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छोटी बचत योजनाओं पर फिर चली कैंची

सरकार छोटी बचत योजनाओं पर कैंची चला रही है. छोटे उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करने के बजाय उन्हें हतोत्साहित किया जा रहा है. छोटी बचत के लिए गांवगांव तक फैले डाकघरों के नैटवर्क का ग्रामीण खासा इस्तेमाल करते थे लेकिन डाकघर अब अनुपयोगी हो गए हैं और यह नैटवर्क लगातार घट रहा है. डाकघरों की घटती संख्या के साथ ही सरकार ने डाकघर बचत योजनाओं पर भी कैंची चलानी शुरू कर दी है. इस क्रम में छोटी बचत के लिए लोकप्रिय रहे राष्ट्रीय विकास पत्र, किसान विकास पत्र जैसी लघु बचत की योजनाओं को हतोत्साहित करने के लिए उन की ब्याज दरों में कटौती की गई और उस का यह क्रम लगातार जारी है. हाल ही में सरकार ने किसान विकास पत्र की 1 से 3 साल तथा अन्य बचत योजनाओं में 5 साल की अवधि की बचत लघु योजना की ब्याज दर पर एकचौथाई कटौती की है.

सरकार का यह कदम संकेत देता है कि लघु बचत का अब कोई महत्त्व नहीं रह गया है. लोगों की आय बढ़ रही है और उन के लिए बैंक ज्यादा सुविधाजनक हैं. इसीलिए इन बचत योजनाओं की ब्याज दरों में लगातार कटौती की जा रही है. पहले 5 साल में जमा राशि के दोगुना होने वाली छोटी बचत योजनाएं अत्यधिक लोकप्रिय थीं. धीरेधीरे यह अवधि 7-8 साल की हुई और फिर इस में ब्याज दरें और घटा दी गईं. अब ये योजनाएं जनसामान्य के लिए नाममात्र की रह गई हैं. सरकार को लोगों में बचत को प्रोत्साहित करने की ईमानदार योजनाएं जारी रखनी चाहिए. इन योजनाओं के बंद होने से लोग छोटीमोटी बचत का पैसा शेयर बाजार अथवा जमीन की खरीद पर लगा रहे हैं जिन में फंस कर सामान्य आदमी दिवालिया भी हो रहा है.

त्वरित टिप्पणी: कोलकाता के बड़ा बाजार में फ्लाईओवर गिरा

मध्य कोलकाता के जोड़ासांकू में निर्माणाधीन विकेकानंद फ्लाईओवर अचानक गिर पड़ा. दोपहर 12 बजे अचानक शक्तिशाली बस फटने की-सी आवाज आयी. कुछ समझने से पहले भयावह नजारा देख कर लोगों के होश उड़ गए. फ्लाईओवर दुर्घटना का नजारा बड़ा भयावह है. इलाके के चश्मदीदों के अनुसार फ्लाईओवर गिरने के साथ पूरा इलाका भूकंप के जोरदार झटकों की तरह कांप गया था. इसके बाद चारों तरफ फैले धूल के गुब्बार के बीच लाखों और घायलों का ढेर से जाहिर है स्थानीय लोगों के बीच आतंक का माहौल है. माना जा रहा है, इतने बड़े पुल के गिरने से आसपास के घरों पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं. गौरतलब है कि यह इलाका घनी आबादी वाला है और रिहाइशी घरों के साथ थोक बाजार की दुकानें भी हैं. फिलहाल 15 लाशे निकाली गयी हैं. फ्लाईओवर के नीचे सैंकड़ों लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है.

मौके पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद हैं. लेकिन इस घनी आबादी वाले इलाके में राहत कार्य के लिए पूरा इंतजाम न होने के कारण फायर ब्रिगेड और पुलिस ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं. इसके बाद राज्य सरकार ने सेना बुलाने का फैसला किया है. दोपहर तीन बजे की खबर है कि फोर्ट विलियवम से सेना की तीन टुकड़ी राहत कार्य के लिए अत्याधुनिक साज-सामान लेकर रवाना हो चुकी है.

बहरहाल, स्थानीय लोगों की मदद से लाश निकालने का काम जारी है. कुछ घायलों को कोलकाता मेडिकल कौलेज अस्पताल में भरती किया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है. यह इलाका कोलकाता का प्रख्यात थोक बाजार बड़ा बाजार का हिस्सा है. सालों से फ्लाईओवर का निर्माण अधूरा पड़ा था. 2009 से फ्लाईओवर बनाने का काम शुरू हुआ था, लेकिन पिछले 4-5 सालों से यह काम अधूरा पड़ा है. जबकि 2012 में इसे पूरा हो जाना था.

यह रास्ता वनवे है और हावड़ा की ओर जाने वाली मिनी बस, कार और राज्य परिवहन विभाग की बस चल रही थी. इस समय कई बसें फ्लाईओवर के नीचे दबीं पड़ीं हैं. इन बसों में कुछ लोग दब कर मर गए हैं वहीं बहुत सारे लोग जिंदा भी है. इन बसों में स्कूली बच्चे भी हैं, जो कोलकाता के स्कूलों में पढ़कर हावड़ा घर लौट रहे थे. घटना के दो घंटे के बाद गैस कटर मौके पर पहुंचा है. इलाके लोगों में जबरदस्त रोष है.

बीच चुनाव के मद्देनजर राजनीति भी शुरू हो गयी है. विपक्षी पार्टियों के नेता इलाके में पहुंच रहे हैं. कोलकाता कारपोरेशन के मेयर शोभनदेव चटर्जी का लोगों ने घेराव किया. इस फ्लाईओवर का निर्माण वाम मोर्चा शासनकाल में शुरू हुआ था. लेकिन 2011 में तृणमूल के सत्ता में आने से पहले ही काम रुका पड़ा है. ममता बनर्जी ने महानगर के अन्य हिस्सों में फ्लाईओवर का काम युद्धस्तर पर पूरा किया. लेकिन बड़ा बाजार के इस इलाके के फ्लाईओवर का काम क्यों रुका पड़ा था, इस बारे में अभी कोई जानकारी ‍नहीं मिल पा रही है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आज मेदिनीपुर में चुनावी सभा को संबोधित करना था. लेकिन सभा को बीच में ही छोड़ कर ममता बनर्जी कोलकाता के लिए रवाना डो गयी हैं.

 

 

सड़क निर्माण के नए मौडल

केंद्र सरकार देश में सड़कों का जाल बिछाने तथा मौजूदा सड़कों पर यातायात को आसान बनाने के लिए कई तरह के मौडल्स पर काम कर रही है. इस के लिए ऐक्सप्रैसवे, पूर्वोत्तर सीमांत सड़क योजना तथा हाइब्रिड जैसे मौडल्स पर काम चल रहा है. इन सब का मकसद देश के हर कोने में सड़क का व्यापक और आरामदायक जाल बिछाना है. 

दिल्ली-मेरठ ऐक्सप्रैसवे देश में 14 लेन की पहली सड़क परियोजना है. इस का मकसद जाम की समस्या से छुटकारा पाना है. इस के अलावा, पूर्वोत्तर में सीमांत क्षेत्रों तक सड़क पहुंचाना और उत्तराखंड में भूस्खलन से बाधित सड़कमार्ग विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है. सड़कों का निर्माण तेजी से हो, इस के लिए ‘हाइब्रिड मौडल’ को हाल में ही मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है.

सरकार का लक्ष्य प्रतिदिन 30 किलोमीटर सड़क के निर्माण का है और उस के लिए हाइब्रिड जैसे मौडल विकसित किए जा रहे हैं. सड़क निर्माण का काम तेजी से हो, इस के लिए हाइब्रिड योजना के तहत निर्माण कार्य पर 40 प्रतिशत राशि सरकार उपलब्ध कराएगी जबकि शेष राशि डैवलपर को खर्च करनी होगी.

सरकारी-निजी क्षेत्र (पीपीपी) मौडल सड़कों के निर्माण के लिए ठीक तो है लेकिन चूंकि इस में अच्छा मुनाफा है, इसलिए ज्यादा भ्रष्टाचार होने की आशंका भी है. पिछले दिनों सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने जम्मूकश्मीर की एक परियोजना का ठेका अपने एक नजदीकी व्यक्ति की फर्म को दिया है. इस फर्म में उन का बेटा भी हिस्सेदार है.                                                

जीपीएस का कमाल

इच्छाशक्ति हो तो शारीरिक अक्षमता कभी भी आप के हौसले के आड़े नहीं आती. हमारे यहां एक पैर से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाली अरुणिमा सिंह इस की मिसाल हैं. ऐसा ही जज्बा भरा काम फ्रांस के 5 नेत्रहीन व्यक्तियों ने किया. उन्होंने जीपीएस की मदद से एक पहाड़ी की सफलतापूर्वक चढ़ाई कर उसे पार किया. सिर्फ एक बेंत और कमर में बांधे गए जीपीएस सिस्टम के माध्यम से 6 दिन में 80 किलोमीटर की दूरी इस ग्रुप ने तय की. नैवीगेशन दिशानिर्देशों का पालन करते हुए इस ग्रुप ने एक मिसाल कायम की है.

भ्रूण के जीन में बदलाव

उन दंपतियों के लिए खुशखबरी है जिन्हें बारबार गर्भपात की समस्या और जींसजनित रोगों से दोचार होना पड़ता था. ब्रिटेन में वैज्ञानिकों को भ्रूण के डीएनए यानी जींस में संशोधन करने की इजाजत मिल गई है. भ्रूण के डीएनए में संशोधन पर शोध लंदन स्थित फ्रांसिस क्रिक संस्थान में किया जाएगा और इस का मकसद मानव जीवन के शुरुआती लमहों को ज्यादा बारीकी से समझना होगा. इस प्रक्रिया में आईवीएफ मरीजों के दान से प्राप्त भ्रूण को जरूरत के हिसाब से संशोधित किया जाएगा और उन्हें ज्यादा दुरुस्त बनाया जाएगा. इस प्रयोग के शुरुआती चरण में वैज्ञानिक  निषेचित भ्रूण के 1 सप्ताह के अंदर प्रमुख नियामक माने जाने वाले जींस ओसीटी 4 की गतिविधियों को अवरुद्ध करेंगे.

संस्थान की टीम इस संपादित किए हुए जींस भ्रूण को किसी महिला के गर्भाशय में आरोपित नहीं करेगी. इस को प्रयोग के बाद नष्ट कर दिया जाएगा जिस से इस का दुरुपयोग न हो सके. जींस में बदलाव को ले कर खासा विवाद रहा है. कुछ लोगों का कहना है कि भ्रूण के डीएनए में छेड़छाड़ डिजाइनर संतान को पाने की ओर एक बढ़ता कदम है. इस से लोग मनमुताबिक रंगरूप वाली संतान चाहने की इच्छा रखेंगे जोकि अनैतिक होगा.

जानिए डौगी का मूड

औफिस में हों या घर से दूर कहीं आउटिंग पर सारा ध्यान घर पर ही रहता है कि पालतू डौगी कैसा होगा. पर आप की इस समस्या का समाधान साइंस ने खोज लिया है. जापानी कंपनी एनीसैल ने एक पहनने वाली डिवाइस को बनाया है. यह डिवाइस आप के पालतू जानवर की सभी गतिविधियों को उस के मालिक तक पहुंचाने का काम करती है. मसलन, आप के पालतू का मूड कैसा है, शरीर का तामपान क्या है, ब्लडप्रैशर सही है कि नहीं, उस के स्वभाव में उग्रता तो नहीं. ये सब सूचनाएं स्मार्टफोन के जरिए उस के मालिक तक पहुंचती हैं. पालतू जानवर के शरीर में इस पहनने वाली छोटी सी डिवाइस को पहना दिया जाता है. स्मार्ट फोन में एक ऐप के जरिए ये सारी जानकारियां देता रहता है, चाहे आप कितने भी दूर हों.

 

पियानो जो पौकेट में समाए

पियानो का नाम सुन कर जेहन में एक भारीभरकम म्यूजिकल इंस्ट्रूमैंट की छवि उभरती है जिसे हम अकसर बड़े होटलों और शानदार हवेलियों में एक कोने में रखा हुआ देखते हैं. पर अब एक ऐसा पियानो आ गया है जिस के लिए किसी बड़ी जगह की जरूरत नहीं होती. रूमाल के आकार का यह पियानो आसानी से फोल्ड हो कर जेब में समा जाता है. टैक्सटाइल पियानो नामक यह पियानो असल में इलैक्ट्रोमैग्नेट फाइबर से बुना हुआ कपड़ा है जिस में सैंसर और इलैक्ट्रोड कंडक्टिविटी के माध्यम से ध्वनि तरंगें निकलती हैं. इस कपड़े में पियानो की ही तरह कीबोर्ड प्रिंट है जिस को एक साउंड सिस्टम से जोड़ा गया है. जैसे ही ‘की’ पर उंगली का स्पर्श होता है, संगीत की मधुर ध्वनि निकलती है.

 

ये पति

मेरे मामीमामा ने हमें मुरादाबाद में अपने घर बुलाया. पति और मैं उन के घर पहुंचे. डोरबैल बजाने पर भी दरवाजा नहीं खुला. हम ने देखा दरवाजे के अंदर की चटखनी नहीं लगी थी. हम ने धक्का दे कर जैसे ही दरवाजा खोला, उन का पालतू कुत्ता भौंकता हुआ आया. हम दोनों डर गए. मैं भाभीभाभी कह कर चिल्लाई. पति डर के मारे वापस घर के बाहर भागे और दरवाजा बंद कर दिया. अचानक मुझे खयाल आया कि कुत्ते को पुचकारना चाहिए. मैं ने जैसे ही उसे पुचकारना शुरू किया, कुत्ता मेरा पांव चाटने लगा. मेरी जान में जान आई. फिर मैं ने दरवाजा खोल कर पति को अंदर बुलाया और शिकायत की, ‘‘हद कर दी आप ने. एक गाना है जिस में ‘शेर तुझे छोड़ के मुझे खा जाए’ बोला गया है लेकिन आप ने तो ‘मुझे छोड़ कर तुझे खा जाए’ वाली बात कर दी.’’पति शर्मिंदा हुए. इतने में मामामामी भी नीचे आ चुके थे. मैं ने हंसहंस कर उन को यह बात बताई. सब हंसने लगे.

– मधु गोयल, गाजियाबाद (उ.प्र.)

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मेरी सहेली के पति बहुत ही मजाकिया किस्म के इंसान हैं, साथ ही, बड़े बहानेबाज भी. कभी जब वह कहती कि आज मुझे 3 बजे न्यू मार्केट जाना है, आप छोड़ देंगे? तो फौरन कहते कि अरे, तुम्हें 3 बजे जाना है और मुझे तो 2 बजे ही जाना है, कैसे छोड़ सकता हूं भला? कभी वह पूछती कि आज कितने बजे आप को जाना है तो कह देते, अरे भाई, आज तो मैं कहीं नहीं जा रहा, घर पर बैठ कर ही काम करूंगा, बहुत काम है. मतलब, एक न एक बहाना उन का तैयार रहता. वह बेचारी मन मसोस के रह जाती. एक दिन घर पर उस की बेटी आई हुई थी और मेरी सहेली को एक मीटिंग में जाना था 3 बजे. सुबह से वह कह रही थी कि मुझे मीटिंग में जाना है, आप छोड़ दीजिएगा. लेकिन उस के पति का का हां में जवाब मिल ही नहीं रहा था. एकाएक बेटी जोश में उठी और बोली, ‘‘पापा, आप रोज बहाना बनाते हो, कुछ भी हो, आज आप को मम्मी को छोड़ना ही होगा.’’

उस की बात सुन कर भी वे तैश में नहीं आए और बड़ी मासूमियत से बोले, ‘‘क्या बात करती हो बेटे? मैं तुम्हारी मम्मी को कैसे छोड़ सकता हूं? मैं ने तो उन को सात जनम तक साथ देने का वचन दिया है न.’’ उन का जवाब सुन कर बेटी एकदम सकते में आ गई, उस से कुछ कहते ही न बना. बाद में बेटी के साथ मेरी सहेली भी बहुत देर तक हंसती रही.

– अनीता सक्सेना, भोपाल (म.प्र.)

देशभक्ति या धर्मा-देशभक्ति

देशभक्ति का नया नारा धर्मा-देशभक्ति है, यह उच्च न्यायालय की जज प्रतिभा रानी के कन्हैया के मामले में सीमाओं पर जवानों की कुरबानियों का हवाला दिए जाने के कुछ दिन बाद यह साफ हो गया. देश के जवान सीमा पर नहीं लड़ रहे, वे तो श्रीश्री रविशंकर के महाधार्मिक उत्सव पर दिल्ली में यमुना नदी को रौंदने के आदेशों का पालन करते हुए नदी पर पुल बनाते दिखे. कन्हैया कुमार के मामले में देशभक्ति का राग अलापा गया और बारबार जवानों की कुरबानियों की बातें कही गईं पर ये जवान देश की रक्षा हरियाणा में जाटों के उपद्रवों से बचाने में करते दिखे, उन जाटों से जिन्हें अभी तक देशद्रोही नहीं कहा गया है जबकि उन्होंने गैरजाट नागरिकों के मकान, दुकान तो जला ही दिए, शायद औरतों के रेप भी किए.

औरतों के रेप के सभी मामले पुलिस में नहीं गए पर ये औरतें अब जीवनभर घरों की जेलों में कैदियों का जीवन जिएंगी, खुली आंखों से उन के घर वालों ने उन की इज्जत तारतार होते देखी थी. जाटों के खिलाफ अब तक धर्मादेश नहीं जारी किया गया क्योंकि आरक्षण मांगते हुए भी वे धर्मटैक्स तो चुका ही रहे हैं. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने तो इस महापाखंडी सम्मेलन में आने से इनकार कर दिया परंतु पूरी केंद्र सरकार हाथ बांधे श्रीश्री रविशंकर की सेवा में 11 मार्च से 13 मार्च तक खड़ी रही और सिद्ध करती रही कि देश की सरकार की नजर में ऋषियोंमुनियों की जगह रामायण, महाभारत और पुराण कथाओं की तरह है.

दिल्ली के यमुना तट पर 35 लाख लोगों के लिए करोड़ों का विशाल, भव्य मंच बना कर श्रीश्री रविशंकर ने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बनाए गए ग्रीन ट्रिब्यूनल को ठेंगा सा दिखा दिया क्योंकि उन्होंने बहुत सी बातों का उत्तर ही नहीं दिया. योग अध्यात्म के साथ रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर के उन्होंने पुराणवादी सोच पर सीमेंट लगाया और बहुत सा सीमेंट रेत में रह जाएगा या यमुना के पानी में घुल जाएगा, इस में संदेह नहीं है. यह अफसोस की बात है पर इस का अंदाजा था कि भारतीय जनता पार्टी का एजेंडा किसी विकास, किसी औद्योगिकीकरण, किसी सुशासन का कम, धर्म प्रचार का ज्यादा ही रहेगा. योग, सूर्य उपासना, मंदिरों के निर्माण, मूर्तिपूजा, इतिहास के पुनर्लेखन, वर्णव्यवस्था, भारत माता की पुकार को ईश्वरजनित मनवाना आदि पर ही सरकारी फैसले मुखर हैं.

यह लगता है कि इस पौराणिकवादी सोच को आजकल देश के व्यापारी वर्ग ने अपना लिया है ताकि उन का सवर्णों की तीसरी श्रेणी से उठ कर, संस्कृतिकरण हो कर उन्हें पहली श्रेणी में शायद ले आया जाए और इसलिए वे श्रीश्री रविशंकर जैसे तमाशों के लिए खजाने खोल देते हैं. वैसे भी देश के धनपतियों के पास जो पैसा है वह बैंकों से लिए गए उधार वाला है, उन बैंकों से जिन के पास या तो आम व्यक्ति का पैसा जमा है या वह जो आमजन व मजदूरों से वसूले गए विभिन्न टैक्सों से सरकार द्वारा बनाई गई सरकारी योगदान के मद का है.

देश आज भी अगर उन पौराणिक गाथाओं में उलझा रहे जिन में बारबार कहा जाता है कि फलांफलां राज्य ने महायज्ञ किए, जिन में दूरदूर से ऋषिमुनि आए और दान में गाएं, स्वर्ण और सुंदरियां ले कर गए, तो यह अफसोस की बात नहीं तो और क्या है

कैट की धमकी

पैपाराज्जी से दुनियाभर की सैलिब्रिटीज परेशान हैं. मर्लिन मुनरो से डायना तक इस पैपाराज्जी की शिकार हो चुकी हैं. पिछले दिनों बौलीवुड अदाकारा कैटरीना कैफ खुद का पीछा करते फोटोग्राफर्स से इस कदर तंग आ गईं कि सरेराह उन्हें पुलिस की धमकी दे डाली. दरअसल, कैटरीना इन दिनों मुंबई में रणबीर कपूर से तथाकथित अलगाव के बाद नया आशियाना ढूंढ़ने में व्यस्त हैं. इसी सिलसिले में जब वे अपनी कार से जाने लगीं तो फोटोग्राफरों का समूह उन के पीछे पड़ गया. काफी दूर तक जब फोटोग्राफर्स उन का पीछा करते रहे तो गुस्से में कैटरीना ने कार से उतर कर उन्हें लौटने को कहा, न मानने पर पुलिस से कंपलेंट करने की धमकी भी दे डाली. कैटरीना जी, रणबीर से अलगाव के चलते गुस्से में मत रहिए वरना बौलीवुड भी आप से कहीं अलगाव का रास्ता न अपना लें.

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