लेखक-नीरज कुमार मिश्रा

मासिकधर्म को अधर्म बताने का षड्यंत्र आज भी रचा जाता है. जाने क्यों धर्म के दुकानदार इसे सहजता से नहीं लेते और न ही लेने देते हैं. क्या है इस के पीछे की अवैज्ञानिक मानसिकता, आइए देखें.

मैं पुरुष हूं, इस नाते मुझे महिलाओं के जैसे होने वाले मासिकधर्म का कोई डर नहीं रहा. पर 2 ऐसी घटनाएं मैं ने अपनी बहन के साथ देखीं जिन्होंने मेरे मन को पूरी तरह हिला दिया, न केवल हिलाया बल्कि स्त्री के प्रति और भी श्रद्धा से भर दिया.

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