचा कि वह 3 साढ़े 3 घंटे में हरिद्वार पहुंच जाएंगे. अभी कार गाजियाबाद से कुछ दूर ही पहुंची थी कि राजीव के पास बैठे व्यक्तियों ने उन के ऊपर काला कपड़ा डाल कर चाकू सटाते हुए चेतावनी दी, ‘‘ज्यादा होशियार बनने की जरूरत नहीं है. चुपचाप ऐसे ही बैठे रहो, वरना अपनी जान गंवा बैठोगे.’’

राजीव समझ गए कि वह बदमाशों के चंगुल में फंस चुके हैं. उन हथियारबंद बदमाशों से वह अकेले मुकाबला नहीं कर सकते थे. लिहाजा उन्होंने बदमाशों से बड़े प्यार से कहा, ‘‘देखिए मेरा हरिद्वार पहुंचना बहुत जरूरी है. आप लोगों को मुझ से जो कुछ चाहिए ले लो, लेकिन मुझे छोड़ दो.’’

इस के बाद एक बदमाश ने राजीव की तलाशी ले कर उन का फोन और पर्स अपने कब्जे में ले लिया. पर्स में कुछ रुपए थे. दोनों चीजें अपने पास रखते हुए एक बदमाश बोला, ‘‘हम तुम्हें छोड़ तो देते लेकिन हमें जितने रुपए चाहिए, उतने तुम्हारे पर्स में नहीं हैं. यदि उतने पैसे हमें मिल जाएं तो हम तुम्हें छोड़ देंगे.’’

‘‘बताइए, आप को कितने पैसे चाहिए.’’ राजीव ने पूछा.

‘‘हमें 15 लाख रुपए चाहिए.’’ चलती कार में ही बदमाश बोला.

‘‘यह तो बहुत ज्यादा है. हमारी हैसियत इतने पैसे देने की नहीं है.’’ राजीव कुमार बोले.

‘‘तुम इस की चिंता मत करो. पैसे कहां से और कैसे आने हैं, इस बात को हम अच्छी तरह से जानते हैं. तुम खुद देखना कि तुम्हारे घर वाले हमारे पास पैसे किस तरह पहुंचाएंगे.’’ बदमाश बोला.

रात में सड़कों पर वह कई घंटे तक कार को घुमाते रहे, फिर वे राजीव को एक कमरे में ले गए और उन के हाथपैर बांध कर एक बोरे में बंद कर दिया. फिर बोरे को कमरे में रखी सेंट्रल टेबल के नीचे डाल दिया. इस से पहले बदमाशों ने राजीव से उन के घर वालों के फोन नंबर हासिल कर लिए थे. बदमाशों ने जिस इलाके में राजीव को बंधक बना कर रखा था, उन्होंने वहां से कहीं दूर जा कर राजीव के फोन से ही उन की पत्नी को फोन किया.

पत्नी को पता नहीं था कि उन के पति का अपहरण कर लिया गया है. इसलिए वह अपने फोन की स्क्रीन पर पति का नाम देखते ही बोलीं, ‘‘कैसे हो और घर कब तक पहुंचोगे?’’

‘‘वो घर पर अभी नहीं पहुंचेंगे. राजीव अब हमारे कब्जे में हैं. अगर तुम लोग उन्हें चाहते हो तो हमें 15 लाख रुपए दे दो.’’ बदमाश बोला.

‘‘आप कौन हैं और कहां से बोल रहे हैं.’’ पत्नी ने घबराते हुए पूछा.

‘‘तुम हमारा इतिहास जानने की कोशिश मत करो. जितना कह रहे हैं, समझ जाओ और पैसों का इंतजाम कर लो. बाकी बात मैं वाट्सऐप से करूंगा.’’ कह कर बदमाश ने काल डिसकनेक्ट कर दी.

पति के अपहरण की बात सुनते ही राजीव की पत्नी परेशान हो गईं. उन्होंने फोन कर के पति के अपहरण की बात अपने ससुरालियों और मायके वालों को बता दी. इस के बाद घर के सभी लोग बहुत परेशान हो गए. अपहर्त्ताओं ने फोन कर के 15 लाख रुपए का इंतजाम करने की बात कही थी. पैसे कहां पहुंचाए जाएं, यह उन्होंने नहीं बताया था.

चूंकि अपहर्त्ता ने वाट्सऐप द्वारा बात करने को कहा था, इसलिए राजीव की पत्नी ने पति के फोन पर वाट्सऐप मैसेज भेज कर पूछा, ‘‘मेरे पति कैसे हैं, क्या उन से हमारी बात हो सकती है. उन का एक फोटो भी भेज दीजिए.’’

‘‘वो बिलकुल ठीक हैं. तुम लोगों ने पैसों का इंतजाम किया या नहीं.’’ अपहर्त्ता ने कहा.

‘‘हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं.’’ राजीव की पत्नी ने कहा.

‘‘ठीक है मैं एक वीडियो भेजूंगा. उस के बाद खुद ही फैसला करना कि क्या करना है.’’ अपहर्त्ता ने कहा.

इस के बाद अपहर्त्ता ने राजीव को बोरे से बाहर निकाल कर उन की पिटाई करनी शुरू कर दी. दूसरे बदमाश ने पिटाई का वीडियो बना लिया. अपहर्त्ता ने राजीव से यह भी कहा कि तुम्हारे घर वालों को शायद तुम्हारी फिक्र नहीं है. इसलिए वे पैसे नहीं दे रहे. यह वीडियो देख कर शायद उन्हें तुम्हारी चिंता हो जाए.

अपहर्त्ता ने राजीव की पिटाई वाली वीडियो उन के घर वालों को वाट्सऐप कर दी. वीडियो देख कर घर वालों का दिल कांप उठा कि वे लोग कितनी बेदर्दी से राजीव की पिटाई कर रहे थे. अब घर वालों ने तय कर लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए वह उन्हें उन के चंगुल से छुड़ाने की कोशिश करेंगे वरना इस तरह तो वह लोग उन की जान ही ले लेंगे.

इस के तुरंत बाद राजीव की पत्नी ने पति के मोबाइल पर वाट्सऐप मैसेज भेजा, ‘‘आप इन से कुछ मत कहिए, अभी हमारे पास जितने भी पैसे हैं, हम आप को देने को तैयार हैं, बताइए पैसे कहां पहुंचाए जाएं.’’

दूसरी तरफ से अपहर्त्ता ने भी मैसेज भेजा, ‘‘आप पैसे राजीव कुमार के ही बैंक अकाउंट में जमा करा दीजिए.’’ तब राजीव के घर वालों ने डेढ़ लाख रुपए उन के बैंक खाते में जमा करा कर इस की जानकारी बदमाशों को दे दी.

उन्होंने फिलहाल पैसे जमा तो करा दिए लेकिन उन्हें इस बात पर भी संशय था कि बदमाशों द्वारा मांगी गई फिरौती की रकम देने के बाद इस बात की क्या गारंटी है कि वह राजीव को छोड़ देंगे. इसलिए उन्होंने इस की जानकारी अपने नजदीकी थाने को दे दी.

मामला अपहरण का था, हरिद्वार पुलिस ने जांच की तो केस उत्तर प्रदेश के जिला  गाजियाबाद का लगा. क्योंकि बदमाशों ने पहली बार राजीव के फोन से उन की पत्नी को फोन कर के जो 15 लाख रुपए की फिरौती मांगी थी, उस फोन की लोकेशन उस समय गाजियाबाद जिले की ही आ रही थी.

इसलिए हरिद्वार पुलिस ने राजीव के घर वालों से कहा कि वह गाजियाबाद पुलिस से संपर्क करें. इतना ही नहीं हरिद्वार पुलिस ने गाजियाबाद पुलिस से संपर्क कर काल डिटेल्स की जानकारी भी दे दी.

राजीव के घर वालों ने गाजियाबाद के एसएसपी वैभव कृष्ण से मुलाकात कर सारी जानकारी दे दी. यह मामला सीधे तौर पर अपहरण का था, इसलिए एसएसपी ने इस केस को गंभीरता से लिया. उन्होंने एसटीएफ के एसपी आर.के. मिश्रा के साथ विभिन्न थानों में मौजूद तेजतर्रार पुलिस वालों को भी केस की छानबीन में लगा दिया.

उधर राजीव के घर वालों ने उन के खातों में जो डेड़ लाख रुपए जमा कराए थे, वह रुपए बदमाशों ने राजीव से उन का डेबिट कार्ड और पिन नंबर ले कर कई बार में अलगअलग जगहों पर स्थित एटीएम मशीनों से निकाल लिए थे.

राजीव के घर वालों ने गाजियाबाद पुलिस को यह भी जानकारी दे दी कि अपहर्त्ताओं के कहने पर उन्होंने राजीव के बैंक खाते में डेढ़ लाख रुपए जमा करा दिए थे. पुलिस ने बैंक अधिकारियों से मिल कर जब राजीव के खाते की जांच की तो पता चला कि बदमाशों ने राजीव के डेविड कार्ड से दिल्ली, गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर के एटीएम से कई बार में सारे पैसे निकाल लिए हैं.

जिन एटीएम सेंटरों से उन्होंने वह पैसे निकाले थे, पुलिस ने वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी तो पता चला कि अलगअलग एटीएम मशीनों से अलगअलग लोगों द्वारा पैसे निकाले गए थे और उन्होंने अपने चेहरे कैप से ढक रखे थे.

राजीव का अपहरण हुए कई दिन बीत चुके थे. उन के घर वालों और रिश्तेदारों को उन की चिंता हो रही थी. सब इस बात को ले कर परेशान थे कि पता नहीं राजीव को उन लोगों ने किस हाल में रखा होगा.

वैसे बदमाश राजीव को हर समय हाथपैर बांध कर ही रखते थे. सुबह और शाम को वह उन के हाथपैर केवल खाना खाने के लिए खोलते थे. खाना खाने के बाद वह फिर से उन्हें रस्सी से बांध देते थे. वह नशे में रहे इस के लिए उन्हे नींबू पानी में नींद की गोलियां मिला कर दे देते. इस के अलावा वह उन की कमर में नशे का इंजेक्शन भी लगाते थे.

राजीव को अपहर्त्ताओं के चंगुल में रहते हुए 9 दिन बीत चुके थे. उन के घर वाले लगातार पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर अपनी चिंता जाहिर कर रहे थे. पुलिस की 20 टीमें अपनेअपने तरीकों से अपहर्त्ताओं के पास पहुंचने की कोशिश में लगी थीं. सर्विलांस टीम भी मुस्तैद थी.

अब तक की जांच और अपने मुखबिरों से मिली जानकारी के बाद पुलिस और एसटीएफ की टीम ने अपहरण के 9वें दिन यानी पहली जून, 2018 को गाजियाबाद की पौश कालोनी वसुंधरा के पास स्थित प्रह्लादगढ़ी गांव में दबिश दे कर रिंकू नाम के बदमाश को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने उस से पूछताछ कर सैंट्रल टेबल के नीचे बोरी में बंद पड़े राजीव कुमार को बरामद कर लिया. उन के हाथपैर बांधे हुए थे और उस समय वह बेहोशी की हालत में थे. उन्हें 2 पुलिसकर्मी तुरंत अस्पताल ले गए. इस के बाद पुलिस ने रिंकू से उस के अन्य साथियों के बारे में पूछताछ की तो रिंकू ने बताया कि उस के साथी शरद और महेश राजनगर एक्सटेंशन की तरफ गए हैं.

रिंकू को साथ ले कर पुलिस राजनगर एक्सटेंशन की तरफ गई तो उन्हें एक सैंट्रो कार दिखी. रिंकू के इशारे पर पुलिस ने उस कार का पीछा किया तो उन लोगों ने सैंट्रो कार की स्पीड और तेज कर दी. बाद में 2 बदमाश कार छोड़ कर पैदल ही भागने लगे. इतना ही नहीं उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की.

बदमाशों की फायरिंग से 2 पुलिसकर्मी अरुण कुमार और मनीष कुमार घायल हो गए. उधर पुलिस की गोली से दोनों अपहर्त्ता भी घायल हो कर गिर पड़े. तभी पुलिस ने दोनों बदमाशों को भी हिरासत में ले लिया. सभी घायलों को तुरंत अस्पताल में भरती कराया गया.

एसएसपी वैभव कृष्ण और एसटीएफ के एसपी आर.एन. मिश्रा को मुठभेड़ में पुलिसकर्मियों के घायल होने और अपहर्त्ताओं को गिरफ्तार कर राजीव कुमार के सकुशल बरामद करने की जानकारी मिली तो दोनों पुलिस अधिकारी अस्पताल पहुंच गए.

उधर सूचना मिलने पर राजीव के घर वाले भी गाजियाबाद के लिए रवाना हो गए. एसएसपी के समक्ष जब तीनों बदमाशों से सख्ती से पूछताछ की गई तो पता चला कि लोगों का अपहरण कर मोटी फिरौती मांगना इन बदमाशों का धंधा बन चुका था.

राजीव से पहले ये और भी कई लोगों का अपहरण कर उन से फिरौती की मोटी रकम वसूल चुके थे. नशे की ज्यादा खुराक देने के चक्कर में अपहरण किए गए 3 लोगों की नशे की ओवरडोज से इन के यहां मौत भी हो चुकी थी और 2 लोगों की वह हत्या भी कर चुके थे.

इन लोगों ने अपहरण करने का गैंग क्यों बनाया और इन का अपहरण करने का तरीका क्या था आदि के संबंध में पुलिस ने पूछताछ की तो इन शातिर बदमाशों ने जो कहानी बताई वह वास्तव में हैरान कर देने वाली थी.

पता चला कि हापुड़ निवासी रिंकू, अयोध्या के रहने वाले शरद और सूरजपुर निवासी महेश मिश्रा तीनों ही वाहन चोर हैं. ये अलगअलग रह कर वाहन चोरी करते थे. जेल में मुलाकात होने के बाद इन्होंने एक साथ मिल कर लूटपाट भी शुरू कर दी. इन लोगों ने लिफ्ट देने के बहाने लोगों को लूटना भी शुरू कर दिया. ज्यादा पैसे पाने के लिए इन्होंने नए तरीके से लोगों का अपहरण कर उन के घर वालों से मोटी फिरौती वसूलनी चालू कर दी.

करीब एक महीने पहले इन्होंने लालकुआं (गाजियाबाद) से बिजनौर जा रहे सौरभ नाम के एक युवक को अपनी कार में लिफ्ट दे कर बंधक बनाया. जब उस ने लूट का विरोध किया तो इन्होंने उस की हत्या कर दी. इस के बाद इन्होंने उस का मोबाइल फोन, अन्य सामान लूट लिया और उस की लाश डासना क्षेत्र में डाल दी.

इस के अलावा 24 मई, 2018 को इन्होंने डाबर तिराहे से दिल्ली में प्राइवेट जौब पर जाने वाले देवेंद्र नाम के युवक को लूटने के लिए रोका. देवेंद्र ने विरोध किया तो उन्होंने चाकू मार कर उस की हत्या कर दी. हत्या के बाद ये उस का लैपटौप, मोबाइल फोन आदि लूट कर फरार हो गए.

28 अप्रैल, 2018 को इन लोगों ने गजरौला के रहने वाले 22 वर्षीय पप्पू खान को आनंद विहार बस अड्डे से लिफ्ट दे कर किडनैप किया और उस के घर वालों से फिरौती  की रकम वसूल की. पप्पू खान 28 अप्रैल को बस द्वारा गजरौला से दिल्ली के लिए चला था. वह रात साढ़े 12 बजे आनंद विहार बस अड्डे पहुंचा. वहां से उसे हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ कर मुंबई में अपने भाई ने पास जाना था.

आनंद विहार बस अड्डे के बाहर महेश, रिंकू और शरद सैंट्रो कार लिए शिकार की तलाश कर रहे थे. ये लोग सराय काले खां बस अड्डे जाने की आवाज लगाने लगे. हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन सराय काले खां बस अड्डे के बराबर में ही है. यही सोच कर पप्पू खान उन की सैंट्रो कार में बैठ गया.

कार में बैठने के बाद इन्होंने पप्पू खान के एक तरफ से चाकू और दूसरी तरफ से पिस्टल लगा दी. पप्पू के मुंह से कोई भी आवाज नहीं निकली. वह बुरी तरह से डर गया. तभी बदमाशों ने उस के मुंह में जबरदस्ती नशे की गोलियां डाल कर ऊपर से पानी पिला दिया और उस का मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड अपने कब्जे में ले लिया.

पप्पू को जब होश आया तो उस ने खुद को एक कमरे में बंद पाया. बदमाश 29 अप्रैल को उसे एनएच-24 हाईवे पर डासना के पास ले गए. उन्होंने उस के ही मोबाइल से उस के भाई से बात कराई. उन्होंने उस के भाई से 10 लाख रुपए की फिरौती मांगी. बाद में मामला 2 लाख रुपए में तय हो गया. 2 लाख रुपए उन्होंने पप्पू खान के ही बैंक खाते में मंगाए. फिर अपहर्त्ता अलगअलग जगहों की एटीएम मशीन से रोजाना 25 हजार रुपए निकाल लेते.

इस तरह उन्होंने 9 दिनों तक पप्पू खान को अपने पास बंधक बना कर रखा. वह उसे नशे की हालत में बांध कर कमरे में रखे संदूक में छिपा कर रखते थे. 2 लाख रुपए वसूलने के बाद उन्होंने पप्पू खान की आंखों पर पट्टी बांध कर सुबह 4 बजे एनएच-24 हाईवे पर यूपी गेट के पास छोड़ दिया. बदमाशों ने घर जाने के लिए उसे 500 रुपए भी दिए थे.

आनंद विहार बस अड्डा और मयूर विहार से उन्होंने अप्रैल माह में ही 2 और लोगों का अपहरण कर उन्हें 10 दिनों तक अपने कब्जे में रखा था. इन में एक को उत्तर प्रदेश के गजरौला में और दूसरे को गाजियाबाद के प्रह्लादगढ़ी में रखा गया था.

किडनैप किए लोगों को ये लोग नशे का इंजेक्शन लगा कर या नशीली गोलियां खिला कर, उन्हें बांध कर रखते थे. हैवी डोज देने की वजह से इन लोगों के पास रहते 3 लोगों की मौत भी हो गई थी. एचसीएल के इंजीनियर राजीव कुमार का अपहरण करने के बाद उन्हें भी नशे की हालत में रखा गया था.

बेहोशी की हालत में कभी उन्हें गद्दे के नीचे छिपा दिया जाता था तो कभी बोरी में बांध कर सेंट्रल टेबल के नीचे. राजीव कुमार ने बताया कि उन्हें बदमाशों के हावभाव देखने के बाद खुद के जीवित रहने की उम्मीद नहीं थी.

किडनैपिंग के अलावा भी शरद, महेश और रिंकू ने गाडि़यां चोरी करनी बंद नहीं की थीं. यह चोरी इस वजह से करते थे ताकि इन की पहचान छोटेमोटे चोर के रूप में बनी रहे. पुलिस ने शरदचंद्र, महेश मिश्रा और रिंकू से विस्तार से पूछताछ करने के बाद उन्हें अदालत में पेश कर जेल भेज दिया.

– कथा पुलिस सूत्रों एवं जनचर्चा पर आधारित

प्रीत का गीत

इस वर्ष हमें हर्ष हो कि हर्ष कर सकें

हर्ष से संघर्ष को स्पर्श कर सकें

इक गीत गाएं प्रीत का

इक गीत मीत का

इक गीत गाएं रीत का

इक गीत जीत का.

इस वर्ष हमें हर्ष हो कि हर्ष कर सकें

हर्ष से संघर्ष को स्पर्श कर सकें

चिलमिलाती धूप में हम

शीतल पवन बन बहें

तिलमिलाती तिमिर में

इक दीप बन कर जलें.

इस वर्ष हमें हर्ष हो कि हर्ष कर सकें

हर्ष से संघर्ष को स्पर्श कर सकें

कर्म की ले कर कसौटी

मनन मंथन कर सकें

चिंतनों के योग से हम

कर्मयोगी बन सकें.

इस वर्ष हमें हर्ष हो कि हर्ष कर सकें

हर्ष से संघर्ष को स्पर्श कर सकें

सुप्त है ये जीवन

इसे मुक्त कर सकें

आराधना से साधना कर

सिद्ध सार्थक बन सकें.

इस वर्ष हमें हर्ष हो कि हर्ष कर सकें

हर्ष से संघर्ष को स्पर्श कर सकें.

  • हर्षवर्द्धन सिंह चौहान

करुणानिधि की मौत के बाद करवटें लेती तमिल राजनीति

तमिलनाडु के 5 बार मुख्यमंत्री रहे मुथुवेल करुणानिधि की 94 वर्ष की आयु में हुई मृत्यु के बाद अब राज्य की राजनीति नई करवटें लेगी. दोनों दिग्गज नेताओं एम करुणानिधि और जे जयललिता की मृत्यु के बाद वहां अगर नेता बचे हैं तो करुणानिधि के परिवार के ही पर मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन, दयानिधि मारन और अन्य बच्चे द्रविड़ मुनेत्र कषगम का रथ साथसाथ खींचेंगे, ऐसा लगता नहीं.

फिलहाल यह परिवार सत्ता से बाहर है और अब इस परिवार को फिर सत्ता मिलती है या लोग साइड में इंतजार कर रहे रजनीकांत और कमल हासन जैसे सितारों को खाली हुए स्थान को भरने का मौका देंगे, कहा नहीं जा सकता.

तमिलनाडु की राजनीति अब केवल हिंदी विरोध या उत्तर भारत विरोध पर नहीं टिकी है. कांग्रेस का वजूद वहां समाप्त सा है और भारतीय जनता पार्टी लाख कोशिशों के बावजूद जम नहीं पा रही. मूलतया तमिलनाडु का प्रबंध उत्तर भारत के राज्यों से ज्यादा अच्छा है. ई वी रामासामी पेरियार, एन अन्नादुरै और करुणानिधि के धर्मविरोधी होने के बावजूद वहां खासे अंधविश्वास पनपते हैं और धर्म का बोलबाला रहता है. पर वहां के लोग बहुत उत्पादक हैं, साथ ही, बहुत उग्र भी. ऐसे विरोधाभासी माहौल में नए नेता अपनी जगह बना पाएंगे, इस में संदेह है.

करुणानिधि और उन के पुराने मित्र एम जी रामचंद्रन ने अन्नादुरै की विरासत का पूरा लाभ उठाया था और जे जयललिता को एम जी रामचंद्रन की विरासत पूरी की पूरी मिल गई थी. एक तरह से 1967 में कांग्रेस के पलायन के बाद से वहां अब तक एक सोच की राजनीति चल रही थी जो अब समाप्त हो गई है. कई वर्षों से इस सोच में तीखापन नहीं रह गया था, पर फिर भी खंडहरों जैसे किले तो मौजूद हैं ही.

नेताओं का अभाव पार्टियों को समाप्त कर देता है. बड़ी बात नहीं होगी यदि द्रविड़ मुनेत्र कषगम और औल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम अपना अस्तित्व जल्दी ही खो बैठें.

समता पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी, हिंदू महासभा, रिपब्लिकन पार्टी जैसी पार्टियां वारिसों के न होने कारण ही शून्य में विलीन हो गईं. भारतीय जनता पार्टी एक अपवाद है पर यह जिस सिद्धांत पर जिंदा है वह कब निरर्थक हो जाए, पता नहीं.

करुणानिधि का अभाव किसी को वैसे नहीं खलेगा क्योंकि अरसे से उन्होंने कोई सामाजिक या राजनीतिक आंदोलन नहीं चला रखा था.

अनवांटेड हेयर से छुटकारा पाना चाहती हैं, तो आजमाएं ये तरीके

बहुत सी महिलाएं त्वचा पर अनचाहे बालों की समस्या से जूझती हैं. वे हर्बल तरीकों यहां तक कि प्यूमिक स्टोन से भी अपने शरीर और चेहरे के अनचाहे बालों को हटाने की कोशिश करती हैं. ज्यादातर महिलाएं शेविंग और वैक्सिंग जैसे तरीकें अपनाती हैं, जबकि अनचाहे बालों को हटाने के लिए अब कई आधुनिक तरीके भी हैं.

त्वचा से अनचाहे बालों को हटाने और चिकनी त्वचा पाने के लिए कुछ अस्थायी तरीके पेश हैं:

शेविंग: शेविंग में गीले रेजर या इलैक्ट्रिक रेजर की मदद से त्वचा की सतह के बालों को हटाया जाता है या ट्रिप कर दिया जाता है. यह तरीका टांगों, बाजुओं और चेहरे के बालों के लिए अच्छा है. लेकिन शेविंग के बाद बाल जल्दी आते हैं, क्योंकि इस प्रक्रिया में बाल जड़ से नहीं निकलते. प्रभावित हिस्से पर शेविंग क्रीम या जैल लगाएं. फिर इसे रगड़ कर झाग बनाएं और 1 मिनट के लिए छोड़ दें. फिर रेजर से शेव कर लें. इस के बाद पानी से धो कर क्रीम या जैल से मौइश्चराइज करें ताकि त्वचा पर जलन न हो और वह चिकनी हो जाए. त्वचा को चिकना बनाए रखने के लिए नियमितरूप से शेविंग करें. शेविंग के बाद मौइश्चराइजर और ऐंटी सैप्टिक क्रीम का इस्तेमाल करना न भूलें.

हेयर रिमूवल क्रीम: हेयर रिमूवल क्रीम बाजार में आसानी से मिल जाती है. इस क्रीम में मौजूद रसायन हेयर शौफ्ट को घोल लिया जाता है. लेकिन इस का इस्तेमाल सही तरह से करना जरूरी है, क्योंकि क्रीम को ठीक से न लगाने या बहुत ज्यादा समय तक त्वचा पर लगा रहने देने से त्वचा जल भी सकती है. साथ ही इस क्रीम को इस्तेमाल करने से पहले ऐलर्जी टैस्ट भी कर लेना चाहिए. थोड़ी सी क्रीम बाजु या त्वचा के किसी छोटे से हिस्से पर लगाएं और सुनिश्चित कर लें कि आप को इस से कोई रिएक्शन तो नहीं हो रहा. क्रीम पर दिए गए निर्देशों का पालन जरूर करें.

लेजर हेयर रिमूवल: लेजर हेयर रिमूवल एक अच्छा विकल्प है. इस में लाइट की मदद से बालों की जड़ों को नष्ट कर दिया जाता है. यह गहरी और हलकी दोनों रंग की त्वचा पर काम करता है. लेजर बीम हेयर बल्ब को नष्ट कर देता है. यह ट्रीटमैंट थोड़ा महंगा हो सकता है. ध्यान रहे यह प्रक्रिया किसी अनुभवी डाकटर से ही करवाएं.

हौट वैक्सिंग: वैक्सिंग से बाल जड़ से निकल जाते हैं. गरम वैक्स को त्वचा पर फैला कर पेपर शीट या कपड़े को वैक्स पर रखा जाता है. ठंडा होने पर शीट को बालों की विपरीत दिशा में तेजी से खींच लिया जाता है. बाल वैक्स में चिपक कर त्वचा से बाहर आ जाते हैं.

वैक्सिंग की ही तरह शुगरिंग में त्वचा पर एक मिश्रण फैला कर उसे ठोस होने दिया जाता है. फिर इसे भी वैक्सिंग की तरह कपड़े या पेपर शीट की मदद से खींच लिया जाता है. इस से भी बाल जड़ से त्वचा से बाहर निकल आते हैं.

वेनिका: इफ्लोरिनिथिन हाइड्रोक्लोराइड वेनिका का सक्रिय अवयव है और इसे दिन में 2 बार त्वचा पर लगाया जाता है. 8 सप्ताह में इस से अच्छे परिणाम दिखाई देने लगते हैं. वैसे तो इस के साइड इफैक्ट्स बहुत कम होते हैं, लेकिन इस के इस्तेमाल से पहले ऐलर्जी की जांच के लिए डर्मैटोलौजिस्ट की सलाह ले लेनी चाहिए. वेनिका का सब से आम साइड इफैक्ट कीलमुंहासे हैं. इसलिए अगर आप को इन की समस्या रहती है, तो हेयर रिमूवल के लिए इस तरीके का इस्तेमाल न करें.

ब्लीचिंग: ब्लीचिंग हालांकि हेयर रिमूवल का तरीका नहीं है, लेकिन यह चेहरे के बालों को छिपाने का अच्छा तरीका है. यह लंबे समय तक चलता है. इस में बाल खिंचते नहीं, इसलिए इस में दर्द नहीं होता. ब्लीच करने के बाद त्वचा पर टैनिंग कम हो जाती है और रंगत भी एकसार हो जाती है. ब्लीच बाजार में आसानी से उपलब्ध है. इस के साथ प्री और पोस्ट यूज क्रीम्स भी आती हैं. क्रीम और पाउडर को सही मात्रा में मिलाएं. प्रभावित हिस्से पर लगा कर कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें.

मैनुअल में दिए गए निर्देशों के अनुसार कौटन पैड की मदद से इसे निकाल लें और ठंडे पानी से धो लें. बालों का रंग आप की त्वचा के रंग से मिल जाएगा और वे दिखाई नहीं देंगे. ब्लीचिंग से कभीकभी थोड़ी से जलन हो सकती है, क्योंकि इस में कैमिकल्स होते हैं. इसलिए ब्लीच का इस्तेमाल करने से पहले पैच टैस्ट जरूर कर लें.

आज टैक्नोलौजी बहुत आधुनिक हो चुकी है. त्वचा के अनचाहे बालों को हटाने के स्थायी तरीके भी उपलब्ध हैं. वर्तमान में इस के लिए 3 तरीके इस्तेमाल किए जा रहे हैं:

इन्टेंस पल्स्ड लाइट: इस प्रक्रिया में कौंसंट्रेटेड लाइट का पतला बीम त्वचा के छोटे से हिस्से पर फोकस किया जाता है. त्वचा की सतह के नीचे मौजूद हेयर फौलिकल्स में पिगमैंट इस लाइट को अवशोषित कर लेता है. इस तरह हेयर फौलिकल्स को गरम करने से उन की ग्रोथ रुक जाती है. यह ट्रीटमैंट पीली व गहरे रंग की त्वचा पर बेहतर काम करता है. इस में दर्द कम होता है, क्योंकि एक बार में त्वचा के एक बड़े सैक्शन का ट्रीटमैंट किया जाता है. यह ट्रीटमैंट महंगा हो सकता है, क्योंकि यह कई सिटिंग्स में पूरा होता है.

इलैक्ट्रोलाइसिस: इस में इलैक्ट्रिक करंट की मदद से हर बाल की जड़ को नष्ट कर दिया जाता है. लेजर हेयर रिमूवल हमेशा और हर तरह की त्वचा के लिए अनुकूल नहीं होता. लेकिन इलैक्ट्रोलाइसिस हर तरह की त्वचा पर काम करता है. यह प्रक्रिया एक बार में सिर्फ एक बाल पर काम करती है, इसलिए इसे पूरा होने में ज्यादा समय लगता है.

इलैक्ट्रोलाइसिस से बाल निकालने के 3 मुख्य तरीके हैं:

– गैलवेनिक इलैक्ट्रोलाइसिस का सब से पुराना तरीका है. आजकल इस का इस्तेमाल नहीं किया जाता. इस में डाइरैक्ट करंट की मदद से हेयर फौलिकल्स को नष्ट कर दिया जाता है. इस में ज्यादा समय लगता है, इसलिए अब इस का इस्तेमाल कम होने लगा है.

– थर्मोलाइसिस में आल्टरनेटिंग करंट की मदद से हीट पैदा कर हेयर फौलिकल्स को नष्ट कर दिया जाता है. आजकल इस का इस्तेमाल बहुत हो रहा है, क्योंकि यह बहुत तेज और प्रभावी तरीका है.

– ब्लैंड में हीट और करंट का इस्तेमाल कर गैलवेनिक कैमिकल रिएक्शन को तेज कर दिया जाता है, जिस से हेयर फौलिकल्स नष्ट हो जाते हैं. यह तरीका थर्मोलाइसिस की तुलना में ज्यादा समय लेता है, लेकिन यह ज्यादा प्रभावी है और मुश्किल हिस्सों से भी बाल निकालने में प्रभावी है.

इन में से किसी भी तरीके का इस्तेमाल करने के लिए अनुभवी पेशेवर की मदद लें जो अपने काम में प्रशिक्षित हो और इस के बारे में अच्छी जानकारी रखता हो.

– डा. साक्षी श्रीवास्तव, कंसलटैंट डर्मैटोलौजिस्ट, जेपी हौस्पिटल, नोएडा

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