‘आ गयी बिटिया...’ नीलमणि की मां ने बेटी को दरवाजे से अन्दर आते देखा तो बोल पड़ी.

‘हां मां...’ नीलमणि मां को छोटा सा जवाब देकर अपने कमरे की ओर जाने को हुई तो मां ने हाथ पकड़ कर अपनी खाट पर बिठा लिया. बोली,

‘अरे, सुन तो... जरा इधर बैठ... आज फिर चौधराइन आयी थीं... तुझे पूछ रही थीं... बिटिया, वह कह रही थीं कि अगर तू एक बार शादी का मन बना ले तो एक और अच्छा लड़का उनकी नजर में है...’

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