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रिचा चड्ढा ने कुणाल कपूर से मिलाया हाथ

कुछ समय पूर्व हमने ‘‘सरिता’’ पत्रिका में ही बताया था कि अभिनेत्री रिचा चड्ढा इन दिनों एक एनजीओ के साथ मिलकर ह्यूमन ट्रैफींकिंग में फंसी व सैक्स गुलाम  नाबालिग लड़कियों के पुनरुद्धार का काम कर रही हैं. रिचा चड्ढा ने फिलहाल पंद्रह लड़कियों को मुंबई में एक मकान रहने के लिए किराए पर लिया है. इन्हे मुफ्त में खाने पीने की सुविधा देने के साथ साथ इनके बेहतर भविष्य के लिए वह इन्हे तकनीकी शिक्षा भी दिला रही हैं. इन 15 लड़कियों पर दो साल में करीबन 12 लाख रूपए का खर्च आने का अनुमान है. इस धनराशि को इकट्ठा करने के लिए रिचा चड्ढा ने एक माह से एक मुहीम चलायी हुई है. पर उन्हे अभी तक अपेक्षित सफलता नहीं मिल पायी है. इसलिए अब रिचा चड्ढा ने कुणाल कपूर की संस्था ‘‘केट्टो’’ से हाथ मिलाया है.

कुणाल कपूर की संस्था केट्टो आनलाइन डोनेशन एकत्रित कर लोगों की मदद करती रहती है. सूत्रों के अनुसार कुणाल की संस्था केट्टो अब तक उड़ीसा के लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने में योगदान देने के अलावा कौशिक नामक महिला के इलाज के लिए लगभग सात लाख रूपए, एक गरीब परिवार के बच्चों की शिक्षा के लिए लगभग तीन लाख रूपयों सहित कई अन्य जरुरतमंद लोगो की मदद के डोनेशन एकत्रित करने के अलावा क्राउड फंडिंग कर चुकी है.

रिचा चड्ढा कहती हैं-‘‘मैं हमेशा सेाचती रहती थी कि जब मै थोड़ी बहुत शोहरत बटोर लूंगी, तो मैं उन मुद्दो को लेकर काम करुंगी, जिन पर मुझे यकीन है. मेरे लिए एक कलाकार के रूप में यह विस्तारित काम ही है. इसे आप मेरी फिलासफी कह सकते हैं. जब मुझे पता चला कि एक एनजीओ ने मुंबई में सैक्स गुलाम रही लड़कियों को उनके बंधकों से छुड़वाया है, तो मैं इन लड़कियों से मिलने गयी और इनकी दर्दभरी दास्तान सुनकर मुझे दुःख हुआ. तब मैने उस एनजीओ के साथ मिलकर इन लड़कियों के पुनरुद्धार का काम अपने हाथ में लिया. हमने 15 लड़कियों के रहने के लिए मुंबई के अंधेरी इलाके में एक बंगलानुमा मकान किराए पर लिया है. अब मैं इनके मुफ्त में रहन सहन, कपड़े, खाने पीने के अलावा इन्हे शिक्षा दिलाकर इन्हे दो साल के अंदर आत्मनिर्भर बनाना चाहती हूं. इसी के लिए धन जमा करने में लगी हुई हूं. मैने अपने इस मकसद में कुणाल कपूर से भी मदद मांगी है.’’

केट्टो संस्था के संचालक और अभिनेता कुणाल कपूर कहते हैं-‘‘यह सुखद है कि अब फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ लोग इस तरह के मुद्दों पर आगे आ रहे हैं. फिल्म इंडस्ट्री के प्रभावशाली लोग जब इस तरह के मुद्दों के साथ जुड़ रहे हैं, तो इसके सकारात्मक परिणाम ही आने हैं. उम्मीद करता हूं कि रिचा चड्ढा का यह कदम बौलीवुड के दूसरी हस्तियों को भी इस तरह के काम को करने के लिए प्रेरित करेंगी. रिचा चड्ढा इस तरह के मिशन पर चलने पर सही मायनों मे एक साहसी महिला हैं.’’

मैं चाहता था विवाद लंबा खिंचे: सलमान खान

रियो ओलंपिक के लिए सद्भावना दूत नियुक्त किए जाने को लेकर विवाद पर सुपरस्टार सलमान खान ने कहा कि वह विवाद से परेशान नहीं हैं क्योंकि उन्होंने महसूस किया कि इस विवाद ने जागरूकता फैलाने में मदद की. इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) ने रियो ओलंपिक 2016 के लिए सलमान को भारतीय टुकड़ी का सद्भावना दूत बनाने की घोषणा की थी.

उनकी नियुक्ति की कुछ खिलाड़ियों, विशेषज्ञों और विश्लेषकों ने आलोचना की थी, जिन्होंने महसूस किया था कि अगर किसी खिलाड़ी को इस काम के लिए नियुक्त किया गया होता तो ज्यादा बेहतर होता.

विवाद के बारे में पूछे जाने पर सलमान ने कहा, ‘मैं चाहता था कि यह विवाद लंबे समय तक चले ताकि लोग रियो ओलंपिक के बारे में जानें. यह शीघ्र ही समाप्त हो गया. जब क्रिकेट खेलने वाले सचिन (तेंदुलकर) और संगीतकार रहमान (ए आर रहमान) को ब्रांड एंबेस्डर नियुक्त किया गया था, तब कोई विवाद नहीं हुआ था. यह निराशाजनक है.

सलमान ने कहा कि उन्होंने सोचा कि मुद्दा दो से तीन सप्ताह के लिए खिंचेगा लेकिन ‘वैसा नहीं हुआ.’ उन्होंने कहा, ‘हमारी पीढ़ी ओलंपिक के बारे में जानती थी क्योंकि हमारी किताबों में ओलंपिक का लोगो हुआ करता था, लेकिन अब वह नहीं होता.’

 उन्होंने कहा, ‘काफी लोगों ने कहा कि मुझे अदालती मामलों की वजह से वहां नहीं होना चाहिए था. अगर अदालत में मामले हैं तो भी क्यों मुझे ओलंपिक के लिए सद्भावना दूत नहीं नियुक्त किया जा सकता. मैं दोषी नहीं हूं.’

बंदिनी मिश्रा को किस बात का सता रहा गम

‘राजश्री प्रोडक्शन’ की हिंदी फिल्म ‘पायल की झंकार’ में कोमल महुआकर के साथ सेकंड लीड में अभिनय कर अपने करियर की शुरूआत करने वाली बंदिनी मिश्रा अब भोजपुरी फिल्मों में मां के किरदार में नजर आती हैं. जबकि उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा व हेमा मालिनी के साथ ‘‘फांसी के बाद’’, गोविन्दा व मंदाकिनी के साथ ‘प्यार मोहब्बत’ के अलावा ‘आगे की सोच’ और ‘खोल दे मेरी जुबान’’ में दादा कोंडके की नायिका के रूप में अभिनय करने के अलावा हिंदी भाषा की तीन दर्जन से अधिक फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा विखेरा था.

इसके बाद जब उन्हे हिंदी फिल्मों में हीरोईन के रूप में काम मिलना बंद हो गया, तो बंदिनी मिश्रा ने भोजपुरी फिल्मों की तरफ रूख करते हुए सुजीत कुमार के साथ भोजपुरी फिल्म ‘‘पान खाये सईंया हमार’’ में नायिका बनी, जिसमें रणजीत खलनायक थे तथा इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और रेखा ने अतिथि कलाकार के रूप में काम किया था. पर वह भोजपुरी फिल्मों में भी ज्यादा समय तक हीरोईन के रूप में काम नहीं कर सकी. तो वह मां के किरदार निभाने लगी.

अब तक वह पचास से अधिक फिल्मों में मां की भूमिकाएं निभा चुकी हैं. बहुत जल्द वह बाली की ‘जिद्दी’ और राजकुमार पांडेय की ‘ट्रक डाईवर-2’ में भी मां के किरदार में नजर आएंगी. इस तरह देखा जाए तो बंदिनी ने काफी फिल्में की हैं. पर उन्हे आज भी गम है. अपने इस गम का इजहार करते हुए बंदिनी मिश्रा कहती हैं-‘‘मैंने कत्थक नृत्य में विशारद की उपाधि हासिल करने के बाद फिल्मों में कदम रखा था. मैं फिल्मों मे हीरोईन बनी. मां भी बनी. फिल्म ‘सेनूर’ में मैंने केवल नृत्य किया था. मगर मुझे इस बात का गम हमेशा सताता रहता है कि मेरी नृत्य प्रधान भूमिका करने की लालसा पूरी न हो पायी. मैं चाहती थी कि ‘उमराव जान’, ‘किनारा’या ‘साधना’ जैसी फिल्में करने का अवसर मिले, पर मेरी यह इच्छा कभी पूरी न हो सकी और अब तो कोई उम्मीद ही नही रही.’’

रांझा विक्रम सिंह ने खोली कारपोरेट कंपनियों की पोल

बौलीवुड के तमाम फिल्मकार सिनेमा के विकास में कारपोरेट कंपनियों के योगदान की प्रशंसा करते हुए ही नहीं थकते हैं. जबकि कुछ फिल्मकार मानते हैं कि कारपोरेट कंपनियों की वजह से सिनेमा की क्रिएटीविटी को नुकसान हो रहा है. धीरे धीरे कारपोरेट कंपनियों की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. जबकि सफलतम हिंदी फिल्म ‘‘हीरोपंती’’ में मुख्य विलेन का किरदार निभाकर शोहरत बटोरने के अलावा कन्नड़ फिल्म ‘‘राणा विक्रम’’ के लिए ‘‘साउथ इंडियन इंटर नेशनल मूवी अवार्ड’’ के लिए नोमीनेट किए गए अभिनेता रांझा विक्रम सिंह तो कारपोरेट कंपनियों के योगदान को सिरे दर्जे से खारिज करते हुए ‘‘सरिता’’ पत्रिका से कहा-‘‘जब मैं 2004 में चंडीगढ़ से मुंबई आया था, तो मैं किसी को नहीं जानता था.

फिर भी मैने करियर की शुरूआत में बौलीवुड में एक नहीं, बल्कि पांच फिल्में बतौर हीरो की थीं. यह फिल्में मुझे निजी निर्माताओं ने दी थी. मैं तो बालीवुड के बाहर से आया था. पर कारपोरेट कंपनियों के आते ही उन्होने सबसे पहले स्टार कलाकारों से संपर्क किया और हर कलाकार को मनमानी उंची कीमत देकर अपनी फिल्म के लिए अनुबंधित किया. क्योंकि बड़े कलाकारों के नाम पर इनकी कंपनी के शेयर के दाम बढ़ जाते हैं. इन कारपोरेट कंपनियों के बिजनेस का अपना एक अलग तरीका है. उनकी इस कार्यशैली के चलते कई नई प्रतिभाओं को जबरन दबाया गया. सच कह रहा हूं, जब से सिनेमा के बदलाव के साथ कारपोरेट कंपनियां हावी हुई हैं, तब से निजी निर्माता पीछे हो गए. हम जैसे कलाकारों को निजी निर्माता लेकर आए थे, तो हम भी उन्ही के साथ पीछे हो गए. पर दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की वजह से मैं जमा हुआ हूं. अब मैंने अपने मित्र के साथ मिलकर हिंदी व पंजाबी भाषा की फिल्म ‘25 किले’ का निर्माण किया है, जिसका मैं हीरो हूं’’

जब हमने उनसे पूछा कि क्या वह मानते हैं कि कारपोरेट कंपनियों की वजह से सिनेमा की रचनात्मकता को नुकसान हुआ? तब रांझा विक्रम सिंह ने बताया-‘‘जी हां! काफी नुकसान हुआ. कारपोरेट कंपनियों के आने के बाद असफल फिल्मों का अनुपात बढ़ा है. आज से दस साल पहले सुभाष घई, राजकुमार संतोषी, अनिल शर्मा की फिल्में हिट होती थी. तब यह सभी सिंगल प्रोड्यूसर थे. यह कहानी व किरदार के अनुरूप कलाकार चुनते थे. इनकी फिल्में सफल हो जाती थी. इनकी फिल्में सिनेमा घरों में दो दो माह तक लगी रहती थी. अब कारपोरेट कंपनियां तो वीकेंड यानी कि शुक्रवार, शनिवार व रविवार की ही बात करती हैं. आज भी जिन फिल्मों के साथ कारपोरेट नहीं जुड़ा होता है, वह फिल्म ज्यादा सफल हो रही है.’’

पर अब वीकेंड की बात क्यों होने लगी है? इस सवाल पर रांझा विक्रम सिंह ने कहा-‘‘क्योंकि सिनेमा के प्रति समर्पण व लगन की भावना कम हो गयी है. अन्यथा फिल्म बनाने में मेहनत तो लगती है. अब निर्देशक के अंदर भी पैशन नहीं रहा. अब हर किसी के लिए पैसा ज्यादा अहमियत रखने लगा है.’’

लेकिन जब मैंने कहा कि  सुभाष घई, राजकुमार संतोषी जैसे लगन से फिल्म बनाने वाले फिल्मकार भी तो गायब हो गए? इस पर रांझा विक्रम सिंह ने कहा- ‘‘इसकी वजह यह रही कि यह लोग कारपोरेट कंपनियों के साथ तालमेल नहीं बैठा पाए. कारपोरेट कंपनियों में एमबीए वगैरह करके जो नई पौध आ रही है, उनके साथ इन बड़े फिल्मकारों के लिए तालमेल बैठाना मुश्किल हो रहा है. जबकि आप महसूस करेंगे कि करण जोहर के साथ जो युवा सहायक निर्देशक थे, वह सभी इन कारपोरेट कंपनियों के साथ तालमेल बैठाकर फिल्में बना रहे हैं.

यानी कि जो लोग अपनी उम्र या अपने दिमागी स्तर पर इन कारपोरेट कंपनियों में बैठे लोगों के साथ तालमेल बैठा पा रहे हैं, वही काम कर रहे हैं. जबकि सुभाष घई हों या राजकुमार संतोषी हों, इनकी अपनी एक पहचान है. इनका अपना काम करने का तरीका है. यह लोग अपने हिसाब से काम करना चाहते हैं. इसलिए कारपोरेट कंपनियों के साथ यह तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं.’’        

सत्ता और शराब के नशे से चौपट सियासत

सत्ता की सनक और हनक, दबंगई, बिगडै़ल बेटे और शराब ने जनता दल (यूनाइटेड) की नेता मनोरमा देवी की सियासत, रसूख और पूरे परिवार को बरबाद कर दिया है.  मनोरमा देवी का पति बिंदी यादव जहां अपराधी है, वहीं उन का बिगड़ैल बेटा रौकी यादव गया के आदित्य सचदेवा मर्डर केस में जेल की कालकोठरी में बंद है. बेटे को बचाने, भगाने और सुबूत मिटाने की कोशिश में बिंदी यादव और घर में शराब रखने के आरोप में मनोरमा देवी भी जेल की हवा खा रहे हैं.

साल 1970 में जनमी मनोरमा देवी के पिता हजारा सिंह मूल रूप से पंजाब के रहने वाले थे और ट्रक ड्राइवरी करते थे. पंजाब से ट्रक ले कर अकसर उन का बिहार आनाजाना होता था और वे गया जिले के बाराचट्टी इलाके के काहूदाग गांव के पास के ढाबे में ठहरा करते थे. ढाबा चलाने वाले की बेटी कबूतरी से हजारा सिंह की नजरें मिलीं और दोनों ने शादी कर ली. हजारा सिंह और कबूतरी की बेटी मनोरमा देवी बचपन से ही काफी बोल्ड थीं. बाराचट्टी के कन्या हाईस्कूल से मैट्रिक और सोभ कालेज से इंटर करने वाली मनोरमा का मन सामाजिक कामों में खूब रमता था.

साल 1989 में मनोरमा देवी की शादी बिदेंश्वरी यादव उर्फ बिंदी यादव के साथ हुई. बिंदी यादव उस जमाने में ठेकेदारी के छोटेमोटे काम करता था. साल 1990 में लालू प्रसाद यादव जब बिहार के मुख्यमंत्री बने, तो बिंदी यादव अपराध के साथसाथ राजनीति में भी पैर जमाने लगा था.

बिंदी यादव के साथसाथ मनोरमा देवी भी राजद में शामिल हो गई थीं. साल 2001 में बिंदी यादव को गया जिला परिषद का अध्यक्ष चुना गया और उसी साल मनोरमा देवी भी मोहनपुर ब्लौक की प्रमुख बनीं. उस के बाद वे साल 2003 में राजद के कोटे से एमएलसी बनीं और साल 2009 तक उस पद पर रहीं. साल 2015 में वे दोबारा जद (यू) के कोटे से एमएलसी बनाई गई थीं.

आदित्य सचदेवा मर्डर केस के आरोपी मनोरमा देवी के बेटे रौकी यादव की खोज में जब पुलिस ने उन के घर पर छापा मारा, तो वहां विदेशी शराब की 6 बोतलें बरामद हुईं. घर से शराब बरामद होने के मामले में जद (यू) से निलंबित मनोरमा देवी को 19 मई, 2016 को कोर्ट से जमानत नहीं मिली. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी.

घर से शराब बरामद होने के 6 दिनों के बाद मनोरमा देवी ने 17 मई, 2016 को गया कोर्ट में सरैंडर कर दिया. सरैंडर करने के बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. मनोरमा देवी ने कहा कि उन्हें फंसाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने साजिश रची है. सरकार ने मनोरमा देवी के मकान को जब्त करने की पहल शुरू कर दी है. मकान की जब्ती की खानापूरी करने के बाद उन के मकान में स्कूल खोला जाएगा.

मनोरमा देवी के पति बिंदी यादव की दबंगई और अपराध की वजह से जमशेदपुर में उस की तूती बोला करती थी. 1990 में वह अपराध जगत का कुख्यात नाम था. बिंदी यादव की तरह उस का बेटा राकेश रंजन यादव उर्फ रौकी यादव भी दबंगई के नशे में चूर था. चमचमाती नई लैंडरोवर गाड़ी में सवार रौकी ने 7 मई, 2016 को ओवरटेक विवाद में 12वीं जमात के छात्र आदित्य सचदेवा की गोली मार कर हत्या कर दी थी.

उस रात तकरीबन 10 बजे आदित्य सचदेवा मारुति स्विफ्ट कार बीआर-2 वन/2699 से बोधगया से अपने घर गया की ओर लौट रहा था. रास्ते में जेल इलाके के पास ही सत्तारूढ़ दल जद (यू) की एमएलसी मनोरमा देवी का बेटा रौकी अपनी लैंडरोवर कार से आदित्य की कार को ओवरटेक करने की कोशिश करने लगा. जब काफी देर तक आदित्य ने उसे पास नहीं दिया, तो खाली सड़क मिलने पर ओवरटेक कर आदित्य की कार को रोका गया और उस की जम कर पिटाई कर दी गई.

पिटाई के बाद आदित्य और उस के साथियों ने माफी मांग ली और वापस अपनी कार की ओर जाने लगा, तो रौकी ने पीछे से उस पर गोली चला दी. आदित्य सचदेवा के दोस्तों ने पुलिस को बताया कि उस लैंडरोवर गाड़ी से 4 लोग बाहर निकले. उन में रौकी, बौडीगार्ड, ड्राइवर समेत एक और आदमी था, जिसे कोई नहीं पहचानता था. रौकी ने पहले पिस्तौल के बट से नासिर पर हमला किया, तो नासिर ने डर कर गाड़ी को भगाने की कोशिश की. गाड़ी कुछ दूर ही आगे गई थी कि पीछे से गोली चलने की आवाज आई. गोली आदित्य को लगी और वह वहीं लुढ़क गया.

इस हत्या के सिलसिले में बिंदी यादव और रौकी को पुलिस ने दबोच लिया. मनोरमा देवी के सरकारी बौडीगार्ड राजेश कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया. राजेश पर आरोप है कि उस ने रौकी को गोली चलाने से क्यों नहीं रोका  

एडीजे, हैडक्वार्टर सुनील कुमार ने बताया कि हथियार की फोरैंसिक जांच में पता चला है कि बौडीगार्ड के हथियार से गोली नहीं चलाई गई है. बौडीगार्ड ने पुछताछ में पुलिस को बता दिया कि रौकी ने ही आदित्य पर गोली चलाई थी. रौकी हमेशा अपने पास रिवौल्वर रखता था. आदित्य सचदेवा की हत्या के 54 घंटे बाद रौकी यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. 10 और 11 मई की रात को 2 बजे उसे उस के पिता बिंदी यादव के मस्तपुरा में बने मिक्सचर प्लांट में दबोचा गया. उस के पास से हत्या में इस्तेमाल की गई लोडेड विदेशी रिवौल्वर और गोलियों से भरी मैगजीन भी बरामद की गई.

एसएसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान रौकी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है, वहीं दूसरी ओर रौकी का कहना है कि उस ने आदित्य की हत्या नहीं की. घटना के समय वह दिल्ली में था और वह अपनी मां के बुलावे पर गया पहुंचा था. उस ने अपनी मां मनोरमा देवी के कहने पर ही सरैंडर किया है.

आदित्य की हत्या के बाद एमएलसी मनोरमा देवी का पूरा परिवार और राजनीति चौपट हो गई है. पहले तो बेटा रौकी हत्या के मामले में जेल गया और उस के बाद पति बिंदी यादव को भी पुलिस ने हत्यारे को छिपानेभगाने के जुर्म में सलाखों के पीछे ठूंस दिया है. इस के बाद घर में विदेशी शराब रखने के आरोप में मनोरमा देवी भी जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दी गई हैं.

शराब की बोतलें मिलने पर छीछालेदर से बचने के लिए एमएलसी मनोरमा देवी को जद (यू) से तुरंत निलंबित कर दिया गया.

एपी कालोनी इलाके में मनोरमा देवी के घर को जब्त करने की कार्यवाही भी शुरू की गई है. उत्पाद सहायक आयुक्त विकास कुमार सिन्हा ने बताया कि नई उत्पाद नीति की धारा 47-ए, 48, 53 और 54 के तहत रामपुर थाने की पुलिस ने मनोरमा देवी के घर को सील किया है. अब धारा 68-जी के तहत मनोरमा देवी के घर का अधिग्रहण किया जाएगा.              

ये कूल गैजेट्स बना देंगे आपको सुपरकूल

अगर आप अपनी लाइफ कूल बनाना चाहते हैं तो इन कूल गैजेट्स को अपने जीवन में शामिल करें. यहां आपको ऐसे कूल गैजेट्स के बारे में बताया जा रहा है जो मार्केट में काफी लेटेस्‍ट हैं और इनके लिए आपको बहुत ज्‍यादा कीमत चुकाने की जरूरत भी नहीं पड़ती है.

इन गैजेट्स का इस्‍तेमाल करने से आपकी लाइफ आसान हो जाएगी और अगर आप किसी पर अपना इम्‍प्रेशन डालना चाहते हैं तो भी आपका काम आसानी से हो जाएगा. आइए जानते हैं इन कूल गैजेट्स के बारे में…

मूविंग अलॉर्म क्‍लॉक

अगर आप हर सुबह तेज बजने वाली घड़ी से तंग आ चुके हैं तो मूविंग अलॉर्म क्‍लॉक को ले आएं. यह घड़ी मूव करती हुई आपको जगाएगी और जब आप इसे स्‍नूज करने की कोशिश करेंगे तो यह दूर भाग जाएगी.

चार्जिंग बैकअप

चार्जिंग बैकअप को रखना एक अच्‍छा ऑप्‍शन है. इसकी मदद से आप अपने गैजेट्स को आसानी से कभी भी कहीं भी चार्ज कर सकते हैं.

फिटनेस ट्रैकर

जो लोग अपनी हेल्‍थ को लेकर बहुत सचेत रहते हैं वो फिटनेस ट्रैकर को खरीदें और उसे अपने स्‍मार्टफोन से कनेक्‍ट कर लें. इससे आपको काफी आराम रहेगी और पता चलता रहेगा कि आपको अभी कितना वर्कआउट और करना है.

न्‍वाइज कैंसलिंग हेडफोन

बाहर से आने वाला शोर अक्‍सर हेडफोन पर होने वाली बात या गाने को भी सुनने में दिक्‍कत पैदा करता है. ऐसे में न्‍वाइज कैंसलिंग हेडफोन को लें और उसका इस्‍तेमाल करें.

पोर्टेबल स्‍पीकर

ऐसे स्‍पीकर्स की मार्केट में धूम है जिन्‍हें कभी भी कहीं भी लाया ले जाया जा सकता है और इनका वजन भी ज्‍यादा नहीं होता है. अपने कलेक्‍शन में इन्‍हें जरूर शमिल करें.

वॉयरलेस डिस्‍प्‍ले एडॉप्‍टर

वॉयरलेस डिस्‍प्‍ले एडॉप्‍टर आपकी लाइफ को आसान बना देता है. वरना कई बार वॉयर्स में उलझे रहने में ही सारा वक्‍त बर्बाद हो जाता है. इसकी मदद से आसानी से प्रोजेक्‍ट या प्रेजेन्‍टेशन को भी दिखाया जा सकता है.

टू-इन-वन लैपटॉप

HP Pavilion x360 जैसा लैपटॉप ड्रीम लैपी होता है जिसे हर कोई अपने साथ रखना चाहेगा. ऐसे लैपटॉप को लेने से आप जब चाहें काम कर सकते हैं और इसके फोल्डिंग मोड का यूज करते हुए मूवी आदि का मजा भी उठा सकते हैं.

‘गवर्नर कोई भी हो, रिजर्व बैंक चलता रहेगा’

रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि गवर्नर कोई भी हो, रिजर्व बैंक अपना काम करता रहेगा और इस पद की पहचान व्यक्तियों से नहीं की जानी चाहिए. राजन ने यह घोषणा कर सबको हैरान कर दिया था कि उनकी दूसरे कार्यकाल में रुचि नहीं है

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष,आईएमएफ के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री को 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट की भविष्यवाणी का श्रेय जाता है. सितंबर, 2013 मैं वह रिजर्व बैंक के गवर्नर बने थे और उनका तीन साल का कार्यकाल चार सितंबर को खत्म हो रहा है.

उन्हें रॉकस्टार केंद्रीय बैंकर कहा जाता है. उनको वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं में रुपये के उतार-चढ़ाव को भी नियंत्रण में रखने का श्रेय जाता है.

साथ ही मुद्रास्फीति को काफी हद तक नियंत्रण में रखने के लिए राजन की सराहना होती है. उन्होंने बैंकों पर अपने बही खातों को डूबे ऋण से साफसुथरा करने के लिए दबाव डालने का भी श्रेय दिया जाता है.

इकनामिस्ट पत्रिका ने अपने ताजा संस्करण में राजन के हवाले से कहा, सबसे महत्वपूर्ण है कि इस पद (आरबीआई गवर्नर) को किसी व्यक्ति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. गवर्नर कोई भी हो, यह चलता रहेगा. यह किसी भी गवर्नर से बड़ा है समझा जाता है. उनकी यह टिप्पणी इस तरह की अटकलों के बाद आई थी कि क्या उन्हें गवर्नर के रूप में दूसरा कार्यकाल मिलेगा या नहीं?

अब एजेंट बुक नहीं कर पायेंगे तत्काल टिकट

इंटरनेट से टिकट निकालने वाले एजेंट अब तत्काल टिकट बुक नहीं कर पायेंगे. आईआरसीटीसी के एजेंट सेवा शुल्क के नाम पर यात्रियों के साथ लूटपाट कर रहे थे. रेलवे ने यात्रियों के साथ हो रही ज्यादती को रोकने के लिये एजेंट्स से यह अधिकार वापस लेने का निर्णय लिया गया है. 
रेल यात्रियों को 25 जून के बाद तत्काल या फिर प्रीमियम कोटे की टिकट लेने के लिये सीधे रेल आरक्षण केंद्र जाना पड़ेगा. मालूम हो कि आईआरसीटीसी से जुड़े टिकट एजेंट तत्काल और प्रीमियम टिकट बुक करने के नाम पर मनमर्जी चला रहे थे. रेलवे के अधिकारियों को शिकायत लगातार मिल रही थी. 
कई बार इस बात का भी खुलासा हुआ है कि आईआरसीटीसी ने टिकट बिक्री का काम जिन कंपनियों को सौंप रखा है, वो लोग यात्रियों से मनचाही रकम वसूल कर रहे हैं. इतना ही नहीं एजेंसी के नुमाइंदे एक यात्री की टिकट बुक करने के नाम पर पचास से लेकर दो सौ या फिर पांच सौ रुपये तक वसूल रहे हैं. तत्काल के नाम पर खुलेआम मुसाफिरों से रेलवे के फेयर से दोगुना राशि वसूल की जा रही थी. रेलवे ने देश भर की एजेंसियों पर 25 जून से तत्काल और प्रीमियम कोटे की टिकटों की बुकिंग पर रोक लगा दी है. 

अब टी20 की तर्ज पर वनडे क्रिकेट लीग!

टी-20 क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता और वनडे क्रिकेट से दूर होते दर्शकों को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) वनडे क्रिकेट में बदलाव की तैयारी में है. उम्मीद है कि आइसीसी दुनिया की 13 टीमों के साथ 50 ओवर प्रारूप की नई लीग का आयोजन करेगी.

सूत्रों के अनुसार आइसीसी की इस महीने होने वाली बैठक में इस नए प्रस्ताव को रखा जाएगा. टी-20 क्रिकेट के प्रति दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ने के बाद यह माना जाने लगा है कि वनडे क्रिकेट को बढ़ावा देने की आवश्यकता है.

उम्मीद है कि 2019 से इस नई वनडे लीग को आजमाया जाएगा. योजना के तहत 13 टीमें आपस में तीन मैचों की सीरीज खेलेगी. ये सीरीज कोई भी टीम अपने घर में या बाहर खेल सकती है. तीन साल की इस लीग में हर टीम 36 मैच खेलेगी और शीर्ष दो टीमों के बीच फाइनल खेला जाएगा. जिसमें संभवत: तीन मैच खेले जाएंगे.

वनडे विश्व कप पर भी असर

इस लीग का वनडे विश्व कप पर भी असर पड़ेगा और नीचे की तीन टीमें विश्व कप से बाहर हो जाएंगी. क्योंकि आइसीसी दस टीमों के साथ विश्व कप आयोजित करने के बारे में भी विचार कर रहा है. माना जा रहा है कि इस लीग में दस टेस्ट टीमें होंगी तथा अफगानिस्तान, आयरलैंड और एक एसोसिएट टीम को इस लीग का हिस्सा बनाया जाएगा. नेपाल को इस लीग का हिस्सा बनाया जा सकता है. उम्मीद है कि इससे वनडे क्रिकेट को एक नया आयाम हासिल होगा और नए दर्शक भी मिलेंगे.

द्विपक्षीय सीरीज को बढ़ावा

टीमें अपने हिसाब से अलग से सीरीज का आयोजन कर सकेंगी और उसे इस लीग से बाहर रखा जाएगा. आइसीसी को उम्मीद है कि इस लीग के आयोजन से विश्व कप से पहले दर्शकों का ध्यान खींचा जा सकेगा और द्विपक्षीय सीरीज से काफी धन इकट्ठा किया जा सकता है. वनडे के अलावा आइसीसी टेस्ट मैचों का भी आयोजन इसी तरह की लीग के साथ करना चाहता है, जिसकी शुरुआत 2019 से हो सकती है.

दिल की धड़कन बनेगी आपका ATM पिन

जल्द ही ऐसा दिन आएगा जब आपके दिल की धड़कन ही आपके ATM का पासवर्ड बन जाएगी. इतना ही नहीं आप दिल की धड़कन की मदद से पैसा निकाल और ट्रांसफर कर सकेंगे.

फिलहाल तो यह बात आपको जरूर मजाक लग रही होगी, लेकिन यह बिल्कुल सच है. आप सोच रहे होंगे की प्रत्येक व्यक्ति की दिल की धड़कन अलग होती है तो यह कैसे संभव हो सकता है.

दिल की धड़कन को एटीम का पिन बनाने का काम जल्द ही होने वाला है. भारत में अभी इस नई और खास प्रकार की तकनीक को आने में थोड़ा समय लगेगा. लेकिन साइबर जगत की सुरक्षा को देखते हुए भारतीय बैंक इसे जल्द से जल्द लाने की तैयारियां कर रहे हैं.

आपको बता दें कि टोरंटो की बायोमैट्रिक और ऑथेंटिकेशन कंपनी इस तकनीक पर रिसर्च कर रही है. इसके लिए हाथ में एक रिस्टबैंड बंधा होगा जो आपके एटीम के लिए एक ट्रांसमिशन सिग्नल का काम करेगा, जो आपके दिल की धड़कन को पहचान लेगा. इस तकनीक को लाने में प्राइवेट बैंक भी आगे बढ़ रहे हैं. प्राइवेट बैंक जैसे HDFC और ICICI बैंक भी इस नई तकनीक को लाने का विचार कर रहे हैं.

इस तकनीक के बारे  में पूछे जाने पर बैंकों का कहना है कि इस तकनीक के आने से ग्राहकों के बैंक खाते और भी सुरक्षित हो जाएंगे. जिससे अकाउंट हैक होने, और धोखाधड़ी का कोई खतरा नहीं होगा. DCB बैंक ने अपने ग्राहकों के लिए एटीम में फिंगरप्रिंट स्कैनर की शुरूआत की है. इसी प्रकार ऐसे बहुत से बैंक हैं जिन्होंने पिन नंबर के स्थान पर नई तकनीक का इस्तेमाल किया है.

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