अभी कुछ ही रोज बीते होंगे जब वर्ल्ड फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी. इस रिपोर्ट में देश की मौजूदा भाजपा सरकार पर नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के हनन के कई आरोप लगे थे. इस रिपोर्ट के आने के बाद भारत में वाजिब खलबली मची जरुर थी लेकिन पक्ष से ले कर विपक्ष तक ने इसे एक साथ ठंडे बस्ते में डाल दिया. ना तो सत्ता पक्ष ने जरूरत समझी कि उन की सरकार पर ऐसे गहन आरोप लगाने वालों पर कड़ा एक्शन लिया जाए और ना ही विपक्ष ने जरुरत समझी कि सरकार को इस मसले पर घेरा जा सके.

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