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आम के प्रमुख कीट, रोग और उन की रोकथाम

भारत दुनिया के सब से बड़े आम निर्यातक देशों में से है लेकिन पिछले कुछ सालों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में निर्यात को गहरा धक्का लगा है. वजह थी, भारतीय आम में कीटनाशक की बहुत ज्यादा मात्रा का पाया जाना.

कीटनाशक के बहुत ज्यादा इस्तेमाल से निबटने का अव्वल तरीका यह है कि सही समय पर ही कीट की पहचान कर कीटनाशक या दूसरे तरीकों से उस से निबटा जाए. कीट की समस्या गंभीर होने और फिर कीटनाशक के छिड़काव से बचा जाए.

गुठली का घुन (स्टोन बीविल) : यह कीट घुन वाली इल्ली की तरह होता है जो आम की गुठली में छेद कर के घुस जाता है और उस के अंदर अपना भोजन बनाता रहता है. कुछ दिनों बाद ये गूदे में पहुंच जाता है और उसे नुकसान पहुंचाता है. इस की वजह से कुछ देशों ने इस कीट से ग्रसित बागों से आम का आयात पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया था.

रोकथाम : इस कीड़े को नियंत्रित करना थोड़ा कठिन होता है इसलिए जिस भी पेड़ से फल नीचे गिरे, उस पेड़ की सूखी पत्तियों और शाखाओं को नष्ट कर देना चाहिए. इस से कुछ हद तक कीड़े की रोकथाम हो जाती है.

जाला कीट (टैंट केटरपिलर) : शुरुआती अवस्था में यह कीट पत्तियों की ऊपरी सतह को खाता है. उस के बाद पत्तियों का जाल या टैंट बना कर उस के अंदर छिप जाता है और पत्तियों का खाना जारी रखता है.

रोकथाम : पहला उपाय तो यह है कि आजादीरैक्टिन 3000 पीपीएम ताकत का 1 मिलीलिटर को पानी में घोल कर छिड़कें.

दूसरा उपाय यह है कि जुलाई में क्विनालफास 0.05 फीसदी या मोनोक्रोटोफास 0.05 फीसदी का 2-3 बार छिड़काव करें.

दीमक : यह सफेद, चमकीले और मिट्टी के अंदर रहने वाला कीट है. यह जड़ को खाता है, उस के बाद सुरंग बना कर ऊपर की ओर बढ़ता जाता है. यह तने के ऊपर कीचड़ का जमाव कर अपनेआप को सुरक्षित करता है.

रोकथाम : इन उपायों से अपने पेड़ों को बचाएं:

* तने के ऊपर से कीचड़ के जमाव को हटाना चाहिए.

* तने के ऊपर 5 फीसदी मैलाथियान का छिड़काव करें.

* दीमक से छुटकारा पाने के 2 महीने बाद पेड़ के तने को मोनोक्रोटोफास (1 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी) से मिट्टी पर छिड़काव करें.

* 10 ग्राम प्रति लिटर ब्यूवेरिया बेसिआना का घोल बना कर छिड़काव करें.

फुदका या भुनगा कीट : ये कीट आम की फसल को सब से ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं. इस कीट के लार्वा और व्यस्क दोनों ही कोमल पत्तियों व पुष्पों का रस चूस कर नुकसान पहुंचाते हैं. इस की मादा 100-200 अंडे नई पत्तियों व मुलायम प्ररोह में देती हैं और इन का जीवनचक्र 12-22 दनों में पूरा हो जाता है. इस का प्रकोप जनवरीफरवरी महीने से शुरू हो जाता है.

रोकथाम : इस कीट से बचने के लिए ब्यूवेरिया बेसिआना फफूंद के 0.5 फीसदी घोल का छिड़ाकव करें. नीम का तेल 3000 पीपीएम प्रति 2 मिलीलिटर प्रति लिटर पानी में मिला कर घोल का छिड़काव कर के भी नजात पाई जा सकती है. इस के अलावा कार्बोरिल 0.2 फीसदी या क्विनालफास 0.063 फीसदी का घोल बना कर छिड़काव करने से भी राहत मिल जाएगी.

फल मक्खी (फ्रूट फ्लाई) : यह कीट आम के फल को बड़ी मात्रा में नुकसान पहुंचाने वाला है. इस कीट की सूंडि़यां आम के अंदर घुस कर गूदे को खाती हैं, जिस से फल खराब हो जाता है.

रोकथाम : यौन गंध के प्रपंच का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस में मिथाइल यूजीनौल 0.08 फीसदी और मैलाथियान 0.08 फीसदी बना कर डब्बे में भर कर पेड़ों पर लटका देने से नर मक्खियां आकर्षित हो कर मर जाती हैं. एक हेक्टेयर के बाग में 10 डब्बे लटकाना सही रहेगा.

गाल मीज : इन के लार्वा बौर के डंठल, पत्तियों, फूलों और छोटेछोटे फलों के अंदर रह कर नुकसान पहुंचाते हैं. इन के प्रभाव से फल और फूल नहीं लगते. फलों पर प्रभाव होने पर फल गिर जाते हैं. इन के लार्वा सफेद रंग के होते हैं जो पूरी तरह विकसित होने पर जमीन में प्यूपा या कोसा में बदल जाते हैं.

रोकथाम : इस कीट की रोकथाम के लिए गरमियों में गहरी जुताई करें. रासायनिक दवा 0.05 फीसदी फोस्फोमिडान का छिड़काव बौर घटने की स्थिति में करना चाहिए.

आम पर लगने वाले रोग, उन से बचाव के उपाय

सफेद चूर्णी रोग : बौर आने की अवस्था में अगर मौसम बदलने वाला हो या बरसात हो रही हो तो यह बीमारी अकसर लग जाती है. इस बीमारी के प्रभाव से रोगग्रस्त भाग सफेद दिखाई पड़ने लगता है. मंजरियां और फूल सूख कर गिर जाते हैं.

इस रोग के लक्षण दिखाई देते ही आम के पेड़ों पर 5 फीसदी वाले गंधक के घोल का छिड़काव करें. इस के अलावा 500 लिटर पानी में 250 ग्राम कैराथेन घोल कर छिड़काव करने से भी इस बीमारी पर काबू पाया जाता है.

जिन क्षेत्रों में बौर आने के समय मौसम असामान्य रहा हो, वहां हर हाल में सुरक्षात्मक उपाय के आधार पर 0.2 फीसदी वाले गंधक के घोल का छिड़काव करें और जरूरत के मुताबिक दोहराएं.

श्यामवर्ण (एंथ्रेक्नोज) : यह बीमारी ज्यादा नमी वाले इलाकों में अधिक पाई जाती है. इस का हमला पौधों की पत्तियों, शाखाओं और फूलों जैसे मुलायम भागों पर ज्यादा होता है. प्रभावित हिस्सों में गहरे भूरे रंग के धब्बे आ जाते हैं. 0.2 फीसदी जिनकैब का छिड़काव करें. जिन इलाकों में इस रोग की संभावना ज्यादा हो, वहां सुरक्षा के तौर पर पहले से ही घोल का छिड़काव करें.

ब्लैक टिप (कोएलिया रोग) : यह रोग ईंट के भट्ठों के आसपास के क्षेत्रों में उस से निकलने वाली गैस सल्फर डाईऔक्साइड के चलते होता है. इस बीमारी में सब से पहले फल का आगे का हिस्सा काला पड़ने लगता है. इस के बाद ऊपरी हिस्सा पीला पड़ता है. इस के बाद गहरा भूरा और अंत में काला हो जाता है.

यह रोग दशहरी आम में ज्यादा होता है. इस रोग से फसल को बचाने का सब से अच्छा उपाय यह है कि ईंट के भट्ठों की चिमनी आम के पूरे मौसम के दौरान 50 फुट ऊंची रखी जाए.

इस रोग के लक्षण दिखाई देते ही बौरोक्स 10 ग्राम प्रति लिटर पानी की दर से बने घोल का छिड़काव करें. फलों की बढ़वार की विभिन्न अवस्थाओं के दौरान आम के पेड़ों पर 0.6 फीसदी बोरोक्स के 2 छिड़काव फूल आने से पहले करें और तीसरा फूल बनने के बाद. जब फल मटर के दाने के बराबर हो जाए तो 15 दिन में 2 छिड़काव करने चाहिए.

गुच्छा रोग : इस बीमारी का मुख्य लक्षण यह है कि इस में पूरा बौर नपुंसक फूलों का एक ठोस गुच्छा बन जाता है. बीमारी का नियंत्रण प्रभावित बौर और शाखाओं को तोड़ कर किया जा सकता है.

अक्तूबर महीने में 200 प्रति 10 लक्षांश वाले नेप्थालिन एसिटिक एसिड का छिड़काव करें और कलियां आने की अवस्था में जनवरी महीने में पेड़ के बौर तोड़ देना भी फायदेमंद रहता है क्योंकि इस से न केवल आम की उपज बढ़ जाती है बल्कि इस बीमारी के आगे फैलने की संभावना भी कम हो जाती है.

पत्तों का जलना : उत्तर भारत में आम के कुछ बागों में पोटेशियम की कमी और क्लोराइड की अधिकता से भी पत्तों के जलने की गंभीर समस्या पैदा हो जाती है.

इस रोग से ग्रसित पेड़ के पुराने पत्ते दूर से ही जले हुए जैसे दिखाई देते हैं. इस समस्या से फल को बचाने के लिए पौधों पर 5 फीसदी पोटेशियम सल्फेट के छिड़काव की सिफारिश की जाती है.

यह छिड़काव उसी समय करें, जब पौधों पर नई पत्तियां आ रही हों. ऐसे बागों में पोटेशियम क्लोराइड उर्वरक का इस्तेमाल न करने की सलाह भी दी जाती है. 0.1 फीसदी मैलाथियान का छिड़काव भी प्रभावी होता है.

डाईबैक : इस रोग में आम की टहनी ऊपर से नीचे की ओर सूखने लगती है और धीरेधीरे पूरा पेड़ सूख जाता है. यह फफूंदजनित रोग होता है, जिस से तने की जलवाहिनी में भूरापन आ जाता है और वाहिनी सूख जाती है. जल ऊपर नहीं चढ़ पाता है.

रोकथाम के लिए रोग से ग्रसित टहनियों के सूखे भाग को 15 सैंटीमीटर नीचे से काट कर जला दें. कटी जगह पर बोर्डो पेस्ट लगाएं और अक्तूबर माह  में कौपर औक्सीक्लोराइड का0.3 फीसदी घोल का छिड़काव करें.

मनीष प्रजापति, प्रियंका प्रजापति, विनायक पांडेय
उद्यानिकी विभाग, एमडीएस कृषि महाविद्यालय, अंबिकापुर

खेती में डिजिटल टैक्नोलौजी घर बैठे पानी पर नियंत्रण

आज खेतीकिसानी के काम में मोबाइल फोन का खासा इस्तेमाल हो रहा है. चाहे मौसम की जानकारी हो, मंडी का भाव हो, उन्नत बीज की जानकारी हो, खादबीज की जानकारी हो या फिर फसल सुरक्षा जैसी जानकारी लेनी हो, सभी तरह की जानकारी मोबाइल फोन पर मौजूद हैं.

खेती किसानी से जुड़ी तमाम कंपनियों ने किसानों की सुविधा के लिए अनेक तरह के मोबाइल ऐप भी बना रखे हैं. इन का इस्तेमाल कर के किसान कई तरह की जानकारी ले सकते हैं.

कृषि यंत्रीकरण के क्षेत्र में बेहतर फायदा लेने के लिए मोबाइल फोन की खासी भूमिका है. आज किसान घर बैठे मोबाइल फोन के द्वारा अपने नलकूप पर नियंत्रण कर सकता है यानी घर बैठे ही खेत पर लगे पानी के पंप को चला सकता है या बंद कर सकता है.

गांव देहातों में बिजली आनेजाने के हालात बहुत खराब हैं. भरपूर मात्रा में बिजली आती भी नहीं है. जब बिजली आने का किसान को पता चलता है और वह पंप चलाने के लिए अपने खेत तक पहुंचता है तो उस में काफी समय बरबाद हो जाता है या बिजली गुल हो जाती है. किसान का वहां जाना भी बेकार हो जाता है. ऐसी ही वजहों को ले कर किसानों को आधुनिक बनना होगा. उन्हें डिजिटल तकनीक अपनानी होगी तभी वह अधिक फायदा ले सकेंगे.

digital technology for farming and agriculture

आज बाजार में ऐसा डिजिटल यंत्र मौजूद है जिस के इस्तेमाल से घर बैठे ही पानी के पंप पर नियंत्रण किया जा सकता है. कभी भी कहीं भी अपने साधारण मोबाइल फोन से घर की मोटर या खेत में लगी पंप की मोटर को चालू या बंद कर सकते हैं.

यह एक ऐसा रिमोट कंट्रोल सिस्टम है जिस के माध्यम से एसएमएस या काल कर के मोटर की पूरी जानकारी देता है. जैसे बिजली का करंट आना, वोल्टेज, मोटर चलने व बंद होने का समय, बिजली आने व जाने का समय आदि.

इस के अलावा यह सिस्टम खेत पर लगे यंत्र की मोटर को जलने से?भी बचाता है. अगर यंत्र की मोटर में कोई गड़बड़ी होती है तो यह सिस्टम उस की भी जानकारी देता है. जैसे इनपुट सप्लाई में कुछ रुकावट आने पर जैसे बिजली का फेस जाना, कम या ज्यादा वोल्टेज आना, खाली मोटर चलना, मोटर पर अधिक लोड पड़ना आदि.

केविनटैक का रिमोट कंट्रोल

केविनटैक कंपनी के 2 मौडल हैं. पहला मौडल जीएसएम है और दूसरा मौडल जीएसएम-इको है. दोनों की अपनी अपनी खूबियां हैं. जीएसएम इको में कुछ अधिक सुविधाएं हैं. इस में सिंगल फेस, डबल फेस या 3 फेस, सभी प्रकार के स्टार्टर के साथ जोड़ सकते हैं.

ज्यादा जानकारी के लिए आप मोबाइल नंबर 8813021333, 9812275837, 9812204348 पर बात कर सकते हैं.

नैनो गणेश रिमोट कंट्रोल सिस्टम : ओसियन एग्रो कंपनी भी नैनो गणेश के नाम से यह यंत्र उपलब्ध करा रही है. इस यंत्र के माध्यम से भी किसान घर बैठे पानी के पंप को चालू या बंद कर सकते हैं.

संगीत किसी पर थोपा नहीं जा सकता : मोहम्मद वकील

जयपुर घराने के गजल गायक मोहम्मद वकील को संगीत विरासत में मिला है. उनके परदादा और दादा संगीत जगत की मशहूर हस्तियां थीं. उनके पिता ने जरुर संगीत से दूरी बनाकर बतौर टूरिस्ट गाइड काम किया, मगर मोहम्मद वकील ने अपने मामा और मशहूर संगीतज्ञ उस्ताद अहमद हुसैन, उस्ताद मोहम्मद हुसैन के शागिर्द बनकर संगीत जगत में एक अलग पहचान बना ली है.

Mohammed Vakil biography music need soul

मोहम्मद वकील ने 1997 में टीवी के रियालिटी शो ‘‘सारेगामापा’’ का हिस्सा बनकर पूरी दुनिया को अपनी प्रतिभा से परिचित करवाया था. उसके बाद से अब तक उनके ग्यारह गजल अलबम आ चुके हैं. मोहम्मद वकील ने यशराज चोपड़ा की फिल्म ‘‘वीरजारा’’ और टीवी सीरियल ‘‘बिखरी आस निखरी प्रीत ’’ में पार्श्वगायन भी किया था. इन दिनों वह अपने सिंगल गीत ‘‘वजूद’’ को लेकर चर्चा में हैं.

आपने संगीत सीखना कब शुरू किया था?

मैंने बचपन से ही संगीत का माहौल देखा. मेरे डीएनए में संगीत है. मैंने अपने मामा उस्ताद अहमद हुसैन को बचपन से अपने शागिर्दों को संगीत सिखाते देखा. वह मेरे गुरू व सगे मामा हैं. उनकी बेटी से ही मेरी शादी हुई है. मैंने उन्हीं से संगीत सीखा.

फिर मेरी जिंदगी में ‘सारेगामापा’ आ गया. उसके बाद एमपी साल्वे साहब ने जनवरी 2001 मुझे जयपुर में सुनने के बाद अपने बंगले में मुझे लता मंगेशकर जी के सामने गवाया. मैंने जब लता जी का चरण स्पर्श किया, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने मुझे सारेगामा में सुना था और उन्होंने मेरे गायन की तारीफ की. यह मेरे लिए बहुत बड़ा अवार्ड था. मेरे परिवार में मेरे अलावा दो भाई भी गजल गाते हैं. हमारे यहां औरतों के गायन पर प्रतिबंध है. मेरे बेटे गाते हैं.

अपनी अब तक की संगीत यात्रा को आप किस तरह से देखते हैं?

मैं अपने आपको भाग्यशाली मानता हूं कि 1998 में मैं टीवी के रियालिटी शो ‘सारेगामापा’ का विजेता बना, जिसके जज थे पंडित जसराज, खय्याम, हरि प्रसाद चौरसिया, नौशाद, कल्याण जी आनंद जी और जगजीत सिंह. इसके अलावा मैंने यश चोपड़ा की फिल्म ‘‘वीर जारा’’ में उस्ताद के साथ एक कव्वाली ‘आया तरे दर पे दीवाना..’ गाया था.

अब तक दस अलबम बाजार में आ चुके हैं. अब मेरा सिंगल गाना ‘वजूद’ जी म्यूजिक पर आया है. सबसे पहले ‘जी म्यूजिक’ ने 1998 में एक अलबम ‘सारेगामापा फाइनलिस्ट’ रिलीज किया था. उसके बाद ‘मैग्ना साउंड’ ने ‘कसक’ सहित दो अलबम रिलीज किए. फिर टाइम्स म्यूजिक कंपनी से दो अलबम ‘गुजारिश’ और ‘मौला का दरबार’ आए. उसके बाद ‘फलसफ़ा’ अलबम आया. उसके बाद ‘पहली नजर’ और ‘तेरा ख्याल’ अलबम आए. खय्याम साहब के लिए प्ले बैक किया है. एक टीवी सीरियल ‘बिखरी आस निखरी प्रीत’ मेंं मैंने व अलका याज्ञनिक ने मिलकर गाया था. मैं फिल्मों में भी गाना चाहता हूंं अब जी म्यूजिक पर सिंगल गाना ‘वजूद’ आया है.

इस सिंगल गाने का नाम ‘‘वजूद’’ क्यों?

इस अलबम का नाम मैंने ‘वजूद’ इसलिए रखा, क्योंकि मेरी सोच यह कहती है कि हर इंसान का वजूद उसके माता पिता से और खासकर पिता से बनता है.

सिंगल गाने ‘वजूद’ पर विस्तार से बताएंगे?

यह गीत विश्व के सभी पिताओं को समर्पित है. हर पिता अपनी औलाद को बेहतरीन परवरिश देने की कोशिश करता है. लोग हमेशा मां के गुणगान गाते हैं. मेरी राय में हर इंसान की जिंदगी में उसकी मां का योगदान बहुत बड़ा होता है. पर पिता के योगदान को नकारा नहीं जा सकता. एक बच्चे को बड़ा करने में पिता जो तकलीफें होती हैं, जो कुर्बानी होती हैं, उन्हें कमतर नहीं आंका जाना चाहिए. एक बच्चे की परवरिश में उसके पिता का दर्द मिला होता है. इसलिए मैंने अपने इस गाने को संसार के सभी पिताओं को समर्पित किया है. जिससे उनका दर्द उनकी पीड़ा लोगों के सामने आ सके, इस गाने में सभी पिताओं का दर्द उनकी पीड़ा शामिल है. इसे शकील आजमी ने लिखा है.

आपकी जिंदगी में आपके पिता की क्या भूमिका रही?

हमारे पिता ने हमें बहुत मुश्किल से पाला है. उन्होंने हमारे लिए जो तकलीफ उठाईं, उसे मैं कभी भुला नहीं सकता. उनकी तकलीफों को ही मैंने इस गीत में पिरोया है. मेरे पिता जयपुर में टूरिस्ट गाइड थे. लेकिन मेरे दादा, परदादा वगैरह गायक थे. हमें याद है कि कई बार हमारे पास पहनने के लिए कपड़े नहीं हुआ करते थे, तब मेरे पिता किस तरह से इंतजाम करते थे.

आपके दादाजी गायक थे. पर आपके पिता ने संगीत नहीं चुना. तो फिर आपने संगीत क्षेत्र क्यों चुना?

हमारे यहां छह पीढ़ियों से संगीत चला आ रहा है. पर संगीत किसी के ऊपर थोपा नहीं जा सकता. मेरे पिता ने संगीत को नही अपनाया. पर मैंने बचपन से अपना लिया था. मुझे लगता है कि मेरे परिवार में जिस तरह से लोग संगीत से जुडे़ हुए थे, उसके चलते मैं कुदरती तौर पर संगीत से जुड़ा. सात वर्ष की उम्र में मैंने बतौर बाल कलाकार गाया था और मुझे संगीतकार जयदेव के हाथों अवार्ड मिला था.

बचपन में तो मैं संगीत सुने बिना और बिना रियाज किए सो नहीं सकता था. मुझे दीवानगी की हद तक संगीत से प्यार है. मेरे पिता ने भले ही संगीत को करियर नहीं बनाया, पर वह शौकिया गाते थे. और मुझे भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

जब आप किसी गजल को गाने के लिए चुनते हैं, तो किस तरह की चीजों पर ध्यान देते हैं?

मैं सबसे पहले गजल के शब्दों पर गौर करता हूं. फिर उसके अर्थ क्या हैं? वह समझता हूं. फिर यह सोचता हूं कि लोगों तक यह गजल क्यों पहुंचनी चाहिए. उसके बाद उसकी ग्रामर पर भी ध्यान देता हूं. देखिए, हर गजल में कुछ न कुछ संदेश जरूर होना चाहिए. दूसरी बात मुशायरे में जो हम गाते हैं, वह अलग होता है.

पर अलबम के लिए या सिंगल गाने के लिए जो गाते हैं, वह अलग होता है. इसके अलावा उसकी धुन अच्छी बननी चाहिए. फिर उसका वीडियो वगैरह भी अच्छा बनना चाहिए.

शायरी या गजल को समझना आसान नहीं होता है, यह आपके अंदर कहां से आया?

यह सब हमारे उस्ताद द्वारा हमें दी गयी शिक्षा का परिणाम है. हमारे उस्ताद ने बताया कि शायरी क्या होती है? गजल क्या होती है? मोमिन का एक शेर है, जिसके लिए मिर्जा गालिब ने कहा था – ‘मेरा पूरा दीवान ले ले, पर मुझे यह शेर दे दे.’ मेरा शायरों के साथ उठना बैठना बहुत रहा है. ‘चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है..’ अब इसमें कहां पर हमें शब्दों को तोड़ना है, यह भी हमें सिखाया गया.

अहमद फरहाज की गजल है – ‘अबकी हम बिछड़े तो,शायद कभी ख्वाबों में मिलें.’’
शायरों ने मुझे लफ्जों को तोड़ना सिखाया. शायरों के साथ यदि आप समय बितायें तो आपकी जिंदगी बन सकती है. हसरत जयपुरी और मेरे नाना जी बहुत अच्छे दोस्त थे. तो मुझे हसरत जयपुरी के साथ भी उठने बैठने और बहुत कुछ सीखने का मौका मिला. हसरत जयपुरी से तो मेरे उस्ताद साहब ने भी बहुत कुछ सीखा था. और मैंने भी सीखा.

किस शायर ने आपको प्रभावित किया?

बशीर बद्र बहुत पसंद हैं और वसीम बरेली. एक गजल है – ‘‘कहां सवार कहां आजाद होता है, मोहब्बतों में कब इतना हिसाब होता है, बिछुड़ कर मुझसे तुम अपनी कशिश मत खो देना, उदास रहने से चेहरा खराब होता है.’’ यह मुझे बहुत पसंद है.

‘यह दिल में कसक रह गयी’ मैंने वसीम बरेली की गजलों को बहुत गाया है.

संगीत नाटक अकादमी क्या करती है?

राजस्थान संगीत अकादमी ने मुझे अवार्ड दिया है. लेकिन इस संस्था से किसी भी कलाकार को फायदा नही होता है. इस संस्था से जुड़े लोग सिर्फ बातें करते हैं. इनका कर्तव्य बनता है कि प्रतिभाशाली कलाकारों को प्रमोट करें, पर ऐसा नहीं होता है. मुझे आकाशवाणी और दूरदर्शन से सहारा मिला.

सिनेमा से गजल गायब हो गयी है?

जी हां!!यह बहुत दुःख की बात है. पर कुछ समय से कव्वाली पुनः फिल्मों में आ रही है. जरुरत है कि कव्वाली के साथ साथ गजल को भी पुनः फिल्मों में लाया जाए.

आप टीवी के रियालिटी शो ‘‘सारेगामापा’’ का हिस्सा रहे हैं. क्या टीवी के रियालिटी शो से फायदा होता है?

जिनमें टैलेट है, उन्हें फायदा होता है. जो सिर्फ रो धोकर अपने परिवार की कमियों का बखान कर जनता का वोट बटोरते हैं, उनको फायदा नहीं होता. मेरी राय में टीवी के रियालिटी शो में पब्लिक वोट के आधार पर विजेता नहीं चुना जाना चाहिए. बल्कि यह अधिकार जजों को मिलना चाहिए. जो लोग सीखकर आते हैं, उनका तो इससे फायदा हो जाता है. क्योंकि उनके पास सबक व इल्म होता है. जो बिना सीखे आता है, वह लंबी उड़ान नहीं भर सकता. अफसोस की बात यह है कि लोग हमदर्दी के वोट बटोर कर जीत जाते हैं.

परिवार की एकता की कोशिश कर गये मुलायम

बड़ा नेता क्यों बड़ा माना जाता है, भाई शिवपाल यादव की नई पार्टी की पहली रैली में पहुंचकर मुलायम सिंह यादव ने दिखा दिया. लखनऊ के रमाबाई स्टेडियम में शिवपाल यादव की नई पार्टी ‘प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया’ की पहली रैली थी. रैली में भीड़ जुटाने के लिये शिवपाल यादव और उनके पार्टी के लोगों ने अथक प्रयास किया. भीड़ के जरीये अपनी ताकत का अहसास भर कराना था. रैली में मुलायम सिंह यादव के पहुंचने की संभावना नाममात्र भी नहीं थी. इसके बाद मुलायम सिंह यादव और उनकी छोटी बहू अपर्णा यादव रैली में पहुंचे और अपनी बात कही. मुलायम सिंह यादव इस रैली में पहुंच कर समाजवादी परिवार को एकजुट करने के प्रयास में दिखे.

‘प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया’ यानि पीएसपी लोहिया के प्रमुख शिवपाल यादव ने कहा कि ‘मैं कोई पद नहीं चाहता था. मैं केवल अपना और नेताजी का सम्मान चाहता था. मैंने नई पार्टी बनाने का फैसला चापलूसों की वजह से किया.’ शिवपाल के भाषण में समाजवादी पार्टी में उपेक्षा का दर्द झलक रहा था. मुलायम सिंह यादव ने रैली में पहुंच कर शिवपाल यादव का हौसला बढ़ाया और आर्शीवाद दिया. मुलायम अपने भाषण में बारबार समाजवादी पार्टी को मजबूत बनाने की बात करते रहे. जो शिवपाल यादव के समर्थक नेताओं को नागवार गुजर रही थी. मुलायम के भाषण के दौरान भी कुछ हूटिंग हुई. इसके बाद भी मुलायम ने बिना किसी प्रतिक्रिया के अपना भाषण पूरा किया. शिवपाल को आर्शीवाद दिया.

मुलायम सिंह यादव जानते हैं कि परिवार में बिखराव का कोई लाभ नहीं होगा. वह यह मानते हैं कि देर सबेर यह परिवार फिर से एकजुट होगा. इस वजह से वह भाई शिवपाल और पुत्र अखिलेश यादव के बीच आतेजाते रहते हैं. मुलायम के विरोधी शिवपाल को भी उकसाते हैं और अखिलेश को भी. इसके बाद भी मुलायम परिवार में एकता के पक्षधर बने हुये हैं.

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पीएसपी लोहिया की रैली में शिवपाल के बेटे आदित्य यादव युवा नेताओं के बीच आकर्षण का केन्द्र बने रहे. शिवपाल यादव ने भाजपा की केन्द्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला. शिवपाल यादव ने सपा के पंरपरागत वोट बैंक मुसलिम और यादव को निशाने पर रखा. अपर्णा यादव ने चाचा शिवपाल यादव का साथ देकर यह जता दिया कि समाजवादी पार्टी से वह किनारा कर रही हैं.

पीएसपी लोहिया के मुख्य प्रवक्ता सीपी राय ने रैली के सफल आयोजन और उसका सही संदेश लोगों तक जाये, इसका बखूबी इंतजाम किया था. राजधनी लखनऊ में जिस तरह से रैली का प्रचार प्रसार हुआ, उसमें नये प्रोफेशनल जुड़े, उससे पार्टी का अलग चेहरा उभर कर सामने आ रहा है. अधिवक्ता और पार्टी प्रवक्ता अभय कुमार सिंह और इंटरनेशनल शूटर विनोद मिश्र ने राजधनी लखनऊ में पार्टी को नई पहचान देने का काम किया. कारोबारी नेता अजय त्रिपाठी मुन्ना और महिला नेता ममता सिंह और अभिनव सिंह ने तमाम नये लोगों को जोड़ कर पार्टी को शहरी वर्ग से जोड़ने का काम किया. पार्टी की रैली में शहरी मध्यम वर्ग की संख्या अधिक दिख रही थी.

मौज मजे की ममता : गजेंद्र और ममता ने मिल कर कैसी साजिश रची

4 अप्रैल, 2018 की बात है. मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के मुरार थाना क्षेत्र में कर्फ्यू लगा होने की वजह से चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ था. कर्फ्यू की वजह यह थी कि 2 अप्रैल को एससी/एसटी एक्ट के संशोधन के विरोध में दलित आंदोलन के दौरान 2 लोगों की मौत हो गई थी. हालात बिगड़ने पर प्रशासन ने इलाके में कर्फ्यू लगा रखा था.

इसी दौरान घटी एक अन्य घटना ने माहौल में अचानक ही गरमाहट पैदा कर दी. घटना भी ऐसी कि पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. खबर यह फैली कि बुधवार की सुबह भारत बंद के दौरान उपद्रव करने वाले लोगों ने तिकोनिया इलाके में एक युवक की हत्या और कर दी है. मरने वाला युवक तिकोनिया पार्क का उमेश कुशवाह है.

यह खबर जंगल की आग की तरह इतनी तेजी से फैली कि थोड़ी ही देर में मृतक उमेश कुशवाह के घर के बाहर भीड़ लग गई. भीड़ में राजनैतिक दलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं से ले कर सामाजिक संगठनों के लोग भी शामिल थे. सभी में इस घटना को ले कर काफी आक्रोश था. लोग हत्यारों के तत्काल पकड़े जाने की मांग कर होहल्ला मचा रहे थे.

सूचना मिलने पर घटनास्थल पर पहुंचे सीएसपी रत्नेश तोमर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए विभाग के आला अधिकारियों को अवगत करा दिया. संवेदनशील इलाके में हत्या की एक और घटना घटने की सूचना पर आईजी अंशुमान यादव, डीआईजी मनोहर वर्मा, एसपी डा. आशीष भी मौका ए वारदात पर जल्द पहुंच गए.

भीड़ ने उन सभी पुलिस अधिकारियों को घेर लिया. इस से तिकोनिया इलाके का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया. ऐसी हालत में किसी भी अनहोनी से बचने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स को भी बुला लिया.

पुलिस अधिकारियों ने वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिया कि इस केस का जल्द परदाफाश कर के हत्यारों को गिरफ्तार कर लेंगे. उन के आश्वासन के बाद भीड़ किसी तरह शांत हुई. इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने मौका ए वारदात का अवलोकन किया.

पुलिस जानती थी कि अफवाहें चिंगारी बन कर आग लगाने का काम करती हैं और उन्हें रोकना कठिन होता है. वे इतनी तेजी से फैलती हैं कि माहौल बहुत जल्द बिगड़ जाता है, इसलिए पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर सख्त कदम उठाते हुए इंटरनेट प्रसारण पर रोक लगा दी.

पुलिस अफसरों के रवाना होते ही डौग स्क्वायड और फोरैंसिक एक्सपर्ट्स की टीमें भी घटनास्थल पर पहुंच गईं. सीएसपी रत्नेश तोमर और थानाप्रभारी अजय पवार ने घटनास्थल का मुआयना किया तो देखा कि खून से लथपथ उमेश कुशवाह की लाश मकान के बाहरी हिस्से में बने कमरे में फर्श पर पड़ी थी.

देख कर लग रहा था, जैसे किसी धारदार चीज से उस के सिर पर प्रहार किया गया था. उस का सिर फटा हुआ था. मौके पर इधरउधर खून फैला हुआ था. लाश बिस्तर पर नहीं थी, इस से लगता था कि मरने से पहले उमेश ने शायद हत्यारे से संघर्ष किया होगा. जिस कमरे में उमेश कुशवाह की लाश पड़ी थी, वहीं पर उस का मोबाइल फोन भी पड़ा हुआ था.

घटनास्थल से सारे सबूत इकट्ठे करने के बाद पुलिस ने अलगअलग कोणों से लाश की फोटोग्राफी कराई. घटनास्थल से कुछ दूरी पर पुलिस टीम को एक हंसिया पड़ा मिला. उस हंसिए पर खून लगा हुआ था. इस से पुलिस को आशंका हुई कि हो न हो इस हंसिया से ही हत्यारों ने इस वारदात को अंजाम दिया हो. फोरैंसिक टीम ने हंसिए से फिंगरप्रिंट उठा लिए. फिर जरूरी काररवाई कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

पुलिस ने वहां मौजूद उमेश की पत्नी ममता से प्रारंभिक पूछताछ की तो उस ने बताया, ‘‘मेरे पति सूरत में नौकरी करते हैं. वह 30 मार्च को ही सूरत से लौट कर घर आए थे. शहर में 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान उपद्रव हो जाने के बाद समूचे मुरार क्षेत्र में कर्फ्यू और धारा 144 लग जाने की वजह से वह सूरत नहीं लौट सके.

‘‘रोजाना की तरह वह खाना खा कर अपने कमरे में सो रहे थे. आज तड़के 4 बजे के करीब मैं बाथरूम गई. जब वहां से लौट कर आई तो पति को खून से लथपथ फर्श पर पड़ा देख कर भौचक्की रह गई. मैं रोती हुई अपने फुफेरे देवर गजेंद्र के पास गई और उसे जगा कर यह बात बताई. मेरी बात सुन कर गजेंद्र तुरंत मेरे घर आया. लाश देख कर वह समझ नहीं सका कि यह सब कैसे हो गया. इस के बाद मैं ने साहस बटोर कर मोबाइल से अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों को जानकारी दे दी. पड़ोसी महेश ने इस की सूचना पुलिस को दी.’’

पुलिस ने ममता से कमरे में उमेश के अकेले सोने की वजह मालूम की तो उस ने बताया कि हमारे दोनों बेटे 2 दिन पहले सिकंदर कंपू स्थित अपने मामा के घर एक कार्यक्रम में गए थे. वे रात को लौटने वाले थे, इसलिए वह दरवाजा खुला छोड़ कर सो रहे थे. उमेश के चीखने की आवाज न तो ममता ने सुनी थी और न ही गजेंद्र ने.

पुलिस अधिकारियों ने क्राइम सीन को पुन: समझा. जांच में 3 बातें स्पष्ट हुईं, एक तो यह कि सिर पर किसी धारदार चीज से प्रहार किया गया था. दूसरा यह कि मामला साफतौर पर हत्या का था न कि लूटपाट में हुई हत्या का.

तीसरी बात यह थी कि वारदात में किसी ऐसे नजदीकी व्यक्ति का हाथ होने की संभावना लग रही थी, जो घर की स्थिति को भलीभांति जानता था. वह व्यक्ति यह भी जानता था कि उमेश के दोनों बेटे आज घर पर नहीं हैं. घर पर सिर्फ पत्नी ममता ही है.

बहरहाल, कातिल जो भी था उस ने गुनाह को छिपाने की हरसंभव कोशिश की थी. पुलिस ने पड़ताल के दौरान जो हंसिया बरामद किया था, ममता ने उसे पहचानने से इनकार कर दिया. घटनास्थल की जांच के बाद एसपी डा. आशीष ने इस मामले के खुलासे के लिए सीएसपी रत्नेश तोमर के नेतृत्व में एक टीम का गठन कर दिया. टीम का निर्देशन एसपी साहब स्वयं कर रहे थे.

अगले दिन पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह सिर पर धारदार चीज का प्रहार बताया गया था. जबकि मौत का समय रात 1 बजे से 3 बजे के बीच बताया गया, इसलिए पुलिस ने तिकोनिया इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की रात 12 बजे से ले कर 3 बजे तक की फुटेज देखी. लेकिन इस से इस घटना का कोई सुराग नहीं मिला.

इलाके में कर्फ्यू लगा होने की वजह से फुटेज में पुलिस के अलावा कोई भी शख्स आताजाता दिखाई नहीं दिया. पुलिस ने ममता से उमेश की हत्या के बारे में पूछताछ की तो वह पुलिस पर हावी होते हुए बोली, ‘‘साहब, मेरे ही पति की हत्या हुई और आप मुझ से ही इस तरह पूछ रहे हैं जैसे मैं ने ही उन्हें मारा हो. जिस ने उन्हें मारा उसे तो आप पकड़ नहीं पा रहे. आप ही बताइए, भला मैं अपने पति को क्यों मारूंगी. आप मुझे ज्यादा परेशान करेंगे तो मैं एसपी साहब से आप की शिकायत कर दूंगी.’’

‘‘देखो ममता, तुम जिस से चाहो मेरी शिकायत कर देना. मुझे तो इस केस की जांच करनी है.’’ सीएसपी रत्नेश तोमर ने कहा, ‘‘अब तुम यह बताओ कि तुम्हारी गजेंद्र से मोबाइल पर इतनी बातें क्यों होती हैं, इस से तुम्हारा क्या नाता है?’’

‘‘साहब, गजेंद्र मेरा फुफेरा देवर है. मैं जिस किराए के मकान में रहती हूं, उसी मकान में वह भी रहता है. अगर मैं गजेंद्र से बात कर लेती हूं तो कोई गुनाह करती हूं क्या?’’ ममता बोली.

‘‘तुम्हारा गजेंद्र से बात करना कोई गुनाह नहीं है. लेकिन तुम्हें यह तो बताना ही पड़ेगा कि पति की हत्या से पहले और बाद में उस से क्या बातें हुई थीं?’’

हत्या का सच जानने के लिए पुलिस को काफी प्रयास करने पड़े. ऐसा होता भी क्यों न, चालाक ममता और गजेंद्र सीएसपी रत्नेश तोमर को गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे. सीएसपी ने ममता से कहा, ‘‘ममता, तुम झूठ मत बोलो. तुम ने ही अपने प्रेमी के साथ मिल कर प्रेम प्रसंग में रोड़ा बन रहे पति को रास्ते से हटाने का षडयंत्र रचा था.’’

इतना सुनते ही ममता के चेहरे का रंग उड़ गया, वह खुद को संभालते हुए बोली, ‘‘नहीं, मेरी गजेंद्र से कोई बात नहीं हुई थी. किसी ने आप को गलत जानकारी दी है.’’

‘‘ममता, हमें गलत जानकारी नहीं दी. यह देखो तुम ने कबकब और कितनी देर तक गजेंद्र से बातें की थीं. इस कागज में पूरी डिटेल्स है.’’ सीएसपी ने काल डिटेल्स उस के हाथ में थमाते हुए कहा.

ममता अब झूठ नहीं बोल सकती थी, क्योंकि काल डिटेल्स का कड़वा सच उस के हाथ में था. ममता की चुप्पी से सीएसपी तोमर समझ गए कि उन की पड़ताल सही दिशा में जा रही है. इस के बाद उन्होंने उस से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की तो उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और पति की हत्या की पूरी कहानी सुना दी.

उमेश कुशवाह मूलरूप से बिजौली के रशीदपुर गांव का रहने वाला था. 15 साल पहले रोजीरोटी की तलाश में वह गांव छोड़ कर सूरत चला गया था. उमेश जवान हुआ तो उस के बड़े भाई मान सिंह ने सिकंदर कंपू इलाके की रहने वाली ममता से शादी कर दी.

शादी के कुछ साल बाद ही ममता 2 बच्चों की मां बन गई. बच्चे पढ़ने लायक हुए तो उमेश ने दोनों बच्चों को ग्वालियर शिफ्ट कर दिया. यहां वह मुरार के तिकोनिया इलाके में किराए का मकान ले कर रहने लगे. इसी मकान के दूसरे कमरे में उमेश का फुफेरा भाई गजेंद्र भी रहता था.

कहते हैं कि जहां चाह होती है, वहां राह निकल ही आती है. ममता के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ. बच्चों का हालचाल पूछने के बहाने गजेंद्र ममता के पास आने लगा. ममता बच्ची नहीं थी, वह गजेंद्र के मन की बात को अच्छी तरह से समझ रही थी. गजेंद्र को अपनी ओर आकर्षित होते देख वह भी उस की ओर खिंचती चली गई.

दोनों के दिलों में प्यार का अंकुर फूटा तो जल्द ही वह समय आ गया, जब दोनों का एकदूसरे के बिना रहना मुश्किल हो गया. धीरेधीरे स्थिति यह हो गई कि ममता को उमेश की बांहों की अपेक्षा गजेंद्र की बांहें ज्यादा अच्छी लगने लगीं. जो सुख उसे गजेंद्र की बांहों में मिलता था, वह उमेश की बांहों में नहीं था. यही वजह थी कि उन दोनों को लगने लगा था कि अब वे एकदूसरे के बिना नहीं रह सकते.

ममता ने तो कुछ नहीं कहा, लेकिन एक दिन गजेंद्र ने कहा, ‘‘ममता, अब मैं तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं रह सकता. मैं तुम से शादी करना चाहता हूं.’’

इस पर ममता ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं हो सकता गजेंद्र, मैं शादीशुदा ही नहीं 2 बच्चों की मां हूं.’’

‘‘मुझे इस से कोई मतलब नहीं है. मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं.’’

गजेंद्र बोला, ‘‘तुम्हारे लिए मुझे यदि उमेश की हत्या भी करनी पड़े तो मैं कर दूंगा.’’

‘‘तुम ऐसा कुछ भी नहीं करोगे.’’ ममता ने कहा, ‘‘उमेश, मुझ से और बच्चों से बहुत प्यार करता है. हम दोनों को जो चाहिए, वह मिल ही रहा है फिर हम कोई गलत काम क्यों करें.’’ ममता ने गजेंद्र को समझाया.

लेकिन ममता के समझाने का उस पर कोई असर नहीं हुआ, क्योंकि वह ममता को हमेशा के लिए पाना चाहता था. गजेंद्र ने ममता पर ज्यादा दबाव डाला तो वह परेशान हो कर बोली, ‘‘तुम्हें जो करना है करो. इस मामले में मैं कुछ नहीं जानती.’’

ममता के प्यार में पागल गजेंद्र ने ममता की इस बात को सहमति मान कर उमेश की हत्या करने की योजना बना डाली और हत्या करने के लिए मौके की ताक में रहने लगा. फिर योजना में ममता को भी शामिल कर लिया.

4 अप्रैल, 2018 को उसे वह मौका तब मिल गया, जब उसे पता चला कि उमेश के दोनों बेटे मामा के घर से नहीं लौट पाए हैं. घर पर सिर्फ ममता और उमेश ही हैं. ममता ने बातोंबातों में फोन पर गजेंद्र को बता दिया कि उमेश खाना खाने के बाद गहरी नींद में सो गया है.

इस पर गजेंद्र उमेश को ठिकाने लगाने के इरादे से उमेश के कमरे पर पहुंच गया. उस ने ममता के साथ बैठ कर योजना बनाई कि तुम सब से पहले मौका देख कर उमेश के सिर पर हंसिए का वार करना. ममता ने ऐसा ही किया. इस के बाद गजेंद्र ने ममता के हाथ से हंसिया ले कर उमेश के सिर को बड़ी बेरहमी से वार कर के फाड़ दिया. थोड़ी देर छटपटाने के बाद उमेश शांत हो गया.

इश्क की राह में बने रोड़े को मौत के घाट उतारने के बाद घर आ कर गजेंद्र ने इत्मीनान के साथ हाथपैर धोए और फिर कपड़े बदल कर सो गया. ममता और गजेंद्र को उम्मीद थी कि उमेश की हत्या पहेली बन कर रह जाएगी और वे कभी नहीं पकड़े जाएंगे.

उधर सुबह घटनास्थल पर पुलिस के आने के बाद ममता और गजेंद्र पूरी तरह से अंजान बने रहने का नाटक करते रहे. पुलिस के सवालों का भी उन दोनों ने बड़ी चालाकी के साथ सामना किया. इन दोनों ने अपने जुर्म को छिपाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने आखिरकार सच उगलवा ही लिया.

ममता और गजेंद्र ने जब अपना गुनाह स्वीकार कर लिया तो पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर के अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया.

पास्ता गार्डन ग्रीन : स्वाद जो हमेशा रहेगा याद

सामग्री

– 10 ग्राम प्याज बारीक कटा

– 10 ग्राम लहसुन बारीक कटा

– 100 ग्राम पेन्ने पास्ता

– 200 एमएल टोमैटो सौस

– 100 एमएल व्हाइट सौस

– 20 ग्राम ग्रीन जुकीनी

– 20 ग्राम यलो जुकीनी

– 20 ग्राम मशरूम

– 20 ग्राम ब्रोक्ली

– थोड़ी सी धनियापत्ती कटी

– थोड़ी सी पार्सले

– 10 ग्राम परमेसन चीज

– थोड़ी सी कालीमिर्च

– 20 एमएल औलिव औयल

– 4 तुलसी की पत्तियां

– 100 एमएल क्रीम

– नमक स्वादानुसार.

विधि

– प्याज, लहसुन और बाकी सब्जियों को बारीक टुकड़ों में काट लें.

– पास्ता उबालने के लिए रखें. अब एक पैन में तेल गरम कर लहसुन और प्याज को सुनहरा होने तक भूनें. फिर आंच धीमी कर इस में रैड और व्हाइट सौस के साथसाथ सब्जियां भी डाल कर अच्छी तरह पकाएं.

– पकने पर इस में पास्ता, तुलसी की पत्तियां और क्रीम डाल कर अच्छी तरह मिक्स कर आंच बंद कर दें.

– परमेसन चीज और धनियापत्ती से सजा कर गरमगरम सर्व करें.

व्यंजन सहयोग: शैफ आनंद

जब अपर लिप्स पर दिखने लगें हरे बाल, तो करें यह काम

होठों के ऊपर मौजूद बाल जिसे आमतौर पर अपर लिप हेयर कहते हैं, किसी भी लड़की के लिए काफी शर्मिंदगी भरे होते हैं. इससे आपकी पर्सनालिटी पर भी असर पड़ता है. और तो और इससे बचने के लिए हर महीने पार्लर के चक्कर लगाने के साथ-साथ इसे हटाते समय काफी दर्द भी झेलना पड़ता है.

लेकिन अब आप इसे आसानी से घर पर हटा सकती हैं और वो भी बिना किसी दर्द के. बस अपनाएं ये कुछ घरेलू तरीके और अपर लिप्स के बालों को मुस्कुराते हुए करें खत्म. लेकिन हां, इसके लिए थोड़े सब्र की जरूरत है क्योंकि इन्हें कुछ हफ्तों तक लगातार करने पर ही आपको रिजल्ट मिलेगा.

दही और चावल का आटा

एक कटोरी में 1 बड़ा चम्मच दही और 1 बड़ा चम्मच चावल का आटा मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें. इसे अपने अपर लिप्स पर लगाएं और जब ये सूख जाए तो रगड़कर इसे हटा लें. एक कटोरी में 1 बड़ा चम्मच दही में 1 बड़ा चम्मच चावल का आटा मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें. इसे अपने अपर लिप्स पर लगाएं और जब ये सूख जाए तो रगड़कर इसे हटा लें.

चीनी और नींबू

किचेन में आसानी से मिलने वाले इन दो इंग्रीडिएंट्स की मदद से आप अपर लिप्स के बालों से झटपट छुटकारा पा सकती हैं. जहां चीनी एक स्क्रब की तरह काम करता है वहीं, नींबू एक ब्लीचिंग एजेंट होता है. एक कोटरी में दो नींबू का रस और चीनी अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट तैयार कर लें. इसे अब अपने अपर लिप्स पर लगाएं और 10-15 मिनट बाद रगड़कर हटा लें और फिर पानी से धो लें.

अंडा, बेसन और चीनी

एक कटोरी में 1 बड़ा चम्मच बेसन, थोड़ी चीनी और अंडे का सफेद हिस्सा तब तक मिलाएं जब तक एक चिपचिपा सा पेस्ट तैयार ना हो जाए. इसे अपर लिप्स पर लगाएं. जब ये सूख जाए तो ऊपर के डायरेक्शन में रगड़ते हुए हटा लें. बेहतर रिजल्ट के लिए ऐसा हफ्ते में दो बार करें.

दूध और हल्दी

फेशियल हेयर के ग्रोथ को कम करने में हल्दी काफी असरदार होती है. 1 बड़ा चम्मच दूध और 1 बड़ा चम्मच हल्दी मिलाकर पेस्ट तैयार करें और अपर लिप्स पर लगाएं. जब ये सूख जाए तो हल्के हाथों से रगड़ते हुए इसे हटा लें.

दही, हल्दी और बेसन

एक कटोरी में समान मात्रा में दही, हल्दी और बेसन मिलाकर मोटा पेस्ट तैयार करें. इसे अपने अपर लिप्स पर लगाएं और 15-20 मिनट बाद हल्के हाथ से रगड़कर हटा लें और फिर पानी से इसे धो लें.

नींबू और शहद

एक कटोरी में 1 बड़ा चम्मच शहद और 2 बड़े चम्मच नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बनाएं और अपर लिप्स पर लगाएं. जब ये सूख जाए तो रगड़कर हटा लें और फिर इसे पानी से धो लें. ऐसा लगातार चार दिन तक हर रोज़ करें. धीरे-धीरे अपर लिप्स के बाल कम हो जाएंगे.

पड़ोसन की काली नजर : कैसे बरबाद हुई माला और शिवम की जिंदगी

धर्मग्रंथों के आधार पर यह माना जाता है कि लंकापति रावण का जन्म गौतमबुद्ध नगर के बिसरख गांव में हुआ था. यहीं पर रावण ने शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर आराधना की थी. इस कहानी को सुना कर बिसरख गांव के लोगों को न तो दशहरे का त्यौहार मनाने दिया जाता है न ही रावण दहन करने दिया जाता है. रावण से जुड़ी इसी कपोल गाथा के कारण बिसरख के बारे में देश और दुनिया बहुत कुछ जानती है.

बिसरख इलाके में एक गांव हैबतपुर है. इसी गांव में शिवम (26) अपनी पत्नी माला (24) के साथ किराए के मकान में रहता था. माला ने जहां एमकौम की पढ़ाई की थी, वहीं शिवम ने एमबीए किया था. सन 2016 में शिवम और माला की जानपहचान फेसबुक के माध्यम से हुई थी.

बाद में दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई. दोनों एक ही बिरादरी के थे, लिहाजा नवंबर 2017 में दोनों ने परिजनों की सहमति से विवाह कर लिया. शादी के कुछ समय बाद शिवम ने नोएडा के एक मौल में सेल्स एग्जीक्यूटिव की नौकरी कर ली.

हालांकि शादी से पहले माला भी जौब करती थी लेकिन बाद में जब वह गर्भवती हुई तो उस ने नौकरी छोड़ दी थी. इन दिनों वह 5 माह के गर्भ से थी. ऐसे में उस ने घर से दूर जा कर नौकरी करनी जरूरी नहीं समझी. वह घर में ही बच्चों की कोचिंग के साथ पास के एक प्राइवेट स्कूल में टीचिंग जौब भी करने लगी थी.

अगर माला के पास समय बचता था तो वह क्रिश्चियन बागू कालोनी में रहने वाले अपने मातापिता के पास चली जाती थी.

माला रामअवतार और मालती देवी की 4 संतानों में सब से छोटी थी. उस की 2 बड़ी बहनें और एक भाई है.सब की शादी हो चुकी है और सभी गाजियाबाद के आसपास ही रहते हैं. शिवम के परिवार में भी उस के मातापिता के अलावा 3 भाई और एक बहन है. वे भी गाजियाबाद में ही रहते हैं.

7 अप्रैल, 2018 को शिवम रोज की तरह ड्यूटी के लिए सुबह साढ़े 10 बजे हैबतपुर स्थित घर से मोटरसाइकिल से निकला. वह अकसर रात को 9 बजे तक औफिस से घर लौटता था. शिवम का नियम था कि वह दोपहर को 2 बजे लंच टाइम में माला को फोन कर के उस की खैरियत पूछ लेता था और उस के खानपान व दवा आदि लेने की याद दिला देता था.

लेकिन उस दिन जब शिवम ने माला को फोन किया तो उस के दोनों मोबाइल फोन स्विच्ड औफ मिले. शिवम ने सोचा कि माला खाना खा कर आराम कर रही होगी. नींद में खलल से बचने के लिए उस ने मोबाइल स्विच्ड औफ कर लिए होंगे.

इस के बाद उस ने करीब 5 बजे फोन किया. लेकिन इस बार भी उस के फोन स्विच्ड औफ ही मिले. इस से शिवम को माला की चिंता होने लगी. लेकिन इस के बाद व्यस्तता की वजह से रात 8 बजे तक उसे माला को फोन करने का समय नहीं मिला.

फुरसत मिलते ही शिवम ने माला को फिर फोन किया तो इस बार भी उस का फोन बंद मिला. यह देख शिवम की परेशानी चरमसीमा पर पहुंच गई. ये सारे फोन शिवम ने अपने मौल के लैंडलाइन नंबर से किए थे.

दरअसल उस के औफिस में काम के दौरान किसी को भी मोबाइल फोन रखने की इजाजत नहीं थी, इसलिए शिवम अपना मोबाइल भी घर पर माला के पास ही छोड़ कर जाता था.

हैरानी की बात यह थी कि माला के फोन के साथ उस का मोबाइल भी स्विच्ड औफ था. हैरानपरेशान शिवम ने 8 बजे जल्दीजल्दी काम समेटा और आधा घंटे में घर के लिए निकल पड़ा. रात 9 बजे वह घर पहुंचा तो देखा कि फ्लैट के मुख्य दरवाजे पर ताला लटका था.

सब से पहले शिवम ने मकान के पहले और तीसरे तल पर रहने वाले किराएदारों से माला के बारे में पूछा. उन लोगों ने बताया कि दोपहर से उन्होंने माला को नहीं देखा.

घर की एक चाबी शिवम के पास भी रहती थी. ताला खोल कर शिवम घर के भीतर गया तो उस का बैडरूम कुछ असामान्य सा था. बैडरूम में पड़े बैड पर काफी सामान बिखरा हुआ था और कमरे में रखी लोहे की अलमारी में भी सामान बेतरतीबी से इधरउधर डाल दिया गया था.

‘‘कहीं ऐसा तो नहीं कि माला अपने मम्मीपापा के पास चली गई हो,’’ सोच कर वह अपनी बाइक से ससुराल की तरफ चल दिया.

उस ने सासससुर से माला के बारे में पूछा तो वे चौंके, क्योंकि उस दिन माला न तो उन के पास आई थी और न ही उस दिन उस ने फोन किया था. परिवार के लोग भी परेशान थे.

इस के बाद शिवम और उस के ससुराल वालों ने दूसरे रिश्तेदारों व जानपहचान वालों को फोन कर के पूछताछ शुरू कर दी. लेकिन कहीं से भी उन्हें माला के बारे में कोई खबर नहीं मिली.

रात अधिक हो चुकी थी लिहाजा शिवम अपने ससुर व साले के साथ रात एक बजे थाना बिसरख पहुंचा. यह बात 8 अप्रैल, 2018 की है. ड्यूटी अफसर ने गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर माला के हुलिए की जानकारी वायरलैस से जिले के सभी थानों को दे दी.

पुलिस माला को अपने ढंग से तलाश कर रही थी और शिवम तथा उस के ससुराल वाले उसे अपने तरीके से ढूंढ रहे थे. इसी तरह 3 दिन गुजर गए. 11 अप्रैल की दोपहर को इंदिरापुरम पुलिस को सूचना मिली कि कनावनी में नाले के किनारे एक संदिग्ध ट्रौली बैग पड़ा है.

इस सूचना पर पुलिस वहां पहुंची. जांचपड़ताल के बाद ट्रौली बैग में एक महिला की लाश निकली, जिस के हाथपैर सूटकेस के अंदर ही बांधे गए थे. मृतका की गरदन से भी तौलिया लिपटा हुआ था, जिस से साफ लग रहा था कि उस की हत्या करने के बाद शव को ट्रौली बैग में भर कर वहां डाला गया था.

इंदिरापुरम थानाप्रभारी सचिन मलिक और क्षेत्राधिकारी धर्मेंद्र चौहान को साफ लग रहा था कि हत्या कहीं और की गई है और शव को वहां फेंका गया है. लिहाजा उन्होंने घटनास्थल व लाश की फोटो करवा कर समाचार पत्रों व टीवी चैनलों में खबरें प्रकाशित करने के लिए दे दीं.

पुलिस ने गाजियाबाद व आसपास के जिलों की पुलिस को भी लावारिस हालत में मिली महिला की लाश की सूचना दे दी ताकि जल्द से जल्द उस की पहचान हो सके. इंदिरापुरम पुलिस ने शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम गृह में सुरक्षित रखवा दिया.

बिसरख थाने में महिला के शव मिलने की जानकारी पहुंची तो पुलिस ने उसी दिन माला के पिता रामअवतार तथा पति शिवम को फोन कर के इंदिरापुरम थाने में मिले शव के बारे में बताया. साथ ही कहा भी कि वे इंदिरापुरम पुलिस के साथ मोर्चरी जा कर वहां रखे शव को एक बार देख लें.

माला के पिता रामअवतार अपने परिवार के साथ इंदिरापुरम थाने पहुंचे और थानाप्रभारी सचिन मलिक को अपनी बेटी माला के लापता होने की बात बताई. इंदिरापुरम पुलिस उन्हें मोर्चरी ले गई.

पुलिस ने उन्हें नाले के किनारे से बरामद की गई महिला की लाश दिखाई तो रामअवतार व उन की पत्नी शव को देखते ही फूटफूट कर रोने लगे. उन्होंने उस की पुष्टि अपनी बेटी माला के रूप में कर दी. जिस ट्रौली बैग में माला का शव मिला था, वह उस के पिता ने शादी के वक्त माला को दी थी.

सूचना पा कर शिवम भी मोर्चरी पहुंच गया. शव को देखने के बाद उस ने भी उस की शिनाख्त अपनी पत्नी माला के रूप में कर दी. शव की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

शव की पहचान के बाद शिवम और माला के पिता इंदिरापुरम थाने पहुंच कर थानाप्रभारी से मिले. थानाप्रभारी ने उन से पूछा कि उन्हें किसी पर शक तो नहीं है. शिवम तो कुछ नहीं बता सका लेकिन माला के पिता रामअवतार ने अपने दामाद शिवम और उस के घर वालों पर शक जताया.

चूंकि मामला गंभीर था इसलिए थानाप्रभारी सचिन मलिक ने सीओ धर्मेंद्र चौहान को फोन कर के सारी बात बता दी. लिहाजा धर्मेंद्र चौहान तत्काल इंदिरापुरम थाने पहुंच गए. रामअवतार ने सीओ चौहान को बताया कि माला की शादी में उन्होंने हैसियत के अनुसार दहेज भी दिया था. लेकिन शादी के बाद से ही शिवम माला को दहेज के लिए परेशान करता था.

प्रेम विवाह करने की वजह से यह बात माला अपने परिजनों को नहीं बताती थी, लेकिन वह अपनी बहनों से अकसर शिवम की प्रताड़ना का जिक्र करती रहती थी. शिवम माला से कहता था कि वह अपने घर वालों से उसे आई10 कार व 5 लाख रुपए ला कर दे.

इस के लिए शिवम अकसर माला को ताने देता रहता था. रामअवतार ने आरोप लगाया कि शिवम ने अपने भाई तथा मांबाप के साथ मिल कर उस की हत्या की है.

रामअवतार की शिकायत पर सीओ चौहान ने उसी दिन इंदिरापुरम थाने में भादंसं की धारा 498ए (क्रूरता), 304बी (दहेज हत्या), 201 (सबूत नष्ट करने), 316 (अजन्मे बच्चे की मौत) के साथ दहेज निषेध अधिनियम 1961 के धारा 3 और 4 के तहत मुकदमा पंजीकृत करवा दिया.

चूंकि मृतका अपने पति के साथ नोएडा के हैबतपुर में रहती थी और संयोग से उस की गुमशुदगी भी उसी थाने में पहले से दर्ज थी, लिहाजा एसएसपी गाजियाबाद वैभव कृष्ण ने हत्या की जांच बिसरख थाने में स्थानांतरित करवा दी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि मृतका माला 5 महीने की गर्भवती थी यानी ये सिर्फ एक हत्या का नहीं बल्कि एक साथ 2 हत्याओं का मामला था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह भी पता चल गया कि माला की हत्या गला दबाने के कारण हुई थी.

दहेज हत्या से जुड़े मामलों की जांच चूंकि राजपत्रित अधिकारी से कराने का नियम है, इसलिए बिसरख पुलिस ने इंदिरापुरम से ट्रांसफर हो कर आए इस मामले को अपने थाने के अभिलेखों में दर्ज कर लिया, जिस की जांच बिसरख के तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अनित कुमार सिंह को सौंप दी गई.

शिवम, उस के मातापिता और भाई को बिसरख पुलिस ने तत्काल हिरासत में ले लिया. लेकिन उन्हें जेल भेजने से पहले पुलिस को ऐसे साक्ष्य जुटाने थे, जिस से साबित होता कि वाकई शिवम व उस के परिजनों ने दहेज के लिए माला की हत्या कर के उस के शव को ठिकाने लगाया था.

शिवम नोएडा के सेक्टर-18 के एक मौल में सेल्समैन का काम करता था. लिहाजा पुलिस ने अपनी जांच वहीं से शुरू की. मौल के मैनेजर विक्रम से पूछताछ से ले कर वहां की सीसीटीवी फुटेज और बायोमेट्रिक मशीन के रिकौर्ड से पता चला कि घटना वाले दिन शिवम सुबह 9 बजे घर से आया था और रात को साढ़े 8 बजे वहां से घर जाने के लिए निकला था.

अगर वह अपनी ड्यूटी पर मौजूद था तो जाहिर है कि घटना में वह कहीं भी सक्रिय रूप से शामिल नहीं था. लिहाजा सीओ अनित कुमार सिंह ने तत्काल शिवम और उस के परिजनों की गिरफ्तारी का फैसला टाल दिया.

इस के बाद पुलिस ने शिवम के अलावा उस के मातापिता और भाई के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. उस से ऐसा कोई सुराग नहीं मिला कि शिवम के परिजनों को आरोपी माना जाता. लिहाजा सीओ अनित कुमार सिंह ने माला हत्याकांड के मुकदमे से दहेज हत्या की धाराएं हटा कर आगे की जांच बिसरख थानाप्रभारी अखिलेश त्रिपाठी के सुपुर्द कर दी.

थानाप्रभारी अखिलेश त्रिपाठी ने इस मुकदमे में अब भादंसं की नई धाराएं 302, 201, 316, 394, 411 जोड़ कर नए सिरे से पड़ताल शुरू कर दी. उन्होंने जानकारी जुटानी शुरू की तो पता चला कि माला के पास 2 मोबाइल फोन थे और संयोग से दोनों ही गायब थे.

शिवम ने यह भी बताया कि 7 अप्रैल को जब वह घर पहुंचा तो बाहर ताला लगा हुआ था. एक चाबी चूंकि उस के पास थी, इसलिए उस ने ताला खोल कर देखा. अंदर बैड पर अलमारी के पास सामान बिखरा पड़ा था. जबकि माला घर को करीने से सजा कर रखती थी. शिवम ने बताया कि घर से जेवरात भी गायब थे.

थानाप्रभारी ने माला के दोनों मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई और फोन सर्विलांस पर लगा दिए. लेकिन कई दिन तक जांच के बाद भी कोई क्लू नहीं मिला. पता चला कि माला इंटरनेट का काफी इस्तेमाल करती थी, इसलिए पुलिस ने उस के वाट्सऐप और फेसबुक प्रोफाइल को भी खंगाला लेकिन उस में भी कोई सुराग नहीं मिला.

पुलिस को यह पता नहीं चला कि वह किस से बात करती थी. पुलिस को काल डिटेल्स की जांच में माला की एक सहेली के बारे में पता चला, जिस से वह जरूरत से ज्यादा बात करती थी.

लिहाजा पुलिस ने माला की उस सहेली से पूछताछ की. पता चला कि नोएडा में रहने वाली इस सहेली की भी लव मैरिज हुई थी. लेकिन पुलिस को लंबी पूछताछ के बाद भी उस से कोई जानकारी नहीं मिली.

8 अप्रैल को हुई माया की हत्या की जांच करते हुए बिसरख पुलिस को 3 महीने से ज्यादा का वक्त बीत गया था, लेकिन पुलिस को कहीं से कोई क्लू नहीं मिला.

इसी दौरान जून के आखिरी हफ्ते में गौतमबुद्ध नगर के एसएसपी डा. अजयपाल शर्मा ने क्राइम मीटिंग की समीक्षा के दौरान जब देखा कि बिसरख थाने की पुलिस माला हत्याकांड को खोलने में नाकाम रही है तो उन्होंने इस केस की जांच जिला अपराध शाखा को ट्रांसफर कर दी. जिस की जांच का जिम्मा इंसपेक्टर कृष्णवीर सिंह को सौंपा गया.

इंसपेक्टर कृष्णवीर सिंह ने एक बार फिर माला हत्याकांड की जांच नए सिरे से शुरू की. उन्होंने सब से पहले माला के मातापिता के आरोपों को ध्यान में रख कर शिवम के इर्दगिर्द जांच का शिकंजा कसा.

इस के बाद माला व शिवम के विवाहेतर संबंधों को ले कर जांचपड़ताल की. तीसरे चरण में उन्होंने लूट के उद्देश्य से माला की हत्या के ऐंगल की जांच करते हुए आसपड़ोस में रहने वाले लोगों से पूछताछ की.

इसी दौरान पुलिस को माला के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और आसपड़ोस के लोगों से पूछताछ के दौरान पता चला कि गाजियाबाद के कैलाश नगर में रहने वाले माला की बुआ के लड़के मोहित और उस की पत्नी रिंकी का माला के घर काफी आनाजाना था. वारदात से एक दिन पहले भी दोनों माला के घर आए थे और 3-4 घंटे तक वहीं रहे थे.

इंसपेक्टर कृष्णवीर सिंह ने मोहित को हिरासत में ले कर पूछताछ शुरू कर दी. उस ने बताया कि उस की पत्नी रिंकी व माला की आपस में गहरी छनती थी, इसलिए वह अकसर माला से मिलने और उस की खैरियत लेने के लिए उस के घर आताजाता रहता था. मोहित ने बताया कि आखिरी बार जब वह माला के घर उस से मिलने के लिए गया तो माला ने उस दिन उसे व रिंकी को अपने गहने और कपड़े दिखाए थे.

इस के बाद इंसपेक्टर कृष्णवीर सिंह को पूरा विश्वास हो गया कि माला के गहने देख कर शायद मोहित के मन में लालच आ गया होगा, इसलिए उन्होंने मोहित के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. इस से पता चला कि मोहित की लोकेशन भी उस दिन माला के घर के आसपास नहीं थी.

इंसपेक्टर कृष्णवीर सिंह ने कई बार मोहित को पूछताछ के लिए बुलाया, लेकिन वह उस के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं जुटा सके. लिहाजा उन्होंने उस की तरफ से ध्यान हटा कर दूसरे बिंदुओं पर केंद्रित कर दिया. इधर बिसरख थाने का ज्यादातर स्टाफ और थानाप्रभारी सभी बदल चुके थे.

बिसरख सर्किल के नए सीओ निशांक शर्मा को जब इस अनसुलझे केस की जानकारी मिली तो उन्होंने थानाप्रभारी अनिल कुमार शाही के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई, जिसे इस केस को किसी भी तरह सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई.

इस टीम में इंसपेक्टर (इनवैस्टीगेशन) रामसजीवन, एसआई देवेंद्र कुमार राठी आदि को शामिल कर के उन बिंदुओं पर काम करने को कहा गया, जिन पर पुलिस ने अब तक गौर नहीं किया था.

इस दौरान पुलिस को हैबतपुर गांव में शिवम के घर के आसपास के लोगों से पूछताछ करने व सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल से पता चला कि जिस दिन माला अपने घर से लापता हुई थी, कुछ लोगों ने उसी मकान में तीसरे फ्लोर पर किराए पर रहने वाले सौरभ व उस की पत्नी रितु को एक बड़े से ट्रौली बैग के साथ टैंपो से कहीं जाते देखा था.

शाम को दोनों वापस घर लौट आए थे. यह एक चौंकाने वाली जानकारी थी. शिवम से पूछताछ करने पर पता चला कि मई के महीने में सौरभ व रितु ने यह मकान खाली कर दिया था और अब वह गाजियाबाद के भीमनगर में किराए पर रहते हैं.

सीओ निशांक शर्मा ने एक पुलिस टीम को एक रणनीति के तहत सौरभ को बिना भनक लगे उस की निगरानी करने को कहा. साथ ही उन्होंने माला व शिवम के दोनों लापता मोबाइल फोन फिर से सर्विलांस पर लगवा दिए.

एक हफ्ता माला का मोबाइल फोन एक नए सिम कार्ड के साथ एक्टिव होने की जानकारी मिली. पता चला कि यह फोन अलीगढ़ के थाना पिसावा के गांव राऊपुर में रहने वाला शिवचरण दिवाकर इस्तेमाल कर रहा है.

सीओ निशांक शर्मा के निर्देश पर इंसपेक्टर रामसजीवन और एसआई देवेंद्र राठी की टीम ने उस गांव में जा कर शिवचरण को हिरासत में ले लिया. शिवचरण ने बताया कि यह फोन कुछ दिन पहले उस के बेटे सौरभ दिवाकर ने उसे दिया था.

सौरभ का नाम सामने आते ही सीओ निशांक पूरी कहानी समझ गए. उन्होंने उसी समय सौरभ को हिरासत में लेने के लिए एक टीम उस के भीमनगर स्थित घर भेज दी. सौरभ तो घर पर नहीं मिला लेकिन उस की पत्नी रितु घर पर ही मिल गई. महिला पुलिस उसे थाने ले आई.

पुलिस को देखते ही रितु के हाथपांव फूल गए. सख्ती करने पर रितु ने स्वीकार किया कि माला की हत्या उस ने ही की थी. फिर घर में लूटपाट करने के बाद शव ट्रौली बैग में रख कर कनावनी नाले के पास फेंक दिया था.

पुलिस टीम ने उसी समय माला की निशानदेही पर उस के घर से करीब 3 लाख रुपए के आभूषण, कीमती कपड़े तथा एक अन्य मोबाइल और दूसरा कीमती सामान बरामद कर लिया.

इस के बाद पुलिस सौरभ दिवाकर की तलाश में जुट गई. अगली सुबह पुलिस ने सौरभ को भी गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में पता चला कि सौरभ मूलरूप से अलीगढ़ के पिसावा का रहने वाला था और माला की हत्या के समय उसी मकान में तीसरे फ्लोर पर किराए पर रहता था, जिस मकान के दूसरे फ्लोर पर शिवम और माला रहते थे.

सौरभ ने बताया कि 6 अप्रैल को माला की बुआ का लड़का मोहित व उस की पत्नी रिंकी उस से मिलने घर गए थे. घर में माला ने रिंकी को अपनी शादी के कीमती कपड़े, साडि़यां और आभूषण दिखाए थे. इसी दौरान वहां पर रितु भी पहुंच गई थी. उस ने आभूषण व कपड़े देख लिए थे. जिस के बाद रितु के मन में लालच आ गया और उस ने यह बात अपने पति सौरभ को बताई.

दोनों ने मिल कर आभूषण व महंगे कपड़े लूटने के लिए माला की हत्या की साजिश रची. सौरभ एक तो नशे का आदी था, दूसरे उस का कामधंधा ठीक नहीं चल रहा था. आर्थिक तंगी के कारण सौरभ ने माला की हत्या कर के उस के घर में चोरी की साजिश रच डाली.

7 अप्रैल, 2018 को शिवम के जाने के बाद सौरभ के कहने पर रितु ने बहाने से माला को अपने घर बुलाया. पहले उन्होंने मिल कर चाय पी और उस के बाद सौरभ ने गमछेनुमा तौलिए से माला का गला घोंट कर हत्या कर दी.

माला की लाश को अपने घर में ही छोड़ कर उस के कमरे की चाबी ले कर दोनों माला के घर पहुंचे. उन्होंने माला के घर की अलमारी में रखी 7 महंगी साडि़यां, लहंगाचुन्नी, स्वेटर और शौल निकाल लिए. साथ ही घर से मिले करीब 3 लाख रुपए के जेवर बाजार में ले जा कर बेच दिए. जबकि 35 हजार रुपए की नकदी अपने पास रख ली थी.

सौरभ ने माला के घर में रखा शिवम और माला का मोबाइल भी चुरा कर स्विच्ड औफ कर दिया. सौरभ माला के यहां से उस का ट्रौली बैग भी चुरा लाया था. बाद में इसी ट्रौली बैग में उस ने हाथपांव बांध कर माला के शव को भर दिया.

दोपहर बाद सौरभ किराए का एक टैंपो ले आया. पत्नी के साथ लाश से भरे ट्रौली बैग को ले कर वह वहां से विजयनगर के कनावनी पहुंचा, जहां उन्होंने टैंपो को छोड़ दिया. टैंपो वाले के जाने के बाद कुछ दूर तक पतिपत्नी बैग को साथ ले गए. इस के बाद मौका देख कर उन्होंने बैग सड़क से नीचे नाले के किनारे लुढ़का दिया और फिर वहां से वापस घर लौट आए.

सौरभ ने माला के घर से चुराए गए 2 मोबाइल फोन में से एक तो अपने घर में ही छिपा कर रख लिया और दूसरा अलीगढ़ में रहने वाले अपने पिता को दे दिया. कुछ दिन पहले उस ने इस मोबाइल में एक सिमकार्ड डाल कर उन्हें इस्तेमाल लिए दे दिया था.

पिछले 5 महीने से माला हत्याकांड का राज खोलने के लिए जुटी बिसरख पुलिस को इस मोबाइल की घंटी बजते ही इस हत्या का राज खोलने का रास्ता मिल गया. सौरभ दिवाकर व उस की पत्नी से विस्तृत पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.   ?

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

ब्लैकमेलर की बिसात पर शातिर हसीना की चाल

सुशील कुमार सिंह दिल्ली के चावड़ी बाजार स्थित वीनस इंटरप्राइजेज नाम की दुकान पर काम करता था. यहां उस की इसी साल नौकरी लगी थी. यह सैनिटरीवेयर की नामचीन दुकान थी. सुशील यहां एकाउंटेंट का काम करता था.

11 अगस्त, 2018 की शाम को सुशील दुकान के मालिक पवन से कह कर निकला कि वह अपने गांव जा रहा है. वहां से 2 दिन बाद लौटेगा. सुशील जब 3-4 दिन बाद भी काम पर नहीं लौटा तो पवन ने उस के मोबाइल पर फोन किया, लेकिन उस का मोबाइल स्विच्ड औफ निकला. 2-3 बार की कोशिश के बाद भी उस का फोन नहीं मिला तो पवन को सुशील पर काफी गुस्सा आया.

पवन के पास सुशील के पिता ऋषिपाल सिंह का भी फोन नंबर था. उस ने फौरन फोन लगा कर ऋषिपाल सिंह से सुशील के काम पर नहीं लौटने की शिकायत की. पवन की बात सुन कर ऋषिपाल सिंह चौंक गए, क्योंकि सुशील 11 अगस्त की शाम घर पहुंचा ही नहीं था. उन्होंने यह बात पवन को बताई तो पवन ने चिंता जाहिर करते हुए पुलिस में मामला दर्ज कराने का सुझाव दिया.

16 अगस्त, 2018 को ऋषिपाल सिंह दिल्ली के थाना हौजकाजी पहुंचे और बेटे की फोटो दे कर उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी. इस केस की तहकीकात का जिम्मा एसआई आर.के. सिंह को दिया गया. उन्होंने ऋषिपाल सिंह से सुशील के बारे में जरूरी जानकारी लेने के बाद उस के दोस्तों व करीबियों के मोबाइल नंबर अपनी डायरी में नोट कर लिए.

एसआई आर.के. शर्मा ने डायरी में दर्ज किए सभी मोबाइल नंबरों की जांचपड़ताल शुरू की. इन में से एक मोबाइल नंबर बंद मिला तो उन्होंने उस की और गुमशुदा सुशील दोनों की काल डिटेल्स निकलवाई. उन्होंने काल डिटेल्स की बारीकी से जांच की तो पाया कि सुशील के फोन से दूसरे फोन पर काफी मैसेज भेजे गए थे.

उस फोन नंबर की पुलिस ने जांच की तो पता चला वह किसी व्यक्ति ने फरजी आधार कार्ड से लिया था. लेकिन पुलिस ने पता लगा ही लिया कि उस मोबाइल नंबर को डिंपल उर्फ डौली चौधरी नाम की लड़की इस्तेमाल कर रही थी.

इसी बीच ऋषिपाल ने हौजकाजी थाने पहुंच कर थानाप्रभारी हरिवंश और एसआई आर.के. शर्मा को बताया कि पिछले 6 साल से सुशील का अफेयर पड़ोसी गांव की डिंपल उर्फ डौली चौधरी से चल रहा था. पिछले डेढ़ साल से वह ग्रेटर नोएडा के अमित मावी नाम के किसी युवक के साथ रह रही है.

इसी वजह से सुशील और डौली के संबंध तनावपूर्ण थे. इतना ही नहीं एक दिन डौली ने उस के घर आ कर शिकायत भी की थी कि सुशील उसे बेवजह परेशान करता है.

इस बात को ले कर गांव में पंचायत भी बैठी थी. पंचायत ने सुशील को डिंपल को परेशान न करने और आगे डौली से किसी प्रकार का भी संबंध न रखने का फैसला सुनाया था.

ये बातें जान कर एसआई आर.के. शर्मा को लगने लगा कि सुशील के गायब होने के तार डौली चौधरी से जुड़े हैं. पुलिस जब किसी केस की जांच शुरू करती है तो उसे केस से जुड़े कई सिरों की जांच करनी पड़ती है.

शर्मा ने डिंपल के उत्तर प्रदेश के जिला गोंडा में आने वाले गांव पिंजरी पहुंच कर उस से पूछताछ की. उस ने यह बात स्वीकार कर ली कि उक्त मोबाइल नंबर का इस्तेमाल वही कर रही है.

पुलिस ने जब उस से सुशील के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया कि सुशील कहां गया है, उसे इस की कोई जानकारी नहीं है. उस से विस्तार से पूछताछ करना जरूरी था, इसलिए पुलिस उसे 25 अगस्त, 2018 को दिल्ली ले आई.

पुलिस ने थाने में उस से काफी देर तक पूछताछ की मगर डौली की बातों से कहीं भी यह जाहिर नहीं हुआ कि सुशील के गायब होने में उस का कोई हाथ है. डौली ने हरेक सवाल का जवाब बड़े ही संयम से दिया.

पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे घर भेज दिया. लेकिन शक होने पर पुलिस ने 30 अगस्त को डौली को फिर थाने बुला लिया. पुलिस ने उस से पूछा कि एक दिन उस के और उस के दूसरे प्रेमी मनीष चौधरी के मोबाइल फोन क्यों बंद थे.

इस सवाल का वह कोई तर्कसंगत जवाब नहीं दे पाई. मजबूर हो कर उस ने सच्चाई बता दी. डौली ने बताया कि सुशील की हत्या कर दी गई है. डौली की बात सुन कर सभी चौंके.

डिंपल उर्फ डौली चौधरी के जुर्म स्वीकारोक्ति के अनुसार 11 अगस्त की रात उस ने अपने दूसरे प्रेमी मनीष चौधरी के साथ मिल कर सुशील को बेहोशी की हालत में मथुरा के पास यमुना नदी की उफनती धारा के बीच फेंक दिया था.

सुशील कुमार की हत्या का खुलासा होते ही पुलिस ने डौली चौधरी को गिरफ्तार कर लिया. साथ ही गुमशुदगी के मामले को अपहरण में तब्दील कर दिया गया. सुशील की हत्या के बाद इस केस की जांच इंसपेक्टर (इनवैस्टीगेशन) एम.पी. सैनी को सौंप दी गई.

डौली चौधरी की निशानदेही पर पुलिस ने 2 सितंबर को इस हत्याकांड में लिप्त दूसरे आरोपी मनीष चौधरी को मथुरा के उसी होटल से गिरफ्तार कर लिया, जहां हत्या के दौरान डौली चौधरी उस के साथ ठहरी थी. पूछताछ के दौरान मनीष ने भी सुशील की हत्या में शामिल होने और उस की लाश को यमुना में फेंकने की बात मान ली.

डौली चौधरी और मनीष चौधरी की निशानदेही पर पुलिस ने मृतक सुशील कुमार सिंह की सोने की घड़ी, कपड़े, बैग आदि बरामद कर लिए. लाश की तलाश के लिए पुलिस ने 2 बार गोताखोरों को यमुना नदी में उतारा, लेकिन लाश बरामद नहीं हो सकी.

डौली चौधरी और उस के प्रेमी मनीष चौधरी द्वारा दिए गए बयानों, पुलिस की जांच तथा मृतक सुशील के परिजनों से बातचीत के आधार पर इस सनसनीखेज हत्याकांड के पीछे की जो कहानी उभर कर आई, वह इस प्रकार है—

23 वर्षीय सुशील कुमार सिंह उत्तर प्रदेश के जिला अलीगढ़ के गांव नंगला जगदेव निवासी ऋषिपाल सिंह का बड़ा बेटा था. ग्रैजुएशन करने के बाद सुशील ने कुछ साल एक सीए के पास रह कर एकाउंट का काम सीखा.

जब वह इस काम में पारंगत हो गया तो उस ने लगभग 7 महीने पहले दिल्ली के चावड़ी बाजार स्थित पवन कुमार की हार्डवेयर की दुकान में एकाउंटेंट की नौकरी कर ली. यहां उसे अच्छी सैलरी मिलती थी, सो उस की जिंदगी मजे में कट रही थी. उस के पिता ऋषिपाल सिंह भी दिल्ली के एमटीएनएल विभाग में कार्यरत थे, इसलिए घर में किसी बात की कमी नहीं थी.

नौकरी के शुरुआती दिनों में वह रोजाना ट्रेन से दिल्ली आता और शाम को अपने घर लौट जाता था. पिछले 6 साल से सुशील अपने गांव से सटे दूसरे एक गांव पिंजरी की रहने वाली डिंपल चौधरी उर्फ डौली के साथ रिलेशनशिप में था. डौली जिन दिनों 12वीं कक्षा में पढ़ रही थी, उसी दौरान दोनों के बीच प्यार का सिलसिला शुरू हुआ.

12वीं पास करने के बाद सुशील के दबाव देने पर डिंपल ने आगे की पढ़ाई छोड़ दी थी, क्योंकि सुशील ने उस से शादी कर के उसे अपना बना लेने का वादा किया था. डिंपल मौडर्न खयालों वाली खूबसूरत युवती थी, जो अपनी जिंदगी के हर पल को पूरी शिद्दत के साथ जीने का जज्बा रखती थी.

जब भी उसे किसी चीज की जरूरत होती, वह प्रेमी सुशील को बता देती थी. वह उस की हर फरमाइश पूरी करता था. जब सुशील को दिल्ली में काम करते हुए कुछ वक्त हो गया तो उस ने सबोली बाग की गली नंबर-5 में किराए पर एक कमरा ले कर रहना शुरू कर दिया. यह उस का डिंपल से मिलने का एक सुरक्षित ठिकाना बन गया. कभीकभी डौली उस के बुलाने पर कमरे पर पहुंच जाती थी.

सुशील ने एक दिन डौली को महंगा गिफ्ट दे कर उस के कुछ न्यूड फोटो अपने मोबाइल से खींच लिए थे. इस के बाद जब भी उस की डौली को बुलाने की इच्छा होती, डराधमका कर उसे बुला लेता. डौली को न चाहते हुए भी मजबूरी में उस के पास आना पड़ता था. न्यूड फोटो के कारण वह सुशील के हाथ की कठपुतली बनती गई.

इस के बाद सुशील उस के साथ मनमर्जी करने लगा. वह कभी उस के साथ मथुरा के होटलों में जा कर रुकता तो कभी उसे दिल्ली में अपने कमरे में रोक लेता था. वह उस के इशारों पर नाचने के लिए मजबूर थी. कभीकभी तो वह खून का घूंट पी कर रह जाती थी.

एक बार जब वह सुशील के बुलाने पर उस के पास नहीं पहुंची तो सुशील ने उस का न्यूड फोटो उस के ताऊ के बेटे के मोबाइल पर भेज दिया. दूसरी बार उस ने डौली का एक न्यूड फोटो उस की बड़ी बहन के मोबाइल पर भेजा, जिस की वजह से डौली के बिगड़े चालचलन के बारे में उस के घर वालों को पता चल गया.

डौली ने हिम्मत कर के सुशील के घर वालों से उस की इस हरकत की शिकायत कर दी. गांव में इस बात को ले कर पंचायत भी बैठी, जिस में सुशील और डौली को बुला कर एकदूसरे से दूर रहने को कहा गया था. उस दौरान पंचों के डर से सुशील ने उन की बात मान लेने को कह दिया था.

लेकिन कुछ ही दिनों के बाद उस ने डौली को फिर से बुलाना शुरू कर दिया तो डौली ने उस की इच्छाओं के आगे समर्पण करने में ही भलाई समझी. इस तरह सुशील अपनी जिंदगी को डौली के साथ एंजौय कर रहा था. उस का सोचना था कि अब डौली आजीवन उस के हाथ की कठपुतली बन कर नाचती रहेगी.

करीब डेढ़ साल पहले डौली ने सुशील से कहा कि अब वह नौकरी करना चाहती है, तब सुशील ने उस की मुलाकात ग्रेटर नोएडा के रहने वाले अपने दोस्त बंटी से करा दी. बंटी और सुशील के बीच इतनी गहरी दोस्ती थी कि वे दोनों एकदूसरे के सभी राज जानते थे.

बंटी के कहने पर डौली एक दिन उस से मिलने ग्रेटर नोएडा पहुंची, जहां पर बंटी ने काम दिलाने के लिए उसे अपने एक करीबी दोस्त मोहित मावी से मिलवाया. पहली मुलाकात में ही मोहित डौली की खूबसूरती का कायल हो गया और उस से प्रभावित हो कर उस ने डौली को अपने ही पास रखने का फैसला कर लिया.

मोहित का चाचा लेबर कौन्ट्रैक्टर था, सो उस ने कुछ सोच कर डौली को 10 हजार रुपए प्रति महीने की नौकरी पर रख लिया. डौली उस के पास नौकरी करने लगी.

शुरू में वह अपने गांव से ग्रेटर नोएडा के अल्फा सेक्टर में नौकरी करने आती थी. बाद में मोहित ने सूरजपुर में उसे एक कमरा किराए पर दिला दिया. इस के कुछ दिन बाद मोहित मावी उस से मिलने उस के कमरे पर भी जाने लगा. उस ने अपने मन की मंशा उस पर जाहिर कर दी.

डिंपल पहले से ही मोहित की मंशा समझ चुकी थी, लेकिन जब मोहित ने उस के सामने अपना प्यार जाहिर किया तो डौली ने खुशी से उस की बात स्वीकार कर ली. इस के बाद मोहित कभीकभी रात में भी डौली के कमरे पर रुकने लगा. अब डौली मोहित को खुश करती, इस के बदले में मोहित उसे महंगी शौपिंग कराने के साथ जेबखर्च के पैसे भी दे देता था. इस तरह उस की जिंदगी बड़े आराम के साथ गुजरने लगी थी.

कुछ दिनों बाद डौली ने अपने पहले प्रेमी सुशील से दूरियां बनानी शुरू कर दीं. अब जब भी सुशील उसे मिलने के लिए अपने पास बुलाता तो वह कोई न कोई बहाना बना कर उस से कन्नी काटने का प्रयास करती थी.

कुछ लोगों की आदत होती है कि मसाला लगा कर इधर की बात उधर करते हैं. बंटी भी उन्हीं में से था. वह मोहित और सुशील दोनों का दोस्त था लेकिन वह दोनों के मन की टोह ले कर उन्हें एकदूसरे के खिलाफ भड़काने का काम करता था. इस काम में उसे बड़ा आनंद आता था.

एक दिन बंटी ने जब मोहित मावी और डौली की बढ़ती नजदीकियों की सूचना सुशील को दी तो सुशील परेशान हो गया. उसे यह शंका होने लगी कि कहीं मोहित उस की प्रेमिका से शादी न कर ले. इस के लिए उस ने डौली को मोहित से दूर रहने को कह दिया.

साथ ही वह डौली पर नौकरी छोड़ देने का दबाव भी बनाने लगा. ऐसा न करने पर उस ने डौली को उस के न्यूड फोटो इंटरनेट पर डालने की धमकी दे दी. उस की इन धमकियों से डौली तनाव में आ गई. चिंता में उसे रात भर नींद नहीं आती थी. मजबूरी में उस ने रात में नींद की गोलियां लेनी शुरू कर दीं.

मोहित मावी की पत्नी पूजा भी ग्रेटर नोएडा के अल्फा सेक्टर में रहती थी. पूजा को जब पता लगा कि उस के पति का किसी डौली नाम की लड़की से चक्कर चल रहा है तो उस ने पति को समझाया. मगर मोहित मावी डौली चौधरी के प्यार में इस कदर पागल हो चुका था कि उस ने पत्नी की बातों को अनसुना कर दिया. पति की अनदेखी से आहत हो कर करीब 2 महीने पहले पूजा ने आत्महत्या कर ली.

पूजा के भाइयों ने उस की मौत की सूचना स्थानीय पुलिस को नहीं दी. चूंकि वे दबंग थे, इसलिए मोहित को यह डर सताने लगा कि कहीं वह अपनी बहन की मौत का बदला लेने के लिए उस के दरवाजे पर न धमक जाएं. इस डर की वजह से मोहित बेंगलुरु भाग गया. लेकिन बेंगलुरु जाने के बाद भी वह डौली के साथ लगातार संपर्क में रहा.

घटना से पहले सुशील ने डौली के मोबाइल पर फोन कर के 11 अगस्त को मथुरा में मिलने और मोहित मावी के बारे में अंतिम फैसला लेने के लिए कहा तो डौली की सहनशक्ति जवाब दे गई.

डौली का एक और प्रेमी मनीष चौधरी भी था, जो मथुरा के गांव बछगांव में रहता था. 28 साल का मनीष चौधरी कुछ समय पहले डौली के गांव में जमीन खरीदने के एक मामले में सलाह लेने के लिए उस के पिता पुनीत चौधरी से मिला था. मनीष ने उन्हें 50 हजार रुपए का कर्ज भी दिया था, जिसे वह अब तक नहीं चुका पाए थे.

उसी दौरान मनीष की नजर डौली से लड़ गई तो उस ने पुनीत चौधरी के आगे डौली से शादी करने की इच्छा जाहिर कर दी. चूंकि मनीष पैसे वाला आसामी था, इसलिए पुनीत चौधरी ने सोचा कि अगर डौली की शादी मनीष से हो जाएगी तो उस का घर भी संवर जाएगा.

जब सुशील ने डौली को फिर से ब्लैकमेल किया तो डौली ने सुशील से मथुरा में मिलने की बात तो मान ली लेकिन इस बार उस ने मन ही मन सुशील को अपने रास्ते से हटाने का फैसला भी कर लिया. उस ने इस बारे में मनीष से बात की तो वह भी सुशील कुमार की हत्या में डौली का साथ देने के लिए तैयार हो गया. इस के बाद दोनों ने सुशील की हत्या की एक फूलप्रूफ योजना बनाई.

योजना के मुताबिक 10 अगस्त, 2018 को ही मनीष मथुरा पहुंच गया और वहां के गोपी होटल में एक कमरा ले कर ठहर गया. योजना के अनुसार, डौली ने एक स्थानीय दुकान से नींद की 50 गोलियां खरीद लीं और अपनी नई स्कूटी से गोपी होटल पहुंच गई. 11 अगस्त की रात 10 बजे दोनों होटल से बाहर निकले. डिंपल ने सुशील को फोन कर के कहा कि वह उस से मिलने मथुरा आ गई है, इसलिए किसी होटल में कमरा बुक करा ले.

यह बात सुन कर सुशील बहुत खुश हुआ, उस ने वरुण रेजीडेंसी में अपनी आईडी दे कर एक कमरा बुक करा लिया. फिर डौली को वहां पहुंचने के लिए कह दिया. थोड़ी ही देर में डौली वहां पहुंच गई. डौली को सामने पा कर सुशील की आंखों में एक अनोखी चमक उभर आई. वह उसे ले कर कमरे में चला गया. कमरे में पहुंच कर उस ने कोल्डड्रिंक्स और बिरयानी का और्डर दिया.

सुशील दिल्ली से मथुरा पहुंचा था, इसलिए वह थका हुआ था. खाने के पहले वह नहा कर फ्रैश होना चाहता था. होटल का कमरा बाथरूम अटैच्ड नहीं था. बाथरूम कमरे से बाहर एक ओर बना था. वह नहाने के लिए बाथरूम में चला गया.

उसी दौरान वेटर उन के और्डर की कोल्डडिं्रक्स और बिरयानी की 2 प्लेटें कमरे में आ कर रख गया. जैसे ही सुशील बाथरूम में गया, डिंपल उर्फ डौली ने नींद की सारी गोलियां सुशील की स्प्राइट की बोतल में डाल दीं. कुछ ही देर में सारी गोलियां घुल गईं.

जब सुशील नहा कर कमरे में पहुंचा तो वह पूरी तरह से तरोताजा था. वह डिंपल की ओर देख कर मुसकराया फिर कपड़े बदल कर उस ने उस की चिकनी कमर में बांहें डाल दीं. डौली प्यार का नाटक करती हुई उस के नंगे तन से लिपट गई.

थोड़ी देर दोनों एकदूसरे के आगोश में पड़े रहे. इसी दौरान डौली ने सुशील को प्यार से अलग करते हुए स्प्राइट की बोतल पकड़ा दी और खुद पेप्सी की बोतल हाथ में ले कर पीने लगी. इस बीच दोनों मीठीमीठी बातें करते रहे.

जैसे ही सुशील की कोल्डड्रिंक्स खत्म हुई उस पर नींद की गोलियों का असर होना शुरू हो गया. जब वह पूरी तरह बेहोश हो गया तो डिंपल उर्फ डौली ने होटल के बाहर इंतजार कर रहे मनीष को फोन कर के बुला लिया और उस की मदद से बेहोश सुशील को अपनी स्कूटी तक ले जाने लगी.

जब इस में परेशानी हुई तो उस ने होटल से एक स्टाफ को यह कह कर मदद के लिए बुलाया कि उस के भाई की तबीयत अचानक खराब हो गई है, इसे अस्पताल ले जाना है.

स्टाफ की मदद से दोनों ने सुशील को स्कूटी के बीच में बिठाया. डौली अपनी स्कूटी ड्राइव करती हुई मथुरा के ओल्ड ब्रिज के बीचोबीच पहुंची और दोनों ने बेहोश सुशील को यमुना नदी की उफनती धारा में फेंक दिया. इस के बाद वे दोनों अपने कमरे में लौटे और अगले दिन अपनेअपने गांव चले गए.

विवेचनाधिकारी इंसपेक्टर एम.पी. सैनी ने डिंपल उर्फ डौली और मनीष को अदालत में पेश कर के अलगअलग तिथियों में दोनों को 2 दिनों की रिमांड पर लिया.

उन की मदद से केस से संबंधित सारे साक्ष्य इकट्ठा करने के बाद उन्हें फिर से अदालत में पेश कर दिया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. चूंकि अभी सुशील की लाश बरामद नहीं हो सकी थी, इसलिए हौजकाजी थाना पुलिस सरगर्मी से लाश की तलाश में जुटी थी.

सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी एम.एस. रंधावा ने इस बारे में मथुरा के एसपी से संपर्क स्थापित कर लाश को बरामद करने में सहयोग करने की अपील की है.

डेट फंड : सुरक्षित निवेश का वादा

विकास एक मध्यवर्गीय परिवार के नौकरीपेशा व्यक्ति हैं. उन के वेतन से घरखर्च, ईएमआई आदि के बाद कुछ रकम बच जाती है. कई बार एरियर आदि के रूप में भी उन्हें कुछ रकम एकसाथ मिल जाती है. यह रकम उन के बैंक के बचत खाते में पड़ी रहती है. जिस पर उन्हें सामान्यतया 4 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज मिलता है. बैंक एफडी पर ब्याज की घटती दरें उन्हें एफडी की तरफ अधिक आकर्षित नहीं कर पा रही हैं. वे अपने निवेश को सुरक्षित रहने के साथसाथ अपेक्षाकृत अधिक ब्याज चाहते हैं.

देश में विकास जैसे लाखों व्यक्ति हैं जिन की यही समस्या है. उन्हें एफडी की तरह सुरक्षित और अपेक्षाकृत अधिक रिटर्न प्रदान करने वाले निवेश माध्यमों की तलाश रहती है. ऐसे लोगों के लिए डेट फंड उपयोगी साबित हो सकता है. डेट फंड एक ऐसा म्यूचुअल फंड है जो अपना निवेश ऋण बाजार प्रपत्रों में करता है. इस के यूनिटधारकों को रिटर्न प्रपत्रों पर मिलने वाले ब्याज आदि पर आधारित होता है.

जो निवेशक अपनी जमाराशि को बचत खाते से निकाल कर डेट फंडों में निवेश करना चाहें, उन के लिए लिक्विड फंड काफी उपयोगी साबित हो सकता है. इस में निवेश की अवधि काफी कम होती है और मिलने वाले रिटर्न में उतारचढ़ाव की संभावना भी काफी कम होती है. इन फंडों में बहुत छोटी अवधि जैसे केवल

5 या 15 दिनों के लिए भी निवेश किया जा सकता है. इन फंडों द्वारा छोटी अवधि वाले बौंड और अन्य प्रपत्र खरीदे जाते हैं जिन की परिपक्वता अवधि अकसर 1-2 माह ही होती है. इस श्रेणी के फंडों ने भी तकरीबन 7 फीसदी का सालाना रिटर्न दिया है.

लंबी अवधि के लिए निवेश करने वालों के लिए भी काफी डेट फंड उपलब्ध हैं. इन में शौर्टटर्म इनकम फंड 2 से 4 वर्ष तक की परिपक्वता वाले होते हैं. उन में निवेश लंबी अवधि को सोच कर किया जाना चाहिए. यदि इन में 3 साल तक के लिए पैसा लगाएं तो बैंक एफडी की तुलना में अधिक ब्याज मिल सकता है.

अधिक लंबी अवधि के डेट फंडों डायनैमिक बौंड फंड चलन में है. इन में 10-15 साल तक के लिए भी निवेश किया जा सकता है. इन में बाजार में ब्याजदरों में होने वाले उतारचढ़ाव का प्रभाव पड़ता है. इन फंडों में फंड मैनेजर की विशेषज्ञता काफी महत्त्वपूर्ण होती है. ये फंड मैनेजर बाजार की ब्याजदरों में उतारचढ़ाव को ध्यान में रखते हुए ऋण के प्रपत्रों में निवेश संबंधी फैसले लेते हैं.

फंड मैनेजर को यदि लगे कि ब्याजदरों की नीचे जाने की स्थिति बन रही है तो वह दरों के नीचे गिरने से पहले ही लंबी अवधि की परिपक्वता के ऋण के प्रपत्रों में निवेश कर देगा जिस से ब्याजदर गिरने का नुकसान निवेशक को नहीं उठाना पड़े. ऐसे फंड मैनेजर की कुशलता काफी महत्त्वपूर्ण होती है. यही फंड की सफलता का राज होता है. इस फंड के निवेशकों को फंड मैनेजर की कुशलता पर पूरा भरोसा करना होता है.

परिस्थितियों पर रखें नजर

डेट फंडों का चुनाव करते समय उन के केवल पिछले वर्षों के प्रदर्शनों को ही आधार नहीं माना जाना चाहिए. ब्याजदरों में उतारचढ़ाव की स्थिति और बाजार परिस्थितियों का लगातार अध्ययन करते रहना इन प्रपत्रों में निवेश के लिए जरूरी होता है. इन फंडों के निवेशकों को या तो खुद पूरी तरह से जागरूकता रखनी होगी या फिर फंड मैनेजर की कुशलता पर भरोसा करते हुए डायनैमिक फंड का चुनाव करना चाहिए. इन में फंड मैनेजर खुद ही उतारचढ़ावों पर फैसला ले कर आप के निवेश को मैनेज करता रहेगा.

फंडों में अब निवेश करना मुश्किल नहीं रहा है. इन में निवेश करते समय इन को आप अपने बैंक खाते से जोड़ सकते हैं, इसी खाते में ईसीएस या औनलाइन ट्रांसफर के जरिए निवेश कर सकते हैं और औनलाइन भुगतान भी प्राप्त कर सकते हैं. इन में परंपरागत तरीके से चैक से भुगतान करने तथा चैक से ही भुगतान प्राप्त करने की समस्या अब नहीं है. सारे लेनदेन आप अपने बैंक खाते के जरिए आसानी से कर सकते हैं. मोबाइल बैंकिंग सुविधा ने यह कार्य आप के मोबाइल फोन के माध्यम से भी आसानी से किया जाना संभव कर दिया है.

हालांकि डेट फंड काफी सुरक्षित तथा अपेक्षाकृत अच्छे रिटर्न देने वाले होते हैं, फिर भी यह याद रखा जाना चाहिए कि ये भी म्यूचुअल फंड ही हैं जो बाजार जोखिमों के अधीन हैं. इसलिए इन में निवेश करते समय भी आप को म्यूचुअल फंड कंपनी और इस के औफर डौक्यूमैंट आदि का पूरा अध्ययन करना चाहिए.

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए निवेश किया जाए तो छोटी अवधि के लिए निवेश कर के भी बैंक एफडी की तुलना में अच्छा रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है. इतना ही नहीं, बचत का लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है.

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