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मेहंदी बना व्यापार

आजकल बढ़ता मेहंदी का प्रचलन या यों भी कह सकते हैं कि मेहंदी बना व्यापार. हर त्योहार जैसे शादी, तीज, राखी, दीपावली, भैयादूज, करवाचौथ आदि पर महिलाएं मेहंदी को ऐसे लगाती हैं जैसे कि बिना मेहंदी के कोई शुभ कार्य होगा ही नहीं. और इस का फायदा उठाते हैं मेहंदी लगाने वाले. भारत में मेहंदी का उपयोग बहुत पुराने समय से होता रहा है.

कैसी कैसी मेहंदी

अरेबिक मेहंदी डिजाइन- अरेबिक मेहंदी में ज्यादातर सजावटी आउटलाइन का उपयोग किया जाता है, यह डिजाइन भारतीय शैली के भरे पैटर्न से कहीं ज्यादा सरल है जहां भारतीय मेहंदी में डिजाइन काफी नाजुक होता है, वहीं अरेबिक शैली में डिजाइन के आउटलाइन्स मोटे होते हैं.

पाकिस्तानी मेहंदी डिजाइन – इस शैली में भारतीय और अरेबिक शैली का सुंदर सा संगम दिखाई देता है. पाकिस्तानी मेहंदी में आउटलाइन करते समय ब्लेक मेहंदी का उपयोग किया जाता है और शेष डिजाइन हलके डिजाइन और पैटर्न भरा जाता है.

इंडो अरेबिक मेहंदी डिजाइन- पाकिस्तानी शैली की तरह इस में भी डिजाइन की आउटलाइन अरेबिक शैली की तरह मोटी बनती और भारतीय डिजाइन के पैटर्न और आधार भरे जाते हैं.

मोस्क्कन मेहंदी डिजाइन- मोरक्कन मेहंदी डिजाइन काफी ज्यामितीय होता है. आमतौर पर इस प्रकार के डिजाइन में आप त्रिकोण, चौकोर, गोलाकर इन का उपयोग ज्यादा देखोगे, दोनों हाथों में एक समान डिजाइन बनाना यह मोरक्कन मेहंदी डिजाइन की खासियत है.

मुघलाई मेहंदी डिजाइन- यह मेहंदी का सब से पुराना और पारंपरिक रूप है. इस प्रकार के डिजाइन में हथेली का एक छोटा सा भाग रिक्त रखा जाता है और बाकी हथेली पर काफी छोटा और नाजुक डिजाइन बनता. इस के अलावा आजकल मेहंदी के नवीनतम डिजाइन्स में ग्लिटर मेहंदी और मल्टी कलर मेहंदी जैसे विभिन्न प्रकार भी दिखाई देते हैं.

क्या करें, कैसे बचें ठगी से

ये लोग मेहंदी लगाने का मनमाना पैसा वसूलते हैं, जो कि आसमान छू रहे हैं. इन का रेट 5 सौ से प्रारंभ होता है और 21 हजार तक वसूले जाते हैं. इस तरह की ठगी से बचने के लिए अगर महिलाएं घर पर ही मेहंदी का कोन बना लें और आपस में एकदूसरे को मेहंदी लगाएं. इस के अलावा आजकल तो बाजार में लकड़ी के बनेबनाए ठप्पे मिलते हैं.

उस में हर तरह के डिजाइन के मेहंदी के ठप्पे ला कर रख लें और जब भी कोई उत्सव हो और आप मेहंदी लगाना चाहें तो खुद को ठप्पों के द्वारा मेहंदी लगा सकते हैं. ठप्पे से मेहंदी लगाने के लिए कटोरे में मेहंदी घोल ले व उस में लड़कड़ी के डिजाइन वाले ठप्पे डिप करें और हाथ में छाप लें. एकदूसरे को इस तरह के डिजाइन लगा सकते हैं.

इस के अलावा मेहंदी का कलर गाढ़ा करने के लिए उस में तरहतरह के कैमिकल मिलाए जाते हैं. जो कि त्वचा के लिए हानिकारक होता है, इसलिए अगर आज महिलाएं व लड़कियां इन मेहंदी वालों को सबक सिखाने के लिए इन से मेहंदी ना लगवा कर खुद ही लगा लें तो इन को सबक मिल जाएगा और नाजायज फायदा नहीं उठा पाएंगे.

मी टू से डरे पुरुष

बस में सफर के दौरान घटी एक घटना हमें इस बात का एहसास कराती है कि हर वह इनसान जिनका मी टू जैसी घटनाओं से कोई लेनादेना नहीं है वह भी कितना डरा हुआ है, हुआ ऐसा कि बस में सीट खराब होने की वजह से किसी बुजुर्ग व्यक्ति का पैर साथ बैठी युवती से बारबार टच हो जाता था, युवती हर थोड़ी देर बाद उन का पैर ठीक कर देती थी. 2-3 बार ऐसा होता रहा तो उस व्यक्ति को लगा कि युवती समझ रही है कि वह जानबूझ कर ये हरकत कर रहा है, जिस से कि युवती परेशान है परन्तु वह जानबूझ कर ऐसा कुछ नहीं कर रहे थे, और न ही उस युवती का ये मतलब था. वह उन का पैर बारबार ठीक कर तो रही थी, असल में जहां उस व्यक्ति का पैर खुलता था तो युवती को थोड़ा धक्का लगता और उस के पैर सीट से बाहर निकल जाते, जिस से होता ये था कि बस में आनेजाने वाले लोगों से युवती का पैर दब जाता था. इस पर उस व्यक्ति ने कहा मैडम मैं ऐसा कुछ नहीं कर रहा हूं. मैं तो मी टू से पहले ही डरा हुआ हूं.

आजकल बस, मेट्रो से ले कर ट्रेन व हवाई जहाज में भी महिला सहयात्री के साथ सीट शेयर करते समय पुरुष घबराते हैं. उन्हें लगता है कि कहीं गलती से हुआ अनचाहा स्पर्श उन्हें मुसीबत में न डाल दे. छेड़छाड़ व अनचाहे स्पर्श में महीन सा फर्क होता है. यह फर्क होता है इंटेशन यानी नीयत का. महिलाओं को किसी भी स्पर्श के पीछे छिपी मंशा का अंदाज आसानी से हो जाता है. इसलिए कई बार जब भीड़भाड़ में ऐसा होता है तो महिलाएं एडजस्ट कर लेती हैं.

सार्वजनिक वाहनों में सफर करना जितना कष्टदायक महिलाओं के लिए होता है, उतना ही पुरुषों के लिए भी. किसी तरह से अपने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए हल्काफुल्का कष्ट इग्नोर करें ताकि यात्रा में मीटू खेद बन कर ब्रेकर न लगाए.

हर इनसान ऐसा नहीं होता पर, बदनामी बड़ी जल्दी मिल जाती है. एक औरत यह गलत इलज़ाम लगाने से पहले यह नहीं समझती कि वह जिस पर यह इलजाम लगाया गया है उस पर क्या गुजरती होगी. इसलिए जिस के साथ गलत होता है वही आगे आए, हर वह औरत नहीं जिसने अपना काम निकालने के लिए उस समय तो कुछ नहीं कहा और सालों के बाद पब्लिसिटी के लिए आगे आ गई.

 

 

फेसबुक ने लौन्च किया ये नया फीचर

फेसबुक ने अपना एक नया फीचर लौन्च किया है. वैसे इस फीचर से फेसबुक स्टोरी पर शेयर किए जाने वाले फोटो और वीडियो में गाने जोड़ने का विकल्प शामिल होगा. यह म्युजिक फीचर फेसबुक यूजर्स के लिए ज्यादा इंट्रेस्टिंग साबित होगा.

रिपोर्टस के मुताबिक फेसबुक ने एक बयान में कहा कि इस फीचर को हम न्यूज फीड में भी लाने जा रहे हैं. जिससे जल्द ही यूजर्स अपने प्रोफाइल में भी गाने जोड़ पाएंगे. फेसबुक पर फोटो और वीडियो के साथ गाने जोड़ने का फीचर ठीक उसी तरह काम करेगा, जिस प्रकार से यह इंस्टाग्राम में करता है.

फेसबुक ने कहा है,  हम इस फीचर को ज्यादा से ज्यादा आर्टिस्ट और क्रिएटर्स तक विस्तार करेंगे और पेज में भी यह फीचर देंगे, ताकि वे अपने फैन्स के साथ और अधिक तरीकों से जुड़ सकें. इसके साथ ये भी कहा है कि इसके अलावा वह ‘लिप सिंक लाइव’ फीचर भी लौन्च करने जा रहा है, जिसका खुलासा उसने जून में किया था. इस फीचर में यूजर गानों के साथ लिप सिंक कर प्रोफाइल बना सकते हैं, जिसे दुनिया भर के यूजर्स के लिए जारी किया जाएगा.

आपके बता दें कि फेसबुक ने कहा है कि उसके आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस  और मशीन लर्निंग टेक्नोलौजी ने उसके प्लेटफार्म से पिछले तीन महीनों में बाल उत्पीड़न से जुड़ी 87 लाख तस्वीरों को हटाने में मदद की है. फेसबुक ने जानकारी दी कि इनमें से 99 फीसदी से ज्यादा तस्वीरों को यूजर्स द्वारा शिकायत करने से पहले ही हटा लिया गया है. फेसबुक के सुरक्षा के ग्लोबल हेड एंटीगोन डेविस ने एक बयान में कहा, ‘हम उन खातों को भी हटा देते हैं, जो इस तरह की सामग्रियों को बढ़ावा देते हैं.’ डेविस ने कहा कि फेसबुक के पास इसके अलावा विशेष प्रशिक्षित टीम भी है जो इस तरह के कंटेंट पर नजर रखती है.

फ्री वाई-फाई का पता लगाना है तो पढ़ें ये खबर

वैसे तो रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों पर फ्री वाई-फाई की सेवा मिल रही है, लेकिन कई बार हम ऐसी जगहों पर होते हैं जहां हमारा इंटरनेट काम नहीं करता और हमें वाई-फाई की बहुत जरूरत पड़ जाती है. ऐसे में हम आज आपको फ्री वाई-फाई का पता लगाने के 3 तरीके बताने जा रहे हैं.

वेफी (WeFi)

वेफी एक ऐप है जो आपको आपके आसपास मौजूद फ्री वाई-फाई का पता बताता है. इसकी सबसे खास बात यह है कि अगर यह ऐप आपके फोन में है तो आपका फोन खुद ही फ्री वाई-फाई से कनेक्ट हो जाएगा, इसके लिए आपको सर्च करने की जरूरत नहीं है. इसे आप प्ले-स्टोर से फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं.

फेसबुक (facebook)

आप अपने फेसबुक ऐप से भी फ्री वाई का पता लगा सकते हैं. इसके लिए फेसबुक ऐप के राइट साइड में दिख रहे तीन डॉट पर क्लिक करें. अब नीचे स्क्रॉल करने पर फाइंड Wi-Fi का ऑप्शन दिखेगा. उस पर क्लिक करने पर आपको फ्री वाई-फाई की पूरी लिस्ट दिख जाएगी.

इंस्टाब्रिज (Instabridge)

Instabridge (इंस्टाब्रिज) भी एक ऐप है जिसकी मदद से आप पब्लिक वाई-फाई से जुड़ सकते हैं. इस ऐप की खासियत है कि यह सबसे फास्ट नेटवर्क से कनेक्ट करता है. इसके अलावा अगर नेटवर्क नहीं मिलता है तो यह ऐप ऑटो मोबाइल नेटवर्क पर आ जाता है ताकि कनेक्टिविटी बनी रहे.

एसबीआई ने कम की कैश निकासी सीमा, जानिये इसके बारे में

एसबीआई ने खाता धारकों और एटीएम धारकों के लिए 31 अक्टूबर 2018 से एटीएम से कैश निकासी की नई सीमा लागू करने की घोषणा की है. अब एसबीआई का क्लासिक और मास्ट्रो डेबिट कार्ड धारक 31 अक्टूबर से सिर्फ 20 हजार रुपए प्रतिदिन निकाल सकेंगे फिलहाल कैश निकासी की यह सीमा 40 हजार रुपए प्रतिदिन है. वहीं एसबीआई के अलग-अलग एटीएम कार्ड की निकासी लिमिट भी अलग-अलग है. एसबीआई ग्लोबल इंटरनेशनल डेबिट कार्ड धारक 50,OOO रुपए प्रतिदन निकाल सकते हैं. वहीं एसबीआई प्लेटिनम कार्ड धारक प्रतिदिन 1 लाख रुपए निकाल सकते हैं.

आइए जानते हैं अन्य बैंकों की कैश निकासी सीमा

एचडीएफसी बैंक (HDFC BANK)

-प्लेटिनम चिप डेबिट कार्ड के जरिए आप 1 लाख रुपये रोजाना निकाल सकते हैं.

-टाइटेनियम रौयाल डेबिट कार्ड के जरिए 75 हजार रुपए प्रतिदिन निकाल सकते हैं.

– ईजी शौप डेबिट कार्ड से 25 हजार रुपए प्रतिदिन निकाल सकते हैं.

– ईजी शौप टाइटेनियम डेबिक कार्ड से 50 हजार रुपए प्रतिदिन निकाल सकते हैं.

एक्सिस बैंक (AXIS BANK)

Axis बैंक ने अपने ग्राहकों को रूपे प्लेटिनम कार्ड के जरिए एक दिन में 40,0000 रुपये तक निकालने देने की कैश लिमिट तय की है. एक्सिस बैंक की वेबसाइट के मुताबिक वीजा टाइटेनियम प्राइम प्लस और सिक्योर प्लस डेबिट कार्ड के जरिए एक दिन में 50 हजार रुपये निकाल सकते हैं.

बैंक औफ बड़ौदा (BANK OF BARODA)

बैंक औफ बड़ौदा के रूपे क्लासिक कार्ड से आप एक दिन में अधिकतम  25 हजार रुपए निकाल सकते हैं.

वहीं बड़ौदा के मास्टर प्लेटिनम कार्ड से आप अधिकतम 50 हजार रुपए प्रतिदिन निकाल सकते हैं.

बैंक औफ बड़ौदा के रूपे प्लेटिनम कार्ड से आप एक दिन में अधिकतम  50 हजार रुपए निकाल सकते हैं.

बैंक औफ बड़ौदा के वीजा इलेक्ट्रान कार्ड और मास्टर क्लासिक कार्ड से आप एक दिन में अधिकतम 25 हजार रुपए निकाल सकते हैं.

बैंक औफ बड़ौदा के वीजा प्लेटिनम चिप कार्ड से आप एक दिन में अधिकतम 1 लाख रुपए निकाल सकते हैं.

आईसीआईसीआई बैंक (ICICI BANK)

– इसके एटीएम से आप हर रोज अधिकतम 50 हजार रुपए निकाल सकते हैं.

– ICICI बैंक प्रिविलेज बैंकिंग टाइटेनियम डेबिट कार्ड से आप एक दिन में अधिकतम 1 लाख रुपए निकाल सकते हैं.

– ICICI बैंक स्मार्ट शॉपर गोल्ड डेबिट कार्ड के जरिए आप प्रतिदिन 75 हजार रुपए निकाल सकते हैं.

इसके अलावा बैंक की वेबसाइट के मुताबिक वीजा सिग्नेचर डेबिट कार्ड से आप एक दिन में 1.5 लाख रुपये तक निकाल सकते हैं.

पीएनबी (PNB BANK)

पंजाब नेशनल बैंक अपने ग्राहकों को इसके प्लेटिनम और रूप डेबिट कार्ड के जरिए एक दिन में अधिकतम 50 हजार रुपए निकालने की सुविधा देता है. बैंक की वेबसाइट के मुताबिक इसके क्लासिक रूपे कार्ड और मास्टर डेबिट कार्ड के जरिए ग्राहक एक दिन में ज्यादा से ज्यादा 25 हजार रुपये निकाल सकते हैं.

सानिया मिर्जा बनी मां, पति शोएब ने इस तरह जाहिर की खुशी

भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्जा और पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शोएब मलिक के घर नया मेहमान आ गया है. सानिया ने मंगलवार को एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया. पति शोएब ने ट्विटर पर यह खुशखबरी अपने फैंस के साथ शेयर की. शोएब मलिक ने ट्वीट किया, ‘बताते हुए बहुत उत्साहित हूं: लड़का हुआ है और मेरी गर्ल (सानिया) बिल्कुल ठीक हैं और हमेशा की तरह मजबूती से खड़ी हैं. आपकी दुआओं और शुभकामनाओं के लिए शुक्रिया. हम बहुत शुक्रगुजार हैं.’ शोएब मलिक ने ट्वीट के साथ हैशटैग #BabyMirzaMalik का भी प्रयोग किया है.

शोएब मलिक के इस शुभसंदेश के बाद से ही कपल को लगातार बधाई संदेश मिलने शुरू हो गए. शोएब मलिक ने फैंस का दुआओं के लिए शुक्रिया भी अदा किया.

बता दें कि अपनी प्रग्नेंसी के दौरान सानिया ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि उनके बच्चे के नाम के साथ मिर्जा और मलिक सरनेम जुड़ेगा. सानिया और शोएब ने 2010 में शादी की थी और यह उनका पहला बच्चा है. पाकिस्तानी क्रिकेटर से शादी करने के कारण सानिया को कई बार ट्रोलिंग का भी शिकार होना पड़ा, लेकिन वह हर परिस्थिति में पूरी मजबूती से डटी रहीं.

हिना खान ने साइन किये एकता कपूर के दो बड़े शो

हम सभी को पता है कि हिना खान अब एकता कपूर के शो ‘कसौटी जिंदगी की 2’ में कोमोलिका का किरदार निभाने जा रही हैं. वे ‘कसौटी जिंदगी की 2’ में नेगेटिव किरदार में दिखाई देने वाली कोमोलिका को नए अवतार के साथ पेश करती दिखेंगी. इसकी एक झलक हाल ही में तब दिखाई दी थी, जब एकता कपूर ने कोमोलिका का प्रोमो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया था. फैन्स को भी यह काफी पसंद आया था और उन्होंने हिना की जमकर तारीफ की थी.

 

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अब खबर आ रही है कि हिना ने एकता के साथ एक और शो साइन किया है जिसका नाम अभी तक फाइनल नहीं हुआ है. इस बारे में हाल में हिना ने बताया कि ‘बिग बौस के बाद मेरे पास पौजिटिव रोल्स की बाढ़ आ गई थी. लेकिन मैंने एक बड़े शो के लिए इन सब को इनकार कर दिया. जब मैं एकता से मिली तो उन्होंने मुझे 2 शो औफर किए. मैं उन्हें इसके लिए मना नहीं कर पायी. वैसे देखा जाए तो मेरे लिए यह फायदेमंद भी है कि दोनों शो एक ही प्रोडक्शन हाउस के हैं इसलिए मेरे फैन्स के लिए भी यह डबल धमाका होगा.’

 

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हिना ने बताया कि अभी उन्होंने ‘कसौटी जिंदगी की 2’ के लिए ही शूटिंग शुरू की है. अभी तक यह भी पता नहीं चला है कि दूसरे शो की शूटिंग कितने समय बाद शुरू होगी. दूसरे शो के बारे में हिना ने कहा कि इसके बारे में वह बहुत ज्यादा नहीं बता सकतीं लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि यह बहुत बड़ा शो होगा.

सैफ अली खान को किसका पर्याय नजर नहीं आ रहा

बौलीवुड में सैफ अली खान अपनी साफगोई के लिए जाने जाते हैं. वह अपने मन के विचारों को व्यक्त करते हुए हिचकते नहीं है. 2014 में जब केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी थी, तो सैफ अली खान ने हमसे एक्सक्लूसिव बात करते हुए इस सरकार से काफी उम्मीदें जतायी थी.

अब साढ़े चार वर्ष बाद जब हमने सैफ अली से एक्सक्लूसिव बात करते हुए उन्हे याद दिलाया कि साढ़े चार वर्ष पहले उन्होने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काफी तारीफें की थी. पर अब वह क्या सोचते हैं, तो सैफ अली खान ने बिना किसी लाग लपेट के कहा- ‘‘देखिए,अब मुझे इस बात का डर है कि बहुत ज्यादा हिंदुतत्व हो गया, लोग मैनौरिटी के खिलाफ खड़े हो जाएंगे. मुझे ही नहीं तमाम लोगों को मैनौरिटी के खिलाफ हिंदुओं के पोलोराइजेशन का डर सताने लगा है. तो भारत के संदर्भ में यह अच्छी बात नही होगी. भारत में हिंदू, मुस्लिम,  क्रिश्चियन, सिख सब को मिलकर रहना चाहिए. सरकार को चाहिए कि इन सभी को एक साथ लेकर चले.

मगर इस सरकार में कुछ अच्छे काम हो रहे हैं. मेरी नजर में जीएसटी एक अच्छा कदम उठाया गया है. यह सरकार रूपए और अर्थशास्त्र को लेकर अच्छे काम कर रही है. और जब देश में आर्थिक उन्नति होगी, तो भारत सुपर पावर बन सकता है. मैं यह भी समझता हूं कि भारत बहुत मुश्किल देश है. यहां सबको खुश रखना आसान नहीं है. इसीलिए हम सरकारों को अवसर देते रहते हैं. 2014 में जिस मैजोरिटी के साथ मोदी सरकार केंद्र में आयी, उससे हमें लगा कि कुछ चीजें आसान हो जाएंगी. देखिए, मैं राजनीति को लेकर बहुत ज्यादा कमेंट नहीं करता. पर हमारी सोच इतनी है कि देश का भला होना चाहिए.

हम चाहते हैं कि भारत विश्व में सुपर पावर बने. हम अपनी फिल्में भी इसी हिसाब से बना रहे हैं. हम सभी फिल्म निर्माण में पूरी लगन व जोर दे रहे हैं. तो हम उम्मीद करते हैं कि भारत सुपर पावर बने, फिर चाहे वह मोदी सरकार में हो या किसी अन्य की सरकार में हो या मिश्रित सरकार में हो. पर फिलहाल मुझे इस सरकार का कोई पर्याय नजर नहीं आ रहा.

अयोध्या के मैदान पर होगा सत्ता का सेमीफाइनल

अयोध्या भले ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना में स्थित न हो पर ‘अयोध्या का राम मंदिर’ इन चुनावों में बड़ा मुद्दा बनेगा. इन चुनावों की सफलता से राजनीतिक दलों को अंदाजा लगेगा कि ‘राम मंदिर’ के नाम पर राजनीति कितनी सफल होगी.

2019 के लोकसभा चुनावों के पहले 5 राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मिजोरम और तेलंगाना के चुनाव को सत्ता का सेमीफाइनल कहा जा रहा है. इन राज्यों में मिली जीत और हार से यूपीए और एनडीए का मनोबल बढ़ेगा और घटेगा. सहयोगी दलों की संख्या और गठबंधनों के सूत्र इन परिणामों से जुड़ेंगे और खुलेंगे.

धर्म के नाम पर राजनीति अब दोनों ही पक्ष कर रहे हैं. अंतर केवल इतना है कि भाजपा पर धर्म का कट्टरवाद हावी है तो कांग्रेस और सहयोगी दलों पर ‘नर्म हिन्दुत्व’ छाया हुआ है. देश में वैचारिक रूप से धर्म का विरोध करने वाले नेताओं और उनके दलो की संख्या शून्य के बराबर हो गई है. कांग्रेस तो  हमेशा से की मध्यम मार्गी पार्टी थी अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मानसरोवर जैसे तमाम मंदिर का भ्रमण दर्शन कर जता दिया कि वह ‘नर्म हिन्दुत्व’ की छाया में आगे चलेंगे.

समाजवादी और अंबेडकरवादी विचारधरा के लोग भी लंबा तिलक लगा कर धर्म का चोला पहन चुके हैं. वामपंथी नेता तक लुके छिपे तौर पर पूजापाठ में यकीन करने लगे हैं खुल कर वह अब मंदिर का विरोध नहीं करते हैं. ऐसे में चुनाव की नजर से राममंदिर महत्वपूर्ण हो जाता है.

राममंदिर-बाबरी मस्जिद जमीनी विवाद विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जनवरी 2019 तक के लिये टाल दी है. इससे यह साफ हो गया है कि अब इस विवाद में 2019 के लोकसभा चुनावों के पहले फैसला आना मुश्किल है. ऐसे में राम मंदिर मुद्दे को लोक सभा चुनाव में मुद्दा तभी बनाया जायेगा जब 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे का कोई लाभ मिलेगा.

भाजपा से जुड़े उसके परिवार के संगठन सरकार पर राम मंदिर के लिये कानून बनाने का दबाव बनायेंगे. अगर 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सबक मिलेगा तो वह लोकसभा चुनाव के पहले राम मंदिर पर कोई ठोस कदम उठाकर चुनाव मैदान में जाने का काम करेगी. यह सच है कि राम मंदिर के लिये अध्यादेश लाना सरल नहीं है. पर भाजपा दूसरे दलों की पोल खोलने के लिये ऐसा प्रयास कर सकती है या ससंद में विशेष सत्रा बुलाकर चर्चा करा सकती है.

कट्टर हिदुत्व बनाम नर्म हिन्दुत्व के टकराव में राम मंदिर के खिलाफ कोई दल नहीं खड़ा होगा. राम मंदिर का जो विरोध 1992 में समाजवादी पार्टी ने किया था अब वह पहले जैसी हालत में नहीं है. इससे भाजपा को लाभ भी हो सकता है और नुकसान भी. राजनीति की प्रयोगशाला में राम मंदिर की हांडी एक बार फिर चढ़ेगी. इस हांडी में कितने चावल पके हैं यह 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में दिखेगा. उसके आधर पर ही लोकसभा चुनाव में राम मंदिर के मुद्दे को ले जाया जायेगा.

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