एक बार जब सचिन तेंदुलकर से पूछा गया था कि उन के बनाए गए रिकार्ड्स को कौन सा बल्लेबाज खिलाड़ी तोड़ सकता है तो उन्होंने बेझिझक विराट कोहली और रोहित शर्मा का नाम लिया था. तब से अब तक ये दोनों खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट टीम को अपनी सेवाएं दे रहे हैं और विराट कोहली तो जिस अंदाज में फिलहाल खेल रहे हैं, उस से लगता है कि वे सचिन तेंदुलकर की कही बात को सच साबित कर दिखाएंगे.

30 साल के विराट कोहली ने अब तक 77 टेस्ट मैच खेले हैं जिन में उन्होंने 53.76 पगलऔसत से 6,613 रन बना लिए हैं. उन्होंने अब तक 25 शतक भी लगा लिए हैं. वनडे मैचों की बात करें तो उन्होंने 226 मैच खेल कर 59.79 की औसत से 10,823 रन बटोर लिए हैं. उन्होंने अब तक 41 शतक भी जमाए हैं.

ट्वेंटी20 मैचों में भी विराट कोहली कमाल का खेल रहे हैं. उन्होंने ऐसे 67 मैचों में 50.28 की औसत से 2,263 रन ठोंक डाले हैं. हालांकि उन्होंने अभी तक कोई शतक नहीं लगाया है.

अपने बल्ले से इतने कारनामे करने के बाद भी विराट कोहली की बतौर कप्तान इमेज ज्यादा अच्छी नहीं बन पाई है, क्योंकि आज भी जब वे मैच में कहीं फंस जाते हैं तो महेंद्र सिंह धौनी की ओर ताकने लगते हैं. अभी हाल ही में औस्ट्रेलिया के खिलाफ मोहाली में खेला गया चौथा वनडे मैच उन की कप्तानी पर ही सवाल उठा गया है. इस मैच में 358 रन बनाने के बाद भी भारत हार गया था. उस मैच में महेंद्र सिंह धौनी को नहीं खिलाया गया था.

इसी मसले पर हमारे पूर्व क्रिकेटर भारतीय स्पिनर और कप्तान बिशन सिंह बेदी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कल दिल्ली में होने वाले भारतऑस्ट्रेलिया के बीच 5वें और आखिरी वनडे मैच से पहले कहा कि विराट कोहली टीम के ‘आधे कप्तान’ हैं. महेंद्र सिंह धौनी की गैरहाजिरी में वे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे वनडे में असहज नजर आ रहे थे.

बिशन सिंह बेदी ने सवाल उठाया कि आखिर महेंद्र सिंह धौनी को आखिरी के 2 वनडे मैचों में आराम देने की क्या जरूरत थी? हालांकि बिशन सिंह बेदी मानते हैं कि धौनी अब युवा नहीं रह गए हैं, लेकिन मैदान में कप्तान विराट कोहली को उन की जरूरत होती है. उन के बिना वे असहज नजर आते हैं. ये अच्छे संकेत नहीं हैं.

इन बातों में इसलिए भी दम लग रहा है क्योंकि औस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे इतिहास में यह पहला मौका था जब भारतीय क्रिकेट टीम को 350 से ज्यादा रन बनाने के बाद भी हार का सामना करना पड़ा. इस से पहले भारत को 23 बार साढ़े 3 सौ से ज्यादा रन बनाने पर हमेशा जीत मिली थी. अब मोहाली में मिली हार से विराट कोहली की कप्तानी पर सवाल उठने लगे हैं. लोग दबी जबान में कहने लगे हैं कि महेंद्र सिंह धौनी के न रहने से विराट कोहली की कप्तानी कमजोर पड़ जाती है.

इस की जो सब से अहम वजह दिखाई पड़ती है वह यह है कि विराट कोहली में महेंद्र सिंह धौनी की तरह ‘कैप्टन कूल’ होने का गुण नहीं दिखाई देता है. वे आज भी मैदान पर किसी 18 साल के नए खिलाड़ी जैसा बरताव करते दिखाई देते हैं. वे जैसे जीतने के लिए ही खेलते हैं. इस जज्बे में कोई बुराई नहीं है पर जब भी उन के हाथ से मैच फिसलता दिखाई देता है तो तनाव उन के चेहरे पर हावी हो जाता है. मुश्किल घड़ी में किसे क्या कहना है या क्या काम कराना है उस में उन के जैसे हाथपैर फूल जाते हैं.

ऑस्ट्रेलिया के साथ हो रही वनडे मैचों की इस सीरीज के तीसरे मैच में जब ऑस्ट्रेलिया को आखिरी ओवर में जीतने के लिए 14 रन चाहिए थे तो महेंद्र सिंह धौनी के कहने पर ही विराट कोहली ने विजय शंकर को गेंद पकड़ाई गई थी. उस के बाद का नतीजा सब जानते हैं.

अभी तो विराट कोहली का बल्ला खूब बोल रहा लेकिन कल को अगर उन पर ‘बैड फॉर्म’ की गाज गिरेगी तो इस का असर उन की कप्तानी पर भी पड़ेगा. तब कहीं यह ‘आधी कप्तानी’ भी उन के हाथ से न निकल जाए.

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