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व्हाट्सऐप न बन जाए एडिक्शन

क्या आप व्हाट्सऐप पर हमेशा एक्टिव रहती हैं, हर दिन प्रोफाइल फोटो व स्टेटस बदलती हैं, सुबह सब को गुड मॉर्निंग विश करती हैं, लोगों के हर मैसेज का रिप्लाई करती हैं, ग्रुप आइकन बदलने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं, तो जरा ध्यान दें. आप जानेअनजाने में व्हाट्सऐप एडिक्शन का शिकार बन गई हैं, आप इस के बिना थोड़ा समय भी नहीं गुजार सकतीं.

साऊदी अरब की एक घटना है जिस में एक आदमी ने अपनी पत्नी को सिर्फ इसलिए तलाक दे दिया क्योंकि उस की पत्नी ने उस के मैसज का जवाब नहीं दिया था. पति का कहना था कि उस की पत्नी हर वक्त व्हाट्सऐप पर एक्टिव रहती थी, वह इतनी ज्यादा एडिक्टेड हो गई थी कि बच्चों पर भी ध्यान नहीं देती थी.

क्या है व्हाट्सऐप एडिक्शन

बारबार प्रोफाइल फोटो बदलना

आप भले ही दूसरों को दिखाने के लिए अपनी प्रोफाइल फोटो बदलती हों लेकिन ये एडिक्शन के लक्षण हैं. यह इस बात की ओर संकेत करता है कि आप का दिमाग किसी एक चीज पर स्थिर नहीं रहता.

हर बात पर ग्रुप बनाना

बाहर घूमने का प्लान हो तो ग्रुप, बर्थ डे सैलिब्रेट करना हो तो ग्रुप, डिनर पर जाना हो तो ग्रुप. आज लोग हर छोटीछोटी बात के लिए ग्रुप बना रहे हैं. ग्रुप बना कर भले ही आप एक साथ कई लोगों से चैट कर सकते हैं लेकिन यह आप के एडिक्शन को बढ़ाता है.

उठते ही व्हाट्सऐप चैक करना

आजकल हम सुबह उठते ही सब से पहले व्हाट्सऐप चैक करते हैं कि किस ने मैसेज भेजा है. यहां तक कि बीच रात में भी जब नींद खुलती है तो फोन उठा कर देखते हैं कि किसी ने मैसेज तो नहीं किया.

नैट पैक खत्म होने पर परेशान हो जाना

आज हमारे फोन में बैलेंस हो चाहे ना हो लेकिन नैट पैक जरूर होना चाहिए. अगर नैट खत्म हो जाए या किसी वजह से नैट ना चले तो एकदम से परेशान हो जाते हैं, हर किसी को अपना फोन दिखाने लगते हैं कि प्लीज देखना जरा मेरा व्हाट्सऐप क्यों नहीं चल रहा है.

दूसरों की प्रोफाइल फोटो व स्टेटस चैक करना

व्हाट्सऐप पर किसी ने मैसेज किया हो या नहीं किया हो लेकिन बारबार ऑनलाइन आ कर दूसरों की प्रोफाइल फोटो व स्टेटस चैक करना बताता है कि आप व्हाट्सऐप एडिक्टेड हैं.

बारबार मैसेज भेजना

जब कोई हमारे मैसेज का रिप्लाई नहीं करता तो बारबार मैसेज करना कि औनलाइन हो लेकिन मुझे मैसेज नहीं कर रहे. लास्ट सीन चैक करना भी व्हाट्सऐप एडिक्शन की ओर इशारा करता है.

हर वक्त ऑनलाइन रहना

फ्रैंड्स के साथ बाहर घूमने जाने के बावजूद भी बारबार ऑनलाइन आना यह बताता है कि आप इस के बिना 5 मिनट नहीं रह सकतीं. कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं जो बातचीत के दौरान ही कह देते हैं ‘‘प्लीज थोड़ा रुकना, मैं जरा रिप्लाई कर दूं.’’

सैल्फी क्लिक करना

व्हाट्सऐप एडिक्शन की वजह से बारबार सैल्फी क्लिक करते हैं ताकि फोटो अपलोड कर के सब का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर सकें.

व्हाट्सऐप एडिक्शन से नुकसान

रिश्तों में दूरियां

व्हाट्सऐप के जरिए आप भले ही अपनों से जुड़े रहते हैं लेकिन आप माने चाहें ना मानें लेकिन इस की वजह से दूरियां भी बढ़ती हैं. जैसे आप अपने पार्टनर को मैसेज करती हैं और वह ऑनलाइन दिखता है लेकिन किसी कारण से आप को रिप्लाई नहीं कर पाता तो आप तुरंत उसे फोन कर के झगड़ने लगती हैं कि ‘किस के साथ चैट कर रहे हो? ऑनलाइन होने के बावजूद मेरे मैसेज के रिप्लाई का टाइम नहीं है.’ बिना किसी बात के आप दोनों के बीच झगड़ा हो जाता है. कई बार तो ऐसा भी होता है कि अगर किसी बात से आप दोनों के बीच कहासुनी होती है तो गुस्से में आप ब्लॉक कर देती हैं जिस की वजह से बात बनने के बजाय बिगड़ जाती है.

फैमिली के लिए टाइम नहीं

इस की वजह से फैमिली को टाइम नहीं दे पाते. अगर फैमिली मैंबर्स हम से कुछ कहते हैं तो उन से बात करने के बजाय सिर्फ हां या ना में जवाब देते हैं. खाली समय में फैमिली के साथ मस्ती करने के बजाय चैटिंग में बिजी रहते हैं.

सेफ्टी को अनदेखा करना

फोन में जैसे ही नोटिफिकेशन आता है हम तुरंत फोन उठा कर चैक करने लगते हैं, हमें इस बात का भी ध्यान नहीं रहता कि हम ड्राइव कर रहे हैं या कुकिंग कर रहे हैं, बस सारा ध्यान रिप्लाई पर ही होता है.

समय बर्बाद करना

चैटिंग को हम इतना इंजॉय करते हैं कि हमारे पास कितना भी महत्त्वपूर्ण काम क्यों न हो उसे टालते रहते हैं.

कैसे बचें व्हाट्सऐप एडिक्शन से

ग्रुप में जब मैंबर्स चैट करते हैं तो हमारे पास बारबार नोटिफिकेशन आता है, जिस की वजह से हमारा ध्यान भटकता है इसलिए ग्रुप को म्यूट रखें ताकि आप बारबार व्हाट्सऐप चैक करने से बच सकें. एक बात हमेशा याद रखें कि अगर कोई बहुत ज्यादा जरूरी काम होगा तो सामने वाला व्यक्ति व्हाट्सऐप करने के बाद आप को कॉल जरूर करेगा. इसलिए अपने दिमाग से यह बात निकाल दें कि आप किसी महत्त्वपूर्ण चीज को मिस कर देंगे.

एक समय तय करें जिस समय आप अपना नैट पैक बंद कर दें ताकि आप इस एडिक्शन से बाहर निकल सकें. ऐसा न करें कि हर 2 मिनट पर ऑन कर के देख लिया फिर बंद कर दिया. अगर आप ने तय किया है कि आप नैट बंद रखेंगे तो बंद ही रखें.

हर मैसेज का रिप्लाई करने और फौरवर्ड करने की आदत बदलें. अकसर हम ग्रुप में एक्टिव रहने के लिए मैसेज व जौक्स फौरवर्ड करते हैं.

गुड मौर्निंग मैसेज करने की आदत छोड़ दें क्योंकि इस की वजह से आप सुबह उठते ही मैसेज करने लगते हैं और जब तक मैसेज भेज नहीं देते तब तक आप का ध्यान किसी दूसरे काम में नहीं लगता.

हर वक्त फोन को अपने पास रखने की आदत न डालें. जब घर पर रहे तो थोड़ी दूरी बरतें.

अपने होम स्क्रीन से व्हाट्सऐप का शौर्टकट आइकन हटा दें ताकि जब आप फोन उठाएं तो आप को व्हाट्सऐप दिखाई न दें.

लोगों की प्रोफाइल फोटो चैक करना बंद कर दें. आप जिस समय व्हाट्सऐप सब से ज्यादा यूज करते हैं उस समय कुछ और करने की हैबिट डालें.

अनइंस्टॉल करना भी एक विकल्प है लेकिन ऐसा करने के बाद आप किसी से चैट नहीं कर पाएंगी. इसलिए अनइंस्टॉल करने के बजाय थोड़ी दूरी बना लें.

‘उड़ता पंजाब’ की आड़ में कौन कौन सेंक रहा है रोटियां

अनुराग कश्यप के नेतृत्व वाली कंपनी ‘फैंटम’ तथा एकता कपूर की कंपनी ‘‘बालाजी मोशन पिक्चर्स’’ द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ के सेंसर प्रमाण पत्र को लेकर विवाद गर्माता जा रहा है. बालीवुड से जुड़े सूत्रों की माने तो यह विवाद महज फिल्म को सेंसर प्रमाणपत्र दिलाने तक का नहीं है, बल्कि इस विवाद के चलते कुछ लोग अपनी अपनी रोटियां सेंकने में लगे हुए हैं.

क्या है फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’?

फिल्म के रिलीज ट्रेलर व सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ की कहानी पंजाब में मादक द्रव्यों/ ड्रग्स की तस्करी और इसके सेवन के इर्दगिर्द घूमती है. जिसमें शाहिद कपूर ने एक ऐसे गायक टॉमी का किरदार निभाया है, जो कि ड्रग्स के सेवन में गले तक डूबा हुआ है. तो वहीं करीना कपूर एक डाक्टर की भूमिका में हैं. तीसरी तरफ आलिया भट्ट का किरदार कुमारी पिंकी का है, जो कि बिहार से आयी एक मजदूर है. वह पंजाब के खेतों में मजदूरी करती है. उसे भरपेट भोजन खाने लायक पैसे भी नहीं मिलते. धीरे धीरे वह भी ड्रग्स की शिकार हो जाती है. फिर वह ड्रग्स हासिल करने के लिए पैसों के अभाव में कई पुरूषों से संबंध स्थापित करती है.

अब तक सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन व फिल्म ‘‘उड़ता पजाब’’ के बीच क्या क्या हुआ?

सूत्रों के अनुसार ‘‘फैंटम’’ ने यह फिल्म सेंसर प्रमाणपत्र के सेंट्ल बोर्ड आफ फिल्म सर्टिफिकेशन’ के पास दस मई को भेज दिया था. एक्जामिंनिंग कमेटी ने फिल्म देखकर 40 दृश्यों को काटकर लाने पर ‘ए’ प्रमाणपत्र देने की सिफारिश की. (यहां याद रखना होगा कि ‘सेंट्ल बेार्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’ खुद किसी भी फिल्म पर कैंची नहीं चलाता. फिल्म में दृश्यों पर कैंची फिल्म के निर्माता को ही चलानी होती है.). इसके बाद निर्माताओं को अपनी इस फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजना चाहिए था. लेकिन अनुराग कश्यप ने घोषणा की कि वह अपनी फिल्म को एफसीएटी(फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलिएट ट्ब्यिूनल) में ले जाएंगे. अब वह ट्रिब्यूनल में गए या नहीं, पर एक जून को वह अपनी फिल्म को रिवाइंजिंग कमेटी के पास लेकर पहुंच गए.

रिवाइजिंग कमेटी ने शुक्रवार, तीन जून को फिल्म को देखा. चार व पांच जून को ‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’ का दफ्तर बंद रहा. सोमवार, छह जून को निर्माताओं को बताया गया कि उन्हें 13 कट्स करके फिल्म जमा करने पर ‘ए’ प्रमाणपत्र मिल जाएगा. पर बीच में क्या हुआ पता नहीं. लेकिन फिल्म निर्माताओं के सूत्रों के हवाले से मीडिया में कई तरह की खबरें छपती रही. कहा जाता रहा कि 89 कट्स हैं.

फिर मंगलवार सात जून की शाम पत्रकारों के पास, बुधवार दोपहर साढ़े तीन बजे अनुराग कश्यप की प्रेंस कांफ्रेस के निमंत्रण पहुंच गए. आठ जून की सुबह सुबह अचानक अनुराग कश्यप मुंबई हाईकोर्ट में गुहार लगाने पहुंच गए कि ‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकशन’ उनकी फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को प्रमाणपत्र नहीं दे रहा. जब सेंसर बोर्ड ने अदालत को बताया कि निर्माता से कहा गया है कि वह फिल्म में तेरह बदलाव करके फिल्म लेकर आएं, उनकी फिल्म को ‘ए’ प्रमाणपत्र मिल जाएगा. इस पर अनुराग कश्यप ने विचार करने के लिए एक दिन का समय अदालत से मांगा.

पर प्रेस काफ्रेंस में अनुराग कश्यप ने सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन व इसके चेयरमैन पहलाज निहलानी को लेकर कई आरोप लगाए गए. अनुराग का कहना था कि जब वह अदालत पहुंचे, तभी उनको सेंसर बोर्ड की तरफ से पत्र मिला. अब वह एफसीएटी यानी कि ट्रिब्यूनल जाना चाहते हैं, पर ट्रिब्यूनल के चेयरमैन 16 जून तक छुट्टी पर हैं. इसलिए उनकी टीम आगे किस तरह बढ़ा जाए, इस पर विचार करेगी.

कुछ सूत्र दावा करते हैं कि अनुराग कश्यप ने जानबूझकर अदालत का दरवाजा खटखटाया, जबकि इसकी जरूरत नहीं थी. उधर भाजपा नेता वाणी त्रिपाठी टिक्कू ने  अनुराग कश्यप पर आरोप लगाते हुए कहा है-‘‘अनुराग कश्यप मीडिया के साथ अदालत के सामने महज रिवाइजिंग कमेटी के निर्णय का पत्र पाने के लिए मगरमच्छी आंसू बहाने पहुंचे. सरकार ने इस फिल्म के संबंध में पहलाज निहलानी से कोई बात  नहीं की है.’’

प्रेस कांफ्रेंस में क्या हुआ?

बुधवार, शाम साढ़े तीन बजे बजे जब अनुराग कश्यप की तरफ से बुलायी गयी प्रेस काफ्रेंस में मीडिया पहुंची, तो पता चला कि इसे ‘‘द इंडियन फिल्म एंड टीवी डायरेक्टर्स एसोसिएशन’ ने बुला रखा है. इस एसोसिएशन के दस हजार सदस्य हैं. मगर वहां पर अनुराग का साथ देने के लिए इस संस्था के अलावा फिल्म प्रोड्यूर्स गिल्ड के मेंबर सहित मुश्किल से बीस लोग मौजूद थे. सभी ने सेंसर बोर्ड की कार्यशैली पर आरोप लगाने के अलावा पहलाज निहलानी की बर्खास्तगी की मांग की. सभी ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले के खिलाफ अपनी लड़ाई कही.

इस प्रेस कांफ्रेंस में अनुराग कश्यप ने बार बार कहा कि वह अपनी फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को बिना किसी कट के, जिस तरह से उन्होंने बनायी है, उसी रूप में सेंसर बोर्ड से प्रमाण पत्र चाहते हैं. उनका साथ देते हुए राकेश ओमप्रकाश मेहरा, आनंद एल राय, मुकेश भट्ट, महेश भट्ट वगैरह ने भी सीधे इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़ते हुए पहलाज निहलानी पर हमला किया.

आप’ पाटी का पैसा?

पर जब इसी प्रेस कांफ्रेस में पत्रकारों ने अनुराग कश्यप से पहलाज निहलानी द्वारा लगाए गए इस आरोप का जिक्र किया कि उन्हें इस फिल्म को बनाने के लिए ‘आम आदमी पार्टी’ ने पैसा दिया है? तो अनुराग कश्यप ने कहा-‘‘मैं इस तरह के आरोपों पर बात करना भी शर्मिंदगी की बात समझता हूं. क्योंकि हमने किसी पार्टी से पैसा नहीं लिया.’’

क्यों प्रेस कांफ्रेंस खत्म कर भागे अनुराग कश्यप?

उसके बाद जब पत्रकारों ने अनुराग कश्यप से सवाल किया कि सेंसर बोर्ड ने जिन 13 दृश्यों या शब्दों पर आपत्ति जतायी है, उनको लेकर वह क्या कहना चाहते हैं? वास्तव में पत्रकार ने बाकायदा उन शब्दों व वाक्यों को पढ़कर सुनाया, जो कि सेंसर बोर्ड के अनुसार फिल्म का हिस्सा हैं और सेंसर बोर्ड नहीं चाहता कि निर्माता उन शब्दों या वाक्यों को फिल्म का हिस्सा बनाए. तो उन शब्दों को सुनकर वहां अपने पिता महेश भट्ट के बगल में बैठी आलिया भट्ट शर्मसार होते हुए बगले झांकने लगी. आलिया भट्ट ने तो अपना माथा पीट लिया. फिर बिना जवाब दिए अचनाक ही प्रेस कांफ्रेंस खत्म कर दी गयी.

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या अनुराग कश्यप का मकसद सिर्फ हंगामा खड़ा करना है? आखिर वह प्रेस कांफ्रेंस में सिर्फ अपने मन की बात कहने के लिए आए थे? उन्हे पत्रकारों के सवालों के जवाब देने में क्या परेशानी हुई? क्या जो कुछ कहा गया, वह उनकी फिल्म का हिस्सा नहीं है.

एकता की चुप्पी से उठे सवाल?

इस प्रेस कांफ्रेंस में फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ की दूसरी निर्माता एकता कपूर भी मौजूद थी. पर वह चुप रहीं. उनकी चुप्पी ने कई तरह के सवाल खडे़ कर दिए.

क्या अनुराग की लड़ाई में एकता कपूर उनके साथ नही हैं?

सूत्रों की मानें तो फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ का ‘‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ के साथ जो विवाद चल रहा है, उससे एकता कपूर व उनका पूरा परिवार खुद को अलग किए हुए है. तभी तो तुषार कपूर ने अपने ट्विटर एकाउंट पर अपने तथा अपने पिता जीतेन्द्र कपूर की तरफ से लिखा है-‘‘हम पंजाब के लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हैं और किसी भी हालात में उन्हें आहत नहीं करना चाहते. हम सदा सेंसर बोर्ड द्वारा दी गयी सही सलाह को स्वीकार करते हैं, आए हैं और आगे भी करेंगे. फिल्में मनोरंजन के लिए होती हैं ना कि किसी की भावनाओं को आहत करने के लिए. हमारा ऐसा कोई इरादा नही है और मैं खुद को पंजाब का पुत्र मानकर गौरवान्वित महसूस करता हूं.’’

इतना ही नहीं ‘‘बालाजी मोशन पिक्चर्स’’ से जुड़े कुछ सूत्रों की माने तो अनुराग कश्यप ने जिस तरह से इस विवाद को लेकर हंगामा मचाया रखा है, उसे कुछ लोग नौटंकी की संज्ञा दे रहे हैं. इससे भी एकता कपूर खुश नहीं है. सूत्रों के अनुसार   एकता कपूर हर हाल में अपनी फिल्म को 17 जून को रिलीज करना चाहती थी. पर अब यह फिल्म 17 जून को रिलीज हो पाएगी, इसकी संभावनांएं कम हैं. वैसे अभी भी एकता कपूर चाहती हैं कि फिल्म 17 या 24 जून को रिलीज हो जाए.

फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ को विदेशी बाजार में नुकसान?

उधर बतौर निर्माता चार पंजाबी फिल्में बना चुके जिम्मी शेरगिल की माने तो फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ के निर्माता अनुराग कश्यप को अच्छी तरह से पता है कि यदि उनकी फिल्म को ‘ए’ प्रमाणपत्र मिला, तो विदेशों में उनकी फिल्म की कमाई ना के बराबर हो जाएगी. इस बारे में जिम्मी शेरगिल कहते हैं-‘‘विदेशों में पंजाबी फिल्मों व भारतीय फिल्मों के दर्शक काफी हैं. खासकर कनाडा, जापान व आस्ट्रेलिया में. मगर इन देशों में फिल्म सेंसर का जो सिस्टम है, उसके अनुसार यदि भारत में  किसी फिल्म को ‘यू ए’ प्रमाणपत्र मिलता है, तो वहां पर वह ‘ए’ प्रमाणपत्र के बराबर हो जाती है. जिससे दर्शक खत्म हो जाते हैं.

क्योंकि विदेशों में दिन में माता पिता नौकरी करते हैं. उस वक्त बच्चे स्कूल जाते हैं. उसके बाद शाम को पूरा परिवार साथ में फिल्म देखने जाता है. अब यदि फिल्म ‘ए’ प्रमाणपत्र वाली होती है, तो लोग उस फिल्म को देखने नहीं जाते है. क्योंकि वह उस वक्त बच्चों को अकेला घर पर छोड़कर फिल्म देखने जाना पसंद नहीं करते. इसका खामियाजा मेरी पिछली फिल्म ‘शरीक’ को मिल चुका है. शरीक को सेंसर बोर्ड ने गलत प्रमाणपत्र नहीं दिया था. क्योंकि जब दो भाई आपस में झगडे़ंगे, खून बहेगा, तो यह सब बच्चों को दिखाना उचित नहीं रहेगा.’’

श्याम बेनगल ने भी उम्मीदों पर पानी फेरा?

अनुराग कश्यप ने अपनी लड़ाई को और आगे ले जाते हुए फिल्म पर कैंची ना चलाने की बात करने वाले फिल्मकार व फिल्म सेंसर बोर्ड में क्या बदलाव होने चाहिए, इसके लिए सरकार की गठित कमेटी के चेयरमैन श्याम बेनेगल को एक निजी शो में फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ दिखायी. मजेदार बात यह रही कि इस फिल्म को देखने के बाद बेनेगल ने कहा-‘‘तकनीकी दृष्टिकोण से यह फिल्म बहुत बेहतरीन बनी है.’’ अब इसके क्या मायने लगाए जाएं. क्योंकि फिल्म की तकनीक को लेकर कोई विवाद ही नही है. फिल्म के कंटेंट को लेकर विवाद है. इस संदर्भ में बेनेगल ने चुप्पी साध रखी है. अब तो अनुराग कश्यप भी श्याम बेनेगल का नाम नही लेना चाहते.

अनुराग कश्यप इस बात से खुश हैं कि उनकी फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ और ‘‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ के साथ जो विवाद चल रहा है, उसे ट्विटर पर बहुत समर्थन मिल रहा है. पर बालीवुड से जु़डे एक बडे़ निर्माता ने अहम सवाल उठाया है कि,‘क्या ट्विटर पर राय जाहिर करने वाले लोग ‘उड़ता पंजाब’ देखने जाएंगे.

अनुराग के ट्वीट पर मंत्री का जवाब

अनुराग कश्यप ने दो दिन पहले ट्वीट करके आरोप लगाया था,‘‘अब भारत भी उत्तरी कोरिया बन गया है. इसलिए हमें उत्तरी कोरिया जाने के लिए हवाई जहाज पकड़ने की जरूरत नहीं.’’ अनुराग कश्यप के इस ट्वीट पर सूचना व प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा -‘‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन के निर्णय से सहमत और असहमत होना निर्माता का हक है. उसके बाद ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता है. हां पर असंतुष्ट होने पर वह फिर से रिवाइजिंग कमेटी के पास जा सकता है तथा याद रखना चाहिए कि भारत, उत्तरी कोरिया नहीं है.’’

उधर सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन के चेयरमैन पहलाज ने जवाब दिया है,‘‘यदि भारत, उत्तरी कोरिया होता तो लोग इस तरह की बातें नहीं कर पाते.’’

बालीवुड से जुड़े कुछ सूत्र यह भी मानते है कि यदि फिल्म उद्योग के सभी लोगों को सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन की कार्यशैली पर आपत्ति है, तो उन्हें सरकार और सूचना प्रसारण मंत्रालय पर दबाव बनाकर ‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’की फिल्म को प्रमाणपत्र देने की जो गाइड लाइन्स है, उसमें बदलाव करवाना चाहिए. पर निर्माता ऐसा करने की बजाय सिर्फ ‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’ या उसके चेयरमैन पर हमला करते रहते हैं.

फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ को लेकर सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ या अनुराग कश्यप में से कौन दोषी है, यह कहना फिलहाल बहुत मुश्किल है. अभी तो आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. मगर जिस तरह की स्थितियां बनी हैं, उन स्थितियों में ‘उड़ता पंजाब’ किसी भी सूरत में 17 को रिलीज नहीं हो पाएगी. क्योंकि अब अनुराग कश्यप अपनी फिल्म एफसीएटी के पास ले जाना चाहते है. मगर एफसीएटी के चेयरमैन एस के महाजन 16 जून तक छुट्टी पर हैं. उधर सूचना प्रसारण मंत्री ने साफ कर दिया है कि ‘सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन’’ और ‘‘एफसीएटी’’ स्वतंत्र संगठन है. इन पर सरकार अपना अंकुश नहीं रखती. पिछले दो साल में कई फिल्में ऐसी रही हैं, जिनके निर्माता सेंट्रल बोर्ड आफ फिल्म सर्टीफिकेशन के निर्णय से संतुष्ट न होने पर एफसीएटी जाकर फिल्म को पास कराया है.

विवाद क्या है

सेंसर बोर्ड ने फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ से क्या हटाने की सिफारिश की हैः

1- फिल्म की शुरुआत में पंजाब का बोर्ड दिखाया गया है, सेंसर बोर्ड ने पंजाब के बोर्ड को सीन से हटाने के लिए कहा.

2- पंजाब, जालंधर, चंडीगढ़, अमृतसर, तरनतारण, लुधियाना और मोगा का नाम जहां जहां भी फिल्म के बैकग्राउंड व संवाद में आया है, उसे हटाने के लिए कहा गया है.

3- फिल्म के एक गाने से ‘चित्तावे’ और ‘हरामी’ शब्दों पर सेंसर ने हटाने के लिए कहा.

4-  चूसा हुआ आम और ऐसी ही गालियां फिल्म में जहां जहां हैं भी फिल्म में आयी हैं उन पर सेंसर बोर्ड को आपत्ति है.

5- फिल्म से पंजाब पार्लियमेंट, एमपी चुनाव आदि शब्दों को भी हटाने के लिए कहा गया है

6- एक गाने में सरदार के आपत्ति जनक खुजलाने के एक सीन पर भी कैंची चली हैं

7- फिल्म में ड्रग्स लेने के क्लोजअप शॉट को भी हटाने के लिए कहा गया है.

8- फिल्म के एक गाने में टामी यानी कि शाहिद कपूर को पब्लिक में पेशाब करते हुए दिखाया गया हैं. इस सीन को भी कट करने के लिए कहा गया है.

9- फिल्म के संवाद-‘‘जमीन बंजर …औलाद कंजर पर भी’ भी हटाएं.

10- कुत्ते का नाम जैकी चैन होने पर भी सेंसर बोर्ड को एतराज है. सेंसर बोर्ड ने कुत्ते का नाम बदलकर कुछ और रखने के लिए कहा है. 

इंग्लैंड की तरफ से खेलना चाहता है यह पाक गेंदबाज

क्रिकेट की दुनिया में पाकिस्तानी टीम को उसकी गेंदबाजी के लिए जाना जाता है. अपनी गेंदबाजी के दम पर पाकिस्तानी टीम किसी भी विपक्षी की धज्जियां उड़ा सकती है. तेज गेंदबाज वसीम अकरम हो या मोहम्मद आमिर जितने भी गेंदबाज आए सबने कहीं न कहीं खुद को बड़े पैमाने पर साबित किया. शायद यही वजह है कि पाकिस्तानी टीम अपने बल्लेबाजों से ज्यादा गेंदबाजों के ऊपर निर्भर रहती है.

कुछ ऐसे भी गेंदबाज हैं जिन्हें आज भी पाकिस्तानी समर्थक टीम में देखना पसंद करते हैं, जिनमें से एक हैं बाएं हाथ के युवा तेज गेंदबाज जुनैद खान जो अब तक पाकिस्तान की ओर से खेलते हुए 71 विकेट लेकर सफल गेंदबाजों की सूची में शामिल हैं.

लेकिन जुनैद को लगातार टीम से बाहर रखा जा रहा है जिसकी वजह से वो काफी मायूस हैं. पाकिस्तानी क्रिकेट के चयन समिति के प्रमुख पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक ने कहा कि बाएं हाथ का ये तेज गेंदबाज घुटने की चोट के बाद से अपनी पूरी लय में नहीं है.

इसी बीच इस तेज गेंदबाज ने हाल में दिए एक बयान में कहा कि उनकी इच्छा पाकिस्तान को छोड़ इंग्लैंड में बसने की है और वहां की राष्ट्रीय टीम की ओर से खेलना भी चाहते है. पाकिस्तान सुपर लीग में पेशावर जल्मी टीम की तरफ से खेलते हुए जुनैद ने बेहतरीन गेंदबाजी की थी. जिसमें उन्होंने अपनी पहले ही ओवर में लाहौर कलंदर्स के विस्फोटक बल्लेबाज क्रिस गेल का विकेट चटकाया दिया था.

पाकिस्तान टीम से लगातार बाहर रखे जाने पर जुनैद ने अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा “मैं पूरी तरह फिट हूं और हर ट्रेनिंग में हिस्सा ले रहा हूं. मुझे बिल्कुल समझ नहीं आ रहा कि आखिर क्यों मुझे नजरअंदाज किया जा रहा है. इससे सिर्फ मैं निराश हो रहा हूं और मुझे अंदर से काफी बुरा भी लग रहा है, मैं इंग्लैंड की तरफ से भी खेलने को तैयार हूं इसके लिए अगर मुझे पांच साल वहां रहकर वहां की नागरिकता लेनी हुई, तो मैं ऐसा करूंगा.

स्मार्टफोन्स में भी यूट्यूब का ऑटोप्ले फीचर जल्द

स्मार्टफोन के लिए यूट्यूब पर गूगल जल्दी ही एक ऐसा फीचर ला रहा है जिसके लिए लोग उसे काफी नापसंद करते रहे हैं. जब आप एक वीडियो देख लेंगे तो दूसरा वीडियो अपने आप ही चलने लगेगा.

अब तक ये फीचर सिर्फ डेस्कटॉप पर था और लोगों के बीच इस फीचर को लेकर काफी नारजगी रही है क्योंकि ये आपके डेटा का इस्तेमाल करता है.

ये वीडियो आपके पसंद के नहीं होते हैं और गूगल के सॉफ्टवेयर के जरिये इन्हें चुना जाता है.

जब मोबाइल पर ये फीचर तैयार हो जाएगा तो जो वीडियो आप देख रहे हैं उसके खत्म होने के बाद ये वीडियो अपने आप ही चलने लगेंगे.

लेकिन खैरियत है कि डिसएबल करने का भी फीचर उसमें होगा और ये करना डेस्कटॉप से आसान होगा.

इस तरह बंद होगा ऑटोप्ले वीडियो

स्मार्टफोन के लिए आपको जहां पर 'सब्सक्राइब' लिखा दिखाई देगा उसके साथ में आपको इसे डिसएबल करने के लिए बटन दिखाई दे जाएगा.

एक बार आपने उसे डिसएबल कर दिया उसके बाद ये हमेशा के लिए वैसा ही रहेगा. डेस्कटॉप वर्जन पर इसे बार बार डिसएबल करना पड़ता है.

डेस्कटॉप या लैपटॉप पर अगर आप यूट्यूब वीडियो देख रहे हैं तो हर बार आपको टॉगल स्विच इस्तेमाल करके ऑटोप्ले को ऑफ करना पड़ता है.

अगर आपने उसे ऑफ नहीं किया और अपने ब्राउजर का विंडो बंद नहीं किया तो एक के बाद एक वीडियो चलते रहेंगे और वो नुकसान आपके डेटा प्लान के खाते में जाएगा.

ये फीचर गूगल इसीलिए देना चाहता है ताकि आप ज्यादा से ज्यादा मोबाइल वीडियो देखें. मोबाइल पर वीडियो देखने का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि कई जगहों पर मनोरंजन का वो एकमात्र साधन है.

दुनिया के सबसे बड़े वीडियो प्लेटफॉर्म के लिए नए ग्राहक ढूंढने का ये सुनहरा मौका है.

तीनः रोमांच व मनोरंजन से कोसों दूर

इन दिनों बौलीवुड के फिल्मकार कोरियन फिल्मों के दीवाने हो गए हैं. कई फिल्मकार सफलतम कोरियन फिल्मों के अधिकार खरीद कर उनका भारतीयकरण कर हिंदी में बना रहे हैं. पिछले दिनों प्रदर्शित निशिकांत कामत के निर्देशन में जान अब्राहम के अभिनय से सजी एक्शन फिल्म ‘‘राकी हैंडसम’’ भी एक कोरियन फिल्म का हिंदी रूपांतरण थी और अब इस सप्ताह यानी कि दस जून को एक साथ दो ऐसी फिल्में रिलीज हो रही हैं, जो कि कोरियन फिल्मों का भारतीयकरण हैं. इनमें से एक है दीपक तिजोरी की फिल्म ‘‘दो लफ्जों की कहानी’’ और दूसरी है-रिभु दासगुप्ता के निर्देशन में बनी फिल्म ‘‘तीन’’, जो कि कोरियन फिल्म ‘‘मांटाज’’ का भारतीयकरण है. मगर जब विदेशी फिल्मों का भारतीयकरण किया जाता है, तो रुपांतरणा के दौरान फिल्म में कुछ ऐसी गड़बड़ियां हो जाती हैं कि मूल फिल्म के मुकाबले भारतीय फिल्म का स्तर काफी हद तक गिर जाता है. जिसके चलते फिल्म बाक्स आफिस पर धराशाही हो रही हैं. कोरियन फिल्म पर आधारित फिल्म ‘‘राकी हैंडसम’’ के साथ भी यही हुआ था और इस फिल्म ने बाक्स आफिस पर पानी नहीं मांगा था.

अब दक्षिण कोरिया की सफलतम फिल्म ‘‘मांटाज’’ पर निर्देशक रिभु दासगुप्ता की रहस्य व रोमांच प्रधान फिल्म ‘‘तीन’’ 10 जून को रिलीज हो रही है. मगर यह फिल्म भी हिंदी में रूपांतरण के दौरान इस कदर गड़बड़ा गयी कि अमिताभ बच्चन, विद्या बालन और नवाजुद्दीन सिद्दिकी की सशक्त अदाकारी भी इस फिल्म को श्रेष्ठ फिल्मों की श्रेणी में नही ला पाती. धीमी गति की फिल्म ‘‘तीन’’ इंटरवल के बाद लड़खड़ा जाती है. जिन्होंने कोरियन फिल्म ‘‘मांटाज’’ देख रखी है, उन्हें भी ‘तीन’ पसंद नहीं आएगी.

फिल्म ‘‘तीन’’ की कहानी के केंद्र में कलकत्ता शहर में रह रहे जान विश्वास (अमिताभ बच्चन), पुलिस अफसर से पादरी बने फादर मार्टिन (नवाजुद्दीन सिद्दिकी) और पुलिस अफसर सरिता सरकार (विद्या बालन) हैं. फिल्म में दो बच्चों के लापता होने की जांच पड़ताल समानांतर चलती रहती है. एक बच्ची एंजली का अपहरण व हत्या आठ वर्ष पहले हुई थी, तो दूसरे बच्चे रानी का अपहरण हाल ही में हुआ है. एंजली के अपहरणकर्ता का पता लगाने के लिए जान विश्वास अपने हिसाब से काम कर रहे हैं और उधर रानी के अपहरणकर्ता को पकड़ने के लिए पुलिस विभाग लगा हुआ है.

कहानी शुरू होती है पुलिस स्टेशन में जान विश्वास के पहुंचने से, जिसे पुलिस अफसर सरिता सरकार समझाकर भेज देती हैं कि जब उन्हे सच पता चलेगा, तो वह उन्हे बताएंगी. पता चलता है कि पिछले आठ साल से सच जानने के लिए जान विश्वास पुलिस स्टेशन के चक्कर हर दिन लगाते आ रहे हैं. घर पर जान विश्वास की पत्नी नेंसी (पद्मावती राव) व्हील चेअर पर हैं. वास्तव में आठ वर्ष पहले जब जान विश्वास अपने बेटे पीटर के दिए बीस लाख रूपयों से एक जमीन खरीदने का प्रयास कर रहे थे, तभी उनकी पोती एंजेला का अपहरण हो गया था. पुलिस की मदद लेने के बावजूद उन्हें अपहरणकर्ता को बीस लाख रूपए देने पड़े थे, पर उन्हें एंजली जिंदा नहीं मिली थी. उधर उनका बेटा पीटर इसके लिए उन्हें दोषी मानता है.

एंजली के अपहरणकर्ता को पकड़ने में पुलिस अफसर मार्टिन ने खास दिलचस्पी दिखायी थी. पर एंजली की मौत का उसे ऐसा सदमा लगा कि वह पादरी बन जाता है. पर पिछले आठ वर्ष से जान विश्वास अपनी पोती के अपहरणकर्ता तक पहुंचने के लिए प्रयासरत है. अचानक उसे एक सुराग मिलता है और उस सुराग के आधार पर विना पुलिस को बताए वह अपहरणकर्ता तक पहुंचने में लग जाता है. इधर अब आठ वर्ष बाद मनोहर सिन्हा (सब्यसाची चक्रवर्ती) की बेटी नीता के बेटे रानी का अपहरण हो जाता है. रानी के अहपरण की जांच पुलिस अफसर सरिता सरकार शुरू करती हैं और वह इस काम में मार्टिन की मदद लेती है. पता चलता है कि सारी घटनाएं उसी तरह से घट रही हैं, जिस तरह से  एंजली के अपहरण के समय घटी थी. परदे पर हम देखते हैं कि दूसरी तरफ जान अपने स्तर पर जांच पड़ताल में लगे हुए हैं. अंततः मनोहर सिन्हा को ही रानी के अपहरणकर्ता के रूप में सरिता गिरफ्तार करती है. पर  रानी मिला नही हैं. उधर मार्टिन को लगता है कि मनोहर ने रानी का अपहरण नहीं किया है.

खैर, रानी की तलाश करते हुए मार्टिन वहां पहुंच जाता है, जहां रानी के साथ जान फुटबाल खेल रहे होते हैं. अब राज खुलता है कि मनोहर ने ही एंजली का अहपहरण किया था, क्योंकि उन्हें नीता के दिल का आपरेशन करवाने के लिए पैसे चाहिए थे. उसने एंजली की हत्या नहीं की थी. वह तो एक हादसे में मारी गयी थी.

फिल्म में अमिताभ बच्चन, नवाजुद्दीन सिद्दिकी, विद्या बालन सहित सभी कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय क्षमता का परिचय दिया है. लेकिन फिल्म के निर्देशक व पटकथा लेखक कई जगहों पर मात खा गए. रिभु दासगुप्ता की बतौर निर्देशक पहली फिल्म ‘‘मिचैल’’ अब तक रिलीज नहीं हुई है. रिभु दासगुप्ता ने ही अमिताभ बच्चन अभिनीत असफल सीरियल ‘युद्ध’ का भी निर्देशन किया था. अब उन्होने रहस्य रोमांच फिल्म ‘‘तीन’’ का निर्देशन किया है. पर यह फिल्म कहीं भी रोमांचित नहीं करती.

फिल्म का अंत अचिश्वसनीय सा लगता है. पटकथा लेखक व निर्देशक इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए कि क्या रानी अपनी मां को कभी नहीं बताएगा कि उसका अपहरण उसके अपने नाना मनोहर सिन्हा ने नहीं किया था, बल्कि उसे जान विश्वास ने अपने साथ रखा हुआ था. फिल्म में नाटकीयता की भी कमी है. मनोरंजन की चाह रखने वाले दर्शकों को भी यह फिल्म निराश करती है. फिल्म देखते समय लोगों को बार बार सुजाय घोष निर्देशित पिछली फिल्म ‘‘कहानी’ ’याद आती है.

पार्श्व संगीत भी काफी कमजोर है. कैमरामैन तुषार कांति राय ने जरुर कमाल का काम किया है. दो घंटे 17 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘तीन’’ का निर्माण सुजाय घोष, गुलाब सिंह तंवर, हयन्वू थामस किम, सुरेश नायर, समीर राजेंद्रन व गौरी साथे, निर्देशक रिभु दासगुप्ता, संगीतकार क्लिंटन सरेजो, कैमरामैन तुषार कांति राय और कलाकार हैं- अमिताभ बच्चन, विद्या बालन, नवाजुद्दीन सिद्दिकी,प दमावती राव तथा सब्यसाची चक्रवर्ती.

राजन ने दिया गरीबी खत्म करने का मंत्र

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि देश से गरीबी हटानी है तो प्रति व्यक्ति आय को 6,000 हजार डॉलर यानी 4 लाख रुपये तक करना होगा. पत्रकारों से बात करते हुए राजन ने कहा कि एक स्तर पर हम अब भी 1,500 डॉलर प्रति व्यक्ति आय वाली अर्थव्यवस्था है.

उन्होंने कहा, 'हमारी 1,500 डॉलर और कहां सिंगापुर की 50,000 डॉलर की प्रति व्यक्ति आय. हमें अभी बहुत कुछ करना है. हम तुलनात्मक रूप से अब भी कमजोर अर्थव्यवस्था हैं और हमें हरेक की आखों से आंसू पोछने हैं. आखिरकार, कोई भी व्यक्ति कम-से-कम 6 से 7 हजार डॉलर के आस-पास का मिडल इनकम चाहता है जिसका तार्किक वितरण होने पर भयंकर गरीबी से निपटा जा सकता है. और, इस मामले में थोड़ी से भी संतुष्टी पाने के लिए हमें दो दशकों तक शानदार काम करना होगा.'

राजन ने कहा कि तत्काल सारे मुद्दे महंगाई रोकने और बैंक बैलेंस शीट को साफ-सुथरा करने से जुड़े हैं. हालांकि, आगे चलकर इनमें देश की गरीब से गरीब आबादी को फाइनैंशल सिस्टम से जोड़ना, हर कोने तक बैंकों की पहुंच, पेमेंट्स बैंक की स्थापना, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस और भारत बिल पेमेंट सिस्टम जैसे मुद्दे शामिल हो जाएंगे.

मौजूदा वित्त वर्ष में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.6% रहने के रिजर्व बैंक के अनुमान पर राजन ने कहा कि कई लोगों को लगता है कि हमने अपनी अर्थव्यवस्था की रफ्तार को कम आंका है. उन्होंने कहा, 'लोगों को लगता है कि देश में मध्यम और लघु उद्योग तेजी से बढ़ रहे हैं, जिन्हें हमने नजरअंदाज कर दिया है. दूसरी ओर बातें यह भी हो रही हैं कि हमने बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े पेश किए क्योंकि कई डिफॉल्टर इशूज अब भी कायम हैं. कुल मिलाकर, हम इन मुद्दों पर काम कर रहे हैं.'

 

स्मार्टफोन भी कर सकता है ये अनोखे काम

आप अपने स्मार्टफोन से क्या-क्या करते हैं? कॉलिंग, चैटिंग, मैसेजिंग, इंटरनेट या शायद कुछ दूसरे काम. हालांकि, स्मार्टफोन में कुछ ऐसे फीचर्स भी होते हैं, जिनके बारे में शायद ही आप जानते हों. इन फीचर्स की मदद से कई काम आसान हो जाते हैं. जैसे, फोटो खींचना, मूवी प्रोजेक्टर बनाना, रिमोट को चेक करना, मल्टीपल पैनोरामा शॉट्स, हाई क्वालिटी लेंस बनाना, साउंड क्वालिटी बढ़ाना जैसे भी कई काम किए जा सकते हैं. हम आपको बताने जा रहे हैं ऐसे कामों के बारे में जो आप अपने स्मार्टफोन में ट्राई कर सकते हैं.

 1. टीवी या अन्य रिमोट को चेक करना

 टीवी, स्पीकर, DVD प्लेयर या अन्य किसी डिवाइस का रिमोट जब काम करना बंद कर देता है तो अक्सर बैटरी बदलकर सही होने का पता लगाया जाता है. हालांकि, कई बार बैटरी बदलने से भी बात नहीं बनती. ऐसे में रिमोट ठीक है या नहीं इस बात का पता लगना मुश्किल हो जाता है, लेकिन आपका स्मार्टफोन इस काम को चुटकी में कर सकता है. यानी आप स्मार्टफोन की मदद से इस बात का पता लगा सकते हैं कि रिमोट ठीक है या नहीं.

 इसका पता लगाने के लिए रिमोट के सेंसर को फोन के कैमरा के सामने रखकर रिमोट के बटन दबाएं. ऐसा करने पर रिमोट के सेंसर में लाइट ब्लिंक करती नजर आएगी. हालांकि, इसे आप बिना कैमरे की मदद से नहीं देख सकते. यदि सेंसर में लाइट ब्लिंक कर रही है, तो रिमोट पूरी तरह सही है.

2. रिमोट खो जाने या खराब हो जाने पर रिमोट की तरह इस्तेमाल

स्मार्टफोन्स से ना सिर्फ टीवी या किसी अन्य अप्लायंस के रिमोट को टेस्ट किया जा सकता है बल्कि अगर आपके फोन में IR सेंसर है तो इसे किसी भी होम अप्लायंस के रिमोट की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए आपको अलग से एप्स इंस्टॉल करने पड़ेंगे. Easy Universal TV Remote एप एंड्रॉयड यूजर्स के लिए बेस्ट एप साबित हो सकता है जो IR सेंसर वाले किसी भी फोन को टीवी रिमोट में बदल सकता है. इसके इस्तेमाल करने पर रिमोट में बेसिक बटन दिखेंगे.

3. लेंस की क्वालिटी को बढ़ाना

स्मार्टफोन का कैमरा अच्छा होने के बाद भी कई बार क्लोज-अप फोटो बेहतर नहीं आता. ऐसे में आप लेंस पर पानी की एक बूंद लगाकर फोटो निकालें. ऐसा करने पर कैमरा के लेंस की जूम बेहतर हो जाता है और बिना किसी जूम के वो छोटे ऑब्जेक्ट को बड़े रेजोल्यूशन में दिखाता है. यानी इसके बाद आप किसी भी क्लोज-अप ऑब्जेक्ट का बेहतर क्वालिटी वाला फोटो क्लिक कर सकते हैं. अगर आप मैक्रो शॉट लेना चाहते हैं तो इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता. क्लोज अप शॉट के लिए ये एक अच्छी ट्रिक साबित हो सकती है.

4. इयरफोन से फोटो खींचना

कई स्मार्टफोन का इयरफोन सिर्फ म्यूजिक और FM रेडियो सुनने के काम ही नहीं आती. बल्कि इसकी मदद से आप फोटो भी कैप्चर कर सकते हैं. दरअसल, इयरफोन में प्ले/पॉज का जो बटन होता है वो आप स्मार्टफोन को बिना टच किए फोटो क्लिक कर सकते हैं. साथ ही, वॉल्यूम कम/ज्यादा वाले बटन से जूम इन और जूम आउट किया जा सकता है. हालांकि, ये जरूरी नहीं कि सभी स्मार्टफोन में ये फीचर्स काम करे. इसका सबसे बड़ा फायदा सेल्फी लेने के वक्त होता है.

5. पैनोरामा शॉट्स में कई बार दिखना

इन दिनों मार्केट में आने वाले हर स्मार्टफोन में पैनोरामा शॉट्स फीचर्स होता है. हालांकि, जिन फोन में ये फीचर नहीं है वो गूगल स्टोर से इसे डाउनलोड कर सकते हैं. पैनोरामा की खास बात होती है कि आप इससे एक साथ 360 डिग्री तक का फोटो भी खींच सकते हैं. यूं तो इस फोटो में आपके चारों तरफ मौजूद लोग दिखाई देते हैं, लेकिन आप चाहें तो इस फोटो के दौरान कई बार आ सकते हैं. इसके लिए आपको फोटो क्लिक कराने के साथ ही फोटोग्राफर के पीछे की तरफ से भागकर किसी दूसरी लोकेशन पर जाना होगा और आप चाहें तो डिफरेंट पोज भी दे सकते हैं. इस तरह आप एक ही फोटो में कई जगह नजर आएंगे.

6. स्मार्टफोन को बनाएं प्रोजेक्टर

मूवी प्रोजेक्टर बनाने के लिए सबसे पहले मैग्निफाइंग लेंस का हैंडल काट दें. इसके बाद उसे शू बॉक्स पर रखकर चारों तरफ से मार्क कर लें और बॉक्स काट लें. बॉक्स में होल होने के बाद लेंस को उसमें फिट करें और ग्लू की मदद से चिपका लें. इसके बाद बॉक्स के अंदर स्मार्टफोन रखने वाला स्टैंड बनाना होगा. इसके लिए थर्माकोल के टुकड़े का इस्तेमाल करें. स्टैंड बनाने के लिए सबसे पहले बॉक्स के अंदर का मेजरमेंट करके थर्माकोल के दो लंबे टुकड़े काट लें. इन दोनों को इस तरह काटना है कि बॉक्स के अंदर इन्हें आसानी से मूव किया जा सके. इसके बाद एक टुकड़े के ऊपर दूसरे को 90 डिग्री पर चिपका लें. अब इस स्टैंड पर टेप की मदद से स्मार्टफोन को फिट कर लें.

अब स्मार्टफोन पर कोई फिल्म या वीडियो प्ले करें और स्टैंड पर रखने के बाद बॉक्स के अंदर लेंस की तरफ रख दें. आप देखेंगे की लेंस से वीडियो का जो आउटपुट निकलेगा वो बिग रेजोल्यूशन वाला होगा. जब आप कोई मूवी प्ले करें तो कॉन्ट्रास्ट को 100 प्रतिशत तक बढ़ा लें. ताकि आपको वीडियो का बेहतर आउटपुल मिलेगा.

7. GPS नैविगेटर की तरह

पुराने स्मार्टफोन्स का एक और अच्छा इस्तेमाल GPS नैविगेटर के तौर पर हो सकता है. गूगल मैप्स के अलावा, मैप माई इंडिया और ऐसे ही कई ऐप्स हैं जिनकी मदद से यूजर्स अपना रास्ता खोज सकते हैं. इन डिवाइसेस को कार में लगाया जा सकता है. इन्हें चार्ज करने के लिए पोर्टेबल चार्जर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

इन एप्स में सिर्फ यूजर्स को अपनी लोकेशन और जाना कहां है ये बताना होता है. इसके बाद यूजर्स के सामने डेस्टिनेशन की पूरी जानकारी होगी.

मारिया शारापोवा पर दो साल का प्रतिबंध

अंतर्राष्ट्रीय टेनिस महासंघ (आईटीएफ) ने रूस की महिला टेनिस खिलाड़ी मारिया शारापोवा को डोप परीक्षण में असफल पाए जाने के कारण दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है. शारापोवा को जनवरी में हुए ऑस्ट्रेलियन ओपन के दौरान प्रतिबंधित पदार्थ मेलडोनियम के सेवन का दोषी पाया गया था. इसके बाद मार्च में उन पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया था.

मेलडोनियम को एक जनवरी को प्रतिबंधित कर दिया गया था. शारापोवा ने कहा था कि वह स्वास्थ्य कारणों से 2006 से इस पदार्थ का सेवन कर रही थीं. पांच बार ग्रैंड स्लैम जीत चुकीं शारापोवा ने कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगी.

आईटीएफ ने बयान में कहा, '2016 डोपिंग रोधी कार्यक्रम के अनुच्छेद 8.1 के तहत नियुक्त किए गए स्वतंत्र न्यायाधिकरण ने मारिया शरापोवा को डोपिंग रोधी नियम के अनुच्छेद 2.1 का दोषी पाया है. इसी के चलते उन्हें अयोग्य घोषित किया जाता है और 26 जनवरी 2016 से दो साल के लिए प्रतिबंधित किया जाता है.'

प्रदर्शन में सुधार के लिए नहीं किया था सेवन

शारापोवा को इसी साल अगस्त में होने वाले रियो ओलिम्पक की रूस की टीम में शामिल किया गया था. पहले यह साफ नहीं था कि वह ओलम्पिक में हिस्सा नहीं ले पाएंगी या नहीं. शारापोवा ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा, 'आईटीएफ न्यायाधिकरण द्वारा मेरे ऊपर लगाए गए दो साल के प्रतिबंध से यह सिद्ध होता है कि मैंने यह जानबूझ कर नहीं किया था. न्यायाधिकरण ने अपनी जांच में पाया है कि मैंने उस पदार्थ का सेवन अपने प्रदर्शन में सुधार के लिए नहीं किया था.'

जानबूझ कर नहीं किया डोपिंग नियमों का उल्लंघन

शारापोवा ने लिखा, 'आपको यह जानने की जरूरत है कि आईटीएफ ने न्यायाधिकरण से मुझे चार साल के लिए प्रतिबंधित करने को कहा था, लेकिन न्यायाधिकरण ने ऐसा करने से मना कर दिया. न्यायाधिकरण ने कहा है कि मैंने जानबूझ कर डोपिंग के नियमों का उल्लंघन नहीं किया है, इसलिए मैं इस दो साल के अनुचित प्रतिबंध को बर्दाश्त नहीं करूंगी.'

सीएएस में अपील करेंगी शारापोवा

शारापोवा ने लिखा, 'न्यायाधिकरण के सदस्यों को आईटीएफ ने नियुक्त किया था और अब उन्हीं ने कहा है कि मैंने जानबूझ कर नियम नहीं तोड़े हैं. बावजूद इसके वह मुझे दो साल के लिए टेनिस से दूर रखना चाहते हैं. मैं तत्काल इस फैसले के खिलाफ खेल पंचाट न्यायालय (सीएएस) में अपील करूंगी.'

दिल्ली में मेट्रो के बाद अब मेट्रिनो

मेट्रो के बाद अब दिल्ली वालों के सफर को आसान बनाने के लिए एक और सौगात मिलने वाली है. जल्द ही दिल्ली-एनसीआर के बीच रोपवे पर एक खास तरह के ड्राइवरलेस पॉड्स चलेंगे. जिसमें कम से कम 5 लोगों की बैठने की सुविधा होगी. ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर दो महीने के भीतर काम शुरु हो जाएगा. फर्स्ट फेज में दिल्ली के धौलाकुआं और हरियाणा के मानेसर के बीच शुरु होने वाले इस प्रोजेक्ट की कीमत 4000 करोड़ होगी.

गडकरी ने बताया इन रोपवे पॉडस को चलाने के लिए हमें 4 टेंडर मिले हैं. शुरु होने के फर्स्ट फेज में यह प्रोजेक्ट 70 किलोमीटर के रास्ते को जोड़ेगी.

क्या है ड्राइवरलेस पॉड्स मेट्रिनो

– मेट्रिनो एक ड्राइवरलेस व्हीकल है. यह रोपवे पर चलता है.

– रोपवे प्रोजेक्ट इलेक्ट्रिसिटी से काम करता है. ड्राइवरलेस यह व्हीकल कंट्रोलरूम से कंट्रोल होगा और कुछ ही स्टेशन्स पर रुकेगा.

– फुली ऑटोमैटिक ये पॉड्स नेटवर्क कंट्रोल रूम से कंट्रोल होंगे और वहीं से कमांड लेंगे.

कुछ महीने पहले मोदी के सामने भी मेट्रिनो प्रोजेक्ट का प्रजेंटेशन हो चुका है. प्रोजेक्ट के मुताबिक एक पॉड में 5 लोग बैठ सकते हैं. इससे एक घंटे में लगभग 7500 लोग सफर कर सकेंगे.गडकरी के मुताबिक इस सर्विस के शुरु होने पर मेट्रो और सड़कों पर ट्रैफिक का प्रेशर कम होगा.

मेट्रो से सस्ता है मेट्रिनो

गडकरी ने बताया कि मेट्रिनो की लागत 50 करोड़ रुपये/किमी आती है. इस तरह से यह मेट्रो से सस्ता होगा, मेट्रो की शुरुआती फाइनेंसियल कॉस्ट 250 करोड़ रुपये/किमी के करीब है.

पहला नाइट विजन कैमरा वाला फोन लॉन्च

Lumigon कंपनी ने T3 नाम से अपना नया स्मार्टफोन लॉन्च किया है. ये दुनिया का पहला नाइट विजन कैमरे वाला स्मार्टफोन है. इसकी बॉडी स्टेनलेस स्टील से बनी है. इसकी कीमत 740 डॉलर (करीब 50,000 रुपए) रखी गई है. आईये जानते हैं फोन में क्या है खास…

1. पहला नाइट विजन कैमरा वाला फोन

इसमें 4 मेगापिक्सल का नाइट विजन कैमरा है. कैमरे के सपोर्ट के लिए Lumigon T3 में 2 IR LED दिए गए हैं. इनकी मदद से आप कम्प्लीड डार्कनेस में भी फोटो खींच सकते हैं. बता दें कि, नाइट विजन कैमरा में यूज किए गए IR लाइट्स इनविजिबल हैं और नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते. क्विक एक्शन से नाइट विजन फंक्शन को इनेबल किया जा सकता है. 

2. इनोवेटिव फीचर्स

फोन को बनाने में स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे एलिगेंट लुक देती है. बैक टच, नाइट विजन, 3D फिंगरप्रिंट और स्टीरियो स्पीकर्स जैसे कई इनोवेटिव फीचर्स दिए गए हैं.

3. डिस्प्ले

इसे बनाने में मिलिट्री-ग्रेड 316 स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल किया गया है. फोन का बैक भी गोरिल्ला ग्लास 4 से प्रोटेक्टेड है. इसमें 4.8 इंच का सुपर Amoled HD डिस्प्ले है. डिस्प्ले के ठीक नीचे फिंगरप्रिंट सेंसर सेटअप दिया गया है. डिस्प्ले को लेकर कंपनी का दावा है कि ये इमेज की बारीकी को बखूबी दिखा सकता है.

4. कैमरा

Lumigoa T3 में 13 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है जो 4K वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है. कैमरा में एडवांस फेज डिटेक्शन के साथ फास्ट ऑटोफोकस जैसे फीचर्स हैं. कैमरा को क्विकली एक्सेस करने के लिए इसमें कैमरा की और जूम की हैं जिससे क्विक और ईजी फोटो क्लिकिंग एक्सपीरियंस मिलेगा. वहीं, दूसरी तरफ इसमें 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा है. लो लाइट सेल्फी के लिए इसमें फ्रंट फ्लैश भी मौजूद है.

5. बैक टच फीचर

फोन में बैक टच फीचर दिया गया है जिसकी मदद से आप फोन को कंट्रोल कर सकते हैं. ये आपको फोटोज स्वाइप करने, सेल्फी लेने और वेबसाइट स्क्रोल करनी की सुविधा देता है.

6. प्रीवेसी के लिए एप

Lumigon के इस हैंडसेट में Vault एप प्री-लोडेड है. ये फोन के फोटोज, कॉन्टैक्ट, एप्लिकेशन और डॉक्युमेंट्स सेफ रखने में मदद करता है.

7. यूनिवर्सल रिमोट कंट्रोल

 Lumigon T3 को यूनिवर्सल रिमोट कंट्रोल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. एयर कंडीशन, TV, ऑडियो जैसे कई डिवाइसेस इससे कनेक्ट को ये फोन कंट्रोल कर सकता है. इसमें एक नोटिफिकेशन लाइट है जो आपको किसी भी इंपॉर्टेंट अलर्ट के बारे में इंफॉर्म करेगा. साथ ही ये वेव फीचर सपोर्ट करता है जिसकी मदद से आप अलार्म क्लॉक बजने पर आप दूर से ही हैंड वेव करके इसे स्नूज कर सकते हैं.

फोन की अन्य कुछ खास बातें

– इस फोन को डेनमार्क की कंपनी Lumigon ने बनाया है.

– ये वाटर और डस्ट रेजिस्टेंट स्मार्टफोन है.

– ये हैंडसेट एंड्रॉइड मार्शमैलो OS पर काम करता है.

– इसमें 3GB रैम के साथ Helio X10 प्रोसेसर है जो 2.2GHz की स्पीड पर काम करता है.

– फोन में 128GB एक्सपैंडेबल मेमोरी है.

– फोन का वजन 145 ग्राम और थिकनेस 7.9mm है.

– फोन के गोल्ड एडिशन की कीमत 1200 डॉलर (करीब 80,000 रुपए) है. इसे बनाने में 24 कैरेट गोल्ड का इस्तेमाल किया गया है.

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