Download App

ईपीएफ ब्याज दर में कटौती जायज : वित्त मंत्रालय

कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज के प्रस्ताव में कटौती के खिलाफ श्रमिक यूनियनों की नाराजगी के बीच वित्त मंत्रालय ने इस फैसले का बचाव किया और कहा कि ईपीएफ पर 2015-16 के लिए 8.7 % का ब्याज देने लिए भी इससे पिछले साल के अधिशेष का सहारा लेना होगा.

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) ने 2015-16 के लिए 8.8 % की दर से के ब्याज देने का प्रस्ताव किया था. वित्त मंत्रालय ने इसे 8.7 % कर दिया है. कर्मचारी यूनियनों ने वित्त मंत्रालय के इस फैसले के खिलाफ 29 अप्रैल को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है. इससे पिछले वित्त वर्ष में ईपीएफ पर 8.75 % का ब्याज दिया गया था.

वित्त मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि 2015-16 में ईपीएफओ की आमदनी इतनी नहीं है कि 8.7 % का ब्याज दिया जा सके. वर्ष 2014-15 में अधिशेष 1,604.05 करोड़ रुपये था. 8.8 % की प्रस्तावित दर पर 2015-16 में यह अधिशेष घटकर केवल 673.85 करोड़ रुपये रह जाएगा.

सूत्र ने कहा कि ऐसे में 8.8 % की प्रस्तावित दर के लिए इससे पिछले साल के अधिशेष में हाथ लगाना पड़ जाएगा और ऐसे में घटते ब्याज दरों में गिरावट के इस दौर में निवेशकों को अगले साल प्रतिफल में अपेक्षाकृत स्थिरता बनाए रखना की संभावना प्रभावित होगी.

 

दमदार परफॉर्मेंस, फिर क्यों नापसंद है ये बाइक

केटीएम ड्यूक भारत में 2012 में लॉन्‍च हुई थी. बजाज ऑटो केटीएम में 40 फीसदी की शेयरहोल्‍डर है और वही केटीएम को भारत में निर्माण, बिक्री और सर्विसिंग आदि में मदद करती है.

फिलहाल ड्यूक के दो वैरिएंट बाजार में हैं – केटीएम 200 केटीएम 390 ये दोनों ही लॉन्चिंग के बाद से बाजार में छाई हुई हैं.

आज हम आपको बता रहे हैं केटीएम बाइक्स को अमूमन लोग निगेटिव बाइक के तौर पर क्‍यों लेते हैं.

शोर करती है ये बाइक

Duke 200 and 390 स्‍पीडर बाइक्‍स हैं और शोर भी करती हैं इसलिए ज्‍यादातर पैरेंट अपने बच्‍चों को ये बाइक लेने से मना करते हैं. वे अपने बच्‍चे की सुरक्षा को लेकर कोई भी रिस्‍क नहीं लेते.

पार्ट और सर्विस है महंगी

ड्यूक 200 सीसी बाइक Rs. 1,43,000 की है जबकि 390 सीसी बाइक Rs. 1,96,000 के आसपास की एक्‍स शोरूम के साथ मिलती है. इनकी सर्विसिंग में तकरीबन Rs. 3000 – 4000 का खर्च आ जाता है जो कि भारतीय नजरिए से महंगा है. ऐसे में यह भी इन बाइक्‍स के लिए निगेटिव पॉइंट है.

तेज स्‍पीड बाइक्‍स

बाइक को चलाने का तरीका ये बाइक्‍स जिस तरह से चलाई जाती हैं, उससे लोगों के मन में इनके लिए निगेटिव इमेज बन जाती है. तेज स्‍पीड बाइक्‍स होने की वजह से कई बार इन्‍हें चलाने वालों की अन्य ड्राइवर्स से नोंकझोंक भी हो जाती है. लेकिन फिर भी इसकी दमदार परफॉर्मेंस के चलते यह लोगों की पसंद बनी हुई है.

सबसे ज्‍यदा एक्सिडेंट

इसका कोई परफेक्‍ट आंकड़ा नहीं है कि ड्यूक बाइक्‍स से कितने एक्सिडेंट होते हैं. लेकिन फिर भी इन बाइक्‍स से काफी एक्सिडेंट देखे गए हैं. अन्‍य मोटरसाइकिल के मुकाबले इससे ज्‍यादा एक्सिडेंट होना भी इसके लिए एक निगेटिव पॉइंट है.

कम है माइलेज

केटीएम ड्यूक 200 सीसी का माइलेज 35 kmpl और केटीएम ड्यूक 390 सीसी का माइलेज महज 25 ही है. ऐसे में माइलेज कम होना भी इनके लिए निगेटिव साबित होता है.

सूखे की मार: इस साल चीनी का करना होगा आयात

भारत को मौजूदा वित्त वर्ष में चीनी के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर रहना होगा. लगातार कई सालों से जारी सूखे के चलते सिंचाई की व्यवस्था कमजोर हो गई है और गन्ने की पैदावार पर खासा असर पड़ा है.

चीनी के उत्पादन में 40 फीसदी तक की कमी की संभावना है. बीते चार सालों में यह पहला मौका है, जब भारत को शत-प्रतिशत चीनी का आयात करना होगा. इस साल चीनी की वैश्विक कीमतें पहले से अधिक हैं, ऐसे में भारत की ओर से मांग बढ़ने पर दाम बढ़ सकते हैं.

यह पाकिस्तान, थाइलैंड और ब्राजील जैसे प्रतिद्वंदी देशों के लिए भी अपने निर्यात में इजाफा कर कमाई करने का मौका होगा. बॉम्बे शुगर मर्चेंट्स असोसिएशन के प्रेजिडेंट अशोक जैन ने कहा, ‘उत्पादन में गिरावट के चलते भारत को अगले साल चीनी का आयात करने की आवश्यकता होगी.’

जैन ने कहा कि सूखे ने महाराष्ट्र के लगभग सभी इलाकों में गन्ने के उत्पादन को प्रभावित किया है. सरकार को निर्यात रोकना चाहिए ताकी अगले सीजन में आयात की जरूरतों को कम किया जा सके.

अल-नीनो के प्रभाव से सूखे की स्थिति पैदा होने के चलते ज्यादातर किसान गन्ने की बुवाई नहीं कर सके हैं.सात साल में यह पहला मौका होगा, जब देश में चीनी का उत्पादन उपभोग की जरूरतों से भी कम होगा.

फोन ऐसा जो गिरने से भी नहीं टूटे…

Motorola के प्रोडक्ट की फिलॉसफी काफी सरल होती है, इसे गूगल द्वारा अधिकृत कर लिया गया था. हालांकि अब इसका मालिक Lenovo है. यह अपने उत्पादों में ऐसे फीचर्स डालता है जिसके लिए लोग हमेशा से सतर्क होते हैं. चाहे वह सॉफ्टवेयर हो, डिजाइन या हार्डवेयर हो सबके साथ सरलता बनी रहती है. इस बार यह नहीं टूटने वाले स्क्रीन के साथ आया है.

Moto X Force साथ मोटोरोला मार्केट के लिए यह फोन लेकर आया है. ये अलग बात है कि हथौड़े से तोड़ने की कोशिश की जाए तो यह काम नहीं करेगा पर यदि हाथ से फिसल कर फोन गिरता है या फिर गुस्से में आप इसे जमीन पर फेंक देते हैं तब यह स्क्रीन नहीं टूटेगा. इसकी कीमत 49,999 रुपये रखी गयी है. नहीं टूटने वाले स्क्रीन के साथ इसमें और भी खूबियां और बुराईयां हैं, डालते हैं एक नजर-

डिजाइन

Motorola ने अपने इस फोन को अच्छे डिजाइन से लैस किया है हालांकि इसमें राउंडेड कॉर्नर नहीं है. इसमें मेटल फ्रेम लगा है. अब तक अपने फोन्स में मोटोरोला पहले से ही गोरिल्ला ग्लास का इस्तेमाल करता रहा है. मोटो एक्स फोर्स में शैटरप्रूफ ग्लास लगा हुआ है. फोन की बिल्ड क्वालिटी भी प्रभावी है. इसका बैक कवर बैलिस्टिक नायलॉन का बना है. यह ऐसा मटीरियल है जो छूने में सिल्क का अहसास देता है. इसके बैक पर मोटो का लोगो है. स्क्रीन के चारों ओर का फ्रेम थोड़ा उठा हुआ है जो गिरने पर ग्लास को बचाता है.

5.4 इंच स्क्रीन वाला Moto X Force बड़ा फोन है पर भारी नहीं, उपयोग करने में यह आरामदेह है. अगर आपका हाथ बड़ा है तो आप एक हाथ से X Force का उपयोग आराम से कर सकते हैं. अन्य मोटो फोंस की तरह ही Moto X Force भी वाटरप्रूफ है. यानि इसे पानी में गिरने पर भी कुछ नहीं होगा.

डिस्प्ले

Moto X Force की स्क्रीन बेहतर डिस्प्ले व टिकाऊ है. 5.4 इंच की स्क्रीन के साथ 1440 x 2560 पिक्सल रेज्योलूशन के साथ आने वाले इस फोन में टेक्सट व इमेज स्पष्ट दिखते हैं. डिवाइस के रंग बेहतर हैं. दिन के दौरान अच्छी रोशनी में स्क्रीन काफी अच्छा दिखता है लेकिन धीमी रोशनी में यह थोड़ा मंद हो जाता है.

इसकी ब्राइटनेस काफी अच्छी है. Moto X Force ने अपने स्क्रीन के ऊपर विशेष प्रकार के लेयर्स का उपयोग किया है, इसकी वजह से यह रिफलेक्टिव दिखता है.

जहां तक इसके टिकाउपन की बात है तो इस फोन का मुकाबला कोई नहीं कर सकता है. इसके पास नहीं टूटने वाली स्क्रीन है. और यह कोई झूठा दावा नहीं है

दूसरी अच्छी बात है कि इस फोन के साथ चार साल की वारंटी भी है.

सॉफ्टवेयर

अन्य मोटोरोला फोंस की तरह इसमें भी एंड्रायड लॉलीपॉप है, और मार्शमैलो अपडेट भी इसे मिलेगा.

मोटोरोला ने फोन पर कुछ एप्स प्रीलोडेड मुहैया कराए हैं. SHAREit जैसे कुछ उपयोगी एप्स भी हैं. X Force पर मार्शमैलो का स्लीक डिजाइन और सरल इंटरफेस है. उपयोग करने में यह काफी आसान है, इसका एनिमेशन भी काफी अच्छा है.

परफार्मेंस

Moto X Force हाई एंड फोन है और इसमें लगा हार्डवेयर भी अच्छी क्वालिटी वाला है. इसमें स्नैपड्रगन 810 प्रोसेसर, 3GB RAM, 32GB इंटरनल स्टोरेज है जिसे माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए 200GB तक बढ़ाया जा सकता है. अच्छा हार्डवेयर और साफ सॉफ्टवेयर वाला फास्ट व स्मूथ फोन है. इसमें GPS फास्ट है और वेब ब्राउजिंग भी स्मूथ है. फुल HD वीडियोज काफी आसानी से चलते हैं.

इसके अंदर पावरफुल प्रोसेसर्स हैं और Moto X Force में Implosion और Asphalt 8 जैसे गेम्स बड़ी आसानी से नियंत्रित किए जा सकते हैं. लेकिन स्नैपड्रगन810 वाले अन्य फोंस की तरह, यह फोन गर्म हो जाता है. यदि आप फोन पर 30 मिनटों तक लगातार Implosion खेलते हैं तो हीट को महसूस कर सकते हैं.

कॉल क्वालिटी व नेटवर्क परफार्मेंस काफी अच्छा है. कॉल में आवाज भी स्पष्ट है. इसका सिंगल स्पीकर छोटे से कमरे के लिए काफी है. लेकिन Lenovo Vibe X3 जैसे फोंस की तुलना में इसकी ऑडियो थोड़ी कमजोर है.

कैमरा

फोन में 21 मेगापिक्सल का रियर व 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा है. अच्छी रोशनी में Moto X Force बढ़िया शूटर है. इसके द्वारा ली गयी तस्वीरों में व्हाइट बैलेंस व पर्फेक्ट मिटरिंग होती है. इमेजेस में रंगों का तालमेल अच्छा होता है. हालांकि धीमी रोशनी में Moto X Force से ली गयी तस्वीरें अच्छी नहीं होती, फोटोज को धुंधला करती है.

फ्रंट कैमरा अच्छा है. यह अच्छी सेल्फी देता है. अच्छी रोशनी में ली गयी वीडियोज स्प्ष्ट होती हैं पर कम रोशनी के वीडियोज का हाल बुरा होता है. इस फोन के कैमरा में निराश करता है इसका सॉफ्टवेयर.

बैटरी

Moto X Force में 3760 mAh की बैटरी लगी है. वास्तविक उपयोग में जब फोन को कई इमेल व सोशल मीडिया अकाउंट्स से जोड़ा जाता है और नियमित रूप से 3G नेटवर्क का उपयोग होता है तो बैटरी 14 से 15 घंटे का टाइम देता है, जो अच्छी बात है. यह फोन फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है हालांकि यह USB 2.0 का उपयोग करता है.

खरीदें या नहीं

Moto X Force कीमती फोन है. लेकिन यदि जरूरत है तो इसे आप बेशक ले सकते हैं क्योंकि इसकी कीमत के अनुसार क्वालिटी भी है.

अगर आप चाहते हैं कि फोन न टूटे तो Moto X Force ही एकमात्र ऑप्शन है. यदि आपका बच्च गेम खेलने की जिद करता है तो यह फोन उनके लिए ही है क्योंकि कितना भी उठापटक कर ले ये टूटेगा नहीं.

अब किसने कर दी कंगना की बत्ती गुल???

कंगना से ब्रेकअप के सात साल बाद अध्ययन ने चुप्पी तोड़ी है और इतने सालों में उनके मन में कंगना को लेकर जितना गुबार भरा था, वो सब बाहर निकाल दिया है. ऐसे में कंगना के साथ रिलेशनशिप के दौरान उन्हें किन-किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, वो सब सामने आ गया है.

मारती-पीटती और गंदी गालियां देती थीं कंगना

'डीएनए' के साथ बातचीत में अध्ययन कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उनकी बातों में गुस्सा, दर्द, हताशा साफ देखने को मिली है. अध्ययन ने दावा किया है कि रिलेशनशिप के दौरान कंगना उन्हें मारती-पीटती और जलील करती थीं. गंदी गालियां भी देती थीं.

काला जादू करने का भी आरोप, ले गई थीं ज्योतिषी के पास

अध्ययन ने एक घटना के बारे में बताते हुए कहा, 'कंगना मुझे एक ज्योतिषि के पास ले गईं. उसने कहा, मेरा समय अच्छा नहीं चल रहा है, पूजा करनी होगी. फिर एक रात उसने मुझे घर बुलाकर 12 बजे पूजा शुरू की. कंगना का गेस्ट रूम पूरा काले कपड़ों से ढंका गया था. भगवान की मूर्तियां रखी थीं. फिर मुझे कुछ मंत्र पढ़ने को कहा और बाहर से दरवाजा बंद कर दिया. फिर एक दिन मुझे उस ज्योतिषी ने रात के 12 बजे शमशान घाट जाकर कुछ चीजें फेंक आने को कहा.'

रितिक के साथ अध्ययन की है पूरी हमदर्दी

अध्ययन ने रितिक रोशन के साथ अपनी हमदर्दी जताई. उन्होंने इंटरव्यू के दौरान कहा, 'मैं रितिक के साथ हूं. उनके साथ जो हो रहा है, उसे अच्छी तरह समझता हूं. इस दर्द से मैं भी गुजरा हूं. उन्हें भावनात्मक रूप से पीडि़त किया जा रहा है. लोगों को सच पता चलना चाहिए.'

रितिक पर हमेशा से थी कंगना की नजर

अब तक के इस पूरे विवाद में कई बातें ऐसी सामने आई हैं जिससे एहसास हुआ है कि रितिक के प्रति कंगना का प्यार एकतरफा था. अध्ययन ने भी दावा किया कि कंगना की नजर हमेशा से रितिक पर थी.

जब कंगना उन्हें डेट कर रही थीं, उस दौरान की एक घटना के बारे में बताते हुए अध्ययन ने कहा कि 'काइट्स' की शूटिंग के समय कंगना की रितिक और सुजैन से दोस्ती हुई थी. वे अक्सर उनके साथ डिनर करती थीं और एक-दो बार मैं भी साथ गया. एक बार रितिक ने कंगना को अपने बर्थडे पर बुलाया और मुझे भी कॉल किया. मैं उनके लिए फ्लॉवर्स और मंहगी शैंपेन की बॉटल लेकर आया. हम दोनों बैठकर बात कर रहे थे, तभी रितिक आ गए. कंगना ने मुझे नजरअंदाज कर दिया और मेरे लाए फ्लॉवर्स व शैंपेन की बॉटल लेकर रितिक को विश करने लगी और कहा कि वो ये सब उनके लिए लेकर आई है. इसके बाद कंगना ने मुझे पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और रितिक में बिजी हो गई.

कंगना के करियर को नुकसान पहुंचाने का मकसद नहीं

कंगना के साथ ब्रेकअप के बाद अध्ययन विदेश चले गए थे. कुछ ही दिनों पहले लौटे हैं. अध्ययन ने कहा कि उनका मकसद कंगना के करियर या स्टारडम को नुकसान पहुंचाना नहीं है, मगर वो किसी और को निशाना बनाकर मासूम नहीं बन सकतीं, क्योंकि और लोग भी हैं जिन्होंने लंबे समय यह दर्द सहा है. अध्ययन के मुताबिक, कंगना की वजह से उनके करियर पर असर पड़ा, क्योंकि कंगना ने गलत बातें फैलाईं. अध्ययन ने ये भी कहा कि कंगना को लेकर उनका यह आखिरी इंटरव्यू है.

'राज 2' के दौरान करीब आए अध्ययन और कंगना

अध्ययन ने इंटरव्यू के दौरान बताया कि 'राज 2' में साथ काम करने के दौरान दोनों एक दूसरे के करीब आए. वो अक्सर ड्राइव्स और डिनर्स के लिए जाने लगे. हालांकि एक दिन वो कंगना को डिनर के लिए ताज ले गए, जहां वो उनके एक्स-ब्वॉयफ्रेंड (आदित्य पंचोली) के बारे में पूछ बैठे. इस बात को लेकर कंगना को काफी गुस्सा आया और वो रेस्टरूम में जाने की बात कर वापस नहीं लौटीं. एक घंटे बाद उन्होंने कॉल किया तो कंगना ने बताया कि वो घर पर हैं. यही से दोनों के बीच अनबन की शुरुआत भी हुई.

ऐसे शुरु हुआ रितिक और कंगना का विवाद

अब तक रितिक और कंगना के कथित अफेयर को लेकर सिर्फ चर्चाएं ही थीं, मगर हाल ही में दोनों के आपस में टकराने से सब कुछ सार्वजनिक हो गया है और ऐसी बहुत सी चीजें व बातें सामने आई हैं जिनके बारे में पहले किसी को नहीं पता था. दोनों के बीच विवाद की शुरुआत तब हुई, जब कंगना ने एक इंटरव्यू में बिना नाम लिए रितिक 'सिली-एक्स' कह दिया. फिर क्या दोनों के बीच कानूनी लड़ाई छिड़ गई और तब से ही दोनों के संबंध को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हो चुके हैं.

 

‘मंडल’ और ‘शराब बंदी’ उत्तर प्रदेश में नीतीश कुमार के हथियार

एक तरफ उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार ने शराब सस्ती कर दी है. दूसरी तरफ बिहार में मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार ने बिहार में शराब बंद कर दी है. जिसका जनता को बडा समर्थन मिल रहा है. बिहार में अपराध् के आंकडे देखने से भी पता चलता है कि शराब बंदी के बाद अपराधें में कमी आई है. बिहार की बडी सीमा उत्तर प्रदेश से भी मिलती है. उत्तर प्रदेश में शराब के सस्ती होने के कारण बिहार में तस्करी करके ले जाई जाती है.

बिहार के मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार जानते है कि जब तक उत्तर प्रदेश में शराब की बंदी नहीं होगी तब तक बिहार पूरी तरह से शराब मुक्त नहीं हो सकेगा. नीतीश कुमार उत्तर प्रदेश के विधनसभा चुनाव में भी ‘शराबबंदी’ को चुनावी हथियार बनाना चाहते है. नीतीश कुमार ने मंडल आयोग लागू करने वाले पूर्व प्रधनमंत्राी विश्वनाथ प्रताप सिंह की विचारधरा को भी उत्तर प्रदेश की राजनीति के केन्द्र में स्थापित करने का प्रयास करेगे.

उत्तर प्रदेश में विश्वनाथ प्रताप सिंह को आज भी समाजसुधरक और पिछडा वर्ग के समर्थक के रूप में पहचाना जाता है.उनकी विचारधरा से लोगों का जोडने का प्रयास नीतीश कुमार करेगे. 15 मई को लखनउफ में नीतीश कुमार ‘किसानमंच’ की महिलाओं के कार्यक्रम में हिस्सा लेगे. ‘किसानमंच’ की स्थापना विश्वनाथ प्रताप सिंह ने की थी. इसके पहले 12 मई को वाराणसी के पिंडारा में जनता दल ;यूनाइटेड यानि जदयू के कार्यकताओं के सम्मेलन में हिस्सा लेगे.

नीतीश कुमार दरअसल उत्तर प्रदेश में मंडल राजनीति को केन्द्र में लाना चाहते है.वह शराबबंदी को प्रमुख मुददा बना कर जयप्रकाश नारायण और डाक्टर राम मनोहर लोहिया की शराब बंदी के विचार को सामाजिक मुददा बनायेगे.नीतीश कुमार उत्तर प्रदेश के विधनसभा चुनाव में एक महागठबंध्न बनाने की तैयारी में है. जिसमें राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस प्रमुख सहयोगी होगे.कांग्रेेस की चुनावी कमान संभाल रहे प्रशांत किशोर के साथ नीतीश का पुराना संबंध् है. ऐसे में एक बेहतर तालमेल की उम्मीद की जा रही है. नीतीश कुमार लोकदल के चौधरी अजीत सिंह को भी महागंठबंध्न में जोडना चाहते है.

नीतीश कुमार मंडल राजनीति के जरीये पिछडी जातियों के समाजवादी पार्टी के वोटबैंक पर हमला करेगे. विश्वनाथ प्रताप की नीतियों के सहारे राजपूत वर्ग को जोडेगे और शराबबंदी के मुददे से गरीब वर्ग और महिलाओं को अपने उत्तर प्रदेश अभियान का मुख्य मुददा बनायेगे. मंडल के सहारे नीतीश न केवल सपा को जबाव दे सकेेेगे बल्कि भाजपा के राममंदिर मुददे का भी मुकाबला कर सकेगे. शराब को लेकर उत्तर प्रदेश में न केवल अपराध् बढ रहे है बल्कि घरेलू लडाई झगडे भी खूब हो रहे है. ऐसे में महिलायें यह चाहती है कि प्रदेश में शराब बंद हो. नीतीश कुमार ने न केवल बिहार में शराब बंदी का एक उदाहरण पेश किया है बल्कि उत्तर प्रदेश में भी शराब बंद करने का भरोसा दिलाया है. वोटरों में बडी संख्या औरतों की है. जो इस मुददे पर वोट कर सकती है. नीतीश कुमार के इस मुददे का विरोध् करना किसी भी दल के लिये कठिन है. ऐसे वैचारिक लडाई में नीतीश कुमार ने सभी दलों पर एक बढत बनाने का काम किया है.                                           

 

लो भाई, बिहार में अब खाना भी बंद

अब बिहार में खाना पर भी पाबंदी लग गई है. ‘पीना’ तो पहले ही बंद कर दिया गया था, अब खाना भी बंद. बिहार सरकार ने नया फरमान जारी किया है कि सुबह 9 बजे से लेकर शाम 6 बजे के बीच खाना नहीं बनेगा. जो इस फरमान का उल्लंघन करेगा, उसे 2 साल के कैद की सजा मिलेगी. आप सोच रहे होंगे कि यह क्या हो रहा है बिहार में? ‘पीना’ याने शराब पर रोक तो ठीक है, पर खाने पर पाबंदी क्यों?

यह कोई अंधेरगर्दी नहीं है, बल्कि बिहार के गांव-गिरांव में अगलगी की वारदातों के तेजी से बढ़ने की वजह से खाना बनाने पर रोक लगा दी गई है. सुबह 9 बजे से पहले ही खाना बना लेना है और रात का भोजन शाम 6 बजे के बाद ही बनाना है. गरमी के मौसम में दोपहर के समय तेज धूप की वजह से सारी झोपडि़यां मानो बारूद बन जाती है. छोटी सी चिंगारी पूरे इलाके में तबाही मचा देती है.

आपदा प्रबंध्न विभाग के प्रधन सचिव व्यास जी ने बताया कि अगलगी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए विभाग की ओर से एडवाइजरी जारी किया गया है. अगलगी की घटनाओं से जान, माल, पफसल और घरों का बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है. सुबह 9 बजे के बाद से ही गरम तेज हवाआं के चलने से चूल्हों से निकली चिंगारियां से गांव के गांव खाक हो रहे हैं. इसलिए सुबह 9 बजे से पहले और शाम में 6 बजे के बाद खाना बनाने को कहा गया है. इसके साथ ही गेहूं की कटनी के बाद उसके डंठल को नहीं जलाने की भी हिदायत दी गई है. इस आदेश को नहीं मानने वालों पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंध्न अधिनियम 2005 की धरा-51; के तहत कानूननी काररवाई की जाएगी. उसके तहत 2 साल की कैद या जुर्माने की सजा है.

अप्रैल महीने में अगलगी की वारदातों ने 73 इंसानों और 236 जानवरों की जान ले ली है. 23 लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं. 11 हजार 575 एकड़ में लगी पफसलें स्वाहा हो गई हैं. अगलगी से करीब 7 करोड़ रूपए का नुकसान हो चुका है और सरकार की ओर से 17 करोड़ रूपए मुआवजा के तौर पर बांटे गए हैं. अगलगी की सबसे बड़ी और दर्दनाक वारदात बिहार के दाउदनगर अनुमंडल मुख्यालय के नजदीक हरिनगर में हुई. पिछले 22 अप्रैल को वहां भयंकर आग लग गई जिसमें झुलस के 6 बच्चों, 3 औरतों और 3 मर्दो की मौत हो गई. इसके अलावा 6 लोग बुरी तरह जख्मी भी हो गए.

टोले के बगल के खाली पड़ी जमीन पर ‘भूत’ भगाने के नाम पर भगतई चल रही थी. इसके लिए बड़ा हवनकुंड बनाया गया था. भूत भगाने की ड्रामेबाजी के दौरान हवनकुंड में तेज आग जलाई गई थी और उसमें हुमाद और घी आदि डाला जा रहा था. हवनकुंड से निकली चिंगारी ने देखते ही देखते ऐसा विकराल रूप धारण कर लिया कि आसपास की कई झोपडि़यों में आग लग गई.

आग मे जल कर मारे गए जटाराम के बेटे विजय दास ने बताया कि उसके घर के बाहर गैरमजरूआ आम जमीन है, जिसका इस्तेमाल वे लोग रास्ते के रूप में करते हैं. इसी जमीन पर कुछ महीने पहले भोला पासवान नाम के एक आदमी ने झोपड़ी बना ली. झोपड़ी में भोला और उसका साथी त्रिलोकी प्रेत और भूत भगाने के नाम पर जादू टोना करता रहता था. 22 अप्रैल को दोपहर 3 बजे के करीब भूत भगाने के लिए झोपड़ी के पास कई लोग जमा थे. भूत भगाने के नाम पर हवन शुरू किया गया. जैसे ही हवन कुंड में लोबान डाला गया वैसे ही आग तेजी से ध्ध्की और झोपड़ी में आग लग गई.

उसी दिन विजय दास का तिलक रस्म था और उसके पिता समेत उसके परिवार के 10 लोग पोंगापंथ की आग में स्वाहा हो गए. औरंगाबाद के नवीनगर से लड़की वाले तिलक लेकर आने वाले थे. पूरा परिवार विवाह की तैयारियों ले लगा हुआ था. इसी बीच विजय के घर के पश्चिम छोर पर धुंआ उठने लगा और लोग चिल्लाने लगे. विजय समेत उसका भाई रमेश, राजेश, उमेश दौड़ पड़े. हंगामे वाली जगह पर पहुंचने के बाद उन्होंने देखा की भोला की झोपड़ी में आग लगी हुई है. लोग जब तक आग पर काबूू पाने की कोशिश करते तब तक तेज हवा की वजह से आग विजय के घर में भी लग गई. विजय की मां शांति देवी और बाकी परिजन बाहर की ओर भागे, पर कई लोग अंदर ही फंस गए. आगलगी में विजय, उसकी मां और 3 भाई तो बच गए पर उसके पिता बाहर नहीं निकल सके.
    
    
 

रितिक के साथ हैं सुजैन

रितिक रोशन और कंगना रनौत के बीच का विवाद दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है. आए दिन नए खुलासों का दौर जारी है. हालांकि दोनों के बीच 'फोटो वार' के चलते रितिक की पूर्व पत्नी सुजैन खान को भी बोलने को मजबूर होना पड़ा है, जिन्होंने अब तक इस विवाद से खुद को दूर रखा था.

हाल ही में रितिक और कंगना की किसी पार्टी की एक पुरानी फोटो सामने आई, जिसमें दोनों एक दूसरे के बेहद करीब थे. जारी विवाद के मद्देनजर यह फोटो वायरल हो गई. इसके बाद कई और फोटो भी सामने आ गई, जिसके बारे में कहा गया कि ये भी उसी पार्टी की हैं. इन सभी फोटो में रितिक और कंगना के बीच काफी करीबियां देखने को मिली.

अब इस मामले में रितिक की पूर्व पत्नी सुजैन चुप्पी तोड़ते हुए उनके सपोर्ट में उतरी हैं, जिनसे उन्होंने 2000 में शादी की थी और 2014 में तलाक के साथ राहें जुदा हो गईं. किसी की तरफ बिना इशारा किए सुजैन ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि जितनी भी फोटो सामने आई हैं, वो फोटोशॉप की गई हैं और झूठी कहानियों को ज्यादा प्रचार मिल रहा है. इसके साथ उन्होंने उस पार्टी की एक फोटो भी शेयर की है, जिसमें वो और रितिक इंटिमेट पोज देते नजर आ रहे हैं. इसके साथ सुजैन ने लिखा है, 'Another pic for the record. I support Hrithik'.

गौरतलब है कि यह पार्टी अर्जुन रामपाल और उनकी पत्नी मेहर जेसिका ने चार दिसंबर, 2010 को अपने घर पर दी थी, जिसमें करीब 40 मेहमान शामिल हुए थे. अब सुजैन के ट्वीट्स इस विवाद को अलग ही मोड़ देने वाले हैं. खैर, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई, जब कंगना ने एक इंटरव्यू में रितिक को इशारों में ही 'सिली-एक्स' कह दिया, जिसको लेकर दोनों के बीच कानूनी जंग छिड़ गई और अब जो स्थिति है आपके सामने है.

एक दिन में 155 लीटर दुग्ध उत्पादन करने वाली बिटाना

गांव में रहने वाली औरतों को लोग असहाय समझते है. लखनउ के मीरखनगर गांव की रहने वाली बिटाना ऐसे लोगों के लिये उदाहरण के समान है. बिटाना ने साल 2014-2015 में कुल 56,567 लीटर दूध का उत्पादन किया. औसतन 155 लीटर दूध प्रतिदिन बिटाना ने पराग को दिया. वैसे उसके यहां कुल 188 लीटर दूध का उत्पादन रोज होता है. बिटाना उन औरतों में है जो अपनी मेहनत से सफलता हासिल करना चाहती है. बिटाना कक्षा 5 तक ही पढी है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने बिटाना को गोकुल पुरस्कार से सम्मानित किया. लखनउ जिले में बिटाना को यह पुरस्कार लगातार 10 वीं बार मिला है. बिटाना देवी ने साल 1985 से यह काम शुरू किया था. उसके घर में उस समय आर्थिक तंगी थी. घर में केवल एक भैंस थी जो उसको शादी में मिली थी. बिटाना ने उसी से दूध बेचने का काम शुरू किया. कुछ ही दिनों में यह काम उसके पूरे घर वालों को पसंद आने लगा. बिटाना के पति हरिनाम सिंह रायबरेली जिले में शिक्षक बन गये तो उसे यह काम खुद से ही शुरू करना पडा.

बिटाना के पास 24 गाय और 10 भैंस है. इनकी देखभाल करने के साथ बिटाना खुद ही इनका दूध निकालती है. खुद ही सभी मवेशियों की देखभाल करने वाली बिटाना कहती है कि साल 2014-2015 में कुल 56,567 लीटर दूध पराग को सप्लाई किया. वह कहती है ‘इस काम में पति मेरा पूरा साथ देते है. उनकी ही प्रेरणा का फल है कि मुझे 10 वीं बार गोकुल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. मेरा सपना है कि मै उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक दुग्ध उत्पादन करने वाली महिला बनूं'. बिटाना को पिछले साल भी प्रदेश में चैथा स्थान मिला था. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वालों में 18 महिलायें है. उत्तर प्रदेश के दुग्ध उत्पादन मंत्री  राममूर्ति वर्मा ने कहा कि दूध कारोबार को बढ़ावा देने के लिये सरकार गोकुल पुरस्कार राशि को बढ़ाने जा रही है. बिटाना ने महिलाओं को नई राह दिखाने का काम किया है.

आखिर जान देना इतना सस्ता क्यों?

बीएचयू के इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. स्वाति पांडेय ने सोमवार को सुसाइड कर लिया. बताया जा रहा है कि मंडुआडीह में वर्कर्स मैनेजर अंबेश त्रिपाठी से उसकी शादी तय हुई थी लेकिन, लड़के ने शादी से इनकार कर दिया.  शादी टूटने से स्वाति परेशान थी. रविवार को उसकी मां और घर के दूसरे सदस्य शादी में गए हुए थे. घर पर पिता और छोटी बहन थी. सोमवार की सुबह जब पिता उसे जगाने गए तो वह साड़ी के फंदे से लटकती हुई मिली. उन्होंने तत्काल पड़ोसियों की मदद से उसे नीचे उतारा और हॉस्पिटल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

ऐसी खबरें समाज के सामने कई सवाल खड़े करती हैं कि आखिर क्यों  ब्रेकअप और शादी से इनकार बन जाता है किसी के लिए ज़िन्दगी से विदा लेने की वजह ? क्या किसी की लाइफ में कोई इतना महत्वपूर्ण हो जाता है कि उस का इनकार किसी को मौत को गले लगाने पर मजबूर कर देता है? आंकड़े बताते हैं कि आत्महत्या का कारण अकसर ब्रेकअप बनता है. प्रेम संबंधों में मिले धोखे के बाद लोग खुद को संभाल नहीं पाते और अवसादग्रस्त हो जाते हैं. बाद में या तो वे आत्महत्या कर लेते हैं या फिर जिंदगी से बेजार हो कर समाज से कट जाते हैं.

सेलिब्रेटी भी पीछे नहीं

ग्लैमर वर्ल्ड में इस तरह की घटनाओं से अछुता नहीं है . जिया खान, दिशा गांगुली, शिक्षा जोशी, रूबी सिंह, कामसूत्र कंडोम की चर्चित मॉडल विवेका बाबाजी, सिल्क स्मिता और ना जाने कितने नाम हमें इस फेहरिस्त में मिल जायेंगे, जिन्होंने अपनी जिंदगी से हार मान ली . हॉलीवुड के जाने माने एक्टर जिम कैरी की गर्लफ्रेंड कै‍थरियोना व्हाइट ने स्टार से ब्रेकअप के बाद खुदकुशी कर ली थी .इनके अलावा भी कई ऐसी सेलीब्रिटी हैं, जिनकी मौत पर से रहस्य का पर्दा नहीं हटा या फिर जो अवसादग्रस्त होकर मौत की आगोश में समा गये. कांग्रेस नेता शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर, बॉलीवुड एक्ट्रेस दिव्या भारती एवं  परवीन बॉबी का नाम यहां प्रमुखता से लिया जाता है.

ब्रेकअप और आत्महत्या का कनेक्शन

मनोविज्ञान कहता है कि ‘ब्रेकअप’ लोगों को इस कदर दुखी करता है कि उन्हें लगता है कि एक ऐसा संबंध जिससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से जुड़े होते हैं, उस से एक पल भी दूर हो जाने का डर उन्हें परेशान कर देता है और वे दुख के सागर में डूब जाते हैं. उन्हें लगता है कि वे उस शख्स के बिना जी नहीं पायेंगे. उन्हें अपनी दुनिया वीरान और बेमतलब लगने लगती है और वे खुद को संभाल नहीं पाते है.  उनकी यह सोच उन्हें इस कदर बेचैन कर देती है कि वे आत्महत्या जैसा कदम  उठाने के लिए मजबूर हो जाते हैं. विगत कुछ वर्षों में प्रेम में असफल युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्ति काफी बढ़ी है. ऐसे युवाओं को समझने की जरुरत है कि किसी के बगैर जिन्दगी नहीं रूकती, अगर आप कुछ दिन इस अलगाव व ब्रेकअप के दर्द को बर्दाश्त कर लेंगे तो जिन्दगी खत्म करने की चाह खत्म हो जायेगी. आप यह सोचिये जिन्दगी किसी के बगैर नहीं रूकती. क्या कभी  किसी ने प्रकृति को ठहरते हुए देखा है? भले कितनी बड़ी विपदा आ जाए सूरज अपने समय पर ही उगता और अस्त होता है. दुनिया में रात और दिन अपने समय पर ही होते है तो फिर ऐसे  किसी के अपनी जिंदगी से चले जाने के निर्णय पर अपनी अमूल्य जिन्दगी को क्यों दांव पर लगाया जाए?

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें