आज भले हाथी धरती पर रहने वाला न केवल सबसे विशाल स्तनपायी हो बल्कि जमीन का सबसे विशालाकार प्राणी हो,जिस कारण उसका  कोई दूसरा जानवर शिकार नहीं कर सकता बशर्ते वह हाथी का बच्चा या कोई बहुत कमजोर या बीमार हाथी न हो  हो, लेकिन हाथी हमेशा से ऐसा नहीं था. शेर के विशालाकार पुरखे हाथियों तक का शिकार कर लेते थे,इस बात की तस्दीक केन्या में करीब एक दशक से भी पहले जो विशाल जीवाश्म मिले थे,उनसे हुई है. लम्बे शोध एवं अध्ययन के बाद जीवाश्मशास्त्रियों ने इस बात का अंततः पता लगा लिया है कि वे जीवाश्म आखिर किस जीव के थे.
जीवाश्म विज्ञानियों के मुताबिक ये जीवाश्म शेर के विशालाकार पुरखों के हैं. जो एक जमाने में विशालकाय हाथियों तक का शिकार कर लेते थे. दरअसल करीब डेढ़ दशक पहले केन्या में मिले विशाल जीवाश्मों को पूरी दुनिया के जीवाश्म वैज्ञानिक बहुत हैरान थे. उन्हें पता नहीं चल पा रहा था कि आखिर वे किस जानवर के हैं. लेकिन अब उन्हें पता चल गया है.ये करीब 2.3 करोड़ साल पहले अफ्रीका में सवाना के घास मैदानों में पाए जाने वाले विशालाकार शेर की हड्डियां हैं. जीवाश्म  वैज्ञानिकों के मुताबिक शेर की यह बहुत ही विशालकाय प्रजाति थी.ये आमतौर पर करीब 1,500 किलोग्राम के हुआ करते थे.इसीलिये ये जब तब हाथियों का और हाथियों जितने बड़े दूसरे जानवरों का भी शिकार कर डालते थे.ये निष्कर्ष ड्यूक और ओहायो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक मैथ्यू बोर्थ्स और नैंसी स्टीवंस के हैं.जिनकी बाद में कुछ दूसरे वैज्ञानिकों ने भी पुष्टि की है.
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वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष जीवाश्म में मिले निचले जबड़े, दांत और अन्य हड्डियों की जांच के आधार पर निकाला है. वैज्ञानिकों के मुताबिक़  करीब 2.3 करोड़ साल पहले धरती में ऐसे विशालकाय शेर मौजूद थे. वैज्ञानिकों ने इनका नाम सिम्बाकुबवा कुतोकअफ्रीका दिया है। स्वाहिली भाषा में रखे गए इस नाम का मतलब है ‘बड़े अफ्रीकी शेर’. वैज्ञानिकों के मुताबिक, ‘अपने बहुत ही बड़े दांतों के कारण सिम्बाकुबवा बहुत ही खास और विशालकाय मांसाहरी जीव थे, वे आधुनिक शेर के मुकाबले बहुत बड़े,करीब 5-6 गुना बड़े थे.’ रिसर्चरों के अनुमान के मुताबिक ये पृथ्वी पर मायोसिन काल में थे.
पृथ्वी के इतिहास में मायोसिन काल,वह समय है,जब आदम वानर पृथ्वी पर चलना सीख रहे थे। उसी कालखंड के दौरान स्तनधारी जीव खुद को सुरक्षित रखने में सफल हो सके. अध्ययन निष्कर्षों के मुताबिक क्रमिक विकास के चक्र में सिम्बाकुबवा करीब एक करोड़ साल पहले लुप्त हो गए. मालूम हो कि केन्या के मेस्वा पुल के पास सिम्बाकुबवा की हड्डियां करीब डेढ़ दशक पहले मिलीं थीं. लेकिन लंबे समय तक वैज्ञानिकों को यह पता ही नहीं चल पाया था कि ये हड्डियां किस जीव की हो सकती हैं.इतने विशाल शेर की तो उन्होंने दूर-दूर तक कल्पना भी नहीं की थी.
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जहां तक हाथी के शिकार किये जाने की कल्पना की बात है तो वह बहुत ही चैंकाने वाली है. क्योंकि हाथी जमीन पर रहने वाला एक विशाल आकार का प्राणी है. आमतौर पर यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि विशालकाय डायनासोरों के अलावा भी उनका कोई शिकार कर सकता था. हाथी आज की तारीख में जमीन पर रहने वाला सबसे विशाल स्तनपायी तो है ही यह हिम युग के पहले भी ऐसा ही विशालाकार जानवर था.जहां तक मौजूदा हाथी की बात है तो ये एलिफैन्टिडी कुल और प्रोबोसीडिया गण का प्राणी है. हालांकि आज एलिफैन्टिडी कुल में केवल दो प्रजातियां जीवित हैं-लिफस तथा लॉक्सोडॉण्टा.हाथी की तीसरी विशालकाय प्रजाति मैमथ अब लुप्त हो चुकी है.
इन जीवित दो प्रजातियों की भी तीन जातियां ही पहचानी जाती हैं.इनमें से-लॉक्सोडॉण्टा प्रजाति की दो जातियां है-पहले अफ्रीकी खुले मैदानों का हाथी जिसे बुश या सवाना हाथी भी कहते हैं. दूसरी प्रजाति है, अफ्रीकी जंगलों का हाथी. लिफस जाति का हाथी वास्तव में भारतीय या एशियाई हाथी है. वैसे कुछ शोधकर्ता अफ्रीका के दोनों ही प्रजातियों को एक ही मानते हैं. कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक हाथियों की यह चैथी प्रजाति है.हाथियों की ये प्रजाति पश्चिमी अफ्रीका में पायी जाती है. लिफॅन्टिडी की बाकी सारी जातियां और प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं. अधिकतम तो पिछले हिमयुग में ही विलुप्त हो गई थीं, लेकिन माना जाता है कि मैमथ का बौना स्वरूप सन 2000 ई.पू. तक जीवित रहा.
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आज हाथी जमीन का सबसे बड़ा जीव भले है,लेकिन इसकी संख्या में न केवल निरंतर कमी आ रही है बल्कि यह धीरे-धीरे लुप्त होने की दिशा में अग्रसर है. लेकिन हाथी के जीवन के प्राकृतिक से कहीं ज्यादा मानवीय संकट हैं. कुदरत ने तो उसे जीने की बहुत सहूलियत दी है.धरती में हाथी एकमात्र ऐसा जीव है जिसका गर्भ काल 22 महीनों का होता है. इस कारण हाथी की पैदा हुई संतान सबसे परिपक्व होती है.जन्म के समय हाथी का बच्चा करीब 100 से 110 किलो तक का होता है. हाथी के बच्चे के सलामत जन्म के बाद मरने की आशंका सबसे कम रहती है. वैसे हाथी अमूमन 50 से 75 सालों तक जीता है. अब तक का सबसे दीर्घायु पाने वाला हाथी 82 सालों तक जिंदा रहा है.

जहां तक वजन और आकार की बात है तो पिछले 500 सालों में धरती का सबसे वजनदार हाथी सन 1955 ई॰ में अंगोला में मारा गया था. इस नर हाथी का वजन लगभग 10,900 किलोग्राम था.जमीन से कन्धे तक की इसकी  ऊंचाई 3.96 मी थी जो कि एक सामान्य अफ्रीकी हाथी से लगभग एक मीटर ज्यादा है.इसके ठीक उलट यदि इतिहास के सबसे छोटे हाथी की बात करें तो माना जाता है कि ये ईसा से 2000  सालों पहले तक यूनान के क्रीट द्वीप में पाये जाते थे. ये गाय के बछड़े या सूअर के आकार के होते थे. ज्यादातर एशियाई सभ्यताओं में हाथी को बुद्धिमत्ता का प्रतीक माना जाता है. हाथी एशियाई संस्कृति में अपनी स्मरण शक्ति तथा बुद्धिमानी के लिए प्रसिद्ध है.

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