2016 की मराठी भाषा की सुपरहिट फिल्म ‘‘सैराट’’ का शशांक खेतान ने हिंदी रीमेक ‘‘धड़क’’ बनाया है, जिसे देखकर अहसास होता है कि फिल्मकार ने ‘सैराट’ की ही औनर कीलिंग कर डाली. ‘धड़क’ से ‘सैराट’ की रूह गायब है. कहा जाता है कि ‘समरथ को नहीं दोष गोसांई’.. इसीलिए ‘धड़क’ के फिल्मसर्जक ने अपने धन बल का भरपूर उपयोग करते हुए क्षेत्रीय भाषा की अति संवेदनशील व औनर कीलिंग के साथ राजनीतिक व सामाजिक परिवेश पर कुठाराघात करने वाली फिल्म ‘‘सैराट’’ को ‘धड़क’ में तहस नहस कर दिया. फिल्मकार नागराज मंजुले ने जिस कौशल व गहराई के साथ ‘सैराट’ में जातिगत व क्लास के चलते भेदभाव व औनर कीलिंग को पेशकर लोगों को सोचने पर मजबूर किया था, उसमें शशांक खेतान बुरी तरह से पस्त नजर आते हैं. ‘सैराट’ की तरह‘धड़क’ में प्रेमी जोड़े में डर व निराशा का अहसास उभरता ही नही है.

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