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यम्मी मम्मी करिश्मा

बीते जमाने की मशहूर अभिनेत्री करिश्मा कपूर आज भी उतनी ही युवा और ग्लैमरस दिखती हैं जितनी शादी से पहले दिखती थीं. खबर है कि ‘सरकाए लो खटिया’ गर्ल लोलो मम्मी बनने के अनुभवों को किताब के जरिए दुनियाभर की महिलाओं के साथ साझा करने जा रही हैं. महिलाओं के लिए गर्भावस्था के बाद के सुझावों से भरी उन की किताब ‘यम्मी मम्मी गाइड’ जल्द ही बाजार में आएगी. गौरतलब है कि इस किताब में करिश्मा महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान फिट रहने के तरीकों के अलावा खूबसूरती के नुस्खों से वाकिफ कराएंगी. वाह करिश्माजी, फिल्म न सही पर किताबों के जरिए जागरूक करने का यह अंदाज अच्छा है.

 

बैड गर्ल कंगना

हाल ही में रिलीज हुए फिल्म ‘कृष 3’ के ट्रेलर में ऋतिक रोशन के अलावा दर्शकों का सब से ज्यादा ध्यान कंगना राणावत ने खींचा. हौलीवुड फिल्मों की कैट वुमन सरीखा लुक और हैरतअंगेज स्टंट देख कर हर कोई कंगना के अभिनय की तारीफ कर रहा है. पहली बार विलेन की भूमिका निभा रही कंगना को इस फिल्म में विवेक ओबराय की बैड कंपनी मिली है. बहरहाल, ट्रेलर से मिली तारीफ कंगना को फिल्म की रिलीज तक सुर्खियों में तो रखेगी ही.

 

बी ए पास

‘बी ए पास’ दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में शूट की गई डेढ़ घंटे की छोटी सी फिल्म है, जिस में कोई बड़ा या नामीगिरामी सितारा नहीं है. फिल्म का सब्जैक्ट काफी बोल्ड है. फिल्म में कुछेक सीन्स पौर्न फिल्मों जैसे हैं. लेकिन ऐसे सीन कहानी की मांग हैं, जबरदस्ती नहीं डाले गए हैं. फिल्म में निर्देशक अजय बहल ने यह दिखाने की कोशिश की है कि किस तरह बड़े शहरों की हवा और वहां का कल्चर मासूम युवाओं को अपने कब्जे में ले कर उन्हें गलत रास्ते पर चलने को मजबूर कर देता है.

फिल्म की कहानी 18 साल के नौजवान मुकेश (शादाब कमल) की है जिस के पिता की मौत हो जाती है. उस की मां भी नहीं है. वह अपनी 2 बहनों के साथ चाचाचाची के पास दिल्ली में रहने लगता है. चाची हर वक्त उसे अपना खर्च खुद उठाने के ताने देती है. वह उस की दोनों बहनों को अनाथालय में भेज देती है. एक दिन चाची की फ्रैंड सारिका (शिल्पा शुक्ला) की नजर मुकेश पर पड़ जाती है. वह उसे अपने घर बुलाती है. पहली ही मुलाकात में सारिका मुकेश के साथ शारीरिक संबंध बना लेती है. फिर यह खेल हर रोज शुरू हो जाता है. बदले में सारिका मुकेश को काफी पैसे भी देती है. वह अपनी सहेलियों के फोन नंबर भी मुकेश को देती है. अब मुकेश हर रात सारिका की सहेलियों के साथ सैक्स करता है और खूब पैसे इकट्ठे करता है.

एक दिन सारिका के पति (राजेश शर्मा) को इस बात का पता चल जाता है और मुकेश की जिंदगी खराब हो जाती है. मुकेश की बहनों के बारबार फोन आते हैं कि वह उन्हें आ कर ले जाए परंतु मुकेश के पास पैसे नहीं होते क्योंकि उस ने सारी जमापूंजी सारिका के यहां रखवा दी थी. सारिका से पैसे वापस मांगने पर वह मना कर देती है. मुकेश उस का कत्ल कर देता है. पुलिस उस के पीछे लग जाती है. मुकेश एक छत से कूद कर अपनी जान गंवा देता है.

फिल्म की इस कहानी में दिल्ली की तंग गलियों में निम्न मध्यवर्ग के घर का सटीक चित्रण भी किया गया है जहां गरीबी है, बेबसी है और पैसों की लाचारी है. निर्देशक ने दर्शकों को बांध रखने की कोशिश की है. सैक्समीनिया  से पीडि़त औरतें किस तरह मासूम युवाओं को अपने जाल में फंसा कर उन्हें गलत रास्ते पर चलने को मजबूर करती हैं, इस का अच्छा चित्रण इस फिल्म में है.

पेट की भूख के साथसाथ शरीर की?भूख भी परेशान करती है. इस फिल्म में दीप्ती नवल का एक किरदार है. उस का पति कई सालों से बीमार है. एक जवान बेटा है जो विदेश में रहता है. वह अपनी शारीरिक भूख मिटाने के लिए जब मुकेश से मिलती है तो उस का गिल्ट उसे ऐसा करने से रोकता है. मुकेश की मासूमियत को देख कर वह वहां से लौट जाती है.

‘बी ए पास’ एक डार्क फिल्म है, जिस में समाज में फैली सैक्स विकृति को दिखाया गया है. फिल्म में पहला सैक्ससीन आते ही लगता है, यह तो पौर्न फिल्म देख रहे हैं लेकिन ज्योंज्यों घटनाक्रम आगे बढ़ता है, दर्शकों की उत्सुकता बढ़ती जाती है. ‘चक दे इंडिया’ में अभिनय कर चुकी शिल्पा शुक्ला ने अंतरंग दृश्य दिए हैं. शादाब कमल का काम भी अच्छा है. फिल्म का छायांकन खुद अजय बहल ने किया है, जो काफी अच्छा है.

डांस एकेडमी अवश्य बनाऊंगी- माधुरी दीक्षित

हिंदी सिनेमा जगत में 80 और 90 के दशक में अपनेआप को सिद्ध करने वाली माधुरी दीक्षित अभिनेत्री ही नहीं, कुशल नृत्यांगना भी हैं. अभिनय के साथसाथ उन के नृत्य का जादू इस कदर छाया हुआ है कि आज भी दर्शक उन की एक झलक पाने को लालायित रहते हैं.

फिल्म ‘अबोध’ से कैरियर की शुरुआत करने वाली माधुरी दीक्षित का टर्निंग पौइंट फिल्म ‘तेजाब’ थी. इस के बाद से उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एक के बाद एक सफल फिल्में करती गईं. ‘राम लखन,’ ‘परिंदा,’ ‘त्रिदेव,’ ‘किशनकन्हैया,’ ‘प्रहार,’ ‘दिल,’ ‘बेटा,’ ‘खलनायक,’ ‘हम आप के हैं कौन,’ ‘दिल तो पागल है’ और ‘देवदास’ जैसी कई हिट फिल्में उन के नाम हैं. माधुरी वर्ष 1999 में हार्ट सर्जन श्री राम माधव नेने से शादी कर के अमेरिका चली गईं.

2 बच्चों की मां बन कर भी वे जब बौलीवुड में वापस आईं तो दर्शकों का प्यार उन्हें मिला. दूसरी पारी में वे छोटे परदे से ले कर बड़े परदे दोनों पर विराजमान हैं. इन दिनों वे ‘झलक दिखला जा सत्र-6’ की जज बनने के साथसाथ कई फिल्मों में भी काम कर रही हैं. पेश हैं उन से हुई सोमा घोष की बातचीत के अंश :

आप ‘डांसिंग दीवा’ कहलाती हैं. कितना मुश्किल था यहां तक पहुंचना?

मैं खुश हूं कि दर्शक आज भी मुझे पसंद करते हैं. मेरे काम को सराहते हैं. हर व्यक्ति की अपनी पर्सनैलिटी होती है. अगर आप नृत्य के साथसाथ अच्छा अभिनय भी कर सकते हैं तो आप की राह आसान होती है. डांस में भाव का होना जरूरी है. अगर आप के भाव अच्छे नहीं हैं तो अच्छे डांसर हो कर भी आप कामयाब नहीं हो सकते. मैं एक ऐक्टर और डांसर हूं. इस का लाभ मुझे मिला है. डांस तो आज की हीरोइनें, मसलन, प्रियंका चोपड़ा, कैटरीना कैफ, अनुष्का शर्मा, करीना कपूर, सोनाक्षी सिन्हा आदि सभी करती हैं पर सब का स्टाइल अलग होता है. अगर आप का स्टाइल दर्शकों को भा जाए तो आप सफल हो जाते हैं.

आप को किस का डांस सब से अच्छा लगता है?

ऋतिक रोशन के डांस को पसंद करती हूं. रणबीर कपूर के साथ मैं ने डांस किया है. उस में एनर्जी लेवल बहुत अच्छा है. इस के अलावा कैटरीना कैफ, प्रियंका चोपड़ा और अनुष्का शर्मा के डांस भी पसंद हैं.

कभी आप को खुद की परफौर्मैंस से असंतुष्टि हुई?

बहुत बार होती है. मैं अपने काम की खुद आलोचक हूं. दूसरों की आलोचना आसान है, खुद की कठिन. बहुत बार अपना डांस या अभिनय देख कर मैं सोचती थी कि मुझे और अधिक अच्छा करना चाहिए था.

हाल ही में आप ने मां के साथ गाना गाया है. अनुभव कैसा रहा? क्या आप सिंगिंग में भी अपना हाथ आजमाना चाहती हैं?

फिल्म ‘गुलाबी गैंग’ में एक गाना अपनी मां के साथ गाने के लिए जब निर्देशक ने कहा तो मैं मां के साथ थोड़ी चालाकी कर उन्हें स्टूडियो ले आई और अपनी आवाज में गाने को कहा. पहले मां समझ नहीं पाईं पर जब मैं ने उन्हें राज बताया तो वे हंसने लगीं. दरअसल उन का यह पहला कमर्शियल गीत था और मैं ने भी उन के साथ गा दिया. वे गाना गाती थीं लेकिन उन्हें कभी कमर्शियल गाना गाने का मौका नहीं मिला था. आगे संगीत में जाऊंगी या नहीं, बताना मुश्किल है.

अपने आप को फिट रखने के लिए क्याक्या करती हैं?

मैं हमेशा से हैल्दी रहना पसंद करती हूं. इस प्रोफैशन में फिट रहना जरूरी भी है, क्योंकि कैमरे के आगे डांस, ऐक्टिंग सबकुछ करना पड़ता है. इस के अलावा हैल्दी खाना खाती हूं. वर्कआउट करती हूं और पूरे दिन में?थोड़ाथोड़ा 5 बार खाती हूं.

क्या आप अपने प्रोडक्शन हाउस से फिल्में बनाने वाली हैं?

मैं अपने प्रोडक्शन हाउस से फिल्में कब बनाऊंगी, पता नहीं. पर डांस एकेडमी अवश्य बनाऊंगी ताकि डांस स्टाइल के साथसाथ गुरु के पास जा कर डांस सीखने की कला शिष्यों को समझ में आए. भारतीय डांस सीखना सभी डांसरों के लिए जरूरी है. हमारी अकादमी की शिक्षा गुरुशिष्य परंपरा के आधार पर होगी.

इतने सारे काम करते हुए ‘टाइम मैनेज’ कैसे करती हैं?

हर काम को प्रायोरिटी के अनुसार प्लान करती हूं जिस में बच्चों के साथ रहना, उन की देखभल करना भी शामिल होता है.

आप के लिए नृत्य की अहमियत क्या है?

नृत्य व्यक्ति को फिट रखता है, आनंद देता है. मैं रोज 1 घंटा नृत्य का अभ्यास करती हूं.

आप कोई नया डांस स्टाइल सीखना चाहती हैं?

मुझे टैप डांस सीखना है. मुझे जिम कैली और फ्रेड एस्टेयर के डांस बहुत पसंद हैं. 

ऐसा भी होता है

कुछ दिन पहले की बात है. मैं सब्जी लेने बाजार गई थी. सब्जी वाले ने हिसाब लगा कर मुझ से 300 रुपए देने के लिए कहा. मैं ने उसे रुपए दे दिए और आगे बढ़ गई. जब मैं ने उन सभी सब्जियों का हिसाब जोड़ा तो 350 रुपए हो रहे थे. शायद सब्जी वाला 2-3 सब्जियों की कीमत जोड़ना भूल गया था. मैं फिर उस की दुकान पर गई और उसे उस की भूल समझाते हुए 50 रुपए दे दिए.

दूसरे दिन सुबहसुबह दरवाजे की घंटी बजी. दरवाजा खोला तो सामने अखबार वाला था. वह मुझे अखबार के साथ ही 100 रुपए का नोट थमाते हुए बोला, ‘‘भाभीजी, पिछली बार आप ने 100 रुपए ज्यादा दे दिए थे.’’ मैं हर्षविस्मित खड़ी थी. पति ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘ले लो भई, तुम्हारी ईमानदारी एक ही दिन में दोगुनी हो कर लौट आई है.’’

कुसुम रंगा, मुंबई (महाराष्ट्र)

मेरे दोस्त की बेटी की शादी थी. गीतसंगीत की धुन पर सभी लोग मजा ले रहे थे. तभी पता चला कि कोई मेहमान बाथरूम के अंदर बेहोश हो कर गिर पड़ा है. बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद था. दरवाजा तोड़ कर उस व्यक्ति को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया. मुंह पर पानी के छींटे मार कर होश में लाया गया.

वे सज्जन अधिक शराब पीने से अपना आपा खो बैठे थे. अंगरेजी सीट पर पांवों के बल चढ़ कर बैठ गए. सीट भी टूट गई और स्वयं भी गिर गए. सभी ने उन से जब पूछा कि आप बराती हैं या घराती तो पता चला कि वे न तो बराती थे और न घराती. वे तो ऐसे मेहमान थे जो मुफ्त की पिकनिक मनाने आए थे. पैलेस मालिक ने सीट और दरवाजे टूटने का खर्चा 10 हजार रुपए लड़की वालों पर डाल दिया.

प्रवीण कुमार ‘धवन’, लुधियाना (पंजाब)

एक बार मैं अपने गांव के प्रधान के घर गई. वे भोजन कर रहे थे. एकदो ग्रास लेते ही वे कहने लगे, ‘‘मैडमजी, देखिए, खाने में कोई स्वाद ही नहीं है.’’ प्रधानजी ने बेमन से थोड़ाबहुत खाया और बाकी खाना छोड़ कर चले गए. इस से उन की पत्नी बड़ी दुखी हुईं.

थोड़ी देर बाद उन की काम वाली बाई अपनी 5 साल की बेटी के साथ काम करने आई. खाना बचा हुआ था. वे बाई से बोलीं, ‘‘पहले खा लो फिर काम करो.’’ भोजन कर के उस ने साफसफाई की और बोली, ‘‘मजा आ गया, मालकिन, 2 दिन से खाने को घर में कुछ था ही नहीं, बिटिया ने भी आज भरपेट खाना खाया.’’ यह देख कर मैं सोचने पर मजबूर थी कि किसी के लिए भोजन बेस्वाद था और किसी के लिए वही स्वादिष्ठ.

उपमा मिश्रा, गोंडा (उ.प्र.)

दिन दहाड़े

मैं अपने बिजली के बिल जमा करवाने गया हुआ था. मेरे हाथ में 3 बिल देख कर साथ वाली लाइन में खड़ा लड़का बोला, ‘‘अंकलजी, यहां 2 से ज्यादा बिल एक बार में नहीं लेते. आज आखिरी तारीख है. आप एक बिल मुझे दे दो, मैं अपने बिल के साथ जमा करवा दूंगा.’’

लाइन साथ होने के कारण मैं ने एक बिल और पैसे उस को दे दिए. मेरी लाइन तेजी से बढ़ रही थी इसलिए मेरा नंबर भी जल्दी ही आ गया. बिल जमा कर के मैं जैसे ही मुड़ा तो देखा वह लड़का वहां से गायब है. मैं ने साथ वालों से पूछा तो एक ने बताया कि वह तो पानी पीने को कह कर गया है. काफी प्रतीक्षा के बाद भी उस के न लौटने पर मैं समझ गया कि वह लड़का दिनदहाड़े मेरे पैसे हड़प कर गया है.

मुकेश जैन ‘पारस’, बंगाली मार्केट (न. दि.)

 

एक दिन मैं बैंक गई थी. एक व्यक्ति ने बैंक से 15 हजार रुपए निकाले. कैशियर ने उसे हजारहजार के नोट भुगतान में दिए. व्यक्ति ने नोट लिए व बगैर गिने ही नकदी काउंटर छोड़ दिया. नोट ले कर वह व्यक्ति मुड़ा और नोट गिनतेगिनते मुख्य दरवाजे तक पहुंचा तो पाया कि 14 नोट ही हैं. वह व्यक्ति तुरंत वापस कैशियर के पास पहुंचा और उसे नोट वापस करते हुए बोला कि ये तो 14 नोट ही हैं. कैशियर ने जब नोट गिने तो 14 ही थे. पर उस ने कहा कि मैं ने तो 15 नोट गिन कर दिए थे. ग्राहक ने कहा, ‘‘मैं तो बस नोट गिन कर तुरंत वापस आ गया.’’ कैशियर ने अपना कैश चैक किया तो वह भी सही मिला. कुछ ग्राहक पीडि़त ग्राहक का पक्ष लेने लगे कि इतनी सी देर में वह नोट कहां गायब हो जाएगा. हो न हो कैशियर से ही कहीं चूक हुई है. कैशियर अपनी गलती मानने को तैयार नहीं था.

बात जब मैनेजर तक पहुंची तो सीसीटीवी कैमरे में देखा गया तो पाया कि जब कैशियर ने ग्राहक को भुगतान किया था, ग्राहक के हाथ से एक नोट फिसल कर नीचे गिर गया. ग्राहक निकल कर आगे चला गया. एक लड़का, जो वहीं खड़ा था, और एक औरत, जो वहां उस के साथ बैठी थी, ने नोट गिरते हुए देख लिया. लड़के व औरत में इशारा हुआ. औरत उठी, लड़के ने उसे कवर किया और औरत नोट उठा कर बाहर निकल गई. लड़का भी पेमैंट ले कर बाहर आ गया.

चूंकि वे बैंक के ग्राहक थे, खाते से मोबाइल नंबर देख कर उन्हें बुलाया गया. उन्होंने तुरंत मना कर दिया कि हमें एक हजार के नोट के बारे में कुछ नहीं पता. काफी धमकाने के बावजूद जब उन्होंने नोट नहीं दिया तो उन्हें सीसीटीवी कैमरे की फुटेज दिखाई गई और मामला पुलिस में देने की धमकी दी गई. तब डर कर उन्होंने नोट वापस किया.

अचला गर्ग, जयपुर (राजस्थान)

उन से पूछो

छत की उम्र पूछनी है

तो ढहती दीवारों से पूछ

आग का मतलब पूछ न मुझ से

दहके अंगारों से पूछ

 

पुरखों की संघर्षकथा

कंप्यूटर क्या बताएगा

कैसे मुकुट बचा मां का

टूटी तलवारों से पूछ

 

बड़ेबड़े महलों का तू

इतिहास लिखे इस से पहले

कितने घर बरबाद हुए थे

बेघर बंजारों से पूछ

 

छेनी की चोटों से जितना

रेशारेशा दुखता है

ऊंचा उठने की कीमत तो

जख्मी मीनारों से पूछ

 

ओ मगरूर मुसाफिर, तेरे सफर की

फिर भी कोई मंजिल है

जिस को चलना फकत चलना है

उन तारों से पूछ.

 

 डा. बीना बुदकी

निर्भय बनो

भय से भूत

भय से भगवान भी

तुम डरे हुए हो इतना कि

तुम ने अस्त्रोंशस्त्रों से

भरपूर कर दिया

अपने भगवान को

वो भी आठआठ

हाथ दे कर

ताकि सोलह हाथों से

तुम्हारी रक्षा कर सकें

 

तुम्हारा भय

और उस का निदान

साल में छह माह के उपवास

रक्षा करो, कामना पूर्ण करो

सहायता करो

यदि तुम्हारे भगवान

का चित्र बनाया जाए

तो वो भयपूर्ण होगा

जिसे भय है

उस के हाथों में ढेरों शस्त्र होंगे ही

 

तुम्हारे भगवान

तुम्हारे बनाए तुम्हारे निर्मित और बिठाए

भगवान न हुए

तुम्हारे सुरक्षाकर्मी हो गए

चौबीस घंटे हथियार से सज्जित

आखिर इतने भयभीत क्यों हो

किस बात का डर है

सामना करो और निर्भय बनो.

देवेंद्र कुमार मिश्रा

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