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रैम और रोम के बीच में क्या है अंतर ? जानिए

हममें से कई लोग ऐसे हैं जिन्हें नहीं पता कि RAM और ROM के बीच एक बड़ा अंतर होता है, अक्सर इस बात का जिक्र किया जाता है कि रैम (रैंडम एक्सेस मेमोरी) कम्प्यूटर की स्पीड के लिए होता है और रोम (रीड ओनली मेमोरी) स्टोरेज के लिए. इसके अलावा हमसभी इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते. आज हम आपको इनके बीच के बड़े अंतर को स्पष्ट रूप से बताने वाले हैं.

अगर हम रैम से शुरुआत करें तो आपको बता देते हैं कि यह एक ऐसी चिप होती है. जो स्थाई होती है, जिसे डाटा को अपने पास सेव रखने के लिए पावर आदि की जरूरत होती है. इसके अलावा जैसे ही इसका कनेक्शन पावर से कटता है, वैसे ही इसमें मौजूद सभी जानकारी गायब हो जाती है.

अगर हम रोम की चर्चा करें तो इसमें रैम के मुकाबले उल्टा होता है, यह एक ऐसी चिप है जो परिवर्तनशील नहीं होती है. अगर आप इसमें एक बाद डाटा को सेव कर दें तो इसे बदला नहीं जा सकता है. इसे रीड ओनली मेमोरी के तौर पर देखा जाता है यानी एक बार डाटा सेव करने के बाद उसे महज पढ़ा जा सकता है, उसे बदला नहीं जा सकता है. अंग्रेजी में इसे नौन-वोलेटाइल स्टोरेज या मेमोरी भी कहा जाता है.

इनके बीच में कुछ अन्य अंतर भी हैं, जिनका जिक्र यहां करना जरुरी है अगर हम विस्तार से और स्पष्ट रूप से इनके बीच के अंतर को जानना चाहते हैं तो…

  • रैम को आप किसी डिवाइस में रोजमर्रा के कामों को करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसके अलावा रोम को महज उसी समय इस्तेमाल किया जाता है, जब उस डिवाइस का निर्माण किया जा रहा होता है.
  • अगर आप रोम में डाटा को सेव करना चाहते हैं तो आपको बता दें कि इसके लिए आपको एक लम्बी प्रक्रिया से गुजरना होता है. हालांकि रैम में इसका उल्टा होता है, इसमें आप बड़ी तेजी से डाटा को सेव कर सकते हैं.

शर्मनाक : नाबालिगों ने सुनाई आपबीती, हर रोज होता था दुष्कर्म

झारखंड की नाबालिग लड़कियों को मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाकर दिल्ली और हरियाणा से रांची लाया गया है. मंगलवार को दूसरे राज्य से अपने घर पहुंचने के बाद लड़कियों ने राहत की सांस ली. नाबालिगों ने जो पर्दाफाश किए हैं, वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं. लड़कियों ने बताया कि उन्हें नौकरी, पढ़ाई व घुमाने का लालच देकर दिल्ली ले जाया गया था, जहां मानव तस्कर प्रभा मिंज मुनी का पति रोहित मुनी उन्हें लगातार हवस का शिकार बनाता था. हर रोज दुष्कर्म किया जाता था. विरोध करने पर बर्बरतापूर्वक पीटा जाता था. कई लड़कियां आपबीती सुनाते हुए रोने लगीं. इस मामले में प्रभा को गिरफ्तार कर लिया गया है.

मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त नाबालिग लड़कियां गुमला, साहेबगंज, सिमडेगा, पाकुड़, गिरिडीह, लोहरदगा, गोड्डा समेत अन्य जगहों की हैं. इन्हें संबंधित जिलों की बाल कल्याण समिति के प्रभारियों के हवाले कर दिया गया है. तीन को फिलहाल प्रेमाश्रय में रखा गया है. दो दिन पूर्व दिल्ली एटीएस ने जिस किंगपिन प्रभा को गिरफ्तार किया है, वही काम का लालच देकर इन लड़कियों को दिल्ली ले गई थी. आरोपित प्रभा के चंगुल से मुक्त गोड्डा जिला की एक नाबालिग ने बताया कि किस तरह काम के नाम पर प्रभा और उसका पूरा परिवार उसे प्रताड़ित करता था. विरोध करने पर निर्वस्त्र कर पीटा जाता था. चाकू से भी वार किया जाता था.

चंडीगढ़ बाल संरक्षण आयोग ने निभाई अहम भूमिका

चंडीगढ़ बाल संरक्षण आयोग के बीके गोयल और शक्ति वाहिनी ने लड़कियों की बरामदगी से लेकर इलाज कराने में अहम भूमिका निभाई. कई महीनों तक चंडीगढ़ और बाद में दिल्ली के अस्पताल में इलाज कराया. दिल्ली में जब लड़कियों का इलाज चल रहा था तब उनसे मिलने वाली झारखंड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने बताया कि उनकी हालत बहुत खराब थी. डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा था कि लड़कियों की स्थिति गंभीर है और अभी इसे यहां से ले नहीं जाया जा सकता. सेहत दुरुस्त होने के बाद अब वे अपने घर लौट पाई हैं. शक्ति वाहिनी सभी लड़कियों को तस्करों से मुक्त कराने के बाद दिल्ली बाल कल्याण समिति की अनुशंसा पर रांची लेकर आई. रांची रेलवे स्टेशन पर इन्हें रिसीव करने के लिए झारखंड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर व शक्ति वाहिनी से ऋषिकांत समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

मानव तस्करी के पैसे से प्रभा मिंज ने खड़ी की करोड़ों की संपत्ति

दिल्ली में गिरफ्तार झारखंड की वांछित मानव तस्कर प्रभा मिंज मुनी ने दिल्ली एटीएस की पूछताछ में कई पर्दाफाश किए हैं. पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ है कि मानव तस्करी के पैसे से उसने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है. सिर्फ दिल्ली के पंजाबी बाग में 250 करोड़ के भूखंड पर आलीशान मकान बना हुआ है. उसकी बेटी फिल्म उद्योग से जुड़ी है. बेटी की फिल्म के निर्माण के लिए उसने पांच करोड़ रुपये का निवेश भी किया है.

जिस दिन प्रभा मिंज मुनी गिरफ्तार की गई थी, उसी दिन दिल्ली में करमा महोत्सव का मेला था, जिसमें झारखंड से तस्करी कर ले जाई गई घरेलू नौकरानियां शामिल थीं. उसका पति रोहित कुमार मुनी खगड़िया में एक महासभा में शामिल होने गया था. पूछताछ में यह भी जानकारी मिली है कि प्रभा मिंज छत्तीसगढ़ में भी एक आलीशान मकान बनवा रही है.

सिमडेगा से चुनाव लड़ाने की थी तैयारी: मानव तस्कर प्रभा मिंज मुनी को कुछ लोग सिमडेगा से चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे थे. प्रभा ऑल इंडिया क्रिस्चियन माइनोटिरी फ्रंट की उपाध्यक्ष भी है. सिमडेगा में मिशनरी के सहयोग से वह चुनाव लड़ने वाली थी. उसने एटीएस को पूछताछ में यह भी बताया है कि उसका एक भाई छत्तीसगढ़ में चर्च में धार्मिक कार्य कराता है. वह चार बहन है. उसका दिल्ली में जहां कार्यालय संचालित हो रहा है, वह लंदन में कार्यरत एक पंजाबी परिवार का बिल्डिंग है.

मानव तस्करों की सूची में टॉप पर थी प्रभा: प्रभा सीआइडी से जारी मानव तस्करों की सूची में टॉप पर थी. उसका पूर्व में एक ऑडियो क्लिप भी जारी हुआ था. जारी ऑडियो में उसने अपनी गिरफ्तारी नहीं होने के पीछे एक पुलिस अधिकारी को मैनेज करने की बात स्वीकारी है.

फेसबुक के माध्यम से प्रभा तक पहुंची पुलिस: प्रभा पुलिस के लिए वांछित थी. विशेष शाखा झारखंड की सोशल मीडिया सेल ने जब फेसबुक पर उसके अपडेट पोस्ट को देखा तो इसकी सूचना दिल्ली पुलिस को दी गई. इसके बाद ही दिल्ली पुलिस की विशेष टीम ने प्रभा को गिरफ्तार किया. उसने फेसबुक पर झारखंड से लेकर दिल्ली तक के वरिष्ठ नेताओं की तस्वीर शेयर की थी. वहीं, अपनी बेटी की फिल्म का प्रमोशन भी किया था.

अगले साल से जाम मुक्त हो जाएगा दिल्ली-एनसीआर

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोगों को अगले वर्ष जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. दिल्ली-एनसीआर की प्रमुख सड़क परियोजनाएं मार्च-अप्रैल तक पूरी हो जाएंगी. इससे बाहरी वाहनों का दबाव कम होने के साथ ही वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही से होने वाली ध्वनि व वायु प्रदूषण की समस्या से काफी हद तक निजात मिल जाएगा.

दिल्ली-एनसीआर को जाम से निजात दिलाने वाले अनेक प्रमुख रास्ते अगले वर्ष मार्च या अप्रैल में यातायात के लिए खुल जाएंगे. इनमें ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे को अप्रैल में यातायात के लिए खोला भी जा चुका है. वहीं, 12 साल से बन रहे वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के अगले महीने चालू हो जाने की उम्मीद है.

ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे

पलवल-मानेसर खंड को अप्रैल, 2016 में ही यातायात के लिए खोला जा चुका है. अब मानेसर-कुंडली खंड को पूरा किया जा रहा है. ईस्टर्न और वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे के पूरा होने पर दिल्ली के चारों ओर एक्सप्रेस-वे का रिंग बन जाएगा, जो अवांछित बाहरी वाहनों को राजधानीवासियों से दूर रखेगा. अकेले ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे चालू होने से दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की संख्या में 30 फीसद की कमी आ गई है. वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे के चालू होने से 60 प्रतिशत वाहन दिल्ली में प्रवेश किए बगैर ही आगे निकल जाएंगे.

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे

दिल्ली में जाम की बड़ी वजह माने जाने वाले एनएच-9 (पुराना एनएच-24) का निजामुद्दीन-यूपी गेट तक का हिस्सा पहले ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के साथ चौड़ा हो चुका है. अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन कर चुके हैं. अब इसके यूपी गेट-डासना, डासना-मेरठ और डासना-हापुड़ के बकाया तीन हिस्सों पर काम चल रहा है. इनमें डासना-हापुड़ का हिस्सा अगले दो महीने में नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा. वहीं, यूपी गेट-डासना व डासना-मेरठ के हिस्से अगले वर्ष मार्च तक पूरे होंगे. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इसकी घोषणा कर चुके हैं. एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आरपी सिंह भी इसकी ताकीद करते हैं. दिल्ली से मेरठ व लखनऊ जैसे प्रमुख नगरों के रास्ते चौड़े होने से वाहनों की रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ जाम व प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी.

सिक्स लेन का दिल्ली-आगरा हाईवे

180 किलोमीटर लंबे दिल्ली-आगरा हाईवे को सिक्स लेन बनाने का काम मार्च तक पूरा हो जाने के आसार हैं. इसके बीच-बीच के अधूरे पैच को बरसात के बाद पूरा कर लिया जाएगा. वर्ष 2012 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अब पूरा होने की दहलीज पर है. हालांकि इसे वर्ष 2015 में पूरा हो जाना चाहिए था.

दिल्ली-पानीपत हाईवे का चौड़ीकरण

एनएच-44 पर दिल्ली से पानीपत तक छह लेन की सड़क को 12 लेन में बदलने के काम ने भी रफ्तार पकड़ ली है. इसके अगले वर्ष अप्रैल में पूरा होने की संभावना है. इस प्रोजेक्ट का प्रधानमंत्री मोदी ने नवंबर, 2015 में शिलान्यास किया था. कुंडली में हाईवे के साथ ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के मिलान संबंधी कार्यो के भी तब तक पूरा हो जाने की उम्मीद है.

फ्लाईओवर व अंडरपास

गुरुग्राम में एनएच-48 पर हीरो होंडा चौक और राजीव चौक को जाम मुक्त बनाने के लिए फ्लाईओवर और अंडरपास के कार्य करीब पूरे हो चुके हैं. एमजी रोड अंडरपास का काम बाकी है. दिल्ली में काम की धीमी रफ्तार के मद्देनजर नितिन गडकरी ने धौला कुआं अंडरपास को आगामी मई तक पूरा करने के लिए नेशनल हाईवे इंस्टीट्यूट को कहा है. दिल्ली सरकार भी राव तुलाराम फ्लाईओवर के साथ बन रहे फ्लाईओवर को जल्द पूरा करने में जुटी है.

अक्टूबर से दिल्ली और भरेगी रफ्तार

दिल्ली में निर्माणाधीन पांच बड़ी परियोजनाएं जाम से जूझ रही दिल्ली को निजात दिलाएंगी. इसमें चार परियोजनाएं अक्टूबर में ही जनता को समर्पित कर दी जाएंगी. इसमें दो परियोजनाओं पर दस साल से काम चल रहा है, जबकि एक परियोजना 31 मार्च तक पूरी होगी. ये सभी परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं और लोगों को इनका बेसब्री से इंतजार है. इनसे दिल्ली ही नहीं पूरे एनसीआर को लाभ मिलेगा. इनसे जनता को जाम से मुक्ति तो मिल सकेगी, साथ ही लाखों रुपये का ईंधन भी बचेगा. प्रदूषण कम होगा और आने-जाने में लोगों का समय भी बचेगा. कौन सी परियोजनाएं पूरी होनी हैं. आइए उन पर डालते हैं एक नजर.

ये हैं 31 अक्टूबर तक पूरी होने वाली परियोजनाएं

सिग्नेचर ब्रिज परियोजना का काम अंतिम चरण में : सिग्नेचर ब्रिज परियोजना का काम अंतिम चरण में है. यह परियोजना 31 अक्टूबर तक पूरी की जाएगी. इसके शुरू होने से दिल्ली ही नहीं पड़ोसी राज्यों को भी बहुत लाभ मिलेगा. यह ब्रिज दस साल से वजीराबाद में बन रहा है. परियोजना पर काम कर रहे दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम का कहना है कि अब काम को लेकर कोई रुकावट नहीं है. काम तेजी से चल रहा है, जिसे हर हाल में 31 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा. करोल बाग से तीस हजारी की दूरी होगी कम: उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा बनाया जा रहा रानी झांसी फ्लाईओवर बनकर तैयार है. इसे अक्टूबर में जनता को समर्पित कर दिया जाएगा. सेंट स्टीफंस अस्पताल से फिल्मिस्तान तक करीब डेढ़ किमी लंबा बनाया जा रहा यह फ्लाईओवर करोल बाग इलाके से तीस हजारी कोर्ट के बीच की दूरी कम करेगा. उत्तरी दिल्ली से इंदिरा गांधी हवाई अड्डा आने जाने वालों को भी इससे लाभ मिल सकेगा.

यूपी लिंक रोड पर फ्लाईओवर का काम अंतिम चरण में: दिल्ली की जनता के लिए खुशी की बात यह है कि यूपी लिंक रोड पर मयूर विहार फेज-एक के सामने बनाया जा रहा फ्लाईओवर 31 अक्टूबर तक जनता को समर्पित कर दिया जाएगा. इस फ्लाईओवर का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है. नोएडा की ओर से लक्ष्मीनगर चुंगी की ओर जाने वालों को इसका लाभ मिलेगा.

अक्टूबर तक तैयार होगा आइटीओ स्काईवॉक: आइटीओ पर बन रहे दिल्ली के पहले स्काईवॉक को अक्टूबर में जनता को समर्पित करने की तैयारी है. यह भले ही एक स्काईवॉक है, जो पैदल चलने वालों की सुविधा के लिए बनाया जा रहा है, मगर जमीनी हकीकत यह है कि इसका बड़ा लाभ वाहन चालकों को भी मिलेगा.

31 मार्च तक रावतुलाराम फ्लाईओवर हो जाएगा डबल: दक्षिणी दिल्ली में बाहरी रिंग रोड पर सिंगल बने रावतुलाराम फ्लाईओवर के समानांतर बन रहे फ्लाईओवर का निर्माण कार्य 31 मार्च तक हर हाल में पूरा किया जाएगा. पहले से सिंगल बने रावतुलाराम फ्लाईओवर पर जाम लगता है, जिससे आइआइटी की तरफ से एयरपोर्ट जाने वालों को बहुत परेशानी होती है. फ्लाईओवर के बन जाने से लोगों की फ्लाइट नहीं छूटेगी.

सावधान : दिल्ली में रोजाना गायब हो रहे हैं 18 बच्चे

देश की राजधानी में रोजाना 18 बच्चे गायब हो रहे हैं. पांच सालों में (वर्ष 2012 से 2017 तक) 41,394 बच्चे गायब हुए हैं. आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत दिल्ली पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, सिर्फ वर्ष 2017 में ही दिल्ली में 6454 बच्चे गायब हुए. इनमें 3915 लड़कियां और 2535 लड़के हैं.

इन आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में रोजाना औसतन 18 बच्चे गायब हो रहे हैं. पुलिस इनमें से 70 फीसद यानी कुल 4391 बच्चों को ही तलाश पाई है. 2063 बच्चों का अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है. गायब हुईं 3536 लड़कियों की उम्र 12 से 18 साल के बीच है.

वर्ष 2016 में 6921, वर्ष 2015 में 7928, वर्ष 2014 में 7574, वर्ष 2013 में 7235 और वर्ष 2012 में 5284 बच्चे गायब हुए थे. आंकड़ों के हिसाब से वर्ष 2016 में रोजाना 19 बच्चे जबकि 2015 में रोजाना 22 बच्चे लापता हुए थे. बच्चों की गुमशुदगी के सबसे अधिक मामले उत्तर-पूर्वी व उत्तर- पश्चिम दिल्ली में दर्ज हुए हैं. वर्ष 2016व 2017 में इन जिलों से कुल 732 बच्चे गायब हुए हैं.

चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) संस्था की क्षेत्रीय निदेशक (नॉर्थ) सोहा मोइत्र ने कहा कि दिल्ली में लापता होने वाले 10 में से 6 बच्चे कभी नहीं मिल पाते हैं. लापता बच्चों को ढूंढने के लिए क्राइम ब्रांच ने कई वर्ष पूर्व मिलाप अभियान की शुरुआत की थी. इसके तहत दिल्ली के विभिन्न बाल सुधार गृहों की तलाशी लेकर वहां रह रहे बच्चों की पहचान कर क्राइम ब्रांच ने उनके परिजनों से मिलाने का सिलसिला शुरू किया था.

पूर्व पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी के कार्यकाल के दौरान यह अभियान शुरू किया गया था, जिसे काफी सराहा गया था. दरअसल, गाजियाबाद पुलिस ने मुस्कान नाम से बच्चों को ढूंढने का अभियान शुरू किया था. उसी को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने मिलाप नाम से अभियान शुरू किया था, लेकिन धीरे-धीरे यह अभियान सुस्त पड़ गया.

एक पुलिस अधिकारी की माने तो अगर मिलाप अभियान को बेहतर ढंग से चलाया जाता तो दिल्ली में लापता बच्चों की संख्या इतनी नहीं बढ़ती. दिल्ली पुलिस लापता बच्चों के मसले पर गंभीरता से जांच नहीं करना चाहती है. पुलिस को जहां भी लावारिस बच्चे मिलते हैं, उन्हें पास के बाल सुधार गृहों में रखवा देती है. स्थानीय पुलिस उनसे पूछताछ कर उनके परिजनों के बारे में जानने की कोशिश ही नहीं करती है.

भीख मांगने को करते हैं मजबूर

दिल्ली में बड़ी संख्या में मानव तस्कर गिरोह सक्रिय हैं, जो बच्चों से चौराहे, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन व अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भीख मंगवाते हैं. बच्चियों को वेश्यावृत्ति से जुड़े लोगों के हाथों बेच देते हैं. कुछ युवतियों को तो मानव तस्कर गिरोह के लोग खाड़ी देशों में भेज देते हैं.

इन छह राज्यों में सस्ता हो जाएगा पेट्रोल और डीजल

हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल व चंडीगढ़ अपने यहां पेट्रोल व डीजल की दरें एक समान करने पर सहमत हो गए हैं. इसके लिए सभी छह राज्य अपने-अपने प्रदेश में वैट की दरें कम करेंगे, ताकि पेट्रोल व डीजल के दाम कम हो सकेंगे.

चंडीगढ़ में हरियाणा की मेजबानी में हुई इन राज्यों के वित्त मंत्रियों तथा अधिकारियों की बैठक में आबकारी नीति, ट्रांसपोर्ट परमिट और गाड़ियों के पंजीकरण से जुड़े टैक्स में भी एकरूपता लाने पर भी सहमति बनी है. इन तमाम मुद्दों पर अधिकारियों की एक कमेटी का गठन किया गया है, जो अगले दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी. इसके आधार पर न केवल पेट्रोल व डीजल पर वैट की दरें घटाई जाएंगी, बल्कि आबकारी नीति, ट्रांसपोर्ट परमिट और गाड़ियों के पंजीकरण के टैक्स भी एक समान होंगे.

बैठक में हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल व दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने हिस्सा लिया. उत्तर प्रदेश,हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ ने प्रतिनिधियों के रूप में आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों को बैठक में भेजा. हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि मई 2015 की तर्ज पर इन प्रदेशों में आम सहमति बनाकर वैट की दरें लगभग एक समान कर जनता को राहत दी जाएगी.

किसी जहर से कम नहीं है आपकी लिपस्टिक

आप होंठों पर लिपस्टिक लगा रही हैं या जहर, क्या आपसे किसी ने ये सवाल किया है. हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया द्वारा की गई एक स्टडी में सामने आया है कि आपकी लिपस्टिक किसी जहर से कम नहीं है, इससे आपको कई समस्याएं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी तक हो सकती है.

आप जानती हैं कि होठों की खूबसूरती बढ़ाने वाली लिपस्टिक आपके लिए खतरनाक भी साबित हो सकती है/ दरअसल लिपस्टिक में लेड होता है, जो एक न्यूरोटॉक्सिन होता है और इसकी वजह से लर्निंग और लैंग्वेज संबंधी परेशानियां हो सकती हैं. हालांकि सभी लिपस्टिक्स में लेड नहीं होता और न ही कोई ब्रैंड अपने प्रॉडक्ट के इन्ग्रीडियेंट्स में लेड होने के बारे में बताता है. लेकिन यह तय है कि लिपस्टिक हमारे होठों के जरिए पेट में जाकर हमें बीमार कर सकती है.

87 मिलीग्राम लिपस्टिक अब्जॉर्ब

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया द्वारा की गई एक स्टडी के अनुसार, अगर एक महिला दिन में 2 से 6 बार लिपस्टिक लगाती है, तो वह दिनभर में कम से कम 87 मिलीग्राम लिपस्टिक अब्जॉर्व करती है. लाल और गहरे रंग की लिपस्टिक्स में धातुओं की अधिकता होती है, जिससे लिपस्टिक पेट में जाकर नुकसान पहुंचा सकती है.

साइड इफेक्ट्स बेशुमार

स्टडी के मुताबिक, लिपस्टिक बनाने में सीसा, कैडमियम, मैग्नीशियम क्रोमियम और एल्यूमिनियम जैसे धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है, जो खतरनाक बीमारियों के लिए जिम्मेदार हैं. इसमें काफी मात्रा में कैडमियम पाया जाता हैं, जिससे गुर्दे के खराब होने के खतरा बढ़ जाता है. यह पेट के ट्यूमर का कारण भी बन सकते हैं. त्वचा के लिए हानिकारक लिपस्टिक में इस्तेमाल किए गए अन्य केमिकल्स आपकी सेंसटिव स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे स्किन और आंखों में जलन, एलर्जी, शरीर में जकड़न और गले में खराश जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

इसमें इस्तेमाल किए गए मिनरल्स ऑयल्स से त्वचा के रोम छिद्र बंद हो सकते हैं. इसमें इस्तेमाल किया गए एल्यूमिनियम से पेट का अल्सर, लकवा आदि रोग व शरीर में फास्फेट की कमी हो सकती है. लिपस्टिक में काफी मात्रा में लेड का इस्तेमाल किया जाता हैं, जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खतरे को बढ़ा सकता हैं. इससे महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है. साथ ही यह शरीर में पहुंचकर रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है, जिससे वह बीमारी से जल्दी नहीं उबर पातीं.

बरतनी चाहिए खास सावधानी

कोई भी लिपस्टिक खरीदने से पहने उसमें मौजूद इंग्रेडिएंट्स की लिस्ट जरूर पढ़ लें. केवल उन्हीं लिपस्टिक को खरीदें, जिनमें लेड न हो. कुछ-कुछ कंपनियां इस बात का खुलासा प्रोडक्ट के पीछे नहीं करती. इसलिए खरीदने से पहले जांच परख लें.

इन बातों का भी रखें ख्याल

लिपस्टिक लगाने के बाद अक्सर हम कुछ भी खाते हैं, तो लिपस्टिक के दाग उस पर लग जाते हैं और वही लिपस्टिक हमारे पेट में चली जाती है. ऐसे में अगर आपकी लिपस्टिक में सीसा, कैडमियम, मैग्नीशियम क्रोमियम और एल्यूमिनियम जैसे धातु हैं, तो फिर यह आपके लिए हानिकारक हो सकता है. इसके साथ ही फटे होठों पर मैट फिनिश वाली लिपस्टिक नहीं लगानी चाहिए.

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छोटी-मोटी तकरार से रिश्ते में बढ़ता है विश्वास

किसी भी रिलेशन में प्यार के साथ-साथ विश्वास होना बहुत जरूरी है, तभी यह रिश्ता और गहरा हो पाता है. लेकिन अगर आपके रिलेशनशिप में झगड़े होते हैं, तो इसके फायदे बहुत हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे शोधकर्ता अमेरिकी लेखक जोसफ ग्रेनी की मानें, तो छोटी-मोटी तकरारों से रिलेशनशिप में आत्मीयता और विश्वास बढ़ता है.

इकॉलजिस्ट आरती श्रॉफ भी इस बात को स्वीकार करती हैं. वे कहती हैं कि प्यार में होने वाले बहस इस बात की ओर इशारा करती हैं कि रिलेशनशिप हेल्दी है और मैच्योरिटी की ओर बढ़ रहा है. लेकिन ये तकरार सही तरीके से होनी चाहिए, कहने का मतलब ये है कि अपने पार्टनर के प्रति रिस्पेक्टफुल होते हुए अपनी नाराजगी या गुस्सा जाहिर करना चाहिए. यहां हम कुछ ऐसे ही लोगों के एक्सपीरियंश और हमारे एक्सपर्ट जसलीन कौर सचदेव और विहान सान्याल के व्यू को शेयर कर रहे हैं.

पॉजिटिव चीजों को न भूलें

कॉमेडियन अमित टंडन की पत्नी सोनल एक प्रोफेशनल एचआर हैं. अमित कहते हैं कि रिलेशनशिप में लड़ाई-झगड़ों की अच्छी हिस्सेदारी होती है. शुरू में हम दोनों एक-दूसरे के अनुकूल खुद को बदलने की कोशिश करते थे, लेकिन समय के साथ हमें ये अहसास हुआ कि एक सीमा के बाद हम खुद को नहीं बदल सकते हैं, अत: असहमति तय हैं. इसलिए अमित और सोनल ने लड़ाई के कुछ बेसिक नियम बनाए हैं. जैसे कि कोई भी तेज आवाज में बात नहीं करेगा और पुरानी बातों को नए झगड़े में शामिल नहीं किया जाएगा. जब हम लड़ते हैं, तो हम ये नहीं भूलते हैं कि हमने अपने रिलेशनशिप में कितनी सारी पॉजिटिव चीजें अचीव की हैं.

एक्सपर्ट व्यू: सायकोथैरपिस्ट विहान सान्याल अपने पार्टनर के पॉइंट ऑफ व्यू को सुनने के फायदे बताते हुए कहते हैं कि आपको इस बात को समझना चाहिए कि आपका पार्टनर आपसे कहना क्या चाहता है. उसकी गलतियों को ढूंढ़कर उससे झगड़ा करने के बजाय इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि कैसे समस्या को हल किया जा सकता है.

अपनी जिम्मेदारी समझें

लॉयर टीना शाह कहती हैं कि वे अपने पार्टनर जमील खान, जो कि जिम इंस्ट्रक्टर हैं, के साथ बहस के दौरान बहुत जल्दी अपना आपा खो देती थीं, लेकिन समय के साथ उनको इस बात का अहसास हुआ कि लड़ाई को लंबा खींचने का कोई फायदा नहीं है. एक बार जब मैं किसी बात पर अपनी असहमति अपने पार्टनर से जता देती हूं, तो फिर उसे बार-बार नहीं दोहराती हूं. बल्कि उसे समझ कर दूर करने के लिए पर्याप्त समय देती हूं. साथ ही साथ मैंने ये भी सीखा है कि अपनी गलतियों को स्वीकारने की जिम्मेदारी भी मेरी ही है. नाम लेकर आरोप लगाना और सामान इधर-उधर फेंकना इस बात की ओर इशारा करता है कि आप अपने पार्टनर का रिस्पेक्ट नहीं करते हैं.

एक्सपर्ट व्यू: क्लीनिकल साइकॉलजिस्ट जसलीन कौर सचदेव कहती हैं कि लड़ाई की शुरुआत जिस प्रकार से होता है उसी से ये तय होता है कि लड़ाई का अंत किस प्रकार होगा. अपने पार्टनर को उसी की भाषा में जवाब देने की बजाय उसे इस बात का अहसास दिलाने की कोशिश करें कि उसकी बातों का आप को क्या फील हो रहा है. तुम या तुम हमेशा से जैसी लाइनों से बात शुरू करने पर आपका पार्टनर डिफेंसिव हो सकता है.

देश के 831 लोगों के पास जीडीपी का एक-चौथाई पैसा

भारत का रुपया कमजोर हो रहा है, पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर हैं और अर्थव्यवस्था के सामने तमाम चुनौतियां हैं. लेकिन इन वजहों का असर पैसा बनाने (वेल्थ क्रिएशन) पर बिलकुल पड़ता नहीं दिख रहा है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत में इस साल 214 लोग नए अमीर बने हैं, जिनकी संपत्ति 1000 करोड़ रुपये के पार चली गई है.

यह बात बार्कलेज हुरून इंडिया रिच लिस्ट 2018 ने अपनी रिपोर्ट में कही है. रिपोर्ट के अनुसार इस समय देश के 831 लोगों के पास एक हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है. इन 831 लोगों की संपत्ति देश की जीडीपी का 25 फीसदी (52 लाख करोड़) है. रिलायंस इंडस्ट्री के चैयरमेन मुकेश अंबानी लगातार सातवीं बार इस लिस्ट में पहले नंबर पर हैं.

बार्कलेज हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2018

– गिरते रुपये-महंगे तेल के बीच 214 नए लोग ‘1000 करोड़’ के क्लब में

– अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का पैसा बनाने वालों पर नहीं दिख रहा असर

– 113 लोग खुद की मेहनत से अमीर बने, ओयो के फाउंडर रितेश सबसे युवा

1000 करोड़ी अमीर कहां रहते हैं

233 मुंबई में

163  दिल्ली में

70 बेंगलुरु में

खुद से अमीर बनीं पांच महिलाएं

किरण मजमूदार शॉ (बायोकॉन फार्मा)

जयश्री उलाल (अरिस्ता नेटवर्क सॉफ्टवेयर)

श्रद्धा अग्रवाल (आउटकम हेल्थ हेल्थकेयर)

विंबु राधा (जोहो सॉफ्टवेयर)

नीरजा शेट्ठी (सिंटेल सॉफ्टवेयर)

इनकी संपत्ति तेजी से बढ़ी

कृष्ण कुमार बांगुर (430%)

बिजु रविंद्रन (230%)

धीरज राजाराम (184%)

दिलिप पीरामल फैमिली (171%)

युगांधर रेड्डी व फैमिली (127 %)

दिल्ली हो रही है कूड़ा, 2021 तक हर दिन पैदा होगा 15,750 टन कचरा

कूड़ा दिल्ली के लिए सबसे बड़ी समस्या बन रहा है. पिछले कई साल से इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. आकलन बता रहे हैं कि 2021 तक दिल्ली में 15,750 टन कचरा प्रतिदिन पैदा होगा. मास्टर प्लान-2015 में ही दिल्ली में 4 नई लैंडफिल साइटें प्रस्तावित थीं, जिन्हें अब तक शुरू नहीं किया जा सकता है.

इस मास्टर प्लान के मुताबिक राजधानी में अब तक 16 लैंडफिल साइट पूरी तरह भर चुकी हैं. चार पर अभी कचरा डालने का काम चल रहा है. चार नई साइट शुरू की जानी है. गौरतलब है कि दिल्ली में 2002 में 5543 टन कूड़ा पैदा होता था. डीडीए के पूर्व योजना आयुक्त आरजी गुप्ता ने इसे लेकर चिंता जाहिर की है और एक प्रपोजल तैयार किया है. बढ़ती आबादी की वजह से दिल्ली में न तो कूड़ा कम होगा और न ही लैंडफिल साइट्स से समस्या सुलझने वाली हैं. जबकि लैंडफिल साइट खुद खतरा बन रही हैं. उनमें आग की घटनाएं बढ़ रही हैं और प्रदूषण भी फैल रहा है.

ऐसे में समस्या से निपटने के लिए लैंडफिल साइटों के आसपास ग्रीन कवर बढ़ाना जरूरी है. इससे वहां निकलने वाली मिथेन गैस का रिसाव भी कम होगा और ग्रीनरी वहां के प्रदूषण को कम करेंगी. साथ ही कूड़े से बिजली बनाने की योजना को ईमानदारी से बढ़ावा देने की जरूरत है. साथ ही कूड़े के इस्तेमाल बढ़ाने जैसे सड़कों आदि में इसके उपयोग करना भी मौजूदा समय की जरूरत है. उन्होंने बताया कि 1980 में मजनू का टीला के नजदीक लगातार तीन वर्ष तक कचरे से बिजली बनाई गई थी.

भर चुकी हैं ये लैंडफिल साइट्स

  • कैलाश नगर
  • तिलक नगर
  • सुब्रतो पार्क
  • भैरो सिंह रोड
  • तिमारपुर
  • सराय काले खां
  • गोपालपुर
  • छतरपुर
  • एसजीटी नगर
  • आईपी डिपो
  • सुंदर नगर
  • तुगलकाबाद एक्स.
  • हैदरपुर
  • मंडावली फाजिलपुर
  • रोहिणी फेस-3
  • हस्तसाल गांव

मास्टर प्लान 2015 में बनाई गई थी चार नई लैंडफिल साइट की योजना

जैतपुर-ताजपुर : 9.84 हेक्टेयर

पूठखुर्द के पास : 55.0 हेक्टेयर

बवाना नरेला रोड : 28.0 हेक्टेयर

सुल्तानपुर डबास : 16.0 हेक्टेयर

राजनीति में अपराधी कैंसर की तरह, संसद करे इलाज : सुप्रीम कोर्ट

गंभीर अपराध के आरोपियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. अदालत ने राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण की तुलना कैंसर से की,हालात बेहद विनाशकारी होने की बात कही लेकिन अपनी लक्ष्मणरेखा का हवाला देते हुए कानून बनाने का जिम्मा संसद के पाले में डाल दिया. हालांकि, हर उम्मीदवार का क्रिमिनल रिकॉर्ड साफ शब्दों में जाहिर करने के कई निर्देश जारी किए.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने कहा कि राजनीति का अपराधीकरण और भ्रष्टाचार भारतीय लोकतंत्र की जड़ को दीमक की तरह कमजोर कर रहा है. इस खतरे को रोकने के लिए जरूरी है कि संसद कानून बनाए ताकि क्रिमिनल केस का सामना करने वाले सियासी गलियारों में न घुस पाएं और राजनीतिक में अपराधीकरण का खात्मा हो सके. कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को निसहाय की तरह पेश कर भ्रष्टाचार के प्रति मौन, बहरा और चुप रहने को मजबूर नहीं किया जा सकता. राष्ट्र बेसब्री से इस बात का इंतजार कर रहा है कि विधायिका और कानून बनाने वाले खुद इस बारे में आगे आएं और कानून बनाएं.

मौजूदा कानून के तहत, पांच साल या उससे ज्यादा की सजा वाले अपराध में दोषी साबित होने पर ही चुनाव लड़ने से रोकने का नियम है. याचिका में ऐसे मामलों में आरोप तय होते ही चुनाव लड़ने के अयोग्य करार देने की मांग की गई थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कानून बनाने का काम संसद पर छोड़ दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर नागरिक का ये अधिकार है कि वह चुनावी मैदान में उतरे लोगों के पिछले रिकॉर्ड और आपराधिक इतिहास की जानकारी रखें. जब उम्मीदवार अपने बारे में सभी जानकारियां पूरी तरह से उजागर करेंगे तो चुनाव ज्यादा निष्पक्ष और स्वतंत्र होंगे.

साफ शब्दों में बताना होगा, कितने क्रिमिनल केस पेंडिंग

  • हर चुनावी उम्मीदवार चुनाव आयोग द्वारा दिए फॉर्म में पूरी जानकारी भरे.
  • कोई क्रिमिनल केस पेंडिंग है तो उसकी जानकारी बोल्ड अक्षरों में दी जाए.
  • अगर पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ें तो उस राजनीतिक दल को पूरी जानकारी दें.
  • पार्टी की जिम्मेदारी है कि कैंडिडेट के पुरानेरिकॉर्ड की सूचना वेबसाइट पर दे.
  • कैंडिडेट और पार्टी दोनों ही मीडिया के माध्यम से क्रिमिनल रिकॉर्ड के बारे में बताएं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को पूर्ण अधिकार दिए गए हैं, फिर भी उसे संसद के बनाए कानून के हिसाब से काम करना होता है. आयोग के पास निष्पक्ष, स्वतंत्र चुनाव कराने के अधिकार हैं, फिर भी उसके अधिकारों की एक सीमा है. दलील दी गई थी कि मौजूदा कानूनी प्रावधान अपराधियों को राजनीति में आने से रोक पाने में सक्षम नहीं हैं. इसी पर कोर्ट ने यह बात कही.

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