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पाकिस्तान ने भारत पर ठोका 500 करोड़ रुपए का दावा

हाल ही में दुबई में हुए क्रिकेट के एशिया कप में भारत 7वीं बार चैंपियन बना पर फाइनल मुकाबला उस के और पाकिस्तान के बीच नहीं हुआ था. उस से कहीं कमतर बंगलादेश ने एक अहम मुकाबले में उसे हरा कर भारत से फाइनल मैच खेलने का शानदार मौका हासिल किया था और भारत को कारीबकरीब हरा ही दिया था.

पर एक समय ऐसा था जब पाकिस्तान की क्रिकेट जगत में तूती बोलती थी. उस का कमजोर से कमजोर खिलाड़ी खेल के मैदान पर घातक होता था. लेकिन आज उसी पाकिस्तान के कप्तान का नाम पूछ लिया जाए तो ज्यादातर लोग बगलें झांकने लगेंगे.

क्या है इस की वजह?

दरअसल, पिछले कई साल से पाकिस्तान और भारत के बीच हुए खराब रिश्तों के चलते भारत और पाकिस्तान के बीच अरसे से कोई सीरीज एकदूसरे के देश में नहीं खेली गई है. इस से पाकिस्तान को पैसे के लिहाज से बहुत नुकसान हुआ है. ऊपर से उन्हें भारत में होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने की इजाजत नहीं है जिस से उस के खिलाड़ियों और दूसरे स्टाफ को भी पैसे का घाटा होता है.

ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने कोशिश नहीं की कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट सीरीज खेली जाए पर ऐसा नहीं हो पाया. भारत ही नहीं दूसरे देश भी वहां क्रिकेट खेलने से घबराते हैं. कई बार खेल के दौरान खिलाडियों को मिली आतंकी धमकियों या कुछ वारदातों के चलते बीच में ही सीरीज छोड़ दी गईं. पाकिस्तान को लगता है कि अगर भारत वहां या कहीं ओर भी उस के साथ क्रिकेट खेल ले तो दूसरे देशों का भी हौसला बढ़ जाएगा और वहां का क्रिकेट बोर्ड पैसा बना लेगा.

इन सब बातों से बौखलाया पाकिस्तान अब भारत के इस अड़ियल रवैए से परेशान हो कर इस मामले को ले कर आईसीसी यानी इंटरनेशनल क्रिकेट कौंसिल के पास पहुंच गया है और उस ने बीसीसीआई यानी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पर 70 मिलियन डॉलर यानी तकरीबन 500 करोड़ रुपए देने का दावा किया है.

पर यह मुआवजा मिलना इतना आसान नहीं है. जब तक खिलाड़ी खुद को एक दूसरे के साथ खेलता सहज महसूस नहीं करेंगे तब तक बात नहीं बनेगी. क्रिकेट की खेल नीति और सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा तभी बात बनेगी.

इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए आईपीएल यानी इंडियन प्रीमियर लीग के चेयरमैन राजीव शुक्ला और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी. राजीव शुक्ला ने कहा कि बीसीसीआई को पीसीबी के साथ क्रिकेट संबंध बनाने में कोई एतराज नहीं है लेकिन कुछ ऐसे मसले हैं जिन्हें सरकार के स्तर पर सुलझाने की जरूरत है. उन्होंने आगे कहा कि इस मामले को बीसीसीआई और पीसीबी को बैठ कर खुद सुलझा लेना चाहिए न कि इसे आईसीसी के पास ले जाने की कोई जरूरत है. बीसीसीआई पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने को ले कर राजी है पर कुछ अनसुलझे मुद्दे हैं और इसलिए बीसीसीआई को पाकिस्तान जा कर क्रिकेट खेलने के लिए सरकार की इजाजत लेने की जरूरत है.

राजीव शुक्ला ने आगे कहा कि भारत ने इंटरनेशनल लेवल पर किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट या एशियाई क्रिकेट काउंसिल के टूर्नामेंट में पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से कभी इनकार नहीं किया है इसलिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को पैसा देने का कोई सवाल नहीं उठता है.

वहीं दूसरी तरफ इस मामले पर अनुराग ठाकुर ने कहा कि पिछले कई सालों से भारत के अलावा कई देशों की टीमों ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया है. भारत के किसी भी अधिकारी को पाकिस्तान के दावे की सुनवाई में भागीदारी करने की जरूरत नहीं है. लिहाजा, भारत को पाकिस्तान को पैसा नहीं देना चाहिए.

इस मसले का हल क्या होगा यह तो भविष्य बताएगा पर पाकिस्तान की बौखलाहट से साफ लगता है कि पैसों के मामले में उस की हालत खस्ता है. और जब वे ज्यादा मैच नहीं खेलेंगे तो ऐसे में कोई क्रिकेट प्रेमी कैसे उस के खिलाड़ियों का नाम याद रख पाएगा?

गांधी जयंती पर आएगा फिल्म ‘‘मणिकर्णिका’’ का टीजर

युद्ध के मैदान में अंग्रेजों के झक्के छुड़ाते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर बनी और 25 जनवरी 2019 को प्रदर्शित होने वाली बहुचर्चित फिल्म ‘‘मणिकर्णिका’’ का टीजर दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर रिलीज़ होगा.

जब से इस फिल्म की घोषणा हुई है, तब से इस फिल्म के साथ नित नए विवाद भी जुड़ते रहे हैं. सोनू सूद और स्वाति सैम्युअल जैसे दो कलाकारों ने इस फिल्म की शूटिंग करने बाद खुद को इस फिल्म से अलग कर लिया. इतना ही नही फिल्म में शीर्ष भूमिका निभा रहीं अदाकारा कंगना रानौट ने फिल्म के निर्देशक राधा कृष्ण को हटाकर स्वयं फिल्म के कई हिस्से पुनः फिल्माए, मगर निर्देशक चुप हैं, जबकि कंगना रानौट को फिल्म के लेखक प्रसून जोशी का खुला समर्थन है.

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फिल्म ‘‘मणिकर्णिका’’ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इस फिल्म के साथ कई बेहतरीन तकनीशियन जुडे़ हुए हैं. फिल्म में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता कंगना रानौट ने निभायी है. तो वहीं संगीतकार के रूप में शंकर अहसान लौय, लेखक के तौर पर प्रसून जोशी और एक्शन निर्देशक हैं हौलीवुड के मशहूर एक्शन डायरेक्टर निक पौवेल जुडे़ हुए हैं.

फिल्म ‘‘मणिकर्णिका’’ के निर्माण से जुड़े जी स्टूडियो के सीईओ शारिक पटेल कहते हैं- ‘‘यह फिल्म वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई को ट्रिब्यूट है. भारत की बहादुर वीरयोद्धा व झांसी की रानी की असाधारण यात्रा को हम सलाम करते हैं. झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने देश की आजादी की लड़ाई लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी. हम गांधी जयंती के अवसर पर फिल्म का टीजर लाकर फिल्म में क्या है, इसकी झलक पेश करने वाले हैं.’’

फिल्म के निर्माता कमल जैन कहते हैं- ‘‘मणिकर्णिका की लार्जर देन लाइफ कहानी को पेश करते हुए हमें गर्व महसूस हो रहा है.’’

राज कपूर की पत्नी कृष्णा राज कपूर का निधन

अपने समय के मशहूर अभिनेता व निर्माता निर्देशक राज कपूर की पत्नी कृष्णा राज कपूर का आज सोमवार, एक अक्टूबर की सुबह पांच बजे हृदयाघात से 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.

 

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I love you- I will always love you – RIP dadi ❤️

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कृष्णा राज कपूर के निधन की खबर उनके बेटे व अभिनेता रणधीर कपूर ने सबसे पहले दी. फिर ट्वीटर पर अभिनेत्री रवीना टंडन और व्यवसायी सुहेल सेठ ने इस खबर को शोक संदेश के साथ साझा किया.

 

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Love you so much RIP ❤️??

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रणधीर कपूर ने एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा- ‘‘आज सुबह पांच बजे मेरी मां का हृदयाघात से निधन हो गया. उम्र भी उनके निधन का एक कारण रहा. उनके निधन से हम सभी को गहरा आघात लगा है और हम सभी सदमे में हैं.’’

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कृष्णा राज कपूर का अंतिम संस्कार चेंबूर के श्मशान गृह में किया जाएगा. राज कपूर और कृष्णा राज की शादी 1946 में हुई थी. इनके पांच बच्चे रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, राजीव कपूर, रितु नंदा और रिमी जैन हैं. कृष्णा राज के कई नाती पोते हैं. इनमें अभिनेता रणबीर कपूर व करीना कपूर का भी समावेश है.

कृष्णा राज कपूर के निधन की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर बौलीवुड हस्तियों की तरफ से शोक व्यक्त किया जा रहा है.

सबरीमाला : औरतों की प्रगति मंदिर प्रवेश से नहीं, फायदा पंडों को

केरल के सबरीमाला स्थित अयप्पा के मंदिर में 10 से 50 साल तक की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगी पाबंदी सुप्रीम कोर्ट ने हटा दी है. सदियों पुरानी इस प्रथा के लिए केरल में 1965 में बने हिंदू पूजा स्थल [प्रवेश के अधिकार] कानून के नियम 3[बी] को अदालत ने रद्द कर दिया. 5 जजों की संविधान पीठ में शामिल चार पुरुष जजों ने महिलाओं पर लगी पाबंदी को लैंगिक भेदभाव के आधार पर असंवैधानिक करार दिया. इस से पहले न्यायालय ने शिर्डी के निकट शनि शिंगणापुर मंदिर में स्त्रियों को प्रवेश की इजाजत दिलाई थी.

5 सदस्यीय पीठ ने 411 पेजों में 4 अलगअलग फैसले लिखे. पीठ ने अयप्पा मंदिर में रजस्वला आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया. 2006 में इंडियन यंग लायर्स एसोसिएशन ने याचिका दायर कर प्रतिबंध को खत्म करने की मांग की थी. इस के बाद मामला पांच जजों की संविधान पीठ को सौंपा गया था.

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि शारीरिक वजहों से मंदिर आने से रोकना रिवाज का जरूरी हिस्सा नहीं है. यह पुरुष प्रधान सोच को दर्शाता है. उधर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि महिला को माहवारी के आधार पर प्रतिबंधित करना असंवैधानिक है. यह मानवता के खिलाफ है.

करीब 800 साल पुराने इस मंदिर में 10 से 50 साल तक और रजस्वला महिलाओं के प्रवेश की मनाही थी. इस के पीछे मंदिर प्रबंधन का कहना था कि मंदिर के देवता अयप्पन ब्रह्मचारी थे. केरल की वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार औरतों को प्रवेश दिलाए जाने के पक्ष में थी लेकिन त्रावणकोर का राज परिवार और देवासम बोर्ड इस के खिलाफ था.

सुप्रीम कोर्ट ने स्त्रियों को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की इजाजत का फैसला दे कर पुरुषों से बराबरी के नाम पर समानता के उन के अधिकार की रक्षा की है. हमेशा से लैंगिक भेदभाव का शिकार रही औरतों के लिए बराबरी के अधिकार का फैसला ठीक है, लेकिन ऐसी बराबरी का रास्ता किस काम का जो अंधेरे की ओर ले जाने वाला हो. सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने स्त्रियों की प्रगति का कोई मार्ग नहीं खोला है.

धर्म ने औरत को सैंकड़ों सालों से दोयम दर्जे का प्राणी बना कर रखा. देवदासियों का मंदिरों में भगवान की सेवा के नाम पर यौन शोषण का इतिहास पुराना है. पति की मृत्यु के बाद स्त्री को परपुरुष से बचाने के लिए जीतेजी जला कर मारने वाली सती प्रथा धर्म का सम्मानित हिस्सा रही है. स्त्री को जहालत मे झोंकने के हजारों धार्मिक आदेश अभी पुराने नहीं पड़े हैं. धर्म के नाम पर सैंकड़ों रीतिरिवाज, परंपराएं अभी जिंदा हैं, जिन में फंसी औरतें जिस धर्म के चलते स्त्री सदियों से गैरबराबरी, भेदभाव, यौन शोषण और पिछड़ेपन का शिकार रही हैं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उन के लिए दलदल का एक और मार्ग ही प्रशस्त किया है.

बराबरी के नाम पर अंधेरे की ओर ले जाने वाला कोई भी फैसला आखिर घातक ही साबित होता है. वैसे इन दिनों मंदिरों, मठों, तीर्थस्थलों, आश्रमों में बाबाओं, गुरुओं, तांत्रिकों द्वारा औरतों के यौन शोषण की खबरें सुर्खियों में हैं. कई बाबा, गुरु जेलों में हैं.

फैसला सुनाने वाली पीठ में शामिल इकलौती महिला जस्टिस इंदु मल्होत्रा महिलाओं के मंदिर प्रवेश से असहमत थीं. जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने चारों जजों से अलग फैसला दिया है लेकिन बहुमत के अभाव में उन का फैसला प्रभावी नहीं हो सका. उन्होंने अपने फैसले में ठीक ही लिखा है,‘‘यह धार्मिक आजादी और समानता के अधिकार के बीच का टकराव है. धर्म की आवश्यक बातें क्या है इसे तय करने का हक अदालत को नहीं, धार्मिक व्यक्ति को है. धर्मनिरपेक्षता का माहौल कायम रखने के लिए कोर्ट को धार्मिक अर्थों से जुड़े मुद्दों को नहीं छोड़ना चाहिए. सती जैसी कुप्रथाओं को छोड़ दें तो यह तय करना कोर्ट का काम नहीं कि कौन से धार्मिक रीतिरिवाज खत्म करने चाहिए.’’

भारतीय नागरिकों के लिए संविधान में उल्लेखित मौलिक कर्तव्यों में वैज्ञानिक विचारों के प्रचारप्रसार, मानवतावाद और जांच तथा सुधार की भावना को स्वयं के अंदर विकसित करने जैसी बातें भी हैं. समाज में फैले अंधविश्वासों के खिलाफ, स्त्रियों के शोषण के अड्डे बने मंदिरों, आश्रमों में जाने न जाने के जांचनेपरखने के  आदेशों की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट से ही की जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट का बराबरी की दिशा में दिया गया यह आदेश स्त्रियों को मंदिर में प्रवेश के लिए जरूर मददगार होगा पर यह उन के लिए प्रगति का नहीं, दलदल का रास्ता है. इस से फायदा पंडों को ज्यादा होगा.

पढ़िए सोहराबुद्दीन शेख फेक एनकाउंटर की असली कहानी, एक गवाह की जुबानी

सोहराबुद्दीन शेख फेक एनकाउंटर मामले में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने अब तक 16 आरोपियों को बरी किया है. बरी किए गए आरोपियों में भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं. इनमें गुजरात पुलिस के पूर्व उपमहानिरीक्षक डीजी वंजारा, राजस्थान पुलिस के पूर्व अधीक्षक दिनेश मीणा और गुजरात पुलिस के एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड के पूर्व अधीक्षक राजकुमार पांडियन का नाम शामिल है. नवंबर 2017 में मामले का ट्रायल शुरू होने के बाद से अब तक 90 गवाह पलट चुके हैं. इस साल 21 सितंबर को कोर्ट ने एक प्रमुख गवाह- रिटायर्ड पुलिस अधिकारी वीएल सोलंकी को गवाही देने के लिए बुलाया है. सोलंकी वह शख्स हैं जिनकी जांच की वजह से उपरोक्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई थी. सोलंकी सोहराबुद्दीन मामले के जांच अधिकारी थे. उन्होंने मामले की शुरुआती जांच की थी जिससे यह बात स्थापित हुई थी कि सोहराबुद्दीन की मौत फेक एनकाउंटर में हुई थी.

सोलंकी की इस जांच के आधार पर गुजरात पुलिस ने मामले में 2007 की जनवरी में पहली चार्जशीट दाखिल की. इसके तीन साल बाद, सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने एक याचिका डाली जिसके बाद सर्वोच्च अदालत ने मामले की जांच को सीबीआई के हवाले कर दिया. रुबाबुद्दीन ने चार्जशीट दाखिल किए जाने के छह दिन बाद अपनी पिटीशन डाली थी. साल 2010 की जुलाई में सीबीआई ने एक चार्जशीट दाखिल की. इसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अलावा उस वक्त के गुजरात के गृहमंत्री और फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर भी आरोप लगाए गए. 2014 की दिसंबर में शाह को भी इस मामले से बरी कर दिया गया.

शाह को बरी करने वाले जज का नाम एमबी गोसावी है. वह मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज तब बने जब इस मामले को पहले से देख रहे जज बीएच लोया की मौत हो गई. गोसावी ने शाह को उसी महीने बरी कर दिया जिस महीने उन्होंने मामले की सुनवाई शुरू की थी.

सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक 22 नवंबर 2005 की रात सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी कौसर बी और उनका साथी तुलसीराम प्रजापति एक लक्जरी बस में हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे. उनके इसी सफर को गुजरात और राजस्थान पुलिस के अधिकारियों ने रोक दिया. तीनों को गुजरात के वलसाड ले जाया गया. प्रजापति को राजस्थान पुलिस उदयपुर ले गई जहां उसे पांच दिनों तक हिरासत में रख गया. सोहराबुद्दीन और कौसर बी को अहमदाबाद के पास दिशा फार्म हाउस में ले जाया गया. 25 नवंबर की रात सोहराबुद्दीन को गोली मार दी गई. अगली सुबह, उनकी पत्नी कौसर बी को भी गोली मार दी गई और उनके शवों को जला दिया गया.

2006 की दिसंबर में प्रजापति को भी मार दिया गया. सोलंकी की जांच से महत्वपूर्ण घटनाओं का पता चला- जैसे, उन्होंने मुख्य गवाहों की पहचान की इनमें बस में सफर कर रहीं शारदा आप्टे भी शामिल थीं जिन्होंने इस बात की पुख्ता जानकारी दी कि सोहराबुद्दीन और कौसर बी उसी बस में सफर कर रहे थे.

इस साल जुलाई में गुजरात पुलिस ने सोलंकी और उनके परिवार को मिली पुलिस सुरक्षा वापस ले ली. इसके बाद इस रिटायर पुलिस अधिकारी ने अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर को अपना डर बताते हुए एक चिट्ठी लिखी जिसमें कहा कि उनकी जान को खतरा है. इस चिट्ठी में उन्हें मिली सुरक्षा वापस देने की अपील की गई थी. इस चिट्ठी को उन्होंने गुजरात पुलिस के डीजी, गुजरात पुलिस के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर जनरल, गुजरात सरकार और सोहराबुद्दीन मामले को देख रहे सीबीआई स्पेशल कोर्ट को भी भेजा.

उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा है, “क्या हमें यह मान लेना चाहिए कि सुरक्षा इसलिए हटाई गई है ताकि मेरे और मेरे परिवार के ऊपर दबाव बने और हम गवाही से पलट जाएं?” जिस दिन सोलंकी को कोर्ट के सामने पेश होना था उस दिन उन्होंने ‘द कैरेवन’ के स्टाफ राइटर सागर से बात की. इस बातचीत के दौरान उन्होंने सोहराबुद्दीन मामले से जुड़ी जांच और उससे सामने आए तथ्यों के बारे में बताया और इसकी वजह से उनके जीवन पर पड़े असर की जानकारी भी दी.

 

सागर: आपने गुजरात पुलिस को एक चिट्ठी लिखी है जिसमें कहा है कि आपकी और आपके परिवार की जान खतरे में है क्योंकि आप सोहराबुद्दीन मामले के मुख्य गवाह हैं. आपके ऊपर किस तरह का दबाव है?

वीएल सोलंकी: पहले तो उन्होंने बिना मांगे पुलिस सुरक्षा दी थी. 18 जुलाई 2018 को उन्होंने ये पुलिस सुरक्षा हटा ली. इसके दो दिनों बाद मैंने सभी एजेंसियों को आवेदन लिखा, जिन्हें आवेदन किया गया उनमें गुजरात के डीजीपी, गुजरात सीआईडी के डीजी, गुजरात गृह विभाग के गृह सचिव, सुप्रीम कोर्ट, गुजरात हाई कोर्ट, सीबीआई के डीजी और मुंबई सेशन कोर्ट के जज शामिल हैं. मेरी आपसे बातचीत तक इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया है. दूसरी बात ये है कि अब मुझे कोर्ट जाने का समन (बुलावा) आया है. मैं इस मामले का मुख्य गवाह हूं. मैंने शुरुआती जांच की है. मेरी शुरुआती जांच के बाद मामले में केस दर्ज हुआ था और ये पुख्ता तौर पर साबित हुआ है कि यह एक फेक एनकाउंटर है. जब जांच चल रही थी उस दौरान मैंने इस मामले के एक महत्वपूर्ण पहलू की जांच की थी. लेकिन अभी तो मैं इस मामले में कोर्ट जाने तक की स्थिति में नहीं हूं क्योंकि मेरी पुलिस सुरक्षा हटा ली गई है. मैं अपनी जिंदगी की कीमत पर माननीय न्यायालय की कार्यवाही में हिस्सा लेने नहीं जा सकता. यही मेरी स्थिति है. और आप लोग [पत्रकार] और वो तमाम लोग जिन्हें इस मामले की सच्चाई पता है, उन्हें पता है कि [इस मामले में शामिल] सारे लोग अपराधी हैं, कभी भी कुछ भी कर सकते हैं.

सागर: आपने अपनी चिट्ठी में सवाल किया है कि क्या पुलिस सुरक्षा इसलिए हटाई गई है ताकि आप डर जाएं. आपको क्या लगता है गुजरात पुलिस किसके इशारों पर काम कर रही है?

वीएलएस: बात ये है कि मैं आपको ये [बातें] नहीं बता सकता. लेकिन आप लोग बहुत अच्छी तरह से जानते हैं. आपको वजह पता है. मैं खुद को खतरे में क्यों डालूं? आप लोग बहुत समझदार हैं और मेरी स्थिति को देखते हुए इसका अंदाजा लगा सकते हैं.

सागर: जब इस मामले की जांच आपके हाथों में थी, क्या कभी अमित शाह का नाम आपकी जांच में आया या क्या आपको कभी इसकी जानकारी मिली कि तब के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी जानकारी थी?

वीएलएस: आप जो बातें जानना चाहते हैं वह जांच से जुड़ी है. मैं इसके बारे में नहीं बता सकता.

सागर: सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर की जड़ एक उगाही करने वाला गिरोह है जिसे पुलिस वालों और अपराधियों के साथ मिलकर नेता चलाते थे. आपकी जांच में भी कोई ऐसी बात निकल कर सामने आई?

वीएलएस: हम इसका कुछ नहीं कर सकते. कर सकते हैं क्या? हां, सोहराबुद्दीन और तुलसीराम प्रजापति दोनों वसूली का काम करते थे. लेकिन मैं नेताओं के बारे में कुछ नहीं कह सकता.

सागर: सीबीआई की चार्जशीट कहती है कि अमित शाह इस रैकेट के मुखिया थे.

वीएलएस: नहीं, मैं ये नहीं कह सकता. आप लोगों को ये बातें पता है. अब इसमें मैं ज्यादा होशियारी दिखाऊं ये ठीक नहीं है. मैं बताना चाहता हूं कि मुझे इस बात का शक है कि मुझे और मेरे परिवार को नुकसान पहुंचाने के लिए कोई षडयंत्र रचा गया है और इसी वजह से मेरी पुलिस सुरक्षा हटाई गई है. यही इकलौता कारण है जिसकी वजह से मैं पुलिस सुरक्षा पर जोर दे रहा हूं. ताकि कल को मुझे कुछ हो जाए तो उन्हें [षडयंत्र रचने वालों को] जिम्मेवार ठहराया जाए.

सागर: क्या आप बता सकते हैं कि आप इस जांच का हिस्सा कैसे बनाए गए और कैसे सोहराबुद्दीन के फेक एनकाउंटर के षडयंत्र को सामने लाए?

वीएलएस: पहले तो यह जांच एक डीएसपी-एसीपी [डिप्टी सुप्रीटेंडेंट असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस] के पास गई. लेकिन उसने इससे मना कर दिया और मामले की जांच में बेपरवाही बरती जिसके बाद मुझसे मामले की विस्तृत जांच करने को कहा गया. तो मेरी जांच के दौरान मैं मध्य प्रदेश गया था और सोहराबुद्दीन के गांव भी गया था. मध्य प्रदेश जाने से पहले मैं हैदराबाद गया था.

10 दिनों तक मैंने इसकी विस्तृत जांच की. मैंने उस ट्रैवल एंजेंसी की बस का पता लगाया जिसमें सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी सफर कर रहे थे. मुझे ट्रैवल एजेंसी के लोगों से पता चला कि टंडोला गांव के पास गुजरात और राजस्थान पुलिस के लोगों ने लक्जरी बस को रोक था. ये गांव मुंबई-हैदराबाद हाइवे पर कर्नाटक के बॉर्डर के पास पड़ता है. इसके बाद मैंने [ट्रैवल एजेंसी से] काफी पूछताछ की जिसमें बस में सफर कर रहे और लोगों का पता लगाना भी शामिल था.

मैंने इस पूछताछ के जरिए आप्टे परिवार का पता और फोन नंबर निकाल लिया. इसके बाद मैं सांगली नाम के शहर गया जहां मैं इस परिवार के घर गया. मैंने उनसे बड़े प्यार से बात की जिसके बाद मैंने उनका बयान रिकॉर्ड कर लिया. अपने बयान में उन्होंने मुझे बताया कि सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर बी साथ सफर कर रहे थे. टंडोल गांव से 10-15 किलोमीटर पहले एक होटल टाइप ढाबा है जिसका नाम- “राव का ढाबा” है, लक्जरी बस इसी ढाबे के पास रात के खाने के लिए रुकी. पास बैठे होने की वजह से आप्टे परिवार ने सोहराबुद्दीन और कौसर बी को भी देखा.

इसके बाद 1-1.30 बजे तक बस ने टंडोला से अपना सफर शुरू किया और दो से तीन किलोमीटर के भीतर गुजरात पुलिस की कार बस के आगे आ गई और इसकी रफ्तार को ब्रेक लगाकर इसे रोक दिया. बस के पीछ भी उन्होंने एक कार खड़ी कर दी. उन्होंने सोहराबुद्दीन को नीचे उतारा. जब सोहराबुद्दीन उतरा तब उसकी पत्नी भी आ गई और कहा, “मेरे शौहर को तुम ले जा रहे हो, मैं भी साथ आती हूं.” वे [पुलिस वाले] दबाव में आ गए और कहा कि यहां कुछ करेंगे तो सब पैसेंजर भी अलर्ट हो जाएंगे. फिर वो सोहराबुद्दीन और कौसर बी दोनों को साथ ले गए.

सागर: क्या तुलसीराम प्रजापति उस समय उनके साथ नहीं थे?

वीएलएस: मुझे नहीं मालूम. दरअसल, तुलसीराम प्रजापति सोहराबुद्दीन की परछाई था. जहां वो [सोहराबुद्दीन] जाता था, वह भी जाता था. वह दोनों हर अपराध को साथ मिलकर अंजाम देते थे. एक तीसरा आदमी भी था. इसकी पहचान पता करने के लिए भी मैंने गहरी जांच-पड़ताल की. उस समय मैंने अपने एडिशनल डायरेक्टर जनरल को एक रिपोर्ट भेजी और कहा, “प्रजापति से पूछताछ करने के लिए मुझे उदयपुर जेल जाने की अनुमति मिल सकती है क्योंकि तुलसीराम प्रजापति इस मामले का सबसे बड़ा गवाह है?.” लेकिन फिर सब हवा में चला गया. जो रिपोर्ट थी वह सब निकल (बर्बाद) गई.

तुलसीराम प्रजापति का भी एनकाउंटर हो गया. दूसरी बड़ी चीज यह है कि मैंने उस जगह का भी पता लगा लिया जहां सोहराबुद्दीन और कौसर बी को अहमदाबाद लाने के बाद रखा गया था. उन्हें दिशा फार्म में रखा गया था. इसके बाद, सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर कर दिया गया. सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर के बाद कौसर बी को गांधीनगर के अरहम फार्म हाउस ले जाया गया. तो ये था जो हुआ.

सागर: क्या आपको लगता है कि आपको प्रमोशन नहीं होने और आपके पुलिस इंसपेक्टर के पद पर ही रिटायर करने की वजह यह रही क्योंकि आपने सोहराबुद्दीन मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की?

वीएलएस: ये एक सच है. आप एक चीज देखिए, जब कभी कोई छोटी सी भी अनुशासनात्मक जांच चल रही होती है या सरकारी मुलाजिमों के खिलाफ कोई शिकायत होती है तो उसके प्रमोशन को हमेशा के लिए लटका कर रखा जाता है. ये सरकारी कामकाज का आम तरीका है. वहीं, एक यह मामला है जहां वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों पर हत्या का आरोप लगा है जिसमें उनके ऊपर आरोपपत्र भी दायर हुआ है- लेकिन उन्हें प्रमोशन दे दिया गया और नौकरी भी वापस मिल गई. यह है हमारा भारत.

सागर: ऐसा क्या हुआ जो आप इस मामले में टिके रहे? क्या आपको किसी का समर्थन हासिल है?

वीएलएस: यह मेरी इकलौती जिम्मेदारी थी. अगर आप अपनी जांच में निष्पक्ष हैं और संविधान की जद में रहकर काम कर रहे है, तो आपके पास ऐसा कोई कारण नहीं जिसकी वजह से आपको डरना चाहिए.

सागर: मैं आपसे एक बार फिर पूछना चाहूंगा कि जब आप इस जांच के नेतृत्व की जिम्मेदार को निभा रहे थे तो आपके ऊपर कोई दबाव था. सीबीआई के सामने तब के एडिशनल डीजीपी जीसी रैगर ने कहा था कि अमित शाह ने 2006 के दिसंबर में गुजरात पुलिस की सीआईडी की पूर्व इंसपेक्टर जनरल गीता जोहरी, डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस पीसी पांडे और रैगर की एक मीटिंग बुलाई थी. रैगर ने कहा था कि शाह ने “हमें झाड़ लगाई क्योंकि तुलसीराम प्रजापति की पूछताछ करके सोलंकी (याने आप) जांच को आगे घसीटना चाहता था जिसकी उसने इजाजत मांगी थी और हम सोलंकी को नहीं संभाल पा रहे थे. उन्होंने (शाह ने) हमें मामला रफा-दफा करने को कहा.” क्या आप हमें बता सकते हैं कि गीता जोहरी ने आपसे क्या कहा था?

वीएलएस: सब सच है. पेपर पर जो कुछ है वह सब सच है. मैं कहना चाहूंगा कि यह बातें सबको पता हैं.

सागर: फिर आप इस जांच को कैसे अंजाम दे पाए?

वीएलएस: आपको बहुत अच्छे से पता है कि यह वैसी परिस्थितियों में संभव नहीं. यह सब पहले ही अखबारों में भी आ गया था. फिर से इस पर कुछ कहने का कोई मतलब नहीं. ये कहानी सबको पता है.

सागर: अभी जो मामला कोर्ट में चल रहा है उससे आपको क्या उम्मीद है?

वीएलएस: भारत में न्याय नाम की कोई चीज नहीं है.

हैंग हो रहा है आपका भी स्मार्टफोन, तुरंत करें ये 5 काम

क्या आपके फोन की स्क्रीन बार-बार हैंग हो रही है या फिर आपका फोन आपके टच कमांड को रीड नहीं कर पा रहा है? अगर आपका जवाब हां, तो हमारी ये खबर आपके काम आ सकती है. दरअसल कई बार स्क्रीन के हैंग होने पर कई यूजर्स परेशान होने लगते हैं और इसे सर्विस सेंटर पर ले जाते हैं. लेकिन कई मामलों में आपका स्कीन खराब नहीं होता है बल्कि सेटिंग्स या फिर दूसरी अनदेखियों की वजह से इसमें परेशानी आने लगती है. आज हम आपको बताएंगे कि वो कौन से 5 काम हैं जिन्हें फोन को सर्विस सेंटर पर ले जाने से पहले आपको अपने फोन में चेक कर लेना चाहिए.

स्क्रीन को ड्राई कपड़े से करें साफ

कई बार यूजर अपने फोन की स्क्रीन को पानी या तेल के हाथ से इस्तेमाल करने लगते हैं. इससे उनके फोन की स्क्रीन हैंग होने लगती है (कई मौकों पर काम करना भी बंद कर देती है). ऐसे में फोन की स्क्रीन को एक साफ और सूखे कपड़े से साफ करें. अच्छा होगा कि आप इस दौरान अपने फोन की स्क्रीन या फोन को औफ कर दें. स्क्रीन को साफ करने के 90 सेकेंड्स के बाद फोन को औन करें. इससे आपके फोन की स्क्रीन पहले की तरह काम करने लगेगी.

स्क्रीन गार्ड बदलें

कई बार स्क्रीन गार्ड की वजह से फोन की स्क्रीन आपके टच को रीड करना बंद कर देती है. इसका एक बड़ा कारण फोन की स्क्रीन गार्ड की खराब क्वालिटी होती है. इसके अलावा स्क्रीन गार्ड के ज्यादा पुराने होने पर भी आपके फोन की स्क्रीन आपके टच कमांड को रीड नहीं कर पाती है. ऐसे में अच्छी क्वालिटी वाला स्क्रीन गार्ड इस्तेमाल करें.

ऐप्स को करें डिलीट

फोन में कई बार हम ऐसे ऐप्स को डाउनलोड कर लेते हैं जिनसे हमारा फोन हैंग होने लगता है. इन ऐप्स में बग या वायरस शामिल होते हैं जिससे आपके फोन के कुछ फंक्शन काम करना बंद कर देते हैं. इसलिए अगर आपके फोन में भी ऐसी परेशानी आ रही है, तो फोन के ऐप्स को डिलीट कर दें. इन मामलों में एंटी वायरस भी आपके काम आ सकता है.

री-स्टार्ट

जब भी फोन या इसकी स्क्रीन हैंग होती है यूजर सबसे पहले अपने फोन को री-स्टार्ट. यह एक सही तरीका है किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को सही करने के लिए. अगर आपकी स्क्रीन भी हैंग हो रही है या फिर काम नहीं कर रही है, तो अपने फोन को तुरंत री-स्टार्ट करें.

फैक्ट्री रीसेट

अगर आपका फोन या इसकी स्क्रीन हैंग हो रही है, तो फैक्ट्री रीसेट के जरिए आप अपने फोन को ठीक कर सकते हैं. फैक्ट्री रीसेट से आपका फोन डिफाल्ट सेटिंग्स में आ जाता है. अगर आसान भाषा में कहें तो जैसे आपने फोन को खरीदा था फोन फैक्ट्री रीसेट के बाद उसी मोड में मिलता है आपको. फोन को रिकव करने के लिए लिए आपको Power Off बटन के साथ वौल्यूम बढ़ाने वाले बटन को दबाना होगा. इसके बाद एंड्राइड का विकल्प आने पर पावर को छोड़ दे. अब वौल्यूम बटन की मदद से फैक्ट्री रीसेट के विकल्प को चुनें और पावर बटन को प्रेस करें.

कार खरीदते समय भूलकर भी न करें ये गलती, हो सकता है भारी नुकसान

कार की खरीदारी एक अहम फैसला है और सभी खरीदारों के लिए यह उनके जीवन में मील का पत्थर होता है. कई ग्राहक कार खरीदने से पहले पूरी तरह से शोध करते हैं जो सभी जरूरतों पर खरा उतरे साथ ही उसकी लागत भी कम हो. कई बार ग्राहक वह बीमा खरीद लेता है जो महंगा होता है और उसकी जरूरतों के अनुरूप भी नहीं होता है. आइये जानें कि क्या ना करें कार खरीदते समय.

बीमा लेने से पहले लगांए पता

कार खरीदते समय यह जरूर ध्यान रखें कि बीमा विकल्पों का औनलाइन पता लगाएं और ज्यादा से ज्यादा बचत करें. यहां तक कि आप पारंपरिक तरीके से बीमा खरीद रहे हैं, फिर भी एक बार औनलाइन सर्च जरूर कर लें, ताकि आपको पता चले कि बीमा की सही कीमत कितनी होनी चाहिए. साथ ही आप कई सारे गैर-जरूरी एडऔन को भी हटा सकेंगे और पैसों की बचत कर सकेंगे.

कार की कीमत के हिसाब से तय करें बीमा राशि

कार का बीमा डीलरशिप पर भी खरीदा जा सकता है और औनलाइन भी खरीदा जा सकता है. लेकिन लोग कार के साथ ही डीलरशिप पर इसलिए खरीदना पसंद करते हैं, क्योंकि यह झंझटमुक्त होता है. हालांकि यह बात थोड़ी सच भी है. लेकिन आपको पता होना चाहिए कि अगर आप डीलरशिप पर बीमा खरीदते हैं तो उसकी कीमत कहीं अधिक चुकाते हैं. कई मामलों में तो यह 5,000 से लेकर 35,000 रुपये तक ज्यादा होता है, जो कि कार की कीमत के हिसाब से तय होता है.”

नियमों का करें पालन

कई डीलर आपको उन्हीं से बीमा खरीदने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. वे बताते हैं कि अगर आप उनसे बीमा नहीं खरीदेंगे तो आपको कैशलेस गैराज की सुविधा नहीं मिलेगी या फिर वे कहते हैं कि कार की कीमत में ही बीमा की रकम भी शामिल है और यह आपको कार के साथ मुफ्त दी जा रही है. जबकि यह सच नहीं है. भारतीय बीमा नियामक प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने इस संबंध में नियम बनाए हैं और कोई भी डीलर आपको कैशलेस सुविधा देने से इनकार नहीं कर सकता, अगर आपके बीमाधारक ने उससे इस संबंध में समझौता किया हो. यहां तक कि कार की वारंटी भी बीमा कंपनी द्वारा की जाती है और डीलर की इसमें कोई भूमिका नहीं होती है कि वारंटी में क्या कवर होगा या क्या कवर नहीं होगा.

ऐड औन पैक को लेकर रहे सावधान

कई बार ऐसा देखा गया है कि डीलरशिप से बीमा करवाने पर बिना जरूरत वाले एड औन पैकेज भी ग्राहकों को थमा दिए जाते हैं, जबकि उसकी जरूरत और प्रयोग अलग होती है. उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति अगर बाढ़ प्रभावित/संभावित इलाके में नहीं रहता है तो उसे बीमा में इंजन प्रोटेक्टर एड औन लेने की जरूरत नहीं है. इसी प्रकार से की और लौक रिप्लेसमेंट को बीमा में शामिल करने पर उसकी लागत बढ़ जाती है, जबकि कई ग्राहक इसे कवर नहीं करवाना भी पसंद करेंगे. डीलरशिप पर इस तरह का विकल्प ग्राहकों को नहीं मिल पाता है.

टी-20 महिला विश्व कप : टीम इंडिया की घोषणा, इन्हें मिली जगह

वेस्टइंडीज में होने वाले आईसीसी महिला वर्ल्ड टी-20 टूर्नामेंट के लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम की घोषणा की गई है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए इसकी जानकारी दी. अखिल भारतीय महिला चयन समिति ने 15 सदस्यीय टीम की घोषणा की है, जिसका नेतृत्व हरमनप्रीत कौर करेंगी और स्मृति मंधाना उनके साथ उप-कप्तान के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगी. आईसीसी महिला वर्ल्ड टी-20 टूर्नामेंट के छठे संस्करण का आयोजन नौ से 24 नवंबर तक वेस्टइंडीज में होगा. इसके लिए भारतीय टीम को ग्रुप-बी में औस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान और आयरलैंड के साथ शामिल किया गया है. भारतीय टीम इस टूर्नामेंट का आगाज गयाना में न्यूजीलैंड के खिलाफ नौ नंवबर को खेले जाने वाले मैच से करेगी. इसके बाद उसका सामना 11 नवंबर को पाकिस्तान, 15 नवंबर को आयरलैंड और 17 नवंबर को औस्ट्रेलिया से होगा.

35 साल की झूलन गोस्वामी की कमी टीम को खल सकती है. झूलन ने 68 टी-20 मैचों में 56 विकेट हासिल किए हैं, जिनमें 2012 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच विकेट भी शामिल हैं जो उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन है. उन्होंने 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 में पदार्पण किया था और इस वर्ष जून में बांग्लादेश के खिलाफ आखिरी टी-20 मैच खेला था. इस मैच में भारत को तीन विकेट से हार का सामना करना पड़ा था. उन्होंने 169 मैचों में 203 विकेट हासिल किए हैं. इसके अलावा उन्होंने 10 टेस्ट मैचों में 40 विकेट चटकाए हैं.

भारतीय महिला टीम : हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना (उप-कप्तान), मिताली राज, जेमिमाह रोड्रिगेज, वेदा कृष्णमूर्ति, दीप्ति शर्मा, तान्या भाटिया (विकेटकीपर), पूनम यादव, राधा यादव, अनुजा पाटिल, एकता बिष्ट, डी हेमलता, मानसी जोशी, पूजा वास्त्राकार और अरुणदति रेड्डी.

तनुश्री का एक और खुलासा, फिल्ममेकर ने कहा था कपड़े उतारकर नाचो

अदाकारा तनुश्री दत्ता पिछले कुछ दिनों से काफी सुर्खियों में हैं. उन्होंने #MeToo कैंपेन के तहत बौलीवुड के कई दिग्गज सितारों जैसे नाना पाटेकर, कोरियोग्राफर गणेश आचार्य, प्रोड्यूसर समी सिद्दीकी और डायरेक्टर राकेश सारंग पर यौन शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया है. तनुश्री का कहना है कि उनके साथ ये सब साल 2008 में फिल्म ‘हौर्न ओके प्लीज’ की शूटिंग के दौरान हुआ था.

पूर्व मिस इंडिया रह चुकीं तनुश्री दत्ता ने बताया कि नाना ने सिर्फ उनके साथ ही नहीं बल्कि कई हीरोइनों का शोषण किया है लेकिन आज तक किसी ने बोलने की हिम्मत नहीं जुटाई. अब तनुश्री ने एक और सनसनीखेज खुलासा किया है.एक समाचार पत्र को दिए इंटरव्यू में तनुश्री ने डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री पर भी शोषण का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा, ‘विवेक मुझसे कहते हैं कि अपने कपड़े उतारो फिर इरफान खान और सुनील शेट्टी के सामने डांस करो.’

‘यह घटना साल 2005 की है. जब मैं फिल्म ‘चौकलेट’ की शूटिंग कर रही थी. इस सीन में सिर्फ दोनों एक्टर्स का क्लोजअप शाट लेना था. वो सीन मेरा था ही नहीं. फिर भी डायरेक्टर ने मुझसे कहा कि कपड़े उतारो और उनके सामने नाचो. तब इरफान खान और सुनील शेट्टी ने विवेक को टोका.’

‘इरफान और सुनील ने कहा कि हमें इशारों की जरूरत नहीं है. हमें पता है कि कैसे करना है. तनुश्री को डांस करने के लिए मत कहो. मैं इरफान खान की बहुत इज्जत करती हूं. ये उनका शाट था और उन्होंने मेरे लिए स्टैंड लिया. मेरे कपड़े उतारकर डांस करने से उनके फेशियल एक्सप्रेशन का कोई लेना-देना नहीं था. फिर भी डायरेक्टर ने कहा कि जाओ जाके कपड़े उतारकर नाचो. मैं हैरान थी.’

इरफान खान भी विवेक की बात सुनकर डर गए. उन्होंने विवेक के साथ पहले भी काम किया था. उन्होंने विवेक से कहा, ‘ये आप क्या कह रहे हैं. मैं अपना क्लोजअप दे सकता हूं. मुझे एक्टिंग आती है. सुनील शेट्टी ने भी अपना पक्ष रखा. उन्होंने इस बात का विरोध किया. वो बोले कि मैं आऊं क्या इशारे करने के लिए.’

‘इरफान खान और सुनील शेट्टी इंडस्ट्री के बेहद अच्छे लोगों में से एक हैं. सुनील ने विवेक को डांट लगाई.’ बता दें कि तनुश्री ने नाना पाटेकर पर जो आरोप लगाए हैं उस पर उनका बयान आया है. नाना ने कहा, ‘मैं अब इस पूरे मुद्दे पर लीगल एक्शन लूंगा.’ नाना पाटेकर फिलहाल जैसलमेर में हैं और ‘हाउसफुल 4’ की शूटिंग कर रहे हैं.

विलेज रौक स्टार्स : मुसीबतों से लड़ने के जज्बे की जीवंत दास्तान…

भारतीय प्रविष्टि के रूप में ‘‘विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म’’ खंड में ‘‘औस्कर अवार्ड’’ के लिए चुनी गयी रीमा दास की मूलतः आसामी भाषा की फिल्म ‘‘विलेज रौक स्टार्स’’ 80 अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में डंका बजाने व तीन अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने के बाद भारतीय सिनेमाघरों में अंग्रेजी सब टाइटल के साथ प्रदर्शित हुई है.

आशाओं, इच्छाओं व जिंदगी के सपनों को पूरा करने के लिए निडरता के साथ गरीबी व प्राकृतिक सहित हर तरह की कठिनाइयों का सामना करते हुए जिंदगी जीने की अद्भुत दास्तान है फिल्म ‘‘विलेज रौक स्टार्स’’. कई तरह की प्राकृतिक आपादाओं का सामना करने वाले आसाम के गांव के बच्चों की जिंदगी की छोटी छोटी खुशियों की मार्मिक दास्तान है रीमा दास की फिल्म ‘‘विलेज रौक स्टार्स’’.

फिल्म की कहानी आसाम के छायागांव के एक गरीब परिवार की दस वर्षीय बालिका धुनू (भनिता दास) के रौक स्टार बनने की कथा है. जो अपना म्यूजिक बैंड बनाने का सपना देखती है. धुनू छायागांव में अपनी विधवा मां (बसंती दास) और बड़े भाई (मनबेंद्र दास) के साथ रहती हैं. धुनू को पेड़ पर चढ़ना, नदी तालाब में स्नान करना, लड़कों के साथ खेलना व पढ़ाई करना पसंद है. वह एक ऐसी लड़की है जो सब कुछ करती है. उसकी सबसे प्यारी सहेली मुनू नामक बकरी है. वह घर के कामों में अपनी विधवा मां का हाथ बंटाती हैं. एक दिन वह कुछ बच्चों को रौक बैंड बनाकर संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत करते देखती है. तो वह सोचती है कि मैं भी अपना रौक बैड बनाउंगी. फिर वह प्लायवुड का गिटार बनाकर गाना गाना शुरू करती हैं. पर उसका सपना है कि एक दिन उसके पास अपना गिटार हो. एक दिन गांव के एक बुजुर्ग की सलाह पर अपने खेत की सब्जी, पेड़ के कुछ फल आदि तोड़कर उन्हें बेचकर पैसा इकट्ठा करना शुरू करती है. वह अपनी बचत के रुपए अपनी मां व भाई से छिपाकर घर की छत को सहारा देने वाले बाबू/बांस में जगह बनाकर करती है. इस तरह नब्बे रुपए उसने जमा कर लिए हैं. दुकानदार ने गिटार की कीमत 150 रुपए बतायी है. पर तभी गांव में बाढ़ आ जाती है. घर के अंदर पानी भर जाता है. नाव के सहारे दूसरे परिवारों की तरह उसका परिवार भी दूसरी जगह रहने चला जाता है. जब बरसात खत्म होती है, तो वह वापस मां व भाई के साथ अपने घर आती है. इसी बीच उनकी खेती की फसल बर्बाद हो गयी है. मुनू नामक बकरी भी खो चुकी है. अपनी मां को दुःखी व परेशान देखकर धुनू अपने छिपाए हुए नब्बे रुपए निकालकर मां को दे देती है. कई दूसरी प्राकृतिक आपदाओं व अन्य मुश्किलों का सामना करते हुए वह अपने जीवन में खुशियां तलाशती रहती है. पर एक दिन उसकी मां उसके लिए नया गिटार खरीदकर ले आती है.

धीमी गति के बावजूद आपकी कल्पनाओं को बांधती है. तेज गति से भागती फिल्म पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म सब्र का इम्तहान हो सकती है. मगर रीमा दास ने लेखक व निर्देशक के तौर पर आसाम के निवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी, सभ्यता, रीति रिवाज व हर किरदार को बहुत ही बेहतरीन तरीके से उकेरा है. भागती फिल्म के साथ दर्शक भी आगे बढ़ता रहता है. रीमा दास ने बड़ी खूबसूरती से गरीबी व दुर्भाग्य में भी परिश्रम के बल पर आगे बढ़ने का मंत्र दिया है. यह रीमा दास के लेखन व निर्देशन की ही खूबसूरती है कि धुनू के दर्द व खुशी के साथ ही दर्शक भी खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता है. रीमा दास ने आधुनिकता के इस युग में भारतीय गांवों की तस्वीर को बिना लाग लपेट के वास्तविकता के धरातल पर सेल्यूलाइड के परदे पर पेश किया है.

यूं तो आसाम में लड़कियों की स्थिति अच्छी नही है. आसाम में भी लड़के व लड़की में फर्क किया जाता है. मगर रीमा दास ने अपनी इस फिल्म में लैंगिक समानता को कहानी में बड़ी खूबसूरती व सादगी से बुना है. धुनू की मां उसकी परवरिश लड़कों की तरह करती है. खुद उसे नदी में तैराकी करने से लेकर पेड़ों पर चढ़ने के लिए न सिर्फ प्रेरित करती है, बल्कि‘लड़की की तरह’रहने की नसीहत देने वाले समाज से धुनू के लिए लड़ती भी है. धुनू के यौवन/सयानपना की दहलीज पर कदम रखने पर होने वाले रीति रिवाज का भी खूबसूरत चित्रण किया है.

रीमा दास बधाई की पात्र हैं कि वह लेखन, निर्देशन, निर्माण के साथ साथ कैमरामैन की जिम्मेदारी को अकेले निभाने में सफल रही हैं.

जहां तक अभिनय का सवाल है तो बाल कलाकार भनिता दास की यह पहली फिल्म होते हुए भी उसने बहुत ही वास्तविक और बेहतरीन अभिनय किया है, तभी तो उसे इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है. धुनू की मां के किरदार में बसंती दास का अभिनय काफी प्रभावशाली है. अन्य कलाकारों का अभिनय भी अच्छा है.

एक घंटे 27 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘विलेज रौक स्टार्स’ का निर्माण रीमा दास व जया दास ने ‘फ्लाइंग रीवर फिल्मस’’ के बैनर तले किया है. फिल्म की लेखक, एडीटर, निर्देशक व कैमरामैन रीमा दास हैं. फिल्म के कलाकार हैं- भनिता दास, मनबेंद्र दास, बसंती दास व अन्य.

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