फिल्मों में पूरी तरह से नकार दिए गए और 90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित बहुचर्चित "रामायण" सीरियल में राम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल की नैया मशहूर फिल्म निर्माता निर्देशक रामानंद सागर ने तो पार लगा ही दी थी. अब लगभग तीन दशक बाद केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को अरुण गोविल की सहारा (बैशाखी) पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में मिल गया है. देखना यह दिलचस्प होगा कि चुनाव में अरुण गोविल की "श्रीराम" की छवि को भाजपा नेतृत्व कितना भुना पाता है. पश्चिम बंगाल के प्रतिष्ठा पूर्ण इस चुनाव को, यह कहा जा सकता है कि भाजपा ने पूरी तरह से "राम मय" बनाकर "संप्रदायिकता" की छौंक भी लगा दी है. यहां सवाल यह भी उठता है हिंदू हिंदुत्व, श्रीराम के उछाल को देख कर भी कि निर्वाचन आयोग मौन क्यों है?

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