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पाठकों की समस्याएं

मैं 17 वर्षीया 12वीं कक्षा की छात्रा हूं. 4 वर्ष पहले मेरा विवाह हुआ था पर आजकल मैं अपने पति से अलग मातापिता के साथ रहती हूं. यहां मुझे एक लड़के से प्यार हो गया है और मुझे विश्वास है कि वह भी मुझे प्यार करता है. मैं उस से विवाह करना चाहती हूं पर वह यह नहीं जानता कि मैं विवाहित हूं. क्या मैं उसे अपने विवाहित होने के बारे में बता दूं? कहीं वह यह जानने के बाद मुझ से विवाह के लिए इनकार तो नहीं कर देगा? मैं ने अपने पति से तलाक के लिए कहा तो उन्होंने तलाक देने से मना कर दिया. इस स्थिति में मैं क्या करूं?
सब से पहले तो आप यह जान लें कि 13 वर्ष की आयु में हुआ आप का विवाह कानूनन मान्य नहीं है. इसलिए आप को किसी और से विवाह करने के लिए तलाक की भी आवश्यकता नहीं है. जहां तक दूसरे लड़के से विवाह की बात है, पहले यह जान लें कि क्या वह भी आप से प्यार करता है और साथ ही उसे अपने पूर्व गैरमान्य विवाह के बारे में भी बता दें. उस से कुछ भी न छिपाएं. इस के बाद अगर वह लड़का और आप दोनों के परिवार वाले इस विवाह के लिए राजी हों तो आप दोनों विवाह कर सकते हैं.
 
मैं 28 वर्षीया महिला हूं. विवाह को 2 महीने हुए हैं. मेरी समस्या यह है कि मैं जब भी शारीरिक संबंध बनाती हूं तो मुझे बहुत दर्द होता है जिस की वजह से मैं सैक्स क्रिया एंजौय नहीं कर पाती. क्या मेरे साथ कोई मैडिकल समस्या है? मुझे क्या करना चाहिए?
शारीरिक संबंध के दौरान दर्द होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, मसलन, पर्याप्त ल्यूब्रिकेशन का अभाव यानी वैजाइनल ड्राइनैस या पैल्विक मसल्स का टाइट होना या आप की प्रजनन अंगों की संरचना में किसी प्रकार की कमी का होना. इस के लिए आप किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें. वह जांच द्वारा समस्या के कारणों का पता लगा कर निदान बताएंगी. 
इस के अतिरिक्त आप फोरप्ले की समयसीमा बढ़ा कर और डाक्टरी सलाह से पैल्विक फ्लोर एक्सरसाइज के द्वारा भी वैजाइनल ड्राइनैस व पैल्विक मसल्स के टाइट होने की समस्या से निजात पा सकती हैं और सैक्स क्रिया को एंजौय कर सकती हैं.
 
विवाह से पूर्व मैं एक लड़के से बहुत प्यार करती थी और वह भी मुझे बहुत प्यार करता था. अब मेरा विवाह कहीं और हो चुका है और मेरे पति मुझ से बहुत प्यार करते हैं लेकिन मैं उस लड़के को अभी तक भुला नहीं पाई हूं. मैं उस के साथ भी रिश्ता रखना चाहती हूं. लेकिन अब वह मुझ से कोई बात नहीं करना चाहता. मैं क्या करूं?
जब तक आप विवाह से पूर्व के अपने संबंध को पति से छिपा कर रख सकती हैं तब तक आप उस लड़के के साथ संबंध बनाए रख सकती हैं बशर्ते लड़का इस के लिए तैयार हो. लेकिन साथ ही यह भी जान लीजिए कि पतिपत्नी के बीच कोई भी रहस्य लंबे समय तक रहस्य नहीं रह सकता. ऐसे में प्यार करने वाले पति के होते हुए ऐसे लड़के से संबंध रखना, जो अब आप से संबंध नहीं रखना चाहता, आप के लिए बड़ी समस्या का कारण भी बन सकता है. अब निर्णय आप का है कि आप उस लड़के से संबंध रखना चाहती हैं या प्यार करने वाले पति के साथ खुशहाल जिंदगी बिताना चाहती हैं.
 
मैं 21 वर्षीया युवती हूं और मौडलिंग के क्षेत्र में कैरियर बनाना चाहती हूं. मुझे इस के लिए क्या करना चाहिए? सलाह दीजिए.
मौडलिंग के क्षेत्र में कैरियर बनाने के लिए आप का आकर्षक होना, लंबाई 5 फुट 7 इंच होना, फोटोजेनिक चेहरा होना, कैमराफ्रैंडली व आत्मविश्वासी होना जरूरी है. साथ ही, जीवन में हैल्दी डाइट व लाइफस्टाइल का पालन करना जरूरी है. इस के बाद आप किसी प्रोफैशनल फोटोग्राफर से अपना पोर्टफोलियो बनवाएं व ऐड एजेंसी या कोऔर्डिनेटर से संपर्क करें. 
आप मौडलिंग की शुरुआत पत्रपत्रिकाओं, सौंदर्य प्रतियोगिताओं में भाग लेने से कर सकती हैं. आप चाहें तो सफल होने के लिए टे्रनिंग प्रोग्राम में भी हिस्सा ले सकती हैं जिस में ब्यूटी केयर, मेकअप, हेयर स्टाइलिंग, डाइट व ऐक्सरसाइज के अलावा कैमरे का सामना करने की तकनीक भी सिखाई जाती है. इन सब बातों का ध्यान रख कर आप मौडलिंग के क्षेत्र में अपने पैर जमा सकती हैं.
 
मैं विवाहिता हूं. विवाह को 4 वर्ष हो गए हैं. 2 वर्षीय बेटी भी है. पति सेना में हैं. मेरी समस्या यह है कि जब भी पति नौकरी से छुट्टी ले कर आते हैं तो शारीरिक संबंध बनाने में रुचि नहीं दिखाते. इस के पीछे के कारण को मैं नहीं जानती लेकिन उन के इस रवैए के चलते धीरेधीरे मेरा मन भी सैक्स संबंधों से हटता जा रहा है. स्वस्थ सैक्सुअल संबंधों के लिए मैं क्या करूं? कोई राह दिखाइए.
पति से इस बारे में खुल कर बात करें, शारीरिक संबंधों में उन की अरुचि के कारण को जानने की कोशिश करें. सैक्स द्वारा अपने प्यार व भावनाओं को पति के समक्ष प्रदर्शित करें. सैक्स में आप दोनों एकदूसरे से क्या चाहते हैं, खुल कर एकदूसरे को बताएं. हैल्दी सैक्सुअल लाइफ के लिए सैक्स प्रक्रिया में भी नयापन व वैरायटी लाएं. 
सैक्स को केवल बैडरूम की क्रिया न मानें और उसे समयसीमा में न बांधें. एकदूसरे की इच्छाओं का ध्यान रखें. फोरप्ले में अधिक समय लगाएं. माहौल को रोमांटिक बनाएं. साथ ही, स्वस्थ खानपान व फिटनैस का भी ध्यान रखें. अवश्य ही आप के सैक्स संबंधों में सुधार आएगा.
 

इन्हें भी आजमाइए

? कटफ्लावर लगाने के लिए गुलदान की गहराई ज्यादा है तो पेपर नैपकिन के टुकड़े कर के गुलदान में डाल दें. इस से गहराई भी कम हो जाएगी और पेपर तले की नमी को सोख भी लेगा.
? बातचीत के दौरान ध्यान रखना चाहिए कि हम ऐसी बात तो नहीं कह रहे जिस से हमारा हलकापन झलकता हो. बातचीत के दौरान गंभीरता रखी जाए तो गरिमा बढ़ती है.
? खाद्य पदार्थ खाने के लिए कांटे का प्रयोग करें या चम्मच का, यदि आप को समझ में नहीं आ रहा तो हमेशा चम्मच का ही प्रयोग करें.
? साफसुथरी मनोरंजन वाली किताबें अपने पास अवश्य रखें. मन में निराशा पैदा होते ही तत्काल चुटकुले की या मनोरंजन वाली किताब पढ़ें.
? टेबलमैट से मेल खाते रंग के नैपकिन का प्रयोग करें. वैसे भूरे, हरे व हलके गुलाबी रंग के नैपकिन आकर्षक लगते हैं.
? बाथरूम के फर्श के धब्बों और मैल को दूर करने के लिए कपड़े के टुकड़े को मिट्टी के तेल में भिगो कर फर्श पर रगड़ें, फर्श साफ हो जाएगा.
? मोबाइल की बैटरी कम हो रही हो, तो फास्ट चार्ज करने के लिए मोबाइल को एअरोप्लेन मोड में रखें.

मेरे पापा

हम 4 बहनें और 1 भाई हैं. 4 लड़कियां होने के कारण अकसर लोग मेरे पापा से कहते थे कि लड़कियों की शादी जल्दी कर दो, इन को पढ़ा कर क्या फायदा?
मेरे पापा ने इन बातों की परवा न कर के हम सभी को पढ़ने के लिए प्रेरित किया और हमारी प्रत्येक इच्छा को पूरी करने की कोशिश की. हमें लड़की होने की वजह से उन्होंने कभी उपेक्षित नहीं किया. हम बचपन से ले कर आज तक अपने पापा के साथ सब बातें शेयर करते आ रहे हैं.
उन के दिए संस्कारों, प्रेरणा, सहयोग व प्यार की वजह से आज हम सभी भाईबहनें शिक्षित व आत्मनिर्भर हैं. मुझे अपने प्यारे पापा पर गर्व है.
मोनिका सक्सेना, अलवर (राज.)
 
मेरे पापा शहर के जानेमाने डाक्टर और अत्यंत मेहनती इंसान हैं. उन्होंने हम तीन बहनों और मेरे भाई को दिलोजान से पाला है. मेरी शादी हो चुकी है, उन से मुलाकात कम हो पाती है. वे इन दिनों अपने सब्जैक्ट पर किताब लिखने में व्यस्त हैं. किताब अच्छाखासा उन का समय लेती है. मैं इस बार घर गई हुई थी, वे अपनी किताब में कुछ करैक्शन कर रहे थे. कंप्यूटर को ज्यादा न जानने के कारण उन को देर लग रही थी. मैं ने किताब पीडीएफ से वर्ड में कनवर्ट कर दी और अपने घर लौट आई. कुछ दिन बाद उन का फोन आया कि ऐसा करना बहुत लाभकारी रहा. उन के शब्दों में धन्यवाद झलक रहा था. मेरे अंदर आंसू की लहर दौड़ गई कि जिस इंसान ने अपना सारा जीवन हमारी खुशहाली के लिए लुटा दिया, उन्होंने मेरे छोटे से कृत्य को इतना सराहा.
डा. अपर्णा सिंघल, पश्चिम विहार (न.दि.)
 
जब भी मैं चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी  सहपाठियों को कामयाब देखती हूं, जिन्होंने मेरे सैलेक्शन होने के 3 साल बाद मैडिकल जौइन किया था, तो मैं अवसाद से भर उठती हूं. किसी भी टैक्निकल लाइन में जाने की मेरी आकांक्षा थी. गर्ल्स स्कूल में साइंस की पढ़ाई नहीं होने के बावजूद मैं ने स्पैशल परमिशन से जिला स्कूल से 3 साल का कोर्स मात्र डेढ़ साल में पढ़ा और मेरा सैलेक्शन पटना मैडिकल कालेज में हुआ.
लेकिन मेरे पापा के एक छोटे से शब्द ‘न’ ने मेरी सारी आशाओं व आकांक्षाओं पर तुषारापात कर मेरे भविष्य को दांव पर लगा दिया. फिर भी किसी तरह मनोबल को जुटा आगे की पढ़ाई की. बीएससी औनर्स एवं एमएससी बिहार के सब से नामी कालेज से टौप करते हुए पास करने के बावजूद जाति, आरक्षण एवं सिफारिश के कारण एवं कुछ अपनी परिस्थितियों के कारण ढंग से कहीं कुछ नहीं कर पाई.
मेरे पापा की अस्पताल के प्रति गलत धारणा ने मेरे सारे सपनों को ध्वंस कर के रख दिया.
रेणु श्रीवास्तव, पटना (बिहार) 

झुकी झुकी निगाहें

मुझे डर सता रहा है
वो कहीं बदल न जाए
अभी था करीब मेरे
कहीं दूर चल न जाए
देख चांद भी छिपा है
सितारे भी सो रहे हैं
आ जाओ करीब मेरे
कहीं रात ढल न जाए
जो नज्म लिखूं मैं तो
तेरे प्यार में हो डूबी
कोई और इश्क पे
मेरे लिख गजल न जाए
छलकें न अब कभी भी
आंखों से अश्क मेरे
किस्मत कहीं ये मेरी
मुझ को छल न जाए
झुकीझुकी निगाहें और
लबों पे खामोशियां हैं
ये इश्क का जुनू है
कहीं दम निकल न जाए
देख तेरे नाम का दुपट्टा
आज ‘हीर’ ओढ़ती है
सिहर सी इक रगों में
ये दिल मचल न जाए.
 हरकीरत हीर

बच्चों के मुख से

मेरी बेटी तान्या 4 साल की है. मैं उसे नएनए शब्द बोलना सिखा रहा हूं. कभीकभी वह इन शब्दों का प्रयोग गलत क्रम में कर देती है जिस से अर्थ का अनर्थ हो जाता है.
एक दिन हम सड़क से गुजर रहे थे. वहां एक गाय खड़ी थी. मैं बोला कि 
बेटा, गाय के पास से मत जाना, यह ‘खतरनाक’ गाय है. वैसे तो वह गाय से अच्छी तरह परिचित है पर ‘खतरनाक’ शब्द उस के लिए नया था. उस ने पूछा, ‘‘खतरनाक मतलब?’’ 
मैं ने कहा, ‘‘बेटा, इस के सींग बड़ेबड़े हैं, इसलिए यह खतरनाक गाय है.’’
कुछ दिनों बाद उसी गाय ने हमारे क्वार्टर के बाहर गोबर कर दिया. तान्या ने देखा और चिल्लाई, ‘‘पापा, देखोदेखो, गाय ने खतरनाक पौटी कर दी.’’ उस की बात सुन कर हम सब हंसे बिना न रह सके. दरअसल, वह तो कहना चाह रही थी कि खतरनाक गाय ने पौटी कर दी.
राजेश कुमार गुप्ता, पंचकूला (हरियाणा)
 
मेरा बेटा वियतनाम के होचीमिन शहर में रहता है. हम लोग उस के पास घूमने गए थे. मेरा 3 साल का पोता अनिकेत बहुत ही नटखट और हाजिरजवाब है. उसे पैदल चलना अच्छा नहीं लगता.
हम वहां का चिडि़याघर देखने गए. गाड़ी करीब आधा किलोमीटर दूर खड़ी करनी पड़ी. उस के पापा ने उसे गोद में घुमाया. रात में वे कहने लगे, ‘‘इसे गोद में उठाने से मेरे हाथ दर्द कर रहे हैं. सुबह औफिस कैसे जाऊंगा?’’ 
अनिकेत सुन रहा था, झट बोला, ‘‘पापा, औफिस तो पैर से जाओगे, हाथ से थोड़े ही जाना है.’’
उस की उस हाजिरजवाबी पर हम सब खिलखिला कर हंस पड़े.
स्नेहलता आगीवाल, उज्जैन (म.प्र.)
 
मेरा छोटा भाई जग्गी लगभग 6 वर्ष का था जब उस ने छोटी साइकिल पर पैडल मारना सीख लिया था. एक दिन वह पिताजी के पास आया और बोला, ‘‘डैडी, मुझे साइकिल चलानी आती है.’’
डैडी ने कहा, ‘‘अच्छा, चलाओ.’’
इस पर जग्गी ने कुछ संदेह से पूछा, ‘‘पर मुझे चढ़ाएगा कौन?’’ 
वहीं पास में खड़े हमारे बूढ़े माली रहीम काका ने कहा, ‘‘मैं चढ़ा दूंगा.’’ 
जग्गी ने फिर पूछा, ‘‘मुझे उतारेगा कौन?’’ रहीम काका ने कहा, ‘‘मैं उतार दूंगा, भैया. तुम चलाओ.’’ 
जग्गी ने फिर पूछा, ‘‘मेरे पीछेपीछे भागेगा कौन?’’ अब तो रहीम काका भी कुछ जवाब नहीं दे सके और हम सब मुंह छिपा कर हंस रहे थे.
मनोरमा दयाल, नोएडा (उ.प्र.)
 

सूक्तियां

घृणा
हम कुछ आदमियों से इसलिए घृणा करते हैं कि हम उन के बारे में पूरी तरह नहीं जानते और कभी जान भी नहीं सकेंगे, क्योंकि उन से हम घृणा करते हैं.
धारणा
पहली मुलाकात में ही किसी व्यक्ति के बारे में कोई निश्चित धारणा न बना ली जाए, क्योंकि बाद में उस पर अडिग नहीं रहा जा सकता.
गणित
अगर किसी का ध्यान इधरउधर बहुत भटकता हो तो उसे गणित पढ़ना चाहिए, जहां भी जरा ध्यान चूकेगा, फिर शुरू से पढ़ना होगा.
दुख
किसी ने ठीक ही कहा है कि उस दुख से बढ़ कर कोई दूसरा दुख नहीं है जो अपने को व्यक्त न कर सके.
चरित्र
दुश्चरित्र आदमी से न दोस्ती करो न जानपहचान. गरम कोयला जलाता है, ठंडा कोयला हाथ काले करता है.
गौरव
हमारा गौरव कभी न गिरने में नहीं है बल्कि गिर कर उठने में है.
रिवाज
रिवाज अकसर गलती के पुरानेपन के सिवा कुछ नहीं होते.

भीतरबाहर

 
 
पक्षियों सा भरता उड़ान
यह मन का द्वार
खिड़की के उस पार
जब देखता है अनंत आकाश
अभिलाषाएं लेती हैं उफान
जैसे सागर में कोई तूफान
 
पर खिड़की के अंदर
धूमिल सा प्रकाश
भावनाएं तरसती हैं हरपल
पाने को एक अलौकिक प्रकाश
जब देखता है मन
खिड़की के आरपार
 
भीतरबाहर की कशमकश से
मानो पाना चाहता है निजात
लालायित रहता है हर क्षण
छूने को नीला आकाश
यह मन का द्वार
जब देखता है खिड़की के उस पार.
सुशीला श्रीवास्तव

जीने की चाह

 
अपनी शर्तों पर जीने की
एक चाह सब में रहती है
किंतु जिंदगी अनुबंधों के
अनचाहे आश्रय गहती है
 
क्याक्या कहना
क्याक्या सुनना
क्याक्या करना पड़ता है
कितना मरना पड़ता है
 
समझौतों की सुइयां मिलतीं
धन के धागे भी मिल जाते
संबंधों के फटे वस्त्र तो
सिलने को हैं सिल भी जाते
 
सीवन
कौन, कहां, कब उधड़े?
इतना डरना पड़ता है
कितना मरना पड़ता है
 
मेरी कौन बिसात यहां तो
संन्यासी भी सांसत ढोते
लाख अपरिग्रह के दर्पण हों
संग्रह के प्रतिबिंब संजोते
 
कुटिया में कौपीन कमंडल
कुछ तो धरना पड़ता है
जी कर देख लिया जीने में
कितना मरना पड़ता है.
बीना बुदकी
 

भारत को घेरने की अमेरिकी चाल का करारा जवाब

अमेरिकी प्रशासन अकसर यह प्रचार करता रहता है कि भारत की निवेश नीति में खामियों की वजह से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को वहां निवेश में भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है. उस के इस दुष्प्रचार के बावजूद बड़ीबड़ी अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश को प्राथमिकता दे रही हैं. भारत में निवेश कर के वे हमें उपकृत नहीं कर रहीं. उन कंपनियों का सीधा मकसद लाभ कमाना होता है और उन्हें जहां बाजार दिखेगा, कारोबार में लाभ की संभावना दिखेगी, वे किसी की परवा किए बिना वहां निवेश करेंगी.
इन कंपनियों का कहना है कि वे बिना अनुकूल परिस्थितियों के किसी बाजार में नहीं घुसती हैं. भारत में उन्हें पूरी तरह से अनुकूल माहौल मिलता है.
दरअसल, ओबामा सरकार को सिर्फ वही समझ आता है जो उस की नीतियों के अनुकूल होता है. इसी नीति के तहत अमेरिकी वाणिज्य उद्योग मंडल ने भारत से कहा है कि वह अपने कानून में बदलाव करे और निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों को संरक्षण देने की अपनी नीति में सुधार लाए.
अमेरिका की धमकी का जवाब देते हुए वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने हाल ही में उसे स्पष्ट कर दिया है कि यदि अमेरिका को लगता है कि भारत अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है तो वह हमारी शिकायत विश्व व्यापार संगठन यानी डब्लूटीओ में जा कर करे. गिलीड, फोर्ड, आईवीएम जैसी नई बड़ी कंपनियां अमेरिका के रुख के खिलाफ खड़ी हो गई हैं और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि बाजार के लिए बौद्धिक संपदा का संरक्षण आवश्यक है और भारत में कारोबार करते हुए उन्हें कहीं भी लगता नहीं कि भारतीय बाजार में उन के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है. इन कंपनियों ने भारत से यह जरूर कहा है कि वह निवेश की प्रक्रिया को कुछ और सरल बनाए. बहरहाल, यह अमेरिकी चाल है जिस का भारत ने सख्ती से जवाब दिया है.

ई-मोड पर कर्मचारी भविष्य निधि

सार्वजनिक क्षेत्र का कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईएफपीओ जमाने के साथ बदल रहा है. संगठन ने तय कर दिया है कि इस साल अगस्त तक वह पूरी तरह से भविष्य निधि से निकासी की प्रक्रिया को सरल बना कर ई-मोड पर ला देगा.
कर्मचारियों को अब तक भविष्यनिधि की अपनी रकम वापस पाने के लिए तरहतरह के दस्तावेजों के झंझट से गुजरना पड़ता था और सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद उसे उस की कमाई का चैक मिल पाता था. एक तरह से उसे सेवानिवृत्ति पर साबित करना पड़ता था कि उस के भविष्य निधि में जो पैसा है वह उसी के वेतन से काटा गया है, इसलिए इस का भुगतान उसे किया जाना चाहिए.
ईएफपीओ के ई-मोड पर आने से औपचारिकताएं कम नहीं होंगी लेकिन कर्मचारी को इस के लिए अब ईएफपीओ के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. आवश्यक जांचपड़ताल के बाद उस का पैसा सीधे उस के बैंक खाते में पहुंच जाएगा. ईएफपीओ के करीब 93 फीसदी काम ई-भुगतान के जरिए हो रहे हैं लेकिन अगले 3-4 माह में यह कार्यालय पूरी तरह से ई-भुगतान पर निर्भर हो जाएगा. कर्मचारी के भविष्य निधि की रकम का अलग से बैंकड्राफ्ट अथवा चैक बनाने की आवश्यकता नहीं होगी, पैसा सीधे उस के खाते में पहुंच जाएगा.
ईएफपीओ का काम लगातार बढ़ रहा है. पिछले वित्त वर्ष में उस का काम पहले साल की तुलना में 13 फीसदी बढ़ा है और इस में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. समाप्त वित्त वर्ष से पहले इस संगठन ने एक करोड़ लोगों के मामले निबटाए थे जबकि 2013-14 में 1 करोड़ 22 लाख लोगों के मामले सुलझाए हैं. उम्मीद की जा रही है कि ई-भुगतान के जरिए कर्मचारियों की निधि का भुगतान करने से न सिर्फ संगठन की कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि कर्मचारियों को भी इस का सीधा लाभ मिलेगा.
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