लेखक- शाहनवाज

जरूरतमंद लोगों का कोई देश नहीं होता, कोई मजहब नहीं होता, कोई जात नहीं होती और न ही कोई उम्र होती है. लेकिन भारत में सत्ता में बैठे लोग और उन के कट्टरपंथी समर्थक जरूरतमंद का मजहब और जात देखने में देर नहीं लगाते. ‘अन्न का कोई धर्म नहीं होता. खाना दिलों को जोड़ने का काम करता है, न कि तोड़ने का.’ ये व इन से मिलते वाक्य आप ने भी अपने जीवन में कभी न कभी सुने होंगे. लेकिन हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में कुछ ऐसा हुआ जिसे यदि आप सुनेंगे तो एक पल यह सोचने के लिए मजबूर हो जाएंगे कि शायद ऊपर लिखे हुए वाक्य अभी भी कुछ लोगों के दिलोदिमाग से कोसों दूर हैं. वे अपने दिलों में असीम नफरत और भेदभाव भरे हुए हैं.

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