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5 स्टार होटल में पिस्टल तानकर बोला नेता का बेटा, जानता नहीं लखनऊ से हूं

दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में बीएसपी के पूर्व सांसद के बेटे की दबंगई का वीडियो मंगलवार को वायरल हुआ तो हंगामा मच गया. लखनऊ के रहने वाले आशीष पांडेयवीडियो में पिस्टल लहराते हुए एक कपल को धमकाते नजर आ रहे हैं. आशीष का जिस युवक से झगड़ा हुआ, वह दिल्ली के पूर्व कांग्रेसी विधायक करन सिंह के बेटे गौरव हैं. मामले के तूल पकड़ने पर पुलिस ने केस दर्ज करके आशीष की गिरफ्तारी के लिए लखनऊ समेत कई जगह छापे मारे. उन्हें विदेश भागने से रोकने के लिए इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर लुकआउट सर्कुलर भी जारी कर दिया गया है.

वारदात साउथ-वेस्ट दिल्ली के आरके पुरम इलाके में 13-14 अक्टूबर को तड़के करीब 3:40 बजे हयात रीजेंसी के पोर्च में हुई. डीसीपी देवेंद्र आर्य ने बताया कि अभी तक की जांच से पता लगा है कि आशीष अपनी तीन महिला दोस्तों के साथ होटल में आए थे. बताते हैं कि इन युवतियों में एक दुबई की, एक उज्बेकिस्तान की और एक रूस की थी. यहां इन्होंने पार्टी की, उसी दौरान एक दूसरे ग्रुप से इनकी कहासुनी हो गई. सिक्युरिटी स्टाफ ने पुलिस को बताया कि पोर्च में झगड़ा हुआ तो आशीष ने बीएमडब्लू कार से पिस्टल निकालकर लहराते हुए कपल को गालियां दीं, डराने की कोशिश की. उनके एक साथी ने उन्हें काबू किया और कार में लेकर गए.

लेडीज टॉयलेट के अंदर से शुरू हुआ था दोनों में झगड़ा

आशीष और गौरव के बीच झगड़ा लेडीज टॉयलेट से शुरू हुआ था, ऐसा बताया जा रहा है. गौरव की दोस्त तबीयत खराब होने पर टॉयलेट गई थी. गौरव मदद करने अंदर चले गए तो आशीष की तीन महिला दोस्तों ने आपत्ति की. शोरगुल सुन बाहर खड़े आशीष अंदर गए तो गौरव से बहस हो गई. बाद में पोर्च में आकर आशीष ने कार से पिस्टल निकालकर गौरव को धमकाया. इसका विडियो आशीष की गाड़ी में बैठी एक युवती ने बना लिया, जो वायरल हो गया.

राजनीतिक दलों ने बनाया मुद्दा, छिड़ी जुबानी जंग

इस घटना के बाद आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और जवाब मांगा. कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने भी कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि मामले की उचित जांच की जानी चाहिए. इसके बाद गृह राज्यमंत्री किरण रिजीजू ने ट्वीट करके कहा कि इस घटना पर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. सख्त और उचित कार्रवाई की जाएगी.

बाहुबली परिवार और हथियारों का शौक

दबंगई के आरोपी आशीष पांडेय के पिता राकेश पांडेय बीएसपी से सांसद रहे हैं. उनके भाई ऋतेश पांडेय यूपी से BSP विधायक हैं.

आशीष पूर्व बाहुबली विधायक पवन पांडेय के भतीजे हैं. दूसरे चाचा कृष्ण कुमार पांडेय सुल्तानपुर के इसौली से बीएसपी से चुनाव लड़ चुके है.

पांडेय भाइयों का यूपी के कई जिलों में रियल स्टेट, शराब और खनन का कारोबार है. आशीष को लग्जरी गाड़ियों और हथियारों का शौक रहा है.

इनके दोनों चाचा का आंबेडकर जिले में लंबा आपराधिक इतिहास है. हालांकि आशीष के परिवार पर कोई आपराधिक केस नहीं है.

हथियार लेकर लग्जरी गाड़ियां दौड़ाने का शौक रहा है आशीष को

लग्जरी गाड़ियों से हथियार लेकर चलना आशीष का मुख्य शौक रहा है. बताया जाता है कि कुछ दिनों पहले लखनऊ में देर रात पार्टी से लौट रहे आशीष ने हाई स्पीड गाड़ी दौड़ाई, लेकिन वह संभाल नहीं सका और डिवाइडर से टकरा कर गाड़ी का एक्सिडेंट हो गया था. हालांकि उसे मामूली चोटें आईं.

आशीष पांडेय के परिवार पर कोई आपराधिक केस नहीं है, लेकिन दोनों चाचाओं पर दर्जनों आपराधिक केस दर्ज हैं. पांडेय भाइयों का यूपी के कई जिलों में रियल स्टेट, शराब और खनन का कारोबार है. देहरादून से शुरुआती पढ़ाई के बाद आशीष विदेश पढ़ने चला गया. पढ़ाई खत्म करने के बाद बिजनेस की तरफ झुकाव देखकर आशीष के पिता राकेश पांडेय ने शहर के फैज़ाबाद रोड पर फैक्ट्री लगवा दी, लेकिन वह नहीं चली. इसके बाद आशीष ने ठेकेदारी शुरू कर दी और लखनऊ शिफ्ट हो गया. यहां रियल स्टेट और शराब के साथ खनन का काम शुरू कर दिया. फिर उसने दोनों हाथों से दौलत बटोरी. स्थानीय लोगों के मुताबिक, आशीष आंबेडकर नगर भाई व पिता के चुनाव लड़ने पर या फिर किसी पारिवारिक कार्यक्रम में ही आते थे.

आशीष के पैतृक आवास महमदपुर व उसके शहर के रघुराजीपुरम में सन्नाटा पसरा रहा. कोई भी घटना के बारे में कुछ बोलने को तैयार नहीं था. आशीष के भाई जलालपुर से बीएसपी विधायक व उनके पिता पूर्व एमपी राकेश पांडेय देर शाम तक मीडिया के सामने नहीं आए.

पिता एमपी थे, भाई है बीएसपी से विधायक

आशीष उर्फ सुड्डू पांडेय का परिवार राजनीतिक रसूखों वाला है. आशीष के पिता राकेश पांडेय जलालपुर से पहली बार सपा से विधायक चुने गए. लेकिन बाद में उन्होंने बीएसपी का दामन थाम लिया और बीएसपी से अकबरपुर लोकसभा से एमपी बने. राजनीतिक रसूख हासिल करने के बाद राकेश पांडेय ने बड़े बेटे रितेश पांडेय को राजनीति में उतारा और 2017 के विधानसभा चुनाव में जलालपुर सीट से बीएसपी से विधायक बनवा दिया.

रियल स्टेट, शराब और खनन का कारोबार

आशीष और उसके परिवार का बिजनेस में जिले में काफी नाम है. यूपी के कई जिलों में इनके शराब, रियल स्टेट और खनन का काम है. बताया जाता है कि बड़े कामों के अलावा इनका परिवार पीडब्ल्यूडी से लेकर कई अन्य कामों को सूर्या कंस्ट्रक्शन के नाम से करता है.

दोनों चाचाओं का है आपराधिक इतिहास

सूर्या कंस्ट्रक्शन फर्म से ठेकेदारी करने वाले आशीष के दोनों चाचाओं का आपराधिक इतिहास है. पवन पांडेय की गिनती बाहुबली नेताओं में की जाती है, कई आपराधिक केस भी दर्ज हैं. दूसरे चाचा कृष्ण कुमार पांडेय इसौली से बीएसपी से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए. इन पर भी आधा दर्जन से अधिक केस दर्ज हैं. आशीष के पास एक लाइसेंसी पिस्टल और एक बंदूक है.

BSP Leader's Son Waves Gun Abuses Woman At 5 star hotel

होटल स्टाफ ने सहमे गौरव और उनकी दोस्त की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया

धमकी देने वाला विडियो अगर वायरल ना होता तो शायद इस मामले को दबा दिया जाता. क्योंकि एफआईआर में दर्ज होटल के असिस्टेंट सिक्यॉरिटी मैनेजर ने जो बयान दिया है, उसमें उसने साफ लिखा है कि हमें इस घटना के बारे में पूरी जानकारी थी, लेकिन हमने इसके बारे में पुलिस या अन्य किसी को नहीं बताया. इसका विडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो आरके पुरम थाना पुलिस ने होटल जाकर पूछताछ की. फिर होटल के असिस्टेंट सिक्यॉरिटी मैनेजर की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई.

मामले का पर्दाफाश होने के बाद जब मीडिया ने इस होटल की विजिट की तो यहां सबसे पहले मीडिया के जाने पर रोक लगाई गई. होटल के सिक्यॉरिटी स्टाफ से जब इस बारे में जानकारी लेनी चाही तो अधिकतर ने बताया कि वह तो उस दिन छुट्टी पर थे, किसी ने कहा कि उसकी ड्यूटी तो दिन में रहती है तो किसी ने कहा कि हमने तो ऐसी कोई घटना नहीं सुनी.

लेकिन एक स्टाफ ने बताया कि भाईसाहब, यह फाइव स्टार होटल है. यहां तो बड़े लोग ही आते हैं. होटलों में इस तरह की घटनाएं होना एकदम आम बात है. होटल वाले कभी इस तरह की छोटी-मोटी घटनाओं की शिकायतें नहीं करते, क्योंकि उन्हें अपने कस्टमर्स की प्राइवेसी और होटल की इमेज भी देखनी होती है. अगर आए दिन किसी होटल का मामला सुर्खियों में रहने लगे तो आप ही बताओ कि क्या आप भी वहां जाना पसंद करेंगे.

दूसरी ओर, होटल की ओर से स्पष्टीकरण देकर कहा गया है कि वह देश और दुनिया में अपने होटलों के कस्टमर्स की सुरक्षा को लेकर बहुत गंभीर रहता है. इस मामले में भी वे पुलिस को पूरा सहयोग करेंगे. लेकिन वायरल विडियो में यह साफ दिखाई दे रहा है कि किस तरह से एक शख्स हाथ में पिस्टल लेकर एक महिला-पुरुष को धमका रहा है और होटल का सिक्यॉरिटी स्टाफ कुछ नहीं कर रहा है.

पहले यहां एक महिला सिक्यॉरिटी गार्ड समेत चार सुरक्षाकर्मी नजर आते हैं, फिर इनकी संख्या बढ़कर पांच हो जाती है. लेकिन इनमें से कोई भी सुरक्षाकर्मी हाथ में पिस्टल लिए आशीष पांडेय को समझाने या रोकने की कोशिश करता नजर नहीं आ रहा है. यहां तक की एक सिक्यॉरिटी गार्ड तो मौके से ही साइड होता नजर आ रहा है. ऐसे में आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां कस्टमर्स की सुरक्षा किस स्तर की है.

होटल के अंदर जा रही गाड़ियों की जांच भी हमने देखी. यह केवल लीपापोती ही नजर आई. होटल के अंदर जाने वाली गाड़ियों की डिकी को खुलवाकर देखा जा रहा था. लेकिन गाड़ियों के अंदर क्या रखा था क्या नहीं, इसकी कोई जांच नहीं कर रहा था. जांच करने वाले कार के नीचे कुछ संदिग्ध चीज ना लगी हो, इसकी छड़ी लगे शीशे से जांच करते हैं. लेकिन यह भी बस दिखावा मात्र ही लग रहा था. हां, मीडिया को अंदर जाने से जरूर रोका जा रहा था.

टौयलेट से पोर्च तक की कहानी

फाइव स्टार होटल हयात रीजेंसी के पोर्च में आशीष पांडेय द्वारा कार से पिस्टल निकालकर एक आदमी और उनकी महिला दोस्त को डराने की शुरुआत असल में होटल के अंदर के एक लेडीज बाथरूम से हुई बताई गई है. वायरल विडियो में आशीष जिस लड़के को हाथ में पिस्टल लेकर डरा रहा है, असल में उनकी महिला दोस्त की होटल के अंदर पार्टी के दौरान अचानक तबीयत खराब हो गई थी. इस वजह से वह बाथरूम में गईं. उनके पीछे-पीछे गौरव भी गया, लेकिन वह लेडीज बाथरूम के बाहर ही खड़ा हो गया. लेकिन जब अंदर से उनकी महिला दोस्त के उलटी करने की जोर-जोर की आवाजें बाहर आ रहीं थीं, तब वह उनकी मदद करने के लिए लेडीज बाथरूम के अंदर चले गए.

बताया जाता है कि इसी दौरान आरोपी आशीष की तीन महिला दोस्त उसी लेडीज बाथरूम में आईं. वहां उन्होंने लेडीज बाथरूम में गौरव को देखा तो सब हक्की-बक्की रह गईं. तीनों महिलाओं और गौरव के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जिसकी तेज आवाज बाथरूम के बाहर तक भी आ रही थी. उस दौरान लेडीज बाथरूम के बाहर आशीष पांडेय भी खड़ा था. उसने अपनी विदेशी मेहमान महिला दोस्तों के साथ बदतमीजी होने की आवाज सुनी तो वह भी लेडीज बाथरूम के अंदर चला गया. पता लगा है कि वहां दोनों ग्रुप में तीखी बहस हुई. इसके बाद किसी तरह से मामला शांत हुआ और आशीष अपनी तीनों विदेशी महिला दोस्तों के साथ होटल के बाहर पोर्च में आ गया. यहां आशीष ने होटल की पार्किंग में खड़ी अपनी बीएमडब्ल्यू कार को मंगाया. पुलिस का कहना है कि कार के अंदर उसकी पिस्टल रखी थी.

इसी दौरान गौरव भी अपनी महिला दोस्त के साथ होटल के बाहर पोर्च में आ गया. उन्हें देखते ही आशीष भड़क उठा और उसने अपनी कार के अंदर रखी पिस्टल निकाल ली. इसके बाद वह एक हाथ में पिस्टल लेकर गाड़ी से उतरकर गौरव को धमकाने जा पहुंचा. वहां गौरव के साथ उनकी जो महिला दोस्त थी, उन्होंने आशीष को गौरव के साथ बदतमीजी करने से रोका और आशीष को धक्का देकर सीढ़ियों से नीचे उतरने पर मजबूर भी किया. इसी दौरान इनका साहिल नाम का दोस्त वहां आया और उसने मामले को शांत करते हुए आशीष को समझाया और उसे गाड़ी में बैठकर वहां से चले जाने की रिक्वेस्ट की. बताया जाता है कि गौरव और आशीष को इनके दोस्तों के साथ पार्टी में साहिल ने बुलाया था. साहिल ने यहां एक पार्टी ऑर्गनाइज की थी.

जब यहां से आशीष चला गया, तब फिर से गौरव अपनी महिला दोस्त को लेकर होटल के अंदर गए और यहां कैफे रेस्तरां में डिनर करने के बाद अपने-अपने घर गए. बताया जाता है कि आशीष की तीन विदेशी महिला दोस्तों में से एक दुबई की, एक उज्बेकिस्तान की और एक रूस की थीं. इनमें से दो काफी समय से दिल्ली में ही रह रही हैं. जांच में पता लगा है कि सोशल मीडिया पर जो विडियो वायरल हुआ है, असल में वह आशीष की एक महिला दोस्त ने ही बनाया था. जो उसकी गाड़ी में पीछे वाली सीट पर लेफ्ट साइड में बैठी थीं. यह विडियो कैसे वायरल हुआ, इसकी भी जांच की जा रही है. बताया जाता है कि आशीष के इस तरह से पिस्टल दिखाने से होटल में आए कुछ अन्य कस्टमर्स भी दहशत में आ गए थे.

होटल के रैंप पर क्या हुआ…

आशीष : गन लेकर लड़का-लड़की के पास जाते हैं…बताऊं तेरे को.

आशीष की दोस्त : F***…लड़की को गालियां देती हैं.

आशीष का दोस्त (साहिल) : (बीचबचाव करते हुए)..भाई चल.

आशीष : अपनी मां की कसम खाकर बोल रहा हूं…मिलेगा तो बताऊंगा.

आशीष : लखनऊ से हूं…************ क्रांति लिख दूंगा.

आशीष के दोस्त (कार में) : गालियां..भाई गाड़ी बढ़ा यहां से निकलो.

आशीष : तू ******** कल मिल मेरे को..तेरे को बताता हूं.

आशीष की दोस्त : F***…ट्रांसेक्शुअल (लड़के को बोलती हुईं).

अब क्या करेंगे कांग्रेस से दूर होते दिग्विजय सिंह

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और अखिल भारतीय कांग्रेस के महासचिव रहे दिग्विजय सिंह जिनके बगैर कभी मध्यप्रदेश की राजनीति का पत्ता भी नहीं हिलता था वे अब खुद हिलने लगे हैं. विधानसभा चुनाव प्रचार से दूर रखे गए गुजरे कल के इस कद्दावर नेता की भड़ास, व्यथा या दुख कुछ भी कह लें इंदौर में उस वक्त फट और फूट पड़ा जब उन्होने अपने चुनिन्दा समर्थकों के बीच यह कह डाला कि वे अब चुनाव प्रचार नहीं करेंगे क्योंकि उनके बोलने और भाषण देने से कांग्रेस के वोट कटते हैं.

फौरी तौर पर बेहद सोच समझ कर दिये गए इस बयान के माने हर कोई अपने ढंग से लगा रहा है जिनमें से एक यह है कि दिग्विजय सिंह अभी भी राज्य की राजनीति में अहम हैं और कांग्रेसी खेमे में वे जितनी जमीनी पकड़ रखते हैं उतनी कोई और नहीं रखता. दूसरी तरफ यह कहने वालों की भी कमी नहीं कि दिग्विजय सिंह वाकई उतने मजबूत अगर होते जितने कि कहे और समझे जाते हैं तो उनकी इतनी दुर्गति नहीं होती .

इतनी दुर्गति यानि राहुल गांधी द्वारा जानबूझ कर बेइज्जती की हद तक की जा रही अनदेखी यह हकीकत हर कोई देख और समझ रहा है कि राहुल गांधी के किसी दौरे या रैली में दिग्विजय सिंह उनके साथ नहीं होते उल्टे उन्हें तो पोस्टरों और बैनरों तक से गायब कर दिया गया है. ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ राहुल गांधी के इर्द गिर्द रहते हैं. अपने भाषणों में भी राहुल गांधी कभी दिग्विजय सिंह का नाम नहीं लेते जबकि कमलनाथ और सिंधिया का जिक्र वे जरूर करते हैं. इन उदाहरणों से ही साबित हो जाता है कि दिग्विजय सिंह की अहमियत पुराने नोट जैसी हो गई है जो चलन में नहीं है लेकिन कुछ वजहों के चलते उसे फेंका भी नहीं जा सकता.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद हर किसी को यह जानने की जिज्ञासा थी कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस किस चेहरे को आगे कर के चुनाव लड़ेगी. वजह तब कांग्रेस राज्य में बेहद कमजोर आंकी जा रही थी और प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव से संगठन संभाले नहीं संभल रहा था. दो बड़े चेहरे कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया हमेशा की तरह कोई खास दिलचस्पी नहीं ले रहे थे ऐसे में हर किसी का अंदाजा यही था कि झख  मारकर ही सही  दिग्विजय सिंह को ही मौका दिया जाएगा और फिर एक बार कांग्रेस मुंह की खाएगी क्योंकि मुख्यमंत्री रहते उनकी इमेज इतनी बिगड़ चुकी थी कि आम लोग उनके नाम से ही नाकभौं सिकोड़ने लगते थे कमोबेश यही हालत आज भी है .

दिग्विजय सिंह की आरएसएस और भाजपाइयों से नज़दीकियां भी अक्सर चर्चा का विषय रहीं हैं कहा तो यह तक जाने लगा था कि भाजपा खुद नहीं जीतती बल्कि दिग्विजय सिंह उसकी जीत का रास्ता आसान करते हैं और इस बाबत उनके पास शाश्वत फार्मूला कलह का है जिसके तहत वे सिंधिया और कमलनाथ को आपस में लड़ा देते हैं. कांग्रेस बसपा का गठबंधन न होने देने का जिम्मेदार मायावती ने सीधे दिग्विजय सिंह को ठहराते उन पर भाजपा का एजेंट होने का आरोप लगाया था तो सकपकाए दिग्विजय सिंह के मुंह से बोल नहीं फूटे थे और जो फूटे थे वे फ़ुस्सू बम जैसे थे ऐसे में कमलनाथ ने उनका बचाव करते खुद को उनका बड़ा भाई साबित कर दिया था.

इन बातों को गहराई से राहुल गांधी ने पहले से ही समझते कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना डाला था और ज्योतिरादित्य को भी बराबर का वजन दिया था. कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री कौन होगा यह पत्ते राहुल गांधी अभी भी नहीं खोल रहे तो इसके पीछे उनकी मंशा यह है कि ये दोनों नेता चुनाव को नाक का सवाल बनाते जी जान से कांग्रेस को जिताने में जुटे रहें और ऐसा पहली बार हो भी रहा है कि कांग्रेसी गुटबाजी छोड़ मैदान में हैं.यह बात भाजपा खेमे की बड़ी चिंता भी है कि कांग्रेस इस दफा बदली बदली सी नजर आ रही है छोटी मोटी तोड़फोड़ तो हर चुनाव के वक्त सभी पार्टियों में होती है.

कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस का मुखिया बनाया जाना एक जोखिम भरा बदलाव था लेकिन राहुल गांधी अभी तक इसे मैनेज करने में सफल रहे हैं.  इसके बाद के घटनाक्रम और फैसलों में धीरे धीरे दिग्विजय सिंह की अनदेखी की जाने लगी जिसे खुद दिग्विजय सिंह भी वक्त रहते नहीं समझ पाये कि उनके पर एक एक कर कुतरे जा रहे हैं और अगर समझ भी रहे हों तो कसमसाकर रह गए. वे इस गलतफहमी का शिकार रहे कि चाहे कुछ भी हो जाये उनके बगैर कांग्रेस भाजपा को टक्कर देने की बात सोच भी नहीं सकती. लेकिन ऐसा होने लगा तो उन्हें अपनी सिमटी हुई हैसियत भी नजर आने लगी.

होते होते नौबत यहां तक आ पहुंची कि थके हारे और बौखलाए दिग्विजय सिंह एक गैर जरूरी वक्तव्य देकर कांग्रेस से कन्नी काटने की बात कह बैठे लेकिन इस पर भी कोई खास हलचल या हाहाकार नहीं मचा तो वे अब फिर परेशान हैं कि क्या करें, घर बैठ जायें या फिर यूं ही अकेले बेमकसद प्रचार करते रहें जिस पर कोई ध्यान ही नहीं दे रहा. मीडिया और कांग्रेसी कार्यकर्ता का सारा फोकस कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया पर है.

दिग्विजय सिंह के साथ वही हो रहा है जो छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी के साथ हुआ था वे भी कांग्रेस को अपनी जागीर समझ बैठे थे और आलाकमान यानि सोनिया राहुल गांधी की अनदेखी करने लगे थे. इससे दूसरे कांग्रेसी यह सोचकर घर बैठने लगे थे कि जब अजीत जोगी की ही चलनी है तो हम क्यों पसीना बहायें. नतीजतन अजीत जोगी को बाहर कर दिया गया अब वे अपनी पार्टी बनाकर बसपा के साथ चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन कांग्रेस को इससे खास नुकसान नहीं हो रहा .

बात जहां तक दिग्विजय सिंह की है तो उनकी एक बड़ी चिंता बेटे जयवर्धन सिंह का भविष्य है जो अभी कांग्रेस से विधायक हैं. टिकट बटवांरे में भी दिग्विजय सिंह को तवज्जोह नहीं दी जा रही है लेकिन यह तय है कि उनके बेटे का टिकट राहुल गांधी तब तक नहीं काटेंगे जब तक अपने चेले अजीत जोगी की तरह कोई खुली और बड़ी बगावत दिग्विजय सिंह नहीं कर देते .

खुली बगावत यानि पार्टी छोड़ देना यह सवाल राज्य के गलियारों में गरमागरम चर्चा का विषय है कि क्या वे पार्टी छोड़ देंगे या फिर खामोशी से सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लेंगे. इधर भाजपा दिग्विजय सिंह के प्रचार न करने के बयान में अपना नफा नुकसान देख रही है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अभी भी अपनी सभाओं में दिग्विजय सरकार को जिम्मेदार ठहराते रहते हैं कि उनके राज में राज्य का बंटाढार हुआ था जिससे भाजपा सरकार जैसे तैसे निबट पाई है और धड़ल्ले से विकास कर रही है लेकिन पूरा विकास तभी होगा जब जनता इस चुनाव में भी भाजपा को चुनेगी. इस बात का डर भी वे अप्रत्यक्षतः वोटर को दिखा रहे थे कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो दिग्विजय सिंह फिर मुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं.

शिवराज सिंह का यह फार्मूला थोड़ा ही सही चल भी रहा था कि 1993 से लेकर 2003 तक दिग्विजय सिंह सरकार के राज में न सड़कें थीं न बिजली थी और न ही पानी था. लेकिन अब खुद दिग्विजय सिंह ने खुद को चुनावी पिक्चर से अलग कर लिया है जिसे एकदम हल्के में कोई नहीं ले रहा क्योकि जानने वाले जानते हैं कि दिग्विजय सिंह जो कहते हैं वो करते नहीं और जो उन्हें करना होता है उसे वह कहते नहीं .

अब गेंद राहुल गांधी के पाले में है कि वे दिग्विजय सिंह के बयान को किस तरह लेते हैं जो एक धौंस भी है और सधी सियासी चाल भी है, वजह दिग्विजय सिंह कांग्रेस को भले ही कुछ न दिला पाएं पर अपनी पर आ गए तो थोड़ा बहुत नुकसान करने की कूवत तो रखते ही हैं. खासतौर से इस वक्त में जब कांग्रेस चुनावी दौड़ में भाजपा को बराबरी से टक्कर दे रही है.

कानून से बड़ा कोई नहीं

निर्मम हत्या के मामले में भी अपराधी किस तरह अदालतों के चक्कर काटते रहते हैं कि किसी तरह छूट जाएं. 1984 में एक घर में भरे दिन में बंदूक से की गई हत्या के 2 अपराधी भाई 2018 तक अदालतों में छूटने की गुहार लगाते रहे पर न तो हाई कोर्ट ने और न ही सुप्रीम कोर्ट ने 35 साल बाद भी उन की बात मानी. मामला केवल एक मोटरसाइकिल का था. 1981 में हुई शादी में पहले ही दिन लगता है खटपट हो गई और 8 दिन बाद पत्नी मायके चली गई. 3 साल बाद पति पत्नी को घर ले तो आया पर 3 दिन बाद ही उस की डबल बैरल गन से दोपहर 4 बजे हत्या कर दी शायद यह सोच कर कि ठाकुर परिवार को कौन हाथ लगाएगा.

चाहे हम कोसते रहें कि देश में न्याय नहीं है और इसे खरीदा जा सकता है पर इस मामले में तो पति, उस के भाई और मां को गिरफ्तार कर लिया गया. सैशन कोर्ट ने उन्हें आजीवन कैद का दंड दिया. 1984 के अपराध की सैशन कोर्ट के फैसले की अपील पर 2014 में उच्च न्यायालय ने 2 भाइयों की सजा तो बरकरार रखी पर मां को छोड़ दिया- 30 साल बाद. पता नहीं इन 30 सालों में वह कितने साल जेल में रही. 2 भाई सुप्रीम कोर्ट में आए पर सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें राहत नहीं दी और उन का अपराध बरकरार रखा.

चाहे जमाना 1980 का हो या 2020 का, मारपीट, हत्या कर के झगड़े सुलझाना अपनेआप में गलत है और खासतौर पर बेकुसूर औरतों पर गुस्सा निकालना जो अपने फैसले खुद नहीं कर सकतीं. देश के एक वर्ग को अपने ऊपर जरूरत से ज्यादा गरूर है कि वह लाठीबंदूक के बल पर कुछ भी कर सकता है और फिर कानून को मनचाहे तरीके से खरीद सकता है. देश में लिंचिंग मौब कभी गौरक्षा के नाम पर, कभी मुसलमानों की नमाज पर, कभी भारत माता की जय बुलवाने के लिए तो कभी कांवडि़यों को विशेष स्थान देने पर कानून बेरहमी से अपने हाथ में लेने लगी हैं. ये उसी तरह के लोग हैं जिन्होंने 1984 में ब्याही पत्नी को दिन के उजाले में डबल बैरल बंदूक से मार डाला मानो वे मदर इंडिया बन गए हैं और गुनहगार तो निहत्थे, निर्दोष ही हैं क्योंकि वे उन की बात को नहीं मान रहे.

सुप्रीम कोर्ट के इस तरह के फैसले एक तरह से राहत देते हैं. देर से न्याय देने में वास्तव में जिन्होंने अपराध किया उन्हें लंबी सजाएं भुगतनी पड़ती हैं या फिर दंडित होने का बिल्ला लगाए घूमना पड़ता है. जेसिका कांड के मनु शर्मा के साथ भी यही हुआ है जब हर तरह की कानूनबाजी के बावजूद जेल में रहना ही पड़ रहा है.

संवरती रही रात भर

सांसें थकथक के चलती रहीं रात भर

रोशनी यूं पिघलती रही रात भर

एक कोहरा सा शीशे पर छाया रहा

मैं बर्फ पर्वत पर ढलती रही रात भर

दर्द खोने का सुबह तक जागा किया

पीड़ा रुकरुक के चलती रही रात भर\

चांद बादल के टुकड़े में छिपछिप गया

मैं चांदनी में ढूंढ़ा करती रही रात भर

धूप थक कर अंधेरों में गुम हो गई

रात तिलतिल के ढलती रही रात भर

कोई यादों के जंगल में भटका किया

मैं चांदनी जैसे झरती रही रात भर

ओस हाथों में ले, चेहरा धोती रही

मैं तारों से मांग भरती रही रात भर

सुबह मिलने की इक चाह में

रात बनती संवरती रही रात भर

कोई तो था, कल जो ठहरा यहां

एक पल दम लिया, फिर चला राह पर

और सांसों के जलते अलाव पर

मैं रोतीसिसकती रही रात भर.

– उर्मिला सिंह

दोपहिया वाहनों पर अच्छे मौनसून का असर

मौनसून का संबंध सीधे खेती से जोड़ा जाता है. स्वाभाविकरूप से मौनसून की अच्छी बारिश खेतों में हरियाली लाती है और किसान को खुशहाल बनाती है. लेकिन इस बार की बारिश दोपहिया वाहन खासकर मोटरसाइकिल निर्माता कंपनियों के लिए ज्यादा उम्मीदें ले कर आई है. इस का असर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में दिखना भी शुरू हो गया है. इस तिमाही में दोहिया वाहनों की बिक्री 17 फीसदी बढ़ी है. इस बढ़ोतरी की वजह मौनसून की अच्छी बारिश को माना जा रहा है. कुछ साल से लगातार पड़ रहे सूखे के कारण किसानों में मायूसी छा गई थी. लेकिन इस बार अच्छी बारिश से उन के खेत लहलहा रहे हैं और अच्छी आमदनी के कारण वे दोपहिया वाहन खरीद रहे हैं.

किसानों में दोपहिया वाहनों में मोटरसाइकिल ज्यादा लोकप्रिय है. इस की वजह है कि स्कूटर के मुकाबले वह ज्यादा लोगों को खींच सकती है और उस में दूध के डब्बे, अनाज के थैले जैसे सामान ढोए जा सकते हैं. यह गांव के कच्चे रास्तों पर शान की सवारी का प्रतीक होती है और गांव का हर किसान मोटरसाइकिल सवारी की हसरत अवश्य रखता है.

पहली तिमाही में सब से ज्यादा 16 फीसदी बढ़ोतरी भी मोटरसाइकिल की बिक्री से हुई है. एक जमाने में गांव की सवारी साइकिल ही हुआ करती थी लेकिन अब उस की जगह मोटरसाइकिल ने ले ली है. स्कूटरों की अच्छी मांग है और स्कूटर की जगह बिना गियर वाली स्कूटी का प्रचलन बढ़ रहा है, लेकिन मोटरसाइकिल की शान कुछ अलग ही मानी जाती है.

पहली तिमाही में ग्रामीण इलाकों में दोपहिया वाहनों की बिक्री में 17 फीसदी की बढ़ोतरी को देखते हुए निर्माता कंपनियां ग्रामीणों का मूड भांप चुकी हैं और उस के अनुरूप वे अपने उत्पादों को ज्यादा आकर्षक बनाने में जुट गई हैं.

ब्यूटी के नेचर कनैक्शन के बारे में आप भी जानिए

त्वचा की खूबसूरती को कौस्मैटिक प्रोडक्ट्स के साथसाथ कई प्राकृतिक चीजों के जरीए भी बरकरार रखा जा सकता है. ये चीजें न सिर्फ सेहतमंद होती हैं, बल्कि कई तरह के साइड इफैक्ट्स से भी बचाती हैं. बादाम, केसर, दूध, शहद, गुलाब , नीम आदि में ऐसे प्राकृतिक तत्त्व मौजूद होते हैं जो त्वचा को ग्लोइंग बनाने के साथसाथ उसे झुर्रियों से भी बचाते हैं. इन के नियमित इस्तेमाल से आप हर उम्र में जवां दिख सकती हैं.

जानिए इन चीजों के फायदे:

गुलाब

इस में विटामिंस, मिनरल्स और ऐंटीऔक्सीडैंट गुण होने के कारण यह मौइश्चराइजर का काम तो करता ही है, साथ ही इस में ऐंटीसैप्टिक, ऐंथ्रीजेंट और ऐंटीइनफ्लैमेटरी प्रौपर्टी होने के कारण यह ऐक्नों और रैडनैस की परेशानी से भी छुटकारा दिलाता है.

स्किन बनती है क्लीयर: ऐंटीऔक्सीडैंट प्रौपर्टी होने के कारण गुलाब स्किन को कीटाणुओं से बचा उसे क्लीयर बनाए रखता है. 1 चम्मच गुलाब की पत्तियों में थोड़ा पानी मिला कर चेहरे पर लगाएं. थोड़ी देर बाद चेहरे को धो लें. चेहरा चमक उठेगा.

करे मौइश्चराइज: गुलाब की पत्तियों में मौजूद नैचुरल औयल कोशिकाओं में पहुंच कर उन्हें नमी प्रदान करता है, जिस से स्किन पर नैचुरल चमक बरकरार रहती है.

औयल कंट्रोलर: ज्यादातर टोनर्स में अलकोहल होने के कारण वे स्किन को बिलकुल रूखा बना देते हैं, जबकि गुलाब स्किन को सौफ्ट बनाने का काम करता है. इसे पेस्ट के रूप में चेहरे पर लगाने पर यह रोमछिद्रों को कम करने के साथसाथ स्किन को भी फ्रैश करता है.

जलन से राहत: ऐंटीइनफ्लैमेटरी गुण होने के कारण यह ऐक्नों से लड़ कर स्किन को कूलकूल फील कराता है.

नैचुरल सनस्क्रीन: गुलाब में विटामिन सी की मौजूदगी व ऐंटीऔक्सीडैंट गुण होने के कारण यह सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचा कर स्किन को सुरक्षा प्रदान करता है. सनबर्न हुई स्किन को भी आराम पहुंचाता है. गुलाब की पत्तियों को पानी में उबाल कर ठंडा होने दें. रोज इस से चेहरा धोने पर वह ग्लो करने लगेगा.

बालों को दे मौइश्चर: यह बालों को मौइश्चर प्रदान कर उन में चमक लाता है. इस के लिए आप डेली रोजवाटर से बालों की मसाज करें.

केसर

इस में पोटैशियम होने के कारण यह कोशिकाओं को बनाने और उन की मरम्मत करने में सक्षम होता है. इस में विटामिंस और ऐंटीऔक्सीडैंट की मौजूदगी स्किन के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होती हैं. ऐंटीफंगल प्रौपर्टीज होने के कारण यह ऐक्नों से भी बचाव करता है.

नैचुरल ग्लो रहेगा बरकरार: अगर आप स्किन पर नैचुरल ग्लो की चाह रखती हैं तो केसर के कुछ धागे 2 घंटे दूध में भिगो कर रखें. फिर इन्हें चेहरे व गरदन पर मल कर फेस वाश करें. कुछ दिन इस प्रक्रिया को दोहराने से रंग में निखार आने के साथसाथ चेहरा ग्लो भी करेगा.

ऐक्ने, ब्लैकहैड्स करे कम: केसर का ऐंटीफंगल गुण ऐक्ने और ब्लैकहैड्स से लड़ने में कारगर होता है. आप 5-6 तुलसी की पत्तियों को 10-12 केसर के धागों के साथ मिला कर पेस्ट तैयार कर उसे चेहरे पर लगा कर 10-15 मिनट बाद ठंडे पानी से चेहरे को धो लें.

सुधारे स्किन टैक्स्चर: हर महिला अपने स्किन टैक्स्चर को सुधारना चाहती है. इस के लिए 1/2 कप पानी को 1/2 घंटा उबालें फिर उस में 4-5 केसर के धागे और 4 चम्मच मिल्क पाउडर डाल कर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं. थोड़ी देर बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें. आप खुद अपने स्किन टैक्स्चर में सुधार देखेंगी.

करे ड्राईनैस दूर: अगर आप की स्किन रूखीरूखी सी है तो नीबू और केसर को मिला कर पेस्ट तैयार करें. नीबू जहां स्किन को क्लीयर करता है वहीं केसर नमी प्रदान कर उस की ड्राईनैस दूर करता है.

शहद

शहद में पोषक तत्त्व, ऐंटीऔक्सीडैंट और हीलिंग गुण होने के कारण यह त्वचा को नमी प्रदान करने के साथसाथ झुर्रियों और बैक्टीरिया से लड़ने में भी मददगार होता है.

मौइश्चराइजर: यह कोशिकाओं तक पहुंच कर उन्हें मौइश्चर प्रदान करता है, जिस से त्वचा सौफ्ट होती है. शहद को चेहरे पर लगा कर 15-20 मिनट बाद धो लें.

क्लींजर का काम: शहद में ऐंजाइम्स होने के कारण यह रोमछिद्रों को क्लीयर और क्लीन करने का काम करता है, जिस से चेहरा आकर्षक लगता है.

ऐक्नों का ट्रीटमैंट: इस में ऐंटीबैक्टीरियल और ऐंटीफंगल गुण होने के कारण यह रैडनैस और ऐक्नों से त्वचा को राहत पहुंचाता है. रैडनैस वाले एरिया पर शहद लगा कर 15-20 मिनट बाद चेहरा धो लें.

बैस्ट कंडीशनर: यह डल स्किन में ग्लोव सौफ्टनैस लाता है. 2 बूंदें नारियल के तेल में 1 चम्मच शहद मिला कर 20 मिनट लगा कर रखें. फिर धो लें. चेहरा खिलाखिला नजर आएगा.

सनबर्न ट्रीटमैंट: शहद में ऐंटीइनफ्लैमेटरी गुण होने के कारण यह सनबर्न स्किन को ठीक करने का काम करता है.

दूध

कच्चे दूध में विटामिन बी, अल्फा हाइड्रौक्सी ऐसिड, कैल्सियम होने के कारण यह स्किन और हैल्थ के लिए काफी फायदेमंद होता है.

नैचुरल फेस क्लीनर: हम डेली प्रदूषण को फेस करते हैं. ऐसे में चेहरे पर गंदगी एकत्रित हो ही जाती है. उसे हटाने के लिए आप डेली कच्चे दूध से चेहरे को साफ करें. फेस क्लीन होने के साथसाथ ऐक्नों की परेशानी से भी राहत मिलेगी.

टैनिंग हटाए: कच्चा दूध न सिर्फ टैनिंग दूर करता है, बल्कि डैड स्किन को भी रिमूव करता है.

बादाम

फाइबर, प्रोटीन, मैग्नीशियम और विटामिन ई होने के कारण बादाम सेहत, स्किन और बालों के लिए काफी फायदेमंद साबित होते हैं.

स्किन बनाएं हैल्दी: आप अगर क्लीयर कौंप्लैक्शन और ग्लोइंग त्वचा चाहती हैं, तो ट्राई करें बादाम तेल. यह स्किन को नमी प्रदान करने के साथसाथ उसे सौफ्ट भी बनाता है.

डार्क सर्कल्स से राहत: आंखें भले ही कितनी भी खूबसूरत क्यों न हों, लेकिन डार्क सर्कल्स हों तो उन की खूबसूरती में कमी आ जाती है. ऐसे में बादाम औयल में विटामिन ई की मौजूदगी डार्क सर्कल्स को कम करती है.

डैड स्किन सैल्स हटाएं: गंदगी, पसीने के कारण त्वचा पर डैड स्किन सैल्स इकट्ठे होने के कारण स्किन डल सी दिखती है. बादाम में मौइश्चराइजिंग प्रौपर्टी होने के कारण डैड स्किन रिमूव होती है.

स्प्लिट ऐंड्स को रिमूव करे: अगर आप बादाम के तेल से बालों की मसाज करें तो उन की डलनैस दूर होने के साथ स्पिल्ट ऐंड्स की परेशानी से भी छुटकारा मिलता है.

नीम

नीम के जितने फायदे गिनवाए जाएं कम हैं. इस की पत्तियों को पीस कर फेस पैक की तरह यूज कर के ऐक्नों की परेशानी से छुटकारा पाया जा सकता है. यह स्किन को ड्राई होने से भी रोकता है.

ब्लैकहैड्स हटाए: नीम औयल की 2-3 बूंदों में थोड़ा सा पानी मिला कर चेहरे पर लगाने से ब्लैकहैड्स जड़ से खत्म हो जाते हैं.

स्किन ऐलर्जी से रखे दूर: नीम स्किन ऐलर्जी से भी बचाता है. पानी में कुछ बूंदें नीम औयल की डाल कर उस से नहाने से स्किन ऐलर्जी दूर होती है.

ग्लो के लिए कारगर टूल: अगर आप रोजाना नीम की पत्तियों और हलदी के पेस्ट को चेहरे पर लगाएंगी तो इस से स्किन क्लीयर होने के साथसाथ ग्लो भी करेगी.

जिम के नियमों का करें पालन, वरना खराब हो सकती है फिटनैस

अगर आप ने जिम जौइन किया है और वहां दूसरे लोगों के साथ जगह और साधन शेयर कर रही हैं, तो इन बातों का अवश्य ध्यान रखें:

– जरूरत से ज्यादा टाइट और जरूरत से ज्यादा ढीले कपड़े न पहनें. कपड़े आरामदायक हों. फटे कपड़े न पहनें, क्योंकि मशीन में फंस सकते हैं.

– आप जिम में हैं तो यह तय है कि आप को पसीना भी आएगा. अत: ऐक्सरसाइज कर चुकने के बाद सफाई का ध्यान रखते हुए सभी चीजें पोंछ दें. अधिकांश जिम ऐंटीबैक्टीरियल स्प्रे और टौवेल्स इसी उद्देश्य के लिए देते हैं. अगर आप के जिम में यह सुविधा न हो तो इन चीजों को खुद साथ रखें. यदि आप कोलोन यूज नहीं करते तो ज्यादा से ज्यादा आप के पास वाले व्यक्ति को आप के पसीने की स्मैल आएगी, पर यदि आप कोलोन यूज कर के जिम जाते हैं, तो जिम में सब को नुकसान हो सकता है.

– जब आप का वर्कआउट खत्म हो जाए तो सारे सामान यथास्थान रख दें. चूंकि जिम में बहुत सा सामान होता है, आप के ऐसा करने से किसी का भी समय खराब नहीं होगा. यह इसलिए भी जरूरी है कि अगर सामान इधरउधर बिखरा रहेगा तो किसी को भी चोट लग सकती है.

– वर्कआउट करने के बाद जिम में इधरउधर न टहलें, वहां फालतू बातों के लिए न रुकें वरना दूसरे डिस्टर्ब होंगे.

– जिम के पीक आवर्स में 60 किलोग्राम के लिफ्टर्स और शीशे के बीच न आएं, क्योंकि ये शीशे उचित फौर्म और तकनीक के लिए लिफ्टर्स के लिए जरूरी होते हैं.

– यदि आप किसी विशेष ऐक्सरसाइज के 1 से ज्यादा सैट कर रही हैं तो बीचबीच में मशीन या बैंच से हटती रहें. ऐसा बहुत बार होता है कि हम अपने वर्कआउट में इतना लीन होते हैं कि दूसरे भी अपना वर्कआउट करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, इस का ध्यान नहीं रहता. अत: कोआर्डिनेशन बनाए रखें. 1 सैट करने के बाद किसी और को भी करने दें, फिर खुद करें, फिर दूसरे को करने दें.

बेहद जरूरी है यौन रोग के शुरुआती लक्षणों को जानना

शादी के कुछ समय के बाद रेखा के अंदरूनी अंग से कभीकभी कुछ तरल पदार्थ निकलने लगा, पर उस ने इस तरफ खास ध्यान नहीं दिया. मगर कुछ दिनों बाद जब उसे उस तरलपदार्थ से बदबू आने का एहसास होने लगा और अंग में खुजली भी होने लगी तो वह तुरंत डाक्टर के पास गई.

डाक्टर ने जांच कर के रेखा को बताया कि उसे यौन रोग हो गया है, पर घबराने वाली कोई बात नहीं है क्योंकि समय पर दिखा लिया. इलाज पर कम पैसा खर्च कर बीमारी ठीक हो जाएगी.

सीमा जब अपने पति के साथ शारीरिक संबंध बनाती तो उसे दर्द होता. उस ने इस परेशानी के बारे में डाक्टर को बताया. डाक्टर ने सीमा के अंगों की जांच कर के बताया कि उसे यौन रोग हो गया है. समय से इलाज कराने पर सीमा की बीमारी दूर हो गई.

यौन रोग पतिपत्नी के संबंधों में बाधक बन जाते हैं. यौन रोग के डर से लोग संबंध बनाने से डरने लगते हैं. कई बार यौन रोगों से अंदरूनी अंग से बदबू आने लगती है, जिस की वजह से सैक्स संबंधों से रुचि खत्म हो जाती है. ऐसे में पतिपत्नी एकदूसरे से दूर जा कर कहीं और संबंध बनाने लगते हैं.

क्या है यौन रोग

यौन रोग शरीर के अदरूनी अंगों में होने वाली बीमारियों को कहा जाता है. यह एक पुरुष और औरत के साथ संपर्क करने से भी हो सकता है और बहुतों के साथ संबंध रखने से भी हो सकता है. यौन रोग से ग्रस्त मां से पैदा होने वाले बच्चे को भी यह रोग हो सकता है. ऐसे में अगर मां को कोई यौन रोग है, तो बच्चे का जन्म डाक्टर की सलाह से औपरेशन के जरीए कराना चाहिए. इस से बच्चा योनि के संपर्क में नहीं आता और यौन रोग से बच जाता है.

कभीकभी यौन रोग इतना मामूली होता है कि उस के लक्षण नजर ही नहीं आते हैं. इस के बाद भी इस के परिणाम खतरनाक हो सकते हैं. इसलिए यौन रोग के मामूली लक्षण को भी नजरअंदाज न करें. मामूली यौन रोग कभीकभी अपनेआप ठीक हो जाते हैं, पर इन के बैक्टीरिया शरीर में रह जाते हैं, जो कुछ समय बाद शरीर में तेजी से हमला करते हैं. यौन रोग शरीर की खुली और छिली जगह वाली त्वचा से ही फैलते हैं.

यौन रोग का घाव इतना छोटा होता है कि उस का पता ही नहीं चलता है. पति या पत्नी को भी इस का पता नहीं चलता है. यौन रोगों का प्रभाव 2 से 20 सप्ताह के बीच कभी भी सामने आ सकता है. इस के चलते औरतों को माहवारी बीच में ही आ जाती है. यौन रोग योनि, गुदा और मुंह के द्वारा शरीर में फैलते हैं. यौन रोग कई तरह के होते हैं. इन के बारे में जानकारी होने पर इन का इलाज आसानी से हो सकता है.

हार्पीज: हार्पीज बहुत ही आम यौन रोग है. इस रोग में पेशाब करते समय जलन होती है. पेशाब के साथ कई बार मवाद भी आता है. बारबार पेशाब जाने को मन करता है. बुखार भी हो जाता है. टौयलेट जाने में भी परेशानी होने लगती है.  जिसे हार्पीज होता है उस के मुंह और योनि में छोटेछोटे दाने हो जाते हैं. शुरुआत में ये अपनेआप ठीक भी हो जाते हैं. अगर ये दोबारा हों तो इलाज जरूर कराएं.

व्हाट्स: व्हाट्स में शरीर के तमाम हिस्सों में छोटीछोटी फूलनुमा गांठें पड़ जाती हैं. व्हाट्स एचपीवी वायरस यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के चलते फैलता है. यह 70 प्रकार का होता है. अगर ये गांठें अगर शरीर के बाहर हों और 10 मिलीमीटर के अंदर हों तो इन्हें जलाया जा सकता है. 10 मिलीमीटर से बड़ा होने पर औपरेशन के जरीए हटाया जाता है.

योनि में फैलने वाले वायरस को जैनरेटल व्हाट्स कहते हैं. यह योनि में बच्चेदानी के मुख पर हो जाता है. अगर समय पर इलाज न हो तो यह घाव कैंसर का रूप ले लेता है. अगर यह हो तो 35 साल की उम्र के बाद एचपीवी का कल्चर जरूर करा लें. इस से घाव का पूरा पता चल जाता है.

गनेरिया: इस रोग में पेशाब की नली में घाव हो जाता है, जिस से पेशाब की नली में जलन होने लगती है. कई बार खून और मवाद भी आने लगता है. इस का इलाज ऐंटीबायोटिक दवाओं के जरीए किया जाता है. अगर यह बारबार होता है तो इस का घाव पेशाब की नली को बंद कर देता है, जिसे बाद में औपरेशन के द्वारा ठीक किया जाता है.

गनेरिया को साधारण बोली में सुजाक भी कहा जाता है. इस के होने पर तेज बुखार भी आता है. इस के बैक्टीरिया की जांच के लिए मवाद की फिल्म बनाई जाती है. अगर यह बीमारी शुरू में ही पकड़ में आ जाए तो इलाज आसानी से हो जाता है. बाद में इलाज कराने में मुश्किल आती है.

सिफ लिस: यह यौन रोग भी बैक्टीरिया के कारण फैलता है. यह यौन संबंध के कारण ही होता है. इस रोग के चलते पुरुषों के अंग के ऊपर गांठ सी बन जाती है. कुछ समय के बाद यह ठीक भी हो जाती है. इस गांठ को शैंकर भी कहा जाता है. शैंकर से पानी ले कर माइक्रोस्कोप द्वारा ही बैक्टीरिया को देखा जाता है. इस बीमारी की दूसरी स्टेज पर शरीर में लाल दाने से पड़ जाते हैं. यह कुछ समय के बाद शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित करने लगता है. इस बीमारी का इलाज तीसरी स्टेज के बाद मुमकिन नहीं होता है. खराब हालत में यह शरीर की धमनियों को प्रभावित करता है. धमनियां फट भी जाती हैं. यह रोग आदमी और औरत दोनों को हो सकता है. इस का इलाज दवा और इंजैक्शन से होता है.

क्लैमाइडिया: इस बीमारी में औरतों को योनि में हलका सा संक्रमण होता है. यह योनि के द्वारा बच्चेदानी तक फैल जाता है. यह बांझपन का सब से बड़ा कारण होता है. यह बच्चेदानी को खराब कर देता है. बीमारी की शुरुआत में ही इलाज हो जाए तो ठीक रहता है. क्लैमाइडिया के चलते औरतों को पेशाब करते समय जलन, पेट दर्द, माहवारी में दर्द, टौयलेट के समय दर्द, बुखार आदि परेशानियां पैदा होने लगती हैं.

लौटती बहारें (अंतिम किस्त) : क्या अपने मकसद में कामयाब हो पाई मीनू

अब तक आप ने पढ़ा:

शादी के बाद मीनू ससुराल आई तो घर के लोगों ?की सोच काफी पुरानी थी. उसे बातबात पर नीचा दिखाने की कोशिश की जाती थी. फिर भी मीनू सब को उचित सम्मान देती थी, सब का खयाल रखती थी.

कुछ दिनों बाद वह अपने मायके आई तो वहां भी खुद के लिए घर वालों का व्यवहार बदला पाया. छोटा भाई जहां लफंगे दोस्तों के साथ घूमने लगा था, वहीं छोटी बहन रेनू गलत सोहबत में पड़ गई थी.

यह सब देख कर मीनू उदास तो हुई पर फिर मन ही मन ठान लिया कि वह अपनी बहन और भाई को सही रास्ते पर ला कर ही दम लेगी.

– अब आगे पढ़ें:

मैं अचानक अपने कमरे में जा कर अपने सामान की दोनों गठरियां उठा लाई. कपड़े तो मैं ने घर में काम करने वाली को देने के लिए आंगन में ही रख दिए पर पुस्तकों को जा कर मां के बड़े संदूक में रख आई.

मैं ने बड़े चाव से पापा व मम्मी की पसंद का खाना बनाया. मैं किचन से निकल ही रही थी कि मम्मी मुझे आवाज दे कर बुलाने लगीं. वहां जा कर देखा कि मम्मी पापा के रिटायरमैंट में मिले उपहारों का अंबार लगाए बैठी थीं. देखते ही बोलीं, ‘‘मीनू इधर आ कर देख. तुझे क्याक्या ले जाना है… तेरे जाने की तैयारी कर रही थी.

मैं सोच रही थी तुझ से पूछ कर ही तेरा सामान पैक करूं?’’

मैं हैरान रह गई कि मुझ से पूछे बिना ही मेरी जाने की तैयारी शुरू हो गई. मैं मन ही मन टूट सी गई, क्योंकि मैं तो 8 दिन रहने का सपना संजो कर आई थी. यहां तो चौथे दिन ही विदा करने का मन बना लिया.

अनुभवी मां ने शायद हम तीनों भाईबहनों के ऊपर गहराते तनाव के बादल और गहरे होते देख लिए थे. मैं ने समझदारी से काम लेते हुए चेहरे पर निराशा का भाव न लाते हुए बड़ी सहजता से कहा, ‘‘अरे नहीं मम्मी, अभी 2 महीने पहले ही तो सब कुछ ले कर विदा हुई हूं. आप फिर शुरू हो गईं?’’

मम्मी ने चुपचाप पापा को मिले उपहारों में से कुछ उपहार छांट कर एक ओर रख दिए और बोलीं, ‘‘तूने तो कह दिया कुछ नहीं चाहिए, पर हमें तो अपने मानसम्मान का ध्यान रखना है… तेरी ससुराल वाले कहेंगे बेटी को खाली हाथ भेज दिया.’’

मैं ने चुप रहने में ही भलाई समझी. चुपचाप सामान देखने लगी. कुछ सामान घरगृहस्थी के उपयोग का था. कुछ कपड़े थे. मैं ने सारा सामान समेटा और अपने सूटकेस में रखने जाने लगी. आंखों से अविरल आंसू बह रहे थे. शुक्र है कमरे में कोई नहीं था. अटैची खोली तो बड़े चाव से साथ लाए कपड़े मुंह चिढ़ाने लगे मानो पूछ रहे हों कितने अवसर मिले हमें पहनने के?

मन की वेदना कम करने के लिए अपनी सब से प्रिय सखी चित्रा को फोन किया पर वह भी शहर से बाहर गई हुई थी. समय काटे नहीं कट रहा था. जिस मायके आने के लिए इतनी ज्यादा उतावली हो रही थी वहां अब 1-1 पल गुजारना कठिन हो रहा था. समय जैसे रुक गया था.

कुछ देर पापा के पास बैठ कर उन से उन के आगे के प्लान पूछने लगी. वे भी निराश से ही थे. इतनी महंगाई में केवल पैंशन से गुजारा होना कठिन था. पापा भी हमेशा से स्वाभिमानी, गंभीर और मितभाषी रहे हैं. चाहते तो किसी अकाउंट विभाग में नौकरी कर सकते हैं, पर बेचारे कहने लगे, ‘‘मीनू मैं जानता हूं कि पैंशन के पैसे रोजमर्रा के खर्चों के लिए कम पड़ेंगे पर क्या करूं? सिफारिश का जमाना है. इस उम्र में नौकरी के लिए किस के आगे हाथ जोड़ूं?’’

यह सुन मन बहुत दुखी हो गया. मैं रोष से बोली, ‘‘आप लोगों ने मेरी शादी की बहुत जल्दी मचाई वरना उस समय मुझे अपने ही कालेज में लैक्चररशिप मिल रही थी. मैं ने आप लोगों से शादी न करने की कितनी जिद की थी पर आप दोनों माने ही नहीं.’’

पापा बोले, ‘‘मीनू बेटा कब तक तेरी शादी न करता बता? एक दिन तो तुझे जाना ही था. पराया धन कोई कब तक अपने घर में रख सकता है.’’

पापा की बात सुन कर मन फिर से खिन्न हो गया. यहां पर भी पराई और ससुराल में भी पराई… मन हाहाकार कर उठा. तो फिर मेरा कौन सा घर है? मैं हूं किस की? आंखें फिर बरसने लगी थीं. बड़ी कठिनाई से स्वयं को संभाल कर मम्मी के साथ किचन में हाथ बंटाने लगी.

मम्मी कहने लगीं, ‘‘आराम से बैठ. मैं सब कर लूंगी. अब तो अकेले ही सब करने की आदत पड़ गई है. रेनू तो किचन में झांकती भी नहीं. बस कालेज, पढ़ाई और कुछ नहीं.’’

मन तो हुआ कि रेनू की बात बता कर मम्मी को सजग कर दूं पर घर का माहौल और खराब न हो जाए, यह सोच कर चुप रही.

अगले दिन सवेरे जल्दी उठ कर नहाधो कर तैयार हो गई. मन उचाट सा हो गया था. दिल कर रहा था जल्दी से निकल जाऊं. कम से कम घर का माहौल तो सामान्य हो जाए. जल्दीजल्दी नाश्ता किया. राजू ही छोड़ने जा रहा था. नीचे औटो आ गया तो मैं सब से मिलने लगी. मैं ने बड़े प्यार से आगे बढ़ कर रेनू को गले लगाया. वह अनमनी सी मेरे जाने के इंतजार में खड़ी थी. उस ने जल्द ही मुझे अपने से अलग कर लिया और सिर झुका कर खड़ी हो गई.

एक बार फिर मैं मम्मीपापा के गले लग कर रो पड़ी. उन्होंने मेरे सिर पर हाथ फेर कर चुप कराया. मैं भावों का और अधिक प्रदर्शन न करते हुए सीढि़यां उतर गई. राजू ने औटो में सामान रख दिया. पापा तो नीचे ही आ गए थे, परंतु मम्मी और रेनू ऊपर बालकनी में ही खड़ी थीं. मैं ने औटों में बैठ कर हाथ हिलाया. ऊपर से भी हाथ हिलते नजर आए. देखतेदेखते सब आंखों से ओझल हो गए.

इस प्रकार मायके से मेरी दूसरी बार विदाई हुई. बसस्टैंड पर बस खड़ी थी. राजू ने मुझे बस में बैठाया फिर बोला, ‘‘दीदी कालेज को देर हो रही है,’’ और फिर नीचे उतर गया.

उतर कर राजू ने एक बार बस की खिड़की की ओर पलट कर देखा. मैं उसी की ओर देख रही थी.

‘‘बाय,’’ कह वह तेजी से चलता हुआ भीड़ में गुम हो गया.

राजू के जाते ही मन में एक गहरी टीस उठी. मैं बस में बैठी सोचने लगी कि समय कैसे बदलता है. मैं रेनू और राजू दोनों की चहेती दीदी थी. हर काम में मुझ से सलाह मांगते थे. मुझ से पूछे बिना एक कदम भी नहीं उठाते थे. आज दोनों कैसे पराए से हो गए थे. मेरे मन में दोनों के गुमराह होने की शंका किसी नाग की तरह फन फैला रही थी.

ससुराल की दहलीज पर कदम रखते ही याद आया कि मायके से 8-10 दिन रहने की अनुमति ले कर गई थी पर 4 दिनों में ही लौट आई. कोई बहाना ही बनाना होगा. मेरे दिमाग ने काम किया. रवि भैया ने जैसे ही दरवाजा खोला मैं ने नकली मुसकान का मुखौटा ओढ़ लिया.

रवि हैरानी से बोला, ‘‘भाभी इतनी जल्दी कैसे? फोन कर देतीं. मैं लेने आ जाता.’’

हमारी आवाज सुन कर पापाजी आ गए.

मैं ने पापाजी के पैर छुए, फिर यभासंभव आवाज थोड़ी तेज कर के कहा, ‘‘वहां पापामम्मी का परिवार सहित भारतभ्रमण का कार्यक्रम पहले से ही तय था. वे सब मुझ से भी साथ चलने का अनुरोध कर रहे थे, पर मैं ने तो इनकार कर दिया. इसलिए जल्दी आना पड़ा.’’

मैं चाह रही थी कि अंदर कमरे में बैठी अम्मांजी भी सुन लें ताकि मुझे बारबार झूठ न बोलना पड़े. वैसे मेरा मन मुझे यह झूठ बोलने के लिए धिक्कार रहा था. अंदर अम्मां से जा कर भी मिली. उन्होंने बताया कि नीलम यहीं थी. कल ही गई है. दरअसल, कुछ दिन बाद उस की बचपन की सहेली दिव्या की शादी है. वह पड़ोस में ही रहती है, इसलिए वह शादी में शामिल होने के लिए 2-3 दिनों के लिए फिर आएगी.

मैं थोड़ी देर पापाजी और अम्मां के पास बैठी रही. वे रिटायरमैंट के कार्यक्रम के विषय में पूछते रहे. किसी ने भी चाय तो क्या पानी को भी नहीं पूछा. मेरा सिर थकावट व तनाव से फटा जा रहा था. फिर किचन में जा कर सब के लिए चाय बना कर लाई. चाय पी कर थोड़ा तरोताजा हो रात के खाने की तैयारी में जुट गई.

2 दिन बाद ये भी मुंबई से लौट आए. इन का काम भी वहां जल्दी खत्म हो गया था. शेखर भी मुझे जल्दी आया देख कर चौंक गए. मैं ने मन में उठती टीस को दबाते हुए जबरन मुसकराते हुए कहा, ‘‘मुझे वहां आप के आने की महक आने लगी थी, इसलिए भागीभागी चली आई.’’

ये भी मूड में आ गए. मुझे पकड़ने दौड़े तो मैं हंसते हुए किचन में घुस गई.

जिंदगी फिर पुराने ढर्रे पर चलने लगी. मैं बारबार ससुराल में अपनेपन का सुबूत पेश करने की कोशिश में लगी रहती और ससुराल वाले उन सुबूतों को झूठा साबित करने के प्रयास में रहते. यही करतेकरते थोड़ा समय और बीत गया.

2 दिन बाद नीलम जीजी आने वाली थीं. उन के पति व्यस्त थे. उन्हें शादी में बरात के समय ही शामिल होना था. परंतु नीलम जीजी सभी कार्यक्रमों में शामिल होना चाहती थीं, इसलिए 2 दिन पहले ही आ रही थीं. नीलम जीजी के आने की खबर से घर में उत्साह की लहर फैली थी. उन की सहेली के परिवार वाले निमंत्रणपत्र देने आए तो बारबार सभी से विवाह में शामिल होने की मनुहार कर रहे थे.

ससुराल शहर में ही थी, इसलिए नीलम जीजी शाम को ही औटो से आईं. राहुल भी साथ था और बहुत सा सामान भी. घर में मैं और अम्मां ही थे. मैं किचन में लगी थी. वे सारा सामान अकेले ही ले कर अंदर आ गईं. सहेली के विवाह में शामिल होने आई थीं, इसलिए बहुत अच्छे मूड में थीं. मैं ने आगे बढ़ कर उन्हें गले लगाया. उन्होंने फिर पहले की तरह मुसकान दी और स्वयं को मुझ से अलग करते हुए अम्मां के पास चली गईं.

अगले दिन दोपहर से संगीत का कार्यक्रम था. मुझे लगा कि मुझे भी नीलम साथ ले कर जाएंगी, इसलिए मैं जल्दीजल्दी काम निबटाने लगी.

अचानक अम्मांजी की आवाज आई, ‘‘बहू, मेरा और नीलम का खाना मत बनाना. हमारा खाना वहीं होगा.’’

मैं आहत सी हो गई. मैं नईनवेली दुलहन पर मुझे तो कोई किसी योग्य समझता ही नहीं. मन मार कर काम में लग गई. तभी अचानक नीलम जीजी की जोरजोर से रोने की आवाजें आने लगीं. मैं डर गई कि क्या हुआ. कहीं राहुल को चोट तो नहीं लग गई. मैं आटे से सने हाथों को जल्दी से धो कर अंदर कमरे की ओर दौड़ी. अंदर जा कर देखा नीलम जीजी अपना सामान बिखराए रो रही थीं. अम्मांजी बैग खोल कर कुछ ढूंढ़ रही थीं. पूछने पर मालूम चला कि नीलम दीदी का एक बैग शायद जल्दबाजी में औटोरिकशा में ही छूट गया. उस में उन के जेवर भी थे.

यह सुन कर मुझे बहुत बुरा लगा. अब तो औटोचालक की ईमानदारी पर ही उम्मीद लगाई कि शायद पुलिस स्टेशन में जमा करा दे अथवा घर आ कर लौटा जाए. नीलम को न तो औटो का नंबर याद था और न ही चालक का चेहरा. इस से परेशानी और बढ़ गई. घर में गहरा तनाव छा गया था.

पापाजी ने इन्हें भी औफिस से बुलवा लिया था. दोनों पुलिस स्टेशन रपट लिखवाने गए. पर वहां जा कर भी कोई ऐसी तसल्ली नहीं मिली जिस से तनाव कम हो जाता. बेटी का मायके आ कर जेवर खो देना मायके वालों के लिए बहुत बदनामी काकारण था. शेखर और रवि दोनों मिल कर जीजी को दिलासा दे रहे थे. नीलम जीजी एक ही प्रलाप किए जा रही थीं कि ससुराल जा कर क्या मुंह दिखाऊंगी. अम्मां औटो वाले को कोस रही थीं. मैं और पापाजी दोनों बेबस से खड़े थे.

उस दिन किसी ने खाना नहीं खाया. मैं ने बड़ी कठिनाई से राहुल को दूध व बिस्कुट खिलाए. अगले दिन शाम तक न पुलिस स्टेशन से कोई खबर आई और न ही औटोचालक का ही कुछ अतापता मिला. सभी निराश हो चले थे. मुझे नीलम जीजी की दशा देख कर बहुत दुख हो रहा था. कितने उत्साह से विवाह में शामिल होने आई थीं और किस परेशानी में घिर गईं. अगर कभी मायके जा कर मेरे साथ यह घटना हो जाती तो? यह सोच मैं मन ही मन कांप गई. मेरे मन में विचारों की उधेड़बुन चल रही थी कि कैसे नीलम जीजी की परेशानी दूर करूं.

अचानक दिमाग में बिजली कौंधी. मैं दृढ़ कदमों से अपने कमरे में गई और अपनी अलमारी से सारे जेवर निकाल लाई. जेवरों का डब्बा मैं ने नीलम जीजी को देते हुए कहा, ‘‘लो जीजी, ये जेवर आज से आप के हुए. मेरे तो फिर बन जाएंगे… अभी आप का जेवरों के कारण कोई अपमान नहीं होना चाहिए.’’

सभी हैरानी से मेरा मुंह देखने लगे मानो उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा हो.

कुछ ही क्षणों बाद घर के सभी सदस्य गहने लेने से इनकार करने लगे तो मैं ने सधे स्वर में कहा, ‘‘मैं जेवर, नीलम जीजी को दे कर कोई एहसान नहीं कर रही हूं. आप सब मेरा परिवार हैं. आप के मानअपमान में मैं भी बराबर की हिस्सेदार हूं. आजकल आएदिन लूटपाट की खबरें आती रहती हैं. गहने तो अधिकतर लौकरों की शोभा ही बढ़ाते हैं,’’ यह कह मैं किचन की ओर चल दी.

तभी नीलम जीजी ने लपक कर मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगीं, ‘‘नहींनहीं भाभी मैं अपनी लापरवाही की सजा आप को नहीं दे सकती,’’ और फिर से जेवर वापस करने लगीं.

इस बार मैं ने उन्हें राहुल का वास्ता दे कर जेवर ले लेने को कहा. कोई चारा न देख कर उन्होंने जेवर ले लिए.

शेखर और रवि भैया मुझे प्रशंसाभरी नजरों से देख रहे थे.

पापा ने मेरी पीठ थपथपाते हुए कहा, ‘‘बहू, इस समय जो तुम ने हमारे लिए किया उसे हम जीवन भर नहीं भुला पाएंगे.’’

हर समय पराए घर की और पराया खून की रट लगाने वाली अम्मांजी लज्जित सी सिर झुकाए बैठी थीं. जेवरों का यों खो जाना कोई मामूली चोट न थी. फिर भी फिलहाल उस पर मरहम लगा दिया. सभी बेमन से थोड़ाबहुत खा कर सो गए.

नीलम जीजी जैसेतैसे सहेली की शादी निबटा कर चली गईं. ससुराल में जा कर बताया कि भाभी के जेवर नए डिजाइन के थे, इसलिए उन से बदल लिए. उन की ससुराल वाले खुले विचारों के लोग थे. अत: उन्होंने कोई पूछताछ नहीं की.

इस घटना के बाद से सब का मेरे प्रति व्यवहार बदल गया. शेखर बाहर घुमाने भी ले जाने लगे. खाना बन जाने पर रवि भैया और शेखरजी डाइनिंगटेबल पर प्लेटें, डोंगे रखवाने में मेरी मदद करते. खाने के समय सब मेरा इंतजार करते.

एक दिन तो अम्मां ने यहां तक कह दिया, ‘‘बहू रोटियां बना कर कैसरोल में रख लिया करो. सब के साथ ही खाना खाया करो.’’

मैं मन ही मन इस बदलाव से खुश थी. पर मन में रेनू और राजू की चिंता, किसी फांस की तरह चुभती रहती. मैं ऊपर से सामान्य दिखने का प्रयत्न करती रहती.

मुझे सहारनपुर से लौटे लगभग 2 महीने होने को आए थे.

पापा का 2-3 बार कुशलमंगल पूछने के लिए फोन आ चुका था. मम्मी से भी बात हो गई थी. रेनू और राजू से एक बार भी बात नहीं हो पाई. उन के बारे में जब भी पूछा, पापा ने घर पर नहीं हैं कह कर बहाना बना दिया. हो सकता है वे दोनों बात करना न चाहते हों.

कल रात जब खाना बना रही थी तो सहारनपुर से पापा का फोन आया. घबराए हुए थे. उन्होंने कहा, ‘‘मीनू बेटी, तेरी मम्मी की तबीयत खराब है, उन्हें पीलिया हो गया है. तुम्हें बहुत याद कर रही हैं.’’

मैं समझ गई मम्मी की तबीयत ज्यादा ही खराब होगी. तभी पापा ने मुझे फोन किया वरना नहीं करते. मेरी आंखें भर आईं. मैं ने पापा को आने का आश्वासन दे कर फोन काट दिया.

पीछे मुड़ी तो कमरे में अम्मां और पापाजी खड़े थे. मेरे चेहरे पर चिंता की रेखाएं देख कर पूछने लगे, ‘‘बहू, मायके में सब कुशलमंगल तो है?’’

मम्मी की तबीयत के बारे में बतातेबताते मैं रो पड़ी.

अम्मां ने मुझे सांत्वना दी. पापाजी ने कहा, ‘‘तुम सुबह ही शेखर को ले कर चली जाओ. मम्मी की देखभाल करो. शेखर के पास छुट्टियां कम हैं पर 1-2 दिन रह कर लौट आएगा. तुम जितने दिन चाहो रह लेना.’’

अगले दिन मैं और शेखर सहारनपुर जा पहुंचे. सारा घर अस्तव्यस्त हो रखा था. मैं ने मम्मी को देखा तो हैरान रह गई. वे बहुत कमजोर हो गई थीं. आंखों में बहुत पीलापन आ गया था.

इलाज तो चल ही रहा था, पर मुझे तसल्ली न हुई. मैं और शेखर मम्मी को दूसरे डाक्टर के पास ले गए. शहर में इन का अच्छे डाक्टरों में नाम आता था. मुआयना करने के बाद डाक्टर ने कहा कि मर्ज काफी बढ़ गया है, पर परहेज और आराम करने से सुधार आ सकता है.

घर पहुंचने पर पाया रेनू और राजू भी आ गए थे. मुझे देख कर दोनों के चेहरे उतर गए, पर मैं भी उन से औपचारिक बातें ही करती.

चौथे दिन मम्मी के स्वास्थ्य में सुधार दिखने लगा. पापा के चेहरे पर भी रौनक लौट आई. यह देख बहुत अच्छा लगा. दोपहर को मैं मम्मी को खिचड़ी खिलाने लगी. घर में कोई नहीं था. मम्मी ने खिचड़ी खा कर प्लेट एक ओर रख कर मेरे दोनों हाथ पकड़ कर मुझे पलंग पर अपने पास ही बैठा लिया. उन की आंखों में आंसू थे.

वे रोते हुए बोलीं, ‘‘मीनू, बेटी पिछली बार हम से तुम्हारा बड़ा अपमान हो गया था. मुझे माफ कर दे बेटी. मैं मजबूर हो गई थी,’’ और फिर मेरे सामने हाथ जोड़ने लगीं.

मुझे बहुत बुरा लगा. मैं ने उन के हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘मम्मी, आप यह क्या कर रही हैं? आप न तो पिछली बातें सोचेंगी और न ही कहेंगी. बस अपनी सेहत पर ध्यान दें.’’

धीरेधीरे मां खुलती गईं. अपनी मन की पीड़ा से मुझे अवगत कराने लगीं. उन्होंने बताया कि रेनू किस तरह घर के प्रति लापरवाह हो गई है. जब से बीमार हुईं हूं सवेरे ही कुछ बना कर डाइनिंगटेबल पर रख जाती है. शाम को भी यही हाल है. जल्दबाजी में कुछ भी कच्चापक्का बना कर दे देती है. कुछ कहो या पूछो तो गुस्सा हो जाती है.

राजू भी दिन भर बाहर रहता है. खानेपीने का कोई नियम नहीं. तेरे पापा ने चाय बनानी सीख ली है. चाय तो वे ही बना लेते हैं.

ये सब सुन कर मन बेहद दुखी हुआ. मैं भी रेनू और राजू के बहकते कदमों के बारे में मम्मी को सतर्क करना चाहती थी पर उन के स्वास्थ्य को देखते हुए मैं ने इस विषय पर चुप्पी ही साध ली.

अगले दिन मैं ने अपनी सहेली चित्रा को फोन किया. वह मुझ से मिलने घर आ गई. विवाह के बाद मैं उसे मिल न पाई थी. चित्रा मेरी बचपन की एक मात्र अंतरंग सखी थी. वह एक धनी व्यवसायी की बेटी थी, परंतु घमंड से कोसों दूर थी. बेहद स्नेहमयी थी. इसीलिए वह हमेशा मेरे दिल के करीब रही. दोनों एकदूसरे के दुखसुख में भागीदार रहती थीं.

चित्रा के आने पर मेरा मन खुश हो उठा. हम दोनों पहले मम्मी के पास बैठीं.

मम्मी बोलीं, ‘‘अरे चित्रा, आज तो तू मीनू को कहीं बाहर घुमा ला. जब से आई है मेरी सेवा में लगी है. अब मैं ठीक हूं.’’

चित्रा ने चलने का अनुरोध किया तो मैं मना न कर पाई. वह अपनी कार में आई थी. दोनों एक रेस्तरां में पहुंच गईं. चित्रा ने कौफी और सैंडविच का और्डर दिया. फिर दोनों बतियाने लगीं. चित्रा मुझ से मेरे विवाह और ससुराल के अनुभव सुनने के लिए बेताब थी. फिर अचानक चित्रा गंभीर हो गई. बोली, ‘‘मीनू, हम दोनों कितने समय बाद मिले हैं. मैं तेरा दिल दुखाना नहीं चाहती हूं पर इस विषय पर चुप्पी साध कर भी मैं तेरा और तेरे परिवार का नुकसान नहीं करना चाहती.’’

मैं ने उसे सब कुछ खुल कर बताने को कहा तो चित्रा ने कहा, ‘‘मीनू तू तो जानती है

कि मेरा छोटा भाई रजत और राजू कालेज में एकसाथ ही हैं. रजत ने मुझे बताया कि राजू 3-4 महीनों से कालेज में बहुत कम दिखाई देता है. वह कुछ दादा टाइप लड़कों के साथ घूमता है. प्रोफैसर उसे कई बार चेतावनी दे चुके हैं. मुझे लगता है उसे अभी न रोका गया तो वह गलत रास्ते पर आगे बढ़ जाएगा, फिर वहां से लौटना कठिन हो जाएगा.’’

मैं ने चित्रा को शुक्रिया कहा और बोली, ‘‘तू ने सही समय पर मुझे सचेत कर दिया. राजू से आज ही बात करती हूं.’’

बात निकली तो मैं ने रेनू के बारे में भी चित्रा को सब बता दिया. मेरी बात सुन कर चित्रा कहने लगी, ‘‘वैसे तो इस उम्र में लड़कियों और लड़कों में आकर्षण आम बात है पर परेशानी तब होती है जब लड़के मासूम लड़कियों को बहलाफुसला कर उन से संबंध बना कर उन के आपत्तिजनक वीडियो बना कर ब्लैकमेल करने लगते हैं.’’

मैं ने कहा, ‘‘बस चित्रा मुझे यही चिंता खा रही है. रेनू सुनने को तैयार ही नहीं है.

क्या करूं?’’

अभी हम बातें कर ही रही थीं कि एकाएक मेरी नजर सामने की टेबल पर पड़ी. वहां एक नवयुवक और एक नवयुवती हाथों में हाथ डाले जूस पी रहे थे. वे धीरेधीरे बातें कर रहे थे. मुझे लगा कि इस लड़के को कहीं देखा है. दिमाग पर जोर डाला और ध्यान से देखा तो याद आ गया. यह वही लड़का है, जिस के साथ रेनू बाइक पर घूमती है.

बस अब मेरा दिमाग तेजी से काम करने लगा. इस फ्लर्टी लड़के के चक्कर में रेनू मेरा इतना अपमान कर रही थी. मैं ने झटपट एक प्लान बनाया और चित्रा को समझाया. चित्रा वाशरूम जाने के बहाने उन दोनों के पास जा कर रुकेगी और मैं समय नष्ट न करते हुए मोबाइल से उन का फोटो ले लूंगी. अगर वह जोड़ा सचेत हो जाता है, तो मैं कैमरे का रुख चित्रा की ओर कर के उसे पोज देने को कहने लगूंगी. मगर दोनों प्रेमी अपने आसपास की चहलपहल से बेखबर एक ही गिलास में जूस पीने में मस्त थे. मैं ने जल्दी से फोटो लिए और हम दोनों रेस्तरां से बाहर आ गईं.

घर पर रेनू और राजू भी आ चुके थे. राजू तो चित्रा को घर आया देख सकपका सा गया

पर चित्रा को रेनू बहुत पसंद करती थी, इसलिए वह चित्रा से बहुत प्यार से मिली. एकदूसरे का हालचाल पूछ कर रेनू सब के लिए चाय बनाने चली गई.

कुछ देर रुक राजू मौका देख कर कोचिंग क्लास के बहाने बाहर जाने लगा तो चित्रा ने लपक कर उस का हाथ पकड़ लिया और बोली, ‘‘क्यों मैं इतने दिनों बाद आई हूं, मुझ से बातचीत नहीं करोगे? मीनू के ससुराल जाने के बाद अब मैं ही तुम्हारी दीदी हूं. मुझ से अपने मन की बात कह सकते हो,’’ यह कहतेकहते वह राजू को अलग कमरे में ले गई.

चित्रा ने राजू को समझाया, ‘‘तुम्हारी हरकतों से तुम्हारा कैरियर तो खराब होगा ही, पूरे घर के मानसम्मान पर भी धब्बा लगेगा. तुम्हारे मातापिता तुम से कितनी उम्मीदें लगाए बैठे हैं.’’

राजू सब सिर झुकाए सुनता रहा.

चित्रा ने आगे कहा, ‘‘तुम कल से नियमित कालेज जाओ… उन लड़कों से मिलनाजुलना बंद करो. अगर इस में कोई भी समस्या सामने आती है, तो प्रोफैसर आदित्य के पास चले जाना. वे मेरे कजिन हैं. हर तरह से तुम्हारी मदद करेंगे. हां, अब तुम्हारी सारी गतिविधियों पर ध्यान भी रखा जाएगा. याद रहे तुम्हारी मीनू दीदी उसी कालेज में टौपर रह चुकी हैं.’’

राजू चित्रा का बहुत आदर करता था. अत: ये सब सुन कर रो पड़ा. उस ने चित्रा से वादा किया कि वह उन की बातों पर अमल करेगा. चित्रा ने प्यार से उस की पीठ थपथपाई. तभी

रेनू चाय बना कर कर ले आई. उधर मैं ने भी अपना काम कर लिया. मैं ने रेस्तरां में खींचे गए फोटो वहीं रख दिए जहां टेबल पर रेनू ने चाय रखी थी. मैं वहां से उठ कर मम्मी के कमरे में चली गई.

रेनू चाय के लिए सब को बुलाने लगी. हम सब हंसतेखिलाते चाय पीने लगे. तभी रेनू की नजर फोटो पर पड़ गई, ‘‘किस के फोटो हैं ये?’’ कह कर उन्हें उठा लिया.

चित्रा बोली, ‘‘ये मेरे फोटो खींच रही थी. मेरे तो खींच नहीं पाई. यह जोड़ा रेस्तरां में बैठा था, उस की खिंच गई. मीनू तू तो मोबाइल से भी फोटो नहीं खींच पाती.’’

फोटो देखते ही रेनू के चेहरे का रंग बदल गया. हम चुपचाप अनजान बने चाय पीते रहे.

रेनू चुपचाप वहां से चली गई. हम थोड़ी देर बाद रेनू के कमरे में जा पहुंचे. वह बिस्तर पर पड़ी रो रही थी.

चित्रा ने उस से प्यार से रोने का कारण पूछा तो उस ने पहले तो बहाना किया पर उस का बहाना मेरे और चित्रा के सामने नहीं चला. मैं ने पुचकार कर पूछा तो उस ने उस लड़के के बारे में सब बता दिया. मैं ने और चित्रा ने उसे इस उम्र में होने वाली गलतियों से आगाह किया और पढ़ाईलिखाई में ध्यान देने को कहा.

रेनू रोतेरोते मेरे गले लग गई और बोली, ‘‘दीदी, मुझे डांटो, मैं बहुत खराब हूं.’’

तब मैं ने प्यार से समझाया, ‘‘सुबह का भूला अगर शाम को घर वापस आ जाए तो उसे भूला नहीं कहते. अब मम्मीपापा की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी तुम्हारी है.’’

रेनू ने हां में सिर हिला दिया. राजू भी सिर झुकाए खड़ा था. वह भी मेरे गले लग गया.

चित्रा जाते समय मम्मीपापा से मिलने गई तो हंस कर बोली, ‘‘अंकल जिस काम के लिए मैं यहां आई थी उसे तो भूल कर जा रही थी. दरअसल, पापा ने मुझे आप के पास इसलिए भेजा था कि पापा को अपने व्यवसाय के लिए एक अनुभवी अकाउंटैंट चाहिए. यदि आप यह कार्य संभाल लें तो उन की चिंता कम हो जाएगी.’’

पापा की खुशी की सीमा न रही. बोले, ‘‘नेकी और पूछपूछ. चित्रा बेटी तुम्हारा यह उपकार कभी नहीं भूलूंगा.’’

यह सुन कर चित्रा प्यार भरे गुस्से से बोली, ‘‘अंकल आप ऐसा कहेंगे तो मैं आप से बहुत नाराज हो जाऊंगी.’’

पापा ने मुसकरा कर अपने कान पकड़ लिए तो सभी जोर से हंस पड़े. सारा माहौल खुशगवार हो गया.

मम्मी अब ठीक थीं. रेनू ने भी घर के कामकाज में ध्यान देना शुरू कर दिया था. मैं ने भी ससुराल लौटने की इच्छा जताई. इस बार राजू मुझे ससुराल छोड़ने जा रहा था. अगले दिन मैं जाने से पहले मम्मीपापा के कमरे के पास से गुजर रही थी तो मुझे उन की बातचीत सुनाई पड़ी.

मम्मी कह रही थीं, ‘‘देखो हम बेटियों को पराया धन, पराई अमानत कह कर दुखी करते हैं परंतु बेटियां पति के घर जा कर भी पिता की चिंता नहीं छोड़तीं.’’

पापा हंस कर बोले, ‘‘तुम ने वह कहावत नहीं सुनी है कि बेटे अपने तब तक रहते हैं जब तक न हो वाइफ और बेटियां तब तक साथ रहती हैं जब तक हो लाइफ.’’

यह सुन कर मैं भी मुसकरा दी. अगले दिन मैं मायके से विदा हो कर ससुराल आ गई. सभी मुझ से और राजू से बहुत प्यार से मिले. शेखर ने राजू को पूरी दिल्ली घुमाया. कई तोहफे दिए. नीलम जीजी भी राजू से मिलने आईं. राजू बहुत ही अच्छे मूड में विदा हुआ.

अम्मां के घुटनों के दर्द के लिए मैं एक तेल लाई थी. उस से मालिश कर के अम्मां और पापाजी के कमरे से निकली तो पापा की आवाज सुनाई दी, ‘‘बहुएं तो प्यार की भूखी होती हैं. जब तक उन्हें पराए घर की, पराए खून की कहते रहेंगे वे ससुराल में अपनी जगह कैसे बनाएंगी?’’

अम्मां बोलीं, ‘‘सच कह रहे हो शेखर के पापा… वे बेचारियां अपना मायके का सब कुछ छोड़ कर हमारे आसरे आती हैं और हम उन्हें अपनाने में पीछे हटते हैं.’’

‘‘ये नादानियां तुम्हीं ने सब से ज्यादा की हैं,’’ पापा ने कहा तो अम्मां ने शर्म से सिर झुका लिया.

समाज की वर्जनाओं को तोड़ने की पहल करें महिलाएं

तेहरान में 39 साल बाद महिलाओं ने फिर आजादी का जश्न मनाया और हजारों की संख्या में तेहरान के सब से बड़े आजादी स्टेडियम में एक बड़ी स्क्रीन पर रूस में हुए फुटबौल विश्व कप का मैच देखा. दरअसल, यहां की महिलाओं को 1979 की इसलामिक क्रांति के बाद से ही खेल स्टेडियमों में आने की इजाजत नहीं थी. इस प्रतिबंध का संबंध सीधे धर्म से था. पर 27 जून, 2018 को स्पेन और ईरान के मैच से पहले स्टेडियम को महिलाओं के लिए खोल दिया गया.

ईरान के रूढिवादी नेताओं ने इस फैसले का विरोध किया. महाअभियोजक मोहम्मद जफर मोंटेजरी ने महिलाओं द्वारा इस तरह सिर से स्कार्फ हटा कर जश्न मनाने, गाने और नृत्य करने को शर्मनाक बताया. गौरतलब है कि ईरान में महिलाओं के लिए सिर पर स्कार्फ पहनना जरूरी है.

कुछ अरसा पहले स्कार्फ की अनिवार्यता के चलते भारत की शतरंज चैंपियन सौम्या स्वामीनाथन ने ईरान में एशियन टूरनामैंट में खेलने से इनकार कर दिया था. 29 साल की ग्रैंडमास्टर सौम्या ने इस नियम को मानवाधिकार का उल्लंघन बताया था. इस से पहले शूटर हिना सिद्द्धू ने 2016 में ईरान के एशियाई एअरगन मुकाबले से खुद को अलग कर लिया था. भारत के अलावा और कई अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी भी ऐसा कर चुके हैं.

सऊदी अरब, ईरान जैसे मुसलिम और दूसरे पिछड़े देशों में महिलाओं के ऊपर तरहतरह की पाबंदियां लगी हुई हैं. सऊदी अरब में ऐसे बहुत से काम हैं, जो महिलाएं नहीं कर सकतीं-

– महिलाओं को घूमने, बैंक अकाउंट खोलने, पासपोर्ट बनवाने, शादी, तलाक, किसी तरह का कौंट्रैक्स साइन करने के लिए अपने घर के पुरुष सदस्यों से इजाजत लेनी जरूरी है.

– महिलाएं वैसे कपड़े नहीं पहन सकतीं जो उन्हें खूबसूरत दिखाते हों.

– अपने रिश्तेदारों के सिवा अन्य पुरुषों से महिलाएं एक सीमित समय तक ही बात कर सकती हैं.

– संयुक्त अरब की महिलाएं सार्वजनिक स्वीमिंग पूल्स में नहीं जा सकतीं. उन्हें केवल महिलाओं के लिए बने जिम और स्पा में ही जाने की इजाजत है.

– शौपिंग करने गई महिलाओं को ट्रायलरूम में कपड़े बदलने की भी इजाजत नहीं. उन्हें बिना ट्राई किए ही कपड़े पसंद करने होते हैं.

– महिलाएं मातापिता की संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार नहीं होतीं.

भारत में भी कमोबेश यही हाल है. कभी मासिकधर्म के नाम पर, कभी परदाप्रथा के नाम पर, कभी सड़ीगली परंपराओं के नाम पर तो कभी असुरक्षित माहौल के नाम पर उन के पैरों में बंदिशों की मोटीमोटी जंजीरें डाल दी जाती हैं.

महिलाओं के कपड़ों को ले कर अकसर बखेड़े होते रहते हैं. लगता है जैसे शरीर महिलाओं का नहीं तथाकथित संस्कारों और परंपराओं का भार ढोते हुए समाज को सही रास्ता दिखाने का ठेका लेने वाले धर्मगुरुओं व पोंगापंडितों का है.

महिलाओं के साथ कोई अपराध हो तो उन्हें ही दोषी करार दिया जाता है. उन्हें परदे के अंदर रहने की हिदायत दी जाती है. हर तरह की चैलेंजिंग जौब से दूर रखा जाता है.

कोमलता कमजोरी नहीं

सवाल उठता है कि क्या महिला होना अपराध है? क्या पुरुषों की तरह औरतें इंसान नहीं? क्या उन का शरीर किसी और चीज से बना है? क्या उन के पास दिल और दिमाग नहीं? क्या वे सोचसमझ नहीं सकतीं? अपने फैसले खुद नहीं ले सकतीं? उन्हें इस कदर बांध कर और पुरुषों के अधीन क्यों रखा जाता है? यदि वे अपने बल पर जीने या कुछ कर दिखाने के काबिल हैं, तो उन्हें रोका क्यों जाता है?

शरीर, हां एक शरीर ही है जो पुरुषों से थोड़ा अलग है. पुरुषों के मुकाबले महिलाएं शारीरिक रूप से थोड़ी नाजुक होती हैं. इसी कोमल तन और मन के नाम पर उन के साथ नाइंसाफियां की जाती हैं.

महिला की कोमलता को उस की कमजोरी मानने वाले पुरुष यह भूल जाते हैं कि इसी कोमल शरीर ने एक से एक ताकतवर पुरुषों को जन्म दिया है. पुरुषों ने इस हकीकत को नजरअंदाज करते हुए कोमलता के नाम पर महिलाओं के शरीर पर अधिकार जमाया.

देह पर किस का अधिकार

देह पर अधिकार को ले कर हाल ही में अटौर्नी जनरल मुकुल रोहतगी का एक दिलचस्प बयान सामने आया. आधार कार्ड को ले कर सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा कि नागरिक अपने शरीर के अंगों पर पूर्ण अधिकार का दावा नहीं कर सकते. वे आधार नामांकन के लिए डिजिटल फिंगरप्रिंट और आइरिस को लेने से मना नहीं कर सकते.

भाजपा सरकार की ओर से रोहतगी ने तर्क दिया कि कोईर् भी व्यक्ति अपने शरीर पर पूर्ण अधिकार का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि कानून लोगों को आत्महत्या करने और महिलाओं को ऐडवांस स्टेज पर गर्भपात करने से रोकता है. यदि उन का अपने शरीर पर पूर्ण अधिकार होता तो लोग अपने शरीर के साथ जो भी करना चाहते वह करने के लिए स्वतंत्र होते. बाद में उन के इस तर्क को कोर्ट ने सिरे से नकार दिया.

हालांकि यहां देह की बात दूसरे संदर्भ में की गई, मगर जब हम महिलाओं की देह की बात करते हैं तो कहीं न कहीं यही मानसिकता हमारे अंदर सिर उठाए रखती है. जहां तक इस बयान का हकीकत से संबंध है, महिलाओं के संदर्भ में इसे वास्तव में लागू किया जाता है. महिलाओं का अपने शरीर पर पूर्ण अधिकार नहीं. पूर्ण क्या, बहुत सी जगह तो महिलाओं को अपने शरीर पर थोड़ा भी हक देने की फितरत नहीं रखी जाती.

टूट रही हैं दीवारें

लंबे अरसे से सऊदी अरब की महिलाओं को ड्राइविंग यानी गाड़ी चलाने का अधिकार नहीं था. वे केवल पिछली सीट पर बैठ सकती थीं.

समयसमय पर वहां की महिलाएं इस के खिलाफ आवाज उठाती रहीं. 1990 में जब 47 महिलाओं ने इस के खिलाफ नारा बुलंद किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. उन के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए. 2007 में महिला ऐक्टिविस्ट्स ने तत्कालीन उस समय के किंग अबदुल्लाह को ड्राइविंग से बैन हटाने के लिए 1000 हस्ताक्षरों के साथ एक याचिका दी पर कोईर् सुनवाई नहीं हुई.

नवंबर, 2014 को संयुक्त अरब अमीरात तक ड्राइव करने की कोशिश के बाद ऐक्टिविस्ट्स लूजा इन हथलाउल और मायसा अल अमूदी को 73 दिनों तक हिरासत में रखा गया. इन पर आतंकवाद से जुड़े केस दर्ज किए गए.

बीते साल सितंबर में किंग सलमान ने अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान द्वारा सुधारों को लागू किए जाने के बाद महिलाओं की ड्राइविंग पर लगे बैन को हटाने का आदेश दिया और फिर गत 24 जून की आधी रात से महिलाओं की ड्राइविंग पर लगा बैन पूरी तरह से हट गया. महिलाएं कारों का स्टीयरिंग थामे इस आजादी का जश्न मनाती सड़कों पर नजर आने लगीं. आधिकारिक तौर पर उन्हें सड़कों पर ड्राइविंग करने की इजाजत जो मिल गई थी. लाइसैंस बनवाने के लिए महिलाओं की लंबी लाइनें लग गईं.

संयुक्त अरब अमीरात दुनिया का ऐसा आखिरी देश है जहां इस तरह का प्रतिबंध कायम था. इस प्रतिबंध के हटने से खाड़ी देशों की 1.5 करोड़ से ज्यादा महिलाएं पहली बार सड़कों पर गाडि़या चला सकेंगी.

सोच बदलनी जरूरी

भले ही प्रतिबंधों के टूटने पर महिलाओं का उत्साह बढ़ता है पर प्रतिबंधों को हटाने के साथसाथ लोगों की मानसिकता भी बदलनी जरूरी है. उदाहरण के लिए एक तरफ जहां संयुक्त अरब अमीरात की महिलाएं ड्राइविंग का हक मिलने के बाद आजादी का जश्न मना रही थीं, तो वहीं दूसरी तरफ इस खबर की रिपोर्टिंग करते हुए एक महिला रिपोर्टर का ऐसा वीडियो वायरल हुआ कि उसे देश छोड़ कर भागना पड़ा.

संयुक्त अरब अमीरात प्रशासन ने उस रिपोर्टर के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए. वजह थी रिपोर्टिंग के दौरान अश्लील कपड़े पहनना, दरअसल, टीवी की रिपोर्टर शिरीन का हैडस्कार्फ ढीला था और उस ने थोड़ा खुला गाउन पहना था. इसी बात को उछालते हुए संस्कृति के तथाकथित रखवालों ने ट्विटर पर नैकेड वूमन ड्राइविंग इन रियाद हैशटैग से वीडियो वायरल कर दिया.

आज के दौर में समाज की उन्नति के लिए स्त्रियों के बढ़ते कदमों को हौसला देने की जरूरत है न कि अपनी कुंठाओं और घटिया सोच के बोझ तले उन के अरमानों को कुचलने और बंदिशों की डोर से बांधने की.

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