जी हां , लोगों के जीवन में खुशी का रंग भरते फूलों ने इन दिनों किसानों के जीवन को रंगहीन कर दिया है .फल , सब्जी या फूलों की खेती की खेती. ये सभी नगदी फसलें हैं .फसल तैयार होने के बाद अगर इन्हें तुरंत बाजार में ना भेजा जाए तो यह खराब हो जाती हैं , इन का मोल दो कौड़ी का भी नहीं रह जाता.
आज फूल पैदा करने वाले किसानों के सामने ऐसा ही दौर आया है .खेतों में लदे इन फूलों की खुशबू किसानों का दम घोंट रही है . अपने हाथों से किसान  खुशबू बिखेरती अपनी फसल को काट कर फेंकने को मजबूर हैं,  क्योंकि कोरोना के कहर ने किसी को नहीं छोड़ा .

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