देश में अब सांप्रदायिक हिंसा, अपराध और गैरबराबरी का माहौल बन गया है. दलितों और अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. धर्म और जाति को मुद्दा बना कर सत्ताधारी दल राजनीति कर रहे हैं. विकास और जनहित की बातें गायब हैं.  जब देश का पूरा समय और ताकत गरीबी, भुखमरी, बीमारी, पढ़ाईलिखाई पर लगनी चाहिए, वहां गौरक्षा, हिंदुत्व के नाम पर लोगों को सरेआम मौत के घाट उतारा जा रहा है.  चूंकि लोकसभा चुनाव 2019 में अब कुछ ही महीने बचे हैं, लिहाजा चुनावी तैयारियों को ले कर सभी राजनीतिक दल जोरशोर से नई रणनीति बनाने और अपना प्रचारतंत्र मजबूत करने में लगे हैं. लेकिन जनता को एक कड़ी में जोड़ कर एकता, अखंडता और विकास का एजेंडा ले कर चलने की सोच रखने वाले सियासी दलों का देश में अकाल सा दिखता है.

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