नए साल में इंसान नई उम्मीद रखता हैं, तरक्की के सपने देखता है और नई ऊंचाइयां हासिल करने की इच्छा रखता है. लेकिन कई बार ऐसा महसूस होता है कि हम थम से गए हैं. समय आगे बढ़ता जा रहा है और हम पिछड़ते जा रहे हैं. ऐसे में मन में हताशा और अपराधबोध हावी होने लगता है. आप पिछड़ेपन के एहसास और हताशा से बचना चाहते हैं और नए साल में सचमुच नई ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं तो सिर्फ सपने देखने से कुछ नहीं होगा, आप को ऐक्शन में आना होगा और कुछ कड़े फैसले लेने होंगे. कुछ फैसले हैं जिन पर पूरी ईमानदारी से अमल करेंगे तो दुनिया की कोई ताकत आप को तरक्की के मार्ग पर आगे बढ़ने से नहीं रोक पाएगी.

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