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फसल कटाई के लिए रीपर मशीन

एक दौर था जब खेती के सभी काम हाथ से करने होते थे और उन कामों को निबटाने के लिए कईकई दिन लग जाते थे. लेकिन वही काम अब कृषि यंत्रों ने आसान कर दिए हैं. साथ ही मशीनों के इस्तेमाल से समय की भी बचत होती?है. इस सिलसिले में ‘फार्म एन फूड’ ने लुधियाना में स्थित अमर एग्रीकल्चर मशीनरी ग्रुप से कुछ जानकारी ली. अमर ग्रुप कृषि मशीनों के प्रमुख निर्माताओं में से?एक है. देशविदेश में भी इस की मशीनें निर्यात होती हैं. इस ग्रुप ने पिछली 3 पीढि़यों से इस उद्योग में अपनी जड़ें जमा रखी हैं. ये लोग बेहतरीन मशीनें बनाते हैं. राष्ट्रीय स्तर पर इन के 150 डीलर हैं, जो इन की बनाई कृषि से संबंधित तमाम तरह की मशीनें जैसे फसल कटाई मशीन, बोआई मशीन, थ्रैशर व हार्वेस्टर वगैरह बेचते हैं.

साल 1994 में अमर ग्रुप को उस की मशीनों की क्वालिटी के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा था.

इन के बनाए कृषि यंत्रों को किसानों में काफी पसंद किया जाता है, जिसे गेहूं, धान, जई, ज्वार, बाजरा जैसी फसलों की कटाई के लिए इस्तेमाल किया जाता?है. यह ग्रुप 2 प्रकार के रीपर बनाता है, जिन्हें किसान अपनी पहुंच के अनुसार खरीद सकते हैं.

स्वचालित रीपर 120 : इसे 1 आदमी द्वारा चलाया जाता है. यह फसल की जमीन से 3 से 4 इंच की ऊंचाई से कटाई करता है और लाइन में फसल कट कर गिरती जाती है. यह रीपर फसल की 120 सेंटीमीटर की चौड़ाई में कटाई करता?है. इसे डीजल इंजन के साथ जोड़ कर बनाया गया है. यह पैट्रोल इंजन के साथ भी मिलता है.

* इस रीपर का हैंडल पकड़ कर किसान को इस के साथसाथ फसल कटाई के लिए चलना पड़ता?है.

* इस में 5 हार्स पावर का डीजल इंजन होता है.

* यह 1 एकड़ फसल की 2 घंटे में कटाई कर देता है और इस में तेल की खपत 2 लीटर प्रति घंटा है.

* इस की कीमत तकरीबन 95,000 रुपए है.

अमर रीपर 220?: इस रीपर को?ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर चलाया जाता है. इसे किसी भी 45 हार्स पावर के ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर चलाया जाता?है. यह 2 मौडल में मिलता है. यह फसल को जमीन से 3-4 इंच की ऊंचाई पर काटता?है. यह फसल की 220 सेंटीमीटर की चौड़ाई में कटाई करता?है.

पहला मौडल 2 बेल्ट वाला रीपर है, जिस की कीमत 57,500 रुपए है और दूसरा मौडल 3 बेल्ट वाला रीपर है, जिस की कीमत 67,500 रुपए है. 3 बेल्ट वाले रीपर से ज्यादा ऊंचाई वाली फसलें (ज्वारबाजरा आदि) भी काट सकते हैं.

किसान अपनी पसंद का रीपर खरीद कर अपनी फसल तो समेट ही सकते हैं, दूसरे किसानों की फसल की कटाई कर के अपनी आमदनी में इजाफा भी कर सकते?हैं.

कंपनी मशीन खरीद की तारीख से 6 महीने की गारंटी भी देती है. इस के अलावा भी अगर आप क्रौप रीपर या किसी अन्य मशीन के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं, तो कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञ अदविंदर सिंह से उन के मोबाइल नंबर 09780000067 पर बात कर सकते हैं. कंपनी के अन्य नंबर हैं 91 161-2491780, 2493128, 2814039, इन नंबरों पर भी जानकारी ली जा सकती है. 

कुछ कहती हैं तसवीरें

रेशमी बहार : अफगानिस्तान महज फसाद के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि उस की पहचान रेशम के कारोबार की वजह से भी है. रेशम के कीड़े व उन के कोकून देखने में भले नहीं लगते, मगर उन से बनने वाला रेशम कमाल का होता है.

 

 

 

अन्नदाता के मातमी आंसुओं पर मनाया जा रहा जश्न

यह बेहद हैरत भरी खबर है कि पिछले 4 सालों में मध्य प्रदेश के किसान बिगड़ती फसलों के कारण बुरी हालत में जा पहुंचे हैं. उन के द्वारा आत्मघाती कदम उठा कर अपना जीवन खत्म करने की कोशिशें हो रही हैं. गौरतलब है कि इन्हीं हालात में पिछले 4 सालों से मध्य प्रदेश को सर्वाधिक उत्पादकता का कृषि कर्मण अवार्ड मिलता आ रहा है.

साल 2014-15 के लिए प्रदेश को एक बार फिर से 5 करोड़ रुपए के इनाम से नवाजा गया है. जिस के जश्न में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रदेश के सिहौर जिले के भोरपुर में आमंत्रित कर के एक बड़ा किसान सम्मेलन आयोजित कराया. इस आयोजन पर करोड़ों रुपए की फुजूलखर्ची की गई. साल 2014-15 में मध्य प्रदेश में हुए 328 लाख टन के फसल उत्पादन को देश का सर्वाधिक फसल उत्पादन बताया गया है, जबकि यह वही साल था, जिस में पूरे सूबे में भयंकर बारिश व ओलों की वजह से 36 जिलों की फसलें तबाह हुई थीं. फरवरी 2015 से अप्रैल 2015 तक केंद्रीय सर्वेक्षण दल ने मध्य प्रदेश के फसल नुकसान को 35 फीसदी माना था, जबकि राज्य सरकार का फसल नुकसान का दावा 50 फीसदी से ज्यादा का था.

प्रदेश सरकार की पांचों उंगलियां घी में

मध्य प्रदेश में कर्ज में डूबे किसान लगातार आत्महत्या करने में जुटे हैं. हर साल आत्महत्या के आंकड़ों में इजाफा हो रहा है. नेशनल क्राइम रिपोर्ट 2014 में  मध्य प्रदेश के किसान आत्महत्या के मामले में देश में तीसरे स्थान पर थे, जहां 1108 किसानों ने आत्महत्या की थी. प्रदेश के गृहमंत्री बाबूलाल गौर ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में एक सवाल के जवाब में कहा था कि 1 जुलाई 2015 से 30 अक्तूबर 2015 के दौरान प्रदेश के 193 किसानों ने अपनी जान दे दी थी. लेकिन बावजूद इस के प्रदेश सरकार की सेहत सुधरी हुई है. एक ओर बरबादी के नाम पर केंद्र से सैकड़ों करोड़ रुपए के राहत पैकेज लिए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर सर्वाधिक उत्पादकता का 5 करोड़ रुपए का अवार्ड भी प्रदेश सरकार की झोली में पिछले 4 सालों से आ रहा है.

किसानों की हालत बदतर

मध्य प्रदेश में किसानों की हालात बद से बदतर बनी हुई है. प्रदेश की 60 फीसदी कृषि आज भी बारिश के पानी पर आधारित है. प्रदेश में नदियों का बहाव कम होने के कारण सिंचाई के साधन विकसित नहीं हो पाए हैं. लेकिन बरसात के पानी को जमा करने के माकूल हालात के बाद भी प्रदेश सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया है. एक दशक पहले लाई गई बलराम तालाब योजना के तहत खेतखेत तालाब बना कर सिंचाई के इंतजाम को मजबूत करना था, लेकिन प्रदेश में 60 फीसदी बलराम तालाब कागजों में ही बन कर रह गए. सरकारी पैसे का दोहन नौकरशाहों व नेताओं द्वारा किया गया है. हालत यह है कि अब प्रदेश की सरकार इस योजना को बंद करने पर विचार कर रही है.

प्रदेश में प्रस्तावित बांध योजनाएं भी कई राजनेताओं व उद्योगपतियों के कहने से रोकी गई हैं. रायसेन जिले में प्रस्तावित मकोदिया डैम परियोजना के जरीए विदिशा व रायसेन के 90 गांवों की 62350 हेक्टेयर जमीन को सींचने की योजना बनाई गई थी, लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया.

खादबीज से मुनाफाखोरी

सूबे में साल 2015 में राज्य सहकारी समितियों के जरीए बेचा गया उर्वरक बाजार मूल्य से महंगा था, जिस से करोड़ों रुपए का मुनाफा प्रदेश के किसानों से कमाया गया है. प्रदेश में अनुदान आधारित आदान स्प्रिंकलर पाइप सिंचाई पंप, टै्रक्टर व हार्वेस्टर वगैरह राज्य सरकार की संस्था एमपी एग्री के जरीए मुहैया किए जाते हैं, जिन का मूल्य बाजार से कई गुना ज्यादा है. सरकारी बीज निगम से दिया जाने वाला बीज भी बाजार से महंगा रहता है.

भ्रष्टाचार

प्रदेश में किसानों को शून्य फीसदी की दर से मिलने वाला किसान क्रेडिट कार्ड, उर्वरक व बीज वगैरह मुहैया कराने की जिम्मेदारी सहकारी समितियों को दी गई है. मगर पूरी तरह सत्ताधारी राजनेताओं के कब्जे वाली ये संस्थाएं किसानों के शोषण में जुटी हुई हैं.

बैंकिंग लेनदेन सहित अन्य सभी रिकार्ड्स को तकनीक आधारित कंप्यूटर व्यवस्था से दूर रखा गया है. आज भी इन संस्थाओं में करोड़ों रुपए का लेनदेन पेन व रजिस्टर के जरीए हुआ करता है और फेरबदल कर के किसानों की रकम को इधरउधर किया जाता है. प्रदेश के रीवा, मंदसौर, पन्ना, रायसेन, होशंगाबाद व सिहौर जिलों की सहकारी संस्थाओं में 50 करोड़ से ज्यादा के गबन व भ्रष्टाचार के मामलों  की जांच सालों से रुकी पड़ी है. राज्य सरकार ने एक विधेयक के जरीए इन बेईमान सहकारी संस्थाओं को आरटीआई के दायरे से भी बाहर कर दिया है. ऐसा किए जाने से अब आम आदमी को इन संस्थाओं के काले चिट्ठे खंगालने का हक भी नहीं रहा है.

नई प्रधानमंत्री फसलबीमा योजना

नई प्रधानमंत्री फसलबीमा योजना पहले से सिर्फ इसलिए बेहतर है कि इस में किसानों से लिया जाने वाला बीमा प्रीमियम कम है. वहीं खेतों में बोआई के 1 पखवाड़े बाद से होने वाले नुकसान को बीमा नुकसान के तहत रखा गया है. लेकिन प्रस्तावित बीमा पालिसी में उन मसलों पर सुधार की भरपूर गुंजाइश है, जिन के कारण किसानों को फसलबीमा का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता है. पिछली बीमा पालिसी में बड़ी कमी यह थी कि खेतों में अनुमानित उत्पादन को बीमा रकम न मान कर किसानों को मिलने वाले किसान क्रेडिट कार्ड लोन को बीमा राशि माना गया था. इस रकम का 50 फीसदी हिस्सा रबी फसल की अधिकतम बीमा राशि हुआ करती है. लेकिन नई प्रधानमंत्री फसलबीमा योजना में इस निर्धारण में कहीं कोई तब्दीली दिखाई नहीं दे रही है.

आवश्यकता भूमि रकबे के आधार पर उत्पादन निर्धारण की होनी चाहिए. नई बीमा योजना की एक अन्य कमी आग से होने वाले नुकसान की है. कुदरती रूप से बिजली गिरने को प्रधानमंत्री फसल दुर्घटना बीमा योजना में शामिल किया गया है. लेकिन गरमी के दिनों में लगने वाली आग व खेतों से निकलने वाली बिजली लाइनों से होने वाले शार्ट सर्किट को नुकसान के तहत शामिल नहीं किया गया है. नई  बीमा पालिसी में भी टेक्नोलाजी व डिजिटल आकलन की बात की गई है, लेकिन साधनों की कमी का खुलासा नहीं किया गया है. फसल के नुकसान के बाद बीमे की रकम न मिलने की हालत में किसान व बीमा कंपनी के बीच विवादों को निबटाने के लिए स्वतंत्र आयोग या न्यायायिक प्राधिकरण बनाने का प्रावधान भी प्रधानमंत्री फसलबीमा योजना में नहीं रखा गया है. ऐसे हालात में किसानों को जल्दी न्याय मिलने में दिक्कत होती है. इस मसले पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री फसलबीमा योजना को प्रधानमंत्री जीवनज्योति योजना से जोड़ कर किसानों की निजी दुर्घटना की भरपाई की बात दोहराई गई है. लेकिन अपने जीवन को दांव पर लगा कर खुले आसमान के नीचे हर हालात में काम करने वाले किसान जो कीटनाशकों सहित तमाम जहरीले रसायनों की वजह से अकसर टीबी, दमा व कैंसर जैसी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं, उन के इलाज की गारंटी इस बीमा योजना में नहीं रखी गई है. देश के प्रधानमंत्री ने नई बीमा योजना के तहत अकेले किसान के हुए नुकसान की भरपाई की बात कही है. लेकिन फसलबीमा ड्राफ्ट में फसलबीमा नुकसान को खेत इकाई के आधार पर दिए जाने की बात कहीं नहीं की गई है. पिछली योजना के मुताबिक बीमा कंपनी को फायदा पहुंचाने के मकसद से प्रदेश भर में खेती के कुल रकबे में 60 फीसदी गेहूं के लिए व 40 फीसदी हिस्सा अन्य फसलों के लिए माना जा रहा है.

यदि किसान 100 फीसदी हिस्से में गेहूं की बोआई करता है, तो उस के नुकसान की भरपाई बीमा कंपनियां 60 फीसदी गेहूं की फसल मान कर किया करती हैं. नई फसलबीमा योजना में इस तरह का कोई भी खुलासा नहीं किया गया है. आजकल देश के कई हिस्सों के साथ मध्य प्रदेश के 23 जिले सूखे की चपेट में हैं. आने वाले वक्त में इन जिलों में अन्न के साथसाथ पानी व चारे के लिए भी दिक्कत होने के आसार हैं. इस के लिए प्रदेश की सरकार प्रधानमंत्री से बात करने वाली है. इन हालात में प्रदेश की सरकार कृषि कर्मण अवार्ड का प्रदर्शन कर के खुद को किसानों की हितैषी बताने की कोशिश कर रही है. लेकिन हकीकत यह है कि कर्ज से दबे प्रदेश के किसान लगातार अपने खात्मे में लगे हैं. कोई फांसी के फंदे को चुन रहा है, तो कोई कीटनाशक पी कर खुद को खत्म कर रहा है. ऐसे में प्रदेश की सरकार को उत्पादन का ढोल पीटने के बजाय किसानों का दर्द समझना चाहिए. जब हालात बेहतर हो जाएं, तब वाहवाही लूटी जा सकती है.

पीएम मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ पर फिदा हुए किंग खान

अभिनेता शाहरूख खान ने केंद्र सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम की सराहना करते हुए उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहल बताया जिससे देश में रोजगार पैदा हो रहे हैं.

शाहरूख ने संवाददाताओं से कहा, ‘मेक इन इंडिया संभवत: हमारे सम्माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक सबसे महत्वपूर्ण पहल है, जो भारत और विदेशों में कंपनियों को हमारे अपने देश में और हमारी जमीन पर उत्पाद बनाने के लिए प्रेरित करती है और इस तरह रोजगार निर्माण, कौशल विकास करती है.’

50 वर्षीय शाहरूख, भाजपा नेता शाइना एनसी की पुस्तक ‘मूवर्स एंड मेकर्स’ के विमोचन के मौके पर बोल रहे थे. यह पुस्तक मेक इन इंडिया पहल को समर्पित है. शाहरूख ने कहा कि मेक इन इंडिया के माध्यम से नये तकनीकी विस्तार कई पीढ़ियों के लिए लाभकारी होंगे. इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे.

…इसलिए शशांक मनोहर छोड़ सकते हैं BCCI अध्यक्ष का पद

शशांक मनोहर जल्द ही BCCI अध्यक्ष का पद छोड़ सकते हैं. इसके पीछे दो तरह की वजह सामने आ रही हैं. पहली- ICC मई में सीक्रेट वोटिंग करने वाला है ताकि नया इंडिपेंडेंट चेयरमैन चुना जा सके. इस दौड़ में मनोहर सबसे आगे हैं. दूसरी- बीसीसीआई पर जस्टिस लोढ़ा कमेटी की रिपोर्ट पर अमल करने का दबाव है. खुद मनोहर एक साथ दो पोजिशन पर नहीं रह पाएंगे. मनोहर हटते हैं तो बीसीसीआई 16 महीने में तीसरा प्रेसिडेंट चुनेगा.

मनोहर को कौन कर सकता है रिप्लेस…

मनोहर के बीसीसीआई छोड़ने की स्थिति में उन्हें एनसीपी चीफ शरद पवार रिप्लेस कर सकते हैं. पवार मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट हैं. वे 2005 से 2008 के बीच बीसीसीआई चीफ रह चुके हैं. फिर वे 2010 से 2012 तक आईसीसी प्रेसिडेंट भी रहे हैं. जगमोहन डालमिया के बीसीसीआई प्रेसिडेंट चुने जाने और उनके निधन के बाद भी शरद पवार का नाम चर्चा में रहा था.

मनोहर कब बने थे बीसीसीआई चीफ

मिस्टर क्लीन कहे जाने वाले मनोहर पहले भी 2008 से 2011 तक बीसीसीआई प्रेसिडेंट रह चुके हैं. लॉयर और अच्छे एडमिनिस्ट्रेटर कहे जाने वाले मनोहर को अक्टूबर 2015 में जगमोहन डालमिया के निधन के बाद बीसीसीआई प्रेसिडेंट बनाया गया था. महज आधे घंटे की मीटिंग में वे बिना किसी विरोध के प्रेसिडेंट चुन लिए गए थे. पिछले कुछ महीनों से बीसीसीआई में आ रहे बड़े बदलावों और रिफॉर्म्स की कोशिशों का क्रेडिट मनोहर को ही जाता है. हाल ही में बीसीसीआई ने डिस्कवरी चैनल में रहे राहुल जौहरी को सीईओ बनाया है. ऐसा पहली बार हुआ है जब बीसीसीआई ने किसी आउटसाइडर को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी हो.

श्रीनिवासन का विरोध कर चुके हैं मनोहर

2015-16 की बीसीसीआई की एनुअल जनरल मीटिंग में मनोहर ने चेन्नई के इंडस्ट्रियलिस्ट एन श्रीनिवासन के खिलाफ कैम्पेन चलाया था. श्रीनिवासन तब बीसीसीआई और आईसीसी, दोनों के चीफ थे और स्पॉट फिक्सिंग स्कैंडल की कॉन्ट्रोवर्सी जोरों पर थी. बीसीसीआई का प्रेसिडेंट बनने के बाद मनोहर ने बोर्ड की इमेज सुधारने की जिम्मेदारी ली. उन्होंने कहा था कि उनका टर्म दो साल का है लेकिन वे जो बदलाव चाहते हैं, वे दो महीने में हो जाएंगे.

मनोहर के अपने बनाए नियम के चलते उन्हें जाना होगा

अगर मनोहर आईसीसी के मई में होने वाले इलेक्शन में कैंडिडेट बनते हैं तो उन्हें बीसीसीआई छोड़ना होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके बीसीसीआई चीफ बनने के बाद ही यह नियम बनाया गया था कि कोई भी शख्स एक ही वक्त पर बीसीसीआई और आईसीसी, दोनों का चीफ नहीं रहेगा. मनोहर ने खुद नवंबर 2015 में आईसीसी में एन श्रीनिवासन को बतौर चेयरमैन रिप्लेस किया था.

बीसीसीआई पर क्या है दबाव?

बीसीसीआई पर आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से अप्वाइंट हुई जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों पर अमल करने का दबाव है. अभी सिफारिशों के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. कई ऑफिस होल्डर्स को लग रहा है कि कमेटी की सिफारिशों से उनका दबदबा खत्म होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बीसीसीआई में वन स्टेट-वन वोट की पॉलिसी होगी. यानी महाराष्ट्र-गुजरात में भले ही तीन-तीन क्रिकेट एसोसिएशंस हों, बीसीसीआई के इलेक्शंस में उनका एक ही वोट काउंट होगा. कई क्रिकेट एसोसिएशंस इसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दे रहे हैं.

क्या है युवराज के 6 गेंदों पर 6 छक्कों का राज

2007 में विश्व टी20 में युवराज सिंह के 6 गेंदों पर 6 छक्कों का कारनामा आज भी फैंस नहीं भूले हैं, लेकिन 9 साल बाद युवराज सिंह ने एक टीवी शो के दौरान अपने छह छक्कों का राज़ खोला है.

तो यह है राज…

युवराज सिंह ने कहा कि जब वह मैदान पर बल्लेबाज़ी करने आए तो इंग्लैंड के ऑलराउंडर एन्ड्रयु फ्लिंटॉफ ने उन पर तंज़ कसना शुरू कर दिया. फ्लिंटॉफ लगातार युवराज सिंह के शॉट्स को बेकार कहने लगे. युवराज सिंह को इस बात पर गुस्सा भी बहुत आया और एक बार तो उन्होंने फ्लिंटॉफ को बल्ला दिखाया और कहा कि ये जो बल्ला मेरे हाथ में है, मैं उसी से तुम्हें मार दूंगा.

फ्लिंटॉफ का गुस्सा ब्रॉड पर निकाला

अगला ओवर स्टुअर्ट ब्रॉड ने फेंका और उस वक्त युवराज सिंह का गुस्सा सातवें आसमान पर था. फ्लिंटॉफ का गुस्सा मानो युवराज सिंह ने ब्रॉड पर निकाला और एक के बाद एक कर छह गेंदों पर छह छक्के जड़ दिए. युवराज सिंह ने जैसे ही छठा सिक्स ओवर में मारा उन्होंने फ्लिंटॉफ की तरफ देखा और कुछ शब्द बोले. युवी को इस साल सनराइजर्स हैदराबाद ने 7 करोड़ में खरीदा है, लेकिन अभी तक वो अपनी चोट से पूरी तरह फिट नहीं हो पाए हैं.

लोन रिकवरी करने वाले बैंकों को मिलेगा सरकारी फंड

सरकार ने इस साल पब्लिक सेक्टर बैंकों को देने के लिए 25,000 करोड़ रुपये अलग रखे हैं. जो बैंक फंड चाहते हैं, उन्हें इसकी मांग रखने से पहले बैड लोन के मामले में कुछ सुधार करना होगा. वित्त मंत्रालय ने बैंकों से लोन रिकवरी का काम तेजी से करने के लिए कहा है. वह फंड जुटाने के बैंकों के प्लान और नॉन-कोर एसेट्स को बेचने के तरीके पर उनके साथ मीटिंग कर रही है. वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘हमें बैंकों के साथ ग्रोथ के अनुमान, लोन ग्रोथ टारगेट और लो कॉस्ट डिपॉजिट जैसे दूसरे एफिशिएंसी पैरामीटर्स पर बात कर रहे हैं. ओवरऑल परफॉर्मेंस के आधार पर बैंकों को फंड दिया जाएगा.’

इसमें अहम पैमाना एनपीए की रीकवरी होगा. सरकारी बैंकों का ग्रॉस एनपीए दिसंबर 2015 तक बढ़कर 7.3 % हो गया था, जो मार्च 2015 में 5.43 % था. वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, ‘हमें बैंकरप्सी लॉ संसद के मौजूदा सत्र में पास होने की उम्मीद है. इसके अलावा,सारफेसी और डीआरटी कानून में बदलाव  किया जा रहा है ताकि बैंकों को लोन रिकवरी में मदद मिले.’ फंड के लिए अभी तक इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त मंत्रालय के सामने प्रेजेंटेशन दिया है.

वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने बताया, ‘कुछ बैंकों को उन सेक्टर्स पर फोकस करना चाहिए जिनमें वे पहले से मजबूत हैं. जैस-एमएसएमई या एग्रीकल्चर लेंडिग. वे ऐसे क्षेत्रों को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बना सकते हैं.’ वित्त मंत्रालय के मुताबिक, सरकारी बैंकों को फाइनैंशल ईयर 2019 तक 1.8 लाख करोड़ रुपये के एडिशनल कैपिटल की जरूरत पड़ेगी. इसमें 1.1 लाख करोड़ रुपये मार्केट और नॉन-कोर एसेट्स बेचकर जुटाए जाने हैं.

गेल को पीछे छोड़ किसने 21 गेंदों में जड़ा शतक?

वेस्टइंडीज के एक 23 वर्षीय बल्लेबाज ने महज 21 गेंदों में शतक जड़ दिया. इराक थॉमस नाम के इस बल्लेबाज ने यह रिकॉर्ड टोबेगो क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा आयोजित टी20 टूर्नामेंट में बनाया. थॉमस ने अपनी पारी में 31 गेंदों पर नाबाद 131 रन ठोक डाले.

त्रिनिदाद व टोबेगो क्रिकेट एसोसिएशन के टी-20 टूर्नामेंट में स्पेसाइड्‍स द्वारा दिए गए 152 रनों के लक्ष्य को स्कारबोरो ने मात्र 8 ओवरों में हासिल किया. थॉमस बेहद आक्रामक बल्लेबाज है, वे इससे पहले चार्लोटविले के खिलाफ 53 गेंदों में 97 रन बना चुके हैं.

थॉमस ने कहा- मैं ट्‍वेंटी-20 क्रिकेट में अपना पहला शतक बनाकर बहुत खुश हूं. मुझे ज्यादा समय नहीं हुआ है और इस दौरान छोटे प्रारूप में शतक बनाकर मैं बहुत खुश हूं. यह ग्राउंड छोटा है, इसके चलते इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल नहीं था. इसी के मद्देनजर मैंने गेंदबाजों की जमकर पिटाई की.

वैसे इससे पहले टी20 क्रिकेट में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड भी वेस्टइंडीज के ही क्रिस गेल के नाम था गेल ने यह कीर्तिमान आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बंगलोर की तरफ से 2013 में पुणे वॉरियर्स के खिलाफ बनाया था. गेल ने उस मैच में रिकॉर्ड 175 नाबाद रनों की पारी खेली थी. गेल ने इस मैच में मात्र 30 गेंदों में शतक बनाया था.

कयों अजहरुद्दीन से परेशान हैं ‘अजहर’ के मेकर्स?

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन के विवादित जीवन पर बनी इमरान हाशमी स्टारर फिल्म 'अजहर' अगले महीने रिलीज होने जा रही है. इमरान इन दिनों फिल्म की प्रमोशन में जुटे हुए हैं. इस बीच अजहरुद्दीन ने मेकर्स से ऐसी डिमांड कर दी है, जिससे वो मुश्किल में फंस गए हैं.

दरअसल,  मोहम्मद अजहरुद्दीन ने मांग की है कि वो इमरान हाशमी के साथ फिल्म के हर प्रमोशनल इवेंट में भाग लेना चाहते हैं. सुनने में आया है कि अजहरुद्दीन की इस डिमांड से मेकर्स परेशानी में फंस गए हैं. मेकर्स को समझ में नहीं आ रहा कि इतने कम समय में वो कैसे प्रमोशन की प्लानिंग में बदलाव कर अजहरुद्दीन को भी इसमें शामिल करें?

फिल्म से जुड़े एक सूत्र ने बताया, ' मेकर्स मीडिया में इमरान और अजहरुद्दीन का एक साथ इंटरव्यू कराने के बाद नरगिस फाखरी और प्राची देसाई समेत पूरी स्टार कास्ट को लेकर कुछ प्रमोशनल इवेंट्स करना चाहते हैं. ऐसे में हर इवेंट में अजहरुद्दीन को शामिल करना बड़ा मुश्किल काम है.'

मेकर्स को यह भी लग रहा है कि अगर हर प्रमोशनल इवेंट में अजहरुद्दीन शामिल होंगे, तो सभी का फोकस फिल्म की स्टारकास्ट पर ना होकर सिर्फ अजहरुद्दीन पर होगा. सूत्र की मानें तो, 'फिल्म के प्रति लोगों की उत्सुकता बढ़ाने के लिए ये जरूरी है कि स्टारकास्ट और फिल्म से जुड़े अनुभवों के बारे में लोगों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिले. तभी लोगों को सिनेमघरों तक आने के लिए प्रेरित किया जा सकता है.'

अब देखना यह है कि 'अजहर' के मेकर्स अजहरुद्दीन की इस मांग को स्वीकार करते हैं या नहीं. अगर ऐसा नहीं होता है,  तो यकीनन अजहरुद्दीन को बुरा लगेगा. और अगर उनकी की मांग को स्वीकार किया जाता है, तो फिल्म के प्रमोशन पर असर पड़ेगा.

अनोखा डिवाइस जो देगा आपके घर और बच्चों को सुरक्षा

स्टार्ट अप कंपनी इवोएक्सवाईजेड ने एक ऐसा अनोखा डिवाइस बनाया है जो आपके घर और बच्चों की सुरक्षा करेगा. इस अनोखे डिवाइस का नाम इवोटैग है. यह डिवाइस स्मार्टफोन में एप के साथ मिलकर काम करता है. जब कभी भी कोई खतरे में पड़ता है तो यह डिवाइस उसे भांप लेता है. और तुरंत खतरे की सूचना स्मार्टफोन को देता है. यह डिवाइस ‘लॉस्ट एंड फाउंड' की तरह काम करता है. इस डिवाइस से आप दूर बैठे सेल्फी भी ले सकते हैं. 

इवोटैग एक छोटा सा वाटरप्रूफ डिवाइस है जिसे बड़ी ही आसानी से किचेन या बैग में लटकाया जा सकता है. यह उन लोगों के लिए ज्यादा अच्छा है जो अपने बच्चों को भीड़-भाड़ वाले इलाके में लेकर जाते हैं. यह डिवाइस आपके खोए हुए बच्चे का पता लगा सकता है. 

इस डिवाइस को अगर बच्चों में लगा दिया जाए तो उनके आपसे ज्यादा दूर जाते ही स्मार्टफोन पर नोटिफिकेशन आने लगेगा. यह डिवाइस प्लग एंड प्ले डिवाइस है जिससे इसे किसी भी उम्र के लोग बड़ी आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. इवोएक्सवाईजेड टेक्नोलॉजी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिल्पा माहना भटनागर ने बताया, ‘‘इवोटैग डिवाइस से बच्चों की सुरक्षा, बच्चों के व्यवहार का अध्ययन, मरीजों के लोकेशन का प्रबंधन, घर की सुरक्षा समेत कई अन्य काम किए जा सकते हैं.’’

इवोटैग नवीनतम लो इनर्जी की ब्ल्यूटूथ तकनीक से लैस है जिसकी बैटरी क्षमता एक साल की है. यह डिवाइस ऐमेजॉन, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील समेत सभी प्रमुख ईकॉमर्स वेबसाइट पर उपलब्ध है.

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