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मूंग दाल के पैनकेक

सामग्री

– 1 कप मूंग दाल पकौड़ों का पाउडर

– 1/4 कप प्याज बारीक कटा

– 1 बड़ा चम्मच टमाटर

– बारीक कटा  थोड़ी सी धनियापत्ती कटी

–  पैनकेक सेंकने के लिए रिफाइंड औयल

बनाने की विधि

– सारी सामग्री मिला कर पानी डाल कर गाढ़ा घोल तैयार करें.

– 10 मिनट ढ़क कर रखा रखें.

– फिर नौनस्टिक पैन में थोड़ाथोड़ा औयल लगा कर छोटेछोटे पैनकेक बना लें.

व्यंजन सहयोग: नीरा कुमार 

हेयर सीरम के फायदे

हेयर एक्सपर्ट्स अक्सर बालों में सीरम लगाने की सलाह देते हैं. लेकिन वो ऐसा क्यों कहते हैं आज हम आपको बताते हैं. अगर आपने अभी तक बालों में सीरम नहीं लगाया है तो जल्द से जल्द आपको इसका इस्तेमाल करना शुरु कर देना चाहिए. क्योंकि इसके बेहद फायदे हैं. हेयर सीरम में सिलिकान होता है जो बालों में समा कर उन्‍हें चमकीला दिखाने में मदद करता है. ये रूखे, सूखे और खराब दिखने वाले बालों के लिये एक जादुई छड़ी के समान है. इसको हल्‍का सा बालों में लगाया और बाल बन जाते हैं स्‍मूथ और सिल्‍की.

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हेयर सीरम को लगाने से आपके बाल सुलझे और स्‍वस्‍थ्‍य रहते हैं. साथ ही इसे लगाने से सूरज की कठोर यूवी रेज, प्रदूषण और वातावरण की नमी आपके बालों पर कोई बुरा असर नहीं डाल पाएंगी. हेयर सीरम को बालों की लंबाई के अनुसार कवर कर के लगाना चाहिये. इसे जड़ में नहीं लगाया जाता नहीं तो बाल औयली हो जाते हैं. अच्‍छा रिजल्‍ट पाने के लिये इसे गीले बालों में ही लगाना चाहिये.

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  • घने बालों के लिये रूखे और कड़े बालों के लिये हेयर सीरम लगाएं. इससे बाल घने और संभालने में आसान हो जाते हैं. अगर बाल उलझते हैं तो वह भी सही हो जाते हैं.
  • बालों को स्‍ट्रेट या कर्ल करने के लिये जब आप रौड का प्रयोग करेंगी तो बाल लंबे समय तक खराब हो सकते हैं लेकिन अगर आप बालों पर हेयर सीरम लगा कर गरम रौड का प्रयोग करेंगी तो आपके बालों पर कोई बुरा असर नहीं होगा.
  • प्रदूषण, धूल-मिट्टी, तेज सूरज की किरणे आदि से ये आपके बालों को बचाता है. इसको लगाने से बाल रूखे नहीं पड़ते.
  • कुछ खास हेयर सीरम में यूवी प्रोटेक्‍शन फार्मूला होता है. जो कि बालों को लगातार सूरज की किरणों से बचाता है.
  • कंडीशनिंग तेल की जगह पर आप हेयर सीरम का प्रयोग कर के बालों को सुंदर बना सकती हैं. इससे बाल चिपचिप नहीं करते और अच्‍छे से संभाले भी जा सकते हैं.

ई सिगरेट का सेवन है जानलेवा

सिगरेट पीना स्वास्थ के बहुत हानिकारक है. इससे स्वास्थ संबंधित बहुत सी बीमारियां होती हैं. फेफड़ों के लिए खासकर के ये हानिकारक होता है. सिगरेट में पाए जाने वाले निकोटीन का प्रभाव सिगरेट पीने के 40 मिनट बाद भी रहता है. बदलते वक्त के साथ ये लोगों में एक फैशन के तौर पर उभर रहा है और इसका स्वरूप भी बदल रहा है. आज एक बड़ी आबादी में ई सिगरेट पीने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. लोगों का मानना है कि ई सिगरेट पीने से लोगों की सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है. पर असल बात धारणाओं के बिल्कुल उलटा है.

ई सिगरेट से स्वास्थ पर होने वाले प्रभावों के बारे में हाल ही मे एक स्टडी हुई. आइए जाने कि इससे क्या बातें सामने आई हैं.

ईसिगरेट पर हुई एक स्टडी की माने तो इसका सेवन करने वाले लोगों में डिप्रेशन होने की संभावना दोगुनी हो जाती है. इसके बाद जो लोग इसके स्वास्थ पर नकारात्मक असर ना करने का दावा करते रहे, उनकी बातें धरी की धरी रह गईं. इस स्टडी को और भी विश्वसिनिय बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने करीब 96,000 लोगों को शामिल किया. इस स्टडी के जो परिणाम आए वो काफी चिंताजनक रहे.  शोध के मुताबिक जो लोग ई सिगरेट का सेवन करते हैं, उन्हे हार्ट अटैक से होने वाला खतरा 56 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. वहीं लंबे समय तक इसका सेवन करने से ब्लड क्लोट की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है.

स्टडी में शामिल जानकारों का कहना है कि ‘हमारी ये स्टडी जो लोग सिगरेट का सेवन करते हैं, उनकी आंखे खोलने के लिए काफी है. ये समझना जरूरी है कि आप ई सिगरेट कम  पिएं या ज्यादा, आपको हार्ट अटैक होने का खतरा बना रहेगा.’

रंगों से बच्चों का ना हो नुकसान, ऐसे रखें ख्याल

त्योहारों में बच्चों की धूम रहती है, उनका उत्साह सातवें आसमान पर रहता है. इस दौरान मां बाप को अपने बच्चों के लिए अधिक सतर्क रहने की भी जरूरत होती है. मां बाप को अपने बच्चों की सुरक्षा को पहले ही सुनिश्तित कर लेनी चाहिए. इसी क्रम में हम आपको कुछ जरूरी टिप्स देने वाले हैं जिसकी मदद से आप अपनी और अपने बच्चों की होली यादगार और मजेदार बना सकते हैं.

 सिंथेटिक कलर्स को कहें ना

सिंथेटिक कलर्स बच्चों के लिए काफी हानिकारक होते हैं. ये बच्चों की आंखों में, त्वचा पर, नाक, कान में जा कर काफी नुकसान पहुंचाते  हैं. कोशिश करें की बच्चे हर्बल कलर्स का इस्तेमाल करें. ये कलर्स बच्चों के लिए सेफ होता है और साथ में आसानी से छूट भी जाता है.

करें सही कपड़ों का चुनाव

बच्चों को फुल स्लीव का शर्ट या कुर्ता, पायजामा या पैंट पहनाएं. इससे उनकी त्वचा ढंकी रहेगी.

गौगल्स का इस्तेमाल करें

बच्चों की आंखों को रंगों से नुकसान ना पहुंचे इसलिए उन्हें गौगल्स दें. कोशिश करें कि गौगल्स कलरफुल हो. इससे बच्चे स्टाइलिश दिखेंगे और आंखें भी सेफ रहेंगी.

बचाएं त्वचा को

रंगों से सबसे अधिक नुकसान त्वचा का  होता है. स्किन की सेफ्टी के लिए पेट्रोलियम जेली या सरसो/ नारियल का तेल लगाएं. ये आपकी त्वचा को रंगों से बचाएंगे.

बनाएं पलकों को घना

लड़कियों की खूबसूरती उनकी आंखों से होती है और अगर उनकी पलके घनी हुईं तब तो इन आंखों का कहर देखिये. आपने देखा होगा कि कई महिलाओं की पलके घनी नहीं होती इसलिये वे अपनी आंखों की सुंदरता को उभारने के लिये नकली या आर्टिफीशियल पलको का इस्‍तमाल करती हैं. लेकिन जब आप अपनी पलको को प्राकृतिक रूप से घना बना सकती हैं, तो आपको इतनी तकलीफ उठाने की जरुरत ही क्‍या है. आइये जानते हैं कि किस तरह से आप अपनी पलको को घना और मोटा बना सकती हैं-

कैस्‍टर तेल

रात को सोते समय हर रोज अपनी पलको पर यह तेल लगाएं. चाहे तो तेल को हल्‍का सा गरम भी कर सकती हैं. इसको दो महीने तक के लिये लगाइये और फिर देखिये कि आपकी पलके किस तरह से घनी हो जाती हैं.

वि‍टामिन इ तेल

एक छोटा सा आइ लैश ब्रश लें और उसे इस तेल में डुबा कर रोजाना अपनी आंखों की पलको पर लगाएं. चाहें तो विटामिन इ की कुछ टैबलेट को क्रश कर के इस तेल के साथ मिला कर लगा सकती हैं. अगर आपकी पलको पर खुजली होती है तो वह भी इस तेल को लगाने से खतम हो जाएगी.

वैसलीन

अगर आप किसी प्रकार का तेल नहीं लगाना चाहती, तो वैसलीन इसका सबसे बेहतर विकल्‍प है. रोजाना रात को सोने से पहले अपनी पलको पर वैसलीन लगाएं. उसके बाद सुबह उठते ही अपनी पलको पर हल्‍के गरम पानी से छींटे मार कर साफ करें वरना पूरे दिन वह चिपचिपाती रहेंगी.

प्रोटीन डाइट

अगर आपका शरीर स्‍वस्‍थ्‍य रहेगा, तो जाहिर सी बात है कि आपकी आंखें और पलके भी ठीक रहेंगी. रोजाना अपनी डाइट में प्रोटीन खाइये क्‍योंकि त्‍वचा, बाल, नाखून और पलको को इसकी बहुत जरुरत होती है. अपने आहार में दाल, मछली, मीट, चने और मेवे आदि को शामिल कीजिये.

ब्रश

जिस तरह से हम अपने बालों को झाडते हैं, ठीक उसी तरह से हमें अपनी पलको को भी ब्रश से झाडना चाहिये. चाहें तो मस्‍कारे का ब्रश भी प्रयोग कर सकती हैं. पलको को रोजाना दो बार ब्रश से झाड़े.

वरमाला डाल रही प्रेमिका को प्रेमी ने गोली मार खुद को गोली मारी

बछरावां थाना क्षेत्र के अंतर्गत बछरावा मौरावा मार्ग पर स्थित गजियापुर गांव में बीती रात गांव के पुत्ती लाल की बेटी आशा देवी उम्र 22 वर्ष की शादी कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर चल रही थी. कुसहरी नवाबगंज जनपद उन्नाव से आई आशा की बारात में बराती ढोल नगाड़े पर नाच रहे थे. दूल्हा और दुल्हन जय माल के कार्यक्रम के लिए बने स्टेज पर बैठे थे.

दूल्हा दुल्हन एक दूसरे को वरमाला डाल रहे तभी गांव के ही दुल्हन के प्रेमी बृजेंद्र कुमार, पुत्र जागेश्वर कुमार, उम्र 26 वर्ष. प्रेमिका को दूसरे के गले में वरमाला डालना सहन नहीं हुआ और उसने अपने चाचा लोधेश्वर की लाइसेंसी डीबीबीएल बंदूक से पहले तो प्रेमिका को गोली मार दी. फिर स्टेज पर ही स्वयं को गोली मार ली और दोनों लहूलुहान हो वहीं पर गिर पड़े. घटना से मौके पर भगदड़ मच गई.

varmala

आनन फानन दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बछरावां लाया गया जहां से उन्हें जिला अस्पताल रायबरेली रेफर कर दिया गया. जहां दोनों की मौत हो गई. घटना के बाद शादी की खुशियां मातम में बदल गई. बराती व घराती बिना खाए पिए ही वापस चले गए और दोनों मृतक परिवारों में मातम छा गया.

अचानक हुई इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई. घटना की सूचना पर कोतवाल रावेंद्र सिंह पुलिस फोर्स मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को सूचना देकर जांच पड़ताल शुरू की. घटना की जानकारी होने पर पुलिस अधिक्षक सुनील कुमार सिंह, एडिशनल एसपी शशि शेखर सिंह, क्षेत्राधिकारी आर पी शाही सहित आसपास के कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई. कोतवाल रावेंद्र सिंह ने बताया कि प्रेम प्रसंग में घटना घटित हुई है.मामले की जांच पड़ताल की जा रही है मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की जाएगी.

यह पूरा खिलाड़ी, क्या है आधा कप्तान?

एक बार जब सचिन तेंदुलकर से पूछा गया था कि उन के बनाए गए रिकार्ड्स को कौन सा बल्लेबाज खिलाड़ी तोड़ सकता है तो उन्होंने बेझिझक विराट कोहली और रोहित शर्मा का नाम लिया था. तब से अब तक ये दोनों खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट टीम को अपनी सेवाएं दे रहे हैं और विराट कोहली तो जिस अंदाज में फिलहाल खेल रहे हैं, उस से लगता है कि वे सचिन तेंदुलकर की कही बात को सच साबित कर दिखाएंगे.

30 साल के विराट कोहली ने अब तक 77 टेस्ट मैच खेले हैं जिन में उन्होंने 53.76 पगलऔसत से 6,613 रन बना लिए हैं. उन्होंने अब तक 25 शतक भी लगा लिए हैं. वनडे मैचों की बात करें तो उन्होंने 226 मैच खेल कर 59.79 की औसत से 10,823 रन बटोर लिए हैं. उन्होंने अब तक 41 शतक भी जमाए हैं.

ट्वेंटी20 मैचों में भी विराट कोहली कमाल का खेल रहे हैं. उन्होंने ऐसे 67 मैचों में 50.28 की औसत से 2,263 रन ठोंक डाले हैं. हालांकि उन्होंने अभी तक कोई शतक नहीं लगाया है.

अपने बल्ले से इतने कारनामे करने के बाद भी विराट कोहली की बतौर कप्तान इमेज ज्यादा अच्छी नहीं बन पाई है, क्योंकि आज भी जब वे मैच में कहीं फंस जाते हैं तो महेंद्र सिंह धौनी की ओर ताकने लगते हैं. अभी हाल ही में औस्ट्रेलिया के खिलाफ मोहाली में खेला गया चौथा वनडे मैच उन की कप्तानी पर ही सवाल उठा गया है. इस मैच में 358 रन बनाने के बाद भी भारत हार गया था. उस मैच में महेंद्र सिंह धौनी को नहीं खिलाया गया था.

इसी मसले पर हमारे पूर्व क्रिकेटर भारतीय स्पिनर और कप्तान बिशन सिंह बेदी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कल दिल्ली में होने वाले भारतऑस्ट्रेलिया के बीच 5वें और आखिरी वनडे मैच से पहले कहा कि विराट कोहली टीम के ‘आधे कप्तान’ हैं. महेंद्र सिंह धौनी की गैरहाजिरी में वे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे वनडे में असहज नजर आ रहे थे.

बिशन सिंह बेदी ने सवाल उठाया कि आखिर महेंद्र सिंह धौनी को आखिरी के 2 वनडे मैचों में आराम देने की क्या जरूरत थी? हालांकि बिशन सिंह बेदी मानते हैं कि धौनी अब युवा नहीं रह गए हैं, लेकिन मैदान में कप्तान विराट कोहली को उन की जरूरत होती है. उन के बिना वे असहज नजर आते हैं. ये अच्छे संकेत नहीं हैं.

इन बातों में इसलिए भी दम लग रहा है क्योंकि औस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे इतिहास में यह पहला मौका था जब भारतीय क्रिकेट टीम को 350 से ज्यादा रन बनाने के बाद भी हार का सामना करना पड़ा. इस से पहले भारत को 23 बार साढ़े 3 सौ से ज्यादा रन बनाने पर हमेशा जीत मिली थी. अब मोहाली में मिली हार से विराट कोहली की कप्तानी पर सवाल उठने लगे हैं. लोग दबी जबान में कहने लगे हैं कि महेंद्र सिंह धौनी के न रहने से विराट कोहली की कप्तानी कमजोर पड़ जाती है.

इस की जो सब से अहम वजह दिखाई पड़ती है वह यह है कि विराट कोहली में महेंद्र सिंह धौनी की तरह ‘कैप्टन कूल’ होने का गुण नहीं दिखाई देता है. वे आज भी मैदान पर किसी 18 साल के नए खिलाड़ी जैसा बरताव करते दिखाई देते हैं. वे जैसे जीतने के लिए ही खेलते हैं. इस जज्बे में कोई बुराई नहीं है पर जब भी उन के हाथ से मैच फिसलता दिखाई देता है तो तनाव उन के चेहरे पर हावी हो जाता है. मुश्किल घड़ी में किसे क्या कहना है या क्या काम कराना है उस में उन के जैसे हाथपैर फूल जाते हैं.

ऑस्ट्रेलिया के साथ हो रही वनडे मैचों की इस सीरीज के तीसरे मैच में जब ऑस्ट्रेलिया को आखिरी ओवर में जीतने के लिए 14 रन चाहिए थे तो महेंद्र सिंह धौनी के कहने पर ही विराट कोहली ने विजय शंकर को गेंद पकड़ाई गई थी. उस के बाद का नतीजा सब जानते हैं.

अभी तो विराट कोहली का बल्ला खूब बोल रहा लेकिन कल को अगर उन पर ‘बैड फॉर्म’ की गाज गिरेगी तो इस का असर उन की कप्तानी पर भी पड़ेगा. तब कहीं यह ‘आधी कप्तानी’ भी उन के हाथ से न निकल जाए.

रूसी को जड़ से मिटाने में एलोवेरा है कारगर

क्या आप भी रूसी से परेशान रहते हैं और उससे छुटकारा पाने के लिये किसी भी प्रकार का घरेलू नुस्‍खा अपनाने से नहीं चूकते. यह आपके सिर और बालों के लिए काफी फायदेमंद है.

एलोवेरा लगाने से सिर की खुशकी दूर होती है. इसमें कीटाणुओं को नाश करने के गुण होते हैं जो रूसी पैदा करने वाले इंफेक्‍शन को दूर करता है. इसके अलावा एलोवेरा बालों की जड़ों को भी मजबूत बनाता है तथा बालों में शाइन भी भरता है. आइए जानें अगर सिर में रूसी है तो एलोवेरा जैल और अन्‍य प्राकृतिक सामग्रियां मिला कर कैसे रूसी को दूर करें.

एलोवेरा और नीम तेल

नीम का तेल एंटीबैक्‍टीरियल गुणों से भरा है जो सिर में पपड़ी नहीं जमने देता. इसे लगाने से सिर की खुजली भी बंद हो जाती है. 3 चम्‍मच एलोवेरा जैल ले कर उसमें 9 बूंद नीम की बूंद मिक्‍स करें. फिर इसे सिर पर लगाएं और थोड़ी देर के बाद सिर धो लें.

ताजा एलोवेरा जैल

इसे लगाने के लिये आप सीधे एलोवेरा की पत्‍ती से जैल को छील कर निकाल सकते हैं. फिर इसे सिर पर लगाएं और रातभर ऐसे ही छोड़ दें. उसके बाद दूसरे दिन सुबह सिर धो लें.

कपूर के साथ एलोवेरा जैल

कपूर को सिर पर लगाने से सिर को ठंडक मिलती है और संक्रमण पैदा करने वाले रोगाणुओं का भी नाश होता है. इस पेस्‍ट को बनाने के लिये 3 चम्‍मच एलोवेरा जैल में थोड़ा सा कपूर पीस कर मिक्‍स करें और सिर पार लगा कर कुछ घंटों में सिर धो लें.

एलोवेरा और नींबू

नींबू में अम्लीय गुण रूसी पैदा करने वाले फंगस को खतम कर देते हैं. जब इसे एलोवेरा के साथ मिक्‍स किया जाता है तो रूसी तुरंत ही खतम होनी शुरु हो जाती है. 3 चम्‍मच एलोवेरा जैल में 2 चम्‍मच नींबू का रस मिलाएं और सिर पर 20 मिनट तक लगाए रखने के बाद सिर धो लें.

एलोवेरा और टी ट्री आयल

टी ट्री आयल लगाने से सिर में कभी रोगाणु नहीं पैदा होंगे क्‍योंकि यह एंटीबैक्‍टीरियल गुणों से भरा है. एलोवेरा जैल में अगर 5 बूंद टी ट्री आयल मिक्‍स कर के सिर पर लगाएं तो रूसी की समस्‍या नहीं होगी. इसे रात में लगा कर सो जाइये और दिन में सिर धो लीजिये.

साधु संतों की असलियत

साधुसंतों और पंडेपुजारियों की बात भगवान क्यों नहीं सुन रहा, इस का जवाब शायद ही भगवान के ये दलाल दे पाएं, मगर इन का विरोधप्रदर्शन करना यह साबित करता?है कि भगवान का वजूद कोरी गप है.

भक्तों को दिनरात भगवान की महिमाएं गागा कर बताने वाले साधुसंत पिछले 1 साल से भारतीय जनता पार्टी की सरकार के सामने कभी गिड़गिड़ाते हैं तो कभी धौंस देने लगते हैं कि हमारी मांगें पूरी करो नहीं तो हम सरकार गिरा देंगे, श्राप दे देंगे या फिर राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेंगे.

इन में से कुछ नहीं कर पाते तो मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की धमकी देने लगते हैं. इन संतों को यह ज्ञान प्राप्त हो गया है कि जो उन्हें चाहिए वह मंदिर में बैठी पत्थर की मूर्ति नहीं दे सकती, चाहें तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जरूर दे सकते हैं.

क्या हैं मांगें

सुबहशाम आरती, प्रवचन, यज्ञहवन कर भक्तों से पैसा झटक अपना पेट पालने वाले इन मुफ्तखोर साधुसंतों की मांगें बेहद साफ हैं कि मठमंदिरों की जमीनजायदाद हमें दे दो, खेतीकिसानी के लिए भी जमीन दो, मठमंदिरों में सरकारी दखलंदाजी बंद करो और चूंकि भक्त को भगवान तक हम पहुंचाते हैं इसलिए उस की पेंशन भी दो.

ज्यादातर साधुसंत कितनी शाही जिंदगी जीते हैं यह इन्हें नजदीक से देखने वाले बेहतर जानते हैं. शुद्ध घी में डुबो कर निकाली गई तर रोटी और पकवान ये खाते हैं. इन के साथ सूमो छाप अधनंगे चेलों की पूरी फौज चलती है तो डर लगता है कि मांगने पर नहीं दिया गया तो छीन लेने की कूवत इन में है. लिहाजा, चुपचाप दे दो.

फिर भी ये साधु बड़े ‘सीधे’ होते हैं. भक्तों को बेवजह तंग नहीं करते, धर्म क्या होता है इस की नुमाइश भर करते हैं. कुंभ के मेले में इन की शानोशौकत की नुमाइश व दुकान देखने लायक होती है. भाला, कटार, तलवार से ले कर आधुनिक रिवाल्वर तक ये रखते हैं.

भगवान के इन बंदों को डर किस का है यह तो इन का भगवान ही कहीं हो तो जाने लेकिन उजागर यह होता है कि कथनी और करनी के मामले में ये नेताओं के भी पितामह हैं.

अब शायद प्रदेश के साधुसंतों को चलनेफिरने में भी तकलीफ होने लगी है, लिहाजा, ये चाहते हैं कि सबकुछ इन का हो, खासतौर से मठमंदिर की जमीनें और जायदाद, जिस की कीमत अरबोंखरबों में होती है. लोगों को माया के मोह से दूर रहने का पाठ पढ़ाने वाले साधुसंत खुद किस हद तक माया के फेर में पड़े हैं यह इन की मंशा और मांगों से साफ जाहिर होता है.

कहां है भगवान

भगवान सर्वव्यापी है,  पालनहार है, दाता है और जो मांगो वह देता है जैसे प्रचलित वाक्यों को बांच और बेच कर जी रहे इन साधुसंतों की मांगों की फेहरिस्त देख हैरत कम चिंता ज्यादा होती है कि यदि सच में भगवान होता तो अपने इन विक्रेताओं की तो जरूर सुनता.

धर्मग्रंथों के मुताबिक सबकुछ भगवान का है बाकी जो हो रहा है वह उस की लीला है. राज्य सरकार इस लीला पर यकीन न करते हुए इन की मांगों पर गौर नहीं कर रही तो जाने क्यों साधुसंत सब से बड़ी अदालत यानी भगवान के दरबार में गुहार नहीं लगा रहे.

दरअसल, इन्हें बेहतर मालूम है कि भगवान एक ऐसी कल्पना है जिस से मंदिर में बैठ कर तबीयत से पैसा कमाया जा सकता है. लोगों का भरोसा बना रहे इसलिए धार्मिक प्रपंच चलते रहने चाहिए.

दिनरात भगवान की सेवा करने वालों ने सरकार के सामने गिड़गिड़ाते हुए भगवान की पोल खोल  कर रख दी है कि वह कहीं नहीं है. होता तो किसी और के सामने रिरियाने की जरूरत नहीं पड़ती, न किसी मंत्री, मुख्यमंत्री का घर घेरना पड़ता.

भगवान हिफाजत करता है, यह दावा भी कितना खोखला है. इस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विंध्य इलाके में सरकार पंडेपुजारियों को लाइसेंसी रिवाल्वर देने की घोषणा कर चुकी है क्योंकि आएदिन वहां मंदिर लुटते रहते हैं यानी सरकार को भी मालूम है कि भगवान नहीं है. आज तक किसी मूर्ति ने लुटेरे की गर्दन नहीं पकड़ी.

चूंकि कमाई का जरिया चला जाता है इसलिए साधुसंत इकट्ठा हो कर हायतौबा मचाने लगते हैं कि देखो, क्या जमाना आ गया है कि भगवान का घर भी चोरलुटेरे नहीं छोड़ रहे. हकीकत यह है कि भगवान को यह नहीं छोड़ रहे. छोड़ दें तो न मंदिर रहेंगे न जायदाद न फसाद तो लूटपाट की नौबत ही नहीं आएगी.

ये चोरलुटेरे हैं तो कानूनन अपराधी ही, मगर इन का ज्ञान साधुसंतों से बड़ा और ज्यादा लगता है. इन्हें मालूम है कि पंडितजी वगैर कुछ किए, सारी दक्षिणा ले जा कर पंडिताइन को दे आएंगे तो हम क्यों रहम करें. जो भी है भगवान का है. अब चाहे उसे सेवक उठाए या हम लें, फर्क क्या पड़ता है सिवा इस के कि पकड़े गए तो फौजदारी का मुकदमा चलेगा और हमें सजा हो जाएगी. इन की नजर में सजा भी भगवान की मरजी है.

कौन है असली भगवान

धर्म के नाम पर मठ व मंदिरों की अरबों की जमीनों पर कब्जा जमाए बैठे साधुसंत कानूनन इसे अपने नाम चाहते हैं. भगवान होता तो शायद दे देता मगर सरकार जाने क्यों हिचकिचा रही है, जो न श्राप से डर रही न सत्ता छिन जाने का खौफ खा रही है.

भगवान के होते आंदोलन और भूख हड़ताल जैसा बेकार का काम कर रहे साधुसंत मुख्यमंत्री के आगे हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाएं तो लगता है असली भगवान तो यही हैं जिन्हें जनता ने वोट दे कर चुना है, किसी भगवान ने मनोनीत नहीं किया.

इन साधुसंतों की दादागीरी शिवराज सिंह 1 साल से बरदाश्त कर रहे हैं और इन की धार्मिक व राजनीतिक अहमियत समझते, उन्हें टरका भी रहे हैं. मगर आंदोलन खत्म नहीं हो रहा. वजह, तमाम हिंदूवादी संगठन इन साधुसंतों के साथ हैं और विधानसभा चुनाव में भाजपा को जिताने को इन्होंने वोट जुटाए.

अपने किए की जरूरत से ज्यादा कीमत ये मांग रहे हैं और सरकार इन की मांगें पूरा कर आम आदमी की नाराजगी मोल नहीं लेना चाह रही. लोकसभा चुनावों की शिकस्त भाजपा गले नहीं उतार पा रही है और इसी साल स्थानीय निकायों के चुनाव भी हैं. ऐसे में वोटर अगर बिदक गया तो सिंहासन हिलना तय है. इस धर्मसंकट से शिवराज सरकार कैसे निबटेगी यह देखना वाकई दिलचस्पी वाली बात होगी.

अहम बात इन साधुसंतों द्वारा यह जता देना है कि भगवान कहीं नहीं है. फिर धर्म के नाम पर ढोंग, पाखंड और लूटपाट क्यों. जो नहीं है उस के नाम पर पैसा कमाना, बादशाहत चलाना वाकई किसी चमत्कार से कम नहीं.

जो चीजें भगवान नहीं दे पाया अगर सरकार दे देगी तो जाहिर है, भगवान से बड़ी साबित हो जाएगी और लोगों का भरोसा भगवान से उठे यह भाजपा सरकार नहीं चाहती. रही बात साधुसंतों की तो वे अपनी पर उतारू हो आए हैं और कानून अपने हाथ में लेने का संकेत देने लगे हैं. ऐसे में समाज पर भार और परजीवी साधुसंतों को दानदक्षिणा दे कर पालने वाले लोग खुद का, समाज और देश का नुकसान कर रहे हैं.

अच्छे दिनों की तलाश

अच्छे दिन वाकई आ गए हैं. अब इतनी सारी जांचें हो रही हैं कि ये अच्छे दिन छिपे कहां पड़े हैं. दिल्ली में ईडी यानी ऐनफोर्समैंट डिपार्टमैंट 20-30 घंटों की पूछताछ कर रहा है कि प्रियंका गांधी के पति रौबर्ट वाड्रा ने ये अच्छे दिन कहां छिपा रखे हैं. उधर सीबीआई कोलकाता पुलिस के ममता बनर्जी के चहेते राजीव कुमार से शिलांग में पूछताछ कर रही है कि ये अच्छे दिन बंगाल में कहां हैं.

सरकारी वकील व अफसर पैरिस, लंदन, एंटीगुआ, पोर्ट औफ स्पेन जैसी जगह जा कर विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी से पूछ रहे हैं कि कहीं अच्छे दिन, नौकरियां, 15 लाख वहां तो नहीं छिपे हुए हैं. सरकार जोशखरोश से पूछ रही है कि अगस्ता हैलीकौप्टरों की फाइलों के पीछे तो नहीं हैं न अच्छे दिन.

सुप्रीम कोर्ट भी पूछने लगा है. मायावती से पूछा जा रहा है कि दलित स्मारकों में बनी मूर्तियों पर अच्छे दिन तो नहीं बैठे. सुप्रीम कोर्ट ने काफी दिन तक सहारा के सुब्रतो राय को जेल में रखा कि सरकार के अच्छे दिनों का बता दे.

किसी को यह नहीं पूछना कि अच्छे दिन तो पटेल की बेमतलब की विशाल मूर्ति में गंवाए जा चुके हैं. कोई यह नहीं जानना चाहता कि कितने अच्छे दिन कुंभ मेले के पाखंडियों पर बरबाद कर दिए गए हैं. सबरीमाला में सुरक्षा पर देश के अच्छे दिन लग रहे हैं पर इन की गिनती कोई नहीं करना चाहता. राफेल हवाईजहाजों के साथ जनता के कितने ही अच्छे दिन फ्रांस पहुंच चुके हैं पर उस की पूछताछ नहीं की जा रही.

प्रधानमंत्री तरह तरह की टोपियां लगा कर लोगों को कहना चाह रहे हैं कि सारे अच्छे दिन इन टोपियों में हैं. टोपी वाला इस देश में महान माना जाता है और दलितों को सदियों टोपी पहनने की इजाजत नहीं थी. केरल में तो औरतों को ऊपरी कपड़ा पहनने तक की इजाजत नहीं थी और बाल विधवाओं को एक छोटी सूती साड़ी पहन कर अच्छे दिन गुजारने पड़ते थे. लगता तो यही है कि भाजपा सरकार उन्हीं अच्छे दिनों को लाना चाह रही है जब भूख, अकाल, प्लेग, अनाथ अच्छे दिनों की पहचान थे.

ये सारी जांचें क्या पता करेंगी? सहीगलत तो वर्षों में पता चलेगा. अभी तो अदालत तक मामला भी नहीं गया है. अभी किसी भी जांच में साबित नहीं हुआ है कि कोई दोषी है या नहीं. संप्रग सरकार में लाखोंकरोड़ों के घोटाले भाजपा के छिपे समर्थक सीएजी विनोद राय ने देश पर थोपे थे पर उस में से 5 साल में 2 भी अच्छे दिन नहीं निकले हैं.

ये जांचें सिर्फ तंग करने के लिए हैं, यह तो अब साफ है क्योंकि सिर्फ भाजपा विरोधियों के खिलाफ हो रही हैं. एक भी भाजपा के दूर के रिश्तेदार के खिलाफ नहीं है जिस ने अच्छे दिन अपने मंदिर में छिपा रखे हैं. वह तो पुण्य का काम है. इंद्र अगर अहल्या को भोगे तो दैविक काम है. अहल्या शिकार बने तो पापिन है. उस के अच्छे दिन तब आएंगे जब राम का पैर लगेगा. सही पैरों में लोट लो, अच्छे ही अच्छे दिन हैं.

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