Download App

जमीनों की मिल्कीयत का मसला

जमीनों की मिल्कीयत के लेकर किस तरह लोगों को कानून पर भरोसा नहीं, भीड़ और हिंसा पर है और किस तरह अदालतों की देरी बेगुनाहों को ङ्क्षजदगी भर जेलों में बंद रख सकती है, इस के उदाहरण देश के हर गांव कस्बे में मिल जाएंगे. यहां जमीन पर या मकान पर कब्जा कानून और उस के पुलिस वाले हाथ नहीं दिलाते, दावेदारों की जुटाई भीड़ दिलाती हैं और चाहे जान चली जाए और चाहे हम कितने ही नारे लगाते रहें कि अदालतों पर हमें भरोसा है, असल में भरोसा तो अपनी खुद ही लाठियों, डंडों, लोहे की रौड़ों, कुल्हाडिय़ों, फारसों, मालों से लैस भीड़ पर होता है जो 2-3 को मार कर कब्जा दिलाती है.

यह पक्का है जब भी भीड़ किसी को मार डालती है तो मरने वालो के घरवाले  तो सदा के लिए मिल्कीयत को भूल जाते हैं, मारने वालों में भी कुछ महिनों, सालों जेलों में रहते है और भीड़ का मकसद कानून की मशीनरी में पिस ही नहीं जाता, पड़ेपड़े उस में घुन लग जाता है और चीटियां और चूहे उसे खा जाते हैं.

असल के एक घंटे गांव बागबर में मकान को ले कर एक झगड़ा शुरू हुआ तो एक गुट ने 15-20 को जमा कर मकान बनाने वाले के घर पर हमला कर दिया. बचने के लिए एक मकान में छिपा पर भीड़ ने उसे ढूंढ लिया और मार कर ब्रह्मïपुत्र में लाश को बहा डाला. मिल्कीयत का सवाल खत्म हो गया? नहीं मुकदमा तो बनेगा ही. पुलिस आई और 32 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. पहला फैसला 17 साल बाद सेशन कोर्ट ने 2015 में दिया. 32 सजाएं मिलीं. जिन्हें सजा मिली उन्होंने हाई कोर्ट में अपील की जिस ने कुछ को छोड़ दिया और कुछ की सजा जारी रखी.

ये भी पढ़ें- बढ़ते अमीर, घटते ग़रीब

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की जहां एक को छोड़ कर बाकी सबको दरखास्त नामंजूर कर दी गई. जिस का मामला सुना गया उस का कहना था कि वह तो बस उस घर के बराबर में रहता था जहां मारने वाला छिपा था और उस ने डर के मारे बता दिया कि भाग कर आया जना वहां छिपा है. भीड़ ने उसे मारा जिस में वह शामिल नहीं था. 2021 दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने उसे रिहा कर दिया. 23 साल बाद कि वह मारने वालों में शामित नहीं था चाहे उस ने बता दिया कि मरने वाला कहां छिपा है.

सवाल अदालती फैसले पर नहीं है, सवाल है कि हम कैसे कह सकते हैं कि देश में कानून का राज चलता है जब न्याय पाने के लिए 23 साल इंतजार करना पड़ता है? हम कैसे देश में रह रहे हैं जहां मिल्कीयत के मसले पर से ज्यादा की भीड़ जमा की जा सकती है और बेरहमी से एक जने को मार कर बजाए दफनाने के लाश को नदी में बहा दिया जाता है. हम किस मंदिर मसजिद की बात कर रहे हैं जब सैंकड़ों साल पुराने धर्म हम से इतनी मानवीयता की बूंदें भी पिला सकते कि यह मसला आपस में तय कर सकें या आम अदालत में जा कर करें. वहां भी देर लगती पर कोई मरता तो नहीं, जेल तो नहीं जाता?

यह कैसा देश है जहां नेताओं को वोटों की तो पड़ी रहती है पर जनता के दुखों की ङ्क्षचता नहीं है. न दड़बों से चूहों से रह रहे लोगों की फिक्र है न जेलों में सड़ रहे उन लोगों की जिन के अपराध साबित नहीं हुए? हम कैसे कह सकते हैं कि हमें संविधान पर गर्व है जो हमें हक नहीं देता, हमें धर्म पर गर्व है जो हमें आदमी नहीं बनाता. कानून और धर्म दोनों बेहद पैसा खाते हैं. पुलिस और वकील एक तरफ, पंडे, पादरी, मुल्ला दूसरी तरफ. आम जनता उन्हीं का गुणगान करती पीढ़ी दर पीढ़ी हैरानपरेशान होती, नारेबाजी के सिवा कुछ नहीं कर पाती.

ये भी पढ़ें- उत्तर प्रदेश का चुनाव: योगी बनाम अखिलेश

Valentine’s Special: लव लैटर में आज भी है दम

एक वक्त था जब प्यार का इजहार करने के लिए प्रेम पत्र लिखे जाते थे. उस वक्त आज के जमाने की तरह न तो इंटरनैट था और न ही एसएमएस का जमाना. वह भी क्या दौर था, जब अपने दिल के भावों को कलम से पत्र पर उतारा जाता था. आज वैलेंटाइन डे पर प्रेमियों में एकदूसरे को फूलों का गुलदस्ता या फिर महंगेमहंगे कार्ड्स देने का चलन है. इस बीच अगर आप अपने वैलेंटाइन के लिए कुछ अनोखा करना चाहते हैं तो अपने हाथों से एक प्रेम पत्र लिख कर उसे सरप्राइज दे सकते हैं.

प्रेम पत्र लिखना भी एक कला है. कंप्यूटर का जमाना है. वैसे तो सबकुछ बनाबनाया मिल जाता है. पर आप के लिए सचमुच कोई खास है तो खास के लिए थोड़ी सी मेहनत तो बनती ही है. सब से पहले एक सुंदर सा पेपर लें. उस पर लिखावट को क्लासिक लुक देने के लिए आप ब्लू, ग्रीन, रैड आदि स्पार्कल पैन का उपयोग कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें- Valentine Special: तू नहीं, तो कोई और सही

लिखने के लिए मूड बनाएं

अपने वैलेंटाइन स्पैशल के लिए प्रेम पत्र लिखना है तो दिल में वह फीलिंग लाने के लिए कोई ऐसी जगह या रूम पसंद करें जहां आप के अलावा कोई न हो. वहां कोई रोमांटिक गाना चलाएं और फिर प्रेम पत्र लिखना शुरू कर दें.

कैसे करें शुरुआत

शुरुआत उसे जो नाम पसंद हो उस से करें. फिर यादगार पलों का जिक्र करते हुए अपनी फीलिंग्स का बखान करें. एक छोटा सा पैराग्राफ ऐसा लिखें जिस में अपने खास की ऐसी खूबियां हों, जो आप को अच्छी लगती हैं. उस में उस की ब्यूटी, सादगी, स्वभाव, नादानी आदि भी शामिल करें. लेखन में प्रामाणिकता रखें.

ये भी पढें- Valentine Special: तोहफा हो प्यार का, न कि उधार का

भावी प्लानिंग के बारे में लिखें

आप अपनी फीलिंग्स को पहली बार अपनी प्रियतमा या प्रेमी के समक्ष स्वीकार करना चाहते हैं तो उन्हें यह एहसास दिलाएं कि आप उन को बारबार देखने की उम्मीद में रहते हैं. ये सारी बातें वैसे तो मामूली व छोटीछोटी हैं पर एक मजबूत रिश्ते के लिए बहुत जरूरी हैं. अगर भविष्य में आप दोनों साथसाथ जीना चाहते हैं तो आप सपने व लक्ष्य के बारे में भी पत्र में लिखें.

फिर पत्र को फोल्ड करें या एक रंगीन कवर में रख कर एक सुंदर से रिबन या डोरी से कवर को बांध दें.

ये भी पढ़ें- Valentine Special: इन 10 टिप्स को अपनाएं और मैरिड लाइफ को बोरियत से बचाएं

प्रेम पत्र लेखन के लिए खास टिप्स

हर वाक्य लिखने से पहले सोचें.

अच्छी राइटिंग में लिखें.

आप पहले रफ पेपर पर प्लान कर लें कि आप क्या लिखना चाहते हैं.

प्रेम पत्र लिखने में सब से खास बात है पत्र का दिल से लिखा होना.

इंटरनैट से रोमांटिक पत्रों की कौपी न करें.

अगर आप पत्र पर परफ्यूम स्प्रे कर रहे हैं तो ध्यान रखें कि पत्र नम न हो.

Valentine’s Special: एहसास- नंदी को कब हुआ अपने सच्चे प्यार का एहसास ?

दिसंबर की खामोश सी एक सर्द दोपहर थी. मैं थाना प्रभारी, कोतवाली की हैसियत से कार्यालय के अपने कमरे में कुरसी पर बैठी सरकारी कामों को निबटा कर, फुरसत के क्षणों में अपने पति के साहित्यिक पत्र का जवाब साहित्यिक भाषा में देने का प्रयास कर रही थी. वे लखनऊ विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफैसर थे और उन्होंने मुझ से शिकायत की थी कि पुलिस अधिकारियों में वह दया, ममता नहीं होती जो अन्य विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों में होती है. मैं उन्हें हिंदी भाषा में पत्र लिख कर यह बताना चाहती थी कि पुलिस वाले ऊपर से तो कठोर बने रहते हैं परंतु उन के हृदय में भी दया, ममता, स्नेह और प्यार का सागर हिलोरे लेता है.

मैं अपने पत्र में लिख रही थी, ‘‘एक दिन सागर ने नदी से पूछा, ‘कब तक मिलाती रहोगी मुझे मीठे पानी से?’ नदी ने हंस कर कहा, ‘जब तक तुझ में मिठास न आ जाए तब तक.’ यही तो रिश्ता होता है सच्चे प्रेम का, सच्चे मिलन का.’’

मैं आगे इस रोचक पत्र में बहुत कुछ अपने पति को लिखना चाहती थी कि तभी अचानक कमरे में कदमों की आहट से मेरा ध्यान भंग हुआ. जब तक मैं कुछ समझती तब तक मेरा पूरा कमरा ओपियम सेंट की खुशबू से भर उठा. मैं ने पत्र से नजर उठा कर देखा तो मेरे सामने एक पुरुष व स्त्री खड़े थे. उन दोनों के हावभाव से यह स्पष्ट हो रहा था कि वे रिश्ते में पतिपत्नी हैं.

ये भी पढ़ें- शिकस्त-भाग 4: शाफिया-रेहान के रिश्ते में दरार क्यों आने लगी

मैं ने जल्दी से पत्र को समेटा और स्त्री को नीचे से ऊपर तक देखा. उस की उम्र 33-34 साल के आसपास होगी. उस ने सुंदर चेहरे पर गहरा मेकअप किया हुआ था. होंठों पर हलकी गुलाबी लिपस्टिक अलग से दिखलाई दे रही थी. विदेशी जींस और महंगे विदेशी कपड़े की खुले गले की पीली हाफ शर्ट पहने हुए थी, जो सलीके से ‘इन’ की गई थी. आंखों में गहरे काजल की उपस्थिति दर्ज थी. ऊंची एड़ी की सैंडिल पैरों में थीं. बौबकट बाल, कानों में कीमती सोने के सुंदर टौप्स, दाएं हाथ में एक फाइल और बाएं हाथ में कीमती मोबाइल. कुल मिला कर स्त्री में एक आकर्षण था, जिसे मैं भलीभांति महसूस कर रही थी.

मैं ने एक क्षण के लिए साथ में आए पुरुष पर दृष्टि डाली. वह हृष्टपुष्ट, दृढ़ विचारों वाला कोई उच्च वर्गीय व्यक्ति सा लगा. उस के वस्त्रों और भावों से उस के अधिकारी होने की पुष्टि हो रही थी. उस की उम्र भी अपनी पत्नी के आसपास या 1-2 साल ज्यादा ही होगी.

मैं ने दोनों को सामने रखी हुई कुरसियों पर बैठने का इशारा किया. स्त्री तो कुरसी पर नहीं बैठी लेकिन पुरुष मेरा निवेदन स्वीकार करते हुए कुरसी पर धन्यवाद कहते हुए बैठ गया. मुझे कहीं न कहीं स्त्री की अपेक्षा पुरुष ज्यादा संस्कारित लगा. मैं ने महसूस किया कि पुरुष से ज्यादा स्त्री तनाव में है. उस ने खड़ेखड़े ही साथ में लाई फाइल में से एक कागज निकाल कर मेरी ओर बढ़ाते हुए तेजी से कहा, ‘‘पहले इसे आप पढ़ लीजिए.’’

मैं ने कहा, ‘‘आप बैठिए तो सही.’’

लेकिन उस ने मेरी इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और मेरे सामने खड़ी ही रही.

मैं ने अपना दाहिना हाथ बढ़ाते हुए स्त्री से कागज ले लिया. यह एक कंप्यूटर से टाइप किया हुआ शिकायती पत्र था, जिस में लिखा था : ‘मैं कल्पना ठाकुर बीई, उच्च शिक्षा प्राप्त हूं और एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रही हूं. अपने पति आर के ठाकुर, जो एक प्राइवेट कंपनी में सीनियर इंजीनियर हैं, के साथ रहना नहीं चाहती हूं, इसलिए मुझे मेरे पति से तत्काल तलाक दिलाया जाए और मेरे मातापिता ने जो इन्हें दहेज दिया है वह वापस दिलाया जाए. इस के साथ ही मेरे पति के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही भी की जाए.’

शिकायती पत्र के नीचे कल्पना ठाकुर का पूरा पता, मोबाइल नंबर आदि लिखा हुआ था. पत्र पढ़ कर मैं ने कल्पना से कुछ प्रश्न करना ही ज्यादा उचित समझा. मैं ने टेबल की दराज से कुछ कोरे कागज निकाले और उस से पूछताछ कर लिखने लगी. मैं ने उस से पूछा, ‘‘आप इन के साथ क्यों नहीं रहना चाहतीं?’’

ये भी पढ़ें- Valentine Special: स्टैच्यू- उन दो दीवाने को देखकर लोगों को क्या याद आया

‘‘कुछ विशेष कारण हैं, जिन्हें मैं बता नहीं सकती,’’ उस ने लापरवाही से कहा.

‘‘देखिए, तलाक तो आप को अदालत से ही मिलेगा लेकिन जितना मैं जानती हूं उस के अनुसार आप को कानूनी रूप से तब तक तलाक नहीं मिल सकता है जब तक तलाक के लिए कोई ठोस कारण

न हो और वह कारण जांच में सही भी पाया जाना चाहिए. जब तक आप इन से तलाक लेने का कोई विशेष कारण नहीं बतलाएंगी तब तक पुलिस आप की कोई भी मदद करने में असमर्थ है.’’

काफी लंबी खामोशी के बाद उस ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए अपने पति की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘बात यह है कि इन के विचारों से मेरे विचार मेल नहीं खाते. ये 21वीं सदी में भी 18वीं सदी की बातें करते हैं. मेरा इन से मतभेद ही नहीं मनभेद भी है. इसीलिए मैं इन के साथ रहना नहीं चाहती.’’

‘‘खुल कर पूरी बात बताइए,’’ मैंने कहा.

उस ने कहा, ‘‘अनादिकाल से यह होता आ रहा है, हो रहा है और होता रहेगा. महिलाओं की हथेलियों में लिखी हुई रेखाएं पैंसिल से खिंची होती हैं और उन्हें मिटाने वाली रबर पुरुषों के पास होती है. यदि महिलाएं पुरुषप्रधान समाज द्वारा खींची गई चारदीवारी के अंदर रह कर उस के द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करती हैं तो रेखाएं जीवित रहती हैं और यदि किसी महिला द्वारा इन नियमों का जानबूझ कर या भूलवश भी उल्लंघन किया जाता है तो इन पुरुषों द्वारा उन उभरी सभी रेखाओं को मिटा दिया जाता है.’’

ये भी पढ़ें- येलो और्किड : भाग 2

पलभर के लिए वह रुकी और फिर उस ने कहना प्रारंभ किया, ‘‘जहां तक मैं समझती हूं, सदियों से स्त्री को देखने वाली नजर ही अलग रही है. उसे अलग रखा गया. अलग माना गया और फिर कहा, बराबरी करो. स्त्री ने जो उम्मीद पाली है कि नजर कभी तो बदलेगी लेकिन पुरुष की वह नजर नहीं बदली.’’

इतना कह कर वह फिर खामोश हो गई.

मैं ने थोड़ा सा कड़क रुख करते हुए कहा, ‘‘देखिए, आप भाषण मत दीजिए. आप तो केवल साफसाफ पूरी बात बताइए कि इन के साथ न रहने का क्या कारण है.’’

घबराहट में फिर उस ने संभल कर कहना प्रारंभ किया, ‘‘ये मुझ से कहते रहते हैं कि हमेशा तुम्हारी मांग में सिंदूर, माथे पर बिंदी, गले में मंगलसूत्र, हाथों में चूडि़यां और पैरों में बिछिया होनी चाहिए. ये सभी शृंगार, एक सुहागन स्त्री की पहचान होते हैं और आवश्यक भी. इन का यह भी कहना है कि जब भी ससुराल पक्ष को कोई उम्र में बड़ा पुरुष या स्त्री मिलने के लिए आए तो तुम्हारे सिर पर आंचल होना जरूरी है.’’

‘‘यह तो नारी धर्म है, सभी स्त्रियां इस धर्म का पालन करती हैं. मैं भी जब ड्यूटी पर नहीं होती हूं तो इन नियमों का निर्वाह करती हूं, लेकिन तुम्हें यह सब करने से क्यों इनकार है?’’ मैं ने पूछा.

‘‘मेरे लिए यह एक असहनीय, कष्टकारी बंधन है. मैं इन बंधनों को नहीं मान सकती, इसलिए मेरा इन के साथ रहना संभव नहीं है. मैडम, एक बात और कहना चाहती हूं.’’

‘‘हांहां, कहिए, हम सुन रहे हैं.’’

‘‘मैं यह कहना चाहती हूं कि लोग चाहते हैं कि औरत कमा कर भी लाए, खाना भी बनाए और बूढ़े सासससुर की सेवा भी करे, ड्राइंगरूम की शोभा भी बने और मखमली बिछावन भी. चूंकि वह पढ़ीलिखी है, इसलिए यह सब उसे करना ही है. इन्होंने जो कुछ काम करने की इजाजत दी है, क्या वह मेरे ऊपर इन का कम उपकार है?’’ उस ने व्यंग्य से कहा.

ये भी पढ़ें- शिकस्त-भाग 3: शाफिया-रेहान के रिश्ते में दरार क्यों आने लगी

यह कह कर वह फिर खामोश हो गई. मैं ने फिर सवाल किया, ‘‘आप के विवाह को कितना समय हुआ?’’

‘‘5 साल.’’

‘‘कोई संतान है?’’

‘‘एक बेटा है, 4 साल का.’’

‘‘वह कहां है?’’

‘‘वह मेरे पास ही है, अभी स्कूल गया है.’’

‘‘क्या आप के पति शराब पीते हैं?’’

‘‘नहीं.’’Short Story, Hindi Short Story, Online Short Story, Sarita’s Short Story, Short story, Kahani, Hindi Kahani, Hindi Kahani Online, Sarita Kahani, Sarita Hindi Kahani, Sarita’s Stories, Online Hindi Kahani, Hindi Story, Best Hindi Story, Best Hindi Kahani, Sexy Stories, Romantic Kahani, Family Kahani, Best Short Story

‘‘क्या आप से मारपीट करते हैं?’’

‘‘जी नहीं, ये कितने भी क्रोध में रहें, न तो ये कभी मारपीट करते हैं और न ही कभी इन्होंने कोई अपशब्द ही कहा है.’’

‘‘क्या तुम्हारे मायके से पैसे लाने के लिए तुम्हें बाध्य करते हैं?’’

‘‘जी नहीं, इन का वेतन इतना ज्यादा है कि इन्हें हमारे पैसों की कोई जरूरत नहीं है.’’

‘‘मैं यह बात नहीं समझ पा रही हूं कि जब ये शराब नहीं पीते, पैसों की मांग नहीं करते तो फिर आप को इन के साथ रहने में क्या परेशानी है? आप ने जो मुझे ऊपर कारण बताया है उन के अलावा भी कोई और कारण है?’’

उस ने मेरे प्रश्न के उत्तर में भावुक हो कर कहा, ‘‘मुझे प्रकृति की गोद में खिले हुए फूल और आकाश में उड़ते हुए परिंदे देख कर हमेशा सुखद एहसास होता है. मैं भी फूलों की तरह खिल कर सुगंधित होना चाहती हूं और उन्मुक्त परिंदों की तरह आकाश में उड़ना चाहती हूं. मैं बंधनहीन जीवन निर्वाह करना चाहती हूं. मेरी भी कुछ इच्छाएं हैं, कुछ महत्त्वाकांक्षाएं हैं. मेरी दृष्टि में, मांग में सिंदूर, माथे पर बिंदी, गले में मंगलसूत्र ये सब शृंगार स्त्रियों के लिए पराधीनता के प्रतीक हैं, जिन्हें मैं स्वीकार नहीं करना चाहती. इसे एक उच्च शिक्षाप्राप्त स्त्री कैसे पसंद कर सकती है?’’

मैं ने स्त्री की बातों को ध्यान से

सुनने के बाद पुरुष से कहा, ‘‘आप क्या चाहते हैं?’’

‘‘मैं यह चाहता हूं कि ये पत्नी बन कर मेरे साथ वैसे ही रहें जैसे अन्य पारिवारिक महिलाएं रहती हैं. ये घर छोड़ कर चली गईं, मुझे सूचना भी नहीं दी. ये काफी समय से कहां और किस के साथ हैं, मुझे नहीं मालूम. मैं आज इन्हें अचानक सड़क पर दिखाई दिया तो इन्होंने मुझे आवाज दी और मुझ से कहा कि तुम थाने चलो, हम तुम्हें जेल भिजवाएंगे.’’

कुछ देर की चुप्पी के बाद उस ने फिर कहा, ‘‘इन्होंने स्वयं स्वीकार किया है कि मेरा बहुत अधिक वेतन है, फिर इन्हें नौकरी करने की क्या आवश्यकता है? यदि ये मेरे कहने से नहीं चलती हैं तो कोई बात नहीं. मुझे केवल चिंता इस बात की है कि मेरे बेटे का भविष्य क्या होगा? क्योंकि मैं जानता हूं कि ये जिस राह पर चल रही हैं उस राह पर चलने वाले का और मेरे बेटे का भविष्य अंधकारमय है. ये पढ़ीलिखी होने के बाद भी यह नहीं समझतीं कि इस पुरुष प्रधान समाज में बिना पति के पत्नी का कोई अस्तित्व नहीं होता है.

‘‘एक बात और, यदि ये मेरे साथ नहीं रहना चाहती हैं तो न रहें, किंतु मुझे इन से मेरा बेटा दिलवा दीजिए. यदि मुझे मेरा बेटा नहीं मिला तो मैं इन से बेटा प्राप्त करने के लिए न्यायालय में केस दायर करूंगा.’’

पुरुष की यह बात सुन कर कल्पना क्रोध से भर उठी. वह आवेश में कुछ कहना चाह रही थी कि तभी मेरे कमरे में 2 पुलिस वाले, नशे में झूमते हुए एक शराबी आदमी को पकड़ कर लाए. उन सभी के पीछेपीछे एक महिला ने भी लगभग दौड़ते हुए मेरे कमरे में प्रवेश किया. मैं ने उस महिला के चेहरे की ओर गौर से देखा, उस के चहेरे पर मारपीट के काफी स्पष्ट निशान थे. चेहरा काफी सूजा हुआ था. नाक से कुछ बूंद खून बह कर सूख चुका था. मैं ने सिपाहियों से पूछा, ‘‘क्या हुआ?’’

‘‘यह शराब पी कर घर में अपनी पत्नी को मार रहा था. पत्नी की मौखिक शिकायत पर हम पकड़ कर इसे आप के सामने लाए हैं.’’

मैं ने सिपाहियों को निर्देश देते हुए कहा, ‘‘इस की पत्नी की लिखित में शिकायत ले लो. पतिपत्नी का मैडिकल कराओ, मैडिकल कराने के बाद इसे हवालात में बंद कर देना. जब इस का नशा उतर जाए तब इसे मेरे सामने लाना.’’

सामने खड़ी महिला ने दोनों हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘मैं कुछ कहना चाहती हूं, साब.’’

मैं ने कहा, ‘‘कहिए, क्या कहना चाहती हैं आप?’’

‘‘मैं इन के खिलाफ रिपोर्ट नहीं लिखवाना चाहती और न कोई पुलिस कार्यवाही करना चाहती हूं.’’

मैं ने आश्चर्य से पूछा, ‘‘इतनी मारपीट के बाद भी?’’

‘‘जी हां, इतनी मारपीट के बाद भी.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘मुझे मेरे पति ने ही तो मारा है, किसी गैर ने तो मारा नहीं. ये नासमझ हैं, परंतु दिल के बहुत अच्छे हैं. ये कभीकभी दोस्तों के साथ बैठ कर जब शराब पी लेते हैं तब ही मुझ से मारपीट करते हैं, तो क्या हुआ, ये मुझे चाहते भी तो बहुत हैं. साब, इन्हें डांटडपट कर छोड़ दिया जाए और इन्हें समझाया जाए कि ये दोबारा मुझ से मारपीट न करें.’’

‘‘तो तुम चाहती हो कि इस के खिलाफ पुलिस कोई भी कार्यवाही न करे?’’ मैं ने आश्चर्यचकित हो कर पूछा.

‘‘हां साब, जब इन का नशा उतरेगा तो यही मुझे डाक्टर के पास ले जाएंगे, दवा कराएंगे और मेरी देखभाल करेंगे, अपने किए पर पछताएंगे. मुझ से माफी मांगेंगे. अब मैं इस उम्र में इन्हें जेल भिजवा कर क्या हासिल कर पाऊंगी? इस दुनिया में न इन का कोई है और न ही इन के सिवा मेरा कोई है.

‘‘इन से मेरे 2 बेटे भी तो हैं, हमें उन्हें भी तो पालना है. यदि इन्हें कुछ हो जाता है तो मुझे बहुत तकलीफ होगी क्योंकि मैं इन से बहुत प्यार करती हूं और शायद ये भी मुझे बेहद चाहते हैं.

‘‘साब, ये हैं, तो मैं हूं, मेरा अस्तित्व है, इन से ही मेरी मांग का सिंदूर है, गले में मंगलसूत्र है, माथे पर बिंदिया है, यानी इन से ही मेरे सोलह शृंगार हैं.

‘‘मैं अनपढ़ औरत जरूर हूं साब, लेकिन इतना जानती हूं कि ‘औरत के लिए मर्द उतना ही जरूरी है जितना एक तसवीर के लिए मजबूत फ्रेम.’ मेरे कहने का मतलब यह है कि मैं इन के बिना अपूर्ण हूं, अपूर्ण हूं. पुरुष और स्त्री एकदूसरे के पूरक हैं. हुजूर, जरा सा इन्हें डराधमका भर दें तो मैं इन्हें अपने साथ घर ले जाऊं. लगता है अधिक शराब पीने के कारण इन्होंने सुबह से कुछ खाया न होगा. इन्हें घर ले जा कर कुछ खिला दूं, तब ही मैं कुछ खा सकूंगी.’’

ये भी पढ़ें- रस्मे विदाई : भाग 2

मैं ने दोनों सिपाहियों को निर्देश दिए कि जब तक इसे होश न आ जाए, जाने न देना. होश में आते ही इस से एक शपथपत्र ले लेना कि यदि भविष्य में अपनी पत्नी से मारपीट की तो इस के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाएगी.

‘‘जयहिंद,’’ कहते हुए दोनों सिपाही उस व्यक्ति को अपने साथ ले गए. पीछेपीछे कृतज्ञता व्यक्त करते हुए वह महिला भी चली गई.

उन सभी के जाने के बाद भी मुझे उस शराबी की पत्नी की उपस्थिति महसूस हो रही थी. उस महिला के कहे हुए शब्द मानो अभी भी हवा में तैर रहे थे.

मैं उस महिला के विचारों से प्रेरित हो कर कल्पना से कुछ कहने ही वाली थी कि तभी कल्पना ने मेरी टेबल पर रखा हुआ अपना शिकायती पत्र तत्परता से उठाया और मेरे सामने ही उस के टुकड़ेटुकड़े कर दिए.

पलभर बाद ही उस ने अपने पति के दोनों हाथों को अपने हाथों में ले कर कहा, ‘‘यह महिला सही कहती है कि पति ही स्त्री का संसार होता है. पतिपत्नी एकदूसरे के पूरक होते हैं. एकदूसरे के बिना अधूरे होते हैं. उस अनपढ़ महिला की बातें सुन कर मुझे भी एहसास हो चुका है कि आप के बिना मेरा जीवन निरर्थक है. चलिए, अब जीवन में मुझ से आप को कोई शिकायत नहीं होगी. मैं भटक गई थी. मैं आप को वचन देती हूं कि आप जैसा कहेंगे, मैं वैसा ही करूंगी. मैं अपना टूटता हुआ घर फिर से बसाना चाहती हूं.’’

यह सुन कर जब पति ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की तब उस महिला ने अपने पति के कदमों पर झुकते हुए कहा, ‘‘अब तो मुझे माफ कर दो.’’

यह सुन कर पति ने अपनी पत्नी के दोनों कंधों को आहिस्ता से पकड़ते हुए उसे उठाया और कहा कि कल्पना, यह याद रखना कि जो प्रिय है वह कितने भी अपराध क्यों न करे, प्रिय ही बना रहता है. अनेक दोषों से दूषित होते हुए भी अपने शरीर का मोह किसे नहीं होता है. मैं यह भी जानता हूं कल्पना कि माफी ऐसी औषधि है जो गहराई तक जा कर भावनात्मक घावों का इलाज करती है, इसलिए मैं तुम्हें, तुम्हारी सारी गलतियों के लिए क्षमा करता हूं. चलो, अब अपने घर चलते हैं.’’

‘‘हांहां चलिए, लेकिन बेटे के स्कूल से होते हुए.’’

यह कहते हुए पति और पत्नी ने मेरी ओर हाथ जोड़ कर विदा मांगी. साथ ही कल्पना ने कहा, ‘‘धन्यवाद मैडम, अब शायद ही कभी हम आप के थाने की ओर अपना रुख करें,’’ यह कहते हुए एकदूसरे का हाथ पकड़े वे तेजी से मेरे कमरे से बाहर चले गए.

महिलाएं… न हों बीमार

कोई बीमार होना नहीं चाहता लेकिन बीमार हो जाता है. बीमारियां सभी को किसी न किसी तरह से परेशान करती रहती हैं. हालांकि, दुनिया में किसी की भी जिंदगी की समयसीमा की कोई गारंटी नहीं है, लेकिन कोई बीमार न हो, इस के लिए साइंटिस्ट रिसर्च करते रहते हैं.

महिलाओं को सब से ज्यादा तादाद में और बहुत सी बीमारियों का सामना करना पड़ता है. महिलाओं से जुड़ी कई बीमारियां आम हैं, जैसे गर्भावस्था की समस्याएं, मैनोपोज, ओवरियन और ब्रेस्ट कैंसर. इन के अलावा कुछ और मेडीकल कंडीशंस हो सकती हैं जो कि महिलाओं की सेहत पर असर डालती हैं. हालांकि, कुछ बीमारियां महिलाओं और पुरूषों को एकजैसे ही प्रभावित करती हैं लेकिन कई बार कुछ बीमारियां महिलाओं के लिए खतरा साबित हो सकती हैं.

यह सच है कि आने वाले वक्त में उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की दिनचर्या और भी बिजी होती जाती है. महिलाएं कितनी भी बिजी क्यों न हों, फिर भी वे अपने घर के सभी सदस्यों का बखूबी खयाल रखती हैं, लेकिन वे खुद की जरूरतों और सेहत को पीछे छोड़ देती हैं. ऐसे में वे बीमार पड़ सकती हैं या यों समझिए कि उन के बीमार होने के चांसेस ज्यादा होते हैं. सो, महिलाओं को चाहिए कि वे समय समय पर इन जरूरी जांचों को करवाती रहें ताकि उन्हें और न ही उन के परिवार वालों को डाक्टर या अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ें. साथ ही, सेहत को ठीक रखने के लिए जरूरी नींद भी लें.

ये भी पढ़ें- थायराइड से राहत पाने के लिए करें इन 7 चीजों को अपनी डाइट में शामिल

पैपटेस्ट:  जब आप 20 की उम्र पार कर रही हों, तभी पेल्व‍िकएग्जाम की जांच शुरू करवा दें, जो कि यूटरस की सही हालत का पता लगाने के लिए की जाती है. इस के अलावा पैपटेस्ट भी हर साल करवाएं. पैपटेस्ट सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए किया जाता है, ताकि ऐसी किसी भी स्थि‍ति में पहले ही समस्या का पता लगा कर इलाज शुरू किया जा सके.

ब्रेस्ट कैंसर: ब्रेस्ट कैंसर की जांच जरूर कराएं, क्योंकि इस में भी कैंसर के शुरूआती संकेत दिखाई नहीं देते. जब आप पैपटेस्ट करवाने जाते हैं, तभी डाक्टर से ब्रेस्ट कैंसर की जांच भी कराएं इस के लिए आप हर 3 साल में मेमोग्राफी करवा सकती हैं.

स्किन की जांच: स्किन कैंसर से बचने के लिए इस की जांच कराना बेहद जरूरी है. इसलिए 20 साल की उम्र में ही स्किन की जांच करवा कर स्किन कैंसर के खतरे को नकारें और फिर बेफिक्र जिंदगी गुजारें.

आंखों की जांच: आंखें लंबे समय तक नार्मल रहें, और किसी तरह की आई प्राब्लम न हो, इस के लिए आंखों का चेकअप कराना बहुत जरूरी है. आज के दौर में बहुत कम उम्र में ही बच्चों को आंखों की प्राब्लम्स से दोचार होना पड़ता है. ऐसे में आप अगर इस से सेफ हैं, तो भी होशियार जरूर रहें और समय समय पर जांच करते रहें.

ब्लडप्रेशर: किसी भी तरह की सेहत की दिक्कत होने पर ब्लडप्रेशर की जांच जरूर कराएं, ताकि ब्लडप्रेशर को कण्ट्रोल में रखने में आसानी हो, वरना आप की दूसरी दिक्कतें बढ़ सकती हैं.

कोलेस्ट्रौल: शरीर व खून में कौलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच करवाना भी बहुत जरूरी है. क्योंकि इन का असामान्य होना, आप को सेहत की गंभीर समस्याओं से पीड़ि‍त बना सकता है.

लें भरपूर नींद

सेहतमंद रहने के लिए नींद लेना बेहद जरूरी है. सो, सारी चिंताओं, परेशानियों, तनाव आदि से दूर रह कर सुकून की नींद लेनी चाहिए. भरपूर नींद न लेने पर कई रोग, जैसे आंखों में सूजन होना, याददाश्त में कमी आना, सुस्ती, थकान, तनाव,कमजोरी, असंतुलन की स्थिति होना आदि घेर लेते हैं. साइंटिफिक नज़रिए से भी नींद को यानी भरपूर सोने को जरूरी माना गया है.

बेहतर नींद लेने के लिए जरूरी है कुछ बातों का ख्याल रखना:

* अच्छी नींद के लिए सब से पहले अपनी दिनचर्या को तय करें.

* नींद का समय तय कर लेना चाहिए.

ये भी पढ़ें- Winter 2022: बढ़ता प्रदूषण बेऔलाद न कर दे

* रात को जल्दी सोने व सुबह जल्दी उठने से मन खुश रहता है. शरीर भी फुरतीला रहता है.

* रात को हलका भोजन करें. सोने के 2 घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए.
* भोजन करने के बाद टहलें ज़रूर ताकि भोजन ठीक तरह से पच जाए.

* सोने से पहले मालिश को भी अच्छा माना गया है.

* शराब पीना छोड़ दें व बेवजह तनाव को दिमाग में पैदा न होने दें.

* बिस्तर साफ़ और आरामदायक होना चाहिए.

* यदि किसी भय, चिंता के कारण नींद नहीं आ रही हो, तो उस तरफ से अपना ध्यान हटाने की कोशिश करें, इस के लिए दिमाग को शांत रखें.

* अपने आसपास के माहौल को अपने लायक बनाएं. आसपास सुंदर व मनभावन चीज़ों को देखें, अच्छी किताबें पढ़ें, अच्छी बातें सोचें, ताकि आप बेफिक्र हो कर मीठी नींद ले सके.

फेसबुक फ्रैंडशिप-भाग 1 : जब सच्चाई से वास्ता पड़ता है तो ये होता है

शुरुआत तो बस यहीं से हुई कि पहले उस ने फेस देखा और फिदा हो कर फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी. रिक्वैस्ट 2-3 दिनों में ऐक्सैप्ट हो गई. 2-3 दिन भी इसलिए लगे होंगे कि उस सुंदर फेस वाली लड़की ने पहले पूरी डिटेल पढ़ी होगी. लड़के के फोटो के साथ उस का विवरण देख कर उसे लगा होगा कि ठीकठाक बंदा है या हो सकता है कि तुरंत स्वीकृति में लड़के को ऐसा लग सकता है कि लड़की उस से या तो प्रभावित है या बिलकुल खाली बैठी है जो तुरंत स्वीकृति दे कर उस ने मित्रता स्वीकार कर ली.

यह तो बाद में पता चलता है कि यह भी एक आभासी दुनिया है. यहां भी बहुत झूठफरेब फैला है. कुछ भी वास्तविक नहीं. ऐसा भी नहीं कि सभी गलत हो. ऐसा भी हो सकता है कि जो प्यार या गुस्सा आप सब के सामने नहीं दिखा सकते, वह अपनी पोस्ट, कमैंट्स, शेयर से जाहिर करते हो. अपनी भावनाएं व्यक्त करने का साधन मिला है आप को, तो आप कर रहे हैं अपने को छिपा कर किसी और नाम, किसी और के फोटो या किसी काल्पनिक तसवीर से.

यदि अपनी बात रखने का प्लेटफौर्म ही चाहिए था तो उस में किसी अप्सरा की तरह सुंदर चेहरा लगाने की क्या जरूरत थी? आप कह सकती हैं कि हमारी मरजी. ठीक है, लेकिन है तो यह फर्जी ही. आप साधारण सा कोई चित्र, प्रतीक या फिर कोई प्राकृतिक तसवीर लगा सकते थे. खैर, यह कहने का हक नहीं है. अपनी मरजी है. लेकिन जिस ने फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी उस ने उस मनोरम छवि को वास्तविक जान कर भेजी न आप को?

आप शायद जानती हो कि मित्र संख्या बढ़ाने का यही साधन है, तो भी ठीक है, लेकिन बात जब आगे बढ़ रही हो तब आप को समझना चाहिए कि आगे बढ़ती बात उस सुंदर चित्र की वजह से है जो आप ने लगाई हुई है अपने फेसबुक अकांउट पर. आप ने अपने विषय में ज्यादा कोई जानकारी नहीं लिखी. आप से पूछा भी मैसेंजर बौक्स पर जा कर. और पूछा तभी, जब बात कुछ आगे बढ़ गई थी. कोई किसी से यों ही तो नहीं पूछ लेगा कि आप सिंगल हो. और आप का उत्तर भी गोलमोल था. यह मेरा निजी मामला है. इस से हमारी फेसबुक फ्रैंडशिप का क्या लेनादेना?

बात लाइक और कमैंट्स तक सीमित नहीं थी. बात मैसेंजर बौक्स से होते हुए आगे बढ़ती जा रही थी. इतनी आगे कि जब लड़के ने मोबाइल नंबर मांगा तो लड़की ने कहा, ‘‘फोन नहीं, मेल से बात करो. फोन गड़बड़ी पैदा कर सकता है. किस का फोन था, कौन है वगैराहवगैरहा.’’

अब मेल पर बात होने लगी. शुरुआत में लड़के  ने फेस देखा. मित्र बन जाने पर लड़के ने विवरण देखा उसे पसंद आया. उसे किसी बात की उम्मीद जगी. भले ही वह उम्मीद एकतरफा थी. उसे नहीं पता था शुरू में कि वह जिस दुनिया से जुड़ रहा है वहां भ्रम ज्यादा है,  झूठ ज्यादा है. पहले लड़की के हर फोटो, हर बात पर लाइक, फिर अच्छेअच्छे कमैंट्स और शेयर के बाद निजी बातें जानने की जिज्ञासा हुई दोनों तरफ से. हां, यह सच है कि पहल लड़के की तरफ से हुई. लड़के ही पहल करते हैं. लड़कियां तो बहुत सोचनेविचारने के बाद हां या नहीं में जवाब देती हैं.

बात आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी लड़के पर ही आती है समाज, संस्कारों के तौर पर. तो शुरुआत लड़के ने ही की. इंटरनैट की दुनिया में आ जाने के बाद भी समाज, संस्कार नहीं छूट रहे हैं यानी 21वीं सदी में प्रवेश किंतु 19वीं सदी के विचारों के साथ.

Anupamaa: अनुज ने लिया ऐसा फैसला, अनुपमा भी हो गई हैरान! सामने आया Video

स्टार प्लस का सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupamaa) की कहानी में दिलचस्प मोड़ आ चुका है. शो के बिते एपिसोड में आपने देखा कि वनराज मालविका को अनुज के खिलाफ भड़काता है. और वह अनुज के सामने भाई-बहन के रिश्ते को लेकर खूब सुनाती है. मालविका कहती है कि इस रिश्ते में केवल मुक्कु ही है. अनुज कहीं नहीं है, इस रिश्ते में केवल मालविका ही करती है. शो के अपकमिंग एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते हैं शो के नए एपिसोड के बारे में.

मालविका की इस बात से अनुज और अनुपमा दोनों ही परेशान हो जाते हैं. तो दूसरी तरफ अनुपमा भी दोनों भाई-बहनों की जिंदगी से जाने का फैसला करती है. शो के अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुज ऐसा फैसला करेगा कि जिससे अनुपमा भी हैरान हो जाएगी.

ये भी पढ़ें- सई को छोड़ पाखी संग रोमांटिक हुआ विराट, देखें Video

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Anupamaa (@anupama.yrkkh)

 

‘अनुपमा’ में आप देखेंगे कि अनुपमा, अनुज के घर से जाने लगती है तो अनुज उसे रोकता है और कहता है, बहन को खो दिया तो जी नहीं पाऊंगा और तुम्हें खो दिया तो जीते जी मर जाऊंगा. वह अनुपमा से कहता है कि वह कुछ जरूरी फैसला लेने वाला है, इसमें अनुपमा का साथ चाहिए. अनुपमा कहती है कि आप जो भी करेंगे, जैसा भी कहेंगे, मैं आपके साथ हूं.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Anupamaa (@anupama.yrkkh)

 

तो दूसरी ओर वनराज जैसे ही ऑफिस जाने के लिए निकलता है, बापूजी उसे रोक लेते हैं और ऑफिस जाने से मना कर देते हैं. लेकिन बापूजी की बात काटते हुए वह ऑफिस के लिए निकल जाता है. वनराज ऑफिस में जैसे ही मालविका से पूछता है कि क्या फैसला लिया, वह उसे बताती है कि अनुज ने सबकुछ उसके नाम कर दिया है.  अनुज के इस फैसले से मालविका दुखी होती है  तो वहीं वनराज ऑफिस पर कब्जा करने के सपने देखने लगता है.

ये भी पढ़ें- Karishma Tanna की शादी की रस्में हुई शुरू, देखें Video

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Anupamaa (@anupama.yrkkh)

 

अनुज अनुपमा से कहता है कि वह सबकुछ मालविका की खुशी के लिए कर रहा है. अनुपमा कहती है कि उसकी खुशी आपकी खुशी में है, अलग होने में नहीं. शो में आप देखेंगे कि अनुपमा इस फैसले में अनुज का साथ देने से माना करेगी. और कहेगी कि इस फैसले में  मैं आपके साथ नहीं है. दूसरी ओर वनराज मालविका को भड़काता है. शो में अब ये देखना होगा कि अनुपमा अनुज-मालविका के रिश्ते में आई दरार को कैसे खत्म करती है.

ये भी पढ़ें- पति को छोड़ इस एक्टर को Kiss करती दिखीं Mouny Roy, देखें Video

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Anupamaa (@anupama.yrkkh)

 

सई को छोड़ पाखी संग रोमांटिक हुआ विराट, देखें Video

टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) विराट पाखी को बिलकुल पसंद नहीं करता है. विराट हर वक्त पाखी को अहसास दिलाता है कि वह सई से बहुत प्यार करता है. लेकिन एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है,जिसे देखकर आप भी चौंक जाएंगे. आइए बताते हैं, क्या है पूरा मामला.

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि विराट सई के सामने पाखी (Aishwarya Sharma) को खरी-खोटी सुना रहा है,जिससे वह नाराज हो जाती है. वह पाखी को बताना चाहता है कि उसकी जिंदगी में सिर्फ सई की जगह है.

ये भी पढ़ें- Karishma Tanna की शादी की रस्में हुई शुरू, देखें Video

 

View this post on Instagram

 

A post shared by StarPlus (@starplus)

 

इस वीडियो में आप आगे देखेंगे कि विराट जैसे ही पाखी को सुनाता है. पाखी नाराज होकर चली जाती है, और इसके बाद विराट सब कुछ भूल जाता है और नाराज पाखी के पीछे-पीछे दौड़ने लगता है. और पाखी को किस करता है. इसके बाद विराट कहता है, गुस्से में तो तुम और भी क्यूट लगती हो. वैसे आज रात को डिनर पर चले मिसेज भट्ट.

ये भी पढ़ें- Anupamaa: अनुज से पार्टनरशिप तोड़ेगी अनुपमा! वनराज की चाल होगी कामयाब?

 

View this post on Instagram

 

A post shared by @sairatspark

 

आपको बता दें कि एक नया शो आने वाला है स्मार्ट जोड़ी, स्टार प्लस ने इसका प्रोमो शेयर किया है. प्रोमो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा गया है कि ‘पाखी-विराट के पीछे छुपी है नील-ऐश्वर्या की अनोखी मिठास. देखिए ऐसी ही कुछ अतरंगी प्यार की कहानियां. स्मार्ट जोड़ी, स्टार प्लस पर जल्द ही.

ये भी पढ़ें- तेजस्‍वी प्रकाश-करण कुंद्रा की रोमांटिक डेट, पपाराजी ने कहा- भैया-भाभी! देखें Video

 

View this post on Instagram

 

A post shared by sairat_lover (@_.ghkkpm._)

 

विराट (नील भट्ट) और पाखी (ऐश्वर्या शर्मा) 30 नवंबर को शादी के बंधन में बंधे. शादी के बाद ये कपल घूमने के लिए राजस्थान गए थे. दोनों अक्सर सोशल मीडिया पर फैंस के साथ फोटोज और वीडियो शेयर करते रहते हैं. शो में विराट पाखी को पसंद नहीं करता है लेकिन असल जिंदगी में दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते हैं.

Satyakatha: मंगेतर का खूनी सरप्राइज

सौजन्य: सत्यकथा

उत्तर प्रदेश के जिला अमेठी के गांव पीपरपुर के रहने वाले निवासी शिवनाथ कश्यप के बेटे किशन
की शादी सुलतानपुर के थाना धम्मौर के हाजीपट्टी गांव निवासी गुडि़या उर्फ प्रभावती से तय हो चुकी
थी और 25 जून, 2020 को उन की शादी की तारीख भी तय हो गई थी.

शादी तय हो जाने के बाद आजकल मंगेतर से फोन पर बातचीत करना, उस के साथ घूमनाफिरना, शौपिंग करना आम बात हो गई है. किशन और गुडि़या भी 2-4 बार फोन पर बात करते थे. वाट्सएप द्वारा तो उन की रोजाना ही बात होती थी. 11 जून, 2020 को सुबह 4 बजे किशन को गुडि़या ने फोन कर के कहा, ‘‘मुझे अपने लिए कुछ शौपिंग करनी है. यदि आप यहां आ जाओगे तो हम दोनों अपनी पसंद की शौपिंग कर लेंगे.’’

ये भी पढ़ें- त्रिलोचन सिंह वजीर: रहस्यों में उलझी मौत

किशन ने हां कर दी और वह उस दिन अपनी मंगेतर के बताए स्थान पर चला गया. जाने से पहले उस ने यह बात अपने घर वालों को बता दी थी. वह चला तो गया, लेकिन वापस नहीं लौटा. घर वालों ने किशन के मोबाइल पर फोन किया तो वह बंद मिला. गुडि़या और उस के घर वालों को फोन किया तो उन के मोबाइल भी बंद मिले. अगले दिन शिवनाथ बेटे की तलाश में अपने गांव से 30 किलोमीटर दूर हाजीपट्टी गांव स्थित गुडि़या के घर पहुंच गए. वहां गुडि़या और उस के पिता राजाराम ने बताया कि किशन वहां नहीं आया था. तब शिवनाथ चिंता में डूबे वापस घर लौट आए.

घर पहुंचे तो घर पर गुडि़या की मां कुसुमा और मामा कांशीराम को मौजूद पाया. उन से पूछा तो उन्होंने बताया कि वह किशन के घर न आने की बात बताने आए थे. इस के बाद वे लोग चले गए. इस के बाद शिवनाथ ने बाजार व भीड़भाड़ वाले इलाकों में जा कर अपने बेटे किशन की फोटो दिखा कर उस के बारे में पूछा कि किसी ने उसे कहीं देखा है. लेकिन कोई किशन के बारे में कुछ न बता पाया. थकहार 14 जून, 2020 को शिवनाथ ने पीपरपुर थाने में किशन की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

16 जून, 2020 को सुलतानपुर के थाना कोतवाली देहात के अलहदादपुर में शारदा सहायक नहर में लोगों ने किसी नवयुवक की लाश पड़ी देखी. लोगों ने उस की सूचना कोतवाली देहात पुलिस को दे दी.
सूचना पा कर थानाप्रभारी देवेंद्र सिंह कुछ सिपाहियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. मृतक की उम्र लगभग 25-26 साल थी. लाश कई दिन पुरानी लग रही थी और पानी में पड़े रहने के कारण फूल गई थी.
अनुमान लगाया गया कि लाश कहीं से बह कर वहां आई थी. फिर भी वहां मौजूद लोगों से लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश की गई, लेकिन कोई भी लाश की शिनाख्त नहीं कर पाया. लाश के कई कोणों से फोटो खींच कर देवेंद्र सिंह ने लाश को मोर्चरी में रखवा दिया और फोटो अखबारों में छपवा कर लाश की शिनाख्त की अपील की.

ये भी पढ़ें- रिश्तों का कत्ल

किशन के किसी परिचित ने अखबार में किशन की लाश का फोटो देखा तो वह पहचान गया. उस व्यक्ति ने वह अखबार शिवनाथ कश्यप को दिखाया. फोटो देखते ही उन की चीख निकल गई और उन के घर में भी सभी रोने लगे. शिवनाथ घर वालों के साथ सुलतानपुर के थाना कोतवाली देहात पहुंच गए. वहां उन्होंने लाश देखी तो उस की शिनाख्त किशन के रूप में कर दी. किशन बचपन में जल गया था, उस जले का निशान उस की पीठ पर था. वही निशान उस की पीठ पर मिला.

लेकिन मुकदमा देहात कोतवाली में दर्ज नहीं किया गया. क्योंकि अमेठी के पीपरपुर थाने में गुमशुदगी पहले से दर्ज थी, इसलिए वहीं हत्या का मुकदमा दर्ज कराने को कहा गया. शिवनाथ पीपरपुर थाने पहुंचे, लेकिन वहां उन की एक न सुनी गई. उन्होंने थाने के कई चक्कर लगाए, लेकिन कोई काररवाई नहीं हुई.
अपनी शिकायत ले कर वह एसपी (सुलतानपुर) डा. विपिन मिश्रा के पास गए तो एसपी विपिन मिश्रा ने कोतवाली देहात के थानाप्रभारी को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया.

थानाप्रभारी देवेंद्र सिंह ने एसपी साहब के आदेश पर शिवनाथ की तरफ से गुडि़या, उस की मां कुसुमा, पिता राजाराम, मामा कांशीराम व लालता के खिलाफ भादंवि की धारा 302/201/394/411 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. मुकदमा दर्ज होने की खबर लगते ही सभी आरोपी घर से फरार हो गए थे. इसलिए थानाप्रभारी ने उन की सुरागरसी के लिए अपने मुखबिरों को लगा दिया. लेकिन काफी प्रयास के बावजूद आरोपित पकड़ में नहीं आ रहे थे.

समय बीतता गया. लगभग एक साल का समय होने को आया ही था कि 9 जून, 2021 को कोतवाली देहात थानाप्रभारी देवेंद्र सिंह ने एक मुखबिर की सूचना पर गुडि़या, उस की मां कुसुमा, पिता राजाराम और मालती देवी को लोहरामऊ बाईपास से गिरफ्तार कर लिया. मालती देवी को घटना के बाद गुडि़या को अपने घर में पनाह देने के मामले में गिरफ्तार किया गया था.थाने ला कर जब चारों आरोपियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और हत्या के पीछे की कहानी बयां कर दी.

सुलतानपुर जिले के धम्मौर थाना क्षेत्र के हाजीपट्टी गांव में रहता था राजाराम कश्यप. राजाराम खेतीकिसानी कर के अपने परिवार का पेट पालता था. परिवार में पत्नी कुसुमा, बेटी गुडि़या उर्फ प्रभावती व आरती और 2 बेटे बिन्नू और विमल थे. 24 वर्षीय गुडि़या काफी खूबसूरत और महत्त्वाकांक्षी थी. वह स्वच्छंद स्वभाव की थी. इसलिए हर किसी से बात करने में संकोच नहीं करती थी. शोख और चंचल गुडि़या का यह रूप गांव के मनचलों को खूब भाता था. उसे पाने के लिए हर कोई मचलता था.

गुडि़या इस बात को बखूबी जानती थी और चाहती भी यही थी कि लोग उस के दीवाने हो जाएं. जैसा वह चाहती थी ठीक वैसा ही हो रहा था. अपने दीवानों के साथ वह खुल कर बात करती और मजाक करती थी. एक तरह से वह गांव के युवकों के सपनों की रानी बन गई थी. गांव के ही उन युवकों में शादाब (परिवर्तित नाम) भी था. शादाब दिखने में काफी आकर्षक था और बातें भी अच्छी कर लेता था. गुडि़या की नजरों को शादाब भा गया.

गुडि़या ने महसूस किया था कि जब भी शादाब उस के आसपास होता था तो उस की नजरें उसी पर टिकी रहती थीं. आसपास न होता तो उस की नजरें शादाब को तलाशती रहती थीं. अभी तक वह सिर्फ दूसरों की चाहत थी, लेकिन आज उसे अपनी पहली चाहत का अहसास हुआ था. उस का दिल तो ऐसे मचल रहा था कि जैसे सीने से निकल कर बाहर ही आ जाएगा. उस की चाहत नजरों से साफ झलकने लगी थी. जिसे पढ़ने की कोशिश करता था शादाब. शादाब की हालत भी इस से जुदा नहीं थी. वह भी गुडि़या के रूपरंग में खोया रहता था. दोनों में बातें होने लगीं. वह पहले से ज्यादा मिलने लगे. दोनों की आंखें एकदूसरे के लिए प्यार जता भी रही थीं. लेकिन जुबां से दोनों ही इस बात को कह नहीं पा रहे थे.

एक दिन जब दोनों मिले तो शादाब गुडि़या का हाथ अपने हाथों मे ले कर सहलाते हुए बोला, ‘‘गुडि़या, यूं तो मैं ने कई लड़कियां देखीं, उन से दोस्ती भी हुई. लेकिन वह मेरी कसौटी पर खरी नहीं उतरीं. लेकिन जब से मेरी तुम से मुलाकात और दोस्ती हुई है, मैं ने तुम को बहुत नजदीक से जानापहचाना. ‘‘जितना मैं ने आज तक तुम्हें पहचाना है, उस से यह साफ जाहिर होता है कि तुम्हारा दिल और तुम्हारी आत्मा बहुत खूबसूरत है. जिस की वजह से तुम इतनी प्यारी लगती हो कि तुम्हारी मूरत मेरे छोटे से दिल में बस गई है.
‘‘उस मूरत को मैं हमेशा अपने दिल में बसाए रखना चाहता हूं. ये मेरी गुस्ताख नजरें भी हमेशा तुम को अपने सामने रखना चाहती हैं. ऐसे में मेरा यह जानना जरूरी है कि तुम मेरे दिल और नजरों की चाहत को पूरा करने की तमन्ना रखती हो या नहीं?’’

शादाब के खूबसूरत जज्बातों को बड़े ही प्यार से गुडि़या सुन रही थी. उस के जज्बात सुन कर गुडि़या भी अपने जज्बात न रोक सकी, ‘‘शादाब, मैं भी तुम से यही कहना चाह रही थी, लेकिन बारबार मेरे जज्बात मेरे सीने में कैद हो कर रह जाते थे. यह सोच कर कि कहीं तुम मेरे जज्बातों को न समझ पाए तो मैं अंदर से टूट ही जाऊंगी. लेकिन आज तुम्हारे जज्बात सुन कर मेरे दिल को बहुत सुकून पहुंचा है. ‘‘हम दोनों के जज्बात आपस में मिलते हैं, यह जान कर मुझे बेहद खुशी हुई है. मैं भी तुम्हारे साथ ही जिंदगी बिताने का सपना देख रही थी, जो आज सच हो गया.’’ भाव विह्वल हो कर गुडि़या शादाब के सीने से लग गई.
शादाब ने भी उसे अपनी बांहों के घेरे में ले लिया. इस से दोनों ने राहत की सांस ली और एकदूसरे के प्यार की गरमी को नजदीक से महसूस किया.

इस के बाद दोनों का प्यार दिनोंदिन परवान चढ़ने लगा. एक दिन दोपहर का समय था और घड़ी की सुइयां 2 बजे का समय बता रही थीं. गुडि़या घर पर खाना खाने के बाद आराम कर रही थी. उस की नजर जब घड़ी पर गई तो बिस्तर से उठ कर तैयार होने लगी. उस ने धानी रंग का टौप और काले रंग की स्किन टाइट जींस पहनी तो उस के खूबसूरत बदन को चार चांद लग गए. कपड़े पहनने के बाद जब उस ने आईने में अपने आप को निहारा तो खुशी से फूली नहीं समाई.

यह उस की आदत में भी शुमार था कि रोज आईने के सामने अपने संगमरमरी बदन को देख कर एक बार दिल से मुसकराती जरूर थी. वह तैयार हो कर घर से निकल कर उस स्थान की तरफ बढ़ गई, जहां वह हर रोज अपने प्रेमी शादाब से मिलती थी. वह जब उस स्थान पर पहुंची तो उस ने शादाब को वहां पहले से बैठा देखा, जोकि उस का बेसब्री से इंतजार कर रहा था. वह चुपचाप शादाब के पीछे पहुंची और उस की आंखों को अपने हाथों से बंद कर लिया. यह देख कर पहले तो शादाब हड़बड़ाया लेकिन गुडि़या के मुलायम हाथों को छू कर वह जान गया कि वह कोई और नहीं बल्कि गुडि़या है. उस ने गुडि़या के हाथों को अपनी आंखोें से हटाया तो उस की खूबसूरती देख कर उस की आंखें चौंधिया गईं.

‘‘क्या बात है, गुडि़या? आज तो बिलकुल बिजली गिरा रही हो.’’ गुडि़या को देखते ही बोला.
‘‘धत्त लगता है आज तुम ने मुझे बेवकूफ बनाने का इरादा बना रखा है.’’ वह इतराते हुए बोली. ‘‘नहीं गुडि़या, मैं तुम्हें बेवकूफ नहीं बना रहा हूं. सच में तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो. फिर हीरा अपनी चमक और कीमत खुद नहीं जानता, वह तो सिर्फ जौहरी ही बता सकता है.’’ उस ने कहा.‘‘अच्छा जौहरी साहब, आप ने इस हीरे की पहचान कर ली हो तो अब जरा यह भी बता दीजिए कि यह हीरे की चमक है या कुछ और…’’‘‘यह खूबसूरती और चमक सिर्फ खालिस हीरे की ही हो सकती है. लेकिन इस जौहरी ने अगर अपना जौहर इस हीरे पर दिखा दिया तो इस हीरे की खूबसूरती और चमक दोगुनी हो जाएगी.’’ शादाब ने गुडि़या की आंखों में आंखें डाल कर प्यार से अपनी बात कही तो गुडि़या को भी उस की बात की गहराई समझते देर नहीं लगी.

इसलिए उस ने लजा कर पलकें झुकाईं और बोली, ‘‘इस हीरे की चाहत तुम हो और यह तुम को जल्द से जल्द पाना चाहता है.’’ इतना कह कर उसने आस भरी नजरों से शादाब की तरफ देखा तो वह मुसकरा रहा था. उस के बाद उन दोनों के बीच शारीरिक रिश्ता भी कायम हो गया.गुडि़या की आम शोहरत सही नहीं थी. गांव में सब उस की दिलफेंक हरकतों के बारे में जानते थे. शादाब के अलावा उस के दूसरे युवकों से भी प्रेम संबंध थे.

पूरे गांव में उस की हरकतों के चर्चे होने लगे तो पिता राजाराम और कुसुमा को चिंता हुई. इस से पहले कि देर हो जाए, वह गुडि़या के लिए रिश्ते की तलाश में जुट गए. अमेठी जिले के गांव पीपरपुर में शिवनाथ कश्यप रहते थे. उन के परिवार में 3 बेटे मुरली, किशन व मनोज और 2 बेटी राजकुमारी और शिवकुमारी थीं. मुरली सूरत (गुजरात) में साडि़यां बनाने वाली फैक्ट्री में काम करता था. वह विवाहित था. पत्नी और 2 बच्चों के साथ वहीं रहता था.

किशन भी 5 साल पहले भाई मुरली के पास सूरत चला गया. किशन वहां गत्ता बनाने वाली फैक्ट्री में काम करने लगा. किशन की उम्र 26 साल थी और वह कमाने भी लगा था. इसलिए शिवनाथ ने उस का विवाह करने का निर्णय ले लिया. वैसे भी उस के लिए रिश्ते आने लगे थे. ऊधर गुडि़या के पिता राजाराम भी गुडि़या के हाथ जल्द पीले करने को आतुर थे. उन को किसी से किशन के बारे में पता चला तो शिवनाथ से जा कर रिश्ते की बात की.बात आगे बढ़ी. शिवनाथ ने घर के लोगों के साथ जा कर गुडि़या को देख लिया और पसंद कर लिया. विवाह की तारीख तय हुई 25 जून 2020.

विवाह की तारीख जैसेजैसे नजदीक आने लगी, दोनों परिवार विवाह की तैयारियों में लग गए. लेकिन इसी बीच शिवनाथ और उस के परिवार तक गुडि़या के बदचलन होने की बात पहुंच गई. यह बात पता चलते ही सब सकते में आ गए. घर वालों ने सोचा कि ऐसी लड़की को घर की बहू बनाना किसी तरह से सही नहीं होगा, आगे चल कर दिक्कतें खड़ी होंगी. समय रहते पता चल गया है तो समय रहते इस रिश्ते को तोड़ दिया जाए तो बेहतर होगा.

यही सोच कर शिवनाथ ने किशन का गुडि़या से रिश्ता तोड़ देने की बात गुडि़या के घर वालों को बता दी. यह सुन कर गुडि़या के घर वाले बौखला गए. गुडि़या की वजह से वैसे भी पूरे गांव में बदनामी हो चुकी थी. अब रिश्ता टूटने की बात और उस की वजह गांव के लोगों को पता चलेगी तो गांव के लोग उन का मजाक उड़ाएंगे. ऐसे में सब ने किशन के घर वालों को सबक सिखाने के लिए किशन की हत्या करने का फैसला कर लिया. इस सब के पीछे गुडि़या के मामा कांशीराम का सब से बड़ा हाथ था.

11 जून, 2020 को गुडि़या ने सुबह फोन कर के किशन को अपने घर बुलाया. किशन ने मना किया लेकिन गुडि़या ने उसे आने के लिए मना लिया. गुडि़या गांव आने वाले रास्ते पर पहले से खड़ी हो गई.
किशन आया तो वहीं रास्ते में गुडि़या ने उसे रोक लिया. वह उसे घर न ले जा कर कुछ दूरी पर नहर के पास सुनसान जगह पर ले गई. वहां राजाराम, कुसुमा और कांशीराम पहले से मौजूद थे. वहां मौजूद सभी लोगों ने किशन को दबोच लिया. किशन को सपने में भी आभास नहीं था कि उस के साथ ऐसा कुछ हो जाएगा.

किशन को दबोच कर उस पर चाकू से कई प्रहार कर के उस की हत्या कर दी और लाश और हत्या में प्रयुक्त चाकू को नहर में फेंक दिया. लाश नहर के पानी के बहाव के साथ बह गई. हत्या करने के बाद सभी लोग अपने घरों को लौट गए. जब मुकदमा दर्ज हुआ तो डर की वजह से सभी घरों से फरार हो गए. गुडि़या ने थाना लंभुआ क्षेत्र के करवर नंबर 3 नया बाग में रहने वाली दूर की रिश्तेदार मालती देवी के यहां शरण ले ली. मालती ने सब की नजरों से बचा कर उसे अपने घर में रखा.

लेकिन गुनाह करने के बाद गुनहगार का बच पाना असंभव होता है. गुडि़या, कुसुमा, राजाराम भी बच न सके और पकडे़ गए. गुडि़या को शरण देने के मामले में मालती को भी गिरफ्तार किया गया. उसे भादंवि की धारा 216 का आरोपी बनाया गया. कानूनी खानापूर्ति करने के बाद चारों को 10 जून, 2021 को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया. गुडि़या के दोनों मामा कांशीराम और लालता फरार थे, जिन की तलाश पुलिस सरगरमी से कर रही थी. कांशीराम की लोकेशन कानपुर में मिली थी, जब तक पुलिस टीम वहां पहुंची, कांशीराम वहां से निकल गया.

पुलिस को लालता की लोकेशन घटना वाले दिन घटनास्थल पर नहीं मिली, लेकिन घटना के बाद उस के द्वारा काफी देर तक कई बार घर वालों से बात की गई. इस से पुलिस का मानना है कि घटना के अंजाम देने में शायद वह शामिल नहीं था, लेकिन उसे घटना के बारे में सब पता था. फिलहाल कथा लिखे जाने तक पुलिस उन दोनों की तलाश में लगी थी.

Valentine’s Special: 11 टिप्स- अरेंज हो या लव मैरिज, टूटने न पाएं रिश्तों की डोर

रवि और श्वेता ने घर वालों की मरजी के खिलाफ कोर्ट मैरिज की थी. अभी उन की शादी को एक साल भी पूरा नहीं हो पाया है कि उन के रिश्ते में दरार आनी शुरू हो गई है. शादी से पहले जहां दोनों एकसाथ जीनेमरने की कसमें खाते थे, अब एकसाथ रहने को तैयार नहीं हैं. घर वाले उन के मामले में नहीं पड़ना चाहते क्योंकि उन्हें यह रिश्ता पहले से पसंद नहीं था. रवि और श्वेता दोनों नौकरीपेशा हैं. दोनों को एकदूसरे के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है और अगर समय निकल भी आए तो उन के अपनेअपने गिलेशिकवे खत्म होने का नाम नहीं लेते. श्वेता की शिकायत है कि रवि उस से शादी से पहले जैसा प्यार अब नहीं करता. अगर फुजूलखर्ची के लिए उसे मना करो तो झगड़ा शुरू कर देता है और उस से नौकरानी जैसा व्यवहार करने लगा है. कई बार वह रवि को समझा चुकी है, लेकिन रवि उस की बातों को महत्त्व नहीं देता. अब उस ने फैसला किया है कि वह रवि के साथ नहीं रहेगी.

रवि का मानना है कि शादी के बाद सब की प्राथमिकताएं बदलती हैं और उस की भी बदली हैं. इस में गलत क्या है? रवि का कहना है कि कल तक श्वेता उस की प्रेमिका थी जिस को लुभाने और खुश करने के लिए वह गिफ्ट्स देता था और तरहतरह से लुभाता था. लेकिन आज वह उस की पत्नी है. श्वेता को यह समझना चाहिए और घर की जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए. मैं जब भी उसे घर का काम करने के लिए कहता हूं या कुछ खर्च करता हूं तो वह झगड़ा करना शुरू कर देती है. तंग आ चुका हूं उस की आदतों से, अब मैं उस के साथ नहीं रह सकता.

ये भी पढ़ें- Valentine Special: हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए आज से ही फौलो करें ये 10 टिप्स

रोहित का भी यही हाल

रोहित और पूजा की घरवालों की मरजी से अरेंज्ड मैरिज हुई थी. रोहित एक बड़ी कंपनी में मैनेजर की पोस्ट पर है, जबकि पूजा एक गृहिणी है. वह घर की जिम्मेदारियों को अच्छी तरह संभाल रही  थी. शादी के शुरुआती दिनों में सबकुछ अच्छा चल रहा था. दोनों काफी खुश थे. उन के प्यार का दायरा तेजी से बढ़ रहा था. 2 साल बाद जब उन के घर बेटी दिव्या ने जन्म लिया तो उन के प्यार को एक नई पहचान मिली. न जाने फिर ऐसा क्या हुआ कि दोनों के प्यार को नजर सी लग गई और एकदूसरे की वफादारी को ले कर शक ने उन के दिमाग में जगह बना ली.

रोहित के औफिस में काम करने वाली महिला सहकर्मियों को पूजा शक की नजर से देखती थी. तो वहीं दूसरी तरफ रोहित पूजा के सोशल साइट्स के दोस्तों के मैसेजेस और फोन कौल्स से परेशान था. पूजा कहीं भी बाहर निकलती तो रोहित के दिमाग में तरहतरह के नकारात्मक विचार उस के शक को बढ़ाने का काम करते. अब आएदिन दोनों में झगड़े होने लगे थे. नतीजा यह निकला कि अब दोनों अलगअलग रह रहे हैं. रवि और श्वेता की समस्या हो या रोहित और पूजा की, यह हकीकत आज के दौर में आम सी हो गई है.

ये भी पढ़ें- Valentine Special: क्या हैं रिलेशनशिप के मायने

आधुनिकता और आगे निकलने की दौड़ में आज आपसी रिश्ते इतने उलझ गए हैं कि उन्हें सुलझाने के लिए भी हमारे पास वक्त नहीं है. विशेषकर महानगरों में जहां परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए पतिपत्नी दोनों कार्यरत हैं. ऐसे में अगर कहीं वक्त निकल भी आए तो दोनों का अहं बीच में आ कर बात को बनाने के बजाय और ज्यादा बिगाड़ देता है. हम किसी को भी समझने की कोशिश नहीं करते, बस अपनी ही धुन में अपनी दुनिया में व्यस्त रहते हैं.

कई बार हमें इस बात का एहसास होता है कि हमारे बीच जो हो रहा है वह सही नहीं है और ऐसा नहीं होना चाहिए. लेकिन हम इस एहसास को अपने दिल के किसी कोने में दबा देते हैं और वह करते हैं जो हमारा मतलबी दिमाग अहं को संतुष्ट करने के लिए कहता है. आपसी रिश्तों का यह तानाबाना, कभी लगता है कि इतना मजबूत है कि सात जन्मों तक नहीं टूटेगा, तो कभी लगता है वक्त के एक छोटे से झोंके से बिखर जाएगा.

ये भी पढ़ें- मध्यम वर्ग के लिए निवेश के नए अवसर

एकदूसरे को मौका दें

अगर किसी बात पर आप की अपने पार्टनर से तकरार होती है और दोनों एकदूसरे से खफा हो कर बात करना बंद कर देते हैं तो आप जरा सोचिए कहां से बात बनेगी या कहां से चीजें सुधरेंगी जब तक हम दूसरों को कोई मौका नहीं देंगे, अपनी बात कहने का या स्वयं के लिए कोई मौका नहीं तलाशेंगे. इस स्थिति में शांत रह कर दूसरे की बात को महत्त्व देना बेहद जरूरी है. यह बात सिर्फ घरेलू रिश्तोें पर ही लागू नहीं होती बल्कि बाहरी रिश्तों पर भी उतनी ही लागू होती है. किसी भी संबंध की शुरुआत झूठ या लालच को आधार बना कर बिलकुल भी नहीं करनी चाहिए. ये वे रास्ते हैं जो कभी मंजिल तक नहीं पहुंचाते.

रिश्ते की अहमियत समझें

किसी भी रिश्ते को बनाए रखने के लिए उसे अहमियत देना, उस के महत्त्व को समझना बेहद जरूरी है. रिश्ते को अहमियत देने से मतलब उस व्यक्ति को महत्त्व और सम्मान देना जिस से आप का रिश्ता है. सिर्फ रिश्ता बना लेना बड़ी बात नहीं होती, बल्कि देखने वाली बात तो तब होती है जब उस रिश्ते को आप किस शिद्दत के साथ निभाते हैं. उसे प्यार और विश्वास की किन बुलंदियों तक ले जाते हैं.

रिश्ते निभाएं ऐसे

हर व्यक्ति जन्म से ही कुछ रिश्तों से बंधा होता है जो उसे विरासत में मिलते हैं. जिन में मां, बाप, भाई, बहन आदि शामिल हैं. वहीं दूसरी ओर कुछ रिश्ते उसे बनाने या कमाने पड़ते हैं, दोस्ती और शादी उन्हीं कमाए हुए रिश्तों में शामिल हैं. रिश्ते बनाना और बिगाड़ना आप के हाथ में होता है. कुछ लोग अपने मधुर व्यवहार से गैरों को भी अपना बना लेते हैं, तो कुछ लोग व्यवहार की कटुता से अपनों को भी बेगाना बना देते हैं. अगर आप सिर्फ अपने लिए सोचते और करते हैं, उस सोच में दूसरों को महत्त्व नहीं देते और न ही उन का खयाल करते हैं तो निश्चित ही आप रिश्ते बनाने की बुनियाद पर बहुत कमजोर हैं. रिश्तों की बुनियाद ही वहां से शुरू होती है जब आप किसी और के लिए सकारात्मक सोच के साथ उसे अपनी सोच में महत्त्व देना शुरू करते हैं. उस के बाद अपनेआप ही धीरेधीरे उस व्यक्ति से आप का बौंड इतना मजबूत हो जाता है कि आप को आगे कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ती. रिश्ते खुदबखुद सही रास्ते पर आ जाते हैं.

प्यार से अच्छा तालमेल बनाएं

शादी को भारतीय समाज में बहुत ज्यादा महत्त्व दिया जाता है. देखा जाए तो विवाह विश्वास से भरा वह बंधन है जिस में पतिपत्नी का एकदूसरे के साथ ईमानदार होना निहायत जरूरी है. कहा जाता है कि पतिपत्नी गाड़ी के 2 पहियों की तरह होते हैं. गृहस्थ जीवन को सुचारु रूप से चलाने के लिए दोनों का न केवल शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है बल्कि एकदूसरे को समझना और महसूस करना उस से कहीं ज्यादा जरूरी है. हो सकता है आप का व उन का सोचनेसमझने और काम करने का नजरिया व तरीका अलग हो.

यह अकसर देखा भी जाता है कि पतिपत्नी के विचार और पसंद आपस में मेल नहीं खाते, बिलकुल विपरीत स्वभाव वाले लोग जीवनसाथी बन जाते हैं. जैसे, अगर एक की आदत कम बोलने की है तो दूसरे की ज्यादा बोलने की, अगर एक पैसे बचाता है तो दूसरा ज्यादा खर्च करता है या फिर एक अंतर्मुखी है तो दूसरा बहिर्मुखी आदि. इस का मतलब यह बिलकुल नहीं कि एक गलत व्यक्ति आप से जुड़ गया है या एक बेमेल रिश्ता बन गया है. अगर आप दोनों के नजरिए अलग हों भी तो उन में प्यार से अच्छा तालमेल बनाएं, एक ऐसी समझ विकसित करें कि विपरीत आदतें आप के रिश्तों पर बुरा असर न डाल सकें.

स्वयं में भी परिवर्तन लाएं

किसी भी व्यक्ति में अपने अनुसार सौ फीसदी परिवर्तन होने की उम्मीद करना, उस के साथ नाइंसाफी करने जैसा है. मतलब उस के रहनसहन, खानपान और आचारविचार को आप अपनी इच्छा के अनुरूप बदलना चाहते हैं. मानव स्वभाव के अनुसार, हर व्यक्ति स्वतंत्र रहना पसंद करता है और अपनी इच्छा के अनुसार ही जीवन जीना चाहता है, उसे किसी तरह का बंधन असहज महसूस होता है. सामने वाले व्यक्ति में अच्छे परिवर्तन लाने के लिए सब से पहले आप को ही बदलना होगा. तभी आप उस में परिवर्तन की उम्मीद कर सकते हैं.

कहा जाता है न, नेक काम की शुरुआत अपनेआप से ही करनी चाहिए और वह बात यहां पूरी तरह लागू होती है. आप का प्यार, समर्पण और अच्छा बरताव उस विपरीत रिश्ते को भी एक मजबूत बुनियाद दे सकता है. ईमानदारी से अगर हम अपनी स्वार्थ से भरी सोच को छोड़ कर अपने पार्टनर को खुशियां और उसे परेशानियों से दूर रखने का निश्चय कर लें तो यकीन मानिए, आप उस का दिल जीत लेंगे और अपने लिए उस की सोच भी बदलने में जरूर कामयाबी हासिल करेंगे. वह भी आप के लिए उतना ही अच्छा करने के लिए मजबूर हो जाएगा.

पहल करना जरूरी

अगर किसी मोड़ पर आ कर आप के आपसी रिश्ते उलझते भी हैं रिश्तों को सुलझाने की पहल चाहे आप करें या आप के सामने वाला व्यक्ति, लेकिन पहल जल्द ही होनी चाहिए क्योंकि गुजरने वाला हर पल आप के और उन के बीच दिलों की दूरी को बढ़ा रहा है और हो सकता है कि वक्त के साथ ये दूरियां अधिक बढ़ जाएं कि दिलों का दोबारा पास आना संभव न हो सके. कभीकभी देखा जाता है कि हमारी एक छोटी सी जिद की वजह से हमें बहुत बड़ा खमियाजा उठाना पड़ता है. हमारी जिद, अहं या गुस्सा हमें उन लोगों से जुदा कर देता है जिन्हें कभी हम अपने से अलग नहीं करना चाहते. जिस भी वजह से आप के आपसी रिश्तों में खटास आनी शुरू हो, समझ लेना चाहिए कि आगे चल कर वही वजह आप के रिश्तों को बरबाद कर सकती है.

जिरह से बचें

कहा जाता है कि मियांबीवी में जब तक तूतू मैंमैं और तकरार नहीं होगी तब तक प्यार का मजा नहीं आएगा. लेकिन यह तकरार एक सीमा तक रहती है तभी तक ठीक है. अकसर यह देखा जाता है कि प्यार में शुरू की गई तकरार धीरेधीरे इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि वह जिरह या बहस का विकराल रूप ले लेती है और दोनों पतिपत्नी उस में उलझते चले जाते हैं.

सकारात्मक समाधान निकालें

अगर आप के खुशहाल गृहस्थ जीवन के रास्ते को कोई समस्या आ कर रोकती भी है तो परेशान न हों. समझदारी से काम लें. ठंडे दिमाग से आपस में खुल कर बात करें और उस समस्या का कोई न कोई सकारात्मक समाधान निकालें और उस पर अमल करें. ऐसी समझदारी दिखा कर आप एक बार पार्टनर का दिल जीत लेंगे और आप के पार्टनर का भरोसा आप पर फिर से पहले जैसा ही कायम हो जाएगा.

काउंसलर की सलाह लें

आप की रिलेशनशिप के दौरान परेशानियां छोटी या बड़ी किसी भी रूप में सामने आ सकती हैं. अगर जिंदगी में किसी भी मोड़ पर आ कर दोनों को लगता है कि एकदूसरे को समझना और समझाना काफी मुश्किल हो रहा है और आप की कोशिशें रिश्तों को सुधारने में बेअसर साबित हो रही हैं तो ऐसी स्थिति में एक काउंसलर आप की काफी मदद कर सकता है. वह आप के टूटते और बेजान हो रहे रिश्तों में अपनी प्रभावी सलाह दे कर एक नई जान फूंक सकता है.

गलत आदतों से बचें

कोई भी व्यक्ति संपूर्ण नहीं होता, मतलब उस में कोई न कोई कमी या बुराई जरूर पाई जाती है, जो दूसरों के लिए परेशानी का कारण हो सकती है. पारिवारिक कलह से बचने के लिए एक बेहतर रास्ता यह हो सकता है कि हमें उन कामों को या उन गलतियों को करने से बचना चाहिए जो हमारे रिश्ते पर बुरा असर डालती हों या हमारा पार्टनर जिन्हें नापसंद करता हो, जैसे रोजाना शराब पीना, सिगरेट, जुआ, फुजूलखर्ची करना या फिर पार्टनर की आंखों में धूल झोंकना आदि. अगर एक आइडिया लगाया जाए तो ऐसी कोई भी बुरी वजह आप के स्वास्थ्य पर तो विपरीत असर डालती ही है और साथ ही साथ आर्थिक रूप से भी कमजोर करती है.

एकदूसरे पर विश्वास बनाए रखें

जीवनसाथी का दिल जीतने के लिए पार्टनर्स को लगातार धैर्य और सकारात्मक रवैया अपनाए रखना है. किसी भी रिश्ते को बनाए रखने के लिए उसे भरोसे की बुनियाद पर सम्मान, समर्पण, प्यार और समय देना बहुत ही जरूरी होता है जिस के बल पर दोनों के बीच एक मजबूत रिश्ता खड़ा होता है. यकीन मानिए जब यह परीक्षा पास कर आप उन का दिल जीत लेंगे, उस के बाद आप दोनों की जिंदगी एक मधुर संगीत में बदल जाएगी. आप के आपसी रिश्ते प्यार और विश्वास की बुनियाद पर इतने मजबूत हो जाएंगे कि उन्हें हिला पाना भी किसी के लिए संभव न होगा.

  • गुस्सा न करें
  • भावनाओं को समझें
  • बचें गलत आदतों से
  • पहल करना जरूरी
  • एकदूसरे को मौका दें
  • शक से दूर रहें
  • तालमेल जरूरी
  • खुद को बदलें
  • रिश्ते निभाएं
  • आपस में ईमानदारी बरतें
  • आपसी विश्वास बनाए रखें
  • समाधान निकालें
  • जिरह से बचें
  • काउंसलर की सलाह जरूर लें

थायराइड से राहत पाने के लिए करें इन 7 चीजों को अपनी डाइट में शामिल

किसी भी तरह की परेशानी में हिदायत दी जाती है कि हम अपना खानपान संयमित और संतुलित रखें. असंतुलित खानपान से हमें कई प्रकार की बीमारियां होती हैं. आज कल महिलाओं में थायराइड की समस्या तेजी से बढ़ी है. ज्यादातर महिलाओं में ये बीमारी देखी जा रही है. इसका प्रमुख कारण असंयमित खानपान और दिनचर्या है. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि जब आपको थायराइड हो तो आपका खानपान किस तरह का होना चाहिए.

  1. लें फाइबरयुक्त आहार

थायराइड की बीमारी में उच्च फाइबरयुक्त आहार लेना चाहिए. इस बीमारी में फाइबर बेहद कारगर होता है.

2. खाएं आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थ

इस बीमारी में जरूरी है कि आप आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों का खूब सेवन करें. जैसे दही, मछली, मांस, अंडे, मूली, और दलिया. इनके निरंतर सेवन से आपको काफी आराम मिलेगा.

ये भी पढ़ें- जानें, क्यों आयरन है बेहद जरूरी

3. नारियल का तेल

बता दें कि नारियल का तेल थायराइड में काफी फायदेमंद होता है. इसलिए आपको इसका सेवन भी करना चाहिए. नारियल के तेल को पीने से आपको और भी कई तरह के लाभ होते है.

4. वसा या कार्बोहाइड्रेट से बचें

थायराइड में वसा या कार्बोहाइड्रेट का सेवन आपके लिए आर भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है. इस बीमारी के मरीजों को इससे दूरी बनानी चाहिए.

5. चबाएं अदरक

थायराइड की समस्या में अदरक असरदार है. इसे कच्चा चबाने से थायराइड में काफी आराम मिलता है. इसमें पाए जाने वाले तत्व थायराइड में काफी असरदार होते हैं.

6. लें हरी पत्तेदार सब्जियां

थायराइड की परेशानी में हरी पत्तेदार सब्बजियां काफी फायदेमंद होती हैं. इसके नियमित सेवन से बीमारी में काफी आराम मिलता है.

ये भी पढ़ें- Periods में ना करें ये 6 गलतियां

7. मौसमी फलों का करें सेवन

थायराइड में फलों का सेवन काफी असरदार होता है. इस समस्या में आपको मौसमी फलों का खूब सेवन करना चाहिए, कुछ दिनों में आपको फायदा दिखेगा.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें