Editorial : जहां हम अंधेरे कमरे में दीये जला कर किसी देवता को पूजने के अधिकारों की बात करते हैं और जहां हमारी खोजें निकट की मसजिद के नीचे दबेछिपे मंदिर की नींवों और मूर्तियों तक सीमित हैं, वहीं 1980 तक हम से हर मायने में गरीब, लाचार, बेचारा, भूखा, कम्युनिज्म का मारा हमारा पड़ोसी चीन आज अंधेरी फैक्ट्रियां बना रहा है जहां रोबोट रातदिन, बिना मानव की उपस्थिति के, प्रति सैकंड एक मोबाइल बनाने में लगे हैं.
चीन की तकनीकी उन्नति अद्भुत है. मोबाइल चाहे अमेरिका ने ईजाद किया हो पर अब इस की तकनीक पर चीन का कब्जा है और दुनिया का शायद ही कोई ऐसा मोबाइल होगा जिस में चीनी पार्ट न लगे हों. भारत में भी लाखों मोबाइल बन रहे हैं पर उन का सामान विदेशों से आता है जिन्हें यहां सिर्फ असैंबल किया जाता है, पैक किया जाता है और किसी अमेरिकी या जापानी कंपनी की मोहर लगाई जाती है.
मोबाइल ही नहीं, दशक के अंत तक चीन अंधेरी फैक्ट्रियों में रोबोटों और आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस से पूरी कार को बनाने की तैयारी कर रहा है, वह तैयारी जो अमेरिका या यूरोप का कोई देश नहीं कर रहा.
चीन की घटती आबादी पर जो लोग जश्न मनाना चाहते हैं उन के लिए बुरी खबर यह है कि चीन मानवों की जगह मशीनों से काम करवा रहा है. उस की जनसंख्या घट कर चाहे 100 करोड़ या 70 करोड़ रह जाए, वह अपने विशाल गर्भगृहों से झूठे, काल्पनिक, गढ़े हुए वरदान नहीं देगा बल्कि आम आदमी की आज की जरूरतों को पूरा करने वाले सामान बनाएगा.
भारत में आज एक ही लक्ष्य रह गया है, पूरी सरकार केवल उसी पर काम करती नजर आती है कि कैसे धर्म को भुनाया जाए, कैसे भारतीयों को धर्मस्थलों पर ले जाया जाए, कैसे उन से उन की मेहनत का पैसा छीन कर मंदिर के दरवाजे सोने के बनाए जाएं, मंदिर का शिखर ऊंचा किया जाए, फलां जगह की मसजिद या चर्च को गिराया जाए, फलां धर्म के मानने वाले की दुकान मंदिर के निकट होने पर उसे बंद कराई जाए, किसकिस के वोट काटे जाएं और किसकिस पर आंतरिक सुरक्षा के मुकदमे थोपे जाएं.
चीन हमारा पड़ोसी ही नहीं, उस के साथ हमारी लंबी विवादास्पद सीमा है. उस की नदियां हमारे यहां आती हैं. उस के तिब्बत के लोग हमारे यहां शरण लिए हुए हैं. वह हमारे इलाकों को अपना कहता है. वहीं, हम इस में फंसे हैं कि रोबोटों को कैसे बनाया जाए और बनाया जाए भी या नहीं.
चीन रोबोट को यूरोप या अमेरिका से आयात नहीं कर रहा. वह अपने युद्ध का सामान भी खुद बना रहा है और रोजमर्रा के उपयोग की चीजें भी. चीन तमाम घरेलू आइटमों को अपने अंधेरे गर्भगृहों वाली फैक्ट्रियों में बना रहा है. हमें तो इस में ही संतोष होता है कि हम ने पंडित को रिश्वत दे कर अंधेरे गर्भगृह में छिपे देवीदेवता के दर्शन ‘अच्छे’ से कर लिए, बस. Editorial





