Family Story in Hindi : सुमन ने तो पहली बार मिलते ही मोहिका को अपनी बेटी मान लिया था लेकिन मोहिका थी कि सुमन को सिर्फ सौतेली मां ही मानती रही. सुमन मोहिका की यह नफरत फिर भी सहती जा रही थी.
घड़ी की सूई की तरह सुमन का कलेजा धकधक कर रहा था. मन में बुरेबुरे विचार आजा रहे थे. समझ नहीं आ रहा था उसे कि वह क्या करे. पति विराज हफ्तेभर बाद औफिस टूर से लौट कर आराम से सो रहे थे, इसलिए उसे सोते से जगा भी नहीं सकती वह लेकिन उसे कैसे नींद आ सकती है जब जवान बेटी घर से बाहर हो.
विराज और सुमन की बेटी मोहिका बोल कर तो यही गई थी कि वह साढ़े 10 बजे तक घर आ जाएगी लेकिन रात के 12 बजने को हैं और अभी तक उस का अतापता नहीं है. दरअसल, मोहिका अपने एक दोस्त के जन्मदिन की पार्टी में गई थी. उस ने कहा था कि वह जल्दी आ जाएगी. मगर अभी तक वह घर नहीं आई है, फोन भी नहीं उठा रही. अब तो उस का फोन बंद आ रहा है. उस के कई दोस्तों को कौल कर के पूछा उस ने मोहिका के बारे में लेकिन सब ने यही कहा कि उन्हें कुछ नहीं पता कि वह कहां है.
क्या करूं अब मैं, हां, राजवी से पूछती हूं. शायद उसे पता हो क्योंकि मोहिका ने कहा था कि वह राजवी के साथ ही यश के जन्मदिन की पार्टी में जाने वाली है. अपने मन में सोच उस ने राजवी को फोन लगाया. उस ने भी यही उत्तर दिया कि उसे नहीं पता कि मोहिका कहां है.
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