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VIDEO: भज्जी-अश्विन का ये इंटरव्यू क्या आपने देखा

टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल मुकाबले से पहले टीम इंडिया के दो दिग्गज स्पिन गेंदबाज आर अश्विन और हरभजन सिंह ने एक दूसरे के साथ अपने अनुभव साझा किये. दोनों ही खिलाड़ियों ने एक दूसरे की खूबियों के बारे में बात की, इसके साथ ही एक दूसरे के शानदार पलों के बारे में भी चर्चा की. अश्विन ने पंजाबी बोलने की कोशिश की तो भज्जी तमिल बोलने की कोशिश करते दिखे.

अश्विन और भज्जी ने नेट्स पर सबसे ज्यादा परेशान करने वाले बल्लेबाज के बारे में भी बात की. दोनों का मानना है कि नेट्स पर विराट कोहली सबसे ज्यादा परेशान करता है. वह आउट होने के बाद गुस्सा हो जाता है और कभी नहीं मानता है कि वह आउट हो गया है.

वहीं सबसे ज्यादा झुंझलाहट देने वाला खिलाड़ी रवींद्र जडेजा को बताया. दोनों ने कहा कि जब वह गेंदबाजी करता है तो उसे लगता है हर गेंद पर विकेट लेता है और जब बल्लेबाजी करता है तो हर गेंद को बाउंड्री को पार करता है. भज्जी जहां अश्विन से कैरम बॉल फेंकना सीखना चाहते हैं, जबकि अश्विन भज्जी से दूसरा फेंकना सीखना चाहते है. इस इंटरव्यू में बहुत कुछ खास है आप भी देखिये.

सूरज की रोशनी से साफ होंगे कपड़े

आज कपड़ों की सफाई और उन की क्वालिटी बरकरार रखने के लिए डिटर्जेंट के अलावा कई तरह के अलगअलग प्रोडक्ट उपलब्ध हैं, लेकिन इस के बावजूद कपड़ों की सफाई के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है. लेकिन अब वह दिन दूर नहीं है जब कपड़ों की सफाई और उन पर लगे दाग को छुड़ाने की टेंशन से मुक्ति मिल जाएगी. अब ना करना पड़ेगा डिटर्जेंट का इस्तेमाल और ना ही घसघस कर दाग छुड़ाने की मेहनत. बिना कुछ किए कपड़े साफ और चमकदार बनेंगे.

अब आप सोच रहे होंगे भला ऐसा कैसे हो सकता है कि बिना कुछ किए कपड़े साफ हो जाएंगे. दरअसल शोधकर्ताओं ने कपड़ों की सफाई का एक नया विकल्प खोज निकाला है. मेलबर्न के आरएमआईटी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने विशेष नैनो तकनीक से एक ऐसा कपड़ा तैयार किया है जो बल्ब की रोशनी या धूप में रखने पर 6 मिनट के अंदर खुद से साफ होगा.

शोधकर्ताओं ने यह कपड़ा चांदी और तांबा आधारित नैनो संरचनाओं में विकसित किया है जो प्रकाश सोखने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं. जब इन नैनो संरचनाओं पर रोशनी पड़ती है तो इन में ऊर्जा के संचार से गर्म इलेक्ट्रौन निकलते हैं, ये गर्म इलेक्ट्रौन ऊर्जा का संचार करते हैं, जिस से ये कपड़ा कार्बनिक पदार्थों (धूलमिट्टी) को हटा देता है.

शोधकर्ताओं के इस दल में एक भारतीय मूल के वैज्ञानिक राजेश रामनाथन भी शामिल हैं. यह शोध एडवांस मैटेरियल इंटरफेसेस जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

ट्रक पर मकान, महज 66 रुपए में

क्या कभी आप ने मकान को सड़कों पर ट्रैवल करते हुए सुना है. सुन कर आप को हंसी आ रही होगी. आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कभी संभव ही नहीं हो सकता क्योंकि सड़कों पर तो सिर्फ इंसान ही चलते फिरते व गाड़ियां फर्राटे से दौड़ सकती हैं.

तो आप को बता दें कि ये कोई मजाक नहीं बल्कि हकीकत है. जैसे आप सुन कर दंग रह गए हैं वैसे ही जब अमेरिका राज्य कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में एक मकान को ट्रक पर यात्रा करते हुए लोगों ने देखा तो वे भी हैरान रह गए. उन्हें अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हुआ. इस के लिए वे अपनी गाड़ियों से उतर कर इस अद्भुत नजारे को देखने लगे.

असल में पूरा माजरा यह है कि रियल एस्टेट डेवलपर सैंग फैम ने 5 मकान किराए पर देने के लिए खरीदे हैं, जिस में से ट्रक पर लाद कर ले जाने वाले मकान का वजन 11 टन है, जिसे उन्होंने सिर्फ 1 डौलर यानी 66 रुपए में खरीदा है.

अब आप सोच रहे होंगे कि भला एस्टेट डेवलपर इसे ऐसे लाद कर कहा ले जा रहा होगा तो आप को बता दें कि वे इसे अपने कई किलोमीटर दूर चुला विस्टा स्थित अपने मकान पर ले गए हैं. यह मकान कोई आज का बना हुआ नहीं है बल्कि 90 साल से भी अधिक पुराना है.

इस मकान की मालकिन ने बताया कि उन्हें इस मकान को बेच कर काफी फायदा हुआ है क्योंकि अगर वे दूसरा मकान बनवाने के लिए इसे गिरवाती तो उन्हें ज्यादा खर्च करना पड़ता, तो ऐसे में उन्हें यह सौदा बुरा नहीं लगा. सैन डिएगो ने बताया कि भले ही उन्हें इस मकान को शिफ्ट करने में 20 लाख रुपए लगे लेकिन ये मकान लुक वाइज इतना मस्त है कि कोई भी किराएदार इस मकान में रहने के लिए रेडी हो जाएगा.

मेरी समस्या यह है कि मेरे चेहरे की त्वचा पर ओपन पोर्स हैं, जिससे त्वचा खराब दिखती है.

सवाल

मैं 20 वर्षीय युवती हूं. मेरी समस्या यह है कि मेरे चेहरे की त्वचा पर ओपन पोर्स हैं, जिन की वजह से त्वचा खराब दिखती है और मेकअप भी अच्छा नहीं दिखता है. मैं ऐसा क्या करूं, जिस से मेरी समस्या का समाधान हो?

जवाब

त्वचा पर ओपन पोर्स की समस्या ज्यादा स्क्रबिंग की वजह से होती है. स्क्रबिंग के बाद अगर त्वचा के ओपन पोर्स को क्लोज करने के लिए पैक न लगाया जाए तो त्वचा पर ओपन पोर्स हो जाते हैं. इस समस्या के समाधान के लिए आप 1 चम्मच टमाटर का रस, 1 चम्मच मैदा और थोड़ा सा गुलाबजल मिला कर चेहरे पर लगाएं. जब पैक सूख जाए तो पानी से मसाज करते हुए चेहरे को धो लें.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

 

शरद मल्होत्रा की नई प्रेमिका युविका चौधरी…!

वक्त बदलते देर नहीं लगता. एक वक्त वह था जब टीवी कलाकार शरद मल्होत्रा और टीवी कलाकार दिव्यंका त्रिपाठी एक दूसरे के प्यार में आकंठ डूबे हुए थे. यहां तक कि दोनों जल्द शादी करेगें, ऐसी खबरे भी आ गयी थी. लेकिन एक साल पहले दोनों के बीच अलगाव हो गया था. दोनो एक दूसरे का चेहरा भी देखना नहीं चाहते थे. पर इस साल की शुरूआत होते ही पता चला कि दिव्यंका त्रिपाठी ने अपने लिए नया प्रेमी ढू़ढ़ लिया है. फिर जब जनवरी माह में जैसे ही दिव्यंका त्रिपाठी ने अपने नए प्रेमी व अभिनेता विवेक दहिया के संग सगाई की, वैसे ही शरद मल्होत्रा ने उनके खुशी जीवन की कामना करने में देर नही लगायी.

पर अब खबर मिली है कि शरद मल्होत्रा ने भी अपनी जिंदगी को संवारने के लिए युविका चौधरी के रूप में नया प्रेम पा लिया है. सूत्रों की माने तो शरद मल्होत्रा, युविका चैधरी के संग प्रेम की रास लीला खेल रहे है, पर वह अब तक इस पर पर्दा डाले हुए थे. सूत्रों की माने तो शरद मल्होत्रा चाहते थे कि पहले दिव्यंका त्रिपाठी की जिंदगी संवर जाए, तब वह अपने नए रिश्ते की भनक लोगों को लगने देंगे.

सूत्रों के अनुसार शरद मल्होत्रा और युविका दोनों एक दूसरे को ‘जी सिने स्टार की खोज’ के वक्त से जानते हैं. दोनों के बीच शुरू से ही अच्छे संबंध रहे हैं और इन दिनों दोनों ‘बीसीएल क्रिकेट’ के लिए ‘बाबू मोशाय टीम’ के साथ खेल रहे हैं. इस खेल के दौरान ही दोनों के करीबी हो जाने की बात कही जा रही है. मगर शरद मल्होत्रा अभी भी इस रिश्ते से इंकार कर रहे हैं. शरद मल्होत्रा कहते है-‘‘हमारे बीच सिर्फ दोस्ती का रिश्ता है. हम दोनों एक ही टीम के लिए क्रिकेट खेल रहे हैं, इसलिए हमारी टीम के कुछ सदस्य व हमारे कुछ दोस्त हमारे रिश्ते की खबर मजाक के तौर पर फैला रहे हैं. इसे सच न माने.’’ पर टीवी इंडस्ट्री में चर्चाएं तो इससे भी आगे की हो रही हैं. कुछ सूत्र दावा कर रहे हैं कि युविका चौधरी की ही वजह से दिव्यंका व शरद के बीच अलगाव हुआ था. अब इस खबर में कितनी सच्चाई है, यह तो दिव्यंका या शरद या वक्त ही बता सकता है.

यह सभ्य समाज की पहचान नहीं

क्या हम सभ्य हैं? सवाल इसलिए पूछा जा रहा है कि देश की राजधानी दिल्ली तक में छेड़खानी के मामलों में सजा पंचायतें मुंह पर कालिख पोत कर व जुर्माना लगा कर दे रही हैं. जातियों  महल्ले की पंचायतों को कंगारू कोर्टों में बदल दिया गया है जिन में औरतें धमकियों से काम कर रही हैं.

यह उस सभ्यता की निशानी है जिस पर हम विश्वगुरु होने का दावा करते हैं. आरोप लगाया गया कि सभ्य टाइप की एक कालोनी में एक बुजुर्ग ने एक 17 वर्षीय लड़की को छेड़ दिया. इस घटना के बाद वहां के एक सबला संघ की सदस्याओं ने बुजुर्ग की पत्नी को धमकाया कि पंचायत के दफ्तर आओ. वहां बुजुर्ग पर क्व50 हजार का जुर्माना ठोंक दिया गया और माफी भी मंगवाई गई. जुर्माना न दे पाने पर उस के मुंह पर कालिख पोत दी गई. बाद में बुजुर्ग और उस की पत्नी ने पुलिस के माध्यम से अदालत में गुहार लगाई. मामला क्या था, यह छोडि़ए. सवाल तो यह है कि क्या विवादों को हल करने के उपाय इस तरह के हथकंडे बचे हैं, जिन में घरेलू औरतें गुट बना कर गुलाब गैंग की तरह विवादों पर फैसले देंगी? क्या देश के कानून, पुलिस और अदालतों से लोगों का विश्वास इस कदर उठ गया है कि हर महल्ले में पंचायत बनेगी और हर फैसला खाप पंचायतों की तरह बिना वकील, बिना दलील और बिना कानून के होगा?

क्या देश की सामाजिक व्यवस्था बड़बोले खाली बैठे लोगों के हाथों में सौंप दी जाएगी जो मनमाने फैसले उसी समाज में रहते हुए करेंगे और तुरंत सजा भी दे देंगे ताकि न अपील का समय हो और न जगह? यह सभ्य समाज की पहचान तो नहीं है. इस से तो महल्लेमहल्ले, कालोनीकालोनी में दबंग औरतों और आदमियों का राज हो जाएगा. जहां 10 लोग मिले वे अपनी अदालत बना लेंगे और बिना किसी प्रक्रिया के, बिना सफाई का मौका दिए, जो मजबूत होगा, जो पंचों को खरीद सकेगा और जो ज्यादा रोना रोएगा उसे अपना मनचाहा फैसला मिल जाएगा.

क्या देश की पुलिस और कानून व्यवस्था इस तरह जंग खा गई है और इस तरह भ्रष्ट हो गई है कि लोगों ने पंचायतों का गठन उन जगहों पर करना शुरू कर दिया है, जहां अदालतें आसपास ही हैं? अगर ऐसा लगातार चलता रहा तो देश को नष्ट होने में समय न लगेगा. यह असल में पूरी सरकार पर एक धब्बा है. हमारी राजनीति पूरी तरह फेल हो गई है. हम अराजकता की ओर बढ़ रहे हैं या यों कहिए कि अराजकता के युग में पहुंच गए हैं और कबिलाई संस्कृति अपनाने को मजबूर हैं, जहां कबीले के दबंग लोग न्याय दिलाने लगे हैं. इस से बुरी स्थिति केवल पश्चिमी एशिया में है जहां फैसले गोलियों और तोपों से किए जाते हैं. यह तो हमारी सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर ऐन अदालत के अंदर होने लगा है, जहां न्याय न्यायाधीश की कलम से नहीं काले कोट वालों द्वारा बिना दलील के बाहर लातोंमुक्कों से दिया जा रहा है, कबिलाई ढंग से.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय और हैदराबाद विश्वविद्यालय के मामले भी यही दर्शा रहे हैं कि जो दिल्ली की पंचायतों में हो रहा है वह कोई अजूबा नहीं है

गुवाहाटी: पूर्वोत्तर राज्यों का दरवाजा

असम को पूर्वोत्तर का गेटवे कहा जाता है. प्राचीन इतिहास के अनुसार इस का नाम  प्राग्ज्योतिषपुर के नाम से जाना जाता था. थाईलैंड की अहोम जाति द्वारा इस क्षेत्र पर कब्जा जमा कर अपना राज कायम करने के बाद से इसे असम या आसाम के नाम से जाना जाता है, इसलिए यहां थाई संस्कृति का असर देखने को मिलता है. असम का सब से बड़ा आकर्षण हरेभरे जंगल, चाय के बागान और विभिन्न प्रकार के वन्य जीवन हैं.

असम राज्य पूर्वोत्तर के सभी राज्यों से क्षेत्रफल की दृष्टि में ज्यादा बड़ा है. पूर्वोत्तर के सभी प्रमुख राज्यों में यहीं से हो कर गुजरना होता है. इस की जीवनधारा मानी जाने वाली ब्रह्मपुत्र नदी इस के बीचोंबीच से हो कर निकलती है.

गुवाहाटी असम के पूर्वोत्तर राज्यों की वाणिज्यिक राजधानी है. असमिया में गुवा का अर्थ होता है अखरोट और हाटी का अर्थ बाजार. हिमालय पर्वतमाला के पूर्व में स्थित इस शहर को पूर्वोत्तर राज्यों का दरवाजा माना जाता है. गुवाहाटी की जलवायु सबट्रापिकल है. यहां गर्मियों में तापमान 22 से 39 डिगरी सेल्सियस और सर्दियों में 10 से 25 डिगरी सेल्सियस हो जाता है.

यहां कलाक्षेत्र म्यूजियम, उमानंद, गुवाहाटी तारामंडल, गुवाहाटी चिडि़याघर आदि देखने लायक हैं. यहां नगर भ्रमण के लिए सिटी बस एक अच्छा साधन है.

दर्शनीय स्थल

पोबितरा वन्यजीव अभयारण्य : भारत के पूर्वोत्तर राज्य के मारीगांव जिले में स्थित यह अभयारण्य गुवाहाटी से 50 किलोमीटर दूर नौगांव और कामरूप जिले की सीमा पर स्थित है. यहां जाने का सब से अच्छा समय नवंबर से मार्च के बीच है. पोबितरा मुख्य रूप से एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध है. गैंडे के अलावा अन्य जानवरों जैसे, एशियाई बफैलो, तेंदुए, जंगली भालू आदि भी यहां के निवासी हैं.  गुवाहाटी से यहां आने के लिए कई निजी होटल बजट के अनुकूल होने के कारण लक्जरी प्रदान करते हैं.

तेजपुर : गुवाहाटी से 180 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तेजपुर सोनितपुर जिले में स्थित है. तेजपुर का असम के इतिहास में प्रमुख स्थान है. यह असम के खूबसूरत शहरों में से एक गिना जाता है. तेजपुर असम का वह छोर है जिस के आगे से अरुणाचल प्रदेश आरंभ हो जाता है. यहां का अग्निगढ़ किला सब से सुंदर पर्यटन स्थल है. भोमोरागुरी मे एक विशाल पत्थर पर उकेरा हुआ शिलालेख देखा जा सकता है. यहां से 65 किलोमीटर दूर ओरंग राष्ट्रीय उद्यान स्थित है जो 72 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां पूर्वोत्तर के मानसूनी मौसम का पर्यटक पूरा फायदा उठा सकते हैं.

काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क : 1940 में वन्यजीव अभयारण्य के तौर पर घोषित काजीरंगा पार्क एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध है. तीनों एशियाई गैंडों में यहां पाया जाने वाला सब से बड़ा गैंडा देखने के लिए पर्यटकों की अच्छी- खासी भीड़ जुटती है. गुवाहाटी से 217 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह पार्क जोरहाट हवाई अड्डे से 96 किलोमीटर की दूरी पर है. इस का नजदीकी रेलवे स्टेशन फुरकटिंग है. यहां पर्यटन के लिए सब से उपयुक्त समय नवंबर से अप्रैल का माना जाता है. पर्यटकों के लिए यहां रहने के लिए वन विश्राम गृह, लाज, होटल उपलब्ध हैं. इस अभयारण्य को हाथी पर सवार हो कर देखा जाता है साथ ही जीप सफारी भी उपलब्ध हैं जिन्हें विभिन्न लाजों द्वारा बुक करवाया जाता है. 

हाफलांग : 680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हाफलांग एक पहाड़ी पर्यटन स्थल है. हाफलांग गुवाहाटी से 345 किलोमीटर दूर है. यहां बेहद खूबसूरत हाफलांग झील है. इस झील की खूबसूरती के कारण हाफलांग को असम का स्काटलैंड कहा जाता है. झील में नौकाविहार करना पर्यटकों को लुभाता है. इस झील के पास ही एक गरम पानी का सोता है जिस का अपना एक अलग आकर्षण है. हाफलांग में पैराग्लाइडिंग, ग्लाइडिंग और ट्रैंकिग की प्रमुख गतिविधियां भी चलाई जाती हैं.

ए4 साइज़ पेपर में समाती कमर

एक समय वह था जब करीना के जीरो साइज़ फिगर का क्रेज लड़कियों के सर चढ़ कर बोल रहा था … और आज बदलते फैशन के दौर में फिगर को लेकर कोई भी समझौता  न करने वाली लड़कियां  जिम, योगा और फिटनेस क्लास लेकर अपनी बॉडी को शेप में देने की होड़ में लगी हैं. परफेक्ट फिगर को लेकर इन दिनों चीन की लड़कियों ने  एक नया फार्मूला इजाद किया है, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर 'A4 Waist Challenge' नाम से धूम मचा रहा है.

वैसे यह चौंकाने वाली बात है कि उन्होंने कागज़ के जिस आकार को मानक बनाया है, उसकी वास्तविक चौड़ाई 21 सेंटीमीटर है. कुछ लोग इस क्रेज को स्वास्थ्य के लिए खतरा व ग़ैरज़िम्मेदाराना और बीमार होने का कारण भी बता रहे हैं. लेकिन इस ट्रेंड दीवानी लड़कियां बेझिझक अपनी ए4 साइज पेपर के साथ तस्वीरों को इंस्टाग्राम और दूसरी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर शेयर कर रही हैं,जिन्हें अन्य  लड़कियां भी काफी पसंद कर रही हैं.

अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपनी हेल्थ को महत्व देंगी या ए4 साइज़ के पेपर की चौड़ाई में समा कर परफेक्ट फिगर की केटेगरी में शामिल होना चाहेंगी.

पति को मोटा हाथी कहने वाली पत्नियां संभल जाएं

पत्नी पर पति के शारीरिक और मानसिक अत्याचार के मामले तो सुनने में आम आते हैं लेकिन पत्नी  के अत्याचार से आहत एक पति ने हाल में ही एक ऐसा मामला दर्ज कराया जहाँ दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने महत्‍वपूर्ण फैसले में कहा कि एक महिला द्वारा पति के शारीरिक स्‍थिति का मजाक उड़ाना, उसे मोटा हाथी एलीफैंट, गैंडा या अन्‍य किसी नाम से संबोधित कर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और विरोध करने पर उसे दहेज के झूठे केस में फंसाने की धमकी देना इत्‍यादि तलाक का ठोस आधार हो सकते हैं. पति से मारपीट और संपत्‍ति जबरन अपने नाम पर कराने के लिए झूठे केस की धमकी देना और शारीरिक संबंधों से इंकार करना भी पति के प्रति क्रूरता है.

दरअसल ,मामला कुछ ऐसा था पूर्वी दिल्‍ली निवासी सुजीत (काल्‍पनिक नाम) की शादी 3 फरवरी 2005 को सीमा (काल्‍पनिक नाम) से हुई थी. 30 दिसंबर 2005 को उन्‍हें एक बेटा पैदा हुआ. पति ने अदालत में सीमा से तलाक के लिए अर्जी दायर की थी.पति का कहना था कि शादी के बाद पत्‍नी का व्‍यवहार बदल गया और वह उसे मोटा हाथी, एलीफेंट कहकर चिढाने लगी. वह अक्‍सर झगड़ा होने पर कहती कि मोटा हाथी किसी काम का नहीं है. वह परिवार को तंग करती और उसे पीटती भी थी. विरोध करने पर आत्‍महत्‍या व दहेज के झूठे केस में फंसाने की धमकी देती. कभी उन पर उनकी संपत्‍ति को उसके नाम करने का दबाव भी डालती.

आखिर कब मिलेगी महिलाओं को घुटन से आजादी

महिलाएं लाख पढ़ लिख जाएं, कामयाबी की बुलंदियां छू लें, अपने पति के कंधे से कंधा मिला कर चलें, मगर पुरुष वर्चस्व वाले इस समाज में अभी भी स्त्रीपुरुष समानता और आजादी महज भुलावे के कुछ और नहीं. इस हकीकत की पुष्टि आए दिन हम अपने आसपास घट रही वारदातों से कर सकते हैं.

ईस्ट दिल्ली के कपिल शर्मा ने गत 24 मार्च को अपनी पत्नी, पार्वती की मुंह दबा कर हत्या कर दी. वजह थी कि वह मां नहीं बन पा रही थी. प्रेग्नेंसी टर्मिनेट हो जाने पर गुस्से में पति ने पत्नी का खून ही कर दिया, जबकि कपिल इस से पहले अपनी पूर्व पत्नी की दहेज हत्या करने के आरोप में 7 साल की सजा काट चुका था.

हाल ही में मौडल प्रियंका की मौत का मामला भी काफी सनसनीखेज रहा है. पुलिस तहकीकात में यह बात सामने आ रही है कि यह आत्महत्या के बजाए हत्या का मामला है. प्रियंका के सुसाइड नोट में साफ लिखा है कि शादी के एक माह बाद ही उस के पति नितिन ने उसे राक्षस की तरह मारा. उस की जिंदगी पर दहशत और खौफ का पहरा बिठा दिया. जाहिर है, प्रियंका की मौत का जिम्मेदार उस का पति ही है, जिस से प्रियंका ने प्रेमविवाह किया था.

अप्रैल 2015 में उन की मुलाकात हुई थी. प्रियंका 25 की और नितिन 38 साल का था. उम्र के इस फासले और परिवार के एतराज के बावजूद प्रियंका ने बस एक भरोसे पर जनवरी 2016 को उस से शादी की. इस के बाद ही नितिन का शक्की मिजाज उभर कर सामने आने लगा. उस ने प्रियंका पर बंदिशें लगानी शुरू कर दीं. दोस्तों से मिलनाजुलना बंद करा दिया. फेसबुक और ट्विटर पर भी रोक लगा दी. वह प्रियंका को टौर्चर करने लगा.

स्त्रियों के साथ हिंसा, मारपीट, सेक्सुअल व मेंटल हैरसमेंट, रेप, किडनैपिंग जैसी घटनाएं देश के हर हिस्से में कायम है. खुद देश की राजधानी दिल्ली में ही हालात बहुत खराब हैं, निर्भया रेप और मर्डर केस के बाद कड़े कानूनों के बावजूद दिल्ली में दूसरे अपराधों के साथसाथ सैक्सुअल हैरेसमेंट भी एक बड़ी समस्या है. हाल ही में अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के महेश नल्ला और स्टौकटन यूनिवर्सिटी के मनीष मदान द्वारा एक सर्वे किया गया, जिस में दिल्ली के 1400 लोगों से बातचीत की गई. इस सर्वे में पाया गया कि 40% महिलाओं को पिछले साल किसी न किसी रूप से सेक्सुअल हैरसमेंट का शिकार बनना पउ़ा, तो वहीं 58% महिलाएं अपनी जिंदगी में कम से कम एक बार सेक्सुअल हैरसमेंट का शिकार हो चुकी हैं. उत्पीड़न के डर से 33% महिलाओं ने पब्लिक प्लेस पर जाना छोड़ दिया जबकि 17% तो ऐसी रहीं, जिन्होंने सार्वजनिक जगहों पर होने वाले हैरसमेंट का सामना करने के बजाए अपनी नौकरी छोड़ना बेहतर समझा.

सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक महिलाएं ऐसी ही घुटन भरी जिंदगी जीती रहेंगी? सिर्फ कानून बनाने या सजा देने से इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता. इस के लिए जरूरी है, लोगों की सोच और मानसिक प्रवृत्ति में बदलाव लाना. बचपन से घर में लड़के लड़की के बीच किए जा रहे भेदभाव को मिटाना.

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