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मैच फिक्सिंग के दोषी पर लगे आजीवन प्रतिबंध: कुक

इंग्लैंड के कप्तान एलेस्टेयर कुक का मानना है कि मैच फिक्सिंग में लिप्त पाए जाने वाले खिलाड़ियों पर आजीवन प्रतिबंध लगना चाहिए. कुक ने जहां एक तरफ मैच फिक्सिंग में दोषी पाए जाने वाले खिलाड़ियों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की वहीं उन्होंने साथ ही कहा कि स्पॉट फिक्सिंग के मामले में सजा काट चुके पाकिस्तान के तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर के खिलाफ उन्हें खेलने में कोई खतरा नहीं है क्योंकि इसके लिए आमिर को सजा मिल चुकी है.

सीमित ओवरों के क्रिकेट में वापसी के बाद आमिर लॉर्डस में इंग्लैंड के खिलाफ श्रृंखला के पहले टेस्ट के साथ टेस्ट क्रिकेट में वापसी के लिए तैयार हैं. कुक 2010 में इंग्लैंड की उस टीम में शामिल थे जब आमिर और पाकिस्तान के 2 अन्य खिलाड़ी लाडर्स टैस्ट में स्पॉट फिक्सिंग में लिप्त पाए गए थे. 

छह साल पहले लॉर्डस टेस्ट के दौरान ही आमिर और पाकिस्तान टीम के उनके दो साथियों को जानबूझकर नो बॉल फेंकने का दोषी पाया गया था. तब एक समाचार पत्र ने स्टिंग आपरेशन कर के इन तीनों को स्पॉट फिक्सिंग में शामिल होने पर राजी होने की इच्छा जताते हुए दिखाया था.

कुक ने कहा, ‘यह विडंबना है कि उसका (मोहम्मद आमिर) पहला टेस्ट मैच दोबारा यहां लॉर्डस पर ही होगा.’ उन्होंने कहा, ‘उसने अपनी सजा काट ली है. उसने जो किया उसके लिए उसे सजा मिली और यह सही हुआ क्योंकि हमें खेल की अखंडता को बचाना है.‘

 इंग्लैंड के कप्तान कुक ने कहा कि यदि कोई खिलाड़ी मैच फिक्सिंग में लिप्त पाया जाता है तो उस पर आजीवन प्रतिबंध लगाना चाहिए. इसके साथ मैच फिक्सिंग करने वालों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए क्योंकि हमें खेल की विश्वसनीयता बनाई रखनी है.

कप्तान ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है आमिर को क्रिकेट में वापसी नहीं करना चाहिए था, क्योंकि उस समय के नियम अलग थे. लेकिन मेरे नजरिए से देखा जाए तो इसके लिए कठोर मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में इसे रोका जा सके. आमिर ने जो गलती की थी इसके सजा उन्हें मिल चुकी है.

कुक से पहले इंग्लैंड के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड ने भी कहा था कि आमिर के खिलाफ खेलने को लेकर उन्हें कोई दिक्कत नहीं है. इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच पहला टैस्ट मैच 14 जुलाई से खेला जाएगा.

कॉल ड्रॉप : ट्राई उठाएगा बड़े कदम

कॉल ड्रॉप के मामले में आम लोगों के निशाने पर आने के बाद ट्राई ने इस पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा कदम उठाने की पहल की है. ट्राई ने मंशा जाहिर की है कि कॉल ड्रॉप पर तय पैरामीटर के उल्लंघन पर संबंधित मोबाइल ऑपरेटर कंपनी के अधिकारियों को दो साल तक की जेल हो. साथ ही दोषी कंपनी पर 10 करोड़ तक का भारी जुर्माना लगाने के लिए अधिकार दिए जाने की मांग की है. ट्राई ने केंद्र सरकार से इसके लिए मौजूदा कानून में बदलाव करने का आग्रह किया है.

ट्राई ने कॉल ड्रॉप के लिए मोबाइल ऑपरेटर कंपनियों को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रति कॉल ड्रॉप 1 रुपया का आर्थिक दंड टेलीकॉम कंपनियों पर लगाने का आदेश जारी किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को खारिज कर दिया था. इसके बाद ट्राई ने नए सिरे से इस समस्या पर अंकुश लगाने की पहल की है.

फिलहाल ट्राई को अधिकतम दो लाख रुपया आर्थिक दंड लगाने का अधिकार है जबकि जेल भेजने का अधिकार इसके पास नहीं है. ट्राई ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम को लिखे पत्र में मौजूदा प्रावधान में बदलाव करने के लिए पत्र लिखा है. इस बीच 10 जून को कॉल ड्रॉप के मसले पर ट्राई ने सभी संबंधित पक्षों की मीटिंग भी बुलाई है.

फिल्मों के सियासी मंसूबे

मुजफ्फरनगर दंगो पर बनी फिल्म ‘शोरगुल’ और पंजाब के नशे के कारोबार पर बनी फिल्म ‘उडता पंजाब’ बनी तो मनोरंजन के लिये, पर अब इनको राजनीति का मोहरा बनाया जा रहा है. इसके चलते दोनो ही फिल्में विवादों में उलझ गई हैं. फिल्म ‘शोरगुल’ उत्तर प्रदेश की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर बनी है. फिल्म ‘शोरगुल’ को सेंसर बोर्ड से प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी इसके खिलाफ अदालत में रिट याचिका दाखिल की गई है. इस फिल्म की कहानी के केन्द्र में 2013 के मुजफ्फरनगर के दंगों को दिखाया गया है. फिल्म में आशुतोष राणा, जिमी शेरगिल, संजय सूरी और नरेद्र झा जैसे कलाकार हैं. यह लोग मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, संगीत सोम और आजम खां जैसे राजनीतिक किरदारों को अदा कर रहे है. इनके नाम मिथिलेश यादव, रंजीत ओम, और आलिम खान जैसे रखे गये है. अपने जैसे किरदारों से समाजवादी पार्टी के नेता और भाजपा के विधायक संगीत सोम नाराज हैं. फिल्म ‘शोरगुल’ को लेकर मेरठ जिले के सरधना में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मिलन सोम ने पीआईएल दाखिल की. उनके वकील दिग्विजय नाथ दुबे के मुताबिक फिल्म 26 जून को रिलीज होने जा रही है. इस फिल्म में कई आपत्तिजनक दृश्य हैं. जिससे सामाजिक सदभावना और समरसता बिगड सकती है. ऐसे में इन दृश्यों के साथ फिल्म को दिखाया जाना ठीक नहीं है.

रिट में फिल्म को दिखाये जाने पर रोक लगाये जाने की बात कही गई है. रिट में केन्द्र और राज्य सरकार समेत अन्य को पक्षकार बनाया गया है. फिल्म ‘शोरगुल’ को लेकर विधायक संगीत सोम कहते है ‘इस फिल्म में बहुत सारे ऐसे दृश्य हैं जो हमारी इमेज को खराब करते हैं. हम इस फिल्म को विरोध करते हैं.’ संगीत सोम कहते हैं ‘पीआईएल के पीछे मेरा कोई हाथ नहीं है पर हम इस फिल्म की विषयवस्तु से सहमत नहीं हैं. इसमें नेताओं की छवि को बिगाडा गया है.’

फिल्म ‘शोरगुल’ की ही तरह की हालत फिल्म ‘उडता पंजाब’ की है. यह फिल्म पंजाब की ड्रग्स समस्या को लेकर बनी है. पंजाब और उत्तर प्रदेश में साल 2017 में विधानसभा चुनाव आ रहे हैं. ऐसे में इन फिल्मों से सियासी मंसूबे साधे जा रहे हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फिल्म ‘उडता पंजाब’ के बारे में ट्वीट किया कि पंजाब ड्रग्स की परेशानी से जूझ रहा है. फिल्म पर रोक लगाने से समस्या हल नहीं होगी. पंजाब सरकार को चाहिये कि ड्रग्स को रोके. पंजाब में अकाली दल-भाजपा की सरकार है. ऐसे में ड्रग्स की बातें उसके खिलाफ जा सकती हैं.

कोशिश यह की जा रही है कि फिल्म ‘उडता पंजाब’ से पंजाब को हटाया जाये. देखने वाली बात यह होगी कि इन फिल्मों से सियासी मंसूबों को कितना लाभ मिल सकता है. कई बार फिल्म रिलीज होने के पहले उसके निर्माता ऐसे विवाद उठा कर लाभ लेना चाहते हैं. मुजफ्फरनगर दंगो ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में बडा बदलाव किया था. समाजवादी पार्टी को इसका नुकसान उठाना पडा था. ऐसे में वह फिल्म ‘शोरगुल’ को लेकर बहुत सावधान है. दूसरी तरफ भाजपा नेता भी नहीं चाहते कि इस फिल्म की वजह से उनकी इमेज खराब हो.

डांस बना कमाई का जरिया

डांस मनोरंजन की एक लोकप्रिय कला है. खुशी के हर पल में इस की जरूरत महसूस की जाती है. आज गांवदेहात, छोटेबड़े शहरों में भी डांस ग्रुप को बुलाया जाने लगा है. आर्केस्ट्रा पार्टी के नाम से जाने जाने वाले ऐसे ग्रुप के बोर्ड सड़क किनारे लगे दिखते हैं. ऐसे में डांस ग्रुप चलाना कैरियर बन गया है. अब तो कई युवतियां भी अपने डांस ग्रुप चलाने लगी हैं, कुछ डांस ग्रुप में पार्टनरशिप में काम करती हैं. ग्रुप में डांस करने वाली प्रमुख डांसर को ‘लीड परफौर्मर’ कहते हैं. वह डांस ग्रुप की पहचान होती है. उस के नाम पर ही काम मिलता है. लीड परफौर्मर को डांस सीखने में ज्यादा समय नहीं लगता है. डांस को सीखने के लिए किसी ट्रेनिंग की खास जरूरत नहीं होती. टीवी और फिल्म देख कर डांस सीखा जा सकता है. जरूरत केवल इस बात की होती है कि सीखने वाले में डांस करने का जनून हो व स्टेज पर जाने से पहले वह अपने डांस को ले कर पूरा होमवर्क और तैयारी भी कर ले. अगर अच्छी कोरियोग्राफी की गई है तो वह देखने वाले को इंप्रैस करेगा ही. डांस में कैरियर बनाने के लिए अब युवकयुवतियों का नजरिया बदल रहा है. शुरू में युवतियों को कुछ परेशानी आती है, लेकिन अब उन के परिवार के लोग भी इसे हलके में नहीं लेते हैं. आज डांस के जरिए कोई भी युवती अपना कैरियर बना सकती है. फ्रैश डांसर को शुरुआत में डांस करने पर कम पैसे मिलते हैं. जब डांसर अनुभवी हो जाती है तो उसे ज्यादा पैसे मिलने लगते हैं. अनुभवी डांसर तो अपना खुद का डांस ग्रुप भी शुरू कर लेती है.

अच्छी है कमाई

एक डांस शो में 35 से 50 हजार रुपए तक मिल जाते हैं. इस में खाने, रहने और आनेजाने का पैसा शामिल नहीं होता. ऐसे में हर डांसर के हिस्से में 2 से 4 हजार रुपए आ जाते हैं. अपने डांस ग्रुप का प्रचार करने के लिए इवैंट मैनेजर और दूसरे संपर्कों का सहारा लिया जाता है. जिन लोगों की डांस में रुचि है पहले उन को दूसरे डांसग्रुप के साथ काम करना चाहिए. डांस की ट्रेनिंग लेने में बहुत समय नहीं लगता है, बस लगन व प्रैक्टिस की जरूरत होती है. डांस के लिए डांसर को अपनी बौडी को फिट रखना होता है. इस में मेकअप का रोल अहम होता है. हमेशा गानों की थीम और ड्रैस के अनुसार मेकअप करना पड़ता है. परिवार में अगर कोई डांस के क्षेत्र में नहीं भी है तो भी युवतियां परिवार वालों को डांस के महत्त्व को समझाती हैं कि इस को कैरियर बना अच्छी कमाई की जा सकती है. डांस को ले कर छोटे शहरों की युवतियों की सोच बदल रही है. डांस करने वाली युवतियों के लिए अकसर लोग गलत सोच बनाते हैं. अनुचित टिप्पणी भी करते हैं, लेकिन जब कैरियर लीक से हट कर होगा तो युवतियों के हौसले भी पस्त नहीं होंगे.

आइटम डांस देखना चाहते हैं लोग

– नंदिनी शर्मा

पहले डांस में कैरियर बनाने वालों के लिए 2 ही रास्ते होते थे, डांसर कल्चरल डांस सीखे या फिर फोक डांस. इस के अलावा फिल्मी डांस का महत्त्व फिल्मों में ही काम देता था. फिल्मों में काम मिलना मुश्किल काम होता था. तमाम कलाकार तो जीवन भर स्टेज पर आने के लिए तरस जाते थे. अब हालात बदल रहे हैं, युवतियों को भी डांस करने के तमाम अवसर मिलने लगे हैं. बड़े शहरों के अलावा छोटेछोटे शहरों में रहने वाली युवतियां भी डांस को कैरियर बनाने में लगी हैं. ऐसी युवतियां न केवल खुद का कैरियर बना रही हैं बल्कि दूसरे युवकयुवतियों के लिए भी इस क्षेत्र में बेहतर कैरियर बनाने में मदद कर रही हैं. आगरा की रहने वाली नंदिनी शर्मा ने मौडलिंग और ऐक्टिंग से अपना कैरियर शुरू किया. आज वे ‘स्पारकल डांस ट्रूप’ चलाती हैं. इस में 4 युवक और 4 युवतियां उन का साथ देती हैं. 6 साल की मेहनत के बाद नंदिनी ने मनोरंजन जगत में अपने डांस ग्रुप की अच्छी पहचान बना ली है.

आगरा के एसएसडी गर्ल्स कालेज से इंटर करने के बाद नंदिनी ने आगरा विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसी बीच उन के मन में मौडलिंग और ऐक्टिंग करने का खयाल आया. वे अपने उद्देश्य में सफल होने के लिए मुंबई पहुंच गईं. यहां रैंप शो, टीवी सीरियल, विज्ञापन फिल्में और डांस कर के अपने को स्थापित किया. नंदिनी कहती हैं कि टीवी सीरियल करने के दौरान मुझे लगा कि अगर मैं डांस में ही अपने को फोकस करूं तो इसे कैरियर बना सकती हूं. इस से कुछ दूसरे युवकयुवतियों को भी काम मिल सकेगा. यही सोच कर मैं ने 2006 में अपना डांस ग्रुप बनाया. अब मुझे इस बात की खुशी है कि मैं खुद के साथसाथ दूसरों के लिए भी मददगार साबित हो रही हूं.

परिवार का सहयोग

नंदिनी के परिवार में मातापिता के अलावा 2 बहनें और 3 भाई हैं. नंदिनी से पहले उन के परिवार में किसी ने डांस के बारे में सोचा भी नहीं था. स्टेज पर डांस करने की तो किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.वे कहती हैं, ‘‘शुरुआत में घर वालों को मेरे स्टेज डांस से परेशानी हुई. धीरेधीरे उन को समझ में आया कि सबकुछ इतना बुरा नहीं होता है जितना लोग समझते हैं. तब वे मुझे सहयोग देने लगे. अब सभी मेरे काम की तारीफ करते हैं और खुश हैं. हर मांबाप बच्चे को सफल होते देखना चाहते हैं. उन को अगर सही तरह से समझाया जाए तो वे बच्चों की खुशियों के आड़े कभी नहीं आते हैं.’’पूरे देश में 300 से अधिक डांस शो कर चुकी नंदिनी ने डांस कहीं से सीखा नहीं है. स्टेज पर जब वे थिरकती हैं तो लगता है जैसे बिजली चमक रही हो. उन का दुबलापतला शरीर, गोरा रंग और शोख अदाएं देखने वालों पर बिजली  गिराती हैं.

उन के डांस ग्रुप को काम कैसे मिलता है, पूछने पर नंदिनी कहती हैं, ‘‘हमारे अपने जानने वाले लोग और इवैंट कंपनी से इस में मदद मिलती है. हम वैस्टर्न, थीम डांस, फिल्मी डांस और आइटम डांस सभी कुछ करते हैं. ज्यादातर लोग आइटम डांस की फरमाइश करते हैं. उस समय जो भी आइटम डांस हिट होता है उस की डिमांड भी ज्यादा होती है.’’

दिखाएं समझदारी

नंदिनी को कैटरीना कैफ, मलाइका अरोड़ा खान का डांस सब से अच्छा लगता है. वे कहती हैं, ‘‘डांसर के लिए उस की बौडी सब से खास होती है. इस के लिए जरूरी है कि डांसर अपने खानपान और ऐक्सरसाइज का सही खयाल रखें. खाने में मेवे व जूस का प्रयोग ज्यादा करें. औयली चीजें कम खाएं. डांस करने वाले को नएनए डांस स्टैप्स सीखते रहने चाहिए. अपने साथी डांसर्स के साथ स्टेज पर बेहतर कोआर्डिनेशन रखना चाहिए. स्टेज

पर नएनए डांस स्टेप्स दिखाने के लिए कोरियोग्राफर का भी बड़ा महत्त्व होता है.’’ डांस, ऐक्टिंग और मौडलिंग जैसी फील्ड में युवतियों के शोषण पर नंदिनी शर्मा का कहना है कि यह ग्लैमर की दुनिया है. युवतियों का शोषण करने वाली बातें कुछ ज्यादा प्रचारित की जाती हैं. बिना सहमति के कोई शोषण नहीं कर सकता है. अगर कहीं ऐसा होता है तो युवतियों को समझदारी से काम लेना चाहिए.

ऐसे तो घर बिखरना तय है

पतियों पर अकसर आरोप लगाए जाते हैं कि वे पत्नियों पर गुस्सा करते हैं, उन की परवाह नहीं करते, उन्हें प्रताडि़त करते हैं. पर असलियत में पति अपनी पत्नी के बिना अपनेआप को अधूरा समझते हैं. पति का पत्नी की तरह कोई मायका नहीं होता. विवाह बाद पति न तो अकेला भाईभाभी के घर जा कर रह सकता है न मातापिता के पास. पत्नी के आने के बाद उस का दूसरों से संबंध बेहद औपचारिक हो जाता है. दिल्ली में एक मध्यवर्गीय कालोनी में इसलाम अहमद ने अपनी पत्नी के मायके से न लौटने पर फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली. आर्थिक संकट से जूझ रहे पति को पत्नी का अभाव इतना खला कि उस ने अपना जीवन ही समाप्त कर डाला.

पतियों पर जोरजबरदस्ती की घटनाएं लाखों में होती हैं पर उसे पतियों का अधिकार जमाने की चेष्टा कह कर कमतर कर दिया जाता है, जबकि असल में यह पति का पत्नी के प्रति प्रेम व निर्भरता का सम्मिलित रूप होता है. पति चाहे प्रेम भरे ड्रामों वाले शब्द न कहे पर रातदिन काम कर के पैसा कमाना और सारा पैसा पत्नी के हवाले कर देना, पत्नी के प्रति प्रेम नहीं तो क्या है? विवाह बाद पतियों के अपनी पूर्व प्रेमिकाओं से संबंध नहीं रहते. मित्रों से मिलनाजुलना कम हो जाता है. भाईबहन से संबंधों में उष्णता गायब हो जाती है. मातापिता के प्रति केवल फर्ज भर रहता है, क्योंकि पति पर तो पत्नी का राज चलता है, उस पर भी उसे उलाहना सुनना पड़ता है कि वह पति के आगे शक्तिहीन है. महिला सशक्तीकरण के नारे के पीछे पतियों के प्रति उन में निरादर की बू आती है.

सब पति अच्छे ही हों, यह जरूरी नहीं पर ज्यादातर पति पत्नी से डरते हैं, उस की चिंता करते हैं, उस के सुखदुख के साथी होते हैं और उस का अभाव उन्हें इसलाम अहमद की तरह इस कदर अवसाद में डाल देता है कि वे आत्महत्या पर उतारू हो जाते हैं. अब जब पत्नियां बराबर सी हैं और घरपरिवार की इकलौती मालकिन हैं, पतिविरोधी आंदोलन को थोड़ा धीमा करना चाहिए. तलाक, परित्याग, दूसरी से प्रेम, शराब आदि की जरूरत ही नहीं होगी अगर पति की तरह पत्नी भी पति का खयाल रखे. पत्नी यह न जताए कि वह पति उस के घर में रह कर एहसान कर रही है. घर तो दोनों से ही बनता है न. अब इसलाम की पत्नी जीवन भर रोएगी कि वह 2 रोज पहले क्यों न मायके से लौट आई पर पति न लौटेगा.

खुद को गाली देते लोग

लड़ाईझगड़े के दौरान लोगों का गालीगलौज करना आम बात है. लेकिन कभीकभी लोग आदतन गाली देते हैं. ऐसे लोग गाली को गाली समझते ही नहीं. कभीकभी ऐसा भी होता है कि आदतन गाली देने वाले लोग गाली देते तो दूसरों को हैं, पर वे उलट कर उन्हीं को मिल जाती हैं. ‘उल्लू का पट्ठा’. इस का मतलब होता है उल्लू का बच्चा. इस गाली का मतलब यह है कि ‘तुम्हारे पिता उल्लू (मूर्ख) हैं, इसलिए तुम भी वैसे ही हो’. यहां तक तो ठीक है, लेकिन कुछ लोग खुद अपने बच्चे को ही ‘उल्लू का पट्ठा’ कहने लगते हैं. वे समझते हैं कि बच्चे को गाली दे रहे हैं, लेकिन इसी सोच में वे खुद अपने को ‘उल्लू’ बना डालते हैं.

दूसरी गाली है, ‘हरामी’ या हरामी का पिल्ला’. ‘हरामी’ का मतलब है नाजायज औलाद. ‘हरामी का पिल्ला’ का मतलब है ‘नाजायज औलाद की औलाद’. कई लोगों को अपने बच्चों को ‘हरामी’ कहते सुना जाता है. कई मांएं भी अपने बच्चों को ऐसी गाली देती हैं. एक  मां से पूछा गया, ‘‘आप इसे ‘हरामी’ कह रही हैं, पर इस में इस बच्चे का क्या कुसूर है?

‘‘आप ने जब अपने पति के अलावा किसी दूसरे आदमी के साथ संबंध बनाया, तभी तो यह बच्चा ‘हरामी’ कहलाया.’’ अगर कोई औरत अपने बच्चे को ऐसी गाली देती है, तो अपने पति को ‘हरामी’ बनाती है. हम ने पढ़ेलिखे लोगों को भी अपने बच्चों को ‘साला’, ‘ससुर’, ‘ससुरा’, ‘ससुरी’ जैसी गाली देते सुना है. अब अगर कोई अपने बच्चे को ‘साला’ कहता है, तो इस का मतलब यह हुआ कि जिसे गाली दी जा रही है, उस की बहन गाली देने वाले की बीवी हुई. अपने बच्चे को ‘साला’ कहने का मतलब हुआ, अपने लड़के की बहन यानी खुद अपनी बेटी को बीवी बनाना. अगर कोई अपने बच्चे को ‘ससुर’ या ‘ससुरा’ की गाली देता है, तो इस का मतलब यह हुआ कि वह खुद पोती को अपनी बीवी बनाना चाहता है.

अगर कोई ऐसी गाली अपने भाई को देता है, तो इस का मतलब यह हुआ कि उस की अपनी भतीजी ही बीवी है. एक औरत की छोटी सी बच्ची थी. वह पैदल चल सकती थी, लेकिन जिद कर के गोद से उतर ही नहीं रही थी. पहाड़ की चढ़ाई थी. अपनी बेटी की जिद से खीज कर उस की मां ने कहा, ‘‘यह ‘ससुरी’ तो एक कदम भी नहीं चलना चाहती.’’ बच्ची थोड़ी देर तक तो चुप रही, लेकिन फिर धीरेधीरे सिसकने लगी. कुछ देर बाद वह बोली, ‘‘मैं ‘ससुरी’ नहीं हूं.’’ उस छोटी सी बच्ची को यह अंदाजा लग गया था कि ‘ससुरी’ कोई गाली है. लिहाजा, गाली देने से पहले सोच लेना चाहिए कि उस का मतलब क्या हो सकता है. वैसे भी गाली देना कोई अच्छी बात नहीं है.

स्मार्टफोन पर स्मार्टली टौक

स्मार्टफोन्स जहां हमें स्मार्ट बनाते हैं वहीं उस का गलत इस्तेमाल हमारी पर्सनैलिटी को ध्वस्त भी कर सकता है. भले ही आप ऊंची आवाज में बात कर के या फिर डिस्को रिंगटोन लगा कर खुद को हीरो, मौडर्न और संतुष्ट समझें लेकिन ये बातें मोबाइल ऐटिकेट्स के खिलाफ हैं और आप के व्यक्तित्व पर बट्टा लगाती हैं. इसलिए शिष्टाचार में रह कर ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना चाहिए.

क्या कहते हैं मोबाइल ऐटिकेट्स

ऊंची रिंगटोन कहीं बन न जाए मजाक

घर हो या बाहर अधिकांश लोग अपने फोन में ऊंची साउंड करने वाली रिंगटोन सैट कर के रखते हैं और पब्लिक प्लेस में जैसे ही फोन बजता है तो टशन मारते हुए फोन निकालते हैं और सोचते हैं जैसे फोन सिर्फ उन के पास ही है. इसे भले ही वे टशन समझें लेकिन देखने वाले तो हंसी ही उड़ाते हैं और साथ ही एक नहीं कईकई बार मुड़मुड़ कर देखते हैं. इस से जहां आप हंसी के पात्र बनते हैं वहीं दूसरे भी आप की इस हरकत से डिस्टर्ब होते हैं. यदि आप इसलिए रिंगटोन पर फोन रखते हैं ताकि कोई फोन मिस न हो तो कोशिश करें कि स्लो वौल्यूम वाली रिंगटोन लगाएं और पब्लिक प्लेस जैसे बस, ट्रेन, सिनेमा हौल वगैरा में तो फोन वाइबरैशन पर ही रखें.

तेज तेज बोल कर खुद को गंवार न बताएं

कुछ लोगों को तेज बोलने की आदत होती है लेकिन कुछ तो अपनी पर्सनल चीजें जानबूझ कर लोगों को सुनाने के लिए जोरजोर से फोन पर बातें करते हैं. जैसे औफिस में अपनी शान दिखाने के लिए जैसे हमारी घर में कितनी चलती है फोन पर कहते हैं कि रात के खाने में ये बना लेना, शाम की चाय के साथ स्नैक्स में ये रख लेना. इस से उन की बातें लोगों तक पहुंच जाती है और फिर बात खत्म होते ही स्टाइल मारते हुए फोन काट देते हैं.

भले ही आप की घर में चलती हो या फिर आप अच्छा खानेपीने वाले हो तब भी अपनी बातें अपने तक ही सीमित रखें. क्योंकि आप को फोन पर जोरजोर से ऐसी बातें करते देख लोग आप के बारे में यही कहेंगे कि है कुछ नहीं लेकिन टशन मरवा लो दुनिया भर के. इसी तरह अगर आप सफर में तेजतेज बातें करेंगे तो आसपास के लोग आप से दुखी हो कर आप को गुस्से से भरी नजरों से देखेंगे. हो सकता है कि कोई आप को टोक भी दे कि मैडम या सरजी आप ही इस बस में अकेले ट्रैवल नहीं कर रहे इसलिए मेहरबानी कर के अपना वौल्यूम धीमा रखें. कोई ऐसा कहें कि इस से पहले खुद को सुधार लें.

ऊटपटांग की भाषा से करें तौबा

अगर आप बस या ट्रेन में हैं और इस दौरान किसी ऐसे व्यक्ति का फोन आ जाए जिस पर आप कई दिनों से गुस्सा निकालने की फिराक में हो और उस का फोन पिक करते ही आप उस पर गालियों की वर्षा कर दें और ऐसीऐसी बातें बोलें जो शायद आप को पब्लिक प्लेस पर नहीं बोलनी चाहिए थी. भले ही आप यह सोचें कि मुझे यहां कौन जानता है या फिर थोड़ी देर या कुछ घंटों बाद ही मैं अपने स्टैंड पर उतर जाऊंगा या जाऊंगी लेकिन मेरी भड़ास तो निकल ही गई न. लेकिन जनाब जरा अपने दिमाग पर जोर डालिए कि ऐसे व्यवहार के बाद कोई आप से बात करना तो दूर आप के साथ बैठना भी पसंद नहीं करेगा और सब आप को देखदेख कर हंसी उड़ाएंगे सो अलग. इसलिए जानबूझ कर खुद को लोगों की नजरों से न गिराएं.

गानों की धुन में न खोएं होश

युवाओं में ये आदत सब से अधिक देखने को मिलती है कि वे हैडफोन्स लगा कर फुल वौल्यूम में गाने सुनते हैं सिर्फ गाने ही नहीं बल्कि वीडियोज भी देखते हैं. इस दौरान वे गानों के साथसाथ खुद भी बराबर गाते हुए उन पर थिरकते हैं और अगर वीडियो में कोई ऐसा सीन आया जिस पर हंसी आ जाए तो वे कंट्रोल करने के बजाय ठहाके मारमार कर हंसते हैं. जिस से देखने वाले तो उन्हें पागल ही कहते हैं. साथ ही तेज वौल्यूम आसपास के लोगों के लिए भी परेशानी पैदा करती है. इसलिए मोबाइल में इतना न खो जाएं कि लोग आप के मुंह पर आप की बुराई कर के चले जाएं लेकिन फिर भी आप को कुछ सुनाई न दे.

सैल्फी का दीवानापन खुद पर न करें हावी

युवा सैल्फी क्रेजी हैं इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि आप बिना जगह देखें सैल्फी लेने में लग जाएं जैसे मैट्रो में बौयज डिब्बे में खड़े हो कर तरहतरह के पोज बना कर सैल्फी लेने लगे. यहां तक कि बस या मैट्रो में मेकअप भी फ्रंट कैमरे के सामने हो. भले ही आप जमाने की परवा नहीं करती लेकिन फिर भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम कहां खड़े हैं वरना भीड़ में हमारा मजाक बनने में देर नहीं लगेगी.

लुक की तरह मैसेज टोन भी हो सोबर

सोबर लुक जहां हमें सैंटर अट्रैक्शन बनाता है वहीं लोग हमें पलट कर देखने पर भी मजबूर हो जाते हैं. ठीक इसी तरह कुछ लोग अपनी अजीबोगरीब हरकतों से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश करते हैं. जैसे मोबाइल में मैसेज टोन ‘अरे एक बार पलट कर तो देख’, ‘लाफिंग गर्ल’ आदि सैट कर लेते हैं. जेसे ही कोई मेसेज भेजता है मैसेज टोन बज उठती है, जिसे सुन मौजूद लोग हंस पड़ते हैं. भले ही आप इसे अच्छा समझें लेकिन ये आप की नादानी को दिखाता है इसलिए ऐसी हरकतें न करें जिस से आप अमैच्योर शो हों.

चार्जिंग पौइंट पर न जमाएं कब्जा

हमारी फोन के प्रति बेचैनी कुछ पल के लिए भी हमें अपने फोन को चार्जिंग पौइंट से दूर नहीं रखने देती. हम सोचते हैं कि अगर चार्जिंग खत्म हो गई फिर तो एकदूसरे से चैटिंगशैटिंग बंद हो जाएगी इसलिए फोन चार्जिंग पर लगाए रखते हैं. घर में तो यह बात फिर भी चल सकती है लेकिन अगर हम पब्लिक प्लेस पर लगे चार्जिंग पौइंट पर फोन लगा कर चैटिंग जारी रखें तो लोगों की आंखों में अखरता है. क्योंकि उस पर जितना हक आप का है उतना ही औरों का है इसलिए कोशिश करें घर से बैटरी फुल कर के चलें और अगर खत्म हो जाए तो उतनी बैटरी फुल करें जिस में फोन आनेजाने जितना गुजारा हो सके. इस तरह अगर आप घर में हो या फिर बाहर आप को मोबाइल ऐटिकेट्स का पालन करना चाहिए.

जिंदगी बरबाद करते दगाबाज आशिक

कहने वाले गलत नहीं कहते हैं कि प्यार अंधा होता है और इस में ठगी अकसर वे लड़कियां जाती हैं, जो अपने आशिक पर आंखें मूंद कर जरूरत से ज्यादा भरोसा करती हैं. बदलते दौर में बहुत जल्द ही वे अपना सबकुछ उन को सौंप देती हैं. आएदिन ऐसे मामले उजागर होने लगे हैं, जिन से यह साबित होता है कि इश्क में माशूका और आशिक ने कुछ दिन एकसाथ काटे, इस के बाद आशिक शादी के अपने वादे से मुकर गया या फिर कन्नी काटने लगा. 2-4 फीसदी मामलों में ही लड़कियां खुद ही सच उजागर करते हुए बवाल मचाती हैं, पर तब तक उन के पास रोने के अलावा कुछ और नहीं रह जाता, क्योंकि उन की जिंदगी बरबाद हो चुकी होती है. प्यार में अंधी हो कर अपने आशिक की असलियत और मंशा को न समझ पाने का खमियाजा 28 साला पार्वती (बदला नाम) रोतेसुबकते भुगत रही है.

यों दी दगा

पार्वती को अपने ही शहर सीहोर, मध्य प्रदेश के एक नौजवान रवि सिसोदिया से प्यार हो गया था. दरअसल, रवि के पहले वह उस के भाई अजय को चाहती थी, जिस की बेवक्त मौत हुई, तो वह टूट सी गई थी. ऐसे वक्त में उसे रवि ने सहारा दिया और बड़ेबड़े वादे किए, जिन में से एक शादी कर लेने का वादा भी था. अजय की मौत का गम रवि के प्यार ने भुला दिया, तो जल्द ही पार्वती ने उसे अपना जिस्म भी सौंप दिया. यही रवि चाहता था. आशिक की नीयत का खोट पार्वती वक्त रहते समझ नहीं पाई और कठपुतली की तरह उस के इशारों पर नाचने लगी. सीहोर छोटा और घना शहर है. लिहाजा, वहां हमेशा मिलनेजुलने और हमबिस्तर होने का मौका सहूलियत से नहीं मिलता था, फिर भी दोनों के बीच कोई परदेदारी नहीं रही थी. बात जब शादी की आई, तो रवि ने पार्वती को समझाया कि यहां शादी करेंगे, तो घर और समाज वाले हल्ला मचाएंगे, इसलिए इंदौर चल कर रहते हैं. कुछ दिनों बाद जब सबकुछ ठीक हो जाएगा, तो वापस आ जाएंगे और सभी थोड़ीबहुत नानुकर व नाराजगी के बाद हमें एक होने की मंजूरी देने पर मजबूर हो जाएंगे.

पार्वती उन दिनों पेट से हो गई थी. लिहाजा, वह समझ नहीं पाई कि रवि की असल मंशा यह है कि इंदौर जा कर बच्चा गिरवा दे और न गिरवा पाए तो भी कोई बात नहीं, कम से कम कोई शादी के बाबत दबाव तो नहीं बनाएगा. अपने आशिक से यह सुन कर पार्वती का भरोसा और बढ़ा कि उस ने इंदौर में रहनेखाने का इंतजाम कर रखा है. फिर एक दिन वह चुपचाप रवि के साथ बस में बैठी और इंदौर जा पहुंची यानी घर से भाग गई. इंदौर में सचमुच रहने के लिए रवि ने सिलिकौन सिटी अपार्टमेंट्स में फ्लैट ले रखा था. लिहाजा, किसी तरह का शक पार्वती को नहीं हुआ. वक्त कटता गया. रवि चूंकि खातेपीते घर का था, इसलिए पैसों की उस के पास कमी नहीं थी. दिन पूरे हुए, तो पार्वती ने अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया. प्यार की यह निशानी अभी घुटनों के बल चलना सीख ही रही थी कि रवि एकाएक गायब हो गया. 2-3 दिन तो जैसेतैसे पार्वती ने उस के इंतजार में काटे, लेकिन जब रवि लौट कर नहीं आया तो उसे घबराहट होने लगी. जल्द ही उस ने पड़ोसियों और जानपहचान वालों को सच बता दिया, तो सभी ने उसे इस दगाबाज आशिक के खिलाफ थाने में जा कर रिपोर्ट लिखवाने का मशवरा दिया.

अब तक पार्वती को भी समझ आ गया था कि रवि ने उसे खूबसूरती से धोखा दिया है और गोद में नन्ही बच्ची थमा कर भाग गया है. लिहाजा, वह 10 अप्रैल, 2016 को इंदौर के राजेंद्र नगर थाने पहुंची और रवि के खिलाफ रिपोर्ट लिखा दी.

लेकिन बरबाद तो हुई

इस मामले में अहम बात यह है कि अब पार्वती का क्या होगा, जो एक बिनब्याही मां है? उसे कौन अपनाएगा? जाहिर है, कोई उसे सहारा नहीं देगा. अब पार्वती अकेली है और उसे अपने दम पर जिंदगी काटनी है और मासूम बेटी की परवरिश भी करनी है. आशिक तरहतरह से अपनी माशूकाओं को ठगा करते हैं और धोखा दिया करते हैं या ऐसी दगाबाजियां करते हैं, जिन के बाद माशूका के पास सिवा पछताने के कुछ नहीं रह जाता. इस लिहाज से यह चिंता की बात जरूर है. वजह, जिस्मानी ताल्लुकात बनाना बेहद आसान काम है, लेकिन बाद के अंजाम की चिंता या परवाह न करना बेवकूफी है, जिस में परेशानियां सिर्फ लड़की के हिस्से में आती हैं. क्यों नहीं पार्वती जैसी लड़कियां अपना पेट गिरवा लेतीं? यह सवाल भी अहम है. आशिक के प्यार की निशानी को नाजायज तरीके से पेट में रखे रह कर पैदा करने की कोई तुक नहीं है. अपने दम पर बच्चे की परवरिश कर पाना कोई हंसीखेल नहीं है, वह भी उस सूरत में जब गांठ में पैसा या रोजगार न हो.

लड़कियां ज्यादा जज्बाती होती हैं और प्यार के दौरान ख्वाबोंखयालों में जीती रहती हैं, जिन्हें उन का आशिक चिकनीचुपड़ी बातें करते हुए और हवा देता रहता है, जिस से वे उस की बदनीयती न समझ पाएं. क्या ऐसे आशिक वाकई प्यार करते हैं? इस सवाल का जवाब शायद ही कोई हां में दे. जिस की मंशा ही महज जिस्म हो, वह क्या खा कर साथ निभाएगा. लड़कियों को प्यार करने से पहले अच्छी तरह सोच लेना चाहिए कि आज भी मर्दों का कुछ खास नहीं बिगड़ता, न ही उन के चालचलन या गलती पर कोई उन्हें कोसता या कुसूरवार ठहराता है. उलटे लड़की को ही कुलटा कहने वालों की फौज खड़ी हो जाती है.

पहचानें दगाबाजों को

फिर इस समस्या का हल क्या है, जिस से आशिक की नीयत का पता चल सके? हालांकि इस बात का कोई तयशुदा पैमाना नहीं है, फिर भी वक्त रहते कुछ एहतियात बरते जाएं, तो लड़कियां धोखा खाने से खुद को बचा सकती हैं: * दगाबाज आशिक आमतौर पर बेरोजगार, निकम्मे और दिखावा करने वाले होते हैं. इन की एक खूबी चाशनी में डूबी प्यार भरी बातें करने की होती हैं. ये माशूका को सैक्स करने के लिए धीरेधीरे उकसाते रहते हैं. * ये कभी किसी बात के लिए सीधे मना नहीं करते, इसलिए महबूबा इन से खुश रहती है और इस तरफ उस का ध्यान ही नहीं जा पाता कि जो हर बात में ‘हांहां’ कर रहा है, वह उन से ही अपनी बात बड़ी चालाकी से मनवा भी भी रहा है.

* दगाबाजी की पहली पहचान आशिक का यह कहना होता है कि सैक्स तो प्यार का हिस्सा है. इसे करने में कुछ गलत नहीं. आजकल तो सभी ऐसा करते हैं. फिर कुछ हुआ, तो मैं हूं न. क्या मुझ पर तुम्हें इतना भी भरोसा नहीं?

पर हकीकत में जब ऐसा कुछ हो जाता है, तो ये कहीं नहीं होते, बल्कि मुंह छिपा कर माशूका से भाग रहे होते हैं. थोड़ाबहुत डरें तो माशूका के पेट से हो जाने के बाद बच्चा गिराने का राग अलापने लगते हैं, पर यह आसान काम नहीं है.

डाक्टर और नर्सिंग होम वाले तमाम तरह के सवाल पूछते हैं और जरूरी खानापूरी करवाते हैं, इसलिए ये माशूका को उस के हाल पर छोड़ देते हैं. कई बार जब बात खुलती है, तो ये अपनी कारगुजारी से साफ मुकर भी जाते हैं. जवानी में हमबिस्तरी की इच्छा आम है, पर इसे करने से पहले लड़कियों को आगेपीछे सोच लेना चाहिए कि अगर कंडोम या दूसरी सावधानियां नहीं बरतीं, तो लेने के देने पड़ सकते हैं. कई दफा जल्दबाजी में संबंध बन जाते हैं और नतीजा निकलता है पेट से होना, जिस का अंदाजा और तजरबा लड़कियों को नहीं रहता और जब पता चलता है, तो 2-3 महीने निकल चुके होते हैं. इस के बाद इतना ही वक्त क्या करें और कैसे करें, यह सोचने में कट जाता है. इस पर भी समाज का डर उन के मन में समाया रहता है.

अगर आशिक की मंशा दगा देने की नहीं है, तो वह घरपरिवार तो दूर की बात है, वाकई पहले अपने कहे मुताबिक जमाने से टकरा जाएगा. पर ऐसा अकसर होता नहीं है. होता यह है कि आशिक हाथ खड़े कर देता है कि अब तुम जानो और तुम्हारा काम जाने. रवि जैसे आशिक तो महादगाबाज होते हैं, जो घर वालों के डर से चोरीछिपे माशूका को कहीं और ले जा कर पेट गिरवा देते हैं. चूंकि ऐसे आशिकों को माशूका और बच्चा बोझ लगने लगते हैं, इसलिए ये भाग जाते हैं. यह इन्हें समझ आ जाता है कि अब बच्चों से बंधी माशूका सिर्फ फड़फड़ा कर रह जाएगी और उस का कुछ खास नहीं बिगड़ेगा.बात सच भी है, क्योंकि कानून ऐसी लड़कियों की ज्यादा मदद नहीं कर पाता और कोई उन्हें पनाह नहीं देता. लिहाजा, बच्चा गोद में लादे अपनी नामसमझी को कोसती और रोती माशूका सोचती रह जाती है कि कैसे एक नादानी के चलते अच्छीखासी जिंदगी बरबाद हो गई.

आत्मसम्मान बचाए रखने के कुछ टिप्स

अपने आत्मसम्मान को कायम रखना और इस बात पर नजर रखना कि कोई भी आप के आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचाए, पूर्णत: आप की व्यक्तिगत जिम्मेदारी है. इसे बनाए रखने के लिए आप को सदैव सतर्क व प्रयासरत रहना जरूरी है. कुछ बातों को ध्यान में रख कर आप अपने आत्मसम्मान को बरकरार रख सकते हैं, जो इस प्रकार हैं :

–       खुद का सम्मान करें, अपनी काबिलीयत को सराहें. जब आप खुद को सम्मान, सराहना के काबिल समझेंगे तब आप को आत्मगौरव की अनुभूति होगी.

–       अपनी अवहेलना, अपमान और उपहास किसी भी कीमत पर बरदाश्त न करें. भले ही अपमान या हंसी उड़ाने वाला आप का दोस्त ही क्यों न हो, आप उस का विरोध करें. अगर उसे आप की कद्र होगी तो निश्चित रूप से वह अपनी गलती मानेगा और आगे से कभी आप के आत्मसम्मान को ठेस नहीं पहुंचाएगा.

–       अपना सम्मान अपने हाथ में ही होता है, इस बात का ध्यान रखें. जैसे आप का ग्रुप हर हफ्ते पार्टी करता है जिस में आप हमेशा शिरकत करते हैं तो यह मान कर चलिए कि हमेशा खाते ही नहीं रहना बल्कि एक पार्टी आप को भी देनी होगी वरना आप मुफ्तखोर का खिताब पाएंगे और आप का खूब मजाक भी बनेगा.

–       यदि आप कालेज में हैं और हमेशा दोस्तों से प्रोजैक्ट में मदद व नोट्स कौपी करते रहते हैं तो यह ठीक नहीं बल्कि आप आगे बढ़ कर किसी प्रोजैक्ट को खुद पूरा करें व अपने नोट्स व बुक्स जैसे दूसरों के लेते हैं वैसे ही अपने भी दें तभी आप को सम्मान मिलेगा.

–       कालेज के सहपाठी हों या औफिस के सहकर्मी, हर वक्त सब की सहानुभूति पाने की कोशिश न करें. क्योंकि हर वक्त सहानुभूति वाला फंडा नहीं चलता. इस चक्कर में लोग आप से कटने लगेंगे.

–       अपनी जिंदगी में आप जो भी पाना चाहती हैं, समाज में अपना जो स्थान बनाना चाहती हैं वह खुद के दम पर हासिल करें. अमीर दोस्तों, उच्च पदस्थ रिश्तेदारों के पैसे, रुतबे, संपर्कों के सहारे आगे बढ़ने की आदत देरसवेर आप के सम्मान को चोटिल कर सकती है.

–       सहेलियों के साथ शौपिंग वगैरा का प्रोग्राम बनता है तो आप बराबरी से खर्च करने को तैयार रहें. अगर आप औरों जितना पैसा खर्च नहीं कर सकतीं तो बेहतर होगा कि आप ऐसे ग्रुप से खुद को अलग कर लें.

–       आज के दौर में लुक्स बहुत महत्त्व रखता है, अगर आप तेल लगे बालों, गंदे कपड़ों और नीरस शक्ल ले कर घर से बाहर निकलेंगी तो आप का मजाक बनेगा ही. बेहतर होगा अपनी पर्सनैलिटी ग्रूम करें, ड्रैसिंग सैंस विकसित करें. अगर आप के घर वाले मौडर्न ड्रैसेज पहनने की इजाजत नहीं देते तो कोई बात नहीं. आप सलवारसूट या चूड़ीदार सूट में भी आकर्षक लग सकती हैं, बस ध्यान यह रखना है कि उस की फिटिंग, कट्स आधुनिक हों, रंग आप पर फबने वाले हों व कपड़े साफ व प्रैस किए हों. बालों का स्टाइल भी ऐसा रखें जिस में चेहरा आकर्षक लगे. इस तरह जब आप की पर्सनैलिटी निखरेगी तो अपनेआप ही आत्मविश्वास बढ़ेगा.

–       जराजरा सी बात पर परेशान हो कर कभी पड़ोसी तो कभी रिश्तेदार के पास मदद मांगने पहुंचने से आप अपना सम्मान स्वयं गंवा देंगी. अपनी समझ, क्षमता, पढ़ाईलिखाई पर भरोसा रखें और अपनी समस्याएं खुद सुलझाने की कोशिश करें. जब आप इस में सफल होंगी तो स्वयं पर विश्वास बढ़ेगा. आत्मसम्मान बचाए रखना है तो मदद मांगिए नहीं बल्कि इस काबिल बनिए कि आप दूसरों के काम आ सकें, उन की समस्या सुलझा सकें.

–       आप जो भी काम कर रहे हैं, नौकरी या व्यवसाय, उस में अपनी अर्निंग क्षमता बढ़ाने की ईमानदार कोशिश करते रहें. जैसेजैसे आप की कमाई बढ़ेगी, घर और बाहर दोनों जगह आप का मान बढ़ेगा. इस से आप का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली बन जाएगा कि आप का अपमान करने से पहले दोस्त, सहकर्मी कई बार सोचेंगे.

–       जिस कार्यक्षेत्र में आप हैं उस से संबंधित नई तकनीक, विकास आदि के बारे में आप को जानकारी होनी जरूरी है. अपनी नौलेज भी वक्तवक्त पर अपडेट करें और इस के लिए आप इंटरनैट का सहारा लीजिए. हो सके तो अपने विषय से संबंधित सैमिनार, वर्कशौप भी आप अवश्य अटैंड करें. नौलेज अपडेट रहने से आप की पर्सनैलिटी में अलग ही ग्रेस आएगा.

–       युवतियां शौपिंग करने जाएं और मोलभाव न करें, ऐसा संभव नहीं. लेकिन अगर दुकान पर फिक्स्ड रेट लिखा है और दुकानदार भी एक बार विनम्रता से आप को कह चुका है कि रेट कम नहीं होंगे तो आप चंद रुपयों के लिए उस का सिर न खाएं वरना चिढ़ कर वह आप को कुछ उलटासीधा कह देगा या बाहर का रास्ता दिखा देगा, जिस से आप सरेआम अपमानित होंगी.

–       शानदार पार्टी अटैंड करनी है और उस के लायक कपड़े या फुटवियर आप के पास नहीं हैं तो इस का यह मतलब नहीं कि किसी दोस्त, पड़ोसिन या भाभी से उन की लेटैस्ट ड्रैस, ज्वैलरी या अन्य ऐक्सैसरीज मांग कर आप पार्टी में अपना इंप्रैशन जमाएं. किसी से कुछ मांगना और खुद को अमीर दिखाना बेहद नकारात्मक मानसिकता का प्रतीक है और अपने आत्मसम्मान को स्वयं कुचलने जैसा भी है.

–       अपनी पारिवारिक समस्याएं, कभी सार्वजनिक न करें, उन्हें स्वयं सुलझाएं वरना आप अपने साथसाथ परिवार का मानसम्मान भी गंवा बैठेंगे.

–       अपनी कमियों, कमजोरियों और अतीत में की गई गलतियों का जिक्र किसी से न करें.  

VIDEO: वरुण धवन पूजा करने के लिए क्यूं गए बैंकाक

फिल्म ‘‘दिलवाले’’ की असफलता से बुरी तरह से हताश हो चुके अभिनेता वरुण धवन ने अब अपने करियर को संवारने के लिए नई नई योजना बना रहे हैं. सूत्रों के अनुसार फिल्म ‘दिलवाले’ में अभिनय करने का वरुण धवन का अनुभव बहुत खराब रहा. सूत्रों की माने तो ‘‘दिलवाले’’ की असफलता के बाद वरुण धवन ने अपने करियर को लेकर काफी मंथन किया और कुछ नए निर्णय लिए हैं.

सूत्रों की माने तो इन्ही निर्णयों के चलते वरुण धवन भारत में कई मंदिरों में पूजा अर्चना कर चुके हैं और अब वह अपने करियर को उंचा उठाने की कामना के साथ बैंकाक भी पूजा अर्चना करने पहुंच गए. इतना ही नहीं वरुण धवन ने दूसरा निर्णय लिया है कि अब वह मल्टीस्टारर फिल्मों में अभिनय करने की बजाय सिर्फ सोलो हीरो वाली फिल्में ही करेंगे. ज्ञात है कि वरुण धवन ने ‘दिलवाले’ से पहले ही अपने भाई रोहित धवन के निर्देशन में मल्टीस्टारर एक्शन फिल्म ‘‘ढिशूम’’ के लिए हामी भर दी थी, इसलिए उन्होंने ‘ढिशूम’ की शूटिंग पूरी कर दी है. पर अब वह सिर्फ सोलो हीरो वाली फिल्में ही करेंगे. इसी के चलते उन्होने अपने पिता डेविड धवन की एक फिल्म की पटकथा भी बदलवायी है.

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