विजय सिंह ने पुलिस अधिकारी के पैर पकड़ लिये कि उस खत में क्या लिखा है कृपया उन्हें बताया जाए. उनकी इकलौती बेटी की जिन्दगी का सवाल है. तब तक नीलू और उसकी मां भी कमरे में पहुंच गयी थीं. नीलू रोती हुई अपने पिता के सीने से चिपक गयी. डर के मारे उसका पूरा बदन कांप रहा था. विजय सिंह ने पुलिस अधिकारी से विनती की, ‘साहब, हमें शरद के बारे में कुछ भी नहीं मालूम. वह ढाई साल पहले यहां किराये पर रहने आया था. उसने बताया था कि उसके आगे-पीछे कोई नहीं है. मां-बाप मर चुके हैं. यहां इन्श्योरेंस कम्पनी में काम करता है. भला लड़का है साहब, मेरी बेटी उससे प्यार करती है, आज दोनों की शादी है. हम पर रहम करिये. बताइये कि इस खत में उसने क्या लिखा है...’

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