Download App

कोहली पर लगा 12 लाख रुपये का जुर्माना

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूरु के कप्तान विराट कोहली पर राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स के खिलाफ आईपीएल के मैच के दौरान धीमी ओवरगति के लिये 12 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है.

क्या है आईपीएल का आधिकारिक बयान?

आईपीएल के एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के कप्तान विराट कोहली पर जुर्माना लगाया गया है, चूंकि राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स के खिलाफ मैच में उनकी टीम की ओवरगति धीमी थी. चूंकी धीमी ओवरगति के मामले में आईपीएल की आचार संहिता के तहत यह कोहली का पहला अपराध था इसलिए उन्हें 12 लाख रुपए जुर्माना लगाया गया है.

 

 

पोर्न स्टार से बॉलीवुड स्टार बनी सनी लियोनी अब नए रोल में

अभिनेत्री सनी लियोनी ने बॉलीवुड में अपने अभिनय से लोगों के दिलों को जीता है और अब वह लेखिका के रूप में भी अपने करियर में नई भूमिका निभाने को तैयार हैं.

सनी ने ‘स्वीट ड्रीम्स’ नामक एक किताब लिखी है जिसमें 12 लघु कहानियां है.मस्तीजादे की अभिनेत्री ने बताया कि लेखन की बात उनके दिमाग में कभी नहीं थी लेकिन उनके पास कुछ विचार थे जिन्हें उन्होंनें कलमबद्ध नहीं किया था.

 सनी ने एक साक्षात्कार में बताया, ‘मेरे दिमाग में लेखन नहीं था. मैं वर्षों से अलग-अलग कहानियों और विचारों के बारे में सोच रही थी लेकिन वास्तव में मैंने कभी कुछ लिखा नहीं. यह पहली बार है जब मैंने इस तरह का कुछ लिखा है. जब में छोटी थी तो मैं एक डायरी रखती थी, मेरी मां ने इसे पढ़ा और उसके बाद मैंने डायरी नहीं लिखी.’

34 वर्षीय अभिनेत्री ने बताया कि जब प्रकाशन गृह जगरनॉट बुक ने 12 लघु कहानियों के लेखन के लिए उनसे संपर्क किया तो उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया और इसे तीन महीनों के भीतर पूरा किया.

देखिए 7 घंटों का फिल्म का ट्रेलर…!

आपने देखा होगा किसी भी बॉलीवुड फिल्म का ट्रेलर ज्यादा से ज्यादा 2-3 या 4 मिनट का होता है. अधिकतर फिल्मों का ट्रेलर 3 मिनट के अंदर ही सिमट जाता है. लेकिन हम आपसे कहे कि हॉलीवुड की एक ऐसी फिल्म है जिसका ट्रेलर ही 7 घंटों का है तो आप सोच में पड़ जाएंगे के पूरी फिल्म कितने देर की होगी.

फिल्म का नाम एंबीयंस है जिसका दूसरा ट्रेलर जारी किया गया है.आपको सबसे ज्यादा हैरानी तब होगी जब आप सोच रहें होंगे कि 7 घंटे का फिल्म का ट्रेलर है तो फिल्म दो-चार दिनों में पूरी होगी. लेकिन ऐसा नहीं है. यह फिल्म पूरे एक महीने में खत्म होगी. दावा किया जा रहा है कि फिल्म की कुल अवधि 720 घंटे की होगी. क्योंकि फिल्म का ट्रेलर ही 7 घंटे 20 मिनट का है तो फिल्म (24X30=720) घंटे की होगी. 

फिल्म को स्वीडन के एक निर्देशक बना रहे हैं. यह दुनिया में अबतक की सबसे लंबी फिल्म होगी जिसका  ट्रेलर ही 439 मिनट यानी सात घंटे 20 मिनट का है. डायरेक्टर आंद्रेस वेबर्ग ने अपनी इस फिल्म का छोटा ट्रेलर भी पिछले साल जारी किया था जो 72 मिनट का था पर अब वे इसका बड़ा ट्रेलर 2018 में जारी करने जा रहे हैं जो सात घंटों से ज्यादा का होगा.

फिल्म की कहानी दो परफॉर्मेंस आर्टिस्टों के संबंधों पर आधारित है जो दक्षिणी स्वीडन में समंदर किनारे मिलते हैं वहीं पर पूरी फिल्म बन जाती है. बताया जा रहा है कि फिल्म सिंगल शाट में तैयार की गई है और इसमें कोई भी कट नहीं होगा. यानी इसे शूट करना आसान काम नहीं होगा. फिलहाल फिल्म के 31 दिसंबर 2020 को रिलीज होने की उम्मीद है. साथ ही फिल्म की कुल अवधि पर सस्पेंस अब भी कायम है.

दिसंबर तक हो सकती है रिलायंस जियो की 4G सर्विस लॉन्च

शेयरिंग और ट्रेडिंग पैक्ट के बाद अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम और मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो आपस में स्पेक्ट्रम साझा करेंगी. रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल अंत तक कंपनी रिलायंस जियो के 4जी सर्विस की सॉफ्ट लॉन्चिंग करेगी और इस साल दिसंबर तक इसका कमर्शियल लॉन्च किया जाएगा.

हो रही देरी का खुलासा

रिलायंस इंडस्‍ट्रीज ने उसकी 4जी सर्विस में हो रही देरी के बारे में खुलासा किया है. कंपनी ने बताया कि वह रिलायंस कम्यूनिकेशंस (आरकॉम) के साथ स्‍पेक्‍ट्रम इंटीग्रेशन होने का इंतजार कर रही है, इसके अलावा कंपनी 4जी सर्विस को लॉन्‍च करने से पहले अपने यूजरबेस को भी बढ़ाना चाहती है.

जियो इंफोकॉम का लक्ष्‍य

रिलायंस जियो के स्‍ट्रेटजी एंड प्‍लानिंग हेड अंशुमान ठाकुर ने बताया कि रिलायंस जियो इंफोकॉम का लक्ष्‍य कमर्शियल लॉन्‍च से पहले 90 फीसदी जनसंख्‍या को कवर करने का है और यह अभी तक तकरीबन 70 फीसदी के स्‍तर पर पहुंच चुकी है. उन्‍होंने कहा कि अभी हम पांच लाख यूजर्स के साथ रिलायंस जियो की टेस्टिंग कर रहे हैं और इस सर्विस को कमर्शियली लॉन्‍च करने से पहले हम इसमें कुछ लाख लोगों को और जोड़ना चाहते हैं.

कब होगी कमर्शियली लॉन्‍च

पहले महीने में ही जियो का औसत डाटा उपभोग प्रति यूजर 18 जीबी को पार कर चुका है और इसमें लगातार वृद्धि हो रही है. इस दौरान औसत वॉइस उपयोग 250 मिनट रहा. कंपनी ने कहा है कि वह दिसंबर तक अपनी इस सर्विस को पूरी तरह से लॉन्‍च कर देगी. ठाकुर ने कहा कि अभी बीटा टेस्‍ट चल रहा है और कमर्शियल लॉन्‍च की तारीख अभी तय नहीं की गई है. उन्‍होंने कहा कि कमर्शियल लॉन्‍च से पहले स्‍पेक्‍ट्रम इंटीग्रेशन बहुत जरूरी है और अभी हम इस पर पूरा ध्‍यान दे रहे हैं. रिलायंस जियो ने कहा कि इस सेवा को शुरू करने में देरी के पीछे कोई तकनीकी खामी नहीं है. कंपनी ने यह भी कहा कि नेटवर्क को अनुकूलतम बनाने में समय लग रहा है और वह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसकी सेवा बाधारहित और बेहतर हो.

सर्किल एरिया

रिलायंस जियो  ने आरकॉम के साथ 17 सर्किल में 800 मेगाहर्ट्ज स्‍पेक्‍ट्रम साझा करने का समझौता किया है. इसमें से 9 सर्किल के लिए टेलीकॉम डिपार्टमेंट से अनुमति मिल चुकी है, यह सर्किल हैं मुंबई, उत्‍तर प्रदेश पूर्व, मध्‍य प्रदेश, बिहार, ओडिशा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, आसम और उत्‍तरपूर्व. इन सर्किल में स्‍पेक्‍ट्रम इंटीग्रेशन 15 दिन के अंदर पूरा हो जाएगा. हालांकि जियो और आरकॉम अपने नौ-सर्किल में स्‍पेक्‍ट्रम ट्रेडिंग सौदे के लिए टेलीकॉम डिपार्टमेंट की मंजूरी का इंतजार कर रहा है, जिसके जल्‍द ही मिलने की उम्‍मीद है. इसके बाद प्रमुख बाजार जैसे दिल्‍ली, कोलकाता, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्‍ट्र, पंजाब, यूपी ईस्‍ट, यूपी वेस्‍ट और पश्चिम बंगाल में 4जी सर्विस शुरू की जा सकेगी. मंजूरी के बाद आरकॉम अपने 4जी स्‍पेक्‍ट्रम के इस्‍तेमाल का अधिकार जियो को दे सकेगा.

यूपी के तीन निशानेबाज कोच बन सकते हैं अंतर्राष्ट्रीय जज

उत्तर प्रदेश के तीन कोच अब निशानेबाजी के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में जज बन सकेंगे. उत्तर प्रदेश शूटिंग टीम के प्रबंधक रोहित जैन ने आज बताया कि पश्चिम बंगाल के आसनसोल में अंतरराष्ट्रीय शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन की ‘बी जज लाइसेंस कोर्स’ की परीक्षा हुई थी. इसे रोहित जैन, आगरा के हिमांशु मित्तल और लखनऊ के फरीदुद्दीन ने उत्तीर्ण की है.  

उन्होंने बताया कि इस कोर्स को 36 लोगों ने पास किया, जिनमें से छह विदेशी और शेष भारतीय हैं. जैन ने बताया कि कोर्स के बाद चार परीक्षाएं ली गयीं. पहला स्थान मित्तल को मिला. दूसरे स्थान पर हिमाचल प्रदेश के विक्रांत राणा रहे. स्वयं मुझे तीसरा स्थान हासिल हुआ. पश्चिम बंगाल के अंकित ढल भी तीसरे स्थान पर रहे.

उन्होंने बताया कि इस परीक्षा को पास करने वाले कोच निशानेबाजी की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं मसलन ओलंपिक,  राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में निर्णायक की भूमिका निभा सकते हैं.

उत्तराखंड में हाशिये पर ‘राजनीतिक शुचिता’

उत्तराखंड में सरकार को बचाने और बनाने की लडाई केवल 2 दलों तक ही सीमित नहीं रह गई है. राजनीतिक दलों के समर्थकों ने सोशल मीडिया से लेकर दूसरे माध्यमों के जरीये ऐसा माहौल बना दिया जिससे लग रहा है कि छोटी और बडी अदालतें भी आमने सामने खडी हो गई हैं. नैनीताल उच्च न्यायलय के फैसले को कांग्रेस के पक्ष में माना जा रहा था और उस फैसले पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भाजपा के पक्ष में प्रचारित किया जा रहा है. सच्चाई यह है कि दोनो ही अदालतों में फैसला संविधान की मंशा के अनुरूप होगा. अगर अदालत को कहीं कोई शंका लगेगी, तो पूरा मामला संविधन पीठ के हवाले भी हो सकता है.

उत्तराखंड की लडाई को केन्द्र सरकार ने अपनी नाक का सवाल बना लिया है. यह उसका अदूरदर्शी कदम है. हालात ऐसे बन गये हैं कि हरीश रावत सरकार के रहने या जाने का लाभ भाजपा को नहीं मिलने वाला. उल्टे अब उत्तराखंड की लडाई भाजपा के लिये कठिन हो जायेगी. आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भाजपा को ‘विलेन’ की तरह पेश करने में सफल हो जायेगी.

दल बदल की सरकार बनाने के मसले में भारतीय जनता पार्टी कई बार सामने आ चुकी है. उत्तर प्रदेश में दल बदल का पूरा एपीसोड लोगों को याद है. मायावती की बहुजन समाज पार्टी को तोडने की घटना और भाजपा का अपना मुख्यमंत्री बनाना सबको याद है. दल बदल के ऐपीसोड के बाद 2004 में भाजपा उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर हुई थी. उसके 12 साल बाद भी सत्ता में वापसी संभव नहीं हो पाई. दरअसल भाजपा जब सत्ता से बाहर होती है तो तमाम तरह की ‘राजनीतिक शुचिता’ की बात करती है. सत्ता में आते ही वह कांग्रेस की कार्बन कापी की तरह वह सारे काम करने लगती है जिनका वह विरोध करती थी. भाजपा की इमेज को इससे नुकसान होता है.

उत्तराखंड विवाद में भाजपा के अति उत्साही महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की राजनीतिक समझदारी उजागर हो गई. वह उत्तराखंड विवाद में पार्टी को सही राह दिखाने में असफल रहे. उत्तराखंड विवाद को हल करने में भाजपा के लोकल नेताओं से अधिक कांग्रेस के बागी विधायकों पर ज्यादा भरोसा किया. जिससे भाजपा को किसी तरह का लाभ होने के बजाय नुकसान होने का अंदेशा बन गया है. भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय कांग्रेस के साथ ही साथ नैनीताल हाईकोर्ट की मंशा पर सवाल उठाने के लिये राष्ट्रपति के खिलापफ मुद्दा बना बैठे, जिससे यह संदेश गया जैसे नैनीताल हाईकोर्ट कांग्रेस के पक्ष में फैसला जानबूझ कर दिया. कैलाश विजयवर्गीय के इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर नैनीताल हाईकोर्ट के खिलाफ मुहिम सी शुरू हो गई. उत्तराखंड की लडाई में जीत हार का ऊंट चाहे जिस करवट बैठे, पर इससे भाजपा की ‘राजनीतिक शुचिता’ सवालों के घेरे में आ गई है.

रेल मंत्री सुरेश प्रभु से बचाओ

सरकारों के लिये जरूरी नहीं है कि वह जनता की जेब पर सीधे हमला करें. कई बार छिपे रास्तों से भी जनता की जेब से पैसा निकाल लिया जाता है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु कुछ ऐसे ही टिप्स तलाश कर लगातार ला रहे है. जिससे जनता को पहली जैसी सुविधाओं के लिये ज्यादा पैसे ढीले करने पड रहे हैं. टिकट कैंसिल कराने के नये नियमों के तहत यात्रियों की परेशानियां बढ गई है. अब ट्रेन जाने के पहले ही टिकट कैंसिल कराना होगा. अगर आप ने पहले टिकट कैंसिल नही कराया तों आपको टिकट राशि का बडा हिस्सा कट जायेगा.

प्लेटफार्म टिकट 5 रूपये से बढाकर 10 रूपये कर दिया गया. पहले प्लेटफार्म टिकट 4 घंटे तक मान्य रहता था, अब यह घटकर 2 घंटे कर दिया गया है. मतलब की पैसा दोगुना हो गया और सुविध आधी कर दी गई. यही नहीं पहले आरक्षित सीटों के लिये बच्चों का पूरा टिकट नहीं पडता था, अब बच्चों का भी पूरा टिकट लेना पडेगा. इस तरह की तमाम छोटे छोटे टिप्स रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अपने पिटारे से निकाल दिये हें, जिससे यात्रियों की जेब को हल्का किया जा सके.

परेशानी की बात यह है कि सुविधा के नाम पर ट्रेनों में कोई सुधार नहीं हुआ है. आरक्षित डिब्बों में वेंटिग टिकट पर सवारी करने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है. जिससे आरक्षित डिब्बों में सफर करना जनरल डिब्बों सा ही हो गया है. ट्रेन में मिलने वाले खाने का दाम बढ गया है. उसकी क्वालिटी में कोई सुधार नहीं हुआ है. ट्रेनों में बाहरी लोग अभी भी खाद्य सामाग्री और गुटका पान मसाला बेचते मिलते हैं. ट्रेन के आने जाने के समय और सुरक्षा साफ सपफाई में कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है. मुम्बई जाने वाली ट्रेनों में किन्नरों का आतंक पहले की ही तरह बना हुआ है. पहले यह लोग जनरल डिब्बों में यात्रा करने वालों से वसूली करते थे, अब एसी और स्लीपर क्लास में यात्रा करने वाले भी इनका शिकार होते हैं. ट्रेनों में सामान चोरी की घटनाओं पर कोई रोकथाम के उपाय नहीं किये जा सके है.

रेल मंत्रालय ने तमाम तरह के हेल्पलाइन नम्बर जरूर बना रखे हैं, पर इन पर सम्पर्क करना ही मुश्किल होता है. कई बार जरूरत पडने पर यह नम्बर मिलते नहीं, तो कई बार शिकायत करने पर भी कोई सहायता नहीं मिलती. अगर किसी घटना पर रेल मंत्री सुरेश प्रभु द्वारा संज्ञान ले लिया जाता है तो उसका प्रचार प्रसार ऐसे किया जाता है जैसे सभी यात्रियो को सुविधा मिल गई है. पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को बिना यात्री टिकट भाडा बढाये रेल को लाभ में लाने का श्रेय दिया जाता है. अब रेल मंत्री सुरेश प्रभु से यात्रियों की जेब हल्की करने की टिप्स लिये जा सकते है.

ऐसे ले सकते हैं छोड़ी हुई LPG सब्सिडी वापस

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए कैंपेन ‘गिव इट अप’ के तहत यदि आपने भी एलपीजी सब्सिडी छोड़ी है और अब वापस पाना चाहते हैं तो इसके लिए चिंता और परेशानी जैसी कोई बात नहीं है. अब एलपीजी सब्सिडी को दोबारा पाने के लिए एक साल के भीतर ही आप क्लेम कर सकते हैं वह भी बिल्कुल मुफ्त.

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए कैंपेन ‘गिव इट अप’ का एक साल पूरा हो गया. उपभोक्ता अगर अपने सब्सिडी छोड़ने वाले निर्णय को बदलना चाहते हैं तो इसके लिए स्वतंत्र हैं. अब सब्सिडी सरेंडर एक वर्ष की अवधि के लिए वैध होगा, दूसरे साल में ऑटो रिन्यूअल नहीं होगा. इसके लिए आपको दोबारा से सूचित करना होगा कि आप सरेंडर कर रहे या नहीं.

सब्सिडाइज्ड सिलिंडर की कीमत दिल्ली में 419.13 रुपये है जबकि नॉन सब्सिडाइज्ड की 509.50 रुपये. वर्तमान में ग्राहक एक साल में 14.2 किग्रा के 12 सब्सिडाइज्ड सिलिंडर पा सकते हैं.

प्रधान ने 1.13 करोड़ परिवारों को सब्सिडी छोड़ने के लिए शुक्रिया अदा किया. मोदी ने यह कैंपेन 27 मार्च 2015 को लांच किया था. ऊर्जा सम्मेलन ‘ऊर्जा संगम’ का शुभारंभ करते हुए उन्होंने लोगों से सब्सिडी सरेंडर करने की अपील की थी. और गरीबों को फ्री एलपीजी कनेक्शंस देने का वादा किया. 1 मई को मोदी 8,000 करोड़ स्कीम शुरू करने वाले हैं जिसके तहत पांच करोड़ गरीब परिवारों को फ्री एलपीजी कनेक्शंस दिया जाएगा.

 

IPL 9 में चल रही है भारतीय क्रिकेट टीम के कोच की खोज

भारतीय टीम का नया कोच चुनने के लिए पूर्व क्रिकेटरों का पूल बनाया जा रहा है और बाद में इसी पूल से मुख्य कोच चुना जाएगा. मुख्य कोच डंकन फ्लेचर का करार खत्म होने के बाद से पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री टीम निदेशक के तौर पर भारतीय टीम के साथ जुड़े थे.

इसके अलावा संजय बांगर बल्लेबाजी कोच,  भरत अरुण गेंदबाजी कोच और आर श्रीधर क्षेत्ररक्षक कोच की भूमिका निभा रहे थे,  लेकिन टी-20 विश्व कप के बाद शास्त्री सहित सहायक कोचों का करार खत्म हो चुका है. इसके बाद सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली वाली बीसीसीआई की क्रिकेट सलाहकार समिति नया कोचिंग स्टाफ चुनने में जुट गई है.

बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि आइपीएल के बाद होने वाले वेस्टइंडीज दौरे से पहले हम इस काम को कर लेंगे. आइपीएल के दौरान दुनिया के पूर्व शीर्ष क्रिकेटर और कोच इस समय भारत में हैं. हमारी सलाहकार समिति उनसे संपर्क में है. इसमें से कुछ नाम छांटकर एक पूल बनाया जा रहा है. इस पूल से मुख्य कोच और सहयोगी स्टाफ का चयन किया जाएगा.

कांबिनेशन पर नजर:

अभी यह तय नहीं है कि टीम निदेशक का पद बरकरार रखा जाएगा या मुख्य कोच चुना जाएगा, लेकिन दोनों नहीं होंगे. अधिकारी ने बताया कि हम पूरा कांबिनेशन देखेंगे. कोच या टीम निदेशक और सहायक कोच के बीच तालमेल चुना जाएगा. हम एक टीम निदेशक के साथ तीन सहायक कोच का कांबिनेशन भी रख सकते हैं. एक मुख्य कोच के साथ दो सहायक कोच भी रखे जा सकते हैं. इतना जरूर है कि मुख्य कोच और टीम निदेशक में से एक ही को रखा जाएगा. यह सब इस बात पर तय होगा कि हम किसे चुन रहे हैं. अगर हमारे पास ऐसा कोच आता है जो गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों पर पकड़ रखता है तो हम उस तरह से सहायक कोच रखेंगे. अगर कोई बल्लेबाज कोच बनता है तो उसके हिसाब से सहायक कोच रखने होंगे.

शास्त्री और द्रविड़ से प्रभावित बीसीसीआई:

जब अधिकारी से पूछा गया कि क्या शास्त्री और राहुल द्रविड़ में से कोई मुख्य कोच बन सकता है तो उन्होंने कहा कि बीसीसीआई दोनों से ही प्रभावित है. जहां तक द्रविड़ की बात है तो मुझे पता है कि आइपीएल की तीन टीमें उन्हें मेंटर के तौर पर अपने साथ जोड़ना चाहती थीं,  लेकिन उन्होंने कहा कि जब तक अंडर-19 विश्व कप नहीं खत्म हो जाता तब तक इस पर बात नहीं करूंगा. जब एक तरफ दुनिया पैसे की तरफ भाग रही है तो एक कोच की इस वचनबद्धता तारीफ के काबिल है और उन्होंने ऐसा ही किया.

वहीं, शास्त्री के बारे में उन्होंने कहा कि 2014 में उनके कमान संभालने के बाद में टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया है. विराट सहित टीम के कई खिलाड़ी उन्हें पसंद करते हैं. रिटायरमेंट के बाद एसी कमरे में बैठकर कमेंटेटर का जॉब आसान होता है, लेकिन शास्त्री ने बीसीसीआई के कहने पर उसको छोड़कर टीम के साथ पसीना बहाया. ये आसान नहीं है. हालांकि आखिरी फैसला सलाहकार समिति ही करेगी और उस पर अंतिम मुहर बीसीसीआई लगाएगी.

आखिर किस साइट ने दी फेसबुक को कड़ी टक्कर?

सोशल नेटवर्किंग में अग्रणी फेसबुक की लोकप्रियता धीरे धीरे घट रही है. यकीनन आपको पहली नजर में विश्वास नहीं होगा, पर जनाब! ये बिल्कुल सच है. दरअसल फेसबुक को टक्कर देने वाली साइट कोई और नहीं खुद फेसबुक ही है. जी हां, हम सही कह रहे हैं. फेसबुक ने थोड़े समय पहले अपना एक लाइट वर्जन 'फेसबुक लाइट' लांच किया था, लेकिन कम समय में इस साइट पर इतनी तेजी से लोग जुड़े कि इसने अपनी पेरेंटल साइट फेसबुक को भी पछाड़ दिया. लांच होने के महज 9 महीनों में ही फेसबुक लाइट से 100 मिलियन यूजर्स जुड़ चुके है.

फेसबुक लाइट

फेसबुक लाइट असल में फेसबुक का ही लाइट वर्जन है. इसकी खास बात यह है कि इसमें कम डाटा खत्म करके फेसबुक का इस्तेमाल किया जा सकता है, इतना ही नहीं नेट कनेक्शन स्लो होने या इंटरनेट की स्पीड कम होने पर भी आप आराम से इसमें फेसबुक चला सकते है. फेसबुक लाइट की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यूरोप के कुछ देशों में, लेटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया समेत 150 देशों के 50 भाषाएं बोलने वाले करोड़ो उपभोक्ता अब फेसबुक लाइट का इस्तेमाल कर रहे है. गौरतलब है कि जून 2015 में फेसबुक लाइट का वर्जन लांच हुआ था.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें