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नया अध्याय – भाग 2: अडिग फैसला साक्षी का

अरेऐसे घूर क्यों रही हो मुझेकुछ गलत बोल दिया क्या मैं नेसौरीसौरी,” अपना कान पकड़ते हुए नरेश फिर शुरू हो गया, “जानते हो सब्जी वाले भैयामैडमजी अगर एक दिन भी बच्चों को न पढ़ाएंतो बेचारी के पैसे काट लिए जाएंगे. फिर तुम्हारा ये गोभीबैंगनमटरटमाटरऔर पालक कौन खरीदेगा… बोलो?” इस बार उस ने मटर का छिलका साक्षी के मुंह पर दे मारातो वह गुस्से से तिलमिला उठी. मन तो किया कि एक जोर का तमाचा उस के गाल पर जड़ दे और कहे कि कुत्ते की दुम कभी सीधी हो ही नहीं सकती. मगर वह यहां लोगों के बीच कोई तमाशा नहीं खड़ा करना चाहती थी. इसलिए सब्जी का थैला उठा कर चलती बनी.

अरे रे… रे… रेसुनो तो टीचरजीमैं तो तुम्हारी मदद करना चाहता था और तुम हो कि नाराज हो गई. अच्छा चलोमैं अपनी गाड़ी से तुम्हें तुम्हारे घर तक छोड़ देता हूं. क्योंकि इस कड़ी धूप में तुम्हारा ये गोरा रंग कहीं काला न पड़ जाए,” साक्षी के गालों को छूते हुए नरेश बोलातो उस ने उस का हाथ जोर से झटक दिया.

बेशर्मी की भी कोई हद होती है. तुम अपनेआप को समझते क्या होवहां पुलिस खड़ी हैदेख रहो हो न,” जब साक्षी ने पुलिस की धमकी दीतो नरेश वहां से नौ दौ ग्यारह हो गया. डरपोक कहीं का… बस औरतों पर ही चलाना आता है इसे. डरती थी कभीपर अब ठेंगे से नहीं डरती. बड़े आए,” अपना अधर टेढ़ा कर साक्षी हंसी और रिकशे वाले को हाथ दिया.

इस बेशर्म इनसान के साथ साक्षी ने 2 साल कैसे गुजारेवही जानती है. लेकिन अब और नहीं. क्योंकि अब उस में बरदाश्त करने की शक्ति नहीं बची. साक्षी को तकलीफ दे कर वह खुद को मर्द समझता था. उसे लगता थासहेगी क्यों नहींवरना जाएगी कहांअपने बातव्यवहार से रोज वह उस के कलेजे को छलनी करता और हर बार वह अपने जख्मों पर मरहम लगा कर फिर से पत्नी धर्म निभाने में लग जाती. लेकिन आखिर कब तक और कितना सहती वो?इसलिए तो नरेश का घर छोड़ आई. सोच लिया उस ने कि चाहे जो हो जाएलेकिन वह नरेश से तलाक ले कर ही रहेगी.

रिकशे वाले ने जब रिकशा रोकातो साक्षी अपनी सोच से बाहर आ गई. रिकशे वाले को पैसे दे कर वह लंबेलंबे डग भरते हुए घर पहुंच गई. स्कूटी से आ सकती थीमगर पैट्रोल के दाम इतने बढ़ गए हैं कि सौ दो सौ का कुछ पता ही नहीं चलता. इस से अच्छा 20-30 रुपए में रिकशे वाला घर तक पहुंचा जाता है. तो ठीक है न. खैरकुछ देर में बच्चे ट्यूशन के लिए आते ही होंगे. इसलिए उस ने अपने कपड़े बदलेफ्रिज से निकाल कर एक गिलास ठंडा पानी पिया और चूल्हे पर चाय चढ़ा दी.

साक्षी के पापा कहा करते थे कि कभी भी धूप से आ कर तुरंत ठंडा पानी नहीं पीना चाहिएवरना सर्दी लग जाती है. लेकिन प्यास इतनी जोर की लगी थी कि साक्षी से बरदाश्त ही नहीं हुआ और पूरा गिलास वह एक बार में ही गटक गई.घर में सब को चाय दे कर वह अपनी भी चाय ले कर मां सुषमा के बगल में बैठ गई और दोनों बातें करने लगीं. सुबह का चायनाश्तादोपहर का खाना बनाने के अलावा बाहर से सागसब्जी लाने की भी जिम्मेदारी साक्षी पर ही थी.

मांदेखो तो सहीअभी से ही कितनी गरमी पड़ने लगी है. फिर मईजून में तो आग बरसेगी. कैसे जिएंगे लोग?” अपने चेहरे का पसीना पोंछते हुए साक्षी बोलीतो मां सुषमा ऊपर आसमान की तरफ देखते हुए बोलीं कि हांएकदम से गरमी बहुत बढ़ गई है. बारिश होगी तो जरा आराम हो जाएगा.

इधरउधर की बातें करते हुए साक्षी के मुंह से निकल गया कि आज सब्जी मार्केट में फिर नरेश उस से मिला. पता नहींअब वह मुझ से चाहता क्या हैजानती हो मांअपनी गाड़ी की धौंस दिखा रहा था. कहने लगावह मुझे अपनी गाड़ी से घर छोड़ देगा. लेकिन मुझे उस की हर एक चीज से नफरत हो गई है. बसजल्दी से हमारा तलाक हो जाएफिर मैं उस का मुंह नहीं देखूंगी कभी,” चाय का जूठा कप एक तरफ सरकाते हुए साक्षी बोली.

Satyakatha: सुलेखा की खूनी स्क्रिप्ट

सौजन्य- सत्यकथा

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर शहर का एक मोहल्ला है मिश्रामऊ. इसी मोहल्ले में राजेश साहू अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी के अलावा 2 बेटे और एक बेटी सुलेखा थी. राजेश घी का कारोबार करता था. वह फतेहपुर शहर के आसपास के गांवगांव जा कर लोगों के यहां से घी खरीदता और फतेहपुर शहर में बेचता. इस से उसे जो फायदा होता, उसी से उस के परिवार की गुजरबसर होती थी.राजेश साहू की बेटी सुलेखा सुंदर होने के साथसाथ थोड़ी चंचल भी थी. इसलिए सयानी होने पर मोहल्ले के कई युवक उस पर डोरे डालने की कोशिश करने लगे. यह भनक राजेश को लगी तो उसे चिंता होने लगी. तब उस ने बेटी के लिए वर की तलाश शुरू कर दी. थोड़ी भागदौड़ के बाद उसे सदर कोतवाली के मोहल्ला बक्सपुर राधा नगर में एक लड़का मिल गया.

लड़के का नाम राजू प्रसाद साहू था. उस के पिता भगवानदीन साहू के पास 5 बीघा उपजाऊ भूमि थी. भगवानदीन के 2 बेटे रामबाबू तथा राजू प्रसाद थे. रामबाबू का विवाह हो चुका था. वह परिवार सहित अलग रहता था. राजू पिता के साथ खेतीकिसानी करता था.बातचीत शुरू हुई तो राजू और सुलेखा का रिश्ता पक्का हो गया. फिर जल्द ही दोनों की शादी हो गई.

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राजू सुंदर पत्नी पा कर खुश था, जबकि सुलेखा अपने सांवले व दुबलेपतले पति से खुश नहीं थी. शादी से पहले उस के मन में पति की जो छवि थी, राजू उस में कहीं भी फिट नहीं बैठता था. लेकिन अब विवाह हो गया था, इसलिए मजबूरी में उस के साथ तो रहना ही था. शादी के 3 साल बाद सुलेखा एक बेटी अर्पिता की मां बन गई थी.अर्पिता के जन्म के बाद राजू ने पत्नी की भावनाओं की उपेक्षा करनी शुरू कर दी. जबकि बेटी जनने के बाद सुलेखा का रूप और निखर आया था और वह हर रात पति का साथ चाहती थी. राजू थकाहारा शाम को लौटता और खाना खा कर सो जाता.

सुलेखा कभी पहल करती, तो राजू झल्ला उठता, ‘‘आज बहुत थक गया हूं. अभी सोने दो.’’पति की बात सुन कर सुलेखा मायूस हो जाती. राजू की कमाई से घर का खर्चा तो किसी तरह चल जाता था. लेकिन सुलेखा अपनी हसरतें पूरी नहीं कर पाती थी.एक तो शारीरिक इच्छाएं, दूसरी अधूरी तमन्नाएं. ऐसे में औरत बहकने लगती है. सुलेखा भी बहकने लगी थी. उस ने पति को दिल से निकाल दिया था और तमन्नाएं पूरी करने के लिए किसी नए मीत की तलाश में जुट गई थी.

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इन्हीं दिनों राजू प्रसाद साहू के घर रामराज का आनाजाना शुरू हुआ. रामराज बांदा जिले के करौली गांव का रहने वाला था. रिश्ते में रामराज राजू का मौसेरा भाई था. रामराज साहू ट्रक ड्राइवर था. वह खूब पैसा कमाता था. वह स्वयं तो पीता ही था, उस ने राजू को भी शराबी बना दिया था.

सुलेखा की सुंदरता और चंचलता की वजह से रामराज का दिल उस पर आ गया था. वह जब भी सुलेखा के घर आता, मौका मिलने पर उस से हंसीमजाक करने से नहीं चूकता. सुलेखा भी उस से खुल कर हंसीमजाक करती थी. वह भी उसे मन ही मन चाहने लगी थी और अपनी तमन्नाएं पूरी करने को लालायित थी. रामराज गबरू जवान था.एक दिन रामराज आया तो राजू प्रसाद घर में नहीं था. सुलेखा को अकेली पा कर उस के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. वैसा ही कुछ हाल सुलेखा का भी था. उस ने इठलाते हुए कहा, ‘‘आओ देवरजी, कैसे आना हुआ.’’

‘‘भाभी, ट्रक ले कर प्रयागराज जा रहा था. फतेहपुर के ढाबे पर रुका, तो अचानक तुम्हारी याद आई तो मन मचल उठा. मैं ने पहले तो मन को मनाने की कोशिश की, जब मन नहीं माना तो यह सोच कर चला आया कि चल कर प्यारी भाभी के दीदार कर लूं. कभीकभी सोचता हूं कि इतनी सुंदर भाभी कालेकलूटे राजू भैया के पल्ले कैसे पड़ गई?’’‘‘अपनाअपना नसीब है देवरजी, मेरी तकदीर में यही लिखा था.’’ सुलेखा ने लंबी सांस ले कर कहा.

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सुलेखा के इस जवाब से रामराज को लगा कि उस का तीर सही निशाने पर लगा है. वह उस के एकदम करीब आ कर बोला, ‘‘नसीब अपने हाथ में होता है भाभी, मैं आप से प्यार करता हूं. मैं कोई पराया तो हूं नहीं. वैसे भी मैं न जाने कब से तुम्हारी खूबसूरती का दीवाना हूं.’’‘‘देवरजी, यह दीवानापन छोड़ो और अब चुपचाप चले जाओ. कहीं वह आ गए तो पता नहीं क्या सोचेंगे.’’ सुलेखा ने उस की आंखों में झांकते हुए कहा.रामराज ने उसे बांहों में भर कर कहा, ‘‘भाभी, मैं चला तो जाऊंगा, पर खाली हाथ नहीं जाऊंगा. आज तो तुम्हारा प्यार ले कर ही जाऊंगा.’’

सुलेखा को बांहों में भरते ही उस ने उस के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी थी. सुलेखा ने उस की इस हरकत का कोई विरोध नहीं किया. इस की वजह यह थी कि वह भी यही चाहती थी. उस ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘भूखे भेडि़ए की तरह क्यों टूट पड़ रहे हो. थोड़ा सब्र से काम लो. दरवाजा खुला है. वैसे भी तुम जो कर रहे हो, वह ठीक नहीं है.’’रामराज समझ गया कि सुलेखा को कोई आपत्ति नहीं है. इस का उस ने पूरा फायदा उठाया और अपने तथा सुलेखा के बीच की दूरियां मिटा दीं. इस तरह सुलेखा के कदम एक बार बहके तो बहकते ही चले गए. मौका मिलते ही रामराज सुलेखा के घर आ जाता.

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सुलेखा भी उस का हर तरह से सहयोग कर रही थी. इस की वजह यह थी कि वह उस के पति से हर मायने में इक्कीस था.सुलेखा ने रामराज से अवैध रिश्ता बनाया तो वह उस की हर तमन्ना पूरी करने लगा. वह उस की आर्थिक मदद तो करता ही था, उस के लिए नई साडि़यां तथा अन्य सामान भी लाता था. राजू उस के आने पर कोई टोकाटाकी न करे, इस के लिए वह उसे मुफ्त में शराब पिलाता था.सुलेखा और रामराज का यह अवैध संबंध चोरीछिपे सालों तक चलता रहा. आखिर कब तक उन का यह गलत संबंध छिपा रहता. वे समय के साथ लापरवाह होते गए. परिणामस्वरूप एक दिन राजू प्रसाद ने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. फिर तो उसे समझते देर नहीं लगी कि उन के बीच यह खेल काफी दिनों से चल रहा है.

रामराज चूंकि उस का मौसेरा भाई था और उस से ज्यादा ताकतवर भी था, अत: राजू प्रसाद ने उस से सीधे टकराना उचित नहीं समझा. उस के जाने के बाद उस ने सुलेखा को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘‘शर्म आनी चाहिए तुम्हें यह सब करते हुए. एक बच्ची की मां होने के बाद तुम नीचता पर उतर आई हो.’’इस के बाद जब दोनों में तूतूमैंमैं शुरू हुई तो बात बढ़ती गई. राजू को गुस्सा आ गया तो उस ने सुलेखा की जम कर पिटाई की. लेकिन इस पिटाई के बाद भी सुलेखा ने रामराज को नहीं छोड़ा. वह रामराज की इतनी दीवानी हो चुकी थी कि जब उसे घर में उस से मिलने का मौका नहीं मिलता तो वह किसी न किसी बहाने बाहर जा कर उस से मिलन कर लेती. जब इस का पता राजू प्रसाद को चलता तो वह शराब पी कर सुलेखा और रामराज को खूब गालियां बकता.

25 मार्च, 2021 की रात राजू प्रसाद ने एक बार फिर सुलेखा और रामराज को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. रामराज तो भाग गया, लेकिन सुलेखा कहां जाती. राजू ने सुलेखा को बेतहाशा पीटा और जम कर गालियां सुनाईं.होली के एक दिन पहले यानी 27 मार्च को भी राजू ने सुलेखा को बहुत पीटा. पीटने के बाद वह घर के बाहर शराब पीने चला गया. उस के जाने के बाद सुलेखा ने अपने प्रेमी रामराज से मोबाइल फोन पर बात की और उसे दुम दबा कर भाग जाने का उलाहना दिया. उस ने यह भी बताया कि राजू ने पीटपीट कर उस की देह स्याह कर दी है. अब वह उस का जुल्म और बरदाश्त नहीं करेगी. जल्द ही कोई रास्ता निकालो. अब वह उस से तभी मिलेगी, जब रास्ते का कांटा साफ हो जाएगा.

28 मार्च, 2021 को होली थी. रामराज बाइक से दोपहर 12 बजे राजू प्रसाद के घर जा पहुंचा. उस के मन में तो नफरत थी. लेकिन उस ने दिखावे के तौर पर राजू के पैर छुए और बोला, ‘‘भैया आज होली है. गले मिलने आया हूं. अपनी गलतियों की माफी भी मांग रहा हूं. हो सके तो मुझे माफ कर दो.’’राजू प्रसाद ने एक नजर रामराज के चेहरे पर डाली और फिर उसे गले लगा लिया. इस के बाद दोनों बातचीत करने लगे. बातचीत में उलझा कर रामराज ने उसे शराब पीने के लिए राजी कर लिया. इस बीच रामराज ने सुलेखा को इस बात की जानकारी दे दी कि आज वह चुभने वाला कांटा निकाल फेंकेगा. इस के बाद रामराज ने राजू को अपनी बाइक पर बिठाया और निकल गया.

दूसरे दिन सुलेखा रोते हुए जेठ रामबाबू के घर पहुंची और उसे बताया कि राजू कल दोपहर से घर से गायब हैं, पता नहीं कहां चले गए. रात भर वह उन के लौटने का इंतजार करती रही. उन का पता लगाओ. उस का जी घबरा रहा है.रामबाबू ने सुलेखा को शक की नजर से देखा, लेकिन उस ने आश्वासन दिया कि वह राजू को ढूंढेगा. इस के बाद रामबाबू ने राजू प्रसाद की खोज शराब के ठेकों, बस अड्डा व टैंपो स्टैंड पर की, पर उस का कुछ पता नहीं चला. नातेदारों के यहां भी वह नहीं गया था.

30 मार्च की सुबह 10 बजे रामबाबू को पता चला कि थरियांव थाने के हंसवा गांव के पास स्थित पीएनसी प्लांट के पीछे झाडि़यों में किसी युवक की लाश पड़ी है. यह पता चलते ही रामबाबू वहां पहुंचा. उस ने लाश देखी तो वह फफक पड़ा.उस समय मौके पर थरियांव थानाप्रभारी नंद लाल, एसपी सतपाल, एडिशनल एसपी राजेश कुमार तथा डीएसपी अनिल कुमार मौजूद थे. पुलिस अधिकारी घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर रहे थे. रामबाबू ने सुबकते हुए बताया कि लाश उस के छोटे भाई राजू प्रसाद साहू की है. वह होली वाले दिन से गायब था.

शव की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हेतु फतेहपुर भिजवा दिया. इस के बाद एसपी सतपाल ने हत्या का परदाफाश करने तथा कातिलों को पकड़ने की जिम्मेदारी एएसपी राजेश कुमार को सौंपी. उन्होंने तब पुलिस टीम का गठन किया. इस टीम में इंसपेक्टर नंदलाल, एसआई उपदेश कुमार, ललित कुमार, महिला सिपाही प्रियंका, सरोज तथा सर्विलांस प्रभारी सुनील कुमार को शामिल किया गया.
पुलिस टीम ने मृतक के भाई रामबाबू से पूछताछ की तो उस ने बताया कि उस के भाई राजू प्रसाद की हत्या उस के मौसेरे भाई रामराज ने की है. वह बांदा जनपद के मर्का थाने के करौली गांव का रहने वाला है. हत्या में मृतक भाई की पत्नी सुलेखा का भी हाथ है. रामराज और सुलेखा के बीच नाजायज रिश्ता बन गया था. इस रिश्ते का विरोध राजू करता था.

यह जानकारी मिलते ही पुलिस टीम ने रामराज के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लगा दिया, जिस से उस की लोकेशन मलाका कस्बे की मिली. जांच से पता चला कि मलाका में रामराज का दोस्त नीरज पासवान रहता है. लोकेशन मिलते ही पुलिस टीम ने 2 अप्रैल, 2021 की सुबह करीब 5 बजे नीरज पासवान के घर छापा मारा और रामराज तथा नीरज को गिरफ्तार कर लिया.इस के बाद टीम ने सुबह 10 बजे सुलेखा को भी उस के घर से गिरफ्तार कर लिया. तीनों को थाना थरियांव लाया गया. पूछताछ में तीनों ने राजू की हत्या का जुर्म कबूल किया. यही नहीं, रामराज ने हत्या में प्रयुक्त मोटरसाइकिल तथा खून सना पत्थर भी बरामद करा दिया.

रामराज ने पुलिस को बताया कि उस के और सुलेखा के बीच नाजायज रिश्ता था, जिस का विरोध राजू प्रसाद करता था और सुलेखा को मारतापीटता था. होली के एक दिन पहले भी राजू प्रसाद ने सुलेखा को जम कर पीटा था, जिस की शिकायत उस ने मोबाइल फोन पर की थी और बाधक बन रहे पति को मिटाने की बात कही थी.इसी के बाद उस ने राजू प्रसाद की हत्या की योजना बनाई और अपनी योजना में दोस्त नीरज पासवान को भी शामिल कर लिया. नीरज फतेहपुर जनपद के गाजीपुर थाने के मलाका का रहने वाला था.

योजना के तहत वह होली वाले दिन बाइक से राजू प्रसाद के घर पहुंचा और उसे शराब पिलाने का लालच दे कर अपने दोस्त नीरज पासवान के घर मलाका लाया. यहां पर उन्होंने शराब पी और खाना खाया. मलाका में शराब पीने के बाद वह, नीरज और राजू प्रसाद मोटरसाइकिल से घूमने निकले.वह बाइक से हुसैनगंज, छिविलहा, हथगाम होते हुए पीएनसी प्लांट पहुंचे. प्लांट के पीछे बैठ कर उस ने राजू प्रसाद को फिर शराब पिलाई. इस के बाद राजू प्रसाद जब नशे में अर्धबेहोश हो गया तो उस ने नीरज की मदद से पत्थर से सिर कूंच कर राजू प्रसाद की हत्या कर दी और वापस मलाका आ गए, जहां से पुलिस ने उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया.

थानाप्रभारी नंदलाल ने बयान दर्ज करने के बाद मृतक के भाई रामबाबू की तहरीर पर भादंवि की धारा 302/201 के तहत सुलेखा, रामराज व नीरज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली तथा उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
3 अप्रैल, 2021 को थाना थरियांव पुलिस ने अभियुक्त रामराज, नीरज व सुलेखा को फतेहपुर की कोर्ट में पेश किया, जहां से उन तीनों को जिला जेल भेज दिया गया.

त्यौहार 2022: घर पर बनाएं राजस्थानी चूरमा लड्डू

अगर आपको लड्डू खाना पसंद है तो आप अपने घर पर ट्राई करें राजस्थानी चूरमा लड्डू यह कम समय से बेहतर टेस्ट देता है.

आवश्यक सामग्री:
गेहूं का आटा

सूजी

घी

दूध

बूरा(तगार**)
काजू

इलाइची

अन्य मेवा

बनाने की विधि:
-एक सकरे बर्तन (परात) में गेहूं का आटा व सूजी मिला लेते हैं

-अब इस आटे को पिघले हुए घी में डाल कर अच्छी तरह से मिला लेते हैं.

-जब आटे में घी मिल जाए तब इसमें थोड़ा सा दूध को डालकर सख्त आटा गूंथ कर तैयार कर लेते हैं.

-और एक घंटे के लिए आटे को अच्छी तरह ढक कर रख देते हैं. एक घंटे के बाद गुंदे आटे में से एक नीबू के आकर के बराबर की लोइयां तोड़ लेते हैं.

-और इन लोइयों को दोनों हाथों की हथेलियों के बीच मे रख कर दवा कर चपटा कर लेते हैं. एक कढ़ाई में घी डाल कर धीमी आंच पर हल्का गर्म होने के बाद इसमें लोइयों को डाल कर तल लेते हैं. जब ये लोइयां दोनों तरफ सुनहरी हो जाए तब इनको एक थाली निकाल लेते हैं और ठंडा होने देते हैं.

-ठंडी हो जाने के बाद इन लोइयों को टुकड़ों में तोड़ कर मिक्सर में डाल कर बारीक पीस लेते हैं और चूरमा को एक छलनी की सहायता से छान लेते हैं.

-जब सारा चूरमा बन जाए तब इस चूरमा को एक कढ़ाई में धीमी आंच पर घी डाल कर कलछी से चलाते हुए थोड़ा और भून लेते हैं.

-भून जाने के बाद इसको एक बर्तन में निकाल कर उसमें बूरा, काजू के टुकड़े (अन्य मेवा) व इलाइची पाउडर डाल कर अच्छी तरह मिला लेते हैं.

– अब इस मिश्रण से हाथों की सहायता से लड्डू बना लेते हैं। इस प्रकार भोग के लिए चूरमा के लड्‍डू तैयार हो जाते हैं.

मेरी दोस्त की बहन की संगत गलत लड़कों के साथ है, क्या करूं?

सवाल

मेरा एक दोस्त है जिस की बहन मेरे ही कालेज में पढ़ती है. मेरे दोस्त ने मुझ से कहा था कि मैं उस की बहन पर नजर रखूं और उसे अपनी बहन जैसा ही मानूं. मैं ने ऐसा ही किया और मैं अपने दोस्त की बहन को अपनी छोटी बहन जैसा ही समझता हूं. कालेज का नया टर्म शुरू हुआ तो मैं ने जाना कि दोस्त की बहन कुछ बिगड़े हुए लड़कों से दोस्ती रखती है जो सही नहीं है, मैं ने उसे समझाया भी कि वे लड़के सही नहीं हैं लेकिन उस ने मेरी बात नहीं मानी. अब मैं सोच रहा हूं अपने दोस्त यानी उस के भाई को इस बारे में बता दूं पर ऐसा करना सही होगा या नहीं, यह समझ नहीं पा रहा.

जवाब

आप ने एक भाई होने के नाते दोस्त की बहन को समझा दिया, अच्छा किया. लेकिन आप की यह बात कि आप यह बात उस के भाई से भी कहेंगे, सही नहीं है. आप खुद सोचिए वह बालिग है और यह उस की जिंदगी और उस का फैसला है कि वह किस से बात करना चाहती है और किस से नहीं. आप किसी की लाइफ में इतना दखल तो नहीं दे सकते. कम से कम दोस्त चुनना तो हमारी खुद की मरजी होनी चाहिए. आप खुद को उस की जगह  रख कर देखिए तो शायद आप को समझ आए. एक दोस्त या भाई के तौर पर नजर रखने की कोई तुक नहीं बनती, और फिर आप तो जासूसों जैसी बातें कर रहे हैं. वे उस के दोस्त हैं और शायद वह इतना जानतीसमझती तो होगी कि दोस्त किसे बनाना चाहिए.

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नया अध्याय – भाग 3: अडिग फैसला साक्षी का

साक्षी की बात मां सुषमा को जरा भी पसंद नहीं आई. वे बोलीं, “जब वह सामने से तुम्हें अपनाना चाहता हैतो जरा झुक जाने में क्या हर्ज हैकिस पतिपत्नी के बीच लड़ाईझगड़े नहीं होतेतो क्या सब तलाक लेने पर उतारू हो जाते हैंलोग तो ऐसे ही कुछ भी बातें बनाते हैं. किसी को अच्छे से खातेपीतेरहते देख जाने क्यों लोगों के पेट में दर्द होने लगता है. लेकिनतू क्यों उन की बातों में आ कर अपना घरबार छोड़छाड़ कर यहां आ बैठी हो. बोल…मैं तो कहती हूं कि सुलह कर ले दामादजी सेनहीं तो कहीं ऐसा न हो कि बाद में तुम्हें पछताना पड़े.

“पति है वो तुम्हाराअगर उन की दो बातें सुन ही लेगीतो क्या बिगड़ जाएगा तेराइतनी अच्छी नौकरी हैअपना घर है. तो और क्या चाहिए तुम्हें?” मां की बात पर साक्षी सुलग उठी कि कैसी मां हैं ये. जो अपनी ही बेटी को झुकने की सलाह दे रही हैंजबकि गलत वो इनसान है.

अच्छी नौकरी और घर… तो क्या आत्मसम्मान कोई मायने नहीं रखता इनसान के लिएसच तो यह है कि नरेश ने कभी मुझे अपनी पत्नी समझा ही नहींबल्कि वह तो मुझे अपने पैरों की जूती समझता रहा और मैं पत्नी धर्म निभाती रही. पता हैक्योंक्योंकि लड़कियों को बचपन से यही सिखायापढ़ाया जाता है कि उस का पति उस का देवता है और उस के चरणों में ही पत्नी का स्वर्ग है. आप ने भी तो मुझे यही सिखाया है न मांलेकिन वो देवता नहींदानव हैदानवजो सिर्फ मुझे नोचनोच कर खाता रहा आज तक. और आप कहती हैं कि जरा झुक जाने में क्या हर्ज है,” बोलतेबोलते साक्षी का गला भर्रा गया.

थोड़ा रुक कर साक्षी बोली, “आप सब ने मेरी शादी मुझ से 13 साल बड़े लड़के से करवा दी. खैरतभी आप सब की मजबूरी थी. समझती हूं मैं यह बात. पापा ज्यादा बीमार रहने लगे थे और वे चाहते थे कि उन की आंखों के सामने मेरी शादी हो जाए. लेकिन मैं ने कभी आप सब से इस बात की शिकायत कीबल्किजहां तक हुआरिश्ते निभाने की कोशिश करती रही. लेकिन कब तक मांखुद पर जुल्म होते देख तो सीधीबेजबान गाय भी अपने बचाव में सींग मारना नहीं छोड़ती. फिर मैं तो इनसान हूं. चलोइतना भी सहा मैं नेक्योंकि आप सब को कोई दुख नहीं देना चाहती थी. लेकिन जब एक औरत को यह पता चले कि उस के पति का किसी और औरत से नाजायज संबंध है और वह भी अपने ही रिश्ते में… तो क्या बीती होगी मुझ पर. सोचिए न जरा.

“मैं ने… मैं ने अपनी इन आंखों से नरेश को उन की भाभी के साथ… छिःमुझे तो बोलते हुए भी शर्म आती है. वैसेआप को तो सब पता ही था न मांफिर भी आप ने मुझे उस नर्क में धकेल दिया. क्यों ऐसा किया आप नेबोलिए…अपने दोनों बेटों की तो आप ने खूब देखपरख कर शादी की. लेकिनमेरे साथ ही ऐसा सौतेलापन क्यों मां?” मां चुपक्योंकि उस के पास साक्षी के एक भी सवाल का जवाब नहीं था. क्या जवाब देती कि बेटी को बोझ  समझने वाली मां जल्द से जल्द उसे विदा कर देना चाहती थी.

और अब जब मैं उस नर्क से निकलना चाहती हूंतो आप फिर मुझे उस नर्क में जाने की सलाह दे रही हैं?मर जाऊंगी मैंपर अब दोबारा उस नर्क में नहीं जाऊंगी. कहे देती हूं,” बोलते हुए साक्षी की आंखों से आंसू गिर पड़े कि जब एक मां ही उस का दुख नहीं समझ पा रही हैतो भाईभाभी क्या समझेंगे. सारे बच्चे आ चुके थेइसलिए वह बच्चों को ले कर टेरेस पर पढ़ाने चली गई. पहले वह यहीं हाल में ही बच्चों का ट्यूशन लेती थीमगर दोनों भाभियों की किचकिच से तंग आ कर छत पर पढ़ाने लगी. दरअसलदोनों भाभियों को टीवी देखने में कष्ट होता था.

आज साक्षी को बच्चों को पढ़ाने में जरा भी आनंद नहीं आ रहा थाक्योंकि मां की बातों ने उस के सूखे जख्मों पर नमक रगड़ दिया था. उसे तो बेटी का सपोर्ट करना चाहिए. लेकिन उलटे वह बेटी को झुक जाने की सलाह दे रही थी. यह हमारे समाज की विडंबना ही है. लड़की सही हो तो भी उसे ही झुकना सिखाया जाता है और बेटों को सिर उठा कर चलनाभले ही वह कितना भी गलत क्यों न हो. इनसान की खाल में भेड़िया नरेश ने हमेशा उस के परिवार के सामने खुद को अच्छा दिखाया,

ताकि वह सब के सामने शरीफ बना रहे और साक्षी बुरीबल्कि यह शादी भी उस ने  समाज के सामने अच्छा बने रहने के लिए ही की थीताकि लोगों को उस के और उस की भाभी के संबंध के बारे में पता न चल सके. नरेश के हाथों मार खा कर जब भी वह अपना सूजा हुआ चेहरा ले कर मायके आईउस की बात सुनने के बजायउलटे उसे ही पत्नी धर्म का ज्ञान दे कर मां उसे उस के ससुराल भेज दिया करती थीजिस का नतीजा यह होता कि नरेश के हौसले और बुलंद होते चले गए.

 

मेरी पत्नी की सैक्स में रुचि कम हो गई है, क्या करूं?

सवाल

हमारी शादी को 13 साल हो गए हैं. अभी तक तो हमारी सैक्स लाइफ अच्छी थी लेकिन तनाव और कुछ हार्मोनल असंतुलन के कारण पत्नी की सैक्स में रुचि कम हो गई है. वैसे वह दवाई ले रही है, क्या मैं उस की कुछ मदद कर सकता हूं?

जवाब

पति होने के नाते आप उन्हें एहसास कराएं कि आप उन्हें प्यार करते हैं. वे अभी भी आकर्षक हैं, सैक्सी हैं. जताएं कि आप उन से प्यार करते हैं, केवल उन के शरीर से नहीं. अपने दोनों के बीच के संबंधों को बेहतर बनाने के लिए कुछ न कुछ नया करते रहें. साथ घूमेंफिरें, छुट्टियां मनाने जाएं जैसी गतिविधियां करते रहें.

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GHKKPM: विनायक को लेकर सई के पास जाएगा विराट, पाखी को लगेगा झटका

‘गुम है किसी के प्यार में’ की कहानी का ट्रैक दर्शकों का कॉफी पसंद आ रहा है. यह शो टीआरपी लिस्ट में भी टॉप पर बना हुआ है. शो के बिते एपिसोड में दिखाया गया कि विराट और सई का आमना-सामना होता है. वो दोनों एक-दूसरे को देखते ही हैरान हो जाते हैं. शो के आने वाले एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है.

विराट के मन में सई के लिए गुस्सा बढ़ता ही जाता है. वह बार-बार सोचता है कि सई के पास वो विनायक नहीं है जो उसका अपना बेटा था. उसे लगता है कि सई की वजह से ही विराट ने अपना बेटा खो दिया.

 

विनायक, विराट का अपना बेटा नहीं होता है बल्कि वह उसे गोद लेता है जो उसे मिशन पर मिलता है. लेकिन विराट अपने मन में सोचता है कि विनायक उसके लिए सगे बेटे से भी बढ़कर है और वह उसे उसके पैरों पर खड़ा करने के लिए कुछ भी करेगा.

 

सई विनायक के इलाज के लिए विराट के पास फोन करती है और कहती है कि आज जो कुछ हुआ, उससे विनायक पर बुरा असर पड़ेगा. लेकिन उनके अतीत का विनायक के इलाज से कोई लेना-देना नहीं है. वह आगे कहती है कि  मैं हमारे अतीत को अपने काम के बीच नहीं आने दूंगी. तो वहीं विराट भी अपने बेटे को लेकर सई के पास जाने के लिए तैयार हो जाता है.

 

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शो में आप ये भी देखेंगे कि पाखी को विराट के कबर्ड में सई के साथ पुरानी तस्वीर मिलेगी. जिसे देखते ही पाखी इमोशनल हो जाएगी. तभी अश्विनी वहां आएगी और  उसे समझाएगी कि उसे अपने अतीत को भूलकर आगे बढ़ना चाहिए.

हनी सिंह और शालिनी तलवार का हुआ तलाक, शादी के 11 साल बाद हुए अलग

पंजाबी सिंगर हनी सिंह और शालिनी तलवार का 8 सितंबर को दिल्ली के साकेत की फैमिली कोर्ट में तलाक हुआ.दोनों की 11 साल की शादी टूट गई. पिछले साल ही हनी सिंह की पत्नी ने सिंगर पर कई गंभिर आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी दी थी.

एक रिपोर्ट के अनुसार, शालिनी तलवार ने उनके खिलाफ घरेलू हिंसा, यौन हिंसा, मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक हिंसा का मामला भी दर्ज कराया था. बताया जा रहा है कि हनी सिंह 1 करोड़ रुपये का गुजारा भत्ता दिया है.

 

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हनी सिंह और शालिनी तलवार के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बाद मामला अदालत में सुलझा. उसके बाद दोनों के बीच 1 करोड़ रुपये के गुजारे भत्ता पर समझौता हुआ. मामले की अगली सुनवाई 20 मार्च 2023 को होगी.

 

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बता दें कि हनी सिंह और शालिनी तलवार बचपन के दोस्त हैं. उन दोनों ने एक-दूसरे को कॉफी समय तक डेट किया.  23 जनवरी 2011 को दोनों शादी के बंधन में बंध गए थे. बता दें कि साल 2014 में हनी सिंह ने रियलिटी शो इंडियाज रॉकस्टार के एक एपिसोड में अपनी पत्नी को दर्शकों से मिलवाया था.

 

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बता दें कि 23 जनवरी 2011 को दोनों शादी के बंधन में बंध गए थे. 2021 में इस जोड़े ने अपने वैवाहिक जीवन के दस साल पूरे कर लिए थे  लेकिन किसी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि वे अपनी शादी में  समस्याओं का सामना कर रहे हैं. और अब वो दोनों अलग हो रहे हैं.

 

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यो यो हनी सिंह फिल्म कॉकटेल के गाने अंग्रेजी बीट के सुपरहिट होने के बाद घर घर में मशहूर हुए. हनी ने पानी पानी, लुंगी डांस, चार बोतल वोडका जैसे कई सुपरहिट गाने गाए हैं.

उड़द की खेती कैसे करें

उड़द खरीफ के मौसम में ली जाने वाली दलहनी फसलों में बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है. उड़द को मुख्य रूप से दाल और बड़ा के रूप में खाया जाता है, जो कि शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है. उड़द में प्रोटीन 25-26 फीसदी तक पाया जाता है.

उड़द की फसल का प्रयोग पशु आहार हरी खाद और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए  भी किया जाता है. उड़द फसल की जड़ों से 30-35 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन स्थापित होती है.

भूमि का चयन

उड़द फसल के लिए अच्छी जल निकास वाली मटासी दोमट या डोरसा भूमि सर्वोत्तम मानी जाती है. पहाड़ी क्षेत्रों में उड़द की खेती बलुई डोरसा व मैदानी क्षेत्रों में मटासी भूमि का उपयोग किया जाता है.

भूमि की तैयारी

इस फसल का अच्छा उत्पादन लेने के लिए 2-3 बार खेत की हलकी जुताई कर घासफूस और कचरा साफ करना चाहिए. दीमक के बचाव के लिए क्लोरोपायरीफास 1.5 फीसदी चूर्ण 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से खेत की तैयारी के समय मिट्टी में मिलाना चाहिए. अंतिम जुताई के बाद पाटा चला कर खेत को समतल कर लेना चाहिए.

बीज दर

उड़द को छिटकवां विधि से बोने के लिए 20-25 किलोग्राम/हेक्टेयर व कतार विधि से बोने के लिए 15-20 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता?है. मिश्रित फसल के लिए 5-7 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है.

उड़द की उन्नत किस्में

मोजक रोग निरोधक-शेखर 1, टीयू-94-2 मोजक एवं भभूतिया रोग निरोधक-इंदिरा उड़द प्रथम.

बीज उपचार

बोआई करने के पहले बीज को सर्वप्रथम फफूंदनाशक थायरम या कार्बंडाजिम 2.5 ग्राम दवा/किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिए. फिर उस के बाद राइजोबियम व पीएसबी कल्चर से 5-10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से उपचारित करें.

बोआई की विधि

उड़द फसल को पौधे से पौधे 8-10 सैंटीमीटर रखना चाहिए व कतार की दूरी 30 सैंटीमीटर में बोना अच्छा रहता है.

खाद एवं उर्वरक की मात्रा

खेत की अंतिम जुताई के समय गोबर की खाद या कंपोस्ट 4-5 टन प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी तरह मिलाएं. इस के बाद बीज की बोआई के समय 20 किलोग्राम नाइट्रोजन,

40 किलोग्राम फास्फोरस, 20 किलोग्राम, पोटाश और 20 किलोग्राम सल्फर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डालना चाहिए. उर्वरक की सही मात्रा का निर्धारण मृदा परीक्षण के बाद अधिक लाभदायक है.

नींदा नियंत्रण

फसल व खरपतवार की प्रतिस्पर्धा की क्रांतिक अवधि बोआई के 25-30 दिनों तक रहती है. इस अवधि में खरपतवार को निराईगुड़ाई कर नियंत्रण कर लेना चाहिए.

सिंचाई

खरीफ के सीजन में उड़द फसल में सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती है, बल्कि अधिक वर्षा की स्थिति में जल निकास की उचित व्यवस्था करें.

कीट प्रबंधन

सफेद मक्खी-121, चित्तीदार फलीभेदक कीट.

* ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करें व फसल के अवशेष को नष्ट करें.

* समय पर बोआई का काम करें, जिस से कीटों द्वारा नुमसान कम हो.

* प्रकाश प्रपंच या फैरोमौन ट्रैप का उपयोग करें. क्लोरोपायरीफास 50 फीसदी, साइपर मेथ्रिन 5 फीसदी का 1.0 लिटर प्रति हेक्टेयर का स्प्रे करना चाहिए.

रोग प्रबंधन

पीला मोजक : रोगवाहक सफेद

मक्खी के नियंत्रण के लिए मैटासिस्टौक्स रोगर 1 मिलीलिटर दवा प्रति लिटर पानी के हिसाब से डालें.

भभूतिया : इस रोग के कारण पत्तियों में सफेद पाउडर जमा हो जाता है. इस के निदान के लिए सल्फेक्स 3 ग्राम प्रति लिटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें.

कटाई

सही समय पर कटाई करें. उड़द की फसल में 80-90 फीसदी फलियां पकने पर ही कटाई करनी चाहिए. फसल अधिक सूख जाने पर खेत में ही चटकने लगती है. कटाई के पश्चात दानों को अच्छी तरह सुखा कर भंडारित करें.

उपज

12-14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की उपज उचित काश्त क्रिया अपना कर ले सकते हैं. साथ ही, 15-20 क्विंटल पौष्टिक भूसा भी मिलता है. भंडारण के समय दानों में नमी की मात्रा 10-12 फीसदी रखते हैं.

नया अध्याय – भाग 4: अडिग फैसला साक्षी का

पति से अलग होने के बाद साक्षी ने यह सोच कर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दियाताकि भाईभाभी और मां के सामने उसे हाथ न फैलाना पड़े और अपनी अधूरी पढ़ाई अपने बल पर पूरी कर सके. अब बस जितनी जल्दी हो सकेनरेश से उसे तलाक मिल जाएतो वह अपने आगे के लिए कुछ सोच पाएगी. जानती है दोनों भाभियों को वह जरा भी नहीं सुहाती. और मां भी बहुओं को कुछ कहने के बजाय उसे ही ज्ञान देती रहती है. लेकिन वह भी क्या करे. बेचारी की मजबूरी है. दरअसलमां सुषमा गठिया की मरीज थीउस से घरबाहर का कोई भी काम नहीं हो पाता है. इसलिए वह अपनी दोनों बहुओं की चापलूसी करती रहती है और बेटी को झिड़कती रहती हैताकि बेटेबहू खुश रहें.

खैरजो भी होपर साक्षी इस बात से उत्साहित थी कि अब बस कुछ ही दिन बचे हैं और नरेश हमेशा के लिए उस की जिंदगी से आउट हो जाएगा.तलाक के बाद जहां साक्षी के परिवार में मातम पसरा थावहीं उस का मन हो रहा था कि वह झूमेनाचे और गाए, ‘मेरे सैयांजी से आज मैं ने ब्रेकप कर लिया…’ अपनी सहेली रेणु की मदद से उस की एक स्कूल में टीचर की नौकरी लग गई. रेणु भी उसी स्कूल में चार साल से पढ़ा रही थी तो उस की काफी जानपहचान बन गई थी और साक्षी ने बीएड तो कर ही लिया था. सोउसे नौकरी मिलने में ज्यादा मुश्किल नहीं आई.

इसी आदर्श शिक्षा निकेतन’ स्कूल में विपुल सर मैथ के टीचर थे. साक्षी से उन की अच्छ बनती थी. उन की  उम्र यही कोई 46-47 होगी. विपुल सर का सरल स्वभाव साक्षी को बहुत अच्छा लगता था और उस से भी अच्छा उन का किसी भी बात पर खुल कर हंस देना लगता है. उन्हें देख कर तो लगता हैजैसे उन के जीवन में कोई टेंशनफिक्र ही नहीं है.

एक रोज साक्षी के पूछने पर विपुल सर बोले कि वर्ष 2020 में कोरोना के चलते उन की पत्नी की मृत्यु हो गई और अब एक बेटा हैजिस के लिए वो जी रहे हैं. साक्षी ने भी अपनी रामकहानी सुनाईतो विपुल सर को उस से थोड़ी  हमदर्दी हो आई और इसी हमदर्दी में उन्होंने बोल दिया, ‘कोई बात नहींमैं हूं. किसी भी चीज की जरूरत होबोलने से हिचकिचाना मत.

अब साक्षी का विपुल सर के साथ दोस्ती से ज्यादा अपनापन का रिश्ता बन चुका था. वह अपनी हर बात विपुल सर के साथ शेयर करती और वे सुनते भी. अब दोनों साथ ही लंच करते. छुट्टियों में कभीकभार फिल्म देखने चले जातेनहीं तो कहीं घूमने निकल पड़ते थे.

सच कहेंतो साक्षी विपुल सर को पसंद करने लगी थी. तलाक के बाद बड़ी भाभी उस के लिए एक विधुर का रिश्ता ले कर आई थीं. लेकिन लड़का… लड़का क्यादो बच्चे का बाप था वह. और उस पर भी उसे साक्षी से ज्यादा उस के कमाए पैसों में ज्यादा दिलचस्पी थी. इसलिए उस ने भाभी के लाए रिश्ते से इनकार कर दिया.

एक बार वह अपने परिवार के कहे पर शादी कर के देख चुकी थी. लेकिन अब वह अपने लिए देखपरख कर जीवनसाथी ढूंढेगीसोच लिया था उस ने. वह तो विपुल सर जैसा कोई सुलझा हुआ इनसान चाहती थी अपने जीवन में. मगर ऐसा कोई मिल नहीं रहा था.

लेकिन विपुल सर ही क्यों नहींउन की पत्नी है नहींएक बेटा है. वह भी अपनी आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका जाने वाला हैतो हांविपुल सर ही मेरे लिए एकदम परफेक्ट इनसान हैं,’ अपने मन में सोच साक्षी उछल पड़ी. भले ही उन्होंने अपने मुंह से कुछ नहीं कहापर इनसान के हावभाव से पता नहीं चलता क्या कि मैं भी उन्हें अच्छी लगती हूंमैं और विपुल सरवाहक्या जोड़ी लगेगी न हमारी,’ ख्वाबों में खोई साक्षी मुसकरा ही रही थी कि तभी टन’ से दरवाजे की घंटी बज उठी. देखा तो स्कूल का प्युन खड़ा है.

क्या है?” खीजते हुए वह बोलीतो प्युन घबराते हुए बोला, “वोविपुल सरजी ने आप को औफिस में बुलाया है. कह रहे थे कि कोई जरूरी काम है.“जरूरी काम,” साक्षी की आंखें चमक उठीं. वह बोली, “ठीक हैतुम जाओ. मैं आती हूं.” कहीं मेरा ख्वाब सच तो नहीं होने वाला ?’ पैन को गोलगोल घुमाते हुए साक्षी मन में ही बोली. मगर विपुल सर ने तो बस इतना ही कहा कि वे कुछ दिनों की छुट्टी पर जा रहे हैंतो प्लीज वह उन की क्लास देख ले जरा.

अरेहां सरक्यों नही. लेकिनआप अचानक छुट्टी पर क्यों जा… मेरा मतलब है कि आप कहीं जा रहे हैं क्या सर?““हांमतलब… मेरे कहने का मतलब हैमेरा बेटा अमेरिका जा रहा हैतो कुछ दिन उस के साथ बिताना चाहता हूं.जहां साक्षी विपुल सर से शादी के सपने देख रही थीवहीं विपुल सर ने बिना किसी को बताए अपनी एक महिला मित्रएश्वर्या से चट मंगनी पट ब्याह कर लिया.

और जब यह बात साक्षी को पता चलीतो उस के सिर पर घड़ों पानी पड़ गया. बेचारी का तो दिल ही टूट गयाअब जी के क्या करेंगेवाला हाल हो गया. औफिस में सब के पूछने पर की यों अचानक से शादी कैसे कर ली उन्होंनेतो वे सफाई देते हुए बोले कि उन का बेटा चाहता था कि उस के अमेरिका जाने से पहले उस के पापा की शादी हो जाएतो बेटे की खुशी के लिए शादी करनी पड़ी.

करनी पड़ी. अरेतो मुझ में क्या कमी थीमैं क्या उस एश्वर्या से देखने में कम सुंदर हूं,”साक्षी मन ही मन भुनभुनाई. ये सारे मर्द एकजैसेएकदम मतलबी.एश्वर्या से शादी के बाद महीनेभर के लिए विपुल सर हनीमून पर निकल गए और इधर साक्षी अपने लिए कोई दूसरा साथी ढूंढने में लग गईताकि वह उस से शादी कर फिर से अपना घर बसा सके. अब जीवन इतना छोटा भी नहीं होता कि अकेले काटा जा सके. एक साथी तो चाहिए ही जीवन में सुखदुख बांटने के लिए. और अभी उस की उम्र ही क्या हुई हैसिर्फ 31 की तो थी वो.

अरेपता चला कि विपुल सर का कहीं और तबादला हो गया है?” लंच ब्रेक में सब के साथ बैठी रेणु बोली.तबादला हो नहीं गयाबल्कि जानबूझ कर उन्होंने करवाया है रेणु मैडम,” रोटी का कौर मुंह में डालते हुए विवेक सर बोले,  “वैसेसाक्षी मैडमआप को तो पता ही होगा कि उन्होंने ऐसा क्यों कियामेरा मतलब है कि बताया तो होगा न आप को ?“

अब मुझे क्या पता कि क्यों करवाया उन्होंने अपना तबादला,” रूखा सा जवाब दे कर साक्षी अपना लंच का डब्बा समेटते हुए उठ खड़ी हुई और पीछे से विवेक सर खींखीं कर हंसने लगे. विपुल सर की जगह जो नए मैथ के टीचर आए थेवे समय के एकदम पाबंद थे. लेकिन लोगों से बोलते बहुत कम ही थे. बस अपने काम से काम रखते थे.

 

मे आई कम इन सर,” अंदर झांकते हुए साक्षी बोली.अरेप्लीज मैडमआइए न,” आकाश सर अपनी कुरसी से उठते हुए बोले.सरवो दरअसलबच्चों के एक्जाम्स आने वाले हैंतो उसी विषय में आप से कुछ बात करनी थी,” साक्षी बोली. मगर उस का मकसद तो आकाश सर के करीब आना था. जब से रेणु ने उसे बताया था कि आकाश सर का अपनी पत्नी से तलाक का केस चल रहा हैतभी से साक्षी के मन में उन्हें ले कर खिचड़ी पकने लगी थी.

सुंदरस्मार्ट आकाश सर पर साक्षी का दिल आ गया था. लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि कैसे वह अपने मन की बात आकाश सर तक पहुंचाए. कहीं ऐसा न हो कि अकेले ही से उसे अपनी पूरी जिंदगी काटनी पड़ जाए या हमेशा के लिए वह भाईभाभियों की दासी बन कर उन के बच्चे पालने में उम्र खपा दे.क्या बात हैकिस सोच में डूबी हो मैडम,” स्टाफरूम में साक्षी को एकटक फाइल निहारते देख रेणु ने पूछा.सुन नतू मेरा एक काम करेगी?” रेणु का हाथ पकड़ उसे अपनी पास वाली कुरसी पर बैठाते हुए साक्षी बोलीतो उस ने आंखों के इशारे से पूछा, ‘कैसा काम…?’

तू मेरी शादी की बात आकाश सर से चला न.““शादी… तू फिर से शादी करना चाहती हैपर क्योंपागल है क्या?”साक्षी को शादी के लिए उतावला देख रेणु अजीब तरह से हंसी. इतनी अच्छी तो लाइफ चल रही है तेरीफिर क्यों इसे हेल बनाना चाहती है. सच कहती हूं कि अगर मैं तुम्हारी जगह होती नतो कभी दोबारा शादी नहीं करती. आराम से अपने मनमुताबिक जीती. मजे करतीघूमतीफिरतीजो मन होता सो करती और कोई बोलनेटोकने वाला न होतातो कितना अच्छा होता न.

“लेकिन तू पागलफिर से इन झंझटों में क्यों फंसना चाहती है?”“वो सब छोड़ये बता कि तू उन से मेरी शादी की बात करेगी या नहींदेखमुझे पता है आकाश सर और तुम एक ही कालेज में पढ़ते थे और दोनों दोस्त हो,” साक्षी बोलीवो सब तो ठीक हैपर मुझे नहीं लगता कि वह दोबारा से फिर शादी के बारे में सोचेगा. और वैसे भी अभी  पूरी तरह से उन का तलाक हुआ नहीं है.

वो तो आज न सहीकल को हो ही जाएगा. परतू शादी की बात तो चला,” तभी स्कूल की घंटी बजी और दोनों अपने क्लास में चली गईं.लंच ब्रेक में भी साक्षी ने वही बात फिर दोहराईतो रेणु ने कहा कि अच्छाठीक हैवह समय देख कर आकाश से बात करेगी. लेकिन पता चला कि आकाश का अपनी पत्नी से तलाक होतेहोते रह गया. दोनों ने कोर्ट में सुलह कर ली और फिर से एक हो गए.

साक्षी का इस बार दिल ही नहींभरोसा भी टूट चुका था. थक चुकी थी अब वह अपने जीवन से. उस पर से घर में भी सब उसे कुछ न कुछ सुनाते ही रहते थेजिस से उस का मन खिन्न रहने लगा था. उस की मनःस्थिति ऐसी हो चुकी थी कि अब वह इस घर में सब के साथ रहना ही नहीं चाहती थी. इसलिए उस ने स्कूल के पास ही दो कमरे का घर ले लिया. इस तीन माले के घर में दो और भाड़ेदार रहते थे. साक्षी दूसरे माले पर रहती थी. सीढ़ियां चढ़तेउतरते समय अकसर उस की मुलाकत सुकेश से हो जाती तो दोनों मुसकरा पड़ते थे. सुकेश इसी मकान की तीसरी मंजिल पर रहता था.

वैसे तो वह केरल का रहने वाला थामगर वह यहां एक आईटी कंपनी में नौकरी करता है. रोज मिलते रहने से दोनों के बीच बातचीत होने लगीतो एक दिन साक्षी ने पूछ लिया, “और आप के घर वाले…?मेरा मतलब हैआपके बीवीबच्चेवे कहां रहते हैं?”

तो सुकेश मुसकराते हुए बोला कि अभी उस की शादी नहीं हुई है.ओह,’ बोल कर साक्षी मुसकराईतो सुकेश कहने लगा कि उस के मांपापा और एक छोटा भाई वहीं केरल में ही रहते हैं. अपने घरपरिवार के बारे में सुकेश ने और भी बहुतकुछ बताया और यह भी कि उस का छोटा भाई मैडिकल की तैयारी कर रहा है और उस के पापा की अपनी गरम मसाले की दुकान है.

साक्षी ने भी अपने तलाक के बारे में सुकेश को बता दिया. एकदूसरे के बारे में जान लेने के बाद अब दोनों अजनबी नहीं रह गए थे.अकसर सुकेश औफिस से लौट कर साक्षी के घर आ जाता या साक्षी उस के घर चली जाती थी और दोनों घंटों यहांवहां की बातें करते.

सुकेश उसे केरिलियन व्यंजन बना कर खिलातातो साक्षी उसे अपने हाथों से मटन ग्रेवी बना कर खिलाती. साथ में घूमनाफिरनाशापिंग करना होता रहता था इन का. दोनों एकदूसरे के साथ काफी खुश नजर आते थेक्योंकि दोनों के विचार एक से थे. और सब से बड़ी बात यह कि दोनों ही अकेले थे अपने जीवन में. सुकेश भी कोई ऐसी लड़की की तलाश में थाजो उसे समझ सकेउस के कदम से कदम मिला कर चल सके.

कहते हैंजब जिसे जो मिलना होता है मिल ही जाता है. साक्षी ने कितने हाथपैर मारेपर उस के मन के मुताबिक कोई न मिला और आज जब सामने से सुकेश शादी का प्रपोजल ले कर आयातो उस ने झट से हां‘ कर दिया. क्योंकि गरजमंद तो यहां दोनों ही थे. दरअसलसुकेश के मातापिता जिस लड़की से उस की शादी करना चाहते थेवह सुकेश को जरा भी पसंद नहीं थी. सिर्फ मोटे दहेज के लिए वह अपने बेटे को एक ऐसी लड़की के पल्ले बांध देना चाहते थेजो अनपढ़ थी. इसलिए सुकेश केरल की नौकरी छोड़ कर दिल्ली आ गया और चार साल से यहीं पर है.

सुकेश की बात सुन कर साक्षी इस सोच में पड़ गई कि जिंदगी हमारी हैफिर मांबाप अपनी ही क्यों चलाते हैं हमेशाऔर उस के साथ भी तो यही हुआ न. बिना उस की मर्जी के उस की शादी उस से 13 साल बड़े लड़के से करा दी गई. और नतीजा क्या हुआकिसी से छिपा नहीं है.

खैरजो हुआ अच्छा ही हुआ,’ अपने मन में सोच साक्षी मुसकरा उठी और सुकेश को फोन लगा दिया. कई दिनों से दोनों कहीं घूमने जाने का प्लान बना रहे थे. लेकिन छुट्टी न मिल पाने के कारण कहीं जा नहीं पा रहे थे. इन 10 दिनों की छुट्टी पर दोनों ने दार्जिलिंग घूमने का प्लान बना लिया. रास्ते की थकान के कारण होटल के कमरे में आते ही साक्षी बेड पर पसर गईतो सुकेश उस के ऊपर झुक गया और उस के गालों को चूम लिया. चंद मिनटों में ही उन के बीच की सारी दूरियां मिट गई. दार्जिलिंग में उन्होंने रोपवेहिमालयन पर्वतारोहणनाइटेंगल पार्कराक गार्डन आदि का खूब मजा लिया. यहां उन्हें अपार शांति और सुकून का अनुभव हो रहा था. आराम से दोनों प्रकृति की गोद में बैठ कर तारों की छांव में आने वाले दिनों के सपने बुने और फिर वापस दिल्ली आ गए.

आज भी वह सुकेश के ही सपनों में खोई थी. लेकिन जब सुकेश ने उसे यह बताया कि वह ईसाई हैतो साक्षी के पैरों तले जमीन खिसक गईक्योंकि कहां वह राजपूत परिवार से है और कहां सुकेश दलित. हमारे यहां ईसाई को दलित समझा जाता है. नहींसाक्षी को सुकेश के ईसाई होने से कोई समस्या नहीं थी. लेकिन क्या उस के परिवार वाले यह सब जानने के बाद इस रिश्ते को स्वीकारेंगे?

कहीं वे लोग इस शादी के खिलाफ हो गए तो…कहीं उसे रिश्ते से बेदखल कर दिया तो…क्या करेगी वह…?’ सोच कर ही साक्षी का माथा फटने लगा.ओहअब मैं क्या करूंरेणु बता न?” लेकिन रेणु क्या जवाब देती. बोली, “तू तो जानती है नमैं जातपांत में विश्वास नहीं रखती. मेरे लिए तो बस इनसान का बातविचार अच्छा होना चाहिए. और सुकेश तो सर्वगुण संपन्न है. लेकिनयह बात मैं अपने परिवार वालों को कैसे समझाऊंगी?”

अगर तुझे सुकेश पसंद है और लगता है कि तू उस के साथ खुश रहेगी तो बताने से डर क्यों रही हैबता दे न,” रेणु ने कहातो साक्षी को एक बल मिला. लेकिन यह सुनते ही कि साक्षी एक दलित लड़के से शादी करना चाहती हैघर में कोहराम मच गया. दोनों भाइयों ने तो तलवार ही निकाल ली और मां रोनाधोना मचाने लगी कि हायपैदा होते मर क्यों न गई ये. दोनों भाभियां भी मुंह बिचका कर कहने लगीं कि कल को जब लोगों को पता चलेगा कि इस घर की बेटी ने एक दलित से ब्याह कर लियातो उन के बच्चों पर क्या असर पड़ेगालोग तो हमारे घर से रिश्ता जोड़ना भी नहीं चाहेंगे. समाज में उन का उठनाबैठना तक बंद करवा दिया जाएगा.

अरेक्या हो गया है आप लोगों कोये जातपांतऊंचनीच कुछ नहीं होता मां. यह बस हमारी सोच है और कुछ नहीं. देखिएदेखिएक्या हमारे माथे पर लिखा है कि हम राजपूत हैंनहीं न. इनसान अपने कर्म से पहचाना जाता हैजाति से नहीं. क्यों नहीं समझ रहे हैं आप लोग यह बातवो नरेश तो हमारी जाति का था नकितना शरीफ थादेख लिया न आप लोगों नेअरेवह इनसान तो सुकेश के पैरों की धूलमात्र भी नहीं है. फिर भी आप लोग ऐसा बोल रहे हैंसुकेश अच्छा लड़का है मां. अच्छी कंपनी में नौकरी करता है. घरपरिवार से भी मजबूत है. तो और क्या चाहिए आप लोगों को?“ साक्षी के इतना समझाने पर भी उस के परिवार वाले टस से मस नहीं हुएबल्कि अपने फैसले पर कायम रहे.

तो ठीक हैअड़े रहिए आप अपने फैसले परलेकिन मैं तो शादी सुकेश से ही करूंगी. और आप मानें या न मानेंलेकिन मेरी नजरों में तो जाति दो ही हैंस्त्री और पुरुष और धर्म सिर्फ एक है इनसानियत.  बाकी सब पाखंड और धंधा है. और यह भी पता है मुझे कि सुकेश से शादी करने के बाद आप सब की नजरों में मैं भी दलित हो जाऊंगीतो कोई बात नहीं,” बोल कर साक्षी घर से निकल गई एक नया अध्याय लिखने.

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