लेखक- संदीप कुमार

दलहनी वर्ग में मसूर सब से पुरानी और खास फसल है. मसूर का दुनियाभर में भारत की श्रेणी क्षेत्रफल के अनुसार पहला व उत्पादन के अनुसार दूसरा नंबर है और भारत में क्षेत्रफल के अनुसार मध्य प्रदेश की प्रथम श्रेणी है. प्रचलित दालों में सर्वाधिक पौष्टिक होने के साथसाथ इस दाल को खाने से पेट के विकार समाप्त हो जाते हैं. रोगियों के लिए मसूर की दाल अत्यंत लाभप्रद मानी जाती है. यह रक्तवर्धक और रक्त में गाढ़ा लाने वाली होती है. इसी के साथ दस्त, बहुमूत्र, प्रदर, कब्ज व अनियमित पाचन क्रिया में भी लाभकारी होती है. दाल के अलावा मसूर का उपयोग विविध नमकीन और मिठाइयां बनाने में भी किया जाता है. इस का हरा व सूखा चारा जानवरों के लिए स्वादिष्ठ व पौष्टिक होता है यानी सेहत के लिए फायदेमंद है.

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