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चौथे वनडे में रोहित का धमाल, वेस्टइंडीज बेहाल

29 अक्टूबर को मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में शिखर धवन के आउट होते ही जब कप्तान विराट कोहली मैदान में उतरे तो सब को यही लग रहा था कि वे अपनी शानदार फौर्म के चलते लगातार चौथा शतक भी जड़ देंगे. पर ऐसा हो न पाया. लेकिन इस की भरपाई रोहित शर्मा और अंबाती रायुडू की उम्दा बल्लेबाजी ने पूरी कर दी और भारत ने वेस्टइंडीज को 224 रनों से हरा कर इस सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली.

इतना ही नहीं, भारतीय टीम ने वनडे में रनों के हिसाब से अपनी तीसरी सब से बड़ी जीत दर्ज की, जबकि वेस्टइंडीज के खिलाफ यह उस की सब से बड़ी जीत रही.

मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में टौस जीत कर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 5 विकेट पर 377 रन का विशाल स्कोर बनाया. इस में रोहित शर्मा के 162 और अंबाती रायुडू के 100 शानदार रन शामिल थे. रनों के इस पहाड़ से मेहमान वेस्टइंडीज टीम पर इतना ज्यादा दबाव पड़ा कि वह 36.2 ओवरों में  महज 153 रनों पर आलआउट हो गई.

भारत की इस जीत के हीरो रोहित शर्मा और अंबाती रायुडू रहे, जिन्होंने तीसरे विकेट के लिए 211 रन जोड़े और भारत के लिए 377 रनों का विशाल अंबार लगा दिया.

लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की पारी की शुरुआत से ही लड़खड़ाती चली गई. 77 रन तक पहुंचते पहुंचते मेहमान टीम ने अपने 7 कीमती विकेट गंवा दिए थे. वह तो भला हो कप्तान जेसन होल्डर का जिन्होंने पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ मिल कर अपनी टीम के खाते में कुछ रन जोड़े और स्कोर को 150 के पार पहुंचाया.

इस सीरीज का दूसरा मैच टाई कराने और तीसरा मैच जीतने वाली वेस्टइंडीज टीम से उम्मीद थी कि उस के बल्लेबाज दोबारा उम्दा खेल दिखाएंगे पर उन की शुरुआत खराब रही और उस के 3 विकेट 20 के स्कोर तक गिर गए. बाद में कप्तान जेसन होल्डर ने अपनी टीम के लिए 54 रन की नाबाद पारी खेली जिस में 70 गेंदों पर 1 चौका और 2 छक्के लगाए.

रोहित और रायुडू के शानदार शतक

भारत की ओर से रोहित शर्मा ने ब्रेबौर्न स्टेडियम में अपने वनडे कैरियर का 21वां शतक जड़ा.

रोहित शर्मा और अंबाती रायुडू ने तीसरे विकेट के लिए 211 रन की साझेदारी की.

आउट होने से पहले रोहित शर्मा ने 137 गेंदों की अपनी पारी में 20 चौके और 4 छक्के जड़े.

अंबाती रायुडू ने 81 गेंदों पर 8 चौके और 2 छक्कों की मदद से 100 रन बनाए. उन्होंने वनडे कैरियर का तीसरा शतक 80 गेंदों पर पूरा किया.

रोहित शर्मा ने एक ही मैच में 150 से ज्यादा रन ठोंकने के अलावा 3 कैच पकड़ने का अनोखा रिकौर्ड बनाया. ऐसा करने वाले वे पहले बल्लेबाज बन गए हैं.

रोहित शर्मा ने भारत की तरफ से वनडे क्रिकेट में सब से ज्यादा छक्के लगाने के मामले में सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ दिया. सचिन ने 195 छक्के मारे थे पर रोहित अब उन से आगे हो गए हैं. अब उन के नाम 198 छक्के हैं. भारत की ओर से महेंद्र सिंह धौनी ने 331 मैचों में 218 छक्के लगाए हैं.

रोहित शर्मा को उन की बेहतरीन बल्लेबाजी और भारत को जीत दिलाने के लिए ‘मैन औफ द मैच’ का खिताब दिया गया.

रोहित शिखर की उपलब्धि

रोहित शर्मा और शिखर धवन की सलामी जोड़ी ने अपने नाम एक और उपलब्धि जोड़ी. वे भारत की दूसरी सब से कामयाब सलामी जोड़ी बन गए और दुनिया में वे चौथे नंबर पर आ गए हैं. उन्होंने सचिन तेंदुलकर और वीरेंदर सहवाग की जोड़ी को पीछे छोड़ा. सहवाग और सचिन ने 2002-2012 के बीच 93 वनडे इंटरनैशनल पारियों में 42.13 की औसत से 3919 रन बनाए थे. उन के बीच 12 शतकीय और 18 अर्धशतकीय साझेदारियां हुई थीं.

वैसे, वनडे मैचों में सब से कामयाब जोड़ी का रिकौर्ड भी भारतीय जोड़ी के नाम है. सचिन तेंदुलकर और सौरभ गांगुली की जोड़ी ने 136 वनडे मैचों में 6609 रन जोड़े थे. इस जोड़ी ने 21 शतकीय और 23 अर्धशतकीय पार्टनरशिप की थीं.

मुक्ति (अंतिम भाग) : जया ने आखिर अपनी जिंदगी में क्या भुगता

स्त्री बाहर काम करे तब भी घर के काम के लिए उसे ही खटना पड़ता है. पति अकसर अपनी जिम्मेदारी से हाथ झटक देते हैं. हां, उनकी सब जरूरतें पत्नी द्वारा समय पर पूरी हो जानी चाहिए. जया के साथ भी कुछ ऐसा ही था. पूर्व कथा जया की नौकरानी गंगा कई दिनों से काम पर नहीं आ रही थी जिस की वजह से जया पर घर का सारा काम आ पड़ा था और वह परेशान रहने लगी थी. एक दिन रानी ने बताया कि गंगा 3-4 दिन और नहीं आएगी क्योंकि वह बीमार है तो जया की परेशानी और बढ़ गई. गंगा का पति अकसर उसे बुरी तरह पीटता था जिस की वजह से वह बीमार रहने लगी थी.

जया ने रानी से कहा कि गंगा पति को छोड़ क्यों नहीं देती तो उस ने कहा कि पति चाहे कैसा हो वह पत्नी का सुरक्षा कवच होता है इसलिए वह उसे छोड़ नहीं सकती. दूसरी ओर जया की सहेली पद्मा जो एक पत्रकार थी और महिला क्लब की सदस्य भी, उस ने सुझाव रखा कि गंगा को उस के पति से तलाक दिलवाना ही ठीक रहेगा.

जया ने बातोंबातों में रानी से गंगा के घर का पता पूछ लिया. जब रानी को गंगा को ले कर महिला मंडल की बैठक होने का पता चला तो वह बोली, ‘‘आप पढ़ीलिखी मैडमों का दिमाग चल गया है. क्या एक औरत अपना बसाबसाया घर और पति को छोड़ सकती है. आप क्यों उसे बेसहारा करना चाहती हैं.’’ रानी को हाई सोसाइटी की इन औरतों पर बहुत क्रोध आ रहा था.

अब आगे…  टिन के उस जंगल में गंगा का घर खोजना तो सचमुच कुछ ऐसा ही था जैसे भूसे के ढेर में सूई ढूंढ़ना. बेतरतीब झोंपड़े, इधरउधर भागते बच्चों की टोलियां, उन्हें झिड़कती हुई माताओं को पार कर के उस के छोटे से एक कमरे वाले घर को तलाशने में ही पद्मा व जया की हालत खराब हो गई. गंगा को उस ने अपनी खोली के एक अंधेरे कोने में दुबका हुआ पाया. चेहरे पर खरोंच यह बता रहे थे कि इस बार मरम्मत कुछ ज्यादा ही अच्छी तरह से हुई थी. जया उस की खस्ता हालत को देख कर अचंभित तो थी ही, उस के जर्जर शरीर को देख कर उसे गहरा दुख भी हुआ.  उन्हें देख कर गंगा जल्दी से उठने लगी तो जया ने उसे हाथ बढ़ा कर रोक दिया. ‘‘बैठी रहो, गंगा,’’ उस ने आत्मीयता से कहा, ‘‘वैसे ही तुम्हारी हालत काफी नाजुक लग रही है.’’ 1 मिनट का असाधारण मौन छा गया और फिर गंगा उन के लिए चाय बनाने उठी. लाख मना करने पर भी मानी नहीं. चाय की चुसकियां लेते हुए जया व पद्मा ने बाहर कुछ आहट सुनी. पदचाप बाहर की ओर से आ रही थी. गंगा फुरती से उठी और 1 मिनट बाद लौटी, ‘‘मेरे पति हैं,’’ उस ने धीमी आवाज में कहा. पद्मा तो मानो इसी घड़ी की प्रतीक्षा में थी. वह तुरंत उठी व पल्लू खोंसते हुए तेजी से बाहर की ओर रुख करने लगी. गंगा ने हाथ बढ़ा कर उसे रोक लिया और दयनीय स्वर में बोली, ‘‘उसे कुछ मत कहना, बीबीजी.’’ जया ने महसूस किया कि गंगा का पति नशे की हालत में ऊलजुलूल बड़बड़ा रहा?था. 1 मिनट बाद चारपाई पर उस के ढेर होने की आवाज आई. ‘‘लगता है सो गया,’’ गंगा मुसकरा कर बोली, ‘‘अब 3-4 घंटे बेसुध पड़ा रहे तो मैं अपना बचाखुचा काम भी समेट लूं.’’ जया को उस बेचारी पर तरस आया कि इस हालत में भी वह घर संभालने में लगी हुई थी और उस का पति आराम से चारपाई तोड़ रहा था. जया को लगा कि वह और पद्मा गंगा के दैनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रही हैं. लौटने के उद्देश्य से उस ने गंगा की ओर देखा, ‘‘गंगा, अपना खयाल रखना, बता देना कब लौटोगी.’’  जया ने पद्मा की ओर कनखियों से इशारा किया. पद्मा तो जैसे भरी बैठी थी, ‘‘रुक भी जाओ, भूल गईं, किसलिए आए?थे यहां,’’ दांत भींचते हुए उस ने जया के हाथ से अपना हाथ छुड़ाया व गंगा की ओर मुखातिब हुई.  गंगा के चेहरे पर उस समय भाव कुछ ऐसे थे जैसे उसे अंदेशा हो गया था कि आगे क्या होगा. रानी ने शायद उसे पहले ही आगाह कर दिया था.  जया कहने लगी, ‘‘फिर कभी, आज नहीं.’’  दरअसल, वह यह नहीं समझ पा रही थी कि क्या यह सही वक्त था गंगा से तलाक के विषय में बात करने का. उस की कमजोर हालत जया को सोचने पर मजबूर कर रही थी. ‘‘नहीं, आज ही. मुझे क्यों रोक रही हो तुम,’’ पद्मा क्रोधित स्वर में जया से बोली, फिर वह गंगा से मुखातिब हुई, ‘‘देखो गंगा, अब और इस हालत से जूझते रहने का फायदा नहीं. क्या तुम्हें नहीं लग रहा कि तुम एक फटेहाल जिंदगी जी रही हो? क्या मिल रहा?है तुम्हें अपने पति से सिवा मारपीट व गालीगलौज के? तुम ने कभी सोचा नहीं कि उस आदमी को छोड़ कर तुम ज्यादा सुखी रहोगी? अपनी जिंदगी के बारे में भी सोचो कुछ.’’ पद्मा की उद्वेग के मारे सांस फूल रही थी और वह लगातार गंगा को प्रेरित करती रही कि ऐसा निरीह जीवन जीने की उसे कोई आवश्यकता नहीं थी. गंगा शांति से उन की बात सुन रही थी. पद्मा का रोष थोड़ा ठंडा हुआ, ‘‘देखो गंगा, अगर तुम चाहो तो हम तुम्हारे जीवनयापन के लिए कुछ न कुछ इंतजाम कर ही लेंगे. तुम्हारे लिए एक छोटी सी टेलरिंग यूनिट खोल देंगे. तुम निश्चय तो करो.’’ ‘‘मैं ने सब सुना?है बीबीजी. रानी तो रोज आ कर आप लोगों की बातें बताती ही रहती है. पर नहीं. मुझे इन चीजों की जरूरत नहीं. ‘‘बिलकुल भी नहीं,’’ पद्मा ने आपत्ति उठाने के लिए मुंह बस खोला ही था कि बाहर से तेज अस्पष्ट आवाजें सुनाई देने लगीं. इस से पहले कि जया और पद्मा कुछ समझतीं कि माजरा क्या है, गंगा बाहर भाग चुकी थी. उस के हाथ में 2 बड़ी बालटियां थीं. बाहर से लोगों की आवाजें दस्तक दे रही थीं, ‘‘टैंकर आ गया, टैंकर आ गया.’’ महानगर निगम के पानी का टैंकर पहुंच गया था. लोगों की अपार भीड़ एकत्र हो रही थी. जया व पद्मा बाहर आ कर नजारा देखने लगीं. यह समस्या तो इस शहर में कमज्यादा सभी तबकों की थी. आदमी सांस लेना भूल जाए पर टैंकर की आहट को नजरअंदाज कभी न कर पाए. महिलाओं व पुरुषों की भीड़ गुत्थमगुत्था हो रही थी. टैंकर के सामने घड़ों, बरतनों, बालटियों की बेतरतीब कतारें लग गई थीं. जया की आंखें उस भीड़ में गंगा को ढूंढ़ने लगीं. उस ने पाया कि गंगा अपनी बीमारी को लगभग भूल कर लोगों से उलझ कर 2 बालटी पानी भर लाई?थी. घर के अहाते तक आतेआते उस का शरीर पसीने से भीग चुका था. माथे पर कुमकुम का निशान भीग कर अर्धकार हो गया था. जयाचंद्रा ने सहारा देने के उद्देश्य से उस से एक बालटी लेने की कोशिश की. ‘‘नहीं, नहीं, बीबीजी. मैं संभाल लूंगी,’’ उस ने जया का हाथ छुड़ाया और पति की ओर इंगित करने लगी, ‘‘यह निखट्टू भी तो है. अभी जगाती हूं इसे,’’ यह कहते हुए गंगा ने अपने दांत भींचे व अंदर की ओर भागी. लौटी तो उस के हाथों में 2 बालटियां और थीं. दोनों बालटियां उस ने आंगन के कोने में रखीं, कमर कस कर पति की चारपाई के करीब जा खड़ी हुई. जया डर रही थी कि जगाने पर वह निर्दयी गंगा के साथ न जाने कैसा सलूक करेगा. अलसाया सा, आधी नींद में वह बड़बड़ा रहा था. और फिर वह अचंभा हुआ जिस की जया को कतई उम्मीद नहीं थी. गंगा ने चारपाई पर बेहोश पड़े पति को एक जोरदार लात मारी. मार के सदमे से वह हड़बड़ा कर उठ बैठा. आंखें मींचता हुआ वह जायजा लेने लगा कि गाज कहां से गिरी.  ‘‘उठ रे, शराबी,’’ गंगा ने दहाड़ मारी, ‘‘अभी नींद पूरी नहीं हुई या दूं मैं एक और लात.’’  वह आदमी धोती संभालता हुआ उठ खड़ा हुआ. 2 आगंतुक महिलाओं के सामने पिटने का एहसास जब हुआ तो बहुत देर हो चुकी थी. गंगा एक और लात जमाने के लिए तैयार खड़ी थी. लड़खड़ाए हुए पति के हाथ में उस ने बालटियां थमाईं और फरमान जारी किया, ‘‘जा, भर ला पानी, कमबख्त.’’ वह डगमगाता हुआ जब डोलने लगा तो गंगा ने 2 तमाचे और जड़ दिए, ‘‘अब जाता है कि…’’ और इसी के साथ दोचार मोटीमोटी गालियां भी पति के हिस्से में आ गईं.  जया व पद्मा अवाक् खड़ी थीं. उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि अभी जिस महिषासुरमर्दिनी को उन्होंने देखा था यह वही छुईमुई सी गंगा थी, जिसे वे चुपचाप घर का काम निबटाते हुए देखा करती थीं. यह कैसा अनोखा रूप था उस का. मुंह खुला का खुला रह गया. होश आया तो पाया कि गंगा आसपास कहीं नहीं थी. वह फिर उसी रेले में शामिल हो गई थी. जीजान से अन्य महिलाओं से लड़ती हुई अपने हिस्से के जल को बालटियों में भरते हुए. महिलाएं एकदूसरे पर हावी हो रही थीं और उन की कर्कश आवाजों से वातावरण गूंज रहा था. वे दोनों तब तक सन्न खड़ी रहीं जब तक गंगा घर में दोबारा आ नहीं गई. उन की फटी नजरों को भांपते हुए गंगा ने एक शर्मीली मुसकान बिखेरी. ‘‘गंगा, यह तुम थीं?’’ आवाज पद्मा के हलक से पहले निकली.  जया भी मुग्ध भाव से उसे देखे जा रही थी. ‘‘हां, बीबीजी, यह सब तो चलता रहता है. इसे मैं दोचार जमाऊंगी नहीं तो कैसे चलेगा. वह मुझ पर हाथ उठाता?है तो मैं भी उसे पीटने में कोई कसर नहीं छोड़ती,’’ वह कुछ ऐसे बोल रही थी जैसे किसी शैतान बच्चे को राह पर लाने का नुस्खा समझा रही हो, ‘‘जब मैं चाहती हूं तब कमान अपने हाथ में ले लेती हूं,’’ झांसी की रानी जैसे भाव थे उस के चेहरे पर, ‘‘मैं जानती हूं बीबीजी, आप सब लोग हमारा?भला चाहती हैं. पर मुझे नहीं चाहिए यह तलाकवलाक. जरूरत नहीं है मुझे. मैं अपने तरीकों से इसे ‘लाइन’ पर ले आती हूं,’’ वह मुसकराती हुई बोली, ‘‘कभीकभी कड़वी दवा पिला ही देती हूं मैं इसे. मिमियाता हुआ वापस आ जाता है बकरी की तरह. और किस के पास जाएगा. आना तो शाम को इसी घर में है न? जब होश आता है तो गलती का एहसास भी हो जाता है इसे. पता है इसे कि मेरे बगैर इस का गुजारा नहीं.’’ गंगा ने शायद अपने पति पर पूरा अनुसंधान कर रखा था. अब मानो वह उन्हें उस की रिपोर्ट पढ़ा रही हो. जया को लगा वाकई जीवन की बागडोर गंगा ने कुछ अपने तरीके से संभाली हुई थी. शायद उन से बेहतर प्रचारक थी वह नारी मुक्ति की. शायद प्रचार करने की आवश्यकता भी नहीं थी गंगा को. उस के तरीके बेहद सरल व प्रायोगिक थे. उस ने देखा गंगा एकदम सहज भाव से बतियाए जा रही थी. उसे इस बात की कोई चिंता नहीं थी कि उस के इस रवैये पर अन्य लोगों की क्या प्रतिक्रिया रहेगी. इस बीच कब गंगा का पति शरमाता हुआ लौटा व एक सेट बरतन और ले गया पानी भर लाने के लिए, इस की उन्हें सुध न रही.  जया व पद्मा अचंभित हालत में अपने वाहन की ओर बढ़ रही थीं. एक अजब खामोशी छाई हुई थी दोनों के बीच में. जाहिर था, दोनों ही गंगा व उस के पति के बारे में सोच रही थीं. जया को लगा कि शायद उन का क्लब वाला प्रस्ताव बेहद बेतुका था. कनखियों से उस ने पद्मा की ओर देखा जो कुछ ऐसी ही उधेड़बुन में लिप्त थी. भारतीय परिवारों में एक अनोखा ही समीकरण था पतिपत्नी के बीच में. कभी किसी का पलड़ा भारी रहा तो कभी किसी का. क्या यही वजह नहीं थी पद्मा व उस के पति ने आपसी सामंजस्य से अपनी जिम्मेदारियों को आपस में बदल लिया था. सब लोग अपनी आपसी उलझनों का कुछ अपने तरीके से ही हल ढूंढ़ लेते हैं. गंगा ने भी शायद कुछ ऐसा ही कर लिया था. गाड़ी में जब पद्मा निश्चल सी बैठी रह गई तो जया से रहा न गया. उस ने एकाएक पद्मा के हाथ से ‘डिक्टाफोन’ छीना, ‘‘देवियो और सज्जनो, क्या आप जानते हैं कि गंगा और हम में क्या अंतर है? वह अपने पति को लात मार सकती है पर हम नहीं.’’  और फिर दोनों महिलाओं के ठहाके गूंजने लगे. ड्राइवर उन्हें कुछ ऐसे देखने लगा जैसे वे दोनों पागल हो गई हों.

चुनावी मुद्दा अब विकास नहीं हिंदू मुस्लिम हो गया है : अशफाक रहमान

देश में अब सांप्रदायिक हिंसा, अपराध और गैरबराबरी का माहौल बन गया है. दलितों और अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. धर्म और जाति को मुद्दा बना कर सत्ताधारी दल राजनीति कर रहे हैं. विकास और जनहित की बातें गायब हैं.  जब देश का पूरा समय और ताकत गरीबी, भुखमरी, बीमारी, पढ़ाईलिखाई पर लगनी चाहिए, वहां गौरक्षा, हिंदुत्व के नाम पर लोगों को सरेआम मौत के घाट उतारा जा रहा है.  चूंकि लोकसभा चुनाव 2019 में अब कुछ ही महीने बचे हैं, लिहाजा चुनावी तैयारियों को ले कर सभी राजनीतिक दल जोरशोर से नई रणनीति बनाने और अपना प्रचारतंत्र मजबूत करने में लगे हैं. लेकिन जनता को एक कड़ी में जोड़ कर एकता, अखंडता और विकास का एजेंडा ले कर चलने की सोच रखने वाले सियासी दलों का देश में अकाल सा दिखता है.

हालांकि जनता दल राष्ट्रवादी जैसे कुछ नए दल भी हैं जो किसी खास जाति या तबके की बात नहीं करते हैं और न ही जाति और धर्म के आधार पर टिकट बांटने में यकीन रखते हैं.  जनता दल राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय संयोजक अशफाक रहमान यों तो कारोबार से जुड़े रहे हैं लेकिन समाज के लिए कुछ करने की चाहत उन्हें राजनीति के गलियारों में ले आई है. अशफाक रहमान राजनीति से अपराधी और विघटनकारी तत्त्वों को खत्म करना चाहते हैं. हालाकि राजनीति उन के लिए नया मैदान नहीं है. साल 1990 से ले कर साल 1995 तक वे बिहार की राजनीति में रहे और मुसलिमों को रिजर्वेशन देने की बात सब से पहले उन्होंने ही उठाई थी.  बहरहाल, मुसलिमों व दलितों के बदतर हालात को देख कर वे नए सिरे से कमर कस कर राजनीति में उतरे हैं और अब जनता दल राष्ट्रवादी के साथ जनता के बीच मौजूद हैं.

देश में पहले से कई सियासी पार्टियां हैं, ऐसे में आप को कारोबार से राजनीति में आने और जनता दल राष्ट्रवादी पार्टी बनाने का जरूरत क्यों पड़ी? 

इस सवाल पर अशफाक रहमान कहते हैं, ‘‘देशभर में दलितों और मुसलिमों के साथ सामाजिक भेदभाव हो रहा है. इस के लिए मौजूदा सरकार ही जिम्मेदार है, क्योंकि वह इन हालात  को बदलने के बजाय जनता का ध्यान असल मुद्दों से भटकाती रहती है. देश की नौकरशाही का सिस्टम पूरी तरह से सड़ने लगा है.  ‘‘दरअसल, सरकारें तो बदल जाती हैं लेकिन व्यवस्था में बैठे भ्रष्ट नौकरशाह नहीं बदलते हैं. वे कई सालों से देश के सिस्टम में पलीता लगा रहे हैं. नतीजतन, लोकतंत्र के माने बदल गए हैं. जनता मालिक होनी चाहिए और वे नौकर, लेकिन आज उलटा है. जनता को नौकर मान कर वे मालिक बन रहे हैं. ऐसे ही लोगों पर नकेल कसने और अव्यवस्था को पूरी तरह से बदलने के मकसद से हम राजनीति में आए हैं.’’  राजनीतिक दल चुनाव आते ही जनता को वादों और दावों का खूब भाषण पिलाते हैं, उस के बाद उन का आमजन से संवाद पूरी तरह से खत्म हो जाता है.

नरेंद्र मोदी देश के गलीमहल्लों से ज्यादा विदेशों में नजर आते हैं. ऐसे  में वे जनता के साथ किस तरह संवाद करते हैं? 

इस सवाल पर अशफाक रहमान बताते हैं, ‘‘देखिए, न हमें नरेंद्र मोदी की तरह कोई बड़ा कारपोरेट सपोर्ट करता है और न ही हम उतने बड़े हैं कि जनता को परेशान छोड़ कर विदेश में घूमें. हम तो गांवगांव जा कर बैठकें करते हैं, लोगों से उन की इलाकाई समस्याएं पूछते हैं और उन के सामने अपनी बात रखते हैं. उन्हें व्यवस्था में बदलाव के लिए आगे आने और सही सरकार चुनने के लिए बढ़ावा देते हैं. पार्टी के दूसरे सदस्य भी इसी  तरह दूरदराज के इलाकों में मीटिंग वगैरह  के जरीए आमजन से संपर्क बना कर रखते हैं.’’

जनता के बीच जाने पर वे कौन से प्रमुख मुद्दे हैं जिन पर मौजूदा सरकार ने काम नहीं किया है?

इस सवाल का जवाब वे कुछ यों देते हैं, ‘‘हैरानी की बात है कि इस सरकार ने सारे मुद्दे ही बदल दिए हैं. पहले चुनावी मुद्दों में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, घोटालों की  बात होती थी, पर अब देश के सामने हिंदूमुसलिम अहम मुद्दा बन गया है.  ‘‘इन 5 सालों में ऐसा माहौल बन गया है कि हिंदू मुसलिम को और मुसलिम हिंदू को शक की निगाहों से देखने लगा है. हमारे कार्यकर्ताओं को भी प्रचार के दौरान इस तरह के अनुभवों से गुजरना पड़ता है. मोदी सरकार ने विघटनकारी ताकतों को बल दे कर असुरक्षा का झूठा माहौल पैदा किया है. ‘‘ऐसा भरम फैलाया जा रहा है कि हिंदुओं को मुसलिमों से खतरा है. मुसलिमों ने 800 साल इस देश में राज किया. अंगरेजों ने 200 साल राज किया. तब हिंदुओं को खतरा नहीं हुआ तो  अब क्या होगा. लेकिन फिर भी सरकार लोगों को बांट कर उन में दरार पैदा कर रही है.

‘‘धर्म के आधार पर जिस तरह से इस सरकार ने लोगों को बांटा है उस से देश का अहम मुद्दा ही बदल गया है. अगर किसी का हक मारा जाएगा तो वहां से विद्रोह निकलेगा ही.  ‘‘दलित हो या अल्पसंख्यक, बेकुसूरों को परेशान किया जाएगा तो बेरोजगारों की फौज सड़कों पर हिंसक हो कर उतरेगी ही.

‘‘यह कैसी सरकार है जो देश के एक नागरिक को दूसरे नागरिक से लड़ा रही है?

यह देश हित में नहीं है. हम व्यवस्था में बदलाव की बात कर रहे थे और आज सारा मामला ही सांप्रदायिक हो गया है. लेकिन हम फिर भी लोगों को इस बाबत जागरूक कर रहे हैं.’’ बेरोजगारी, निजीकरण के मुद्दे पर मोदी सरकार को आड़े हाथ लेते हुए अशफाक रहमान कहते हैं, ‘‘सरकार में बड़ेबड़े पद पर बैठे लोग जिस भाषा का इस्तेमाल करते हैं, वह शर्मनाक है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो बेरोजगारी को ही मजाक बना दिया है. कभी वे बोलते हैं कि पकौड़े बेच लो तो कभी नाली गैस की बातें होती हैं.  ‘‘बीएसएनएल जैसा बड़ा सरकारी उपक्रम फेल हो रहा है, जिओ को बढ़ावा मिल रहा है. एयर इंडिया का हाल खस्ता है. सरकार देश में निजी कंपनियों को बेचने पर उतारू है. इस तरह से देश बरबाद हो जाएगा.’’ मुसलिम और दलित समाज को ले कर हो रही सियासत पर अशफाक रहमाने कहते हैं, ‘‘देश का हर दल मुसलिमों के वोट पाने के लिए ढोंग रच रहा है. सब की साजिश यही है कि मुसलिमों और दलितों को अनपढ़ व जाहिल बना कर रखा जाए. अब तक मुसलिम समुदाय जाति या धर्म के आधार पर न तो वोट देता रहा है और न ही अपना प्रतिनिधित्व चुनता आया है. इस का फायदा नीतीश कुमार से लालू प्रसाद यादव तक सब ने उठाया.  ‘‘लेकिन अगर यही हाल रहा तो आगे चल कर मुसलिम समाज भी अपनी बिरादरी का दल या नेता खोजने पर मजबूर हो जाएगा. ‘‘राजनीति में जब तक लोग जनसेवा के बजाय कमाई करने के लिए आते रहेंगे तब तक देश को सही सरकार नहीं मिल सकेगी. अगर राजनीति से कमाई करने का मकसद होता तो हमारी पार्टी में साफ इमेज के लोगों के बजाय अपराधी और दलाल होते.’’

नीड़ का निर्माण फिर से (भाग-1) : क्या मानसी को छुटकारा मिल सका

मानसी का मन बेहद उदास था. एक तो छुट्टी दूसरे चांदनी का ननिहाल चले जाना और अब चांदनी के बिना अकेलापन उसे काट खाने को दौड़ रहा था. मानसी का मन कई तरह की दुश्ंिचताओं से भर जाता. सयानी होती बेटी वह भी बिन बाप की. कहीं कुछ ऊंचनीच हो गया तो. चांदनी की गैरमौजूदगी उस की बेचैनी बढ़ा देती. कल ही तो गई थी चांदनी. तब से अब तक मानसी ने 10 बार फोन कर के उस का हाल लिया होगा. चांदनी क्या कर रही है? अकेले कहीं मत निकलना. समय पर खापी लेना. रात देर तक टीवी मत देखना. फोन पर नसीहत सुनतेसुनते मानसी की मां आजिज आ जाती.

‘‘सुनो मानसी, तुम्हें इतना ही डर है तो ले जाओ अपनी बेटी को. हम क्या गैर हैं?’’ मानसी को अपराधबोध होता. मां के ही घर तो गई है. बिलावजह तिल का ताड़ बना रही है. तभी उस की नजर सुबह के अखबार पर पड़ी. भारत में तलाक की बढ़ती संख्या चिंताजनक…एक जज की इस टिप्पणी ने उस की उदासी और बढ़ा दी. सचमुच घर एक स्त्री से बनता है. एक स्त्री बड़े जतन से एकएक तिनका जोड़ कर नीड़ का निर्माण करती है. ऐसे में नियति उसे जब तहसनहस करती है तो कितनी अधिक पीड़ा पहुंचती है, इस का सहज अनुमान लगा पाना बहुत मुश्किल होता है. आज वह भी तो उसी स्थिति से गुजर रही है. तलाक अपनेआप में भूचाल से कम नहीं होता. वह एक पूरी व्यवस्था को नष्ट कर देता है पर क्या नई व्यवस्था बना पाना इतना आसान होता है. नहीं…जज की टिप्पणी निश्चय ही प्रासंगिक थी.

पर मानसी भी क्या करती. उस के पास कोई दूसरा रास्ता न था. पति घर का स्तंभ होता है और जब वह अपनी जिम्मेदारी से विमुख हो जाए तो अकेली औरत के लिए घर जोड़े रखना सहज नहीं होता. मानसी उस दुखद अतीत से जुड़ गई जिसे वह 10 साल पहले पीछे छोड़ आई थी. उस का अतीत उस के सामने साकार होने लगा और वह विचारसागर में डूब गई. उस की सहकर्मी अचला ने उस दिन पहली बार मानसी की आंखों में गम का सागर लहराते देखा. हमेशा खिला रहने वाला मानसी का चेहरा मुरझाया हुआ था. कभी सास तो कभी पति को ले कर हजार झंझावातों के बीच अचला ने उसे कभी हारते हुए नहीं देखा था. पर आज वह कुछ अलग लगी. ‘मानसी, सब ठीक तो है न?’ लंच के वक्त उस की सहेली अचला ने उसे कुरेदा. मानसी की सूनी आंखें शून्य में टिकी रहीं. फिर आंसुओं से लबरेज हो गईं.

‘मनोहर की नशे की लत बढ़ती ही जा रही है. कल रात उस ने मेरी कलाई मोड़ी…’ इतना बतातेबताते मानसी का कंठ रुंध गया. ‘गाल पर यह नीला निशान कैसा…’ अचला को कुतूहल हुआ. ‘उसी की देन है. जैकेट उतार कर मेरे चेहरे पर दे मारी. जिप से लग गई.’ इतना जालिम है मानसी का पति मनोहर, यह अचला ने सपने में भी नहीं सोचा था.  मानसी ने मनोहर से प्रेम विवाह किया था. दोनों का घर आसपास था इसलिए अकसर उन दोनों परिवारों का एकदूसरे के घर आनाजाना था. एक रोज मनोहर मानसी के घर आया तो मानसी की मां पूछ बैठीं, ‘कौन सी क्लास में पढ़ते हो?’ ‘बी.ए. फाइनल,’ मनोहर ने जवाब दिया था. ‘आगे क्या इरादा है?’ ‘ठेकेदारी करूंगा.’ मनोहर के इस जवाब पर मानसी हंस दी थी. ‘हंस क्यों रही हो? मुझे ढेरों पैसे कमाने हैं,’ मनोहर सहजता से बोला. उधर मनोहर ने सचमुच ठेकेदारी का काम शुरू कर दिया था. इधर मानसी भी एक स्कूल में पढ़ाने लगी.

24 साल की मानसी के लिए अनेक रिश्ते देखने के बाद भी जब कोई लायक लड़का न मिला तो उस के पिता कुछ निराश हो गए. मानसी की जिंदगी में उसी दौरान एक लड़का राज आया. राज भी उसी के साथ स्कूल में पढ़ाता था. दोनों में अंतरंगता बढ़ी लेकिन एक रोज राज बिना बताए चेन्नई नौकरी करने चला गया. उस का यों अचानक चले जाना मानसी के लिए गहरा आघात था. उस ने स्कूल छोड़ दिया. मां ने वजह पूछी तो टाल गई. अब वह सोतेजागते राज के खयालों में डूबी रहती.

करवटें बदलते अनायास आंखें छलछला आतीं. ऐसे ही उदासी भरे माहौल में एक दिन मनोहर का उस के घर आना हुआ. डूबते हुए को तिनके का सहारा. मानसी उस से दिल लगा बैठी. यद्यपि दोनों के व्यक्तित्व में जमीनआसमान का अंतर था पर किसी ने खूब कहा है कि खूबसूरत स्त्री के पास दिल होता है दिमाग नहीं, तभी तो प्यार में धोखा खाती है. मनोहर से मानसी को तत्काल राहत तो मिली पर दीर्घकालीन नहीं.

मांबाप ने प्रतिरोध किया. हड़बड़ी में शादी का फैसला लेना उन्हें तनिक भी अच्छा न लगा. पर इकलौती बेटी की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा. मानसी की सास भी इस विवाह से नाखुश थीं इसलिए थोड़े ही दिनों बाद उन्होंने रंग दिखाने शुरू कर दिए. मानसी का जीना मुश्किल हो गया. वह अपना गुस्सा मनोहर पर उतारती. एक रोज तंग आ कर मानसी ने अलग रहने की ठानी. मनोहर पहले तो तैयार न हुआ पर मानसी के लिए अलग घर ले कर रहने लगा.

यहीं मानसी ने एक बच्ची चांदनी को जन्म दिया. बच्ची का साल पूरा होतेहोते मनोहर को अपने काम में घाटा शुरू हो गया. हालात यहां तक पहुंच गए कि मकान का किराया तक देने के पैसे न थे. हार कर उन्हें अपने मांबाप के पास आना पड़ा. मानसी ने दोबारा नौकरी शुरू कर दी. मनोहर ने लगातार घाटे के चलते काम को बिलकुल बंद कर दिया. अब वह ज्यादातर घर पर ही रहता. ठेकेदारी के दौरान पीने की लत के चलते मनोहर ने मानसी के सारे गहने बेच डाले.

यहां तक कि अपने हाथ की अंगूठी भी शराब के हवाले कर दी. एक दिन मानसी की नजर उस की उंगलियों पर गई तो वह आपे से बाहर हो गई, ‘तुम ने शादी की सौगात भी बेच डाली. मम्मी ने कितने अरमान से तुम्हें दी थीं.’ मनोहर ने बहाने बनाने की कोशिश की पर मानसी के आगे उस की एक न चली. इसी बात को ले कर दोनों में झगड़ा होने लगा. तभी मानसी की सास की आवाज आई, ‘शोर क्यों हो रहा है?’ ‘आप के घर में चोर घुस आया है.’

वह जीने से चढ़ कर ऊपर आईं. ‘कहां है चोर?’ उन्होंने चारों तरफ नजरें दौड़ाईं. मानसी ने मनोहर की ओर इशारा किया, ‘पूछिए इन से… अंगूठी कहां गई.’ सास समझ गईं. वह कुछ नहीं बोलीं. उलटे मानसी को ही भलाबुरा कहने लगीं कि अपने से छोटे घर की लड़की लाने का यही नतीजा होता है. मानसी को यह बात लग गई. वह रोंआसी हो गई. आफिस जाने को देर हो रही थी इसलिए जल्दीजल्दी तैयार हो कर इस माहौल से वह निकल जाना चाहती थी.

शाम को मानसी घर आई तो जी भारी था. आते ही बिस्तर पर निढाल पड़ गई. अपने भविष्य और अतीत के बारे में सोचने लगी. क्या सोचा था क्या हो गया. ससुर कभीकभार मानसी का पक्ष ले लेते थे पर सास तो जैसे उस के पीछे पड़ गई थीं. एक दिन मनोहर कुछ ज्यादा ही पी कर आया था. गुस्से में पिता ने उसे थप्पड़ मार दिया. ‘कुछ भी कर लीजिए आप, मैं  पीना  नहीं  छोड़ूंगा. मुझे अपनी जिंदगी की कोई परवा नहीं. आप से पहले मैं मरूंगा. फिर नाचना मानसी को ले कर इस घर में अकेले.’ शराब अधिक पीने से मनोहर के गुरदे में सूजन आ गई थी. उस का इलाज उस के पिता अपनी पेंशन से करा रहे थे. डाक्टर ने तो यहां तक कह दिया कि अगर इस ने पीना नहीं छोड़ा तो कुछ भी हो सकता है. फिर भी मनोहर की आदतों में कोई बदलाव नहीं आया था. मानसी ने लाख समझाया, बेटी की कसम दी, प्यार, मनुहार किसी का भी उस पर कोई असर नहीं हो रहा था.

बस, दोचार दिन ठीक रहता फिर जस का तस. मानसी लगभग टूट चुकी थी. ऐसे ही उदास क्षणों में मोबाइल की घंटी बजी. ‘हां, कौन?’ मानसी पूछ बैठी. ‘मैं राज बोल रहा हूं. होटल अशोक के कमरा नं. 201 में ठहरा हूं. क्या तुम किसी समय मुझ से मिलने आ सकती हो,’ उस के स्वर में निराशा का भाव था. राज आया है यह जान कर वह भावविह्वल हो गई. उसे लगा इस बेगाने माहौल में कोई एक अपना हमदर्द तो है. वह उस से मिलने के लिए तड़प उठी.

आफिस न जा कर मानसी होटल पहुंची. दरवाजे पर दस्तक दी तो आवाज आई, ‘अंदर आ जाओ.’ राज की आवाज पल भर को उसे भावविभोर कर गई. वह 5 साल पहले की दुनिया में चली गई. वह भूल गई कि वह एक शादीशुदा है.  मानसी की अप्रत्याशित मौजूदगी ने राज को खुशियों से भर दिया. ‘मानसी, तुम?’ ‘हां, मैं,’ मानसी निर्विकार भाव से बोली, ‘कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो वक्त के साथ भी नहीं भरते.’ ‘मानसी, मैं तुम्हारा गुनाहगार हूं.’ ‘पर क्या तुम मुझे वह वक्त लौटा सकते हो जिस में हम दोनों ने सुनहरे कल का सपना देखा था?’ राज खामोश था.

मानसी कहती रही, ‘किसी औरत के लिए पहला प्यार भुला पाना कितना मुश्किल होता है, शायद तुम सोच भी नहीं सकते हो. वह भी तुम्हारा अचानक चले जाना…कितनी पीड़ा हुई मुझे…क्या तुम्हें इस का रंचमात्र भी गिला है?’ ‘मानसी, परिस्थिति ही ऐसी आ गई कि मुझे एकाएक चेन्नई नौकरी ज्वाइन करने जाना पड़ा. फिर भी मैं ने अपनी बहन कविता से कह दिया था कि वह तुम्हें मेरे बारे में सबकुछ बता दे.’ थोड़ी देर बाद राज ने सन्नाटा तोड़ा, ‘मानसी, एक बात कहूं. क्या हम फिर से नई जिंदगी नहीं शुरू कर सकते?’ राज के इस अप्रत्याशित फैसले ने मानसी को झकझोर कर रख दिया. वह खामोश बैठी अपने अतीत को खंगालने लगी तो उसे लगा कि उस के ससुराल वाले क्षुद्र मानसिकता के हैं. सास आएदिन छोटीछोटी बातों के लिए उसे जलील करती रहती हैं, वहीं ससुर को उन की गुलामी से ही फुर्सत नहीं. कौन पति होगा जो बीवी की कमाई खाते हुए लज्जा का अनुभव न करता हो.

‘क्या सोचने लगीं,’ राज ने तंद्रा तोड़ी. ‘मैं सोच कर बताऊंगी,’ मानसी उठ कर जाने लगी तो राज बोला, ‘मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा.’ आज मानसी का आफिस में मन नहीं लग रहा था. ऐसे में उस की अंतरंग सहेली अचला ने उस का मन टटोला तो उस के सब्र का बांध टूट गया. उस ने राज से मुलाकात व उस के प्रस्ताव की बातें अचला को बता दीं. ‘तेरा प्यार तो मिल जाएगा पर तेरी 3 साल की बेटी का क्या होगा? क्या वह अपने पिता को भुला पाएगी? क्या राज को सहज अपना पिता मान लेगी?’ इस सवाल को सुन कर मानसी सोच में पड़ गई.  ‘आज तुम भावावेश में फैसला ले रही हो. कल राज कहे कि चांदनी नाजायज औलाद है तब. तब तो तुम न उधर की रहोगी न इधर की,’ अचला समझाते हुए बोली.

‘मैं एक गैरजिम्मेदार आदमी के साथ पिसती रहूं. आफिस से घर आती हूं तो घर में घुसने की इच्छा नहीं होती. घर काट खाने को दौड़ता है,’ मानसी रोंआसी हो गई. ‘तू राज के साथ खुश रहेगी,’ अचला बोली. ‘बिलकुल, अगर उसे मेरी जरूरत न होती तो क्यों लौट कर आता. उस ने तो अब तक शादी भी नहीं की,’ मानसी का चेहरा चमक उठा. ‘मनोहर के साथ भी तो तुम ने प्रेम विवाह किया था.’ ‘प्रेम विवाह नहीं समझौता. मैं ने उस से समझौता किया था,’ मानसी रूखे मन से बोली. ‘मनोहर क्या जाने, वह तो यही समझता होगा कि तुम ने उसे चाहा है. बहरहाल, मेरी राय है कि तुम्हें उसे सही रास्ते पर लाने का प्रयास करना चाहिए. वह तुम्हारा पति है.’

‘मैं ने उसे सुधारने का हरसंभव प्रयास किया. चांदनी की कसम तक दिलाई.’ ‘हताशा या निराशा के भाव जब इनसान के भीतर घर कर जाते हैं तो सहज नहीं निकलते. तू उसे कठोर शब्द मत बोला कर. उस की संगति पर ध्यान दे. हो सकता है कि गलत लोगों के साथ रह कर वह और भी बुरा हो गया हो.’ ‘आज तू मेरे घर चल, वहीं चल कर इत्मीनान से बातें करेंगे.’

इतना बोल कर अचला अपने काम में जुट गई. अचला के घर आ कर मानसी ने देर से आने की सूचना मनोहर को दे दी. ‘राज के बारे में और तू क्या जानती है?’ अचला ने चाय का कप बढ़ाते हुए पूछा. ‘ज्यादा कुछ नहीं,’ मानसी कप पकड़ते हुए बोली. ‘सिर्फ प्रेमी न, यह भी तो हो सकता है कि वह तेरे साथ प्यार का नाटक कर रहा हो. इतने साल बाद वह भी यह जानते हुए कि तू शादीशुदा है, क्यों लौट कर आया? क्या वह नहीं जानता कि सबकुछ इतना आसान नहीं. कोई विवाहिता शायद ही अपना घर उजाड़े?’ अचला बोली, ‘जिस्म की सड़न रोकने के लिए पहले डाक्टर दवा देता है और जब हार जाता है तभी आपरेशन करता है. मेरा कहा मान, अभी कुछ नहीं बिगड़ा है.

अपने पति, बच्चों की सोच. शादी की है अग्नि के सात फेरे लिए हैं,’ अचला का संस्कारी मन बोला. मानसी की त्योरियां चढ़ गईं, ‘क्या निभाने की सारी जिम्मेदारी मेरी है, उस की नहीं. क्या नहीं किया मैं ने. नौकरी की, बच्चे संभाले और वह निठल्लों की तरह शराब पी कर घर में पड़ा रहता है. एक गैरजिम्मेदार आदमी के साथ मैं सिर्फ इसलिए बंधी रहूं कि हमारा साथ सात जन्मों के लिए है,’ मानसी का गला भर आया. ‘मैं तो सिर्फ तुम्हें दुनियादारी बता रही थी,’ अचला ने बात संभाली.

‘मैं ने मनोहर को तलाक देने का मन बना लिया है,’ मानसी के स्वर में दृढ़ता थी. ‘इस बारे में तुम अपने मांबाप की राय और ले लो. हो सकता है वे कोई बीच का रास्ता सुझाएं,’ अचला ने कह कर बात खत्म की.  मानसी के मातापिता उस के फैसले से दुखी थे.

‘बेटी, तलाक के बाद औरत की स्थिति क्या होती है, तुम जानती हो,’ मां बोलीं. ‘मम्मी, इस वक्त मेरी जो मनोस्थिति है, उस के बाद भी आप ऐसा बोल रही हैं,’ मानसी दुखी होते हुए बोली. ‘क्या स्थिति है, जरा मैं भी तो सुनूं,’ मानसी की सास तैश में आ गईं. वहीं बैठे मनोहर के पिता ने इशारों से पत्नी को चुप रहने के लिए कहा. ‘तलाक से तुम्हें क्या हासिल हो जाएगा,’ मानसी के पापा बोले. ‘सुकून, शांति…’ दोनों शब्दों पर जोर देते हुए मानसी बोली. ‘अब आप ही समझाइए भाई साहब,’ मानसी के पापा उस के ससुर से हताश स्वर में बोले. ‘मैं ने तो बहुत कोशिश की.

पर जब अपना ही सिक्का खोटा हो तो कोई क्या कर सकता है,’ उन्होंने एक गहरी सांस ली. मनोहर वहीं बैठा सारी बातें सुन रहा था. ‘मनोहर तुम क्या चाहते हो? मानसी के साथ रहना या फिर हमेशा के लिए अलगाव?’ मानसी के पापा वहीं पास बैठे मनोहर की तरफ मुखातिब हो कर बोले. क्षणांश वह किंकर्तव्यविमूढ़ बना रहा फिर अचानक बच्चों की तरह फूटफूट कर रोने लगा. उस की दशा पर सब का मन द्रवित हो गया.

क्रमश:

राफेल पर रार : बिखरी हुई है भारत की रक्षा तैयारी

राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के इर्दगिर्द हो रहे विवाद के पीछे एक कड़वा तथ्य यह है कि भारत की रक्षा तैयारी देश की दूसरी तैयारियों की तरह बुरी तरह लचर व बिखरी हुई है. हमारी सेना हो, प्रशासन हो, शिक्षा हो, स्वास्थ्य सेवाएं हों, सभी हमारे किसी भी शहर की तरह हैं जहां कुछ इलाके ढंग से बने हैं, साफ हैं, व्यवस्थित हैं जबकि शेष शहर में पैचवर्क है, कहीं का रोड़ा कहीं का ठीकरा जमा कर बनाए गए आढ़ेतिरछे, गंदे, बदबूदार मकान हैं.

जहां पिछली सरकार 130 राफेल विमानों की बातचीत कर रही थी, वहीं नरेंद्र मोदी सरकार केवल 36 पर ही अटक गई और वे भी कब आएंगे, पता नहीं. इतने बड़े देश के लिए 36 नए विमान नाकाफी हैं क्योंकि पिछले मिग विमानों का बेड़ा लगभग समाप्त सा है और अब हमारे पास न तो अमेरिकी रक्षाकवच है, न रूसी यानी अगर किसी से युद्ध हो तो यही कहेंगे कि हम तो पहले जैसे हैं, आना है तो आओ और लूटपाट कर के ले जाओ.  राफेल विमान दुनिया के अकेले लड़ाकू विमान नहीं हैं और कितने ही देशों के पास दूसरे विमानों की बड़ी तादाद है.

हर देश अपनी रक्षा के लिए अपने पड़ोसी से अच्छा विमान रखता है. चीन ने तो चेंगडू जे-10 बनाने शुरू कर दिए हैं. जे-20 हवाई जहाज भी हैं उस के पास. केवल 20 हजार कर्मचारियों वाली चीनी कंपनी दशकों से हवाई जहाज बना रही है. भारत की फ्रांस व दूसरे देशों पर रक्षा के लिए निर्भरता हमारी आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी कमजोरी ही दर्शाती है. यह हमारे नेताओं की बेवकूफी का नतीजा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उम्मीद थी कि उन के फैसलों से किसी तरह का विवाद खड़ा न होगा पर उन का यह फैसला गले की हड्डी बन गया है.

यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. हो सकता है कि रक्षा के रहस्यों को जगजाहिर न होने देने के लिए सुप्रीम कोर्ट इसे रफादफा कर दे पर विपक्षी दलों को अगले 6 महीने तक यानी भावी आम चुनावों तक बोलने से कोई रोक नहीं सकता. एक ऐसी खरीद जिस पर देश को गर्व होना चाहिए था, एक काला धब्बा बन कर रह जाएगी. होना तो यह चाहिए था कि इस खरीद पर देश को गर्व होता कि न केवल लड़ाकू विमान आ रहे हैं, बल्कि उन के भारत में बनने का रास्ता भी साफ हो रहा है, पर असल में हमारा हाल यह है कि न केवल लड़ाकू विमान बल्कि हम से कुछ भी नहीं बन पा रहा चाहे साइकिल जैसी चीज हो या बड़े यात्री जहाज, सब बाहर से आ रहे हैं.

हम तो, बस, योग का निर्यात कर के गोबर का गुणगान करते फिर रहे हैं. सरकार ने एक तरह से ऊंची तकनीक वाले महंगे अरबोंखरबों वाले लड़ाकू विमानों की खरीद को मजाक बनवा डाला है. यह अब कुंभ के मेले की तरह बन गया है जहां हर कोई मैली गंगा को छू कर अपने को धन्य मानता है. देश की रक्षा को विदेशियों के हवाले करना अपनेआप में दयनीय व चिंतनीय है, ऊपर से उस में आरोपप्रत्यारोप लग रहे हैं तो इस से देश की बदनामी भी हो रही है.

डार्क सर्कल्स हटाने के आसान तरीके हम से जानिए

कहते हैं आंखें दिल का हाल बयां करती हैं, मगर आप शायद यह नहीं जानते कि आंखें सेहत का हाल भी सुनाती हैं. स्वस्थ चमकदार आंखों की तुलना में थकीथकी, डार्क सर्कल्स से घिरी आंखें आप की गलत जीवनशैली और खराब सेहत का संकेत देती हैं. साथ ही आप को उम्रदराज भी दिखाती हैं.

मेकअप से डार्क सर्कल्स छिपाने की कितनी भी कोशिश की जाए ये छिपते नहीं हैं. क्यों होते हैं डार्क सर्कल्स डार्क सर्कल्स अस्तव्यस्त जीवनशैली, हारमोंस में परिवर्तन, आनुवंशिकता, तनाव आदि कई कारणों से हो सकते हैं.

थकान और तनाव: महिलाएं अपनी सेहत के प्रति लापरवाह होती हैं. पूरा दिन घर वालों की फरमाइशें पूरी करने में लगी रहती हैं. उन्हें अपने खानेपीने या आराम करने का होश नहीं रहता. औफिस जाने वाली महिलाओं पर काम का दोहरा बोझ होता है. इस तरह तनाव, शारीरिक थकावट और नींद की कमी उन की आंखों के नीचे काले घेरों के रूप में उभरने लगती है.

बीमारी: ऐनीमिया, किडनी रोग, टीबी, टाइफाइड जैसी कई बीमारियों में कमजोरी से आंखों के नीचे काले घेरे बन सकते हैं.

पानी की कमी: डिहाईड्रेशन की वजह से अकसर इस तरह की समस्या पैदा हो जाती है. कम पानी पीने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही ढंग से नहीं हो पाता, जिस से आंखों के नीचे की नसों को पूरा खून नहीं मिल पाता. नतीजतन डार्क सर्कल्स हो जाते हैं.

नशा: धूम्रपान, शराब, कैफीन या और किसी तरह का नशा करने की आदत भी डार्क सर्कल्स की वजह बन सकती है.

पिगमैंटेशन: तेज धूप में ज्यादा रहने से भी डार्क सर्कल्स पड़ जाते है.

मेकअप: आंखों के नीचे की त्वचा काफी पतली और सैंसिटिव होती है. गलत मेकअप प्रोडक्ट्स का प्रयोग डार्क सर्कल्स की वजह बन सकता है.

सोडियम और पोटैशियम की अधिकता: भोजन में इन की ज्यादा मात्रा से डार्क सर्कल्स हो सकते हैं. बींस, पीनट बटर, योगर्ट, दूध, टमाटर, संतरे, आलू वगैरह में पोटैशियम अधिक मात्रा में पाया जाता है. अधिक नमक की वजह से भी शरीर में सोडियम अधिक मात्रा में पहुंच जाता है.

ऐलर्जी पैदा करने वाले खाद्यपदार्थ: डार्क सर्कल्स किसी खास खाद्यपदार्थ के प्रति ऐलर्जिक रिएक्शंस या सैंसिटिविटी का नतीजा भी हो सकते हैं. चौकलेट, मटर, यीस्ट, खट्टे फल, चीनी आदि सामान्य ऐलर्जिक फूड्स हैं.

क्या है उपाय संतुलित और पौष्टिक भोजन: कोशिश करें कि आप के भोजन में विटामिन और आयरनयुक्त खाद्यपदार्थ पर्याप्त मात्रा में हों जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, फलियां, मौसमी फल, मछली, अंडे आदि.

नींद: वैसे तो हर व्यक्ति के लिए नींद की जरूरत अलगअलग होती है, फिर भी औसतन एक युवा महिला को 6-7 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए. कोशिश करें कि रोज रात में जल्दी सोएं और सुबह जल्दी उठें.

आंखों को तेज धूप से बचाएं: अपनी आंखों को अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में न आने दें. जब भी तेज धूप में निकलना हो काला चश्मा जरूर पहनें.

विटामिन सप्लिमैंट्स: विटामिन बी 12, बिटामिन ए, के, ई या डी, फौलिक एसिड आदि की कमी से भी डार्क सर्कल्स हो सकते हैं. इस के लिए डाक्टर की सलाह से मल्टीविटामिन और दूसरे सप्लिमैंट्स ले सकती हैं.

खूब पानी पीएं: दिनभर में 7-8 गिलास पानी जरूर पीएं. डिहाइड्रेशन से बचने के लिए जूस, सूप और दूसरे पौष्टिक पेयपदार्थ भी बीचबीच में लेती रहें.

दूध: दूध लैक्टिक एसिड, अमीनो एसिड, ऐंजाइम्स, प्रोटीन और दूसरे कई ऐंटीऔक्सीडैंट्स के गुणों से भरपूर होता है. अत: दिन में 2 बार दूध पीने की आदत डालें.

कंसीलर: एक अच्छी क्वालिटी का कंसीलर उपयोग में लाएं, जो त्वचा की टोन से मिलता हो. इस की सहायता से डार्क सर्कल्स कवर करें. फिर पाउडर बुरक कर इसे सैट कर लें.

स्किन पैच टैस्ट करें: जो उत्पाद त्वचा पर जलन पैदा करे या रैशज लाए, आंखों में दर्द या पानी आने की वजह बने उस का उपयोग तुरंत बंद कर दें.

अगर आजमाएंगी ये तरीके तो खेल खेल में सीखेंगे बच्चे

बच्चों को सब से ज्यादा खेलना पसंद होता है और अगर उन्हें कुछ सीखना हो तो जबरन सिखाने की जगह उन्हें खेलों के जरिए सिखाने की कोशिश करनी चाहिए. इस से खेलखेल में उन्हें सीखने को भी मिल जाता है. पिछले कई सालों से मेटल जो अमेरिका की मल्टीनैशनल खिलौने की कंपनी है, ऐसे खिलौने बना रही है जो बच्चों को नईनई चीजें सिखाने के साथ उन्हें रचनात्मक भी बनाते हैं. खिलौने जैसे टोडलर रौकर, स्मार्ट फोन व टैबलेट, फ्रूट्स व फन लर्निंग मार्केट, पियानो गेम व लर्न कंट्रोलर आदि बच्चों के बीच काफी चर्चित है.

क्यों है खिलौने मददगार

जैसेजैसे बच्चे बड़े होते हैं वे अपने आसपास के लोगों को देख कर नईनई चीजें करने के बारे में सोचते हैं. ऐसे में इस तरह के खेल उन्हें कुछ नया करने व सीखने का मौका देते हैं. जैसे उस की खिलौना गाड़ी में लगी बैल्स जो उस के चलते ही बजने लगती है, की आवाजें उस के कानों व आंखों को आकर्षित करती हैं और वह बारबार उसे करने के बारे में सोचता है. वहीं उस की खिलौना गाड़ी को उस की मां जब आगेपीछे करती है तो वह खिलखिला कर हंसने लगता है और इस के बाद खुद को अपने आप खिसकाने की कोशिश करता है. ये उस का खिलौने से सीखने का तरीका है. वहीं स्मार्ट फोन व टैबलेट आदि के जरिए वे संख्या की गणना करना, पहेलियां सुलझाना, अक्षरों की पहचान करना और पक्षियों व जानवरों की आवाजों को पहचानना सीखते हैं.

इन खिलौनों के जरीए उन की सुनने की जिज्ञासा भी बढ़ती है और वे इन आवाजों को सुन-सुन कर बोलने की भी कोशिश करते हैं. जैसे-जैसे ये खिलौने उन की दिनचर्या में आते हैं वे उसी में कुछ नया खोजने लगते हैं जो उन की कल्पनाशीलता भी बढ़ने लगती है. इन्हीं खेलों से वे बोलना, पढ़ना, डांस करना, अक्षरों व चित्रों की पहचान करना सीखते हैं. यानी बच्चे की पहली शिक्षा उस के घर से ही शुरू हो जाती है. आप को बस ध्यान रखना है कि बढ़ती उम्र के साथ उस का रूझान किस ओर बढ़ रहा है जैसे अगर वह पीले रंग को देख कर आकर्षित हो रहा है तो उसे ऐसे खिलौने दिए जाएं जो उसे रंगों की पहचान कराएं. इस तरह के खेलखिलौने बच्चों के विकास में काफी मददगार होते हैं.

दोराहे पर खड़ा प्यार : सोनी को ब्लैकमेल करने की किसने की कोशिश

20 अगस्त, 2018 को सुबह के समय बिरियां गांव का राजू अपने खेत की तरफ जा रहा था. जब वह बाबा की बगिया पार कर रहा था तो उस ने खेत की मेड़ पर एक युवक की लाश पड़ी देखी. लाश देख कर वह उलटे पांव गांव की ओर सरपट दौड़ा. उस ने हांफते हुए गांव के कुछ लोगों को लाश पड़ी होने की जानकारी दी. इस के बाद तो पूरे गांव में लाश मिलने की बात फैल गई और लोग लाश देखने के लिए खेत की ओर दौड़ पड़े.

जिस खेत की मेड़ पर लाश पड़ी थी, वह खेत गांव बिरियां के ही भानु शुक्ला का था. इसी गांव के रहने वाले विजय सिंह सेंगर को जब लाश की सूचना मिली तो उन का माथा ठनका. क्योंकि उन का जवान बेटा अखंड प्रताप सिंह उर्फ कल्लू बीती रात घर नहीं आया था. वह घर से सजेती बाजार जाने की बात कह कर निकला था.

विजय सिंह सेंगर बदहवास हालत में नंगे पैर ही खेत की ओर दौड़ पड़े. भानु शुक्ला के खेत पर पहुंच कर जब उन्होंने लाश देखी तो वह दहाड़ मार कर रो पड़े. क्योंकि वह लाश उन के बेटे अखंड प्रताप सिंह की ही थी. इसी बीच किसी ने यह खबर फोन द्वारा थाना सजेती पुलिस को दे दी.

सूचना पा कर थानाप्रभारी राजेंद्र रावत पुलिस दल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. शव के पास एक अधेड़ आदमी फूटफूट कर रो रहा था. श्री रावत ने उस से पूछताछ की तो उस ने बताया कि मृतक युवक उस का बेटा अखंड प्रताप सिंह उर्फ कल्लू है.

कल्लू के गले में खरोंच के निशान थे और गले में सफेद रंग का अंगौछा लिपटा हुआ था. उस की उम्र यही कोई 23 साल के आसपास थी. लाश देखने से थानाप्रभारी को लग रहा था कि उस की हत्या गला घोंट कर की गई है.

थानाप्रभारी अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसपी राधेश्याम तथा सीओ अर्पित कपूर भी वहां पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद मृतक के पिता विजय सिंह सेंगर से पूछताछ की. विजय सिंह ने बताया कि उस की न तो किसी से कोई दुश्मनी है और न ही किसी से लेनदेन या जमीनजायदाद का झगड़ा है. पता नहीं किस ने और क्यों उस के बेटे को मार डाला.

पुलिस अधिकारियों ने वहां मौजूद गांव के अन्य लोगों से भी पूछताछ की. फिर थानाप्रभारी को दिशानिर्देश दे कर दोनों पुलिस अधिकारी वहां से चले गए. इस के बाद थानाप्रभारी ने मौके से सबूत कब्जे में ले कर लाश पोस्टमार्टम के लिए माती में स्थित पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दी. फिर विजय सिंह सेंगर की तरफ से अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली और जांच में जुट गई.

शुरुआती जांच में पुलिस को पता चला कि मृतक कल्लू की न तो किसी से कोई दुश्मनी थी और न ही किसी से लेनदेन का झगड़ा था. बल्कि पड़ोसी महेश भदौरिया की बेटी सोनी से उस का चक्कर चलने की बात सामने आई. पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि घटना वाली रात सोनी अपने मायके में थी लेकिन दूसरे ही दिन वह अचानक ससुराल चली गई थी.

सोनी शक के घेरे में आई तो थानाप्रभारी राजेंद्र रावत ने सोनी के पिता महेश से पूछताछ की. महेश ने दबी जुबान से स्वीकार किया कि सोनी को कल्लू ने अपने प्रेमजाल में फंसा लिया था. पर जैसे ही उसे यह जानकारी मिली तो उस ने सोनी का विवाह हरदोई के भोला सिंह के साथ कर दिया था. सावन में गुडि़या और रक्षाबंधन का त्यौहार मनाने के लिए वह घर आई थी लेकिन पता नहीं वह क्यों रक्षाबंधन से पहले ही ससुराल चली गई.

सोनी रक्षाबंधन से पहले ही ससुराल क्यों चली गई, यह बात थानाप्रभारी की समझ में नहीं आ रही थी. उन्हें इस बात का शक हो गया कि कल्लू की हत्या के तार जरूर सोनी जुड़े हैं. थानाप्रभारी ने सोनी के पिता महेश भदौरिया से कहा कि वह सोनी को उस की ससुराल से बुलवा लें, नहीं तो पुलिस सोनी को पूछताछ के लिए उस की ससुराल से ले आएगी.

महेश भदौरिया ने सोचा कि यदि पुलिस सोनी की ससुराल गई तो वहां उस की बदनामी होगी. अत: उस ने श्री रावत से वादा किया कि वह जल्द ही सोनी को ससुराल से ले आएगा.

इसी बीच थानाप्रभारी को एक व्यक्ति ने बताया कि उस ने सोनी और कल्लू को कल शाम के धुंधलके में बाबा की बगिया के पास एक साथ बतियाते देखा था. कल्लू की हत्या किस ने की है, यह उसे पता नहीं है. लेकिन वह यह बात दावे के साथ कह सकता है कि हत्या का राज सोनी जरूर जानती है.

25 अगस्त को महेश भदौरिया सोनी को उस की ससुराल से घर बुला लाया. तभी थानाप्रभारी 2 महिला सिपाहियों के साथ गांव बिरियां पहुंच गए. पूछताछ के लिए वह सोनी को थाने ले आए. थाने में जब उस से कल्लू की हत्या के संबंध में पूछा गया तो वह साफ मुकर गई लेकिन जब महिला दरोगा उमारानी ने पुलिसिया अंदाज में उस से पूछताछ की तो सोनी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी.

उस ने कल्लू की हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. अखंड प्रताप सिंह उर्फ कल्लू तो सोनी का प्रेमी था. उस ने अपने प्रेमी कल्लू की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली—

उत्तर प्रदेश के जिला कानपुर देहात के थाना सजेती का एक छोटा सा गांव है बिरियां. ठाकुर बाहुल्य इसी गांव में महेश भदौरिया अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी अनीता सिंह और 2 बेटियां थीं.

महेश के पास गांव में जो खेती थी, उसी से वह अपने परिवार का खर्च चलाता था. उस ने बड़ी बेटी की शादी घाटमपुर निवासी जगत सिंह के साथ कर दी. जगत सिंह तहसील में काम करता था.

दोस्ती बदल गई प्यार में

महेश की छोटी बेटी सोनी बहुत खूबसूरत थी. वह जब किसी काम से घर से निकलती तो गांव के कई युवक उस पर डोरे डालने की कोशिश करते थे. उन्हीं में से एक उस के पड़ोस में रहने वाला अखंड प्रताप सिंह उर्फ कल्लू भी था.

कल्लू उसे कुछ ज्यादा ही चाहता था. अखंड प्रताप सिंह के पिता विजय सिंह सेंगर और सोनी के पिता महेश सिंह पड़ोसी थे और दोनों एक ही बिरादरी के थे. इसलिए दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध थे. दोनों परिवारों के बच्चों का बचपन साथसाथ खेलते बीता था.

सोनी और अखंड प्रताप सिंह के बीच बचपन से ही लगाव था. लेकिन जब दोनों जवान हुए तो उन के बीच लगाव तो पहले की ही तरह था लेकिन अब उन के नजरिए में बदलाव आ गया था.

उन की चंचलता अब खामोशी के साथ दूसरा मुकाम अख्तियार कर चुकी थी. उन के दिलों में प्यार के बीज अंकुरित हो चुके थे. इसलिए अब वे गंभीर हो चुके थे. जब भी उन्हें मौका मिलता, वह प्यार भरी बातें करते. यह सिलसिला काफी समय तक इसी तरह चलता रहा.

दोनों के घर वालों को उन पर किसी तरह का शक इसलिए नहीं हुआ क्योंकि वे पड़ोस के नाते भाईबहन थे. रक्षाबंधन पर सोनी कल्लू की कलाई पर राखी बांधती थी. इसी रिश्ते की आड़ में वह घर वालों को बेवकूफ बनाते रहे. उन के बीच जो प्यार उपजा था, वह उस रिश्ते को भूल गया था.

सच्चाई आ ही गई सामने

कहते हैं कि प्यार की खुशबू बहुत तेजी से फैलती है. ऐसा ही सोनी और कल्लू के साथ भी हुआ. एक दिन सोनी की मां अनीता सिंह ने उस की और कल्लू की बातें सुन लीं. शाम को इस बारे में उस ने बेटी से पूछा तो उस ने हंसते हुए कह दिया कि उस का कल्लू से इस तरह का कोई संबंध नहीं है.

अनीता सिंह ने भी जमाना देखा था. वह समझ गई कि बेटी झूठ बोल रही है, इसलिए उस ने उस से सख्ती से पूछताछ की तो सोनी को सच उगलना ही पड़ा. सोनी ने डरतेडरते कह दिया कि वह कल्लू से प्यार करती है.

प्यार शब्द सुनते ही अनीता का गुस्सा फूट पड़ा. वह सोनी की पिटाई करते हुए बोली, ‘‘कुलच्छिनी, तुझे शरम नहीं आई. जानती है जातिबिरादरी के नाते वह तेरा क्या लगता है? कम से कम अपने रिश्ते का तो लिहाज किया होता.’’

‘‘मम्मी, वह कोई मेरा सगा भाई थोड़े ही है. हम दोनों एकदूसरे को बहुत चाहते हैं और मैं उस से शादी करना चाहती हूं.’’

‘‘अच्छा, बहुत जबान चला रही है. अभी खींचती हूं तेरी जबान.’’ कहते हुए अनीता ने उस पर लात और घूंसों की बरसात कर दी. लेकिन सोनी यही कहती रही कि चाहे वह उसे कितना भी मार ले, पर कल्लू को नहीं छोड़ेगी.

सोनी की पिटाई करतेकरते जब अनीता हांफने लगी तो एक ओर बैठ कर उसे गालियां देने लगी. साथ ही उस ने धमकी दी, ‘‘आने दे तेरे बाप को, वही तेरी ठीक से खबर लेंगे. बहुत उड़ने लगी है न तू, अब तेरे पर कतरने ही पड़ेंगे.’’

मां की पिटाई व धमकी से भयभीत हो कर सोनी सुबकती रही. शाम को जब महेश आया तो अनीता ने सारी बात उसे बता दी. महेश को गुस्सा तो बहुत आया लेकिन उस ने समझदारी से काम लिया.

वह बेटी को दूसरे कमरे में ले गया और उसे समझाते हुए कहा, ‘‘बेटा, तूने जो कदम उठाया है, जानती है इस से हमारा गांव में रहना दूभर हो जाएगा. किसी के सामने हम सिर नहीं उठा सकेंगे. वैसे तू अब कोई बच्ची तो है नहीं, खुद समझदार है. तुझे खुद समझना चाहिए कि क्या करना चाहिए, क्या नहीं.’’

पिता की सीख सोनी को अच्छी तो लगी, लेकिन उस के सामने समस्या यह थी कि वह कल्लू से उस के साथ जिंदगी बिताने का वादा कर चुकी थी. अब उस के सामने एक ओर पिता की इज्जत थी तो दूसरी ओर वह प्यार था, जिस के लिए वह कुछ भी करने का वादा कर चुकी थी.

अंत में वह इस नतीजे पर पहुंची कि वह घर वालों की इज्जत के लिए अपने प्यार को एक स्वप्न की तरह भूल जाने की कोशिश करेगी. इसलिए उस ने पिता से वादा कर लिया कि वह अब कल्लू से नहीं मिलेगी. यह बात लगभग सवा साल पहले की है.

इधर सोनी की पिटाई वाली बात कल्लू को पता चल चुकी थी. उस के मन में इस बात का डर था कि कहीं महेश चाचा यह शिकायत उस के मातापिता से न कर दें. इस डर की वजह से उस ने सोनी के घर जाना बंद कर दिया. दूसरी ओर सोनी उसे भुलाने की कोशिश करने लगी थी, इसलिए उस ने भी कल्लू की देहरी नहीं लांघी.

लेकिन दोनों प्रेमी ज्यादा दिनों तक एकदूसरे से दूर नहीं रह सके. उन की यादें जेहन में घूम रही थीं. कल्लू का मन सोनी से मिलने को बेचैन हो रहा था लेकिन उस की समझ में यह नहीं आ रहा था कि वह उस से कैसे मिले.

दोबारा उड़ने लगी प्यार की पतंग

सोनी का व्यवहार देख कर उस के घर वालों ने यही समझा कि वह कल्लू को भूल चुकी है. इसलिए उन्होंने उस पर निगरानी करनी बंद कर दी. एक दिन सोनी घर में अकेली थी. मौका मिलते ही कल्लू मिलने के लिए उस के घर पहुंच गया. अचानक घर में उसे देख कर सोनी चौंकी, ‘‘तुम यहां क्यों आ गए, कोई आ गया तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी.’’

‘‘सोनी, मैं तुम से सिर्फ यह पूछने आया हूं कि तुम मुझे इतनी जल्दी कैसे भूल गई.’’ कल्लू ने पूछा.

‘‘भूली नहीं हूं, मजबूरी है. यदि मेरी जगह तुम होते तो तुम भी यही करते.’’ सोनी बोली.

सोनी की इस बात से कल्लू खुश हो गया और उस ने सोनी को झट से गले लगा कर कहा, ‘‘तुम चिंता न करो, मैं मुलाकात का कोई न कोई रास्ता निकाल लूंगा.’’

अपने प्रेमी से मिलने के बाद सोनी अपने पिता से किए गए वादे को भूल गई. वह भी उस से खूब बातें करना चाहती थी. लेकिन उसे इस बात का डर था कि कहीं उस की मां या पिता न आ जाएं, इसलिए उस ने प्रेमी से कहा, ‘‘कल्लू, इस से पहले कि घर का कोई यहां आ जाए, तुम यहां से चले जाओ.’’

कल्लू वहां से चला गया. प्रेमिका से मिल कर उसे बड़ा सुकून मिला था. एक हफ्ते बाद उस ने एक मोबाइल खरीद कर सोनी को दे दिया. इस के बाद सोनी चोरीछिपे उस से बातें करने लगी. अब उन्हें मिलने में आसानी हो गई. इस तरह उन का प्यार पहले की तरह ही चलने लगा लेकिन उन का चोरीछिपे मिलनेमिलाने का यह खेल ज्यादा दिनों तक नहीं चल सका.

खुल गई सोनी की पोल

एक दिन रात को अचानक सोनी की मां अनीता की आंखें खुलीं तो उस ने बेटी को चारपाई से गायब पाया. उस की तलाश में वह छत पर पहुंची तो वहां उसे कुरसी पर बैठी देख कर चौंकी.

मां की आहट पाते ही सोनी ने प्रेमी से चल रही बातचीत बंद कर दी और फोन छिपाने लगी. अनीता ने उसे कुछ छिपाते देख तो लिया था, लेकिन उसे यह पता नहीं था कि उस ने क्या छिपाया है.

उस ने बेटी से इतनी रात को अकेली छत पर बैठने की वजह पूछी तो वह सकपका गई. तब उस ने पूछा, ‘‘तूने अभी क्या छिपाया है, दिखा मुझे.’’

‘‘कुछ नहीं छिपाया मम्मी,’’ सोनी घबरा कर बोली.

बेटी की बात सुन कर अनीता को लगा कि वह झूठ बोल रही है. क्योंकि उस ने कोई चीज रखते सोनी को देखा था. अत: उस ने सोनी के सीने पर हाथ डाला तो वहां मोबाइल देख कर पूछा, ‘‘यह किस का मोबाइल है और तू यहां अकेली बैठ कर किस से बातें कर रही थी?’’

‘‘किसी से नहीं मम्मी,’’ सकपका कर सोनी बोली.

बेटी के झूठ बोलने पर अनीता समझ गई कि यह जरूर उस कल्लू से ही बातें कर रही होगी. इस का मतलब यह है कि यह हमारी आंखों में धूल झोंक कर उस से लगातार मिल रही है. अनीता ने रात में हंगामा करना जरूरी नहीं समझा.

सुबह होने पर अनीता ने सारी सच्चाई पति को बता दी. महेश समझ गया कि बेटी को कितना ही समझा लो. यह सोनी से मिलना नहीं छोड़ेगी. इस से पहले कि समाज में उस की बदनामी हो, उस ने उस के हाथ पीले करने का फैसला कर लिया.

इस के अलावा महेश ने पड़ोसी विजय सिंह सेंगर से उस के बेटे अखंड प्रताप सिंह उर्फ कल्लू की शिकायत कर दी. विजय सिंह को पता नहीं था कि उस के बेटे का सोनी से चक्कर चल रहा है.

पड़ोसी की बात पर विजय सिंह को बेटे पर बहुत गुस्सा आया. उस ने उसे भरोसा दिया कि वह बेटे को समझाएगा.

विजय सिंह ने बेटे अखंड प्रताप सिंह उर्फ कल्लू से इस बारे में बात की तो डरने की बजाय उस ने कह दिया कि वह सोनी से प्यार करता है और शादी भी उसी से करेगा. तब गुस्से में विजय सिंह ने उसे 2-3 थप्पड़ जड़ कर कहा, ‘‘तुझे पता नहीं कि सोनी रिश्ते में तेरी बहन है. बहन के साथ शादी की बात कहते हुए तुझे शरम नहीं आई.’’

लेकिन कल्लू अपनी जिद पर अड़ा रहा.

महेश भदौरिया बेटी के लिए लड़का खोजने लगा. उस के एक रिश्तेदार ने हरदोई जिले के नैपुरवा गांव में भोला सिंह नाम का एक लड़का बताया.

बातचीत के बाद महेश ने बेटी का रिश्ता भोला सिंह के साथ तय कर दिया. भोला संडीला में मोबाइल की दुकान पर काम करता था. 3 भाईबहनों में वह सब से बड़ा था. उस के पिता अर्जुन सिंह किसान थे. उन की आर्थिक स्थिति ठीक थी.

सोनी चली गई ससुराल

शादी तय हो जाने की बात जब कल्लू को पता चली तो वह परेशान हो उठा. उस ने सोनी से मिल कर भाग जाने का प्लान बनाया. सोनी प्रेमी का साथ देने को राजी भी हो गई. लेकिन वह पैसों का इंतजाम न कर सका, जिस से वह घर छोड़ कर सोनी को ले कर न जा सका.

इधर कल्लू सोनी की शादी में कोई अड़ंगा न डाल दे, इसलिए महेश ने आननफानन में 5 जुलाई, 2018 को सोनी की शादी भोला सिंह से कर दी. डर की वजह से सोनी इस शादी का विरोध न कर सकी और लाल जोड़ा पहन कर ससुराल चली गई.

किसी और के साथ प्रेमिका की शादी हो जाने से कल्लू को बड़ा दुख हुआ. उस का दिन का चैन और रातों की नींद हराम हो गई. उस ने मोबाइल पर सोनी से संपर्क करना चाहा तो उस का फोन बंद मिला. वह समझ गया कि घर वालों ने उस का मोबाइल छीन लिया होगा. जैसेजैसे दिन बीतते जा रहे थे वैसेवैसे कल्लू की बेचैनी बढ़ती जा रही थी.

सोनी एक माह तक ससुराल में रही, उस के बाद राखी पर मायके आ गई. ससुराल से लौटने के बाद सोनी का दिमाग एकदम बदल गया. उस ने सोचा कि पति के साथ विश्वासघात करना ठीक नहीं है, इसलिए उस ने तय कर लिया कि वह प्रेमी कल्लू को समझाएगी कि वह उसे भूल जाए.

सोनी को भा गई ससुराल

दरअसल सोनी को ससुराल में खूब सम्मान मिला था. पति व सासससुर उसे हर तरह से खुश रखते थे. ससुराल में ही उसे अपना भविष्य सुखद नजर आया, जिस से उस का मन प्रेमी से उचट गया.

एक दिन कल्लू के अनुरोध पर सोनी उस से मिली तो उस ने मन की बात कह दी. प्रेमिका में अचानक आए इस बदलाव पर कल्लू चौंका. उस ने साफ कह दिया कि चाहे कुछ भी हो, वह उसे भूल नहीं सकता. सोनी उस की जिद से वाकिफ थी. इसलिए वह यह सोच कर परेशान हो गई कि अब क्या किया जाए.

कल्लू को सोनी के सिवाय कुछ दिखता ही नहीं था. वह उसे हर हाल में हासिल करना चाहता था. उस ने सोनी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह पति को छोड़ दे और उस से शादी कर ले. यही नहीं वह सोनी से शारीरिक संबंध बनाने का भी दबाव बनाने लगा था. पर सोनी उस की किसी भी बात को मानने को राजी नहीं हुई.

एक रोज कल्लू ने सोनी को गांव के बाहर बाबा की बगिया में बुलाया. सोनी पहुंची तो उस ने उसे अपनी बांहों में भर लिया और बोला, ‘‘सोनी, आज तुम्हें बताना ही पड़ेगा कि तुम मुझ से शादी करोगी या नहीं?’’

सोनी ने किसी तरह अपने को छुड़ाया फिर बोली, ‘‘देखो कल्लू, मेरी शादी हो चुकी है. अब मैं किसी की अमानत हूं. ऐसे में भला मैं तुम से शादी कैसे कर सकती हूं.’’

‘‘तो फिर सुनो, अगर तुम मेरी न हुई तो मैं तुम्हें दूसरे की भी नहीं होने दूंगा. मैं तुम्हारी ससुराल जा कर अपने और तुम्हारे प्रेम संबंधों को उजागर कर दूंगा. यह भी बता दूंगा कि हमारे तुम्हारे बीच शारीरिक संबंध भी रहे हैं.’’

‘‘ऐसा न करना कल्लू, मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं, पैर पड़ती हूं.’’ सोनी उस के सामने गिड़गिड़ाने लगी.

‘‘तो फिर मेरी बात मान लो और हमें अपना बना लो.’’ कल्लू ने शर्त रखी.

‘‘हमें एकदो दिन सोचने का मौका दो.’’ सोनी फिर गिड़गिड़ाई.

‘‘ठीक है, 2 दिन बाद तुम इसी बगीचे में इसी खेत पर मिलना.’’

अखंड प्रताप सिंह उर्फ कल्लू ने जो शर्त रखी थी, उस से सोनी विचलित हो गई. वह 2 रोज तक प्यार की अजीब राहों में झूलती रही. आखिर में उस ने एक खतरनाक निश्चय कर लिया. फिर वह प्रेमी का फोन आने का इंतजार करने लगी.

सोनी ने ले लिया सख्त फैसला

19 अगस्त, 2018 की शाम 5 बजे अखंड प्रताप सिंह उर्फ कल्लू ने सोनी से मोबाइल पर बात की और बताया कि वह गांव के बाहर बाबा की बगिया में उस का बेसब्री से इंतजार कर रहा है. इस पर सोनी ने जवाब दिया कि वह शीघ्र ही आ रही है.

शाम 6 बजे के लगभग सोनी बाबा की बगिया जा पहुंची. अब तक धुंधलका छाने लगा था. दोनों पेड़ के नीचे खेत की मेड़ पर बैठ कर बतियाने लगे. बतियाते बतियाते कल्लू लेट गया और उस ने अपना सिर सोनी की जांघों पर रख लिया. सोनी उस के बालों में अंगुलियां फिराते बोली, ‘‘सच बताओ, कल्लू तुम मुझ से नफरत करते हो या प्यार?’’

कल्लू सोनी की आंखों में झांकते हुए बोला, ‘‘मैं तुम से बहुत प्यार करता हूं और तुम्हारे लिए अपनी जान भी दे सकता हूं और किसी की जान ले भी सकता हूं.’’

कल्लू के गले में अंगौछा लिपटा था. सोनी ने अचानक अंगौछा कसना शुरू कर दिया और बोली, ‘‘कल्लू, तुम नहीं मान रहे तो अब तुम मरने को तैयार हो जाओ. तुम्हारी खातिर मैं पति को धोखा नहीं दे सकती. तुम्हारा प्यार छलावा और स्वार्थी है.’’

गले में अंगौछा कसने से कल्लू के मुंह से घुटीघुटी सी आवाज निकलने लगी और वह बचाव में हाथपैर चलाने लगा. लेकिन नफरत से भरी सोनी तब तक गला कसती रही जब तक उस की सांसें थम नहीं गईं.

इस के बाद वह शव को वहीं छोड़ कर घर वापस आ गई. घर में उस ने किसी को कुछ नहीं बताया. दूसरे रोज वह पति के बीमार होने की बात कह कर मायके से ससुराल चली गई.

अगली सुबह गांव का राजू बाबा की बगिया पहुंचा तो उस ने लाश देखी. तब कहीं कल्लू की हत्या की जानकारी मिली. 27 अगस्त, 2018 को थाना सजेती पुलिस ने सोनी से पूछताछ करने के बाद उसे कानपुर (देहात) की माती कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के सामने पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक उस की जमानत मंजूर नहीं हुई थी. ?

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

खाकी वरदी पर भारी बिटकौइन : आईपीएस अधिकारी ने किया कैसा जुर्म

वर्चुअल करेंसी की बात करें तो आजकल देश में सब से ज्यादा चर्चा बिटकौइन की होती है. केवल भारत में ही नहीं, बल्कि इस के चरचे दुनिया के कई देशों में होते हैं. बिटकौइन न तो कोई सोने का सिक्का है और न कागजी रकम. यह डिजिटल करेंसी है. आप इसे आभासी मुद्रा भी कह सकते हैं, जो क्रिप्टो करेंसी की श्रेणी में आती है. बिटकौइन की खरीदफरोख्त औनलाइन होती है. हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने इसी साल 6 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी कर के क्रिप्टो करेंसी के लेनदेन पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

देश की सर्वोच्च अदालत में दायर कुछ याचिकाओं में बिटकौइन जैसी क्रिप्टो करेंसी के रेगुलेशन के लिए दिशानिर्देश बनाने का आग्रह किया गया है, जबकि कुछ याचिकाओं में सरकार से इस क्रिप्टो करेंसी की खरीदफरोख्त को रोकने का आग्रह किया गया है.

इस साल 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली जस्टिस ए.एम. खानविलकर और जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की बैंच ने इन याचिकाओं की सुनवाई की. इस में रिजर्व बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि बिटकौइन जैसी क्रिप्टो करेंसी में सौदों की अनुमति देने से गैरकानूनी लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा. यह सरकारी नियंत्रण से बाहर की डिजिटल मुद्रा है.

खैर, सुप्रीम कोर्ट का फैसला जब आएगा, तब आएगा. अभी तो हाल यह है कि लोगों को बिटकौइन की डिजिटल मुद्रा में सोने नहीं हीरे जैसी चमक नजर आ रही है. देश भर में रोजाना अरबों रुपए के बिटकौइन की औनलाइन खरीदफरोख्त हो रही है. बिटकौइन के चक्कर में तमाम लोग ठगे भी जा रहे हैं. कई नामीगिरामी हस्तियां बिटकौइन के मामले में फंस चुकी हैं. ऐसे मामलों में फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा भी शामिल हैं.

बिटकौइन के चक्कर में खाकी वरदी भी दागदार हुई है. गुजरात की राजधानी अहमदाबाद के बहुचर्चित बिटकौइन मामले में एक एसपी सहित करीब 10 पुलिसकर्मी गिरफ्तार हुए हैं. एक पूर्व विधायक को तो अदालत ने भगोड़ा घोषित कर रखा है. कई बड़े अफसर और नेता भी इस मामले में फंसे हुए हैं.

पिछले दिनों राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक महिला थानेदार ने बिटकौइन केस में फंसाने की धमकी दे कर एक औनलाइन फर्म के संचालकों से 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी. यह महिला थानेदार रिश्वत की पहली किस्त में 5 लाख रुपए लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार हुई, साथ में उस का वकील पति भी पकड़ा गया था.

उस दिन तारीख थी 7 अगस्त. जयपुर के मानसरोवर इलाके के थाना शिप्रापथ में महिला एसआई बबीता चौधरी किसी मुकदमे से संबंधित फाइल देख रही थीं. इसी बीच उन के मोबाइल पर कोई काल आई तो वह अपनी कुरसी से उठ कर थाने के बरामदे में टहलते हुए बात करने लगीं.

बबीता जब मोबाइल पर बात कर रही थीं, तभी उन्होंने एक अच्छी कदकाठी के युवक को थाने के अंदर आते देखा. उस युवक के पास एक बैग था. बबीता युवक को जानती थीं. उस का नाम मोहित (बदला हुआ) था. मोहित ने बबीता को देख लिया था. वह थाने में बबीता से ही मिलने आ रहा था. बबीता ने उसे 7 अगस्त को बुलाया था.

मोहित को देख कर बबीता ने मोबाइल पर हो रही बात जल्दी खत्म की और मोहित को इशारा कर के अपने पास बुलाया. मोहित ने बबीता के पास पहुंच कर कहा, ‘‘मैडम, मैं अपने वादे का पक्का हूं. आप से जो वादा किया था, उसे पूरा करने आया हूं.’’

‘‘ठीक है.’’ एसआई बबीता ने एक तिरछी नजर डाल कर मोहित के बैग का जायजा लिया. फिर उस से कहा, ‘‘चलो सामने रेस्टोरेंट में बैठ कर चाय पीते हैं, वहीं पर गपशप कर लेंगे.’’

‘‘मैडम, काफी गरमी है, चाय पीने की इच्छा नहीं है, फिर भी आप कह रही हैं तो चाय पी लेते हैं.’’ मोहित ने कहा.

‘‘मोहित, ज्यादा भाव मत खाओ, पुलिस वाले दूसरों से चाय पीते हैं, मैं तो तुम्हें अपने पैसों से चाय पिला रही हूं’’ बबीता ने मोहित को आंखें दिखाईं.

‘‘नहीं मैडम, मैं तो मजाक कर रहा था.’’ मोहित ने एसआई बबीता के नाराजगी वाले हावभाव देख कर कहा.

इसी के साथ बबीता थाने से निकल कर सामने वाले रेस्टोरेंट में चली गईं. मोहित भी उन के पीछेपीछे था. रेस्टोरेंट में उस समय ज्यादा भीड़भाड़ नहीं थी. बबीता ने कोने की टेबल की तरफ इशारा करते हुए मोहित से कहा, ‘‘चलो उस टेबल पर बैठते हैं.’’

टेबल के एक तरफ कुरसी पर बबीता बैठ गईं और सामने वाली कुरसी पर मोहित. उन के बैठते ही वेटर टेबल पर आ गया. उस ने 2 गिलास ठंडा पानी रख कर और्डर पूछा. बबीता ने वेटर से 2 कप चाय और कुछ नमकीन लाने को कहा.

वेटर चला गया तो बबीता ने मोहित से पूछा, ‘‘तुम कौन सा वादा पूरा करने की बात कह रहे थे?’’

‘‘मैडम, आप ने जो कहा था, मैं ले आया हूं.’’ मोहित बोला.

बबीता ने पूछा, ‘‘कितने हैं?’’

मोहित ने अपने हाथ की पांचों अंगुलियां दिखाते हुए कहा, ‘‘इस बैग में हैं.’’

‘‘ठीक है.’’ कहते हुए बबीता ने टेबल पर रखा अपना मोबाइल उठा कर एक नंबर मिलाया. 2-3 घंटियां बजने पर दूसरी ओर काल रिसीव कर ली गई. काल रिसीव होने पर बबीता ने कहा, ‘‘डियर, मैं थाने के सामने रेस्टोरेंट पर बैठी हूं, छोटा सा काम है, इधर आ जाओ.’’

‘‘हां, मैं अभी आता हूं.’’ दूसरी ओर से आवाज आई. इतनी देर में वेटर ने चाय के कप ला कर टेबल पर रख दिए. एक प्लेट में नमकीन भी थी. बबीता ने मोहित से कहा, ‘‘लो चाय पीयो.’’

दोनों चाय पीने लगे. इस बीच, बबीता के मोबाइल पर फिर काल आ गई तो वह बात करने लगीं. करीब 10 मिनट बाद जब बात खत्म हुई तब तक बबीता की चाय ठंडी हो चुकी थी. मोहित ने कहा भी कि मैडम आप के लिए दूसरी चाय मंगा लेते हैं. इस पर बबीता बोलीं, ‘‘नहीं रहने दो, आज कई चाय पी चुकी हूं.’’ मोहित चुप हो गया.

बबीता प्लेट में रखी नमकीन खाने लगीं. नमकीन खातेखाते बबीता ने मोहित से उस की फर्म और काम धंधे के बारे में पूछा. मोहित ने नपेतुले शब्दों में बबीता की बातों का जवाब दे दिया.

जब दोनों बात कर रहे थे तभी एक आदमी रेस्टोरेंट में आया. उस ने रेस्टोरेंट में इधरउधर झांक कर देखा तो बबीता कोने की टेबल पर नजर आ गईं. उस आदमी को देख कर बबीता ने आवाज दी, ‘‘अमर यहां आ जाओ.’’

वह आदमी बबीता की टेबल पर चला गया. मोहित उसे पहले से जानता था. वह एसआई बबीता के पति अमरदीप चौधरी थे. अमरदीप ने वहां खाली पड़ी एक कुरसी पर बैठते हुए मोहित से हाथ मिलाया. फिर बिना किसी औपचारिकता के बबीता से कहा, ‘‘कैसे बुलाया?’’

‘‘अमर, ये मोहित जी का बैग है, इसे ले जाओ. इस में कुछ खास सामान है, संभाल कर रखना.’’ बबीता के कहते ही मोहित ने अमर को बैग दे दिया.

अमरदीप बैग ले कर रेस्टोरेंट से बाहर निकला. उस के साथ बबीता और मोहित भी बाहर आ गए. ये लोग जैसे ही रेस्टोरेंट से बाहर आए वैसे ही 4-5 लोगों ने बबीता और अमरदीप को घेर कर पकड़ लिया. बबीता उस समय वरदी में थी. बबीता ने उन लोगों को हड़काया तो उन्होंने कहा कि वे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी से हैं.

एसीबी का नाम सुनते ही बबीता और अमरदीप के चेहरे काले पड़ गए. एसीबी अधिकारियों ने उन की तलाशी ली. तलाशी में 5 लाख रुपए मिले. यह रकम बबीता ने मोहित से रिश्वत के रूप में ली थी.

एसीबी अधिकारियों ने 5 लाख रुपए जब्त कर के आवश्यक काररवाई की. इस के बाद बबीता व अमरदीप के घर की तलाशी ली गई. इन लोगों का घर जयपुर के वैशाली नगर में गांधीपथ स्थित गुरु जंभेश्वर नगर में था, तलाशी की काररवाई दूसरे दिन 8 अगस्त को भी चली.

इन के मकान की तलाशी में 5 लाख 81 हजार रुपए नकद मिले. इस के अलावा 19 मकान, दुकान और जमीनों के दस्तावेज भी मिले. इन में 7 मकान, दुकान और जमीनें बबीता और उस के पति के नाम थीं और बाकी दस्तावेज दूसरे लोगों के नाम पर थे. बबीता और उस के पति के नाम की अचल संपत्तियां जयपुर के कालबाड़ रोड, सीकर रोड, निवारू रोड, जगतपुरा, टोंक व देवली आदि पर थीं.

इतनी अचल संपत्ति होने के बावजूद बबीता अपने परिवार के साथ किराए के मकान में रहती थीं. बबीता के घर से एक लक्जरी गाड़ी, करीब 100 ग्राम सोने के जेवर और ज्वैलरी शोरूम के बिल मिले. इन बिलों के हिसाब से करीब 10 लाख रुपए की ज्वैलरी खरीदी गई थी.

एसीबी अधिकारियों के अनुसार, परिवादी मोहित (बदला हुआ नाम) की ओर से की गई शिकायत और आरोपियों से पूछताछ में जो कहानी उभर कर सामने आई. वह इस तरह थी.

दो युवक जयपुर के महारानी फार्म में स्थित किराए की बिल्डिंग में साइबर नेटिक्स सौल्यूशन नाम की फर्म चलाते थे. उसी औफिस में संचालकों की एक अन्य फर्म भी थी. इस फर्म का काम औनलाइन मार्केटिंग और विज्ञापन डिजाइनिंग का था. फर्म के मैनेजर मोहित ने एसीबी में श्कियत की थी कि उन की फर्म में काम करने वाले सोनू नाम के एक एजेंट ने करीब 3 घंटे फर्म के फोन की रिकौडिंग की थी. इस के अलावा लेनदेन का डेटा चुरा लिया था.

सोनू ने यह रिकौर्डिंग और लेनदेन का डेटा एक पेन ड्राइव में एसआई बबीता के पति अमरदीप चौधरी को दे दिया था. अमरदीप वकील भी है. रिकौर्डिंग में अमेरिका सहित कई अन्य देशों से आने वाली काल और बिटकौइन की खरीदफरोख्त का जिक्र है.

आरोप है कि अमरदीप इस रिकौर्डिंग के नाम पर बिटकौइन की खरीदफरोख्त करने के मामले में बबीता के मार्फत फर्म के संचालकों को आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करने की धमकी दे रहा था. अमरदीप करीब 10 दिन पहले फर्म संचालकों से मिला भी था.

अमरदीप और बबीता ने फर्म संचालकों को मुकदमा दर्ज करने से बचाने के लिए 50 लाख रुपए मांगे. दबाव बनाने के लिए एसआई बबीता ने 3 दिन में 15 से ज्यादा बार फोन कर के फर्म संचालकों को थाने बुलाया था.

फर्म संचालकों ने पुलिस के पचड़े से बचने के लिए बातचीत शुरू की. उन्होंने नया बिजनेस होने और 50 लाख रुपए देने में असमर्थता जताई तो बबीता ने 45 लाख रुपए किस्तों में देने की बात कही. इस पर फर्म संचालक राजी हो गए. इसी के तहत पहली किस्त के रूप में 5 लाख रुपए 7 अगस्त को देने की बात तय हुई थी.

इस मामले की शिकायत मिलने पर एसीबी के आईजी सचिन मित्तल ने एडिशनल एसपी नरोत्तम लाल वर्मा को जांच सौंपी. एसीबी अधिकारियों ने शिकायत की पुष्टि कराई और पुष्टि होने पर बबीता और अमर को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया. इसी योजना के तहत फर्म के मैनेजर मोहित को एसआई बबीता को 5 लाख रुपए देने के लिए भेजा गया था. आखिर बबीता और उन के पति अमरदीप एसीबी अधिकारियों की पकड़ में आ गए.

एसीबी की जांच में यह बात भी सामने आ गई कि फर्म के संचालकों ने डेढ़ साल में बिटकौइन के नाम पर करोड़ों रुपए कमाए थे.

इस फर्म के मैनेजर और संचालक दिल्ली और चंडीगढ़ के रहने वाले थे. इन लोगों ने डेढ़ साल पहले जयपुर आ कर महारानी फार्म के पास डेढ़ लाख रुपए महीना किराए पर बिल्डिंग ले कर साइबरनेटिक्स वेब सौल्यूशन नाम की फर्म शुरू की थी. इस फर्म का दूसरा औफिस जयपुर में शिप्रापथ विजयपथ तिराहे के पास था. फर्म संचालकों ने अपने औफिस में कई युवकयुवतियों को नौकरी पर रखा था. ज्यादातर काम रात को होता था.

एसीबी अब इस बात की भी जांच कर रही है कि बबीता और अमरदीप के पास ऐसे कौन से सबूत थे जिन के आधार पर वे फर्म संचालकों को ब्लैकमेल कर रहे थे. एसीबी को जांच में कुछ तथ्य मिले तो इस फर्म के संचालक भी गिरफ्तार हो सकते हैं.

बबीता चौधरी 2010 बैच की पुलिस सबइंपेक्टर थीं. नौकरी में आने के बाद 2 साल के प्रोवेशन पीरियड के बाद उन्हें जयपुर के प्रतापनगर थाने में नियुक्ति मिली थी. उस दौरान बबीता पर रेप का एक केस दर्ज नहीं करने और आरोपियों का पक्ष लेने के आरोप लगे थे.

तत्कालीन डीसीपी (ईस्ट) कुंवर राष्ट्रदीप ने इस मामले में बबीता को सस्पेंड कर के एसीपी से जांच कराई थी. जांच में बबीता को दोषमुक्त कर दिया गया. इस पर उन्हें वापस प्रतापनगर थाने में लगा दिया था. बाद में उन्हें पुलिस लाइन भेज दिया गया. करीब 5 महीने पहले ही बबीता को जयपुर कमिशनरेट पुलिस लाइन से शिप्रापथ थाने में लगाया गया था. एसीबी की काररवाई के बाद बबीता को फिर सस्पेंड कर दिया गया.

मजेदार बात यह है कि बबीता के मोबाइल पर उन के पति एडवोेकेट अमरदीप चौधरी का मोबाइल नंबर ट्रूकौलर पर एसीपी क्राइम ब्रांच के नाम से प्रदर्शित होता था. एसीबी ने 8 अगस्त को बबीता और उन के पति अमरदीप को अदालत में पेश कर के न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था.

सूरत के रहने वाले बिल्डर और कारोबारी शैलेश भट्ट और उस का पार्टनर किरीट पालडिया डिजिटल करेंसी बिटकौइन की डील करते हैं. शैलेश भट्ट नवंबर 2016 में नोटबंदी के दौरान सूरत के व्यापारी किरीट पालडि़या के संपर्क में आया था. किरीट ने ही भट््ट को बिटकौइन में पैसा निवेश करने की सलाह दी. बाद में भट्ट और किरीट पार्टनरशिप में बिटकौइन की डील करने लगे थे. कुछ समय बाद दोनों की पार्टनरशिप टूट गई थी.

इसी साल फरवरी के महीने में पुलिस इंसपेक्टर अनंत पटेल ने अपनी पुलिस टीम के साथ अहमदाबाद और गांधीनगर के बीच एक पैट्रोल पंप से भट्ट और उस के 2 साथियों को उठा कर बंधक बना लिया था. इन लोगों को एक फार्महाउस में रखा गया.

इस दौरान पुलिस इंसपेक्टर अनंत पटेल ने एनकाउंटर की धमकी दे कर शैलेश के वौलेट से 200 बिटकौइन अपने मोबाइल के जरिए किरीट पालडि़या के खाते में ट्रांसफर करवा लिए. इन बिटकौइन की कीमत करीब 12 करोड़ रुपए बताई गई. इस के बाद पुलिस इंसपेक्टर ने इन लोगों को छोड़ने के एवज में भट्ट से 32 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी.

बिल्डर भट्ट ने फिरौती की रकम पहुंचाने का आश्वासन दिया. इस के बाद पुलिस ने भट्ट और उस के साथियों को छोड़ दिया. बाद में बिल्डर शैलेश भट्ट ने इस मामले की शिकायत गुजरात सरकार और सीआईडी क्राइम ब्रांच में कर दी. भट्ट ने आरोप लगाया कि इस मामले में उस के पुराने पार्टनर किरीट पालडि़या और गुजरात के पूर्व विधायक नलिन कोटडि़या के अलावा स्टेट सीबीआई के एक अधिकारी का भी हाथ है.

करीब एक महीने की जांचपड़ताल के बाद गुजरात के अमरेली जिले के पुलिस इंसपेक्टर अनंत पटेल सहित 8 पुलिसकर्मियों और सूरत के एक वकील और जमीनों के दलाल केतन पटेल के खिलाफकेस दर्ज किया गया. बाद में इस केस में अमरेली के एसपी जगदीश पटेल और अन्य लोगों के नाम भी जोडे़ गए.

गुजरात पुलिस की सीआईडी क्राइम ब्रांच ने इस मामले में सब से पहले 8 अप्रैल को अमरेली जिला पुलिस की लोकल क्राइम ब्रांच के हैडकांस्टेबल बाबूभाई डेर और कांस्टेबल विजय वाढेर व सूरत के वकील केतन पटेल को गिरफ्तार किया. बाद में 19 अप्रैल को पुलिस इंसपेक्टर अनंत पटेल को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

इस मामले में तब महत्त्वपूर्ण मोड़ आ गया जब गिरफ्तार पुलिस इंसपेक्टर अनंत पटेल ने यह खुलासा किया कि बिटकौइन हड़पने का षडयंत्र एसपी जगदीश पटेल के निर्देश पर रचा गया था. इस खुलासे के बाद सीआईडी क्राइम ब्रांच ने एसपी को पूछताछ के लिए बुलाया, लेकिन वह नहीं आए.

इस के बाद सीआईडी क्राइम ब्रांच की टीम अमरेली में उन के आवास पहुंची और पूछताछ के लिए मुख्यालय ले गई. करीब 18 घंटे लंबी पूछताछ के बाद अमरेली के एसपी जगदीश पटेल को 23 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया गया. इस दौरान क्राइम ब्रांच के मुखिया आशीष भाटिया ने दावा किया कि इस मामले का मुख्य सूत्रधार एसपी जगदीश पटेल ही था. जांच एजेंसी के पास इस के सबूत हैं.

गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले के बाद पहली बार किसी आईपीएस औफिसर की गिरफ्तारी हुई थी.

जांच में सामने आया कि एसपी जगदीश पटेल ने शैलेश भट्ट के पास बिटकौइन होने की जानकारी मिलने पर इंसपेक्टर अनंत पटेल को उसे उठाने को कहा था. एसपी के निर्देश पर इंसपेक्टर अनंत अमरेली से गांधीनगर आया था.

बिटकौइन और पैसों के लेनदेन के मामले में एसपी ने वकील केतन पटेल और अनंत पटेल से मोबाइल पर बातचीत की थी. पैसे लेने के लिए अमरेली के 6 पुलिसकर्मी मुंबई गए थे. वहां से ये लोग इनोवा कार से भरूच गए थे. पुलिसकर्मियों को भरूच से लाने के लिए एसपी जगदीश पटेल के आदेश पर अमरेली पुलिस की एक गाड़ी भरूच भेजी गई थी.

सीआईडी क्राइम ब्रांच ने इस मामले में अप्रैल में ही पूर्व विधायक नलिन कोटडि़या के भतीजे संजय कोटडि़या से भी पूछताछ की थी. इस से पूर्व विधायक कोटडि़या पर दबाव बढ़ने लगा तो कोटडि़या ने दावा किया कि शैलेश भट्ट ने सूरत के पीयूष सावलिया और धवल मवाणी का अपहरण कर के 240 करोड़ रुपए के 2300 बिटकौइन हड़प लिए थे. बाद में पीयूष सावलिया ने सीआईडी क्राइम ब्रांच व सरकार को हलफनामा भेज कर पूर्व विधायक के दावे को झुठला दिया. इस से पूर्व विधायक नलिन कोटडि़या को करारा झटका लगा.

इस बीच, मई के पहले सप्ताह में सीआईडी क्राइम ब्रांच ने किरीट पालडि़या को भी गिरफ्तार कर लिया. इस के अलावा पूर्व विधायक कोटडि़या के करीबी समझे जाने वाले राजकोट निवासी ननकूभाई आहिर को गिरफ्तार करने पर 25 लाख रुपए की नकदी बरामद हुई.

यह रकम किरीट पालडि़या ने पूर्व विधायक को दी जाने वाली 66 लाख रुपए की राशि के हिस्से के तौर पर ननकूभाई के पास भेजी थी. मई के दूसरे सप्ताह में सीआईडी क्राइम ब्रांच ने शैलेश भट्ट को धमकी दे कर ट्रांसफर करवाए गए बिटकौइन में से 119 बिटकौइन किरीट पालडि़या के वौलेट से जब्त कर लिए.

सीआईडी क्राइम ब्रांच ने पूर्व विधायक नलिन कोटडि़या को पूछताछ के लिए बुलाने के लिए सम्मन भी भेजे, लेकिन वह हाजिर नहीं हुए. ननकूभाई से 25 लाख रुपए जब्त किए जाने के बाद कोटडि़या ने सोशल मीडिया के माध्यम से बयान दे कर खुद के एनकाउंटर की आशंका जताई. उन्होंने कहा कि बिटकौइनमामले में सबूत मिटाने के लिए उन का एनकाउंटर किया जा सकता है.

अहमदाबाद स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की विशेष अदालत ने बिटकौइन मामले में 18 जून को पूर्व विधायक नलिन कोटडि़या को भगोड़ा घोषित कर दिया. इसी मामले में 27 जुलाई को अमरेली के 7 अन्य पुलिसकर्मियों को भी गिरफ्तार किया गया.

कांग्रेस ने नोटबंदी के बाद गुजरात में बिटकौइन के जरिए 5 हजार करोड़ से ज्यादा के घोटाले और इस में भाजपा के नेताओं के शामिल होने का आरोप लगाते हुए इस की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है.

इस पूरे मामले की जांच के दौरान शैलेश भट्ट के भी बडे़ पैमाने पर बिटकौइन धोखाधड़ी में शामिल होने की बातें सामने आईं. इसलिए जांच एजेंसी भट्ट के खिलाफ भी शिकंजा कस सकती है. गिरफ्तार वकील केतन पटेल के छोटे भाई जतिन पटेल इस मामले में फरार हैं. अदालत ने उस की गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया है.

बहरहाल, सीआईडी इस मामले की करीब 6 महीने से जांच कर रही है. अब तक एक दरजन से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. 3 मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इन में एक मुकदमे में शैलेश भट्ट भी आरोपी है. आईपीएस औफिसर, पूर्व विधायक और बड़े कारोबारियों के अलावा पुलिसकर्मियों के लिप्त होने से यह मामला अब हाईप्रोफाइल बन चुका है. इस से बिटकौइन की चकाचौंध कम होने के बजाए बढ़ी है. भारत में बिटकौइन की चमक अभी कायम रहेगी या घटेगी, यह सुप्रीम कोर्ट में 11 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में तय हो सकता है.

प्रेमी का छल : रीतेंद्र ने पिंकी के साथ क्या किया

पिंकी जैसी लड़कियां भले ही खुद पर कितना भी कौन्फीडेंस रखती हों, लेकिन सच्चाई यह है कि अपने कौन्फीडेंस की वजह से वे किसी न किसी के जाल में फंस ही जाती हैं. पिंकी सोचती थी कि वह जब चाहे रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर की हकीकत सामने ले आएगी. लेकिन उसे नहीं मालूम था कि वह मगरमच्छ है.

मंजू गुप्ता अपने पति किशन गुप्ता के साथ समाधान दिवस पर कानपुर के थाना चकेरी पहुंची. उस समय एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा, एसपी (पूर्वी) सुरेंद्र कुमार दास, सीओ अजीत प्रताप सिंह और थानाप्रभारी अजय सेठ थाने में ही मौजूद थे. थाना परिसर में फरियादियों की भीड़ लगी थी और अधिकारी बारीबारी से उन की समस्याएं सुन कर निदान करने की कोशिश कर रहे थे.

फरियादियों में नेताजी नगर निवासी मंजू गुप्ता भी थी. बारी आने पर जब वह एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा के सामने पहुंची तो अपनी लिखित फरियाद देते हुए फफक कर रो पड़ी. रोतेरोते उस ने कहा, ‘‘साहब, हमारी बेटी पिंकी उर्फ आंचल को घर से गायब हुए डेढ़ साल से ज्यादा हो चुका है लेकिन अभी तक उस का कुछ पता नहीं चला. पता नहीं वह जिंदा है भी या नहीं. उस की गुमशुदगी और अपहरण की रिपोर्ट थाने में दर्ज है.’’

एसएसपी मीणा ने मंजू गुप्ता को भरोसा दिया कि वह उस की बेटी पिंकी की खोज कराएंगे और वह जहां भी होगी, बरामद की जाएगी. आश्वासन पा कर मंजू गुप्ता पति के साथ घर वापस आ गई. हालांकि एसएसपी के आश्वासन पर उन्हें यकीन नहीं था, क्योंकि अब तक वे लोग आईजी, डीआईजी से ले कर डीएम व कमिश्नर तक की चौखट पर दस्तक दे चुके थे, पर किसी ने भी उन की मदद नहीं की थी. फिर भी एसएसपी के आश्वासन पर उन के मन में आशा की एक नई किरण तो जागी ही थी. यह बात 21 जुलाई, 2018 की है.

एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा ने पिंकी गुप्ता अपहरण मामले को गंभीरता से लिया. उन्हें इस बात का अफसोस था कि डेढ़ साल से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद पुलिस पिंकी को बरामद नहीं कर सकी थी. उन्होंने इस मामले को हैंडल करने की जिम्मेदारी एसपी सुरेंद्र कुमार दास को सौंपी. दास हाल ही में अंबेडकर नगर से पदोन्नत हो कर आए थे और एसपी (पूर्वी) बनाए गए थे.

एसपी सुरेंद्र कुमार दास ने पिंकी अपहरण मामले को चुनौती के रूप में लिया. उन्होंने सीओ अजीत प्रताप सिंह, थानाप्रभारी अजय सेठ तथा चौकी इंचार्ज जगदीश सिंह को अपने औफिस बुला लिया. साथ बैठ कर सभी ने इस मामले पर गंभीरता से विचारविमर्श किया. इसी मीटिंग में तय हुआ कि पिंकी अपहरण मामले की जांच चौकी इंचार्ज जगदीश सिंह करेंगे. यह भी तय हुआ कि हर रोज की जांच से वह अधिकारियों को अवगत कराते रहेंगे.

24 जुलाई, 2018 को जांच की जिम्मेदारी मिलने के बाद जगदीश सिंह ने उसी दिन इस मामले की फाइल के पन्ने पलटते हुए अब तक हुई जांच के बारे में जानने की कोशिश की. पता चला कि पिंकी की गुमशुदगी दर्ज होने के बाद तत्कालीन दरोगा संजय यादव को जांच सौंपी गई थी.

बाद में संजय यादव ने पिंकी की गुमशुदगी को अपहरण में तरमीम कर दिया था. इस के बाद दरोगा राघवेंद्र सिंह, सुजीत कुमार मिश्रा तथा मुरलीधर पांडेय ने जांच की. इस दरमयान 55 पर्चे काटे गए थे. लेकिन पिंकी का कहीं पता नहीं चला था. इस के बाद इस मामले की जांच जगदीश सिंह को सौंपी गई थी.

दरोगा जगदीश सिंह ने फाइल खंगाली तो कई बातों ने उन्हें चौंकाया

पिंकी अपहरण केस की पूरी फाइल का अध्ययन करने के बाद जगदीश सिंह ने पिंकी की मां मंजू गुप्ता को चौकी बुलाया और उस से पूछताछ कर के उस का बयान दर्ज किया. मंजू ने बताया कि पिंकी उर्फ आंचल 27 सितंबर, 2016 को यह कह कर घर से निकली थी कि वह मैडिकल परीक्षण कराने उर्सला अस्पताल जाएगी. उसे थाना बाबूपुरवा की पुलिस ने बुलाया है. उस के बाद वह घर वापस नहीं लौटी थी. पता नहीं वह कहां और किस हाल में होगी.

‘‘तुम्हें किसी पर शक है?’’ जगदीश ने पूछा.

‘‘हां साहब, है.’’ मंजू ने जवाब दिया.

‘‘किस पर?’’

‘‘रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर तथा उस के दोस्त अनुज सिंह पर.’’

‘‘उन के खिलाफ तुम्हारे पास कोई सबूत है क्या?’’ जगदीश सिंह ने पूछा.

‘‘साहब, सबूत तो कोई नहीं है. पर शक जरूर है. दिखावे के लिए तो बउआ ठाकुर ने मेरी मदद की है लेकिन पिंकी के अपहरण का षडयंत्र उसी ने रचा है. उसी ने अपने दोस्तों की मदद से पिंकी का अपहरण किया है.’’

विवेचक जगदीश सिंह ने रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर के संबंध में जानकारी जुटाई तो पता चला कि बउआ ठाकुर शिवकटरा का रहने वाला है और क्षेत्र का दबंग आदमी है. वह डीएवी कालेज का छात्र नेता रहा था और उस ने छात्रसंघ का चुनाव भी लड़ा था. यह अलग बात है कि वह हार गया था. बउआ प्रौपर्टी डीलिंग का काम करता था, साथ ही वह वकील भी था. उस की गिनती दबंग वकीलों में होती थी.

बउआ ठाकुर के दोस्त अनुज सिंह के बारे में सिंह ने जानकारी जुटाई तो पताचला कि वह केडीए कालोनी श्यामनगर का रहने वाला है और ट्रैवल एजेंसी चलाता है. उस का भी अपने क्षेत्र में दबदबा है. साथ ही उस की राजनीतिक गलियारों में पैठ भी है. बउआ ठाकुर से उस की गहरी दोस्ती है. दोनों साथ उठतेबैठते हैं और शराब की महफिल जमाते हैं.

बउआ ठाकुर और अनुज सिंह शक के घेरे में आए तो जगदीश सिंह ने पिंकी गुप्ता उर्फ आंचल के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवा कर देखी. जिस दिन पिंकी गायब हुई थी, उस दिन उस की जिनजिन नंबरों पर बात हुई थी, उन नंबरों को जगदीश सिंह ने अलग पेपर पर लिख लिया. इस के बाद उन्होंने उन नंबरों पर काल कर के एकएक शख्स को थाने बुलाया और उन से पूछताछ की.

बउआ ठाकुर आया संदेह के दायरे में

इसी दौरान एक युवक जगदीश सिंह के हाथ लगा, जिस ने बताया कि 27 सितंबर, 2016 को उस ने पिंकी गुप्ता को छात्र नेता व अधिवक्ता बउआ ठाकुर और उस के दोस्त अनुज सिंह के साथ श्यामनगर में हाइवे पुल के नीचे कार में देखा था.

जगदीश सिंह ने इसी क्लू को आधार बनाया. उन्होंने सीधे अधिवक्ता बउआ ठाकुर पर हाथ डालना उचित नहीं समझा. सोचविचार कर उन्होंने पहले अनुज को उठाने का तानाबाना बुना. इस के लिए उन्होंने एसपी (पूर्वी) सुरेंद्र कुमार दास से संपर्क किया और सारी जानकारी देते हुए अनुज व बउआ को अलगअलग गिरफ्तार करने की अनुमति मांगी.

एसपी ने जगदीश सिंह की जांच प्रगति के आधार पर दोनों की गिरफ्तारी की अनुमति दे दी, साथ ही सहयोग के लिए स्पैशल फोर्स भी मुहैया करा दी.

इसी बीच विवेचक जगदीश सिंह को काल डिटेल्स से एक और चौंकाने वाली बात पता चली कि जिस दिन पिंकी बउआ व अनुज के साथ कार में देखी गई थी, उसी रात से तीनों के मोबाइल फोन स्विच्ड औफ हो गए थे. इस का मतलब उस रात कोई न कोई ऐसी अनहोनी जरूर हुई थी, जिस की वजह से तीनों को मोबाइल स्विच्ड करने पड़े थे. इस क्लू के आधार पर बउआ ठाकुर व अनुज सिंह पुलिस के रडार पर आ गए.

25 अगस्त, 2018 की रात दरोगा जगदीश सिंह ने एसपी (पूर्वी) द्वारा उपलब्ध कराई गई स्पैशल फोर्स की मदद से अनुज सिंह के केडीए कालोनी, श्यामनगर आवास पर छापा मारा. पुलिस छापे से घर में हड़कंप मच गया. घर वालों व पड़ोसियों ने अनुज की गिरफ्तारी का विरोध किया, लेकिन पुलिस ने किसी की एक नहीं सुनी और अनुज सिंह को गिरफ्तार कर थाना चकेरी ले आई.

थाना चकेरी पर अनुज सिंह से पिंकी गुप्ता के संबंध में पूछा गया तो वह साफ मुकरते हुए बोला, ‘‘मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता.’’

थानाप्रभारी अजय सेठ व सीओ अजीत प्रताप सिंह ने भी अनुज से हर तरह से पूछताछ की, लेकिन उस ने जुबान नहीं खोली. इस पर विवचेक जगदीश सिंह ने क्लू देने वाले आदमी से अनुज का सामना कराया. उसे देखते ही अनुज सिंह को पसीना आ गया. आखिर उसे जुबान खोलनी पड़ी.

अनुज सिंह ने पुलिस को बताया कि पिंकी गुप्ता अब इस दुनिया में नहीं है. उस ने और बउआ ठाकुर ने पिंकी का अपहरण कर उसी दिन मार डाला था और उस का शव हमीरपुर ले जा कर यमुना नदी में फेंक दिया था. यह पूछे जाने पर कि पिंकी को क्यों मारा, अनुज बोला, ‘‘यह सब बउआ से पूछो. मैं ने तो दोस्ती के नाते उस का साथ दिया था.’’

आखिर खुल ही गया पिंकी की गुमशुदगी का भेद

अनुज सिंह ने पिंकी की हत्या का खुलासा किया तो पुलिस सकते में आ गई. आननफानन में इंसपेक्टर अजय सेठ ने पिंकी की हत्या किए जाने की जानकारी एसपी (पूर्वी) सुरेंद्र कुमार दास व सीओ कैंट अजीत प्रताप सिंह को दे दी. अधिकारियों के निर्देश पर दबंग छात्र नेता, अधिवक्ता रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर के शिवकटरा, गांधीनगर स्थित घर पर भारी पुलिस बल के साथ छापा मारा गया. पुलिस उसे बंदी बना कर थाना चकेरी ले आई.

बउआ ठाकुर की गिरफ्तारी की खबर छात्र नेताओं और वकीलों को लगी तो वे थाना चकेरी आ पहुंचे और हंगामा करने लगे. हंगामे की खबर पा कर एसपी सुरेंद्र कुमार दास व सीओ कैंट अजीत प्रताप सिंह भी आ गए. उन्होंने छात्र नेताओं और वकीलों से अपील की कि वे हंगामा न करें. अगर बउआ ठाकुर निर्दोष है तो उसे बाइज्जत छोड़ दिया जाएगा.

एसपी सुरेंद्र कुमार दास ने जब बउआ से पिंकी के संबंध में पूछताछ की तो वह साफ मुकर गया. लेकिन जब उस का सामना अनुज सिंह से करा कर बताया गया कि उस ने पिंकी की हत्या का राज उगल दिया है तो बउआ ने भी सिर झुका लिया. इस के बाद उस ने पिंकी की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. यही नहीं, दोनों ने हत्या में प्रयुक्त अर्टिगा कार भी बरामद करा दी.

मंजू गुप्ता को जब पिंकी की हत्या हो जाने की खबर मिली तो वह थाना चकेरी पहुंच गई. उस ने हवालात में बंद बउआ से पूछा कि तुम तो पिंकी को बहुत चाहते थे, फिर उसे क्यों मार डाला? इस पर बउआ बोला, ‘‘तुम्हारी बेटी मुझे ब्लैकमेल कर के शादी का दबाव डालने लगी थी. आखिर क्या करता मैं?’’

चूंकि बउआ ठाकुर और अनुज सिंह ने पिंकी की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था, इसलिए विवेचक जगदीश सिंह ने दोनों को अपरहण की धारा 364, हत्या की धारा 302 और लाश गायब करने के लिए धारा 201 में नामजद कर विधिसम्मत बंदी बना लिया.

पुलिस बउआ व अनुज को ले कर हमीरपुर गई, जहां दोनों ने पिंकी के शव को यमुना पुल के नीचे फेंका था. लेकिन पुलिस शव बरामद नहीं कर पाई. पुलिस यमुना किनारे स्थित थानों से अज्ञात शव के बारे में जानकारी जुटा कर पिंकी के शव की शिनाख्त कराने का प्रयास कराने लगी.

पिंकी कौन थी, वह बउआ ठाकुर के संपर्क में कैसे आई, बउआ ने उसे अपने प्यार के जाल में कैसे फंसाया और फिर उस की हत्या क्यों और कैसे की, यह सब जानने के लिए हमें पिंकी के अतीत को टटोलना पड़ेगा.

आम लड़की से खास बनी पिंकी

कानपुर महानगर के चकेरी थाना के अंतर्गत एक मोहल्ला है नेताजी नगर. इसी मोहल्ले में किशन गुप्ता अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी मंजू के अलावा केवल एक ही बेटी थी पिंकी उर्फ आंचल.

किशन गुप्ता जीटी रोड पर अंडे का ठेला लगाता था. उस की पत्नी मंजू भी उस के काम में हाथ बंटाती थी. किशन जो कमाता था, उसी से परिवार का भरणपोषण होता था. मंजू गुप्ता की बेटी पिंकी उर्फ आंचल देखनेभालने में काफी सुंदर थी. उस ने जब जवानी की ओर कदम बढ़ाया तो उस का अंगअंग दमकने लगा. गोरी रंगत और खूबसूरत आंखों वाली पिंकी को जो भी देखता, आकर्षित हो जाता.

पिंकी गुप्ता का चचेरा भाई दिलीप गुप्ता भी नेताजी नगर में पिंकी के घर के पास रहता था. उस की अपने चाचा किशन व चाची मंजू से पटरी नहीं बैठती थी. दोनों के बीच अकसर छोटीमोटी बातों को ले कर झगड़ा होता रहता था. पिंकी इस झगड़े से बहुत परेशान रहती थी. मां का पक्ष ले कर कभीकभी वह दिलीप से भी भिड़ जाती थी, जिस से दिलीप उस से नाराज रहने लगा था.

एक रोज पिंकी चचेरे भाई दिलीप की शिकायत ले कर एसएसपी औफिस जा रही थी, तभी रामादेवी चौराहे पर उस की मुलाकात अधिवक्ता रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर से हो गई. उस रोज टैंपो औटो की हड़ताल थी, जिस से पिंकी को सवारी नहीं मिल रही थी.

अधिवक्ता बउआ ठाकुर कचहरी जा रहा था, पुलिस कार्यालय भी कचहरी के पास ही था. बउआ ठाकुर ने पिंकी से कहा कि उस की कार में बैठ जाए, वह उसे पुलिस औफिस के सामने उतार देगा.

पिंकी की मजबूरी थी, सो वह गाड़ी में बैठ गई. पिंकी खूबसूरत होने के साथसाथ बातूनी भी थी. रामादेवी चौराहे से पुलिस औफिस तक वह उस से बातें करती रही. एक मिनट के लिए भी उस का मुंह बंद नहीं हुआ.

जिस तरह वह मुसकरामुसकरा कर बातें कर रही थी, उस से रीतेंद्र सिंह बहुत प्रभावित हुआ. पहली ही नजर में पिंकी उस के दिल में उतर गई. वह बैक मिरर में उस का चेहरा देखते हुए उस की बातों का जवाब देता रहा. बातोंबातों में उस ने पिंकी का मोबाइल नंबर भी ले लिया.

बउआ ने धीरेधीरे पांव आगे  बढ़ा कर थाम लिया पिंकी का हाथ

पिंकी उर्फ आंचल से हुई पहली मुलाकात में ही बउआ जैसे उस का दीवाना हो गया. उस का फोन नंबर तो उस के पास था ही, इसलिए जब भी उस का मन करता, उस से फोन पर बात कर लेता. रीतेंद्र उर्फ बउआ ठाकुर शरीर से हृष्टपुष्ट व स्मार्ट था, सो पिंकी को भी उस से बातें करना अच्छा लगता था. धीरेधीरे उन दोनों के बीच दोस्ती हो गई. यही दोस्ती बाद में प्यार में बदल गई. दोनों ही एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे.

एक दिन पिंकी के चचेरे भाई दिलीप के घर चोरी हो गई. दिलीप ने अपनी चाची मंजू व चचेरी बहन पिंकी के विरुद्ध थाना चकेरी में रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने मंजू के घर तलाशी ली तो चोरी का कुछ सामान बरामद हो गया.

पुलिस ने मांबेटी को गिरफ्तार कर लिया. हालांकि मंजू चिल्लाती रही कि उस ने चोरी नहीं की है, बल्कि उसे साजिशन फंसाया गया है. लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी और मंजू और उस की बेटी पिंकी को जेल भेज दिया.

प्रेमिका पिंकी के जेल जाने की बात अधिवक्ता बउआ ठाकुर को पता चली तो वह तिलमिला उठा. उस ने दौड़धूप कर के पिंकी व उस की मां मंजू की जमानत करा दी. इस दरम्यान दोनों को 14 दिन जेल में रहना पड़ा. चूंकि वकील बउआ ठाकुर ने मंजू की जमानत कराई थी, इसलिए वह उस के अहसान तले दब गई और उसे अपन हितैषी मानने लगी.

पिंकी का भी प्यार उमड़ पड़ा और वह बउआ को अपना सच्चा प्रेमी समझ बैठी. इस के बाद बउआ और पिंकी का प्यार परवान चढ़ने लगा. दोनों साथसाथ घूमनेफिरने और मौजमस्ती करने लगे. दोनों का शारीरिक मिलन भी होने लगा.

रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर चकेरी थाना के शिवकटरा, गांधीग्राम में रहता था. वहां उस का अपना मकान था. वह छात्र जीवन से ही दबंग था. डीएवी कालेज में पढ़ाई के दौरान उस ने छात्र संघ का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वह हार गया था. बउआ प्रौपर्टी डीलिंग के साथसाथ वकालत भी करता था. उस की आर्थिक स्थिति मजबूत थी और वह क्षेत्र का दबंग व्यक्ति था.

मांबाप ने भी नहीं समझाया पिंकी को

पिंकी, बउआ के प्यार में ऐसी दीवानी हुई कि वह उस के साथ शादी रचाने का ख्वाब देखने लगी. ख्वाब ही नहीं देखने लगी बल्कि उस पर शादी के लिए दबाव भी डालने लगी. जबकि बउआ शादीशुदा था. भला वह शादी के लिए कैसे राजी होता. पिंकी जब भी शादी का प्रस्ताव रखती, बउआ यह कह कर टाल देता कि अभी तो मौजमस्ती के दिन हैं. शादी की जल्दी क्या है.

अब तक पिंकी के मांबाप भी जान गए थे कि पिंकी और बउआ ठाकुर एकदूसरे को चाहते हैं. लेकिन उन्होंने कभी विरोध नहीं किया. इस का कारण यह था कि बउआ ठाकुर मंजू और किशन की हरसंभव मदद करता था.

मांबाप यह भी जानते थे कि अगर वे पिंकी को मना भी करेंगे तो भी वह बउआ का साथ नहीं छोड़ेगी. इसलिए उन्होंने पिंकी को बउआ ठाकुर के साथ आनेजाने की छूट दे दी थी. पिंकी का जब भी जी चाहता, बउआ के साथ चली जाती थी.

इधर पिंकी के चचेरे भाई दिलीप को जब पता चला कि दबंग बउआ ठाकुर पिंकी के घर वालों की मदद कर रहा है तो उस ने भी बउआ से दोस्ती कर ली. जल्द ही दिलीप भी बउआ ठाकुर का खास बन गया. दिलीप की शराब पार्टी भी बउआ ठाकुर व उस के दोस्तों के साथ जमने लगी. पार्टी का खर्च दिलीप ही उठाता था.

जब पिंकी को बउआ ठाकुर और दिलीप की दोस्ती की जानकारी हुई तो वह बउआ से नाराज रहने लगी. उस ने बउआ के साथ आनाजाना भी कम कर दिया. अब वह बहुत अनुरोध करने पर ही उस के साथ जाती थी. दरअसल पिंकी को यह गवारा नहीं था कि उस का प्रेमी उस के पारिवारिक दुश्मन दिलीप से दोस्ती रखे. इसलिए वह बउआ से दूरी बनाने लगी थी.

19 जून, 2016 को पिंकी बाबूपुरवा कालोनी में रहने वाले किसी रिश्तेदार के घर जा रही थी, तभी ट्रांसपोर्ट चौराहे पर उसे बउआ ठाकुर मिल गया. उस ने पिंकी को साथ चलने को कहा. लेकिन उस ने साफ इनकार कर दिया. बउआ पिंकी को जबरदस्ती खींच कर कार में बिठाने लगा. इस पर पिंकी ने हंगामा खड़ा कर दिया, जिस से भीड़ जुट गई. भीड़ जुटते देख बउआ वहां से रफूचक्कर हो गया.

पिंकी ने बउआ ठाकुर के  खिलाफ दर्ज कराया केस. इस के बाद पिंकी बदहवास हालत में थाना बाबूपुरवा पहुंची और उस ने रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर तथा अपने चचेरे भाई दिलीप के विरुद्ध छेड़छाड़, मारपीट, गालीगलौज, धमकी देने और पोक्सो ऐक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी. पिंकी ने चचेरे भाई दिलीप को सबक सिखाने के लिए रिपोर्ट में उस का नाम भी दर्ज कराया.

बउआ ठाकुर को जब पिंकी द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने की जानकारी मिली तो उस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. उस ने पिंकी पर दबाव डाला कि वह इस मामले को रफादफा कर दे. लेकिन पिंकी राजी नहीं हुई. वह सीधेसीधे ब्लैकमेलिंग पर उतर आई.

उस ने बउआ ठाकुर से कहा कि वह समझौता तभी करेगी, जब वह उस से शादी कर लेगा. उस ने यह भी धमकी दी कि अगर उस ने शादी नहीं की तो वह उस की जिंदगी में भी जहर घोल देगी. इस के लिए वह उस की पत्नी को अपने और उस के अवैध संबंधों की जानकारी दे देगी.

पिंकी की धमकी से बउआ ठाकुर घबरा गया. वह जानता था कि पिंकी जिद्दी लड़की है, वह किसी भी हद तक जा सकती है. अत: गले की इस फांस को निकालने के लिए बउआ ने एक भयानक निर्णय ले लिया और समय का इंतजार करने लगा. इस बीच बउआ ठाकुर ने अपने अजीज दोस्त अनुज सिंह से भी मुलाकात की जो ट्रैवल एजेंसी चलाता था. वह केडीए कालोनी, श्यामनगर में रहता था. बउआ ने उसे अपनी परेशानी बताते हुए मदद मांगी तो अनुज राजी हो गया.

बउआ ठाकुर वकील था. उस ने मामले को रफादफा करने के लिए एक शपथपत्र तैयार कर रखा था. वह इस शपथपत्र पर पिंकी से दस्तखत कराना चाहता था. लेकिन पिंकी इस के लिए राजी नहीं थी. उस ने पिंकी को समझौते के लिए मोटी रकम देने का भी लालच दिया, लेकिन वह टालमटोल करती रही.

पिंकी ने मौत की ओर खुद बढ़ाए कदम

पिंकी ने बउआ के खिलाफ पोक्सो ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था. इस मामले में उम्र का पता लगाने के लिए पिंकी का मैडिकल होना था. बाबूपुरवा पुलिस ने 27 सितंबर, 2016 को उसे थाने बुलाया और मैडिकल कराने उर्सला अस्पताल ले गई.

पिंकी के मैडिकल की जानकारी बउआ ठाकुर को हुई तो वह अपने दोस्त अनुज सिंह के साथ अर्टिगा कार ले कर कचहरी पहुंच गया. अर्टिगा कार अनुज के दोस्त गोलू की थी. यहीं से बउआ ठाकुर ने फोन कर के पिंकी को समझौते के लिए बुलाया.

मैडिकल करा कर पिंकी कचहरी गेट पहुंची तो बउआ ने उसे काली स्क्रीन चढ़ी अर्टिगा कार में बैठा लिया. वहां से ये लोग छप्पनभोग चौराहा आए, जहां बउआ, पिंकी और अनुज ने नाश्ता किया. वहां से निकल कर उन की कार श्यामनगर हाइवे हो कर हमीरपुर रोड की ओर दौड़ने लगी.

कार अनुज चला रहा था, जबकि पीछे वाली सीट पर बउआ ठाकुर और पिंकी बैठे थे. रात करीब 8 बजे चलती कार में पिंकी और बउआ के बीच समझौते के लिए झगड़ा होने लगा. शातिरदिमाग बउआ ठाकुर ने समझौते के शपथ पत्र पर जबरदस्ती पिंकी के दस्तखत करा लिए और समझौते के लिए रुपए देते हुए वीडियो भी बना लिया.

इस के बाद बउआ ठाकुर ने पिंकी को बेरहमी से पीटा और कार में अपने पैरों के नीचे गिरा दिया. बाद में उस ने पैर से ही पिंकी का गला दबा कर उसे बेरहमी से मार डाला. पिंकी की सांसें थमने के बाद बउआ और अनुज हमीरपुर स्थित यमुना पुल पहुंचे.

वहां बउआ ने अनुज की मदद से पिंकी की लाश उफनती यमुना में फेंक दी. फिर दोनों वापस घर लौट आए. बउआ ने पिंकी का मोबाइल तोड़ कर फेंक दिया था और दोनों ने अपने मोबाइल स्विच्ड औफ कर दिए थे.

इधर 27 सितंबर, 2016 की रात तक जब पिंकी वापस नहीं लौटी तो उस की मां मंजू को चिंता हुई. वह रात भर पिंकी के इंतजार में जागती रही. दूसरे दिन वह पिंकी की गुमशुदगी दर्ज कराने थाना बाबूपुरवा जा ही रही थी कि बउआ ठाकुर आ गया. उस ने मंजू से कहा कि उस का पिंकी से समझौता हो गया है.

समझौते के तौर पर 10 हजार रुपए ले कर वह वैष्णोदेवी के दर्शन करने गई है. हफ्ते भर में आ जाएगी. सबूत के तौर पर उस ने मंजू को शपथ पत्र तथा वीडियो दिखाया, जिस से मंजू को विश्वास हो गया.

पिंकी जब हफ्ते भर बाद भी वापस नहीं लौटी और उस से फोन पर भी संपर्क नहीं हुआ तो मंजू ने बउआ से मदद मांगी. तब बउआ ने हमदर्द बन कर मंजू की तरफ से 12 नवंबर, 2016 को चकेरी थाने में पिंकी की गुमशुदगी दर्ज करा दी. गुमशुदगी दर्ज होने के बाद दरोगा संजय यादव ने जांच की.

जांच के बाद उन्होंने गुमशुदगी को अपहरण में तरमीम कर दिया. बाद में एक के बाद एक कई अफसरों ने इस मामले की जांच की. लेकिन डेढ़ साल बाद भी पिंकी का कुछ पता नहीं चला. इस बीच बउआ ठाकुर मंजू का हमदर्द बन कर मंजू को पुलिस अधिकारियों की चौखट पर ले जाता रहा.

जिस से पुलिस को भी उस पर शक नहीं हुआ. मंजू की हमदर्दी का फायदा उठा कर बउआ ठाकुर ने समझौते का शपथ पत्र तथा पिंकी के अपहरण की रिपोर्ट कोर्ट में लगा कर अपने मारपीट, छेड़छाड़, धमकी व पोक्सो ऐक्ट के मामले को खत्म करा दिया.

बउआ ठाकुर व अनुज सिंह निश्चिंत थे कि वे पुलिस की पकड़ में नहीं आएंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन के पाप का घड़ा फूट ही गया और पिंकी की हत्या का राज खुल गया.

दरअसल, 21 जुलाई 2018 को मंजू गुप्ता समाधान दिवस पर अपनी फरियाद ले कर थाना चकेरी पहुंच गई और एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा के समक्ष पिंकी को बरामद करने की गुहार लगाई. एसएसपी के निर्देश और एसपी सुरेंद्र कुमार दास की मौनिटरिंग में जब दरोगा जगदीश सिंह ने जांच शुरू की तो एक महीने में ही पिंकी के अपहरण व हत्या का परदाफाश हो गया.

27 अगस्त, 2018 को थाना चकेरी पुलिस ने अभियुक्त रीतेंद्र सिंह उर्फ बउआ ठाकुर तथा अनुज सिंह को कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से दोनों को जिला कारागार भेज दिया गया.

-पुलिस सूत्रों पर आधारित

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