दिल्ली में रामराज्य की परिकल्पना साकार करने पर उतारू हो आए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लगता है रामायण सलीके से पढ़ी ही नहीं है. मुमकिन है कल को वे इस बात की हिमायत करने लगें कि धर्मकर्म करने वाले शंबूक की तरह दलितवध पाप नहीं है, बाली जैसे निर्दोष बंदर को धोखे से मारना क्षत्रिय धर्म है और चरित्र पर शंका होने पर जनता की मांग पर गर्भवती पत्नी का त्याग भी रामराज्य की परिकल्पना का ही बिंदु है.

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