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GHKKPM: बेटे के लापता होने के बाद सई की दुश्मन बनेगी पाखी तो विराट लेगा ये फैसला

सीरियल गुम है किसी के प्यार में फिर वो समय आ गया है जब सई और विराट के बीच में लड़ाई होने लगी है, विनायक वो शख्स है जिसकी वजह से परिवार में फिर से बखेरा खड़ा होने वाला है. विनायक सई के मुंह से सुन लेती है कि वह सई की बेटा नहीं है.

इस बात को विनायक पाखी और विराट को बता देता है कि वह सई का बेटा नहीं है जिसे सुनते ही सई को काफी ज्यादा सदमा लगता है. विराट और पाखी सई से बात करने करने की कोशिश करते हैं तभी सई को बड़ा झटका लगता है.

इसी बीच विनायक एक चौकाने वाला फैसला लेने वाला है, विनायक खुद को कमरे में बंद कर लेगा अब उसकी नाराजगी को देखकर विराट का खून खौल उठेगा. विराट बिना देर किए सई को फोन करेगा और खूब खरी खोटी सुनाने की कोशिश करेगा.

विराट सई को डांटते हुए कहेगा कि आप भरोसे के काबिल नहीं है. जिसे सुनकर सई काफी ज्यादा टूट जाएगी. इस बात को सुनने के बाद सई विराट से बात करने च्वहाण हाउस पहुंचेगी.

तब सई देखेगी विनायक ने खुद को कैसे कमरे में बंद करके रखा है. इसका बुरा असर सई पर पड़ेगा.

 

दुनियादारी- भाग 1: किसके दोगलेपन से परेशान थी सुधा

सुधा स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही थी कि टैलीफोन की घंटी बज उठी. बाल बनातेबनाते उस ने रिसीवर हाथ में लिया. उधर से आवाज आई, ‘‘सुधा, मैं माला बोल रही हूं.’’

‘‘नमस्ते जीजी.’’

‘‘खुश रहो. क्या कर रही हो? प्रोग्राम बनाया अजमेर आने का?’’

‘‘जी, अभी तो बस स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही थी.’’

‘‘स्कूल में ही उलझी रहोगी या अपने परिवार की भी कोई फिक्र करोगी. तुम्हारे ससुर अस्पताल में भरती हैं, उन की कोई परवा है कि नहीं तुम्हें?’’

‘‘पर जीजी, उन की देखभाल करने के लिए आप सब हैं न. जेठजी, जेठानीजी व मामाजी, सभी तो हैं.’’

‘‘हांहां, जानती हूं, सब हैं, पर तुम्हारा भी तो कोई फर्ज है. दुनिया क्या कहेगी, कभी सोचा है? वह तो यही कहेगी न, कि बूढ़ा ससुर बीमार है और बहू को अपने स्कूल से ही फुरसत नहीं है.’’

‘‘पर जीजी, आप तो जानती ही हैं कि अभी परीक्षा का वक्त है और ऐसे में छुट्टी मिलना बहुत मुश्किल है. फिर मेरी कोई जरूरत भी तो नहीं है वहां. समीर वहां पहुंच ही गए हैं. वैसे भी बाबूजी को कोई गंभीर बीमारी नहीं है. सही इलाज मिल गया तो वे जल्दी ही घर आ जाएंगे. 2-4 दिनों में स्कूल के बच्चों की परीक्षा हो जाएगी तो मैं भी आ जाऊंगी.’’

‘‘भई, समीर तो अपनी जगह मौजूद है, पर तुम भी तो बहू हो. लोगों की जबान नहीं पकड़ी जा सकती. मेरी मानो तो आज ही आ जाओ. समाज के रीतिरिवाज और लोकदिखावे के लिए ही सही.’’

‘‘ठीक है जीजी, मैं देखती हूं,’’ कह कर सुधा ने फोन रख दिया और तैयार हो कर स्कूल के लिए चल पड़ी.

रास्तेभर वह सोचती रही कि जीजी ठीक ही कह रही हैं, मुझे वहां जाना ही चाहिए. चाहे यहां बच्चों का भविष्य दांव पर लग जाए. पराए बच्चों के लिए मैं परिवार को तो नहीं छोड़ सकती.

तभी अंतर्मन से कई और आवाजें आईं, ‘छोड़ने के लिए कौन कह रहा है, 2-4 दिनों बाद चली जाना, वहां ज्यादा भीड़ लगाने से क्या होगा.

पार्टियां आपस में कर रही हैं लड़ाई

पार्टियों के झगड़े देश की सरकारों को ढंग से चलाने में कितने आड़े आ रहे हैं. यह कोई आज की बात नहीं है. वैसे तो रामायण और महाभारत दोनों में जड़ में परिवारों के झगड़े थे, न बाहरी जने का हमला, न जनता की नाराजगी, न कुदरत का कहर. इन पौराणिक ग्रंथों से निकले देवीदेवता आज भी पूरी तरह पूजे ही नहीं जाते, उन के नाम पर एकदूसरों का सिर कलम भी किया जाता है. पर लोग भूल जाते हैं जो सत्ता में बैठे होते हैं, उन के आपसी झगड़े कितने भारी पड़ते हैं.

जब भी सत्ता के लिए घरवालों में झगड़ा होता है, जनता की भलाई के कामों पर ब्रेक लग जाता है. सत्ताधारी का सारा समय तो अपनी गद्दी बचाने में लग जाता है. कल तक जो कंधे से कंधा मिला कर बोझ ठो रहा था वह कंधा तोडऩे में लग जाता है. फिलहाल यह गरमी महाराष्ट्र में ढो रही है जहां उद्धव ठाकरे और एकनाथ ङ्क्षशदे शिवसेना को चकनाचूर करने में लगे हैं.

एकनाथ ङ्क्षशदे अपने साथ 30-35 विधायकों को ले कर भारतीय जनता पार्टी के खेमे में चले गए है और वहां उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया गया. बाल ठाकरे के पुत्र उद्धव ठाकरे अब अपने पिता की बनाई पार्टी का बचाखुचा हिस्सा संभालने में लगे हैं. आमतौर पर इस तरह ने झगड़े भाइयों में होते है पर यहां ङ्क्षशदे शिवसेना के कार्यकर्ता थे लेकिन उन का रौब सब घरेलू सदस्य का सा था.

इस झगड़े में महाराष्ट्र को जनता के भले के लिए ही रहे हर काम में अड़चन आने लगी है. फैसले टल रहे हैं. फाइलों जमा हो रही हैं, सप्लायर, ठेकेदार बदले जा रहे हैं. हर पुराने काम को जांच की कोशिश की जा रही है ताकि साबित किया जा सके कि उद्धव ठाकरे ने कोई बेइमानी की और उन्हें बिहार के लालू यादव और हरियाणा के ओमप्रकाश चौटाला जैसे जेलों में सड़ाया जा सके.

अपने लोगों से विश्वासघात को देश में अब घरवापिसी जैसा नाम दिया जाने लगा है, जो दलबदल करता है, अपनी पार्टी में झगड़ा करता है, कोई बाहरी आ कर एक को भरपूर पैसा देने लगता है. अभी चूंकि पैसा भारतीय जनता पार्टी के पास है, फायदा उसी को हो रहा है. कल किसी और को हो सकता है.

पोलिटिकल पार्टी में झगड़ों पर कमी भी खुशी नहीं मनाई जानी जाती और इसे नमकहरामी और धोखा ही माना जाना चाहिए. मतभेद हों, मतभेद हो तो अलग रास्ते पर चल दें पर तोडफ़ोड़ न करें.

जो काम नेता करते हैं, जो देवीदेवता करते रहे हैं, जो मठों आश्रमों में होता है, जो मंदिरोंचर्चों में होता है, वह आम घरों में पहुंच जाता है. फूट का वायरस कोरोना वायरस की तरह है. बीमार भी करता है और जानलेवा भी. अफसोस यह है कि आम जनता ऐसे देवीदेवताओं को पूजती जिन्होंने घरपरिवार तोड़े, ऐसे नेताओं को हार पहनाती है जिन्होंने पाॢटयां तोड़ी, घर तोडू सोच को हमारे यहां उसी तरह बुरा नहीं माना जाता जैसे पिछले कुछ दशकों में पश्चिम में शादी को तोडऩा गलत नहीं माना जा रहा. दोनों जिस तरह घरवालों पर भारी पड़ते हैं ये वे सब जानते हैं जो इन अंधेरी गुफाओं के गद्दे कीचड़ से गुजर चुके हैं. हर झगड़ा पैसा खर्च कराता है.

ज्योति -भाग 3: सब्जबाग के जाल में

अगर उस ने प्रियंका को चाहा था, तो फिर अपने लिए दूसरी लड़की क्यों चुनी? वह समझ गई कि पिताजी का विरोध करने की हिम्मत उस में नहीं रही होगी और बिरादरी और रिश्तेदारों में अपने पिता की इज्जत भी उछलने का विचार आया होगा.

क्योंकि उस के पिता अमर सिंह राठौर को अपनी राठौरी पर बड़ा गुरूर था. अपनी बिरादरी की लड़की के अलावा किसी भी दूसक बिरादरी की लड़की से जुगल की शादी वे कभी कर ही नहीं सकते थे.

ज्योति को याद आ गए वो दिन, जब उस के पिता अमर नाथ सिंह राठौर ने छोटे भाई भ्रमर नाथ के एकलौते बेटे रमेश की इच्छा के अनुसार उस का विवाह किसी दूसरी बिरादरी की लड़की से कर दिया था.

तो, अमर नाथ अपनी मूंछों पर ताव देते हुए इतना गुस्सा हुए थे कि उन्होंने अपने सगे भाई से पूरी तरह नाता तोड़ लिया था.

भ्रमर नाथ उन की सब बात सह गए थे, पर उन्होंने अपनी जबान बंद ही रखी गुस्से के कारण अमर नाथ ने पैतृक घर का बंटवारा तक कर डाला तो भी उन्होंने स्वीकार कर लिया, पर जबान न खोली.

कानूनी लड़ाई के बाद अलग हो कर जब इस खानदानी घर का बंटवारा हुआ, तो 5 कमरों और बड़े से आंगन वाला ये घर आधा रह गया. बीच में दीवार खड़ी हो गई.

फिर चाचा भ्रमर नाथ अपने हिस्से का पोर्शन बेच कर इसी तहसील के एक दूसरे कोने में बस गए. तब से उस ने चाचा की शक्ल 1-2 बार तभी देखी, जब उन की बिरादरी में किसी रिश्तेदार की शादी होती या कोई बड़ा फंक्शन होता.

पिता की नजरें बचा कर वह वहां अपने प्रिय चाचा से मिल लेती थी. चाचा की आंखों में उसे पहले जैसा ही प्यार दीखता. उसे देखते ही वो उस के सिर पर हाथ रख कर कह देते थे, “अरे, तू तो बहुत बड़ी और प्यारी सी दिखने लगी है.”

पास खड़ी चाची भी उसे गले से लगा लेतीं. और तब वह सोचती कि उस के पिता इतने कठोर दिल और दकियानूसी विचारों के क्यों हैं.

प्रियंका ने उस के कंधे पर हाथ रखा, तो वो फिर विचारों से बाहर आई.

प्रियंका की आंखों में आंसू आ गए थे. उस के शब्दों में एक अजीब सी विनती थी, “ज्योति, तुझे ही मेरे लिए कुछ करना होगा, वरना मैं कहीं की नहीं रहूंगी और मर जाऊंगी.”

उस ने उठ कर प्रियंका को सीने से लगा लिया और बोली, “तू ने बहुत देर कर दी. तुझे तो पता था कि मेरे पिता अपनी बिरादरी से बाहर जुगल की शादी की बात सोच ही नहीं सकते हैं.”

तभी कमरे से बाहर कुछ आहट हुई… प्रियंका की मां सुनंदिनी थीं. कमरे में आ कर वे बोलीं, “बहुत दिनों के बाद तू प्रियंका से मिलने आई है? ले, ये ले प्रसाद खा. अभीअभी पूजा कर के उठी हूं. ”

प्रियंका तब तक अपने को संभाल चुकी थी. कुछ देर तक दोनों खामोश रहीं. फिर ज्योति ने ही पूछा, “तू भी अपनी मां की तरह कोई व्रत वगैरह रखती है क्या?”

“नहीं, मुझे व्रत वगैरह रखना बिलकुल भी पसंद नहीं है.”

अचानक ज्योति को याद आया कि उसे प्रियंका के घर आए हुए बहुत देर हो गई है. वह एकदम से उठ खड़ी हुई और चलते हुए बोली, “मैं तुझ से कोई वादा तो नहीं कर सकती हूं, पर इतना जरूर कह कर जा रही हूं कि मैं तेरे लिए प्रयास जरूर करूंगी.”

प्रियंका से विदा ले कर ज्योति ने अपनी साइकिल उठाई और घर की तरफ बढ़ गई.

शाम हो चली थी. अभी वह अगले मोड़ पर मुड़ी ही थी कि उस की साइकिल एक मोटरसाइकिल से टकरातेटकराते बची.

Diwali 2022: मार्बल रसमलाई और गोल्डन ओरियो बूंदी केक से करें मुंह मीठा

  1. मार्बल रसमलाई

सामग्री :

2 किलोग्राम दूध, 11/2 छोटे चम्मच कस्टर्ड पाउडर, थोड़ा सा केसर, 1/4 कप चीनी, 2 चुटकियां इलायची पाउडर, 8-10 पिस्ते, 8-10 मार्बल केक के पीस, 1/2 कप मलाई.

विधि :

दूध काढ़ते हुए जब आधा रह जाए तो 2 चम्मच ठंडे दूध में कस्टर्ड पाउडर घोल कर उबलते दूध में डाल दें. दूध गाढ़ा होने लगे तो उस में केसर, चीनी और इलायची पाउडर डाल कर 2 उबाल आने तक पकाएं. दूध को फ्रिज में खूब ठंडा होने तक रखें. मार्बल केक की स्लाइसें एक ट्रे में रखें. गाढ़ी मलाई को अच्छी तरह फेंट लें.

कुछ स्लाइसों पर यह मलाई लगाएं  और 2-3 स्लाइसों को उन के ऊपर रख कर सैंडविच जैसा बना लें. इन्हें मनचाहे आकार में काट लें. कटोरियों में गाढ़ा किया दूध डालें. मार्बल केक के तैयार टुकड़े ऊपर डालें. मार्बल रसमलाई खाने के लिए तैयार है.

2. काजू-मैंगो फज

सामग्री :

1 कप काजू दरदरे पिसे हुए, 100 ग्राम मीठा आमपापड़, 1/4 कप चीनी, 1 बड़ा चम्मच नारियल का बुरादा, कटे मेवे सजाने के लिए.

विधि :

एक पैन में चीनी घोल लें. आमपापड़ के छोटेछोटे टुकड़े काट लें. चीनी के घोल में काजू और आमपापड़ मिलाएं और अच्छी तरह हिलाएं. इस मिश्रण को एक चिकनी थाली में निकाल लें. थोड़ा ठंडा होने पर चम्मच से उठा कर थोड़ाथोड़ा मिश्रण प्लेट में रखें. ऊपर से नारियल का बुरादा और कटे मेवे बुरकें. ठंडा कर के परोसें.

3. शकरकंद फिरनी

सामग्री :

500 ग्राम शकरकंद उबली, 2 किलो दूध, 1 कप कंडैंस्ड मिल्क, 1/2 कप कटे मेवे, थोड़े से पिस्ते व गुलाब की पंखडि़यां सजाने के लिए, चुटकीभर छोटी इलायची पाउडर.

विधि :

शकरकंद को छील कर कद्दूकस कर लें. एक भारी तले के बरतन में दूध उबलने के लिए रखें. जब दूध उबल कर आधा रह जाए तो उस में कसी शकरकंद व इलाइची पाउडर डाल दें. दूध गाढ़ा होने तक पकाएं. फिर मेवे और कंडैंस्ड मिल्क डाल कर लगातार चलाती रहें. उबाल आने पर आंच से उतार लें. गरम फिरनी सर्विंग डिश में डालें. ऊपर पिस्ता व गुलाब की पंखडि़यों से सजाएं.

4. गोल्डन ओरियो बूंदी केक

सामग्री  :

6 बूंदी के लड्डू, 15-20 गोल्डन ओरियो बिस्कुट, 50 ग्राम मक्खन, थोड़ी सी चौकलेट सौस और शुगर बौल्स सजाने के लिए.

विधि :

बूंदी के लड्डुओं का फोड़ कर चूरा कर लें. बिस्कुटों को मिक्सी में पीस लें. एक बाउल में पिघला मक्खन लें. बिस्कुटों का चूरा मिला कर अच्छी तरह गूंध लें. एक चौकोर ट्रे लें. बिस्कुटों के चूरे के 2 भाग कर लें. एक भाग को ट्रे में नीचे अच्छी तरह फैला कर जमा दें. उस पर बूंदी का चूरा अच्छी तरह से दबाते हुए जमा दें. सब से ऊपर फिर से बिसकुट के चूरे की तह जमा दें.

चाकू की सहायता से ऊपरी सतह एकसार कर लें. इस ट्रे को कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें. जब यह अच्छी तरह सैट हो जाए तो ऊपर से चौकलेट सौस और शुगर बौल्स से सजाएं. परोसने से पहले मनचाहे आकार के टुकड़ों में काट लें.

दीवाली स्पेशल : खोखली रस्में

मेरी उम्र 24 साल है, एक साल हुआ मेरी एक लड़के से दोस्ती हुई, शादी करना चाहती हूं सलाह दें?

सवाल 

मेरी उम्र 24 साल है. एक साल हुआ मेरी एक लड़के से दोस्ती हुई. अब हमारी बहुत अच्छी फ्रैंडशिप हो गईर् है. हम आएदिन डेट पर जाते हैं. लास्ट डेट पर उस ने मुझे होटल जाने के लिए कहा तब मैं ने मना कर दिया. उस ने बहुत कहा कि हम फुल प्रोटैक्शन के साथ सैक्स करेंगेलेकिन मैं राजी नहीं हुई. वह  नाराज हो गया. लेकिन मैं ने भी उसे नहीं मनाया तब एक हफ्ते बाद उस ने मुझे खुद फोन किया कि उसे ऐसी बात नहीं करनी चाहिएजो उसे नागवार थी.

मुझे अच्छा लगा कि उसे अपनी गलती का एहसास हुआ. अब वह मुझे मिलने के लिए कहता है. बोलता है तुम्हारा मन करे मुझ से मिलने कामुझे बता देनामैं आ जाऊंगा.

मुझे उस की यह बेरुखी सहन नहीं हो रही. मैं वाकई उसे दिल से चाहती हूंबस शादी से पहले अपनी मर्यादा में रहना चाहती हूं. अब मैं क्या करूं कि उस के दिल में मेरे लिए पहला वाला प्यार आ जाए. मैं उसे खुश देखना चाहती हूं.

जवाब

शादी से पहले सैक्स करने के हक में तो हम भी नहीं हैं. तब तो बिलकुल भी नहीं जब आप का मन खुद इस के लिए गवाही न दे रहा हो. आप अपने बौयफ्रैंड को दोबारा प्यार से समझाइए कि आप शादी से पहले सैक्स के हक में नहीं हैं. शादी हो जाएगी तो आप उस की हर इच्छा पूरी करेंगीं.

आप बस अपने बौयफ्रैंड से रोमांटिक बनी रहिए. उन का गुस्सा अपनेआप नरम पड़ेगा और चेहरे पर स्माइल आएगी. रोमांटिक मैसेजवीडियो कौल करेंये प्यार जताने का क्यूट अंदाज है.

रिश्ते में चल रही नाराजगी को खत्म करने के लिए रोमांटिक सरप्राइज प्लान कर सकती हैं. जहां केवल आप दोनों हों और एकदूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकेंजहां खुल कर दिल की बातें कहसुन सकें.    

दीवाली 2022: खत्म होते रिश्ते, दोस्तों में तलाशें

लोगों के शहरों में बसने से रिश्तेदारी सिमटने लगी है हालांकि इस की जगह दोस्तों ने ले ली है. जरूरी है कि दोस्तों में ही रिश्तेदारी तलाशी जाए. हर संभव मदद का लेनदेन करते रहें. परिवार नियोजन यानी फैमिली प्लानिंग का मतलब यह होता है कि आप अपने परिवार की प्लानिंग आर्थिक संसाधनों के हिसाब से करें जिस से परिवार के सदस्यों का सही पालनपोषण, शिक्षा और विकास हो सके. हमारे देश में फैमिली प्लानिंग में परिवार के आर्थिक पक्ष को तो रखा गया पर सामाजिक पक्ष को छोड़ दिया गया. इस का धीरेधीरे असर यह हो रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ करीबी रिश्ते खत्म होने की कगार पर हैं.

जैसे, अब परिवार में एक लड़का या एक लड़की ही प्लान की जा रही है. जिस परिवार में केवल लड़की ही है उस परिवार में भाई नहीं होगा तो भाई और मामा का रिश्ता खत्म हो जाएगा. ऐसे ही अगर परिवार में केवल लड़का हुआ तो बहन और बूआ का रिश्ता आने वाले दिनों में बच्चे केवल किस्सेकहानी में सुनेंगे. ऐेसे ही अगर फैमिली प्लानिंग में केवल एक लड़का व एक लड़की रही तो दूसरा भाई नहीं होगा तो भाई और चाचा का रिश्ता नहीं होगा. इन रिश्तों से जुड़े तमाम रिश्ते खत्म हो जाएंगे जैसे मामा नहीं तो मामी और ममेरे भाई नहीं होंगे. चाचा नहीं तो चाची और चचेरे भाई नहीं होंगे. बूआ नहीं तो फूफा और फुफेरे भाईबहन नहीं होंगे. 2 बहनें नहीं होंगी तो मौसी का रिश्ता नहीं होगा.

मौसा और मौसेरे भाई नहीं होंगे. भारतीय समाज और परिवेश में हर रिश्ते का अलग महत्त्व है. उन के लिए अलग संबोधन होता है. विदेशों में इन रिश्तों में कौमन शब्द का प्रयोग होता है. चचेरे, फुफेरे और ममेरे भाईबहनों के लिए कजिन शब्द का प्रयोग होता है. ऐसे ही हर रिश्ते के साथ होता है. फैमिली प्लानिंग का एक प्रभाव यह भी समाज पर पड़ने वाला है. भारत में फैमिली प्लानिंग की जब शुरुआत हुई थी तो एक नारा दिया गया था, ‘बच्चे तीन ही अच्छे,’ लेकिन सरकार इस बात से सहमत नहीं थी. ऐसे में दूसरा नारा दिया गया ‘हम दो हमारे दो’. इस के जरिए समाज को यह सम?ाने की कोशिश की गई थी कि फैमिली प्लानिंग इस तरह से हो कि हमारा एक लड़का और एक लड़की हो. कुछ सालों बाद लोग जागरूक हुए और अब ‘एक ही बेटा या बेटी’ की प्लानिंग होने लगी है.

एक वर्ग ऐसा भी है जो ‘नो किड्स, डबल इनकम’ की धारणा पर चल रहा है. ऐसे लोग शादी तो करना चाहते हैं पर बच्चे नहीं पैदा करना चाहते. इन से भी दो कदम आगे कुछ ऐसे लोग भी हैं जो शादी ही नहीं करना चाहते. राहुल गांधी, सलमान खान जैसे बहुत सारे लोग ऐसे ही हैं. इस का समाज पर असर पड़ रहा है. फैमिली प्लानिंग के चक्कर में भारत ही नहीं, दूसरे तमाम देश भी आ गए हैं जहां अब जनसंख्या तेजी से घट रही है. आने वाले 50 सालों में वे देश मुश्किल में आने वाले हैं. इस की चिंता वहां की सरकारें करने भी लगी हैं. वे अब ज्यादा बच्चे पैदा करने की योजना पर काम कर रही हैं. भारत में भी 50 सालों के बाद ऐसे हालात दिखने लगेंगे. खत्म होते रिश्तों के साथ तालमेल कैसे बैठाएं यह तो सच है कि फैमिली प्लानिंग के चक्कर में कुछ रिश्ते खत्म होने की कगार पर पहुंच गए हैं.

संयुक्त परिवार खत्म हो गए हैं. परिवार के घटने से सहयोग करने वालों की संख्या घट गई है. इस का एक ही विकल्प सामने है कि अब हम समाज में रिश्ते बनाएं. दोस्तों में नजदीकियां तलाशें. वैसे भी जब हम अलगअलग शहरों में रहने लगे हैं तो यहां हमारे घर के लोगों की जगह हमारे पड़ोसी हमारे सब से बड़े मददगार होने लगे हैं. एक जगह पर रहतेरहते हमारे तमाम दोस्त बन जाते हैं. यही हमारी जरूरत पर सब से पहले काम आते हैं. यह कहा जाता है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है. वह समाज में रहता है. हमें समाज में रहना, आपसी दूरियां, भेदभाव और मनमुटाव खत्म कर के भरोसा और विश्वास पैदा करना होगा. करीबी रिश्तों में एक जिम्मेदारी का भाव होता है.

यहां मदद को जिम्मेदारी सम?ा जाता है. दोस्त को मदद में जिम्मेदारी की जगह पर सहयोग सम?ा जाता है. इस का अर्थ यह होता है कि जैसी मदद आप अपने दोस्त की करेंगे वैसी ही मदद की उम्मीद आप उस से कर सकते हैं. दोस्ती में इस को सम?ों. आप को अपने दोस्त की मदद उस की जरूरत पड़ने पर करनी होगी. अगर आप उस की मदद नहीं करेंगे तो उस से मदद की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. रिश्तों में अपवाद को छोड़ दें तो लोकलाज और सामाजिक दबाव ही सही, रिश्तेदार मुसीबत में साथ खड़े जरूर होते हैं. बदलते समाज में दोस्त एक नई जरूरत है. इस बात को सम?ाने की जरूरत है. इस के अनुकूल ही व्यवहार करने की जरूरत है. दोस्तों के बीच संबंधों को ले कर बेहद सतर्क रहने की भी जरूरत होती है. उन के सुख और दुख में शामिल रहें. जब हम दोस्तों की बात करते हैं तो यह ध्यान रखें कि फेसबुक और सोशल मीडिया के जो फ्रैंड्स होते हैं, हम उन को दोस्त न मान लें.

कई लोग ऐसी गलती करते हैं और फिर डिप्रैशन में चले जाते हैं यह सोच कर कि उन के 5 हजार दोस्तों में से जरूरत पड़ने पर 5 दोस्त भी मदद करने नहीं आए. द्य रिश्तेदारों जैसे बनाएं दोस्त द्य सोशल मीडिया जैसे नहीं, रिश्तेदारों जैसे दोस्त बनाएं. द्य आपस में जरूरी तालमेल रखिए, एकदूसरे की मदद कीजिए. द्य केवल मदद ही नहीं, उन की खुशी के पलों में भी शामिल रहिए. द्य आर्थिक मदद लेने और देने में खयाल रखें, रिश्ते यहीं टूटते हैं. द्य कई बार दोस्ती में लोग मदद मांगने में संकोच करते हैं. ऐसे में बिना मांगे मदद देने का प्रयास करें. द्य अगर कोई बात ऐसी है जो आपस में दरार डालने का काम कर रही है तो उस को आपसी बातचीत से हल कर लें. द्य दोस्ती रिश्तेदारी से भी नाजुक होती है, इस बात का खयाल रखें. इस की केयर उसी तरह से करें. द्य रिश्तेदारी टूट कर जुड़ भी जाती है, रिश्तेदार आपसी विवाद भूल भी जाते हैं. लेकिन दोस्ती में पड़ी दरार को मिटाना कठिन होता है.

Diwali 2022: इस बार दीवाली पर कैसे रहें फिट

फिट रहना सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है और कोई भी इससे कोई भी समझौता करना नहीं चाहता है. आप चाहे  जितना व्यस्त हों, त्योहारों से घिरे हों पर फिटनेस से समझौता नहीं करना चाहिए. यहां कुछ ऐसे तरीके बताए जा रहे हैं जिससे आपको दीवाली के त्योहारी मौसम में भी फिट रहने में मदद मिलेगी. इस बारे में बता रहे हैं क्लिनिक ऐप्प के सीईओ, श्री सतकाम दिव्य.

साल का वह समय फिर आ गया है जब आप स्वादिष्ट मिठाइयों और खाने की चीजों से घिरे रहेंगे. पर जिन लोगों को डायबिटीज है उन्हें दीवाली में मिठाइयों से बचना मुश्किल लग सकता है. ऐसे लोग स्वादिष्ट मिठाइयों की खुश्बू से कैसे बचें.

ये उपाय डायबिटीज के मरीजों के साथ उन सभी लोगों की सहायता करेंगे जो ज्यादा कैलोरी नहीं लेना चाहते हैं.

अपने आहार पर नियंत्रण रखिए

डायबिटीज को नियंत्रित रखने की कुंजी समय तय करना और डायबिटिक डायट लेना है. कार्बोहाइड्रेट्स और मोटापे वाली खाने की चीजों की एक सूची बनाइए. इसमें अपने शरीर की आवश्यकता और आयु का भी ख्याल रखिए. हर दिन की कैलोरी का हिसाब रखिए और उस संख्या से आगे मत बढ़िए. इस चार्ट को तैयार करने के लिए आप डायबिटिक डायट के शाश्वत नियमों की सहायता ले सकते हैं.

अपने भोजन में मैदा और चीनी से बचिए

दीवाली के दौरान ज्यादा खा लेना आम है. इसलिए, अपने आहार को नियंत्रित रखने के लिए आपको खाने की वैसी चीजों से बचना चाहिए जिसमें मैदा और चीनी हो. इन चीजों का आपके शरीर पर बुरा असर हो सकता है और आपके डायट चार्ट को असंतुलित कर सकता है. त्यौहारों के समय लोग अपनी खाने की आदतों का ख्याल रखना भूल जाते हैं. आप क्या खा रहे हैं उसपर नजर रखने की कोशिश कीजिए.

मिठाइयां घर में बनाइए

दीवाली पर या किसी भी त्यौहार के मौके पर मिठाइयां घर में बनाना सबसे अच्छा आईडिया है. यह बाजार से खरीदी गई मिठाइयों की तुलना में बहुत स्वास्थ्यकर होता है. यही नहीं, आप ताजा और हाइजेनिक भोजन भी करेंगे. आप इनमें चीनी की मात्रा कम रख सकते हैं या फिर शुगर फ्री का उपयोग कर सकते हैं. पसंद आपकी. अपनी पाक विधियों में पौष्टिक और स्वादिष्ट मेवे डालना न भूलें.

अकेले न खाएं

ज्यादा खाने से बचने का सबसे अच्छा और आसान तरीका है कि खाने वाले आयटम छोटे रखे जाएं और समूह में खाया जाए. दूसरे के साथ अपना खाना साझा करने से आपको कम या थोड़ा लेने में मदद मिलेगी और इस तरह आप ज्यादा नहीं खाएंगे. मुमकिन है यह तरीका आपको अच्छा न लगे पर अंत में आपको अपेक्षित नतीजा अच्छा मिलेगा.ऑनलाइन उपलब्ध स्वादिष्ट पाकि विधियों से छोटे आकार की मिठाइयां बनाइए. स्वादिष्ट पाकविधियों से आप जितनी अच्छी चीजें बनाएंगे खाने का मन उतना ही ज्यादा करेगा. खाना पकाने के अपने कौशल से प्रिय लोगों को चौंकाइए पर मिठाइयों का आकार छोटा रखिए. इससे आप ज्यादा नहीं खाएंगे.

अपने ग्लूकोज स्तर की जांच कराइए

अपने शुगर लेवल की जांच का सबसे अच्छा तरीका है उसपर नजर रखना और समय-समय पर उसकी जांच करना. अगर आपको दिखे कि चीनी का स्तर बढ़ रहा है तो मीठा खाना तुरंत बंद कर दीजिए. दीवाली से एक दिन पहले अपने स्वास्थ्य की निगरानी शुरू कर दीजिए और एक हफ्ते तक इसे रोज जारी रखिए.

शारीरिक गतिविधि भी जोड़िए

दीवाली के दौरान, थोड़ा ज्यादा सक्रिय हो जाइए और शारीरिक व्यायाम बढ़ा दीजिए. उदाहरण के लिए लिफ्ट की बजाय सीढ़ियां चढ़िए या फिर मित्र के पास अथवा बाजार जाना हो तो पैदल चले जाइए. इससे खाद्य पदार्थों को पचाने में सहायता मिलेगी. यही नहीं, खाने के बाद भारी महसूस नहीं होगा. हर दिन की इन गतिविधियों से आप ज्यादा कैलोरी जला पाएंगे और कैलोरी की मात्रा को आसानी से संतुलित कर लेंगे.

शराब पीना सीमित करें

शराब कई कारणों से शरीर के लिए स्वास्थ्यकर नहीं है. स्वस्थ रहने के लिए, शराब के सेवन से बचिए और सिर्फ सीमित मात्रा में लीजिए. खासकर तब जब आप डायट के प्रति जागरूक हों और अपने स्वास्थ्य से समझौता करना नहीं चाहते हों. मामूली उपेक्षा भी आपके शरीर की क्षमता कम करती है और सेल्यूलोज को तोड़ देगी जिससे डायबिटीज में हाइपोग्लाइसेमिया होता है.

यह शरीर के अंदर शुगर लेवर का उत्पादन रोक देता है और हाइपोग्लाइसेमिया के महत्वपूर्ण लक्षणों को छिपा देता है जो भूख लगने, पसीना आने और कंपकपी के कारण सामने आते हैं.

अच्छी नींद सोइए

त्यौहारों के मौसम में अक्सर देर रात तक मिलना-जुलना चलता रहता है और मस्ती मनोरंजन के चक्कर में आपको देर तक जगे रहना पड़ सकता है. देर तक जगे रहने से संभव है कि आपकी नीन्द पूरी न हो और इसका असर मेटाबोलिज्म पर हो सकता है. इस स्थिति से बचने का बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि छह से सात घंटे अच्छी तरह सोएं. इससे अगले दिन जब आप जगेंगे तो तरोताजा महसूस करेंगे और त्यौहारों की मस्ती जारी रख सकेंगे.

रात का अपना खाना जल्दी बना लीजिए

त्यौहारों के मौसम में हर कोई मुख्य रूप से त्यौहारों के लिए व्यंजन तैयार करने में लगा रहता है और रात के लिए अच्छा खाना बनाना भूल जाता है. दिन के लिए आप कृत्रिम स्वीटनर के साथ खाने की चीजें बना सकते हैं और शाम के लिए स्वस्थ भोजन तैयार कीजिए.

अतिरिक्त उपाय :

अपने आस-पास का परिवेश साफ रखिए

दीवाली में पटाखे चलाने से बचिए. अगर पटाखें चलाना ही चाहें तो सुनिस्चित कीजिए कि आप अपना चेहरा ढंग से. नाक मुंह को भी ढंक लीजिए. छोटे पटाखे से भी हवा की गुणवत्ता खराब होती है. इसलिए, अगर आप पहले ही अस्थमा (दमा) के शिकार हैं या सांस लेने की दिक्कत है तो चेहरे के साथ मुंह और नाक को ढंकना ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है.

उम्मीद है, उपरोक्त तरीकों से आपको दीवाली के दौरान फिट रहने में सहायता मिलेगी त्यौहारों का मतलब होता है साथ रहना और स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेना. इसीलिए आपको डायट पर नजर रखने की जरूरत है और ऐसी कोई भी चीज ज्यादा नहीं खाइए जिससे आपको जीवन भर परेशानी हो.

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