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बेमतलब का है नोटा, इस बार कम दबेगा

ईवीएम मशीन में नोटा यानि इनमें से कोई नहीं वाला बटन एक बेमतलब की चीज है. मतदान प्रतिशत बढ़ाने इसका प्रावधान साल 2013 के चुनाव से चुनाव आयोग ने उन मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने किया था जो किसी को वोट नहीं देना चाहते. तब लोगों ने उत्साहपूर्वक इस का उपयोग किया भी था. लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि इससे हासिल क्या हुआ उउन्होंने रामलाल और श्यामलाल दोनों उमीदवारों को वोट नहीं दिया फिर भी इनमे से कोई एक चुन लिया गया तो तटस्थता या विरोध के माने क्या रह गए जबकि कई सीटें ऐसी भी थीं जिन पर नोटा का प्रतिशत हार जीत के अंतर से ज्यादा था.

मिसाल मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की लें तो साल 2013 में 230 में से 54 सीटें ऐसी थीं जिन पर नोटा को मिले वोट हार जीत के अंतर से ज्यादा थे और कई सीटों पर नोटा तीसरे नंबर पर था जिसका कोई घोषित प्रत्याशी नहीं था. फिर इन वोटों का औचित्य क्या रह गया यह बात समझ से परे है जिनकी गिनती न हार में होती न जीत में.

राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों की पसंद न पसंद के हिसाब से बात ठीक वैसी ही है जैसे किसी नास्तिक को यह कहते बहला फुसलाकर मंदिर तक ले जाया जाये कि कोई बात नहीं जो भगवान को नहीं मानते लेकिन मंदिर जाने में क्या हर्ज है. जबकि हर्ज यह है कि जब पूजा पाठ होते ही रहना है तो भीड़ बढ़ाने का मतलब क्या जाहिर है सिर्फ यह दिखाना कि बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. जबकि होना यह चाहिए कि किसी विधान सभा क्षेत्र में अगर मतदान 50 फीसदी से कम है तो यह मान लेना चाहिए कि बचे 50 फीसदी वोट नोटा को गए हैं यानि वहां के लोग किसी को नहीं चाहते लेकिन इसके लिए मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने की वाध्यता क्यों क्या मूर्ति पूजा का विरोध करने मंदिर जाना जरूरी है.

नोटा की औचित्यता के सिलसिले में विचार इस बात पर भी होना चाहिए कि कुल मतदान अगर 70 फीसदी हुआ है और उसमें से भी जीतने वाले को 40 फीसदी वोट मिले हैं तो सीधी सी बात है कि 60 फीसदी लोग उसे नहीं चाहते इसके बाद भी वह 100 फीसदी जनता का प्रतिनिधित्व करता है. मतदान प्रणाली में हालांकि इसका कोई विकल्प नहीं है लेकिन नोटा के जरिये जो लोग विरोध दर्ज करा रहे हैं उनकी भावनाओं का सम्मान कहाँ है. चूंकि वे प्रतिशत में कम हैं इसलिए उनका वोट बेकार जाता है.

इस हकीकत को लोगों ने समझा है इसलिए इस बार नोटा का इस्तेमाल कम होने की संभावना है दूसरे तीन राज्यों में इस बार पार्टियों की भरमार है. अकेले मध्यप्रदेश में कोई 75 राजनैतिक दल ताल ठोक रहे हैं इनमें से भी दिलचस्प बात यह है कि धर्म संप्रदाय और जाति की बिना पर आधा दर्जन पार्टियां बन चुकी हैं. इनमें आदिवासियों की जयस सहित कंप्यूटर बाबा और एक दूसरे ब्रांडेड धर्म गुरु देवकीनंदन ठाकुर की नवगठित पार्टियों के अलावा सपाक्स प्रमुख हैं जो सवर्णों की है.

यानि मतदाता के पास 2013 के मुक़ाबले विकल्प ज्यादा हैं जो जानबूझ कर ठीक चुनाव के पहले पैदा किए गए हैं. इसके अपने अलग फायदे नुकसान हैं जिनका हिसाब किताब पार्टियों के मुनीम लगा रहे हैं लेकिन बात जहां तक नोटा की है तो वोट डालने पर भी वोट न डालने बालों की स्थिति वाकई नास्तिकों सरीखी है.

सत्ता विरोधी ज्यादा है नोटा – अपने पक्ष में वोट डलवाने राजनैतिक पार्टियां क्या कुछ नहीं कर रहीं यह किसी से छुपा नहीं है लेकिन नोटा वोटर की मानसिकता को टटोलें तो वह सत्तारूढ़ दल के खिलाफ ज्यादा लगती है. मध्यप्रदेश में जो लोग भाजपा सरकार को असफल मानेगे वे जाहिर है कांग्रेस या किसी दूसरी पार्टी को वोट देंगे लेकिन जो लोग भाजपा उम्मीदवार से खुश हैं वे मुमकिन है नोटा का बटन दबाकर किसी दूसरी पार्टी को वोट देने से खुद को बचा लेंगे इससे उनका सरकार के प्रति विरोध दर्ज होने से रह जाएगा.

दो टूक कहा जाए तो नोटा में डाले गए वोट सरकार के निकम्मेपन के प्रति भड़ास ज्यादा होते हैं लेकिन व्यक्तिगत आस्था वगैरह के चलते ये दूसरी किसी पार्टी को नहीं जा पाते तो लोकतन्त्र के माने क्या रह गए इस बारे में चुनाव आयोग को गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए जो अतिरेक उत्साह में सिर्फ ज्यादा वोटिंग पर तुला हुआ है.

अब कई वजहों के चलते तीन राज्यों खासतौर से मध्यप्रदेश में नोटा का बटन कम दबेगा लेकिन इसके बाद भी जो लोग नोटा को वोट देंगे उनकी भावनाओं को समझा जाना चाहिए कि वे आखिर क्या चाहते हैं इनकी तादाद चूंकि काफी कम होती है इसलिए इन पर कोई ध्यान नहीं देता जबकि सबसे ज्यादा ध्यान इसी वर्ग पर दिया जाना चाहिए. और अगर नहीं दिया जा सकता तो नोटा का बटन बंद कर देना चाहिए जिसके तकनीकी तौर पर कोई माने नहीं क्योकि नोटा कोई पार्टी या प्रत्याशी नहीं है इसलिए लोग वोट की गोली आसमान में दाग कर उसे जया ही करते हैं.

जल्द ही आप व्हाट्सऐप से फेसबुक और इंस्टाग्राम को कर पाएंगे लिंक

व्हाट्सऐप अपने यूजर्स की सुविधा के लिए एंड्राइड और iOS प्लेटफौर्म पर लगातार नए फीचर्स जोड़ रहा है. कंपनी जल्द ही स्टीकर्स, PiP मोड के अलावा तीन नए फीचर्स लाने की तैयारी में है. पहला फीचर लिंक्ड अकाउंट्स हैं जिसके तहत यूजर्स अपने व्हाट्सऐप को इंस्टाग्राम और फेसबुक से लिंक कर पाएंगे. इसका कारण क्या है इस बारे में फिलहाल कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है. दूसरा फीचर साइलेंट मोड है. इसके तहत म्यूट की गई चैट्स में कोई भी ऐप बैज नहीं दिखाई देगा. वहीं, तीसरा फीचर वैकेशन मोड है जिसके तहत आर्काइव चैट्स में आने वाली परेशानी को रीमूव किया जाएगा.

व्हाट्सऐप लिंक्ड अकाउंट फीचर

व्हाट्सऐप ने लिंक्ड अकाउंट्स फीचर पर काम करना शुरू कर दिया है. व्हाट्सऐप को फेसबुक और इंस्टाग्राम से लिंक किया जा सकेगा. कुछ समय पहले ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि यूजर्स अपने व्हाट्सऐप अकाउंट का इस्तेमाल कर फेसबुक अकाउंट को रिकवर कर पाएंगे. इस नए फीचर के आने से यह सही साबित हो जाएगा.

व्हाट्सऐप साइलेंट मोड फीचर

इस फीचर को हाल ही में एंड्राइड 8.0 ऑरियो या उससे ऊपर के वर्जन के यूजर्स के लिए पेश किया गया है. आपको बता दें कि पहले म्यूट की गई चैट्स पर भी व्हाट्सऐप ऐप बैज दिखाता था. लेकिन इस फीचर के आने के बाद यह समस्या भी खत्म हो जाएगी. साइलेंट मोड में म्यूट की गई चैट्स पर ऐप बैज नहीं दिखाया जाएगा.

व्हाट्सऐप वैकेशन मोड फीचर

सभी जानते हैं कि व्हाट्सऐप यूजर्स को चैट को आर्काइव करने का विकल्प देता है. लेकिन अभी ऐसा होता है कि अगर आर्काइव चैट में कोई नया मैसेज आता है तो वो चैट ऑटोमैटिकली ही अनआर्काइव हो जाती है. इस नए फीचर के आने से इसमें काफी बदलाव देखने को मिलेगा. यह फीचर यूजर्स द्वारा काफी डिमांड में है. वैकेशन मोड में अगर यूजर किसी चैट को अपने होम स्क्रीन या रीसेंट चैट लिस्ट में नहीं देखना चाहते हैं तो वो उसे बिना डिलीट किए आर्काइव कर सकते हैं. इस मोड के तहत चैट तब तक अनआर्काइव नहीं होगी जब तक यूजर खुद उसे मैनुअली चेक न करे. इस फीचर पर फिलहाल काम किया जा रहा है. खबरों के मुताबिक इस फीचर को सबसे पहले iOS यूजर्स को दिया जाएगा.

व्हाट्सएप्प स्टेटस पर जल्द दिखाई देंगे विज्ञापन

मैसेजिंग एप व्हाट्सएप्प पर जल्द ही यूजर्स  विज्ञापन देखने को मिल सकते है. इस बात की जानकारी व्हाट्सएप्प मैसेजिंग सर्विस के उपाध्यक्ष क्रिस डैनियल ने दी है. उन्होंने कहा, कंपनी स्टेटस सेक्शन में विज्ञापन डालने जा रही है, इससे कंपनी की कमाई होगी. यह कमाई का प्राथमिक जरिया होगा.

यही नहीं, इससे व्यवसायों के लिए लोगों तक पहुंचा भी जा सकेगा. हालांकि, डैनियल ने फिलहाल यह नहीं बताया है कि कंपनी इसे कब तक अपडेट करेगी.

यूजर्स की रुचि के मुताबिक मिलेंगे ऐड

रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाट्सएप्प यूजर्स को स्टेटस सेक्शन में विज्ञापन दिखाए जाएंगे. माना जा रहा है कि जिस तरह से फेसबूक पर यूजर्स की रुचि के मुताबिक उन्हें विज्ञापन दिखाए जाते हैं ठीक वैसे ही व्हाट्सएप में भी दिखाए जाएंगे. स्टेटस सेक्शन में यूजर्स टेकस्ट, फोटो और वीडियो को शेयर करते हैं जो 24 घंटे बाद डिलीट हो जाती हैं. इसका मतलब जब भी यूजर्स व्हाटसएप में किसी का स्टेटस देखेंगे तो उन्हें विज्ञापन भी दिखाई देंगे.

त्यौहारों में ये 5 गलतियां खाली कर देंगी बैंक अकाउंट, SBI की चेतावनी!

आजकल पैसों की लेन-देन को लेकर काफी फ्रौड हो रहे हैं. ये फ्रौड सिर्फ औनलाइन ही नहीं, बल्क‍ि एटीएम सेंटर से भी होते हैं. जिसे देखते हुए देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक यानी भारतीय स्‍टेट बैंक (SBI) ने अपने ग्राहकों के अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए 5 ऐसी बातें सुझाई हैं, जिन्हें त्यौहारों के दौरान आपको भूलकर भी नहीं करना है. ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आप ऐसा करते हैं तो आपके बैंक खाते में सेंध लगने का खतरा रहता है. लिहाजा आपको इस फेस्टिव सीजन में इन गलतियों को करने से बचना है. आइए जानें इसके बारे में…

बैंक कभी नहीं मांगता ये 6 जानकारी

एसबीआई ने अपने ट्विटर अकाउंट पर बयान जारी कर कहा है, ‘प्रिय ग्राहक, कृपया ध्यान दें कि एसबीआई कभी भी आपके द्वारा यूजर आईडी, पिन, पासवर्ड, सीवीवी, ओटीपी, वीपीए (यूपीआई) जैसी संवेदनशील जानकारी नहीं लेगा. अगर आप जब भी पैसों का लेन-देन करते हैं तो हमेशा कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए. बैंक ने इस पर एक वीडियो भी जारी किया है. ग्राहक को क्या करना है और क्या नहीं करना!

सार्वजनिक स्थान पर औनलाइन अकाउंट का प्रयोग न करें

बैंक की ओर से जारी वीडियो में बताया गया है कि पब्लिक इंटरनेट यानी रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या फिर किसी भी अन्य जगह जहां पर ओपन वाई-फाई के जरिए इंटरनेट सर्विस मिलती है. वहां पर डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसे में आपकी बैंकिंग इन्फौर्मेशन लीक होने का खतरा बढ़ जाता है.

OTP, PINs, CVV, UPI पिन शेयर न करें

बैंक का कहना है कि कभी भी आपको अपने अपना OTP (वन टाइम पासवर्ड), पिन नंबर, एटीएम कार्ड के पीछे लिखा सीवीवी नंबर किसी के साथ भी शेयर नहीं करना चाहिए. आजकल इस तरह के फोन आते हैं कि हम बैंक से बोल रहे हैं और आप हमे अपने कार्ड पर लिखा नंबर बता दीजिए. आपके फोन पर आया ओटीपी बता दीजिए. ये लोग जालसाज होते हैं.

अपना ATM कार्ड किसी के साथ शेयर न करें

अपना एटीएम, क्रेडिट कार्ड कभी भी किसी को नहीं देना चाहिए. साथ ही, आपको इससे जुड़ी डिटेल भी किसी के साथ शेयर नहीं करनी चाहिए. ऐसे में अकाउंट से आपकी जानकारी के बिना ट्रांजेक्शन (लेन-देन) हो सकता हैं.

अकाउंट डिटेल फोन में सेव न करें

आपको अपने फोन में कभी भी अपना बैंक अकाउंट नंबर, पासवर्ड, एटीएम कार्ड का नंबर या फिर इसकी फोटो खींचकर नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि ये सभी डिटेल आपके फोन से लीक हो सकती हैं.

पहलवानों के फिरेंगे दिन

अखाड़े से मैट तक पहुंची कुश्ती के अब दिन फिरने वाले हैं. लंगोटधारी पहलवान जगत के खुश होने का मौका जल्दी ही आने वाला है.  दरअसल, कुश्ती को अब क्रिकेट की तरह बड़ी पहचान देने की तैयारी की जा रही है. भारत में कुश्ती के लिए अब क्रिकेट की तरह केंद्रीय अनुबंध प्रणाली को शामिल करने की सोच पर काम चल रहा है. इस के बाद पहलवानों को ग्रेड के आधार पर केंद्रीय अनुबंध का हिस्सा बनाया जाएगा.

इस के अलावा कुश्ती के प्रसारण के लिए पहली बार एक बड़े स्पोर्ट्स चैनल से बातचीत की जा रही है. सबकुछ सही रहा तो साल 2019 से शुरू होने वाली इस डील से भारत में होने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कुश्ती मैचों के 100 दिन के लाइव प्रसारण की गारंटी हो जाएगी.

एक जानकारी के मुताबिक, खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट 15 नवंबर 2018 से शुरू होंगे. इस से एलीट के अलावा जूनियर, सबजूनियर, अंडर-23 वर्ग के तकरीबन 150 पहलवानों को भी फायदा होगा. इतना ही नहीं, अंडर-15 वर्ग के पहलवान भी इस में शामिल होंगे, जबकि इस कॉन्ट्रैक्ट की हर साल समीक्षा की जाएगी.

पहलवानों को ग्रेड 5 ग्रुप में मिलेगा जिस में एक सीनियर और बाकी जूनियर पहलवानों के लिए होगा. इस का आधार ओलिंपिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप, एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स, यूथ ओलिंपिक और दूसरे बड़े इवेंट में मिले मेडल को रखे जाने की उम्मीद है.

30 अक्टूबर 2018 को राजधानी दिल्ली में रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के हेडक्वॉर्टर में इसे ले कर एक बैठक आयोजित की गई जिस में  सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और दिव्या काकरान समेत तकरीबन 15 पहलवान, फेडरेशन के अधिकारी और स्पोर्टी सॉल्यूशंस के अधिकारी भी शामिल हुए थे.

इस बैठक में पहलवानों के भविष्य को सुरक्षित करने के दूसरे तमाम तरीकों पर भी विचार किया गया.

जब से क्रिकेट ने अपने खिलाड़ियों को मालामाल किया है तब से दूसरे खेलों के खिलाड़ी भी अच्छा प्रदर्शन करने के एवज में अपने लिए पैसे की मांग करते रहे हैं. अब भारतीय पहलवान इंटरनेशनल लेवल पर गोल्ड मैडल तक लाने लगे हैं जिस से कुश्ती को नई पहचान मिली है.

जो काम सचिन तेंदुलकर ने बीसीसीआई के लिए किया था मतलब अपने उम्दा खेल से भारत क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था वही काम कुश्ती में सुशील कुमार ने किया है. वे एक बार वर्ल्ड चैंपियन रह चुके हैं तो 2 बार ओलिंपिक खेलों में मेडल ला चुके हैं. उस के बाद योगेश्वर दत्त, गीता फोगाट, विनेश, बजरंग पूनिया जैसे पहलवानों ने कुश्ती को और आगे बढ़ाया. इस हिसाब से अब कुश्ती के लिए इस तरह की योजना कारगर साबित होगी.

सब से ज्यादा फायदा पहलवानों की नई पौध को होगा जो इंटरनेशनल लेवल पर अपना नाम दर्ज कराने के सपने देख रही है.

सपना चौधरी से क्यों डरी भाजपा

लखनऊ में सपना चौधरी के डांस का कार्यक्रम भले ही आयोजकों की गलती से न हो पाया हो पर प्रशासन ने सपना चौधरी के खिलाफ भी मुकदमा कायम कर दिया. पुलिस ने धोखाधड़ी का यह मुकदमा कायम करने से पहले यह भी पता करने की कोशिश नहीं की थी कि सपना चौधरी ने क्या धोखा किया.

लखनऊ के बाद इलाहाबाद में सपना चौधरी का कार्यक्रम था तो वहां भी जिला प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी. इसी तरह से आगरा में भी सपना चौधरी के कार्यक्रम को प्रशासन अनुमति नहीं दी.उत्तर प्रदेश में सपना चौधरी के कार्यक्रम की अनुमति न देने के पीछे प्रशासनिक वजहों के साथ राजनीतिक वजहें भी हैं.

अपने कार्यक्रमों के जरिये भीड़ को एकत्र करने में सपना चौधरी हिंदी क्षेत्र की सबसे बड़ी कलाकार हैं. वह एक शो का 8 से 10 लाख रूपया लेती हैं. उनको सुनने और देखने हजारों लाखों की संख्या में लोग आते हैं. सपना चौधरी कांग्रेस पार्टी के साथ हैं. उनकी कांग्रेस के बड़े नेताओं से मुलाकात भी हो चुकी है. यह बात भी सामने आई कि सपना चौधरी कांग्रेस ज्वाइन करके लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रचार भी कर सकती हैं.

सपना चौधरी को लेकर कई शो आयोजित करने वाले लोग मानते हैं कि सपना चौधरी के राजनीतिक कदम उठाने के बाद से उनके कार्यक्रमों पर रोक का सिलसिला बढ़ गया है. इस वजह से लगता है कि भाजपा की उत्तर प्रदेश सरकार सपना की लोकप्रियता से कांग्रेस को लाभ न मिले इस लिये उसके शो का आयोजन नहीं होने दे रही है. वही प्रशासन का तर्क है कि सपना चौधरी के कार्यक्रम में आई भीड़ से तोड़फोड़ की आशंका से अनुमति न देने के कदम उठाने पड़ते हैं.

सपना चौधरी हरियाण की रहने वाली गायिका, डांसर और अभिनेत्री हैं. सपना चौधरी टीवी रियलिटी शो बिग बौस की प्रतिभागी रही हैं. सपना ने नानू की जानू, भांगओवर, और वीरे की वेडिंग जैसी फिल्मों में आइटम सांग भी किया है. सपना चौधरी का जन्म 1990 में हरियाणा के रोहतक में एक मध्यम वर्ग के परिवार में हुआ था. उनके पिता एक निजी कंपनी कर्मचारी थे. साल 2008 में ही सपना के पिता का देहांत हो गया था. तब वह महज 18 साल की थी.

सपना ने अपने करियर की शुरुआत हरियाणा के एक आर्केस्ट्रा टीम के साथ की थी. सपना चौधरी उस समय मंडली में रागनी कलाकारो के साथ टीम का हिस्सा बनकर काम करती थी. सपना करियर की शुरुआत में हरियाणा और आस पास के राज्यों में रागनी प्रोग्रामो में रागनी पार्टियों के साथ हिस्सा लेती थी. उसके बाद सपना ने स्टेज डांस करना शुरू किया. सपना के एक हरियाणवी गाने पर मोर म्यूजिक कम्पनी ने डांस वीडियो बनाया जो हिट रहा. इसके बाद सपना को हरियाणा के साथ अन्य प्रदेशो में भी पहचान मिली.

सपना ने 30 से अधिक गानों में अपनी आवाज दी है. सपना ने फिल्मों में अपनी शुरूआत फिल्म ‘भांग ओवर’ में आइटम नंबर से किया. इसके बाद सपना ‘वीरे की वेडिंग’ फिल्म के ‘हट जा ताऊ’ में नजर आई थीं. अभय देयोल स्टार फिल्म ‘नानू की जानू’ में सपना ने अहम किरदार निभाया और ‘तेरे ठुमके सपना चौधरी’ नामक एक आइटम नंबर भी किया है.

विवादों से सपना चौधरी का पाला पड़ता रहा है. गुड़गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में चौधरी ने एक रागनी गाई थी. जिसमें आरोप के मुताबित दलितों के लिए जातिसूचक शब्द बोले गए थे. रागनी के गीत पर आपत्ति दर्ज कराते हुए दलित संगठन बहुजन आजाद मोर्चा के अध्यक्ष सतपाल तंवर ने सपना के खिलाफ हिसार में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. मामले में सपना ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी. विवादों ने सपना चौधरी को और भी अधिक लोकप्रिय कर दिया.

पहलाज निहलानी भी अब लगा रहे हैं आरोप

वक्त वक्त की बात है. लगभग डेढ़ वर्ष पहले तक पहलाज निहलानी ‘‘केद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ के चेयरमैन पद पर आसीन थे. उस वक्त वह अपनी इस संस्था व खुद को पाक साफ बता रहे थे, जबकि उनके कार्यकाल में भी ‘‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ पर कई फिल्मकारों ने आरोप लगाए थे. उनके कार्यकाल में इतना हंगामा हुआ था कि पहलाज निहलानी को अपने कार्यकाल के समाप्त होने से साढ़े पांच माह पहले ही अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा था.

अब जब पहलाज निहलानी ने बतौर फिल्म निर्माता गोविंदा की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘‘रंगीला राजा’’ बनायी हैं, तो वह भी घड़ियाली आंसू बहाते हुए ‘‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ पर आरोप लगाने लगे हैं. उनका आरोप है कि ‘‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ व उसके चेयरमैन प्रसून जोषी के चलते उनकी फिल्म ‘‘रंगीला राजा’’ के 16 नवंबर को प्रदर्षित होने की संभावनाएं नजर नही आ रही हैं.

पहलाज निहलानी ने ‘‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ और इसके चेयरमैन प्रसून जोषी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है-‘‘मैंने डेढ़ माह पहले अपनी फिल्म को सेंसर प्रमाणपत्र के लिए भेजा था. लेकिन मेरी समझ में नही आ रहा है कि ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’ ने अब तक मेरी फिल्म को सेंसर करके प्रमाणपत्र  क्यों नहीं दिया है.

नियमों  के तहत 21 दिन के अंदर चेयरमैन को चाहिए कि वह फिल्म सेंसर करने वाली कमेटी को फिल्म दिखाए और कमेटी को तय करने दें कि वह फिल्म को लेकर किस तरह का प्रमाणपत्र देना चाहती है. मगर समस्या यह है कि प्रसून जोषी बामुश्किल आफिस में मौजूद रहते हैं. जबकि जब मैं चेयरमैन था, तब मैं हर दिन आफिस में रहता था और छुट्टी के दिन भी काम करता था.’’

वह आगे कहते हैं- ‘‘वास्तव मे अब ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’ बड़े बजट की फिल्में व बड़े स्टूडियो द्वारा बनाई जा रही फिल्मों को प्राथमिकता दे रहा है. हमसे वे कह रहे हैं कि फिल्म को प्रमाणपत्र मिलने में 68 दिन लगते हैं, लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार फिल्म ‘ठग्स आफ हिंदुस्तान’ को मेरी फिल्म के कई दिनों बाद ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’ में जमा किया गया था, पर इस फिल्म को प्रमाणपत्र दिया जा चुका है. मैं जानता हूं कि प्रसून जोषी और फिल्म ‘ठग्स आफ हिंदस्तान’के हीरो आमीर खान जिगरी दोस्त हैं, इसलिए ऐसा हुआ. अब वह बड़े स्टूडियो को प्राथमिकता दे रहे हैं.’’

आज से बदलेंगी ये चीजें, आम लोगों पर पड़ेगा सीधा असर

1 नवंबर से देश भर में कई ऐसे बड़े बदलाव हो रहे हैं जो आम लोगों को सीधे तौर पर असर करेंगे. इसमें बैंक से जुड़े बदलाव हैं, इसके अलावा भारतीय रेल में भी आम लोगों के लिए बेहद ही जरूरी सुविधा मिलने वाली है. राजनीतिक चंदे के मामले में भी कुछ बदलाव किए गए हैं. तो पढ़ें इन बदलावों के बारे में पूरी खबर.

  • पीएनबी लोन हुआ महंगा

 changes from first november

आपको बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने मार्जिनल कौस्ट लेंडिंग रेट (MCLR) में 0.05 फीसदी का इजाफा किया है. बैंक ने अधिकारिक तौर पर ग्राहकों को इस बात की जानकारी दिया. इसका असर सीधे तौर पर ग्राहकों पर पड़ने वाला है. इससे ग्राहकों के लिए होम लोन महंगा हो जाएगा. आपको बता दें कि इससे ब्याज की दरों में भी बदलाव होंगे. नई दरों के मुताबिक, एक सालों के लिए ब्याज दर 8.5% हो गई है. तीन सालों के लिए ये दर 8.7% है. वहीं 6 महीनों के लिए ये दर 8.45 की होगी. एक महीने या ओवरनाइट लोन के लिए ग्राहकों को 8.15% की ब्याज दर चुकाना होगा.

  • औनलाइन बुक करें जनरल टिकट

 changes from first november

ट्रेन यात्रियों के लिए काफी जरूरी सुविधा मिलने वाली है. यात्रियों को अब टिकट के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं है. रिजर्वेशन की तरह अब जनरल टिकट भी औनलाइन उपलब्ध है. भारतीय रेलवे का UTS Mobile App एक नवंबर से अनरिजर्व्ड टिकट बुक करने के लिए उपलब्ध होगा. इससे आप एक बार में 4 टिकट खरीद सकेंगे.

  • 1 से 10 तक होगी चुनावी बौंड की बिक्री

 changes from first november

राजनीतिक दलों को चंदा देने में इस्तेमाल होने वाले चुनावी बौन्ड की छठी किस्त की बिक्री 1 से 10 नवंबर के बीच होगी. सरकार ने इलेक्शन बौंड की व्यवस्था राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले चंदे में पादर्शिता लाने के लिए शुरू की है. इसे नगद चंदा देने के एक विकल्प के रूप में पेश किया गया है.

धोनी को टी20 से बाहर करने का फैसला बिल्कुल सही : अजीत अगरकर

गौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को वेस्टइंडीज और औस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले टी 20 सीरीज में जगह नहीं मिली है. इस फैसले के बाद टीम के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद की काफी आलोचना हुई. जिसके बाद एमएसके प्रसाद को इस बारे में सफाई भी देनी पड़ी, लेकिन अब भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज अजीत अगरकर ने चयनकर्ताओं के समर्थन में आते हुए उनके इस फैसले को सही बताया है. उनका कहना है कि धोनी को टीम से बाहर किए जाने का फैसला एकदम सही है.

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अजीत अगरकर ने कहा कि भारतीय टीम के भविष्य को ध्यान में रखते हुए धोनी को टीम से बाहर किए जाने का फैसला बिल्कुल ठीक है. अगला टी 20 विश्व कप 2020 में खेला जाना है और इसे ध्यान में रखते हुए टीम में युवा विकेटकीपर को मौका दिया जाना चाहिए, जिसके लिए रिषभ पंत पूरी तरह से फिट हैं. विश्व कप से पहले रिषभ को मौका मिलना चाहिए जिससे कि वो पूरी तरह से परिपक्व हो सकें. किसी भी खिलाड़ी का टीम में चयन के लिए सिर्फ उसका प्रदर्शन ही मापदंड होना चाहिए. टी 20 क्रिकेट में धोनी के आंकड़े काफी निराश करने वाला रहा है और सिर्फ अपनी पहली उपलब्धि और नाम की वजह से वो टीम का हिस्सा बने नहीं रह सकते.

sports

बता दें कि धोनी इस वक्त भारतीय वनडे टीम का हिस्सा हैं और वेस्टइंडीज के खिलाफ खेल रहे हैं इनदिनों उनका प्रदर्शन काफी निराश करने वाला रहा है. विकेट के पीछे वो अब भी कमाल के हैं. हालांकि इस बात की पूरी उम्मीद है कि वो अगले विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा रहेंगे. गावस्कर ने भी कहा है कि धोनी टीम के लिए अहम हैं और विराट को उनकी जरूरत है. वैसे धोनी पर इस बात का दबाव है कि वो बल्लेबाजी में अच्छा कर अपनी फौर्म में वापसी कर लें. विश्व कप से पहले भारत को अब ज्यादा वनडे मैच नहीं खेलने हैं ऐसे में धोनी की ये कोशिश जरूर रहेगी कि वो अपनी फौर्म पा लें और इंग्लैंड में अगले विश्व कप में अच्छी बल्लेबाजी करें.

दृष्टि धामी ने इस वजह से छोड़ा ‘सिलसिला बदलते रिश्तों का’

बौलीवुड व टीवी इंडस्ट्री में कुछ भी हो सकता है. यहां लोग खुद को और अपनी फिल्म या सीरियल को लोकप्रिय बनाने के लिए, उसका प्रचार करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. पिछले एक सप्ताह से टीवी इंडस्ट्री में खबर गर्म रही है कि निर्माता संजय वाधवा के ‘‘कलर्स’’ चैनल पर प्रसारित हो रहे सीरियल ‘‘सिलसिला बदलते रिश्तों का’’ का प्रसारण महज सात माह बाद नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में बंद करने का निर्णय लिया जा चुका है और इसी सीरियल के टाइम स्लाट पर नवंबर माह के अंतिम सप्ताह से नए सीरियल ‘‘तंत्र’’का प्रसारण  शुरू किया जाएगा. सूत्रों की माने तो इस निर्णय से सीरियल के निर्माता संजय वाधवा के अलावा सीरियल में अभिनय कर रहे कलाकारों दृष्टि धामी, शक्ति अरोड़ा, अदिति शर्मा व अभिनव शुक्ला काफी हताश हैं. इसी खबर के बीच अभिनेता शक्ति अरोड़ा ने मीडिया में आकर खबर को झुठलाते हुए कहा- ‘‘यह सब गलत खबर है. हमारा सीरियल बंद नहीं होने वाला है. इसकी टीआरपी काफी अच्छी है.’’

और अब सीरियल ‘‘सिलसिला बदलते रिश्तों का’’ में नंदिनी का किरदार निभा रही अभिनेत्री दृष्टि धामी ने सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम प्लेटफार्म पर अति भावुक पत्र पोस्ट कर सीरियल ‘‘सिलसिला बदलते रिश्तों का’’ को छोड़ने का ऐलान किया है. दृष्टि धामी ने लिखा है- ‘‘मुझे गोवा के आउट डोर शूटिंग का वह दिन आज भी याद है और लगता है कि यह कल ही हुआ हो. इस सेट पर मैंने कुछ नए कलाकारों के साथ अभिनय करना शुरू किया था, जो कि बहुत जल्द मेरे अच्छे दोस्त बन गए और आज भी अच्छे दोस्त हैं. इन दोस्तों और अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत मैं नंदिनी के किरदार को जीवंत कर पायी. इस सीयिल में अभिनय करना मेरे लिए इंसान व कलाकार के तौर पर शिक्षाप्रद अनुभव रहा. मैं अपने निर्माता का धन्यवाद अदा करती हूं, जिनके साथ यह मेरा दूसरा सीरियल रहा. मैं ‘कलर्स’ चैनल व सह कलाकारों की भी आभारी हूं. मैं अपने प्रशंसकों की भी आभारी हूं कि इस सीरियल को करते हुए मुझे उनका असीम प्यार मिला. जब तक अब दुबारा किसी अन्य सीरियल में मुलाकात नहीं होती है.’’

सूत्र दावा करते हैं कि सीरियल में नंदिनी का किरदार जिस तरह से आगे बढ़ रहा था, उससे दृष्टि धामी खुश नहीं थीं, इसलिए इस सीरियल को काफी समय से छोड़ना चाहती थीं. पर अब उन्होंने छोड़ दिया है. पर टीवी इंडस्ट्री से जुड़े कुछ सूत्र दावा करते हैं कि यह निर्माता और दृष्टि धामी की मिली भगत है. इससे यह चैनल पर दबाव बनाने के अलावा सीरियल में कुछ बदलाव कर इसकी टीआरपी बढ़ाने का अंतिम प्रयास किया जा रहा है.

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