उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में रहने वाली रीता के घर के सामने स्कूटी से एक युवक ने हेलमेट चोरी करते देखा गया. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया. चोरी करने वाले ने खुद हेलमेट लगा रखा था. उसकी गाड़ी में भी तीन चार हेलमेट लगे थे. चोर को देख कर लगता है कि वह हेलमेट चोरी करता है. यह पहला मामला है जिसमें पुलिस ने हेलमेट चोरी में दर्ज किया है. मोटर साइकिल, स्कूटर, साइकिल चोरी के साथ ही साथ अब हेलमेट की चोरी भी बड़ी संख्या में होने लगी है. केवल नये ही नहीं पुराने हेलमेट भी चोरी हो सकते है. जो शायद बाजार में 50 रूपये का ही बिकता होगा.

लखनऊ पुलिस का कहना है कि हेलमेट चोरी की शिकायतें अक्सर आती रहती है. केवल रात में ही नहीं  बल्कि अगर हेलमेट लौक न हो तो पार्किग से भी हेलमेट चोरी हो जाता है. लखनऊ के ही रहने वाले रमेश बताते है कि वे अपनी मोटर साइकिल को चारबाग रेलवे स्टेशन की पार्किग में बाइक खड़ी कर दी. 4 घंटे के बाद जब वे वापस आएं तो गाड़ी से हेलमेट गायब था.

पार्किग के नियम कानून में यह लिखा होता है कि गाड़ी के साथ लगे हेलमेट की जिम्मेदारी पार्किंग की नहीं होगी. ऐसे में कई पार्किग में सुविधा भी होती है कि गाड़ी के लिये अलग और हेलमेट के लिये अलग चार्ज देना पड़ता है. किसी भी शहर को देख लीजिये वहां हर दोपहिया गाड़ी में हेलमेट का लौक लगा होता है.

केवल अपने देश में ही नहीं विदेशो में भी इस तरह वियाना जैसे देश में भी लोग अपनी साइकिल को 3-3 चेनों से खंभे में बांध देते है. साइकिल के साथ हेलमेट को भी चेन से बांधा जाता है. इससे साफ है कि छोटी छोटी चीजों की चोरी की परेशानी पूरी दुनिया में है. अपने देश में यह परेशानी कुछ ज्यादा ही है. इन चीजों को चोरी बचाने के लिये भी अलग अलग तरह की व्यवस्था होने लगी है. विदेशों में साइकिल चलाने वाले को भी हेलमेट लगाना होता है. ऐसे में हेलमेट को चोरी से बचाने के लिये उसे भी चेन से बांधना पडता है.

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स्कूटी जैसी गाडियों में तो कंपनी सीट के नीचे हेलमेट रखने की जगह कंपनी ही बनाकर देने लगी है. पहले स्कूटर में ऐसी व्यवस्था नहीं होती थी. उस समय हेलमेट स्कूटर में बांधना पड़ता था. मोटर बाइक में हेलमेट बांधने की व्यवस्था के लिये चेन और लौक दोनो तरीके होते है. नये हेलमेट की कीमत 5 सौ रूपये से लेकर 1200-1400 सौ रूपये तक होती है चेन और हेलमेट स्टैंड 100 रुपये से लेकर 200 रूपये तक मिलता है.

चोरी का हेलमेट बाजार में 200 से 400 रूपये में बिकता है. ऐसे में चोरी के हेलमेट से बहुत लाभ चोरी करने वाले को नहीं होता है. इसके बाद भी हेलमेट जैसी छोटीछोटी चीजों की चोरी होती रहती है. चोरी के डर से कुछ लोग हेलमेट नहीं लगाते. पार्किग में हेलमेट को सुरक्षित रखने की जगहें नहीं है. कई पार्किग में हेलमेट जमा करने के लिये अलग से पैसा देना पड़ता है. हेलमेट जमा ना करके पैसे बचाने में हेलमेट चोरी हो जाता है.

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लखनऊ से कानपुर रोज नौकरी करने जाने वाले सुरेश कुमार कहते है कि ‘मैं हेलमेट लगाकर इसलिये नहीं जाता क्योकि स्टेशन की पार्किंग में जहां हम बाइक खड़ी करते है वहां बाइक एक दूसरे से इतना सटाकर खड़ी की जाती है कि बाइक के बगल में हेलमेट बांधने से उसका शीशा टूट जाता है. अगर हेलमेट भी स्टैंड पर जमा करो तो उसके लिये अलग से पैसा देना पड़ता है. ऐसे में हेलमेट नहीं लगाता तो कई बार पुलिस का चालान भी हो जाता है.’

धार्मिक मान्यताएं भी छोटी छोटी चोरियों को रोकने में सफल नहीं हो पा रही है. धार्मिक स्थलों में भी इस तरह की चोरी होती है. इससे साफ है कि जो लोग धार्मिक स्थलों पर 501 रूपये का प्रसाद चढ़ाते हैं. 5 हजार तीर्थ यात्रा पर खर्च करते है वें भी 50 रूपये का पुराना हेलमेट चोरी कर सकते हैं.

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