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सपने देखने वाली लड़की : क्या गहरी खाई की ओर बढ़ रही थी शिप्रा ?

देवांश उसे दूर से एकटक देख रहा था. देख क्या रहा था,नजर पड़ गई और बस आंखें ही अटक गई उसपर !विश्वास नहीं होता – यह वही है या उस जैसी कोई दूसरी?

मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल  स्टेशन पर पीठ पर एक बैग लादे वह अकेली खड़ी है !

देवांश का ध्यान अपने काम से भटक गया था.सवारी गई तेल लेने! पहले यह शंका तो निवारण कर ले! बिहार के समस्तीपुर से यहां मुंबई में अकेले! लग रहा है,अभी अभी ट्रेन से उतरी है.

चाहता है उसे अनदेखा कर सवारी ढूंढे, कहीं वह नहीं हुई तो थप्पड़ भी पड़ सकता है.

आजकल की स्टंटमैन लड़कियां! देवांश इनसे दूर ही रहता है!

लेकिन अगर वही हुई तो? यह जरूर उसका फिर नासमझी में उठाया  गया कदम होगा !

वह इसके घरवालों को जानता है, वे ऐसे बिलकुल नहीं कि बेटी को अकेले मुंबई आने दें! इसके पापा का साइकिल में हवा भरने, पंक्चर बनाने की एक छोटी सी दुकान है. एक बड़ा भाई है जो पहिए वाले ठेले पर माल ढुलाई करता है. इससे दो बड़ी बहनें हैं जिनकी जैसे तैसे शादी हुई थी.

आज से पांच साल पहले जब देवांश मुंबई भाग आया था तब यह शायद बारह साल के आसपास की रही होगी.उस वक्त देवांश बीस वर्ष का था. शिप्रा उस समय सरकारी स्कूल में पढ़ रही थी .सजने का बड़ा शौक था  इसे. इस कारण हरदम इसकी मां इस पर टिक टिक करती रहती.दुकान से लगे छोटे से घर में ये अपने भाई, मां, पप्पा के साथ रहती थी .

अब तक वह इधर उधर देखती ,कुछ सोचती, थोड़ा थोड़ा चलती देवांश से अनजान उसकी ओर ही बढ़ी चली आ रही थी.

देवांश भी अब तक उसके नजदीक आ चुका था.

“तुम शिप्रा हो न? यहां कैसे?”

पहले शिप्रा ने खुद को छिपाने का प्रयत्न किया लेकिन देवांश का अपनी बात पर भरोसा देख उसे मानना पड़ा कि वह समस्तीपुर के फुलचौक की शिप्रा ही है.

अपनी बात को टालने की गरज से शिप्रा ने प्रतिप्रश्न किया – “तुम यहां कैसे?”

“बीस साल की उम्र में मुंबई भाग आया था. हीरो बनना था. सालभर खूब एड़ियां घिसी, फिल्मी स्टूडियो के बाहर कतारें लगाई, प्रोड्यूसर डायरेक्टर के पीछे भागता रहा, लेकिन रात ?

वह तो पिशाचिनी की तरह भूखी प्यासी मुझे निगलने को आती थी.

स्टूडियो के बाहर नए लड़के लड़कियों की इतनी भीड़ कि कौन किसे पूछे? उनमें जिनके पहचान के  निकल जाते, उन्हें  किसी तरह अन्दर जाने का मौका मिल जाता.लेकिन इतना तो काफी नहीं होता न! मंजे हुए कलाकारों के सामने खड़े होने की भी कुबत कम लोगों में ही होती है! फिर गिड़गिड़ाना भी आना चाहिए, इज्जत पर बाट लगाकर काम के लिए हाथ फैलाना भी आना चाहिए! मैंने तो साल भर में हाथ जोड़ लिए! मेरा औटो जिंदाबाद! पहले भाड़े पर लेकर चलाता था, अब अपना है, मीरा रोड पर अपनी खोली भी है!  मगर तुम यहां क्यों आ गई? बारहवीं बोर्ड दिया?” एक साथ इतनी बातें कहने के पीछे देवांश की एक ही मंशा थी कि वो मुंबई की जिंदगी और अपने सपनों की वास्तविकता को समझे!

“देकर ही आई हूं! मुझे एक हीरो से मिलना है, उसके साथ मुझे हीरोइन का रोल करना है! मै ठान कर आई हूं, हार नहीं मानूंगी.”

अब तक शिप्रा अपने नए स्मार्ट फोन पर किसी का नंबर ढूंढने में लगी थी.

देवांश ने कहा-” तुम्हारे पप्पा मेरी साइकिल कई बार ऐसे ही ठीक कर दिया करते थे .कुछ तो मेरा भी फर्ज बनता है, अपने जगह की हो, कहां मारी मारी फिरोगी! अच्छा हुआ जो मै तुम्हे मिल गया! चलो मेरे घर. वहीं रहकर काम ढूंढ़ लेना.”

इस बीच शिप्रा की उससे बात हो जाती है जहां वह फोन लगा रही थी. बात समाप्त होते ही शिप्रा का रुख थोड़ा बदल सा जाता है. वह अब जल्दी निकलना चाहती है.

“देवांश जी मुझे जल्दी निकलना होगा, हरदीप जी से बात हो गई, उन्हीं के कहने पर यहां आई हूं . वे मुझे अपने स्टूडियो में बुला रहे हैं, इंटरव्यू करेंगे, और फोटो शूट भी!”

“ये सब पक्का है? देखो, मुंबई है ,सही गलत की पहचान जरूरी है, ठगी न जाओ!”

“देवांश जी मुझे अभी जाना है, आपको बाद में बताऊंगी .

आप भैया के साथ स्कूल पढ़े हो, मेरे घरवालों को पहचानते हो, अभी कुछ बताना मत उन्हें, पता चला तो मेरी जबरदस्ती शादी कर देंगे. मै बड़ी स्टार बनना चाहती हूं, दीदियों की तरह गृहस्थी में अभी से नहीं पीसना मुझे!”

जाना कहां है? चलो छोड़ देता हूं तुम्हे.”

“करजत नाम की कोई जगह है- वहीं कहीं बता रहे हैं”

“मेरा फोन नंबर रख लो, रात को वापिस आ जाना, अपना नंबर दे दो, मै अपना पता तुम्हे लिख भेजूंगा. मुंबई अनजान नई लड़कियों के लिए ठीक नहीं, शोषण हो सकता है!”

“मुझे जल्द पहुंचाइए देवांश जी, कहीं देर न हो जाए!”

औटो भीड़ को काटते जैसे तैसे गंतव्य की ओर दौड़ रहा था.

शिप्रा को अपने सपनों के आगे जिंदगी की चुनौतियां तुच्छ नजर आ रही थी.देवांश समझ चुका कि यह चट्टानों से टकराए बिना नहीं मानेगी.

देवांश भी तो ऐसा ही था. कितनी रातें उसने आंखों में काटी, कितने दिन फाकों में! और जब काम मिलने को हुआ तो जैसे सर दीवार से जा टकराया! गीगोलो! अमीर औरतों के ऐश के लिए खरीदा गया गुलाम; उसे धोखा देकर ले जाने की पूरी तैयारी हो चुकी थी कि अचानक जैसे उसे दो कदम पीछे आकर फिर से सोच लेने की मति आई, उसके तो होश ही उड़ गए! किसी तरह बच कर निकला था वह! औटो दौड़ाते वह बेचैन हो गया.

लड़की को पता नहीं कहां पहुंचाने जा रहा है वह!

“हरदीप जी को कैसे जानती हो?”

“फेसबुक से, मेरी सुन्दरता देख उन्होंने फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी. बाद में मुझे समझाया कि मै आसानी से हीरोइन बन सकती हूं अगर किसी तरह मुंबई पहुंच जाऊं!  वे मुझे स्टार बना देंगे. जोखिम तो लेना पड़ता है सपने पूरे करने के लिए!”

“पैसे हैं तुम्हारे पास?”

“घर में रखे दो हजार उठा लाई हूं, मां के चांदी के पायल भी,जब तक चले, फिर तो रुपए मिल ही जाएंगे.”

“कई बार नई लड़कियों का शोषण होता है, सावधान रहना!”

मतलब?”

“कोई तुम्हारा नाजायज फायदा उठा कर तुम्हे ठग सकता है,जैसे कोई कहे कि हम तो तुम्हे नाम पैसा सब देंगे, बदले में तुम क्या दोगी,तो -”

” जो कहेंगे वही करने का कहूंगी!”

“अरे! तुम्हारी उम्र कितनी है! तुम्हे समझ नहीं आती क्या बात!”

“अठारह साल!”

” छोड़ो, इससे आगे और क्या क्या समझाऊं तुम्हे! अगर रात को वापिस मेरे पास आने का मन हो तो फोन कर लेना मुझे.”

उस रात तो क्या महीने भर देवांश को शिप्रा का पता नहीं लग पाया.

और एक रात अभी वह अपने कमरों की बत्ती बुझाकर सोने चला ही था कि उसके दरवाजे पर किसी ने आवाज दी .

थोड़ा झल्लाया, दिन भर के खटे मरे, नींद से बोझिल आंखों में स्वागत सत्कार का आल्हाद कहां से लाए? झल्लाहट में दरवाजा खोला और सामने शिप्रा को देख अवाक रह गया.

सुंदर सजीली,एक ही नजर में भा जाने वाली लडकी जैसे अचानक कोयले के खदान से उठ आई हो! आंखों के नीचे गहरी कालिख!तनाव से चेहरा सूखा सा! विषाद के गहरे बादल जैसे अभी बरस पड़ेंगे!

“आओ आओ, फोन कर देती तो लेने चला आता! कहां रही अब तक?

“अंदर आ जाने दो देवांश जी! सब बताती हूं!”

पहले से  ज्यादा समझदार लगी शिप्रा.

रात के दस बज रहे थे, देवांश ने अपना डिनर ले लिया था.सो उस ने बिहारी स्टाईल में दाल भात आलू चोखा ,पापड़, सलाद लगाकर शिप्रा को खिलाया, और  अपने छोटे से पलंग पर उसका बिस्तर लगा दिया.

देवांश बगल वाले छोटे कमरे में अपनी खटिया बिछा कर अभी जाने को हुआ कि शिप्रा ने उसकी कलाई पकड़ ली.

“यहीं इसी कमरे में सो जाओ.अलग मत सोओ !”

“अरे क्यों ?” देवांश को आश्चर्य हुआ.

शिप्रा ने अपना सर झुका लिया.

“कहो!” देवांश ने जोर दिया.

रात कोई दूसरे कमरे से आकर मुझ पर सोते वक्त हमला न कर दे इसका डर लगता है, अच्छा है कोई साथ ही सो रहे, किसी के दरवाजे खोल कर अंदर आ जाने के डर से मै रात को सो ही नहीं पाती!”

“क्या हुआ था, मुझे बताओ, मै तुम्हारा हर डर दूर कर दूंगा .”

उसके स्नेह भरे स्वर में अपनेपन की ऐसी आश्वस्ति थी कि शिप्रा का तनाव कुछ कम होने लगा.

देवांश के पलंग पर दोनो आसपास बैठे थे, शिप्रा कहने लगी-”

उस दिन प्रोड्यूसर हरदीप जी के स्टूडियो के बाहर वेटिंग हौल में रात के आठ बजे तक बैठी मै इंतजार करती रही, आपने मुझे वहां करीब दोपहर के एक बजे छोड़ा था. सोच रही थी आपको फोन कर ही लूं, कि पियोन आकर मुझे बुला ले गया. मुझे एक आलीशान बड़े से कमरे में ले आया वह. यहां सोफे से लेकर पलंग तक सब कुछ मेरी कल्पना से परे की बेहतरीन चीजें थीं.सब कुछ अब जैसे जल्दी होने लगा था. मै घबराई भी थी और उत्सुक भी!

बाहर से मै लौक कर दी गई थी, मुझे अच्छा नहीं लगा, मगर इंतजार करती रही.

कुछ देर बाद हरदीप जी आए.पचपन के आसपास की उम्र होगी उनकी .आराम से बात की, मुझे कुछ छोटे विकनी टाईप के कपड़े दिए और उसे पहन कर आने को कहा. मै झिझक गई, तो आंखें इस तरह तरेरी कि मुझे बदलने जाना पड़ा .बाथरूम से वापिस आई तो देखा तीन लोग शूट के लिए आ पहुंचे थे. जैसा कहा गया वैसा कर दिया, शूटिंग पूरी होने पर  हरदीप जी ने मुझसे कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करवाये. बाकी लोगों के जाने के बाद हरदीप जी ने मुझे नजदीक बिठा कर शाबासी दी और उनके साथ सहयोग करने पर जल्द मुझे स्टार बनाकर मेरे पसंद के हीरो के साथ रोल देने का वादा किया. डिनर आ गया था, और वो बहुत लाजवाब था. हरदीप जी को मैंने अनुरोध किया कि वे बाहर से दरवाजा मत लगाएं,”

“ये तुम्हारा मामला नहीं है” कहकर वे बाहर से बन्द कर चले गए.

फिर ये सिलसिला चल निकला . कभी बाहर भी शूट को ले जाते तो उनकी वैन में, काम ख़तम होते ही मुझ पर ताला जड़ दिया जाता. कितना भी समझा लूं,  वे मुझे सांस लेने की इजाजत नहीं देते!”

“सोते हुए तुम पर कभी हमला हुआ था? क्या वजह है तुम्हारे डर की?”

“यूं तो जैसे मै उनकी खरीदी गुलाम थी. कभी साज सज्जा के नाम पर, कभी दृश्य और संवाद के कारण वे सभी मेरी देह को खिलौना ही समझते. लेकिन इसके बाद की वो रात मेरे लिए बुरा सपना था! मुझे सपनों से डर लगने लगा है!”

“कहोगी क्या हुआ था?”अनायास ही अधिकार का स्वर मुखर हो गया था देवांश में, लेकिन वह तुरंत संभल गया.

“इस तरह उनके कहे पर उठते बैठते बीस दिन हो गए थे. थकी हारी रात को मै सो रही थी.मध्य रात्रि में जैसे मेरे कमरे को किसी ने बाहर से खोला, मुझे अंदर से बन्द करने की सख्त मनाही थी.

नींद में होने की वजह से जब तक संभल पाती किसी ने अजगर की तरह मुझ पर कब्जा कर लिया, मै उसके पंजो में छटपटाती सी शिथिल पड़ गई. फिर तो यह सिलसिला ही चल पड़ा. लेकिन सुबह सब कुछ सामान्य रहता  जैसे किसी को कुछ मालूम ही न हो. मै पागल सी होने लगी. मै वहां से निकलना चाहती थी, हरदीप जी से कहा तो सबके सामने मेरा कांट्रैक्ट पेपर दिखा दिया. मुझे हस्ताक्षर करते वक़्त उसे पढ़ना चाहिए था. तीन महीने के मुझे पचास हजार मिलने थे,और एक दिन भी पहले छोड़ना चाहूं तो प्रति दिन दो सौ के हिसाब से जितना बने. मेरे सपनों पर काली स्याही फैल गई थी, मै स्टार बनने के लिए  तिल तिल कितना मरती! शायद पचास हजार का शिकंजा कसकर वे कई को रोक रखते थे और मनमानी करते थे, मुझे लगा आखिर तक शायद वे खुद ही ऐसे हालात पैदा कर दें कि मै तीन महीने से पहले ही छोड़ने को बाध्य हो जाऊं! फिर क्यों नहीं अभी ही निकल जाऊं! मैंने तय किया कि अब और नहीं!

मुझे उन्होंने छह हजार पकड़ा दिए, और मै अपना सबकुछ खो कर निकल आई.”

सब कुछ खोकर से क्या मतलब है तुम्हारा? क्या तुम इज्जत की बात कर रही हो? तुमने आगे बढ़ने और सपनों को पूरा करने के लिए जोखिम उठाया, इस जोखिम उठाने को इसलिए गलत नहीं कह सकते क्योंकि तुम एक लड़की हो और सपने बेचने वाले लोग गिद्ध है ! वे जो गिद्घ बने बैठे हैं, उन्हें अपनी इज्जत बचाने के लिए सभ्य होना चाहिए! हां तुम्हारी गलती इतनी है कि जब तुम्हे मैंने आगाह किया, सतर्क होने को समझाया तुमने अपनी धुन में मेरे अनुभव को तवज्जो नहीं दी, सपने देखना और उसके पीछे दौड़ना फिर भी आसान है, लेकिन सपनों को हकीकत में बदलने के लिए जुनून के साथ धीरज की जरूरत होती है, और यह जरा कठिन है!”

“क्या मुझे वापिस समस्तीपुर जाना चाहिए?”

“क्यों? जीवन में कुछ अच्छा सोचने के लिए देहरी तो लांघना ही पड़ता है. मुझे सपने देखना पसंद है, और सपने देखने वाली लड़की भी! अब चलो शुरू से शुरू करते हैं. तुम्हे अब आगे बढ़ाने में मै मदद करूंगा. जिंदगी मसाला चाय नहीं – कि बना और पीया, सपने अच्छे हैं, लेकिन उन्हें हासिल करने में समझदारी चाहिए! समझी !”देवांश ने उसकी आंखों में अपने नजर की मुस्कुराहट बिखेर कर हलके से शिप्रा की हथेली को दबाया. विश्वास और संवेदना से भरी लजाती सी मुस्कान शिप्रा के दिल का हाल बता रही थी.

“सपने पूरे हो जाएं और मुझे भी अपनी जिंदगी में शामिल करना चाहो तो बन्दा हमेशा हाजिर है ! कभी बता नहीं पाया मगर हमेशा चाहता था कि तुमसे दोस्ती हो जाय!”देवांश मन को धीरे धीरे खोल रहा था.

“देवांश तुम जैसे प्यारे इंसान क्या सचमुच के होते हैं? क्या यह भी तो कोई सपना नहीं ! ”

शिप्रा ने देवांश के कंधे पर अपना सर टिका दिया था.मन का बोझ पिघलने लगा था.सपने देखने का अपराध बोध जाता रहा, शिप्रा फिर से हसीन सपनों को सच करने का सपना देखने लगी थी.

राजनीति की रामायण में हेमंत सोरेन के बाद किस का नंबर

निर्माता रामानंद सागर के धार्मिक धारावाहिक ‘रामायण’ के एक दृश्य में रावण का दरबार लगा है. चर्चामंत्रणा इस बात पर हो रही है कि एक मामूली बंदर आखिर कैसे सोने की लंका जला गया. होतेहोते बात विभीषण पर होने लगती है कि आखिर उस का भवन कैसे बच गया. हनुमान ने उसे नुकसान क्यों नही पहुंचाया. रावण का बेटा मेघनाथ शक जाहिर करता है कि काका विभीषण, राम से मिले हुए हैं. उलट इस के, रावण का ससुर माल्यवान दामाद को समझाता है कि युद्ध खत्म कर दिया जाए क्योंकि जब राम का दूत इतना शक्तिशाली है तो खुद राम कितने ताकतवर होंगे. इस का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.

रावण नहीं माना लेकिन समझने वालों को यह समझ आ गया कि चूंकि विभीषण के महल में राम नाम की सिक्योरटी प्लेट लगी थी, उस के लौन में तुलसी का पौधा लगा था, और तो और, उस के घर विष्णु के पवित्र चिन्ह, मसलन शंख, गदा और चक्र भी थे, इसलिए हनुमान ने उसे बख्श दिया.

कलियुग की लोकतांत्रिक रामायण का ताजा पहलू यह है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बच गए हैं. हनुमानरूपी ईडी से बचने के लिए उन्होंने सीधे सरकार की शरण ले ली और धर्मभतीजे तेजस्वी को बलि के बकरे की तरह आगे कर दिया है. अपनी निष्ठा जताने को उन्होंने ताजा बयान यह दिया है कि राहुल गांधी बेतुके और निराधार बयान दे रहे हैं. जातिगत जनगणना का आइडिया कांग्रेस का नहीं बल्कि हमारा था. असल में अपनी न्याय यात्रा के बिहार में दाखिल होते ही राहुल ने नीतीश की दुखती रग पर हाथ यह कहते रख दिया था कि हम समझ सकते हैं कि उन पर दबाव था.

यह दबाव सरकार दूत अतुलित बलधामा ईडी का था या कोई और बात थी या कोई और डील हुई है, यह राम जाने लेकिन अजब इत्तफाक यह था कि नीतीश के अपने आंगन में तुलसी का पौधा रोपते ही पूरे लालू कुनबे पर बलधामा की गाज गिरी. इन दिनों देश की राजनीति में रामायण का सा मंचन हो रहा है. संसद जय श्री राम के नारों से गूंज रही है. स्कूल, कालेजों, बसों और मेट्रो रेल तक में राम आएंगे तो अंगना सजाऊंगी वाला भजन गाया जा रहा है. दूसरी दीवाली तो 22 जनवरी को धूमधाम से मन ही चुकी है.

ताज़ी खबर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की है जिस ने बजट की खामियों को ढक दिया है क्योंकि बजट में खूबी तो कोई होती नहीं और खामियों को नजरअंदाज करने की आदत अब अभक्तों को भी पड़ गई है. हेमंत सोरेन का गुनाह क्या था और कुछ है भी या नहीं, इस से किसी को कोई मतलब नहीं. यह मान लिया गया है कि समूचा विपक्ष (नीतीश जैसों को छोड़ कर) आसुरी टाइप का है, इसलिए उसे सत्ता तो सत्ता, कहीं भी रहने का अधिकार नहीं. उस की जगह जेल में है, सो एकएक कर सभी की मुश्कें कसी जा रही हैं जिस से रामराज्य की स्थापना में आड़े आ रहे जनता द्वारा चुने गए ये अड़ंगे साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल करते दूर किए जा रहे हैं.

हेमंत सोरेन का असल गुनाह यह है कि वे आर्य संस्कृति से इत्तफाक नहीं रखते, वे आदिवासियों को हिंदू नहीं मानते और वे पोंगापंथ के भी हिमायती नहीं हैं, इसलिए उन्हें भी सबक सिखाया जा रहा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि कविताओं और शेरोशायरी के जरिए आत्मविश्वास दिखा रहे हेमंत के इरादे हेमंत ऋतू तक भी टिक पाते हैं या नहीं. हालफ़िलहाल लग तो रहा है कि वे नीतीश कुमार की तरह डर कर समझौता नहीं करेंगे.

रामायण मंचन का एक दृश्य चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भी देखने को आया. त्रेतायुग में जब राम ने बाली को धोखे से मारा था तब उस ने राम पर आरोप लगाते पूछा था कि राम, तुम तो भगवान हो, फिर तुम ने मुझे छल से क्यों मारा. उस ने तो राम को कपटी और अधर्मी तक कह दिया था. रामायण के एक श्लोक में वह कहता है-

न त्वामं विनिह्त आत्माम धर्म ध्वजम अधार्मिकम,

जाने पाप समाचारम तृने कृपम इव आवृतम.

अर्थात, मुझे ज्ञात नहीं था कि आप की आत्मा को मार डाला गया है. मुझे ज्ञात नहीं है कि आप धर्म के अधर्मी ध्वजवाहक हैं, मुझे ज्ञात नहीं है कि आप अच्छी तरह से ढके हुए भूसे की तरह कपटी हैं.

दम तोड़ते बाली ने कई बार राम को राघव कह कर सवाल पूछे हैं लेकिन आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्डा मीडिया के सामने बाली की तरह बता और पूछ रहे थे कि भाजपा ने देशद्रोह किया है. फर्जीवाड़े से हुई जीत कोई माने नहीं रखती. चंड़ीगढ़ मेयर चुनाव में भाजपा के मनोज सोनकर को 16 और इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को महज 12 वोट मिले. क्योंकि आप कांग्रेस के 8 पार्षदों के वोट पीठासीन अधिकारी ने अवैध घोषित कर दिए थे. इस बाबत उन्होंने वह वीडियो भी मीडियाकर्मियों को दिखाया जिस में भाजपा अल्पसंख्यक मोरचे के पदाधिकारी रहे पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह कैसे भाजपा के मसीहा बनते आप व कांग्रेस के पार्षदों के वोट पर स्याही लगा रहा है.

मासूम राघव चड्डा के मुताबिक, भाजपा जब मेयर चुनाव में खुलेआम धांधली कर रही है तो आम चुनाव जीतने के लिए क्याकुछ नहीं करेगी. हकीकत वे भी जानतेसमझते हैं कि सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा कुछ भी कर सकती है. हालफ़िलहाल तो वह चुनचुन कर विरोधियों को ईडी वगैरह के जरिए अंदर कर रही है जिस से नरेंद्र मोदी के चक्रवर्ती सम्राट बन जाने के अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा पकड़ने की जुर्रत कोई न करे. लोग खुद से ताल्लुक रखते मुद्दे बजट पर सवाल नहीं कर रहे. उन की उत्सुकता इस बात में है कि हेमंत सोरेन के बाद अब कौन तेजस्वी यादव या पहले अरविंद केजरीवाल या कोई और.

राहुल गांधी सरकार पर यह कहते हमलावर हैं कि भ्रष्टाचार में डूबी भाजपा सत्ता की सनक में लोकतंत्र को तबाह करने का अभियान चला रही है. जो प्रधानमंत्री के साथ नहीं गया वह जेल जाएगा. हेमंत सोरेन को इस्तीफ़ा देने को मजबूर करना संघवाद (आरएसएस वाला संघवाद नहीं) की धज्जियां उड़ाने जैसा है. इस लिहाज से तो नीतीश कुमार ने गलत कुछ नहीं किया बल्कि समझदारी दिखाई है कि कौन बुढ़ापे में जेल की चक्की पीसे, उस से तो बेहतर है कि जनता की सेवा करो, राम नाम भजो, उसी में सार और मोक्ष है.

देश गर्त में जाए, तो जाता रहे. लोग दिमागीतौर पर गुलाम होते हैं, तो होने दो. पैसा चंद हाथों में सिमट रहे, तो सिमटने दो. इन में और इन से हमारा क्या बिगड़ रहा है. जब जनता खुद अपने पांव पर कुल्हाड़ी मार रही है तो भुगतेगी भी खुद. अब कोई जयप्रकाश या अन्ना हजारे पैदा नहीं हो रहा तो इस में किसी का क्या दोष. जब अधर्म, पाप और अत्याचार हद से ज्यादा बढ़ जाएंगे तब प्रभु स्वयं अवतार लेंगे.

वैसे, माहौल तो यह कहता है कि भगवान अवतार ले चुके हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकर्जिन खड़गे कुछ दिनों पहले ही देहरादून से कह चुके हैं कि नरेंद्र मोदी खुद को विष्णु का 11वां अवतार समझते हैं. वे चाहते हैं कि लोग हर सुबह देवताओं या गुरुओं के बजाय केवल उन के चेहरे पर ध्यान केंद्रित करें.

इस में कोई शक नहीं कि आसन्न चुनावों को ले कर नरेंद्र मोदी घबराए और डरे हुए हैं और इसी हड़बड़ाहट में तानाशाहों जैसा व्यवहार भी करने लगे हैं. लेकिन लोकतंत्र में सुकून देने वाली इकलौती बात यही है कि जनता देर से सही, कुछ नुकसान उठाने के बाद ही सही, सही चुनाव करने को मजबूर हो जाती है. 2014 में उस का मोदी को चुनने का फैसला गलत नहीं था क्योंकि तब नरेंद्र मोदी सुधार और रोजगार सहित भ्रष्टाचार से मुक्ति की बातें कर रहे थे लेकिन अब वे सत्ता के स्वाभाविक अहंकार और अहं ब्रह्मास्मि की फीलिंग का शिकार हो गए हैं ठीक वैसे ही जैसे कभी इंदिरा गांधी हो गई थीं, यह और बात है कि उन्होंने धर्म और पूजापाठ को अपनी ढाल नहीं बनाया था. इस गलती को मोदी ने सुधारा है, इसलिए वे थोड़ा लंबा खिंच रहे हैं.

अफसरों ने बनाया चुनावी बजट : पीएम योजनाओं पर दिखी खास मेहरबानी

Union Budget 2024 : वर्ष 2024 के आम चुनाव के पहले मोदी सरकार का यह अंतिम बजट है. इस में चुनावी जुमले को आर्थिक ढांचे में पेश करने का काम किया गया है. कुछ समय पहले अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जातीय गणना के मुद्दे को कुंद करने के लिए कहा था कि उन के लिए केवल 4 जातियां गरीब, युवा, महिला और किसान ही देश में हैं. कोई भी बजट अगर विकास के लिए नहीं है और कोई भी विकास अगर जनता के लिए नहीं है तो वह व्यर्थ है.

समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखो है, ‘भाजपा सरकार ने जनविरोधी बजटों का एक दशक पूरा कर के एक शर्मनाक रिकौर्ड बनाया है, जो फिर कभी नहीं टूटेगा क्योंकि अब सकारात्मक सरकार आने का समय आ गया है. यह भाजपा का ‘विदाई बजट’ है.’

पहले बजट नेता बनाते थे तो सामाजिकता का ध्यान रखा जाता था. आज का बजट अफसर बनाते हैं तो वे केवल आर्थिक ध्यान रखते है. देश का विकास तभी होगा जब अर्थ और समाज के बीच तालमेल होगा. आर्थिक बजट बनने से अमीर और अमीर जबकि गरीब और गरीब होते जाएंगे. इस बजट में बेरोजगारी को दूर करने की कोई स्पष्ट सोच नहीं दिख रही. बजट में केवल बयानबाजी होती दिखी है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट के बारे में कहा, ‘इस में गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसान यानी अन्नदाता पर फोकस किया गया है. उन की आकांक्षा और उन का कल्याण हमारी सब से बड़ी प्राथमिकता है. इन सभी चारों को सरकार का समर्थन मिलेगा. उन के सशक्तीकरण से देश आगे बढ़ेगा. पीएम मोदी भी इन्हें 4 जातियां बता चुके हैं जिन पर सरकार का फोकस है.’ इस से यह बात साफ हो गई है कि यह बजट केवल पीएम योजनाओं पर फोकस करते हुए चुनावी लाभ के लिए बनाया गया है.

वित्त मंत्री के बजट से साफ है कि यह बजट वित्त विभाग की जगह पीएमओ के द्वारा बनाया गया है. इस वजह से यह जनता की रुचि की जगह सरकारी दस्तावेज अधिक लग रहा है. जनता भी समझ नहीं पा रही है कि उस के लिए खुश होने जैसा क्या है? बजट पेश करने के पहले निर्मला सीतारमण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने पहुंचीं. राष्ट्रपति ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को दही खिला कर उन का स्वागत किया. किसी भी शुभ चीज से पहले भारतीय परंपरा में दही खिलाने की प्रथा रही है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना लगातार 6ठा बजट पेश किया. वे 5 पूर्ण बजट और एक अंतरिम बजट पेश कर पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के क्लब में शामिल हो गई हैं. सीतारमण पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री हैं, जो जुलाई 2019 से अब तक 5 पूर्ण बजट पेश कर चुकी हैं. पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने सर्वाधिक 10 बार बजट पेश किए थे.

मोदी सरकार के 2014 में सत्ता संभालने के बाद वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी भाजपा के दिग्गज नेता अरुण जेटली को सौंपी गई थी. उन्होंने साल 2014-15 से 2018-19 तक लगातार 5 बार बजट पेश किए. जेटली के खराब स्वास्थ्य के कारण 2019 के आम चुनावों के पहले वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार पीयूष गोयल को सौंपा गया. उन्होंने एक फरवरी, 2019 को अंतरिम बजट पेश किया था.

2019 के आम चुनावों के बाद मोदी सरकार में वित्त विभाग का जिम्मा निर्मला सीतारमण को सौंपा गया. वे इंदिरा गांधी के बाद बजट पेश करने वाली दूसरी महिला भी बनीं. इंदिरा गांधी ने वित्त वर्ष 1970-71 के लिए बजट पेश किया था. यह बजट वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पेश होने वाला अंतरिम बजट लेखानुदान है. यह सरकार को अप्रैलमई के आम चुनावों के बाद नई सरकार आने तक कुछ निश्चित मदों में खर्च करने का अधिकार देगा.

खर्च का बढ़ाने वाला बजट

सरकार ने मोबाइल फोन सस्ते करने की घोषणा की है. यह जनता का खर्च बढ़ाने वाला काम है. सरकार ने अब यह मजबूरी बना दी है कि लोग सस्ते मोबाइल फोन की जगह पर महंगे फोन का प्रयोग करें. फोन का मुख्य काम बात करना होता है. इस के अलावा जरूरी मैसेज एक दूसरे तक पहुंच जाएं, इस के लिए 15 सौ से 2 हजार रुपए तक में आने वाले नौर्मल फोन के प्रयोग सब से अच्छा होता था. धीरेधीरे यह फोन स्मार्टफोन में बदल गया. इस की वजह से साइबर अपराध बढ गए. इस के साथ ही लोगों का खर्च बढ़ गया. 10 साल पहले 5 से 10 हजार रुपए में अच्छा स्मार्टफोन आता था. अब यह कीमत बढ़ कर 25 से 30 हजार रुपए हो गई है.

महंगे मोबाइल फोन की कीमत 2 लाख रुपए से भी ऊपर पहुंच गई है. ताज्जुब यह है कि इन की कीमत बढ़ गई जबकि इन की लाइफ कम हो गई. यह स्मार्टफोन एक से दो साल तक ही चलता है. मोबाइल फोन आज एक तरह से स्टेटस सिंबल हो गया है. सरकार के नियमकानूनों के चलते महंगे मोबाइल फोन जरूरी हो गए हैं.

अब सरकार मोबाइल पार्ट्स की इंपोर्ट ड्यूटी घटा कर जनता पर एहसान करने का दिखावा कर रही है. कस्टम एक्ट 1962 के सैक्शन 25 के तहत सरकार ने इस बजट में मोबाइल पार्टस पर इंपोर्ट ड्यूटी को 15 फीसदी से घटा कर 10 फीसदी कर दिया है. इस इंपोर्ट ड्यूटी कटौती के बाद देश में मोबाइल फोन का निर्माण सस्ता हो जाएगा और लोगों को सस्ते फोन मिल पाएंगे. बजट में हर तरफ इस बात पर ध्यान दिया गया है कि जनता लोन ले कर काम करे.

बचत योजनाओं की तरफ ध्यान नहीं दिया गया है. पहले लोग बचत करते थे, फिर अपने काम करते थे. अब लोन ले कर अपने काम करते हैं. सरकार और बैंकों को ब्याज देते हैं. ऐसे में कई बार हालात बन जाते हैं कि कर्ज चुका न पाने की हालत में लोग आत्महत्या कर लेते हैं. आत्महत्या करने के मामलों में पहला नंबर आर्थिक होने लगा है. बजट में खर्च बढाने वाले प्रावधान अधिक किए गए हैं.

चुनावी है बजट

मोदी सरकार का यह बजट पूरी तरह से चुनावी है. सरकार ने जिन मुद्दों पर वोट लेने की रूपरेखा बनाई है, बजट में उन्हीं पर ध्यान दिया गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि पीएम किसान योजना के तहत 11.8 करोड़ किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है. पीएम किसान योजना के तहत सरकार 3 समान मासिक किस्तों में प्रति वर्ष 6,000 रुपए का वित्तीय लाभ प्रदान करती है. यह पैसा देशभर के किसान परिवारों के बैंक खातों में ‘डीबीटी’ के जरिए डाला जाता है. फरवरी 2019 में अंतरिम बजट में इस की घोषणा की गई थी.

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि देश में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मिलने से उन की भोजन संबंधी चिंताएं खत्म हो गई हैं. उन्होंने लोकसभा में अंतरिम बजट पेश करते हुए कहा कि 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई, तो भारत भारी चुनौतियों का सामना कर रहा था और सरकार ने सही तरीके से चुनौतियों पर काबू पाया. प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि उन की सरकार गरीब आबादी के लिए मुफ्त राशन योजना को 5 साल के लिए बढ़ाएगी. बजट पर पीएमओ की छाया साफ झलकती है.

वित मंत्री ने कहा कि मध्यवर्ग के लिए विशेष आवास योजना ले कर सरकार आएगी. किराए के घरों, झुग्गी बस्तियों एवं चाल में रहने वाले लोगों के लिए योजना बनेगी. ग्रामीण आवास योजना के तहत सरकार 3 करोड़ रुपए का लक्ष्य हासिल करने के करीब है. अगले 5 वर्षों में 2 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण किया जाएगा. पीएम स्वनिधि से 78 लाख रेहड़ी-पटरी दुकानदार पीएम विश्वकर्मा योजना से भी लाभांवित होगे. देश में 10 साल में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है, सरकार गरीबों को सशक्त बना रही है.

बजट के जरिए देश को यह भी बताया जा रहा है कि अगर मोदी सरकार वापस आई तो अगले 5 साल देश के लिए अभूतपूर्व विकास का समय होगा, विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा. वित्त मंत्री ने अंतरिम बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार ने पीएम मुद्रा योजना के तहत कुल 22.5 लाख करोड़ रुपए के 43 करोड़ लोन दिए हैं. सीतारमण ने अपने चुनाव पूर्व बजट में कहा कि जनधन खातों के माध्यम से 34 लाख करोड़ रुपए के डायरैक्ट बैनिफिट ट्रांसफर से 2.7 लाख करोड़ रुपए की बचत हुई है. वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में महिलाओं को 30 करोड़ रुपए मुद्रा योजना ऋण की बाबत दिए गए हैं.

दिमाग में चिप फिट कर इंसान को रोबोट बनाने की कोशिश में एलन मस्क

इंसानी दिमाग को सदियों से धर्म की चाबुक से चलाया जा रहा है. पूरी पृथ्वी पर अलगअलग भूखंड में जितने भी धर्म मनुष्य द्वारा गढ़े गए, पीढ़ी दर पीढ़ी उन के नियमों का पालन जबरन कराया जाता रहा है. धर्म की घुट्टी जन्म लेने के साथ ही पिलाई जाने लगती है और यह घुट्टी हम मृत्यु तक पीते हैं. धर्म के आगे सोचविचार निषिद्ध है. इस के आगे सारे तर्कवितर्क फेल हैं. आस्था पर बहस वर्जित है. सवाल पूछने की पूरी तरह मनाही है. कुल जमा यह कि अपने दिमाग का इस्तेमाल ही नहीं करना है. जो बताया गया है उस का आंखें मूंद कर पालन करना है.

कोई पूछ नहीं सकता कि ईश्वर कहां है? कौन है? कैसा है? किस ने देखा उसे? किसी से मिलता क्यों नहीं? डरता है क्या? अकेले दम पर इतनी बड़ी दुनिया बना ली तो अपना घर बनाने की जिम्मेदारी इंसान पर क्यों छोड़ दी? अभी कहां रह रहा है? दुनियाभर के अलगअलग धर्मों में उस के लाखों घर हैं तो एकसाथ इतने घरों में रहता कैसे है? इस तरह के लाखों सवाल हैं जिन के जवाब धर्म और धर्म को पैदा कर के उसे ढोने वालों के पास नहीं हैं, इसीलिए उन्होंने पूरी दबंगई से सवालों पर रोक लगा रखी है. धर्म ने हमारे दिमाग को कैद कर रखा है. वो जैसा चाहता है वैसे हमारे दिमाग को चलाता है. जिस दिशा में चाहता है उस दिशा में चलाता है मगर हमें खुद हमारे दिमाग का इस्तेमाल नहीं करने देता है.

आजकल धर्म के साथसाथ सोशल मीडिया ने हमारे दिमाग पर कब्जा जमा लिया है. सोशल मीडिया धर्म के ढोंग-ढकोसलों को हमारे दिमागों में और ज़्यादा पुख्ता करता है. साथ ही, सोशल मीडिया पूरे समाज की सोच और गति को निर्धारित करता है. सोशल मीडिया एकजैसी सोच पैदा कर के बड़ेबड़े समूह बना रहा है. उन समूहों को गति दे रहा है. समूहों को आपस में लड़वा रहा है. हम सोशल मीडिया पर चस्पां हर चीज को सच मान रहे हैं, उन पर विश्वास कर रहे हैं. उस के अनुसार हम काम कर रहे हैं. हम ने अपने दिमाग का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया है.

अब साइंस और तकनीक हमारे दिमाग पर कब्जा जमाने के लिए आगे बढ़ रही हैं. इंसान को रोबोट बनाने के लिए चिप बनाई जा रही हैं. ये चिप दिमाग में लगेंगी और चिप हमें इंस्ट्रक्शन देंगी कि क्या करना है और क्या नहीं. पहले इंसान ने रोबोट बनाए, अब इंसान को ही रोबोट बनाने की तैयारी है.

वैज्ञानिक एलन मस्क की न्यूरोटैक्नोलौजी कंपनी न्यूरालिंक ने दावा किया है कि ऐसा बस एक चिप के जरिए संभव होगा. जिन के दिमाग में चिप लगाईं जाएगी वो लोग बिना हाथ लगाए सिर्फ अपनी सोच से ही कंप्यूटर और मोबाइल जैसी चीजें चला सकेंगे. हालांकि कहा जा रहा है कि ये चिप लकवाग्रस्त रोगियों, मिर्गी के मरीजों या पार्किंसन बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए डैवलप की जा रही हैं, यानी जिन के शरीर के अंगों पर उन के दिमाग का कंट्रोल नहीं रह गया है, उन के दिमाग में चिप लगा कर उन के रोजमर्रा के कामों को आसान किया जाएगा, लेकिन सोचिये जब दिमाग में लगने वाली चिप बड़ी संख्या में बनने लगेंगी तो क्या ये मानव जीवन और पृथ्वी के अस्तित्व के लिए सुरक्षित होंगी?

आखिर चिप में क्या भरा गया है, यह तो उस को बनाने वाला और उस को कंट्रोल करने वाला ही जानता होगा. यह चिप जब आप के दिमाग में फिट कर दी जाएगी तो उस का कंट्रोल किस के हाथ में होगा? क्या उस डाक्टर के हाथ में या चिप बनाने वाले वैज्ञानिक के हाथ में? चिप से अगर आप के दिमाग को इंस्ट्रक्शन मिले कि अमुक व्यक्ति की हत्या कर दो, या अमुक जगह आग लगा दो, या अमुक जगह बम गिरा दो तो उस गुनाह के गुनाहगार आप होंगे, या वो डाक्टर या वो वैज्ञानिक? इन बातों पर क्या अपने दिमाग का इस्तेमाल इंसान को नहीं करना चाहिए?

अभी भले चिप को बनाने के पीछे रोगमुक्ति को कारण बताया जा रहा हो मगर एक बार जब इन का प्रोडक्शन बड़े पैमाने पर शुरू हो जाएगा तो हम मनुष्य, अन्य जीवों और पृथ्वी पर आने वाले खतरे को कैसे रोक पाएंगे?

एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक का कहना है की पहली बार उस ने इंसानी दिमाग में वायरलैस कंप्यूटर चिप को प्रत्योपित करने में सफलता हासिल कर ली है. जिस के जरिए लकवाग्रस्त व्यक्ति के हाथोंपैरों को चलाना संभव होगा. दावा तो यह भी है कि इस की बदौलत किसी नेत्रहीन की आंखों में रोशनी भी वापस लाई जा सकती है. यही नहीं, इस के जरिए बधिर लोग सुन भी सकते हैं. सोशल मीडिया मंच एक्स पर एलन मस्क ने लिखा कि जिस व्यक्ति के मस्तिष्क में यह चिप लगाई गई है वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है.

न्यूरालिंक प्रत्यारोपण प्रक्रिया के तहत दिमाग में इलैक्ट्रोड प्रत्यारोपित करते हैं. इन इलैक्ट्रोड की मदद से मिर्गी और पार्किंसन के मरीजों को लाभ होने का दावा किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि चिप की मदद से लकवाग्रस्त रोगी अपने आसपास के लोगों से बात कर सकते हैं. न्यूरालिंक ने अपने इस उत्पाद को टैलीपैथी नाम दिया है. न्यूरालिंक इंसानी दिमाग के पैदा होने वाले सिग्नल समझ रही है. मस्क भविष्य में इस में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल की योजना बना रहे हैं.

हालांकि बंदरों पर जब उन्होंने इस चिप का प्रयोग किया तो काफी होहल्ला मचा था, पर एलन ने सफाई दी कि इस से किसी बंदर की मौत नहीं हुई. होहल्ला मचने के बाद जान का ख़तरा कम करने के लिए इस का परीक्षण बीमार बंदरों पर होने लगा. पर अब वे मनुष्य पर भी परीक्षण शुरू कर चुके हैं. मनुष्य पर परीक्षण का उद्देश्य कंपनी को अपने डिवाइस के लिए सही डिज़ाइन तैयार करने में मदद करना है. न्यूरालिंक का कहना है कि इस साल वह 11 सर्जरी करेगी.

अलगअलग जानवरों पर प्रत्यारोपण के परीक्षण के बाद अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने पिछले साल मई में मनुष्यों पर इस के परीक्षण की अनुमति न्यूरालिंक को दी थी मगर फिजीशियन कमेटी फौर रिस्पौन्सिबल मैडिसिन जैसे समूहों ने तभी इस की कड़ी आलोचना की थी. उन का आरोप था कि न्यूरालिंक द्वारा जानवरों पर की गईं अनेक सर्जरी विफल हुई हैं. गौरतलब है कि इलैक्ट्रोड को पहली बार 2004 में सिंक्रोन और प्रिसिजन न्यूरोसाइंस कंपनी ने प्रदर्शित किया था, पर वे ज्यादा सफल नहीं हुए थे.

न्यूरालिंक एलन मस्क की स्टार्टअप कंपनी है जो 2017 में शुरू की गई. 2019 तक इस में 15.8 करोड़ डौलर की फंडिंग हुई. इस में अकेले एलन मस्क के 10 करोड़ डौलर लगे हैं. मस्क की ब्रेन-चिप कंपनी को मानव परीक्षण के लिए इंडिपेंडेंट इंस्टिट्यूशनल रिव्यू बोर्ड से रिक्रूटमैंट की मंजूरी मिली थी. परीक्षण उन लोगों पर हो रहा है जो सर्वाइकल स्पाइनल कौर्ड में गंभीर चोट के कारण बिस्तर पर पड़े हैं.

एलन बड़ी संख्या में लोगों पर परीक्षण करने के लिए उतावले हैं. इस के लिए उन्होंने परीक्षण में शामिल होने के लिए लोगों का आह्वान किया है. अमीर आदमी एलन मस्क ने जाहिर है, इस के लिए बड़ी धनराशि का लालच रखा होगा. उन्होंने कुछ शर्तें भी रखी हैं. जो लोग परीक्षण में शामिल होना चाहते हैं उन की उम्र कम से कम 22 साल होनी चाहिए. परीक्षण में 6 साल का समय लगेगा. परीक्षण में शामिल लोगों को यात्रा भत्ता और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी. अगर अध्ययन में सबकुछ ठीक रहा तो इस चिप को बाजार में आने में 5 से 10 साल का समय लगेगा.

सोचिए दिमाग में चिप फिट करवा कर बाजारों में घूमने वाले लोग आप से बात करते समय, आप से व्यवहार करते समय किस के द्वारा संचालित हो रहे होंगे. क्या एलन मस्क दुनिया को अपना रोबोट बनाने की राह पर बढ़ रहे हैं? सो, आप अपना दिमाग इस्तेमाल करें. सरिता पढ़ें. आप अपने को धर्म और सोशल मीडिया से संचालित होना बंद करें वरना एक दिन इन के जरिए एलन मस्क और उस की तरह की सोच रखने वाले राजनीतिक लोग आप के दिमाग में चिप फिट करवा कर आप को अपना रोबोट बनाने में सफल हो जाएंगे.

पौलीसिस्टिक ओवरी डिजीज क्या होती है, जानें इसके कारण और बचाव के उपाय

पीसीओडी यानी पौलीसिस्टिक ओवरी डिसीज (पीसीओडी) एक स्थिति है, जो महिलाओं में हार्मोनों के स्तर को प्रभावित करती है. इस में गर्भाशय में कई छोट- छोटे सिस्ट बन जाते हैं इसीलिए इसे पौलीसिस्टिक ओवरी डिसीज कहते हैं. जिन महिलाओं को पीसीओडी की समस्या होती है उन में पुरूष हार्मोनों का स्राव सामान्य से अधिक होता है. यह समस्या 15 से 44 वर्ष की महिलाओं में हो सकती है क्योंकि इसी दौरान उन्हें पीरियड्स आते हैं और वे प्रेग्नेंट होती हैं.

अमूमन 24 से 25 प्रतिशत महिलाएं इस की शिकार होती हैं. कुछ सालों पहले तक यह समस्या 30 से 35 साल के ऊपर की महिलाओ में ज्यादा होती थी परन्तु अब कम उम्र की लड़कियों में भी यह दिखने लगा है. पीसीओडी महिलाओं में बांझपन का सबसे प्रमुख कारण है क्योंकि यह फीमेल हार्मोन्स एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रौन के स्राव को प्रभावित करता है.

क्या हैं पीसीओडी के लक्षण

  1. पीरियड्स समय पर न होना

समय पर मासिक धर्म का न आना, छोटी उम्र में ही अनियमित पीरियड्स आना आदि इस का सबसे बड़ा संकेत होता है.

  1. अत्यधिक रक्तस्त्राव होना

जब पीरियड्स आता है तो सामान्य से अधिक दिनों तक आता है और रक्तस्त्राव भी अधिक होता है.

  1. अचानक वज़न बढ़ जाना

जिन महिलाओं को पीसीओडी होता है उन में से आधे से अधिक महिलाओं का वजन औसत से अधिक होता है या वे मोटी होती हैं. उन्हें वजन कम करने में भी परेशानी आती है.

4.  अनचाहे स्थानों पर बालों का विकसित होना

पीसीओडी से ग्रस्त अधिकतर महिलाओं के चेहरे और शरीर के अन्य भागों जैसे छाती, पीठ और पेट पर बाल उगने लगते हैं. कईं महिलाओं में अनचाहे बालों की समस्या अत्यधिक बढ़ जाती है जिसे हिरसुटिज़्म कहते हैं.

  1. मेल पैटर्न बाल्डनेस

इस बीमारी में महिलाओं के शरीर और चेहरे पर तो अनचाहे बाल उगने लगते हैं लेकिन सिर के बाल अत्यधिक झड़ने लगते हैं.

  1. त्वचा पर गहरे रंग के चकते पड़ जाना

शरीर की त्वचा पर जगहजगह गहरे रंग के चकते पड़ने लगते हैं. यह उन स्थानों पर अधिक पड़ते हैं जहां त्वचा फोल्ड होती है जैसे गर्दन पर, स्तनों के नीचे आदि.

कारण

कुछ ऐसे सामान्य कारण हैं जो पीसीओडी की चपेट में आने का खतरा बढ़ा देते हैं:

  1. शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना.
  2. वजन सामान्य से अधिक बढ़ जाना.
  3. अनुवांशिक कारण (अगर आप की मां और बहन को यह समस्या है तो आप के इस की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है).
  4. अत्यधिक तनाव (इस के कारण हार्मोन असंतुलन की आशंका बढ़ जाती है).

उपचार

पीसीओडी का वैसे तो कोई स्थायी उपचार नहीं है लेकिन जीवनशैली में परिवर्तन ला कर और कुछ जरूरी उपाय कर के इस के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है;

वजन कम करें

अगर आप अपने वज़न को 5% भी कम कर लेंगी तो पीसीओडी की गंभीरता कम होने लगेगी. वजन कम होने से प्रैग्नैंसी की संभावना भी बढ़ जाती है.

व्यायाम

व्यायाम करने से आप का वजन कंट्रोल में रहेगा और पीसीओडी की वजह से होने वाली इन्सुलिन रेसिसटेंट की समस्या भी कम हो जाएंगी. आप ब्रिस्क वाक, दौड़ना, तैराकी या एरोबिक व्यायाम कर सकती है.

संतुलित आहार

अपने खाने में पिज़्ज़ा, बर्गर जैसे शरीर के लिए नुकसानदायक आहार लेने की जगह हरे पत्तेदार सब्जी और फलों को शामिल करें.

दवाईयां

हार्मोन के स्राव को संतुलित करने वाली, पीरियड्स को नियमित करने वाली, मुंहासों, अनचाहे बालों और पिग्मेंटेशन का उपचार करने वाली विभिन्न दवाईयां आती हैं.

सर्जरी

हिरसुटिज़्म (अनचाहे बालों के अत्यधिक विकास) के लिए लेजर उपचार उपलब्ध है. गर्भाश्य से सिस्ट निकालने के लिए लैप्रोस्कोपिक सर्जरी भी की जाती है जिसे लैप्रोस्कॉपिक ओवेरियन ड्रिलिंग कहा जाता है. इस सर्जरी में लेज़र या अत्यधिक नुकीली सुईंयों द्वारा अंडाशय के सिस्ट में छेद किया जाता है.

आईवीएफ

जो महिलाएं गर्भाश्य में कई सिस्ट बनने के कारण मां नहीं बन पाती हैं उन के लिए असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीक के इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (आईवीएफ) के द्वारा संतान प्राप्ति करना संभव है.

पीसीओडी के कारण होने वाली स्वास्थ्य जटिलताएं

बांझपन

पीसीओडी के कारण शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है जिस से बांझपन की समस्या हो सकती है.

एंडोमेट्रियल कैंसर

पीसीओडी के कारण अंडोत्सर्ग नहीं हो पाता है जिस से गर्भाश्य की सब से अंदरूनी परत निकल नहीं पाती है और वह समय बीतने के साथसाथ मोटी होती जाती है. गर्भाश्य की सब से अंदरूनी परत का मोटा हो जाना एंडोमेट्रियल कैंसर की चपेट में आने का खतरा बढ़ा देता है.

मेटाबालिक सिंड्रोम

पीसीओडी की शिकार अधिकतर महिलाएं मोटी होती हैं. मोटापे और पीसीओडी दोनों के कारण रक्तदाब, रक्त में शूगर और बुरे कोलेस्ट्राल का स्तर बढ़ जाता है. इन फैक्टर्स को एकसाथ मेटाबालिक सिंड्रोम कहते हैं और इन के कारण हृदय रोग, डायबिटीज़ और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.

अवसाद

पीसीओडी में हार्मोनों के स्तर में परिवर्तन आने, बांझपन, अनचाहे बालों के विकसित होने और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने के कारण कईं महिलाएं अवसाद और एंग्जाइटी की शिकार हो जाती हैं.

कब करें डाक्टर से संपर्क:

  1. दो महीने से आप को पीरियड्स नहीं आ रहें हैं लेकिन आप प्रैग्नैंट नहीं हैं.
  2. आप 12 महीने से अधिक समय से गर्भधारण करने का प्रयास कर रही हैं लेकिन सफल नहीं हो पा रही हैं.
  3. वज़न कम करने के प्रयासों के बावजूद आप का वज़न बढ़ता ही जा रहा है.
  4. आप को डायबिटीज के लक्षण दिखाई दें जैसे अत्यधिक भूख या प्यास लगना, नजर धुंधली हो जाना या वजन बहुत कम हो जाना.

इंदिरा आईवीएफ अस्पताल की डा. सागरिका अग्रवाल से की गई बातचीत पर आधारित

पालक से बनाएं ये 4 यम्मी डिशेज

आप पालक की सब्जी और पराठे तो जरुर खाएं होगे, लेकिन क्या कभी आपने पालक रोल खाएं है. जी हां जो खाने में टेस्टी के साथ-साथ हेल्दी भी है. तो आइए जानते हैं इस रेसिपी के बारे में.

  1. चीज पालक रोल

सामग्री

दो लहसुन की कलियां

20 ग्राम चेडार चीज

20 ग्राम मोजेरला चीज

एक चम्मच टोमैटो प्यूरी

दो चम्मच व्हाइट सौस

स्वादानुसार नमक

स्वादानुसार काली मिर्च पाउड

गेहूं का आटा- 1कप

दूध- 1कप दूध

पालक 100 ग्राम बारीक कटा हुआ

एक अंडे का घोल

तीन चम्मच बटर

दो बारी कटी हुई प्याज

बनाने की विधि

सबसे पहले सबसे पहले आटा, दूध और अंडे का घोल डालकर मिलाएं.

इसे अच्छी तरह से फेंट लें और इसके बाद एक नौन स्टिक पैन लें.

जिसे गैस को सिंक करके रखें, फिर इसमें बटर डालें.

इसके पिघलने के बाद इसमें गेहूं और अंडे वाला घोल डालकर फैलाएं.

इसे दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें और पूरे घोल से क्रेप इसी तरह से बना लें.

भरावन ऐसे करें

इसके लिए एक पैन में बटर डालकर गैस की मध्यम आंच पर रखें.

फिर इसमें प्याज, लहसुन और पालक डालकर तेज आंच पर भूनें.

इसके बाद इसमें चेडार चीज, व्हाइट सौस, नमक और काली मिर्च पाउडर डालकर 2 मिनट तक पकाएं.

आंच से उतारकर इस मिश्रण को क्रेप्स पर फैलाकर इसे मोड़ दें.

इस पर टोमैटो प्यूरी मिलाकर मोजरेला चीज कद्दूकस करके डालें और फिर इन्हें ओवन प्लेट में रखें.

2.घर पर बनाएं पालक की भुर्जी

सामग्री

1 टी स्पून जीरा पाउडर

1 टी स्पून धनिया पाउडर

1 टेबल स्पून देसी घी

2 टी स्पून अदरक पेस्ट

3 बड़ा बटर क्यूबस

2 प्याज, टुकड़ों में कटा हुआ

2-3 टमाटर, टुकड़ों में कटा हुआ

हरा धनिया, टुकड़ों में कटा हुआ

अदरक का पीस, कटा हुआ

2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर

4-5 हरी मिर्च

4 टी स्पून लहसुन का पेस्ट

बनाने की वि​धि

पालक को काट लें, एक पैन में तेल गर्म करें. इसमें लहसुन का पेस्ट, पालक और नमक डालकर कुछ देर पकाएं.

एक पैन में देसी घी गर्म करें,  इसमें लहसुन का पेस्ट,  अदरक का पेस्ट डालकर भूनें.

एक बार जब लहसुन ब्राउन हो जाए तो इसमें टमाटर, जीरा पाउडर और धनिया पाउडर डालें और इसे थोड़ी देर पकाएं.

एक पैन में मक्खन डालें, इसमें कटा हुआ प्याज डालकर भूनें. अब इसमें पालक, टमाटर पेस्ट, नमक, लाल मिर्च पाउडर, पनीर, हरी मिर्च और हरा धनिया डालें.

पालक भुर्जी को थोड़ी देर पकाएं और गर्मागर्म सर्व करें.

3. पालक पकौड़े

सामग्री

पालक के पत्ते – 10

हल्दी – 1/4 चम्मच

बेसन – 70 ग्राम

लाल मिर्च – 1/2 चम्मच

चाट मसाला – 1/2 चम्मच

अजवाइन – 1/2 चम्मच

नमक – 1/2 चम्मच

चावल का आटा – 1 चम्मच

तेल

पानी

सौस – सर्व के लिए

विधि

पालक पकौड़े बनाने के लिए सबसे पहले आप पालक के पत्तों को काट लें. अब एक बाउल में बेसन, लाल मिर्च, हल्दी, अजवाइन, चावल का आटा, चाट मसाला और नमक डालें और अच्छे से मिला लें.

अब इसमें थोड़ा-सा पानी डालें और गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. इसमें कटे हुए पालक के पत्ते डालें.

फिर एक कड़ाही में तेल गर्म करें और पकोड़ों को फ्राई करें. इसे हल्का ब्राउन होने तक पकाएं. पालक पकौड़े बनकर तैयार हैं. इसे सौस के साथ सर्व करें.

4. जानें, कैसे बनाएं पालक दाल खिचड़ी

सामग्री

दाल (1 कप)

जीरा (1 टी स्पून)

सरसों के दाने (1 टी स्पून)

हल्दी पाउडर

नमक (स्वादानुसार)

लाल मिर्च पाउडर (स्वादानुसार)

कढ़ीपत्ता (5-6)

घी (1 टी स्पून)

हरी मिर्च

लहसुन का पेस्ट (1 टी स्पून अदरक)

पानी (आवश्यकतानुसार)

पालक (1 कप)

1 प्याज ( टुकड़ों में कटा हुआ)

2 टमाटर (टुकड़ों में कटा हुआ)

चावल (½ कप)

बनाने की वि​धि

चावल को 15 मिनट के लिए भिगो दें और दाल को  धो लें.

एक प्रेशर कूकर लें और इसमें तेल डालें.

एक बार जब तेल गर्म हो जाए तो इसमें सरसों के दाने, जीरा, कढ़ीपत्ता, ताजा बना अदरक लहसुन का पेस्ट डालकर अच्छी तरह भूनें.

इसमें बारीक कटा हुआ टमाटर और प्याज डालें, अपने स्वादानुसार हरी मिर्च डालें और पकने दें.

इसमें हल्दी, धनिया और लाल मिर्च पाउडर डालकर भूनें और स्वादानुसार नमक डालें.

दाल और चावल डालें और साथ ही इसमें एक गिलास पानी भी डालें.

और इसे 2 मिनट पकाने के बाद ताजी कटी पालक डालकर प्रेशर कूकर को बंद कर दें.

इसे 10 से 12 मिनट पकने दें.

मैं फेसबुक पर एक फ्रैंड से बात करती हूं, अब वो मिलने की बात कह रहा है, मैं क्या करूं ?

सवाल

फेसबुक पर फ्रैंड रिक्वैस्ट आई थी. मैं अपनी जौब के कारण दिल्ली में अकेली रहती हूं. घरपरिवार सब देहरादून में है. शुरू से कैरियर ओरिएंटेड रही हूं, इसलिए जब हाईक पर दिल्ली में जौब औफर हुई तो मौका नहीं गंवाया. 36 साल की हो चुकी हूं. मातापिता शादी करने के लिए बोलते रहते हैं. मुझे फोटोज भी भेजते रहते हैं लेकिन मैं शादी के बारे में सोचना नहीं चाहती और न ही उन फोटोज में कोई मुझे भाता है. औफिस से आ कर घर पर टाइमपास के लिए अपना इंस्टा, फेसबुक देखती रहती हूं. 3 महीने पहले मेरे फेसबुक पर एक लड़के की फ्रैंड रिक्वैस्ट आई.

मैं ने यों ही ऐक्सैप्ट कर ली. हमारी थोड़ी बातें शुरू हो गईं. मैं ने उसे अपना मोबाइल नंबर दे दिया. उस ने अपनी उम्र 27 साल बताई. मुझे अपनी उम्र से कम उम्र का वह लड़का भाने लगा. उस की रोमांटिक बातों में मुझे मजा आने लगा. वह खूब मेरी तारीफ करता. मैं ने ऐसा पहले कभी फील नहीं किया जैसा मैं उस के लिए फील करने लगी. थोड़े दिनों पहले उस ने मुझ से कहा कि फोन पर बातें तो बहुत हो गई हैं, अब वह मुझ से मिलना चाहता है. तब से मुझे घबराहट हो रही है. यह सब मैं ने अपने मजे के लिए शुरू किया था. अपनी उम्र से कम लड़के से बातें कर के मुझे यंगनैस की फील आ रही थी.

मुझे नहीं पता कि मुझ से पर्सनली मिलने के बाद वह क्या फील करेगा. मैं तो फोन पर बातें कर के उस से अपना टाइमपास करती थी. मैं उस से कोई सीरियस रिलेशनशिप नहीं चाहती. अब आप ही बताएं कि मैं क्या करूं?

जवाब

ऐसा लगता है कि आप खुद नहीं जानतीं कि आप चाहती क्या हैं. एक तरफ तो आप कहती हैं कि उस से बात कर के आप बहुत अच्छा फील करती हैं. किसी और के साथ आप ने ऐसा फील नहीं किया. दूसरी तरफ कहती हैं कि अपना टाइम पास करती हैं, कोई सीरियस रिलेशनशिप नहीं चाहतीं.

देखिए, सब से पहली बात, वह लड़का कोई आप का एंटरटेनमैंट का साधन नहीं है. आप ने उस से दोस्ती की है तो वह मिलने की इच्छा जाहिर करेगा ही. आप डर रही हैं कि पर्सनली मिलने के बाद क्या फील करेगा.

जब आप सीरियस रिलेशनशिप रखना ही नहीं चाहतीं तो डरने की बात ही नहीं. जो होगा देखा जाएगा. आप से पर्सनली मिलने के बाद वह कैसे रिऐक्ट करता है, उसे करने दो. आप को कुछ फर्क नहीं पड़ना चाहिए.

हां, आप से मिलने के बाद वह दोस्ती से कुछ ज्यादा सीरियस रिलेशनशिप चाहेगा तो आप को सोचने की जरूरत पड़ेगी.

वैसे, आप की लाइफ है, निर्णय आप के खुद के होने चाहिए. हम सिर्फ यह सलाह देना चाहते हैं कि आप के मन में यदि उस लड़के की उम्र को ले कर इश्यू है तो आज इस टाइप की कई रिलेशनशिप, कई मैरिज देखने को मिल रही हैं. उम्र का फर्क सिर्फ एक नंबर का फर्क है. प्यार है तो रिलेशनशिप लंबी चलती है.

फिलहाल, आप अभी ज्यादा मत सोचिए. पहले उस लड़के से मिलिए. उस के बाद ही कुछ डिसाइड कीजिएगा.

गर्लफ्रैंड सोशल मीडिया क्रेजी है. मैं जितना इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सऐप आदि से दूरी बना कर चलता हूं, उतनी ही मेरी गर्लफ्रैंड इन सब की दीवानी है. फोटो पोस्ट करना, अपना स्टेटस अपडेट रखना, कमैंट देने में सब से आगे रहना, रोज अपनी प्रोफाइल पिक चेंज करना, उस पर अपने लाइक देखना, इस सब के पीछे सारा दिन लगी रहती है. ठीक है, मैं इस सब के अगेंस्ट नहीं हूं लेकिन पागलपन की हद तक इसी में घुसे रहना मुझे पसंद नहीं.

इस बात को ले कर हमारा झगड़ा भी हो जाता है. कईकई दिन हमारे बीच बात नहीं होती. लेकिन फिर वह खुद ही मुझे मना लेती है. कहती है कि वह यह सब कम कर देगी. लेकिन थोड़े दिनों बाद फिर वही सब शुरू कर देती है. मैं परेशान हो गया हूं उस की इस हरकत से. अब आप ही बताएं कि मैं क्या करूं? ऐसी गर्लफ्रैंड के साथ मैं शादी तो हरगिज नहीं कर सकता.

गर्लफ्रैंड के सोशल मीडिया क्रेजीनैस से परेशान हैं तो पहले आप को गर्लफ्रैंड से साफसाफ बात करनी चाहिए. नहीं तो शादी के बाद यही बात झगड़े की वजह बन जाएगी, जिस का नतीजा अच्छा नहीं होगा.

हम भी यही मानते हैं कि सब चीजों की एक लिमिट होती है. लिमिट से बाहर सब खराब होता है. सोशल मीडिया हमारे फायदे के लिए हैं. डिजिटल वर्ल्ड ने हमें कई सहूलियतें दी हैं. उन का फायदा उठाना चाहिए. लाइफ का उसे पार्ट बनना चाहिए न कि उसे ही लाइफ बना लें. आप को गर्लफ्रैंड को और समझना होगा. उस से शादी जैसा अहम फैसला बहुत सोचविचार के बाद ही लीजिएगा.

Holi Special: हक ही नहीं कुछ फर्ज भी- भाग 3

पीछे का दरवाजा खुला था. उन्नति और काव्या दबे पांव हिसाब लगाते हुए कि पापा इस समय बाथरूम में होंगे और मां किचन में. मेड जा चुकी होगी. 9 बज रहे हैं तो सुरम्य सो ही रहा होगा. एकदूसरे को देख मुसकराते हुए वे सुकांत और निधि के बैडरूम में पहुंच गईं. सुकांत की दराज खोल उन्होंने चुपके से कुछ रखा. फिर सीधे सुरम्य के रूम में जा कर तकियों के वार से उसे जगा दिया.

‘‘आज भी देर तक सोएगा? संडे तो है पर रक्षाबंधन भी है. उठ जल्दी नहा कर आ. राखी नहीं बंधवानी?’’

‘‘अरे उठ भी तुझे राखी बांधने के बाद ही मां कुछ खाने को देंगी… बहुत जोर की भूख लग रही है,’’ कहते हुए काव्या ने एक तकिया उसे और जमा दिया.

‘‘क्या है,’’ सुरम्य आंखें मलते हुए उठ बैठा.

दोनों बहनें उसे बाथरूम की ओर धकेल हंसती हुई किचन की ओर बढ़ गईं.

‘‘मां सरप्राइज,’’ कह दोनों निधि से लिपट गईं.

‘‘अरे, कब घुसी तुम दोनों? मुझे तो पता ही नहीं चला,’’ कह निधि मुसकरा उठी.

राखियां बंधवाने के बाद जब सुरम्य ने दोनों को 6-6 लाख के चैक दिए तो दोनों बहनें उस का चेहरा देखने लगीं.

‘‘मजाक कर रहा है?’’

‘‘मजाक नहीं सच में बेटा… हम वह मुकदमा जीत गए… उसी के 4 हिस्से कर दिए. एक मेरा व निधि का बाकी तुम तीनों के.’’‘‘अरे नहीं पापा ये हम नहीं ले सकतीं,’’ काव्या और उन्नति एकसाथ बोलीं. उन्होंने उन पैसों को लेने से साफ इनकार कर दिया, ‘‘नहीं मम्मीपापा, इन पर केवल सुरम्य का ही हक है. उसी ने आप दोनों के साथ सारी जिम्मेदारियां उठाई हैं. पहले घर के छोटेछोटे कामों में फिर बड़े कामों में… लोन, बिल्स, औपरेशन, इलाज, रिश्तेदारी, गाड़ी और अब यह मकान. आप दोनों और घर से अलग अपने लिए कुछ नहीं जोड़ा उस ने.

‘‘सच है मम्मीपापा हर बात में बराबरी करने वाली हम बेटियां पढ़लिख कर भी बेटियां ही रह गईं बेटा न बन सकीं. हम ने शान और मस्ती के अलावा कुछ सोचा ही नहीं… कभी समझना ही नहीं चाहा. दायित्व तो दूर की बात… मेरे और काव्या के लिए बहुत कुछ कर लिया आप ने… अब तो इस का ही हक बनता है हमारा नहीं.’’

‘‘हां पापा, अब तो बस झट से इस के लिए अच्छी सी लड़की पसंद कीजिए और इस की धूमधाम से शादी कर दीजिए, बहुत आनाकानी कर चुका है. हां, नेग हम बड़ाबड़ा लेंगी.’’

उन्नति और काव्या एक के बाद एक बोले जा रही थीं. फिर वे सुरम्य को छेड़ने लगीं, ‘‘वैसे एक बहुत सुंदर लड़की मेरे पड़ोस में है. बस थोड़ी तोतली है. उस से करेगा शादी?’’ उन्नति ने ठिठोली की तो काव्या भी पीछे नहीं रही, ‘‘अरे, मेरी ननद की देवरानी की छोटी बहन दूध जैसी गोरीचिट्टी है. बस थोड़ी भैंगी है. पर उस के बड़े फायदे रहेंगे एक नजर किचन में तो दूसरी से वह तुझे निहारेगी.’’

काव्या और उन्नति दोनों अगले ही दिन चली गईं. घर सूना हो गया.

‘‘निधि… ये मेरी दराज में लिफाफे कैसे रखे हैं?’’ कह उन्होंने एक खोला तो पत्र में लिखावट उन्नति की थी. लिफाफे में हजारहजार के नोट रखे थे. वे अचरज से पढ़ने लगे-

‘‘मम्मीपापा यह मेरी पहली कमाई का छोटा सा अंश है,  आप दोनों के चरणों में. आप इसे मना मत करिएगा. आप दोनों ने मुझे इस काबिल बनाया. मैं कमा कर कम से कम अपना लोन तो खुद उतार सकती थी पर मैं तो अपने में ही मस्त थी. मैं इतनी स्वार्थी कैसे बन गई.

‘‘न कभी आप लोगों के लिए सोचा न सुरम्य के लिए. छोटा था पर हर बात में उस से बराबरी करते हुए उस से घर के कामों में भी फायदा उठाया और अपने बाहर के काम भी उसी से करवाए कि वह लड़का है. सब कुछ उसी पर डाल कर हम बहनें मजे लेती रहीं. सौरी मम्मीपापा. मैं फिर जल्द आऊंगी. आप की डैंटिस्ट बेटी उन्नति.’’

दूसरा लिफाफा काव्या का था, लिखा था-

‘‘मां और पापा, आप ने हमेशा हम तीनों को बराबर का प्यार दिया, हक दिया. बराबर मानते हैं न तो सुरम्य की ही तरह मुझे भी अपना लोन चुकाने दीजिए. आप दोनों मना नहीं करेंगे, सामने से देती तो आप बिलकुल न लेते पर सोचिए तो पापा अगर बेटेबेटी में कोई फर्क नहीं मानते तो आप को इसे लेना ही पड़ेगा. प्रतीक की भी यही इच्छा है.

‘‘पता नहीं बेटियों का बेटों की तरह मांबाप पर तो हक है पर मांबाप को बेटों की तरह बेटियों पर हक अभी भी समाज में क्यों मान्य नहीं हो पा रहा? प्रतीक ऐसा ही सोचता है. आप ने अपनी परेशानियों को एक ओर कर के हमारे सपने, हमारी जरूरतें पूरी की हैं. हमारा आप पर हक है ठीक है पर हमारा फर्ज भी तो है कुछ… जिसे मैं पहले कभी नहीं समझ पाई. आप दोनों की लाडली बेटी काव्या.’’

पत्र के पीछे लोन अमाउंट का चैक संलग्न था.

बेटियों की चिट्ठियां पढ़ रहे सुकांत और उन के पास खड़ी निधि की आंखें सजल हो उठी थी और सीना गर्व से भर उठा.

‘‘हमें इन्हें वापस करना होगा निधि, कितने समझदार बन गए हैं बच्चे. इन्होंने हमारे लिए इतना सोचा यही बहुत है… अब हमें वैसे भी पैसे की कोई जरूरत नहीं रही.’’

निधि ने आंचल से आंखों के कोरों को पोंछ मुसकराते हुए अपनी सहमति में सिर हिला दिया.

Writer- Dr. Neerja Srivastava

उधार का रिश्ता : भाग 1 – उस दिन क्या हुआ थाा सरिता के साथ ?

टैलीफोन की घंटी लगातार बजती जा रही थी. मैं ने उनीदी आंखों से घड़ी की ओर देखा. रात के 2 बजे थे. ‘इस समय कौन हो सकता है?’ मैं ने स्वयं से ही सवाल किया और जल्दी से टैलीफोन का रिसीवर उठाया, ‘‘मेजर रंजीत दिस साइड.’’

‘‘सर, कैप्टन सरिता ने आत्महत्या कर ली है’’ औफिसर्स मैस के हवलदार की आवाज थी. वह बहुत घबराया हुआ लग रहा था.

‘‘क्या?’’

‘‘सर, जल्दी आइए.’’

‘‘घबराओ मत, मैं तुरंत आ रहा हूं. किसी को भी मेरे आने तक किसी चीज को हाथ मत लगाने देना.’’

‘‘जी सर.’’

मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि कैप्टन सरिता ऐसा कर सकती है. वह एक होनहार अफसर थी. मैं नाइट सूट में था और उन्हीं कपड़ों में औफिसर्स मैस की ओर भागा. वहां पहुंचा तो कैप्टन नीरज और कैप्टन वर्मा पहले से मौजूद थे. कैप्टन नीरज ने सरिता के कमरे की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘सर, इस ओर.’’

‘‘ओके,’’ हम सब कैप्टन सरिता के कमरे की ओर बढ़े. नाइलौन की रस्सी का फंदा बना कर वह सीलिंग फैन से झूल गई थी.

‘‘सब से पहले कैप्टन सरिता को इस अवस्था में किस ने देखा?’’  मैस स्टाफ से मैं ने पूछा.

‘‘सर, 10 बजे मैम ने गरम दूध मंगवाया था. मैं दूध देने आया तो मैम लैपटौप पर काम कर रही थीं. मैं ने दूध का गिलास रख दिया. उन्होंने कहा, ‘आधे घंटे में गिलास ले जाना.’ मैं ‘जी’ कह कर लौट आया. आ कर कुरसी पर बैठा तो मेरी आंख लग गई. आंख खुली तो देखा कि मैम के कमरे की लाइट जल रही थी. सोचा, खाली गिलास उठा लाता हूं. मैम के कमरे में आया तो उन को पंखे से लटके देखा. मैं ने उन का चेहरा देख कर अनुमान लगाया था कि वे मर चुकी हैं. तुरंत आप को सूचित किया.’’

‘‘क्या तुम्हें इस बात का ध्यान नहीं रहा कि इतनी रात गए किसी महिला अफसर के कमरे में नहीं जाना चाहिए?’’ मैं ने मैस हवलदार को घूरते हुए कहा.

‘‘सर, मुझे समय का ध्यान नहीं रहा. मैं ने घड़ी की ओर देखा ही नहीं. मैं ने सोचा, मेरी आंख लगे अधिक देर नहीं हुई है. इसलिए चला गया, सर.’’

मैं ने देखा, मैस हवलदार एकदम डर गया है. शायद उसे लग रहा था कि इस छोटी सी गलती के लिए उसे ही न फंसा दिया जाए.

‘‘कैप्टन नीरज, देखो कोई सुसाइड नोट है या नहीं? तब तक मैं मिलिटरी पुलिस को इस की सूचना दे देता हूं,’’ यह कहते हुए मैं टैलीफोन की ओर बढ़ा. मैं ने नंबर डायल किया तो दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘सर, मैं डेस्क एनसीओ हवलदार राम सिंह बोल रहा हूं.’’

इधर से मैं ने कहा, ‘‘मैं ओएमपी से मेजर रंजीत सिंह बोल रहा हूं. मुझे आप के ड्यूटी अफसर से तुरंत बात करनी है.’’

‘‘सर, एक सेकंड होल्ड करें, मैं लाइन ट्रांसफर कर रहा हूं,’’ राम सिंह ने कहा.

कुछ समय बाद दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘ड्यूटी अफसर कैप्टन डोगरा स्पीकिंग, सर, इतनी रात गए कैसे याद किया?’’

‘‘एक बुरी खबर है कैप्टन डोगरा. कैप्टन सरिता कमीटैड सुसाइड,’’ मैं ने उसे बताया.

‘‘ओह, सर, यह तो बहुत बुरी खबर है. सर, किसी को बौडी से छेड़छाड़ न करने दें. मैं अभी टीम भेज रहा हूं. प्लीज मेजर साहब, डू इनफौर्म टू ब्रिगेड मेजर इन ब्रिगेड हैडक्वार्टर. आई विल आलसो इनफौर्म हिम.’’ यह कह कर कैप्टन डोगरा ने फोन काट दिया.

मैं ने तुरंत बीएम साहब को फोन लगाया. दूसरी ओर से आवाज आई, ‘‘यस, मेजर बतरा स्पीकिंग.’’

‘‘मेजर रंजीत दिस साइड,’’ मैं ने कहा.

‘‘इन औड औवर्स? इज देयर ऐनी इमरजैंसी, मेजर रंजीत?’’

‘‘यस, कैप्टन सरिता कमीटैड सुसाइड.’’

‘‘ओह, सैड न्यूज, मेजर. हैव यू इनफौर्म मिलिटरी पुलिस?’’

‘‘यस, मेजर.’’

‘‘ओके, प्लीज डू नीडफुल.’’

‘‘राइट, मेजर.’’

मैं अभी फोन कर के हटा ही था कि मिलिटरी पुलिस की टीम आ गई. उस टीम में 1 सूबेदार और 2 हवलदार थे. उन्होंने मुझे सैल्यूट किया और चुपचाप अपने काम में लग गए. इतने में कैप्टन नीरज मेरे पास आया और कहा, ‘‘सर, और कुछ तो मिला नहीं, लेकिन यह डायरी मिली है. मैं मिलिटरी पुलिस की टीम से बचा कर ले आया हूं. सोचा, टीम के देखने से पहले शायद आप देखना चाहें.’’

‘‘गुड जौब, कैप्टन नीरज.’’

‘‘थैंक्स, सर.’’

‘‘कैप्टन नीरज, हैडक्लर्क को मेरे पास भेजो.’’

‘‘राइट, सर.’’

थोड़ी देर बाद हैडक्लर्क साहब आए, सैल्यूट किया और चुपचाप आदेश के लिए खड़े हो गए. मैं ने उन्हें गहराई से देखा और कहा, ‘‘यू नो, व्हाट हैज हैपेंड?’’

‘‘यस सर.’’

‘‘गिव टैलीग्राम टू हर पेरैंट्स. जस्ट राइट डाउन, कैप्टन सरिता एक्सपायर्ड, गिव नियरैस्ट रेलवे स्टेशन ऐंड माई सैल नंबर. डोंट राइट वर्ड सुसाइड.’’

‘‘राइट, सर.’’

‘‘मेक दिस टैलीग्राम मोस्ट अरजैंट.’’

‘‘सर, हम सैल से भी इनफौर्म कर सकते हैं.’’

‘‘कर सकते हैं, पर इस समय हम इस अवस्था में नहीं हैं कि उन से बात कर सकें. जस्ट डू इट, इट इज माई और्डर.’’

‘‘यस, सर,’’ हैडक्लर्क साहब ने सैल्यूट किया और चले गए.

हैडक्लर्क साहब गए तो मेरे सेवादार ने आ कर कहा, ‘‘सर, ब्रिगेड कमांडर साहब आप को याद कर रहे हैं. उन्होंने कहा है, जिस अवस्था में हों, आ जाएं.’’

‘‘उन के साथ और कोई भी है?’’

‘‘सर, बीएम साहब हैं.’’

‘‘ठीक है, तुम उन को औफिस में ले जा कर बैठाओ. उन्हें पानी वगैरह पिलाओ, तब तक मैं आता हूं.’’

‘‘जी, सर,’’ कह कर वह चला गया लेकिन मैं खुद पिछली यादों में खो गया.

अभी पिछले सप्ताह की ही तो बात है, ब्रिगेड औफिसर्स मैस की पार्टी में कैप्टन सरिता ब्रिगेडियर यानी ब्रिगेड कमांडर साहब से चिपक कर डांस कर रही थी. मुझे ही नहीं बल्कि पूरी यूनिट के सभी अफसरों को यह बुरा लगा था. मैं उस का कमांडिंग अफसर था. मेरा फर्ज था, मैं उसे समझाऊं. दूसरे रोज औफिस में बुला कर उसे समझाने की कोशिश भी की थी.

‘यह सब क्या था, कैप्टन सरिता?’

‘क्या था, सर?’ उलटे उस ने मुझ से सवाल किया था.

‘कल रात पार्टी में ब्रिगेडियर साहब के साथ इस तरह डांस करना क्या अच्छी बात थी?’ मैं ने उसे डांटते हुए कहा. कुछ समय के लिए वह झिझकी फिर बड़े साफ शब्दों में बोली, ‘सर, मैं उन के साथ रिलेशन में हूं.’

‘क्या बकवास है यह? जानती हो तुम क्या कह रही हो? तुम कैप्टन हो, वे ब्रिगेडियर हैं. तुम्हारे और उन के स्टेटस में जमीनआसमान का फर्क है. वे शादीशुदा हैं, 2 बच्चे और एक सुंदर बीवी है. तुम उन के साथ कैसे रिलेशन रख सकती हो? थोड़ा सा भी दिमाग है तो जरा सोचो.’

‘सर, उन्होंने कहा है, वे मेरे साथ लिव इन रिलेशन में रहेंगे. वे अपने बीवीबच्चों को भी खुश रखेंगे और मुझे भी.’

‘माइ फुट. वह तुम्हें यूज करेगा और छोड़ देगा. वह मर्द है, सरिता, मर्द. उस को कुछ फर्क नहीं पड़ता, वह चाहे 10 के साथ संबंध रखे. तुम लड़की हो, एक कुंआरी लड़की, तुम्हारा ब्राइट कैरियर है. जरा सोचो, लोग, तुम्हारे मांबाप, समाज, सब तुम्हें उस की रखैल कहेंगे और रखैल को समाज में अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता.’

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