इस कोरोना काल में बहुत सारे सामाजिक मान्यताएँ रश्मों रिवाज और धर्म के प्रति दकियानूसी और पारम्परिक मान्यताएं टूटती हुवी दिख रही है. इन मान्यताओं को सदियों से लोग बिना समझे बुझे अपने कंधों पर ढो रहे थे. जब लोग पूछते हैं. ऐसा क्यों करते हैं तो सिर्फ एक जवाब होता है कि हमारे बाप दादा करते आये हैं. इसलिए हम भी कर रहे हैं.

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