Widow Property Rights :

झंझट से बचने के लिए वसीयत जरूरी

65 साल की विधवा प्रेमा कुमारी के कोई संतान नहीं. 5 वर्ष पहले उस के पति की मृत्यु हो चुकी थी. इस के बाद से ही प्रेमा कुमारी बीमार रहती थी. एक दिन अचानक उस की मौत हो गई. अब सब से बड़ा सवाल यह है कि प्रेमा कुमारी की जमीन किस के उत्तराधिकार में जाएगी? वह संपत्ति जो विधवा की पैतृक नहीं है उस का क्या होगा?

कोविड के दौरान एक युवा दंपती की मौत हो जाती है. अब लड़के की मां अपने बेटे की संपत्ति पर अपना हक समझाती है और लड़की की मां अपनी बेटी की संपत्ति पर अपना अधिकार समझा रही थी. एक मामले में निसंतान दंपती की मृत्यु के बाद पुरुष की बहन संपत्ति को अपना समझा रही थी. आज के दौर में महिलाएं नौकरी में हैं, उन की अपनी स्वअर्जित आय होती है. इस आय, जो विधवा की संपत्ति है उस पर किस का अधिकार होगा?

भारत में उत्तराधिकार का अधिकार व्यक्तिगत कानूनों के अंतर्गत आता है. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के अनुसार हिंदू अविभाजित परिवार में बहू को विवाह की तिथि से ही परिवार के सदस्य का दर्जा मिल जाता है. बहू को संपत्ति में अपने पति के हिस्से या तो पति द्वारा स्वेच्छा से हस्तांतरित या पति की मृत्यु के बाद प्राप्त अधिकार के माध्यम से परिवार की संपत्ति में हिस्सा मिलता है.

बहू उस संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं जता सकती जो विशेष रूप से उस की ससुराल वालों की अपनी बनाई संपत्ति हो. ससुराल में बहू को केवल अपने पति के हिस्से पर ही अधिकार प्राप्त होगा. बड़ा सवाल यह है कि विधवा की संपत्ति में अधिकार मायके वालों का होगा या ससुराल वालों का?

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