हमारे देश में लोगों की नसों में खून के साथ जातियां बहती हैं. समाज टुकड़ेटुकड़े हो चुका है. दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की पिटाई, हत्या, बलात्कार व उत्पीड़न का सिलसिला थम नहीं रहा है. इन हालात में समाज में जातिवाद की खाई बढ़ती जा रही है और इस को पाटना मुश्किल होता जा रहा है.

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