दुनिया में जब-जब भी मनुष्य पर संकट आया इतिहास गवाह है कि धर्म के ठेकेदार, ईश्वर के स्वयंभू एजेंट्स और अमीर पूंजीपति मैदान छोड़ कर अपनी-अपनी बिलों में घुस जाते हैं. आपदाओं से अगर कोई लड़ता है तो वह है विज्ञान. आज कोरोना वायरस के संकट में पूरा विश्व थरथर काँप रहा है. मानव जीवन मुश्किल में है. हर दिन सैकड़ों ज़िंदगियाँ काल के गाल में समा रही हैं. ऐसे वक़्त में पोंगा पंडित, मौलवी-मौलाना, पादरी जो विज्ञान की धज्जियां उड़ाते हुए धार्मिक अंधविश्वासों, पाखंड और मान्यताओं को स्थापित करने में दिन रात एक किये रहते थे, सारे के सारे सिरे से नदारद हो गए हैं. गोमूत्र को हर मर्ज़ की दवा बताने वाले कोरोना से खुद को बचाने के लिए सात किवाड़ों के पीछे जा छिपे हैं. अब कोई गोमूत्र नहीं पी रहा और ना ही गोबर का लेप अपने शरीर पर कर रहा है. अब कोई व्रत नहीं कर रहा, कथाएं नहीं बांच रहा, गण्डा-ताबीज़ नहीं बाँट रहा है क्योंकि धर्म के ठेकेदारों को ये अच्छी तरह मालूम है कि इन चीज़ों से ना कभी कुछ हुआ है और ना कभी कुछ होगा.

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