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ज्यादा एंटीबायोटिक लेना है आपके लिए खतरनाक, पढ़ें पूरी खबर

हमारी समान्य जीवनशैली में पेट दर्द, सिरदर्द या बुखार का होना आम है. जैसे ही ये परेशानियां होती हैं हम तुरंत कोई एंटीबायोटिक दवाई खा लेते हैं. इससे हमारी परेशानी तुरंत खत्म हो जाती है पर पीछे से एक बड़ी परेशानी के आने का दरवाजा खुल रहा होता है. कई जानकारों और चिकित्सकों ने इन दवाइयों के निरंतर सेवन से पेट की गंभीर बीमारियों के होने की चेतावनी दी है.

कुछ जानकारों का मानना है कि जरूरत से अधिक एंटीबायोटिक लेने से आपको पेट की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. इससे डायरिया का खतरा काफी बढ़ जाता है. इसके अलावा प्रो-इंफेक्शन इम्यूनिटी विकसित हो सकती है, इसका मतलब है कि आपके शरीर में हुआ इंफेक्शन जल्दी ठीक नहीं होगा.

too much antibiotic are harmful

वर्तमान में एंटीबायोटिक प्रतिरोधक क्षमता विश्व के कुछ बड़े और गंभीर समस्याओं में से एक हो गई है. आज लोगों में एंटीबायोटिक दवाइयों से संबंधित जानकारी का अभाव है, जरूरी ये है कि लोगों को इससे जुड़ी जानकारी दी जाए और उन्हें जागरुक किया जाए.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, एंटीबायोटिक दवाइयां, वायरस संक्रमण को रोकने और उनके इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां हैं. एंटीबायोटिक तब कारगर नहीं होता, जब इनके जवाब में बैक्टीरिया अपना स्वरूप बदल लेता है.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो बिना जरूरत के एंटीबायोटिक लेने से इम्यूनिटी कमजोर होती है, जो कि वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है. लंबे समय तक एंटीबायोटिक लेने से उपजे संक्रमण से मरीज को अस्पताल में भर्ती रहना पड़ सकता है. बीमारी गंभीर होने पर मरीज की मौत भी हो सकती है.

इलैक्ट्रिक शौक

सामग्री

– 1 बड़ा चम्मच नीबू का रस

– 2 बड़े चम्मच शुगर सिरप

– 3 बड़े चम्मच ब्लू लगून सिरप

– कुछ बूंदें टबैस्को सौस की

– 5-6 आइस क्यूब्स

– सोडा जरूरतानुसार.

विधि

– सोडा छोड़ कर बाकी सारी सामग्री ब्लैंडर से चर्न कर मौकटेल मिक्सर में शेक करें.

– अब सोडे के साथ मिला कर सर्व करें.

व्यंजन सहयोग: शैफ सारिका मेहता

पीना कोलाडा

सामग्री

– 2-3 बड़े चम्मच पाइनऐप्पल क्रश

– 200 एमएल स्प्राइट

– 5-6 आइस क्यूब्स.

विधि

– पाइनऐप्पल क्रश और आइस क्यूब्स को मौकटेल मिक्सर में शेक कर गिलास में डालें.

– अब स्प्राइट डाल कर पाइनऐप्पल स्लाइस से गार्निश कर सर्व करें.

व्यंजन सहयोग: शैफ सारिका मेहता

फेस मास्क : हटाएं ब्लैकहेड, निखारें खूबसूरती

चेहरे पर ब्‍लैकहेड की समस्‍या पुरुषों और महिलाओं दोंनो को झेलनी पड़ती है. यह होना बेहद ही आम बात है. इसको हटाने के लिये आप स्‍क्रब का प्रयोग तो कर ही सकती हैं लेकिन जितना असर पील औफ फेस पैक लगा कर होगा उतना कुछ और लगा कर नहीं. इसलिये अगर आपको घर पर ही पील औफ फेस मास्‍क बनाना है तो ये खबर पढ़ें.

औरेंज पील औफ फेस मास्‍क

यह एक तरह का आम फेस पील औफ मास्‍क है, जो ब्‍लैकहेड मिटाने में मदद करता है. संतरे के छिलको को सुखा कर अच्‍छे से पाउडर बना लीजिये. फिर एक चम्‍मच पाउडर ले कर उसमें दूध मिलाइये और चेहरे पर 15 मिनट तक के लिये लगाइये. इसके पाल इसे निकाल कर गरम पानी से चेहरा धो लीजिये. इस मास्‍क से डेड स्‍किन साफ होती है और सन टैनिंग भी साफ हो जाती है.

एग मास्‍क

अंडा त्‍वचा से ब्‍लैकहेड हटाता है और उसे चमकदार बनाता है. अंडे के सफेद भाग को 1 चम्‍मच जिलेटिन और 2 चम्‍मच दूध के साथ मिलाइये और 1 मिनट के लिये गर्म कीजिये. इसको एक पेस्‍ट के रूप में बना लीजिये और ठंडा होने दीजिये. अब इसको अपने चेहरे पर लगाइये और सुखा लीजिये और हाथ से पील कर लीजिये. यह पील औफ मास्‍क चेरहे से ब्‍लैकहेड हटाएगा और पोर्स को खोलेगा.

लेमन एंड एग मास्‍क

नींबू के रस में अल्‍फा हाइड्रोक्‍सी एसिड होता है जो बैक्‍टीरिया का नाश करता है, स्‍किन पोर्स को टाइट बनाता है, डेड स्‍किन और ब्‍लैकहेड को रगड़ कर साफ कर देता है. नींबू के रस को अंडे के सफेद भाग के साथ मिलाइये और उसे साफ चेहरे पर लगाइये. इसको 10 मिनट तक के लिये छोड़ दीजिये. इसके बाद इसे किसी माइल्‍ड फेस वाश से साफ कर लीजिये.

फ्रांस में हिंसा : आर्थिक नीतियों के खिलाफ मध्यम वर्ग का विद्रोह

सामाजिक, आर्थिक क्रांतियों का अगुवा फ्रांस एक बार फिर आंदोलन की वजह से सुर्खियों में है. फ्रांस में पिछले 3 हफ्तों से सरकार के खिलाफ जारी हिंसक प्रदर्शनों से राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है. युवा सड़कों पर हैं. प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है. विश्लेषक गृहयुद्ध जैसे हालात बता रहे हैं. फ्रांस में इस तरह की हिंसा कई दशकों बाद हुई है.

आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है जब बेकाबू हो रही हिंसा के चलते राष्ट्रपति मैक्रोन को आपात बैठक बुलानी पड़ी और देश में आपातकाल लगाने के विकल्प तक पर सोच लिया गया है.

फ्रांस का यह आंदोलन पैट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि, महंगाई और टैक्सों में बढ़ोतरी को ले कर लोगों के गुस्से का नतीजा है. इस आंदोलन का कोई नेता नहीं है. सोशल मीडिया पर सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना शुरू हुई और लोग विरोध में सड़कों पर उतरने लगे.

2 दिसंबर को पेरिस की सड़कों पर हिंसा उग्र हो गई. दर्जनों गाडि़यां और सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया. प्रदर्शन में 130 लोग घायल हो गए. येलो वेस्ट नाम से चल रहे आंदोलन में अब तक साढ़े तीन से अधिक लोग शामिल हो चुके हैं.

सरकार की नीतियों का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है. फ्रांस का यह आंदोलन यहां के मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग का सरकार की आर्थिक, सामाजिक नीतियों के खिलाफ गुस्से का नतीजा है. यह वर्ग पिछले एक साल से लगातार बढाए जा रहे टैक्सों और महंगाई से त्रस्त है.ऊपर से सरकार इन वर्गों को राहत पहुंचाने के बजाय अमीरों को राहत दे रही है.

मैक्रोन सरकार द्वारा अमीरों को फायदा पहुंचाने और निम्न तबके की खरीदने की क्षमता घटाने वाली नीतियों के खिलाफ लोगों को एकजुट हो कर विरोध के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा. फ्रांस में इस साल टैक्स में बढ़ोतरी के कारण पैट्रोलियम उत्पादों के दाम 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गए हैं. इस से आम जनता की जेब पर भार बढ़ गया है.

आंदोलन के बावजूद राष्ट्रपति मैक्रोन ने बढ़ाये गए टैक्स वापस लेने से इनकार कर दिया है. देश की अर्थव्यवस्था के लिए उन्हें जरूरी बताया है.

फ्रांस में क्रांति का इतिहास रहा है. 1789 से 1799 के चली क्रांति का इतिहास फ्रांस में राजनीतिक और सामाजिक बदलाव का रहा है.

खूनी संघर्ष

इस क्रांति के चलते यहां राजा को गद्दी से हटाया गया और एक गणतंत्र की स्थापना हुई. इस क्रांति ने आधुनिक इतिहास की दिशा बदल दी थी. इस से दुनिया भर में राजतंत्र का खात्मा होना शुरू हुआ. क्रांति से केवल फ्रांस में ही नहीं, समूचे यूरोप के जनजीवन में उथलपुथल मच गई थी.

इस क्रांति ने अन्य यूरोपीय देशों में भी स्वतंत्रता की भूख पैदा की और कई देश राजशाही से मुक्ति के लिए संघर्ष करने लगे.

असल में फ्रांस में निरंकुश राजतंत्र था जो दैवीय सिद्धांत पर आधारित था. इस में राजा को संपूर्ण अधिकार प्राप्त थे. राजा स्वेच्छाचारी था. लुई 14वें के शासनकाल में[1643-1715] निरंकुशता अपनी पराकाष्ठा पर थी. वह अपनी इच्छानुसार कानून बनाता था. उस ने शक्ति का केंद्रीयकरण राजतंत्र के पक्ष में कर लिया था.

आज भेदभावपूर्ण यह स्थिति फ्रांस में ही नहीं, दूसरे देशों सहित भारत में भी है. पेरिस में जब आम लोग सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ हिंसक हो रहे थे, दिल्ली की सड़कों पर भी देश भर से जुटे हजारों किसान, मजदूर एनडीए सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे थे. ये किसान सरकार की भेदभाव वाली नीति से परेशान हैं.

भारत में भी अमीरों के हक में आर्थिक नीतियां बनाई जा रही हैं. किसानों का आरोप है कि मोदी सरकार कारपोरेट घरानों को ध्यान में रख कर उन को फायदा पहुंचाने वाली योजनाएं बना रही हैं और उन्हीं पर अमल कर रही है. किसानों, मजदूरों को जमीनों से बेदखल किया जा रहा है. विकास के नाम पर उन की  जमीनें जबरन छीन कर कौरपोरेट घरानों की दी जा रही हैं.

किसान ही नहीं, देश का युवा बेरोजगार भी दुखी हैं. हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया गया था पर युवाओं को नई नौकरियां देने की बात तो अलग, सरकार की नीतियों के चलते नौकरीशुदा लोगों का रोजगार छिन रहा है. आम मध्यम और निम्न मध्यम तबका नोटबंदी, जीएसटी के बाद बढती महंगाई से त्रस्त हैं. सरकार केवल जुमलेबाजी करती सुनाई दे रही है.

फ्रांस की तरह भारत में भी राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना में बहलाने के प्रयास किए जा रहे हैं. आज दुनिया भर में लोकतंत्र के नाम पर एक नई तरह की तानाशाही शुरू हो रही है, जहां शासकों द्वारा निरंकुश फैसले लिए जा रहे हैं जो जनता के खिलाफ और अपने चंद लोगों को लाभ पहुंचाने वाले होते हैं.

दुनिया भर में अब लोकतंत्र के नाम पर पनप रहे तानाशाही शासनों के खिलाफ गुस्सा धीरेधीरे उबल रहा है और लोग सड़कों पर उतर रहे हैं. भेदभाव वाली नीतियां चाहे आर्थिक हों या सामाजिक एक दिन नीतिधारकों को पीड़ित लोगों के गुस्से का सामना करना ही होगा.

मुजफ्फरनगर न बन जाये बुलंदशहर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश एक बार फिर सुलग उठा है. इस बार मुजफ्फरनगर की जगह बुलंदशहर निशाने पर है. बुलंदशहर में फैली हिंसा किसी एक दिन की घटना का अंजाम नहीं है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गौ रक्षा के नाम पर धर्मिक सौहार्द को बिगाड़ने का काम लंबे समय से चल रहा है. चुनाव करीब देख कर पहले से धधक रहे माहौल में चिंगारी लगाने का काम बुलंदशहर की घटना ने किया है.

बुलंदशहर की घटना से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार निशाने पर है. केवल विरोधी दल ही नहीं भाजपा के अपने नेता और प्रदेश सरकार में सहयोगी दलों ने भी योगी सरकार को कठघरे में खड़ा किया है. योगी सरकार के लिये मुसीबत वाली बात यह है कि अगर वह कड़े कदम उठाती है तो हिन्दू संगठनों पर कारवाई करनी पड़ेगी, ऐसे में बीच का रास्ता निकालने के लिये एक बार फिर गौरक्षा को आवरण बनाया जा रहा है.

योगी सरकार के आने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गोकशी और अवैध कमेलो यानि अवैध वधशालाओं को बंद कर दिया गया. गौकशी के मामलों में आंकड़ों में कमी आई है. अब यह मामले चोरी छिपे हो रहे हैं. इससे यह कानून व्यवस्था के लिये चुनौती बनते जा रहे हैं. योगी सरकार के बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुरादाबाद, बिजनौर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, अमरोहा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और संभल में गौकशी बंद की दी गई. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन शहरों में गौकशी और अवैध कमेलों का जाल फैला हुआ था. गौकशी पर रोक के बाद जिस तरह से आवारा पशुओं का गांव में आंतक बढ़ा, उससे अब किसान ऐसे पशुओं से तंग आ चुके हैं. अवैध कमेलों को रोकने का काम करने वाले गांव के लोग खामोश हो गये हैं. ऐसे में भैंस के मीट की आड़ में गौकशी होने लगी है.

गौरक्षा के नाम पर धधकता पश्चिमी उत्तर प्रदेश

गौकशी पर रोक लगाने के नाम पर हिन्दू वादी संगठन विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और शिवसेना जैसे बहुत से दलों के लोग इनके पदाधिकारी होने की बात कह कर पुलिस से गौकशी की शिकायत करके अपने हित साधते हैं. इससे उनको अपनी राजनीति चमकाने का मौका भी मिलता है. यह लोग पशुओं से लदे वाहनों को पकड़ कर पुलिस के हवाले करते हैं. इनको लेकर यहां बहुत विवाद होता रहता है. पुलिस इन पशुओं को पकड़ कर गांव वालों या गौशाला वालों को देने की बात करती है. असल में कई बार इन पशुओं को वह ऐसे ही आवारा छोड देती है. पुलिस के पास इन पशुओं को रखने के लिये जगह नहीं होती है.

मेरठ पुलिस ने सरध्ना में नवंबर माह में एनकांउटर करने की बात कही. 20 से अधिक गौ तरस्करों को पकडने की भी बात कही. 2016-2017 में मेरठ रेंज के जिलो में 342 और सहारनपुर रेंज के जिलो में 310 घटनायें गौकशी की हुई. योगी सरकार बनने के बाद इन आंकड़ों में कमी का दावा किया गया. 2017-2018 में मेरठ रेंज में 192 और सहारपुर रेंज में 105 घटनाये दर्ज हुई. घटनायें भले ही कम हुई हो पर यहां की कानून व्यवस्था बिगड़ी और इन मामलों में झगड़े बढ़ गये. खुर्जा में नवम्बर माह के दूसरे पखवाड़े में 50 लोगों को गौवंश कटान के मामले में पकड़ा गया. सरध्ना में हिन्दू संगठनों ने समुदाय विशेष के लोगों से मारपीट किया. मेरठ के किठौर में गाय और भैंस पकडी गई. मेरठ में 3 जगहों पर गोकशी के आरोप में झगड़े हुये. अमरोहा, मुरादाबाद, अलीगढ़, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में गौकशी को लेकर 9 मामले सामने आये. पुलिस के लोग कहते हैं कि इन घटनाओं को लेकर थानों पर हंगामा होता रहता है.

छवि बनाने का सरल रास्ता

योगी सरकार आने के बाद राजनीति कर रहे युवाओं के लिये अपना नाम चमकाने का सरल रास्ता गौकशी का विरोध बन गया है. इसके जरीये वह सीधे मुख्यमंत्री की महत्वकांक्षा को पूरा कर उनकी निगाह में आने का प्रयास करते हैं. केसरिया गमछा, लंबा तिलक लगाये यह युवा थाने में अपनी पकड़ बनाने का काम करने लगे. जिससे उनको थानों में घुसकर काम कराने की छूट मिल जाती है. बुलंदशहर की घटना में नामजद योगेश राज का सफर भी ऐसा ही था. योगेश राज बजरंगदल का जिला संयोजक था. योगेश पहले एक प्राइवेट नौकरी करता था. 2016 में वह बजरंगदल का जिला संयोजक बना. इसके बाद उसने नौकरी छोड़कर संगठन का काम करने लगा. वह स्याना के नयाबास गांव का रहने वाला था. इसका नाम पहले भी विवादों में आ चुका है.

योगेश ने ही भीड़ को भड़काने का काम किया. पुलिस का कहना है कि योगेश राज की शह पर ही भीड़ ने दंगा करना शुरू किया. घटनाक्रम के अनुसार योगेश ने ही गोकशी की शिकायत की. पुलिस ने भीड़ को शांत कर लिया था. सडक पर से पशुओं के मांस के अवशेष से लदा ट्रैक्टर भी हट गया था. इसके बाद योगेश पुलिस कारवाई से खुश नहीं दिखा. जिसके बाद हिंसा भड़क उठी. योगेश की तरफ से गौकशी करने वाले 7 लोगों के खिलाफ मुकदमा लिखा गया. इसमें उसने लिखा कि वह अपने साथियों के साथ महाब के जंगलों घूम रहा था तो सुबह 9 बजे वहां पर यह पशुओं के काटने के अंश मिले थे. पुलिस ने योगेश के खिलाफ भी आईपीसी की धरा 147, 148, 149, 307, 302, 333, 353, 427, 436, 349 के तहत मुकदमा दर्ज किया. पुलिस की एफआईआर में लिखा गया कि योगेश राज ने अपने साथियों के साथ मिलकर भीड़ को भड़काया.

साजिश पर अलग तर्क

हिन्दूवादी संगठनों का नाम आने के बाद भी उत्तर प्रदेश के आला अफसर सीधे नाम लेने से बच रहे हैं. एडीजी ला एंड आर्डर आनंद कुमार ने कहा कि किसी संगठन के बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुलंदशहर की घटना को एक गहरी साजिश मानते हैं. मुख्यमंत्री ने भी हिन्दूवादी संगठनो की चर्चा किये बिना गोकशी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़े कदम उठाने को कहा. मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है. इस घटना को गंभीरता से लिया जाये. गोकशी से संबंध रखने वाले किसी भी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष को बचना नहीं चाहिये. योगी ने कहा कि 19 मार्च 2017 से ही अवैध स्लाटर हाउस बंद है तो डीएम और एसपी कैसे स्लाटर हाउस चलने दे रहे हैं?

एक सवाल यह उठ रहा है कि गोकशी पर तो मुख्यमंत्री बोले, पर इंसपेक्टर की हत्या करने वालो को लेकर कोई आदेश नहीं दिया. इसके पीछे की वजह देखी जाये तो पता चलता है कि भाजपा और दूसरे संगठन मुख्यमंत्री को बताते हैं की गोकशी को लेकर पुलिस एक्शन नहीं लेती है. अगर वह शिकायतों को सुनते तो यह घटनाये नहीं होती. यही वजह है कि पुलिस इंसपेक्टर की हत्या पर उत्तर प्रदेश सरकार ने केवल मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी समझ ली.

मुख्यमंत्री की ही तरह दूसरे दल भी इसे साजिश मान रहे हैं. योगी सरकार के मंत्री मंडल में शामिल मंत्री और भाजपा के सहयोगी दल के सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर कहते हैं ‘इस घटना के लिये विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, और संघ जिम्मेदार हैं. यह इनकी साजिश का परिणाम है.’ अपने ट्विटर पर ओमप्रकाश राजभर ने लिखा कि ‘आखिर कौन से धर्म के हिमायती लोग हैं जो इंसान की जान की कीमत नहीं समझ रहे हैं. राजभर ने कहा कि ‘आखिर मुसलिम इज्तिमा के दिन ही यह घटना क्यों हुई? यह हिन्दू संगठनों के द्वारा अशांति फैलाने की साजिश है.’

हिंसा का साथ नहीं देती जनता

बसपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि भाजपा सरकार अराजकता करने वालो को संरक्षण दे रही है. यह सरकार की लापरवाह नीतियों के कारण हुई है.

अब समय आ गया है कि प्रदेश को भीडतंत्र की हिंसा और अराजकता की भेंट चढ़ने से रोका जाये. भीडतंत्र की हिंसक प्रवृत्ति का शिकार अपने भी होते हैं.’ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर दंगों को अभी भूले नहीं हैं. उसकी याद करके लोग अभी भी सहम जाते हैं. बुलंदशहर की चिंगरावटी पुलिस चौकी के उपद्रव के बाद वहां के आसपास के गांव खामोश हो गये. घर से लोग गायब हो गये. घरों में केवल महिलायें और बच्चे ही बचे. चिंगरावटी और महाब गांव सबसे अधिक प्रभावित दिखे.

मुजफ्फरनगर दंगों के राजनीतिक प्रभाव को देखें तो साफ पता चलता है कि जनता कभी दंगाईयों का साथ नहीं देती है. अखिलेश यादव की सपा सरकार के समय हुये दंगों के बाद सपा का पश्चिमी उत्तर प्रदेश से सफाया हो गया था. इस बार सत्ता में भाजपा है और योगी सरकार से वहां के लोग नाराज हैं. ऐसे में बुलंदशहर की हिंसा का प्रभाव योगी सरकार की छवि पर ही नहीं वोट पर भी पड़ सकता है. योगी सरकार के लिये जरूरी है कि मामले का जल्द खुलासा हो, नहीं तो योगी की छवि पर बुलंदशहर का लगा दाग कभी साफ नहीं हो पायेगा.

चुनावी राजनीति में फंसा बुलंदशहर

बुलंदशहर की जनसंख्या करीब 50 लाख है. यहां हर तरह जाति बिरादरी के लोग रहते हैं. हिन्दू और मुसलिम आबादी है. यहां जाट बाहुल्य आबादी है. जाट बिरादरी के लोगों ने अपनी मेहनत से यहां की भूमि को कृषि योग्य बनाया है. यहां की मुख्य उपजें गेहूं, चना, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा, कपास एव गन्ना आदि हैं. गन्ना यहां की मुख्य कैश क्राप यानि नकदी फसल है. सूत कातने, कपड़े बनाने का काम जहांगीराबाद में, बरतनों का काम खुर्जा, लकड़ी का काम बुलंदशहर व शिकारपुर में होता है. कांच से चूड़ियां, बोतलें आदि भी बनती हैं. करघे से कपड़ा बुना जाता है. अनूपनगर में पानी के हैंडपम्प बनाने की भी कई ईकाई है. खुर्जा चीनी मिट्टी के काम के लिए पहचाना जाता है.

बुलंदशहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है. अनूपशहर, खुर्जा, स्याना, डिबाई, सिकंदराबाद व शिकारपुर बुलंदशहर के खास कस्बे है. दिल्ली से 75 किलोमीटर की दूरी पर बुलंदशहर काली नदी के किनारे बसा है. बुलंदशहर मेरठ, अलीगढ़, खैर, बदायूं, गौतमबुद्व नगर व गाजियाबाद से जुड़ा हुआ है. बुलंदशहर जनपद के नरौरा में गंगा के किनारे भारत वर्ष में विद्यमान परमाणु विद्युत संयंत्र बना हुआ है.

बुलंदशहर का इतिहास लगभग 1200 वर्ष पुराना है. इसकी स्थापना अहिबरन नाम के राजा ने की थी. यहां उपर कोट नाम से एक किला बना है. किले के चारों ओर सुरक्षा के लिए नहर का निर्माण भी था जिसमें इस ऊपर कोट के पास ही बहती हुई काली नदी के जल से इसे भरा जाता था. ब्रिटिश काल में यहां राजा अहिबरन के वंशज राजा अनूपराय ने भी शासन किया, जिन्होंने अनूपशहर नामक शहर बसाया.

मुगल काल के अंत और ब्रिटिश काल के उद्भव समय में जनपद में ही मालागढ़ रियासत, छतारी रियासत व दानपुर रियासत की भी स्थापना हो चुकी थी जिनके अवशेष आज भी जनपद में विद्यमान है. ऐतिहासिक महत्व के साथ ही साथ बुलंदशहर का भौगोलिक महत्व भी है. बुलंदशहर के पूर्व में गंगा नदी व पश्चिम में यमुना नदी इसकी सीमा बनाती है. बुलंदशहर के उत्तर में मेरठ तथा दक्षिण में अलीगढ़ जिले हैं. पश्चिम में राजस्थान राज्य पड़ता है.

इसका क्षेत्रफल 1,887 वर्ग मील है. यहां की भूमि उर्वर एवं समतल है. गंगा की नहर से सिंचाई और यातायात दोनों का काम लिया जाता है. निम्न गंगा नहर का प्रधान कार्यालय नरौरा स्थान पर है. वर्षा का वार्षिक औसत 26 इंच रहता है. पूर्व की ओर पश्चिम से अधिक वर्षा होती है. भारत के कई प्रमुख शहरों से रेलमार्ग द्वारा बुलंदशहर जुड़ा हुआ है. सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हापुड़ व खुर्जा है. बुलंदशहर सड़क मार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है. दिल्ली, खैर, आगरा, अलीगढ़ और जयपुर आदि शहरों से सड़कमार्ग द्वारा जुड़ा है.

इंसपेक्टर की हत्या और बिसाहडा कांड

बुलंदशहर की घटना में जिस तरह से गोकशी और हिन्दूवादी संगठनों का नाम सामने आया है उसके बाद से यह बात तेजी से उठ रही है कि अखलाक केस की जांच करने के कारण ही तो इंसपेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या नहीं की गई? इंसपेक्टर के परिजन इस बात पर खुलकर कहते हैं कि अखलाक केस की जांच करने के ही कारण उनको निशाने पर लेकर मारा गया. बिसाहडा कांड में कई आरोपियों को उनकी अगुवाई में पकड़ा गया था. इससे कई हिन्दूवादी संगठन उनसे खफा थे. इंसपेक्टर की बहन और पत्नी ने कहा कि उनको धमकी भरे फोन भी आते थे. इंसपेक्टर के बेटे  अभिषेक ने सवाल उठाया कि समाज में धर्म के नाम पर जिस तरह से हिंसा फैलाई जा रही है, उसमें आज मेरे पिता की जान गई तो कल किसी और के पिता की जान जायेगी. पुलिस विभाग के अफसर एडीजी प्रशांत कुमार बिसाहडा कांड जैसी किसी साजिश से इंकार करते कहते हैं कि सुबोध ने डेढ़ माह ही इस केस की छानबीन की थी उस दौरान इस केस की चार्जशीट नहीं लगी थी.

इन ऐप्स के सहारे अपने स्मार्टफोन स्क्रीन को करें रिकौर्ड

क्या आप आपने फोन की सभी एक्टिविटी को रिकौर्ड करना चाहते हैं? तो अब सोचिये मत बल्कि हमारे इस खबर को पढ़ने के बाद अपने फोन की किसी भी एक्टिविटी को कर डालिए रिकौर्ड. गूगल प्ले स्टोर पर कई ऐप्स मौजूद हैं, जिन्हें डाउनलोड करके आप अपने फोन की स्क्रीन को रिकौर्ड कर सकते हैं. इस तरह आप अपने व्ह़ाट्सऐप वीडियो कौल से लेकर मैसेंजर टेक्स्ट को वीडियो फौर्मेट में सेव कर पाएंगे. डालते हैं इन ऐप्स पर एक नजर.

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फोन की स्क्रीन को रिकौर्ड करने के लिए डीयू रिकौर्डर एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है. ऐप की सेटिंग में जाकर यूजर विडियो रिजोल्यूशन को 240P से 1080P के बीच सेट कर सकते हैं. इसका साथ ही औडियो क्वालिटी को भी 15एफपीएस से लेकर 60एफपीएस तक सेट किया जा सकता है. रिकौर्डिंग को चालू और बंद करने के लिए गेस्चर कंट्रोल और मोबाइल शेक आप्शन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. रिकौर्डिंग को काउंटडाउन टाइमर के इस्तेमाल से भी चालू किया जा सकता है. ऐप के जरिए यूजर अपनी वीडियो को शेयर और एडिट भी कर सकते हैं. इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर पर जाकर मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है.  इसकी साइज 9.8 एमबी है, अब तक इसे 1 करोड़ यूजर डाउनलोड कर चुके हैं. यूजर्स से इस ऐप को 4.8 रेटिंग मिली है.

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Screen Recorder

स्क्रीन रिकौर्डर को यूजर गूगल प्ले स्टोर पर जाकर मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं. इसकी साइज 2 एमबी है. अबतक इसे 10 लाख यूजर्स डाउनलोड कर चुके हैं. यूजर्स द्वारा इस ऐप को 4.2 रेटिंग मिली है. इस ऐप में आपको किसी भी फीचर्स खरीदने की जरूरत नहीं है. इसमें रिकौर्डिंग के लिए यूजर्स काउंटडाउन सेट कर सकते हैं. इसकी मदद से आप गेम खेलते हुए भी स्क्रीन को डाउनलोड कर सकते हैं.

AZ Screen Recorder

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AZ स्क्रीन रिकौर्डर को यूजर गूगल प्ले स्टोर पर जाकर मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं. इसकी साइज 15 एमबी है. इस ऐप को अब तक 1 करोड़ यूजर डाउनलोड कर चुके हैं. यूजर्स से इसे 4.6 रेटिंग मिली है. इस ऐप के कई फीचर्स आपको खरीदने पड़ेंगे. स्क्रीन की साइड में ये रिकौर्डिंग आप्शन दिखाता रहेगा. इसमें आप वीडियो की रिजोल्यूशन से लेकर औडियो क्वालिटी को सेट कर सकते हैं. इस ऐप की सबसे बड़ी खासियतों में से एक ये है कि आप फ्रंट कैमरा इनेबल कर औनस्क्रीन के साथ खुद को भी रिकौर्ड कर सकते हैं.

पोर्न फिल्मों का बाजार बढ़ा है : सनी लियोनी

‘पोर्न स्टार’ सनी लियोनी बौलीवुड में अब काफी नाम कमा चुकी हैं. स्वभाव से हंसमुख सनी लियोनी को शुरुआत में जो भी काम मिला उसे वे खुशी से करती गईं. नतीजतन, आज ज्यादातर सभी फिल्मकार व डायरैक्टर उन्हें अपनी फिल्मों में लेना पसंद करते हैं.

सनी लियोनी को उन का पोर्न टैग खराब नहीं लगता, क्योंकि उन्होंने जब भी काम किया है, सोचसमझ कर अपनी मरजी से किया है. उन के हिसाब से जो लोग पोर्न फिल्मों को खराब कहते हैं वे ही उन्हें देखना भी पसंद करते हैं. यही वजह है कि पोर्न फिल्मों का बाजार पहले से काफी बढ़ा है.

पेश हैं, सनी लियोनी से हुई बातचीत के खास अंश :

बौलीवुड ने आप की जिंदगी को कैसे संवारा है?

बौलीवुड ने मेरी जिंदगी को पूरी तरह से बदल दिया है. जब मैं पहली बार केवल 2 हफ्तों के लिए यहां आई थी, तब वापस लौस एंजिल्स चले जाने की बात सोची थी लेकिन आज मैं कई फिल्में कर चुकी हूं.

मेरे लिए अपनेआप को फिल्म इंडस्ट्री में जमाना आसान काम नहीं था. पुराने दिनों को याद करूं तो हर दिन सुबह उठ कर किसी प्रोफैशनल की तरह होंठों पर स्माइल लिए प्रोडक्शन हाउस के चक्कर लगाना, हमेशा खुश रहने की ऐक्टिंग करना, जो भी काम मिले उसी को कर लेना, इसी से मुझे बौलीवुड में जमने का मौका मिलता गया. न तो मैं एक अच्छी अदाकारा हूं और न ही एक अच्छी डांसर. पर मैं ने हर काम में दिनरात मेहनत कर के महारत हासिल की. कोई भी हालात हों हमें पूरी तरह जिंदगी को जीना चाहिए.

बौलीवुड की कौन सी बात आप को पसंद है या नापसंद?

लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं मुझे पता है पर उस का असर मुझ पर नहीं पड़ता. पसंद की बात करें तो मैं फिल्में कर रही हूं, इंडस्ट्री का हिस्सा बन चुकी हूं और यहां बहुत से लोग मेरे फैन हैं जिस की मुझे खुशी है.

नापसंद की बात कहें तो जो लोग मेरे बारे में भलाबुरा कहते हैं, उस का मुझ पर कुछ खास फर्क नहीं पड़ता. इस के अलावा यहां इंडस्ट्री कैसे कारोबार करती है, मेरे लिए इसे जानना आसान नहीं था.

अमेरिका में सब अलग है, पर यहां काम के साथसाथ इमोशन भी होते हैं जिस में मुझे एडजस्ट करना पड़ा क्योंकि बौलीवुड इंडस्ट्री किसी के साथ एडजस्ट नहीं करती. यहां कोई काम समय पर नहीं होता.

आप का ड्रीम प्रोजैक्ट क्या है?

मेरी इच्छा है कि मुझे किसी बड़े बजट की फिल्म में लीड रोल करने का मौका मिले. इस के अलावा मैं पीरियड फिल्में भी करना चाहती हूं जहां मुझे भारत के इतिहास के बारे में जानने का मौका मिलेगा. अगर कोई इंटरैस्टिंग बायोपिक होगी तो मैं जरूर करना पसंद करूंगी.

आप की प्रोडक्शन कंपनी इन दिनों क्या कर रही है?

जब मैं यहां आई तो पता चला कि यहां कारोबार करने के लिए कंपनी खोलना बहुत जरूरी है. फिर मैं ने ‘सनसिटी मीडिया एंटरटेनमैंट’ के नाम से कंपनी खोली. अगर अच्छी कहानी मिलेगी तो मैं फिल्म बनाऊंगी. मुझे कोई जल्दी नहीं है. थ्रिलर फिल्म बनाने की भी इच्छा है.

आगे कौन सी फिल्म कर रही हैं?

मैं ने अभी अरबाज खान के साथ फिल्म ‘तेरा इंतजार’ की है जो रुपहले परदे पर आ चुकी है. यह एक रोमांटिक थ्रिलर फिल्म है. इस के अलावा मैं कुछ और फिल्में भी करने वाली हूं.

जब काट ले कुत्ता तो सबसे पहले करें ये काम

कुत्ते इंसान के बेहद करीब रहे हैं. एक प्रकार के पालतू जानवर हैं ये. इनकी प्रजाति इंसानों के बीच विकसित हुई है. कुत्ते का काटना एक समय में काफी खतरनाक माना जाता था. पुराने समय में इसके काटने से जो बीमारी लोगों को होती थी उसका कोई इलाज नहीं था. जिसके कारण लोग काटने से हुई बीमारी से मर जाते थे. पर आज ये उतना गंभीर या कहें तो खतरनाक नहीं रहा. मेडिकल साइंस में कुत्ता, बिल्ली जैसे पशुओं के काटने से होने वाले संक्रमण का इलाज अब मुमकिन है.

आज इस खबर में  हम आपको रेबिज से बचने के कुछ उपाय बताएंगे. हम आपको जानकारी देंगे कि अगर आपको किसी कुत्‍ते ने काट लिया है तो, उसके वायरस से कैसे बचा जा सकता है.

जब किसी को कुत्ता काट ले तो इन उपायों को ध्यान में रखें

कुत्ते के काटे हिस्से को पानी से धोएं

कुत्तों के काटने पर घाव को पानी की तेज धार से कई बार धोएं. इससे बैक्टीरिया और कीटाणुओं का सफाया हो जाता है. जरुरत पड़ने पर एंटीबैक्‍टीरियल साबुन का प्रयोग करें.

घाव को जोर से दबाएं

कुत्ते के काटने पर खून को रोकना जरूरी होता है. इसलिए जब घाव से खून आए तो उसे जोर से दबाएं.

एंटीबायोटिक क्रीम लगाएं

कुत्ते के काटने पर सबसे महत्वपूर्ण होता है इंफेक्शन को रोकना. इसलिए जरूरी है कि आप घाव पर तुरंत एंटीबायोटिक क्रीम लगा लें. इससे इंफेक्सन का खतरा कम हो जाता है.

बैंडेज लगाएं

एंटी बैक्टीरियल क्रीम लगाने के बाद उसको बैंडेज से बांध लें. इससे घाव पर दोबारा इंफेक्शन का खतरा नहीं रह जाता.

डाक्टर के पास जाएं

डाक्‍टर के पास जा कर तुरंत ही टिटनेस का इंजेक्‍शन लगवाएं.

बेरी सरप्राइज

सामग्री

– 4 बड़े चम्मच ब्लू बेरी क्रश्ड

– 1 कैन जिंजर ऐल (कार्बोनेटेड सौफ्ट ड्रिंक)

– 4-5 पुदीनापत्ती

– 1 बड़ा चम्मच नीबू का रस

– 1 फांक नीबू की.

विधि

– पुदीनापत्ती और नीबू की फांक को चर्न कर ब्लू बेरी के साथ गिलास में डालें.

– अब आइस क्यूब्स और जिंजर ऐल मिला कर ठंडाठंडा सर्व करें.

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