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ग्रेट ग्रैंड मस्ती का पहला गाना रिलीज

बॉलीवुड की सुपरहिट एडल्ट कॉमेडी फिल्म 'ग्रैंड मस्ती' फ्रैंचाइजी की तीसरी फिल्म ग्रेट ग्रैंड मस्ती का ट्रेलर पहले से ही चर्चा में है और अब इस फिल्म का मस्ती भरा पहला गाना भी रिलीज हो गया है.

'तेरी कमर को’ मेरी नजर के नाम से रिलीज हुआ यह गाना एक शानदार डांसिंग नंबर है. हाई बीट्स पर बने इस गाने पर फिल्म 'ग्रेट ग्रैंड मस्ती' के स्टार्स रितेश देशमुख, आफताब शिवदासानी और विवेक ओबरॉय खूब ठुमकते नजर आ रहे हैं. गाने का हिप हॉप म्यूजिक और बोल दोनों ही आकर्ष‍ित करते हैं.

इस गाने को संजीव राठौड़, दर्शन राठौड़ और कनिका कपूर ने आवाज दी है. इसे कुमार ने लिखा है और संजीव दर्शन ने कंपोज किया है. इंद्र कुमार द्वारा निर्देशित इस फिल्म में रितेश देशमुख, आफताब शिवदासानी और विवेक ओबरॉय के अलावा उवर्शी रौतेला भी नजर आएंगी. यह फिल्म 22 जुलाई को रिलीज होगी.

सलीम खान के बाद सलमान के बचाव में उतरे अरबाज

फिल्म ‘‘सुल्तान’’ में कुश्तीबाज का किरदार निभाने वाले अभिनेता सलमान खान ने हाल ही में पत्रकारों के साथ बात करते हुए अपनी शूटिंग की दिक्कतों का जिक्र करते हुए अपनी तुलना रेप पीड़ित महिला से करके विवादों को जन्म दे दिया है. तमाम सामाजिक संगठनों, राजनैतिक पार्टियों के साथ साथ वे राष्ट्रीय महिला आयोग के निशाने पर आ गए हैं. सलमान खान के प्रशंसक भी उनसे नाराज हो गए हैं. इस विवाद के पैदा होने के बाद सलमान खान के पिता सलीम खान ने उनकी व अपने परिवार की तरफ से माफी मांगी. पर सलमान खान अभी भी चुप हैं. उधर पूरा बालीवुड चुप है. सिर्फ सलमान के समर्थन में फिल्मकार सुभाष घई आगे आए हैं. अब सलमान खान के बडे़ भाई अरबाज खान ने उम्मीद जतायी है कि सलमान खान भी माफी मांग लेंगे.

मंगलवार की रात मुंबई के एक पांच सितारा होटेल में फिल्म ‘‘जीना इसी का नाम है’’ का प्रमोशनल इवेंट था. इस फिल्म में अरबाज खान ने भी अहम भूमिका निभायी है. इस कारण अरबाज खान मौजूद थे. तो स्वाभाविक तौर पर पत्रकारों ने अरबाज खान से सवाल कर दिया कि क्या सलमान खान को माफी मांगी चाहिए? पहले तो अरबाज खान ने पत्रकारों को समझाने की कोशिश की कि वह सभी लोग फिल्म ‘‘जीना इसी का नाम है’’ के प्रमोशन के लिए इकट्ठा हुए हैं. इसलिए इस फिल्म को लेकर ही बात होनी चाहिए. सलमान खान व किसी अन्य मुद्दे पर बाद में बात की जा सकती है. पर जब पत्रकार अपने सवाल पर डटे रहे, तो अरबाज खान को बोलना ही पड़ा.

सलमान खान द्वारा अपनी तुलना रेप पीड़ित महिला को लेकर सलमान खान को माफी मांगनी चाहिए या नहीं, इस पर अरबाज खान ने कहा,-‘‘पहली बात तो सलमान खान की हर बात के लिए जवाब देने को मैं बाध्य नहीं हूं. सलमान खान खुद 50 साल के पुरूष हैं और वह स्वयं इस मुद्दे पर बात करने में सक्षम हैं. कई बार हम बातों बातों में कुछ बोल जाते हैं और उस वक्त उन बातों को कहने का हमारा इंटेशन यानी कि मकसद गलत नही होता है. तो लोगों को यह देखना चाहिए कि कौन सी बात किस मकसद के साथ की गयी है. मैंने इंटरव्यू का वह हिस्सा सुना हैं. उनके कहने का मतलब गलत नहीं था. उस पर बेवजह बवाल किया गया है. सलमान खान को अहसास हो चुका है कि उन्होने क्या कह दिया. मुझे उम्मीद है कि इस पर सलमान खान जरूर अपनी सफाई देंगे. पर उसे माफी मांगनी चाहिए या नहीं, इस पर मैं कुछ नही कह सकता.’’

पर जब अरबाज खान का ध्यान इस बात पर आकर्षित किया गया कि उनके पिता सलीम खान माफी मांग चुके हैं. तो ऐसे में सलमान खान को क्या करना चाहिए? तब अरबाज खान ने कहा-‘‘सलीम खान पिता हैं. एक पिता अपने बच्चों के लिए बहुत कुछ कर सकता है और करता रहता है. माफी मांगने का अर्थ यह नही होता कि गलती की है. बल्कि माफी तो किसी का दिल दुःखा हो तो भी मांगी जा सकती है.’’

क्या ‘शोरगुल’ मुजफ्फरनगर में रिलीज हो पाएगी…?

फिल्म ‘‘शोरगुल’’ के निर्माताओं ने अपने ट्रेलर के माध्यम से यह संदेश दिया था कि उनकी यह फिल्म मुजफ्फरनगर के दंगों पर आधारित एक राजनीतिक फिल्म है. यदि इस फिल्म के मुख्य कलाकार जिम्मी शेरगिल की माने तो इस तरह का ट्रेलर बनाने का मकसद फिल्म के प्रति दर्शकों की उत्सुकता पैदा करना रहा है. जबकि यह फिल्म पूरी तरह से एक प्रेम कहानी वाली फिल्म है. इस फिल्म का ट्रेलर आने के बाद से ही यह फिल्म विवादों से घिरी हुई हैं. फिल्म के खिलाफ और खासकर जिम्मी शेरगिल के किरदार के खिलाफ एक पीआईएल भी दाखिल हुई थी, पर जिम्मी शेरगिल ने लोगों को समझाया कि यह फिल्म किसी एक किरदार पर आधारित नही है. बल्कि पूरे देश भर में हुए तमाम घटनाक्रमों पर एक काल्पनिक कहानी है. जिसमें मूल कहानी तो प्रेम कहानी है. तब पीआईएल वापस हो गयी थी.

पर अब जैसे ही फिल्म की रिलीज का समय आया है, तो अब जिस तरह के हालात हैं, उन हालातों में यह फिल्म मुज्जफरनगर में रिलीज नही हो पाएगी. मंगलवार को मुजफ्फरनगर में इस फिल्म के पोस्टर फूंक कर फिल्म पर बैन लगाने की बात की गयी. वही लखनऊ में दरगाह खम्मनपीर कमेटी ने फिल्म पर बैन के साथ ही जिम्मी शेरगिल पर फतवा जारी कर दिया है. इस फतवे में कहा गया हैं -‘‘जिम्मी शेरगिल ने अपने संवादों से मुस्लिम समुदाय को आहत किया है, जिससे समाज में अशांति का माहौल बन सकता है. फिल्म में मुस्लिम समुदाय की गलत छवि प्रस्तुत की गयी है. इसलिए फिल्म पर प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए. विवादों से बचने के लिए जिम्मी शेरगिल देश से बाहर चले गए हैं.’’

उधर लखनऊ के चारबाग इलाके में स्थित दरगाह खम्मनपीर कमेटी के महासचिव मोहम्मद युनुस ने मीडिया से कहा है-‘‘हमने फिल्म का ट्रेलर देखा है. इसमें जिम्मी शेरगिल के संवाद मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हैं. हम इस फिल्म को रिलीज नही होने देंगे. हम अदालत का भी सहारा लेंगे और यदि फिल्म रिलीज हो गयी, तो जिम्मी शेरगिल को दुबारा लखनऊ नही घुसने देंगे.’’

उत्तर भारत व खासकर लखनऊ में फिल्मायी गयी फिल्म ‘‘शोरगुल’’ में जिम्मी शेरगिल ने एक शक्तिशाली राजनैतिक नेता का किरदार निभाया है.

इस फतवे के जारी होने के बाद फिल्म के निर्माताओ ने अपनी तरफ से फिर कहा है कि उनकी फिल्म देश में घटित कुछ दुखद घटनाओं का सिनेमाकरण है. उनका मकसद किसी की भावनाओं को दुख पहुंचाना नही है. बल्कि देश कि जनता को जागरुक करना है.

उधर मुज्जफरनगर जिले के तमाम सरकारी अधिकारी सिनेमा घर के मालिकों पर दबाव बना रहें हैं कि वह स्वयं इस फिल्म को रिलीज करने से मना कर दें. अब देखना यह होगा कि यह विवाद आगे क्या रंग लाता है.

यूपी में न सरकार का पता, न संगठन का

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कौमी एकता दल के विलय से साफ पता चल गया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को न पार्टी की गतिविधियों का पता होता है और न सरकार के फैसले का. साल 2012 में अखिलेश यादव ने बाहुबली डीपी यादव के लिये पार्टी के दरवाजे बंद करके अपनी छवि को मजबूत किया था. उत्तर प्रदेश की जनता को अखिलेश यादव की यह छवि पंसद आई. इसके बाद विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी को बहुमत मिला, तो उसके लिये सबसे बडा कारण अखिलेश यादव की छवि को माना गया.

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने खुद जीत के लिये अखिलेश को शाबासी दी और उनको मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया. यह बात और है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद भी अखिलेश यादव अपने आपको परिवार और पार्टी के बडे नेताओं के प्रभाव से दूर नहीं रख पाये. जिस वजह से उत्तर प्रदेश में कई मुख्यमंत्री होने का आरोप लगता रहा.

अपने फैसलों से अखिलेश यादव ने पूरे कार्यकाल यह साबित करने की कोशिश की कि वह ताकतवार मुख्यमंत्री हैं. अपने फैसले खुद लेते हैं. समय समय पर समाजवादी पार्टी और सरकार ऐसे फैसले करती रहती है, जो सगठन और सरकार पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पकड को लेकर सवालिया निशान लगाते हैं. कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय का फैसला भी ऐसा ही एक पेंच है.

चुनावी मौसम में हुये इस फैसले ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की छवि को धूमिल किया है. केवल सरकार के स्तर पर ही नहीं, संगठन के स्तर पर भी मुख्यमंत्री की पकड नहीं दिखती. अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. ऐसे में उनको संगठन के हर फैसले की जानकारी होनी चाहिये. कौमी एकता दल और समाजवादी पार्टी के विलय वाले मसले पर नाराज होकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस विलय का जिम्मेदार मानते हुये माध्यमिक शिक्षामंत्री बलराम यादव को अपने मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया है.

कौमी एकता दल बाहुबली मुख्तार अंसारी की पार्टी है. वाराणसी, गाजीपुर, मऊ और बलिया जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में मुख्तार अंसारी का अपना प्रभाव है. समाजवादी पार्टी के बडे नेताओं को लगता है कि मुख्तार के साथ आने से पूर्वी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का प्रभाव बढेगा. मुख्तार अंसारी आगरा जेल में बंद थे. इस प्रकरण के बाद उनको लखनऊ जेल ट्रांसफर किया गया है. इससे साफ लग रहा है कि एक तरफ मुख्यमंत्री मुख्तार अंसारी का विरोध कर रहे हैं, दूसरी तरफ सरकार और संगठन दोनो मुख्तार के लिये पलके बिछा रही है.

सपा में कौमी एकता दल के साथ मुख्तार के भाई पूर्व सांसद अफजाल अंसारी और विधायक सिब्गैतुल्लाह अंसारी शामिल हो चुके हैं. मुख्तार अंसारी के नाम पर पार्टी महासचिव शिवपाल यादव के कहा कि मुख्तार अंसारी पार्टी में शामिल नहीं है. अब इस सवाल का जवाब समाजवादी पार्टी के पास नहीं है कि प्रदेश अध्यक्ष  और मुख्यमंत्री के रूप मे अखिलेश यादव को इस प्रकरण की जानकारी क्यों नहीं थी? अगर मुख्यमंत्री को यह जानकारी थी तो उन्होने इस प्रकरण की जिम्मेदारी बलराम यादव पर डालते उनको मंत्रिमंडल से बर्खास्त क्यों किया?                    

वर्दी वाला लुटेरा

जब आम आदमी की हिफाजत में लगी पुलिस ही लुटेरी बन जाए, तो क्या कहा जाए? पटना में पुलिस वालों के लुटेरा बनने से आम आदमी जहां सकते में हैं, वही सरकार की एक बार फिर भद्द पिट रही है. बिहार पुलिस के 5 सिपाहियों ने मिल कर एक युवक से 40 हजार रूपए लूट लिए. गनीतम यह रही कि सारे सिपाही सिविल ड्रेस में थे. पटना के कदमकुंआ थाने में तैनात पांचों सिपाहियों ने लोहानीपुर मुहल्ले में एक युवक को पकड़ा और उस पर जुआ खेलने का आरोप लगा कर और पिस्तौल का भय दिखा कर राजेंद्र नगर पुल के नीचे बने पुलिस चौकी में ले गए.

सिपाहियों ने युवक के बैग की तलाशी लेने के बहाने बैग में रखे सारे सामान को बाहर निकाल कर सड़क पर बिखेर दिया. बैग में रखे 40 हजार रूपए भी बाहर गिर पड़े, जिसे देख सिपाहियों की आंखें चमक उठी. पांचों सिपाहियों में से एक ने युवक के 40 हजार रूपए अपने पौकेट में रख लिये और उसे धमका कर भगा दिया. संतोष गिड़गिड़ाता रहा कि वह अपनी बहन के घर जरूरी काम से रूपये पहुंचाने जा रहा है, इसलिए उसके रूपये लौटा दिया जाए. उसके रोने-बिलखने से भी सिपाहियों को मन नहीं पसीजा. सिपाहियों ने उसे धमकाते हुए कहा कि अगर वह नहीं भागेगा, तो जुआ खेलने के आरोप में जेल में बंद करवा देंगे.

युवक ने इस मामले में कदमकुंआ थाना में एफआईआर दर्ज कराई और मामले की जांच की गई तो पता चला कि सिपाही ही लुटेरे बन गए थे. पिछले 12 जून को लोहानीपुर मुहल्ले में रहने वाला युवक संतोष कुमार अपनी बहन के घर जहानाबाद जाने के लिए घर से निकला था. वह अपनी बहन के यहां रूपये पहुंचाने जा रहा था. घर से निकलने के कुछ देर बाद ही 5 लोगों ने उसे पीछे से दबोच लिया. उन्होंने कहा कि वे बिहार पुलिस के सिपाही हैं और उसकी बैग की तलाशी लेना चाहते हैं. सारे लोग उसे पकड़ कर राजेंद्र नगर ओवरब्रिज के नीचे ले गए और उसे मारपीट कर रूपए छीन लिया. इस लूट के मामले में पांचों सिपाहियों के खिलाफ धारा 341, 342, 323 और 386 के तहत मामला दर्ज किया गया.

पुलिस ने इस मामले में पड़ताल की तो संतोष का आरोप सही पाया गया. राजेंद्र नगर पुल के नीचे 12 जून को तैनात सिपाहियों से पूछताछ की गई तो सभी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया. लुटेरे सिपाहियों के नाम विपुल कुमार, सुनील कुमार, अमित कुमार, धीरज कुमार और अर्जुन कुमार है. पुलिस ने अमित कुमार (सिपाही संख्या-7575) को तो गिरफ्तार कर लिया है पर बाकी चार सिपाही फरार हो गए हैं. अमित कुमार के पास से 37 हजार 500 रूपये भी बरामद कर लिये गये हैं.

मामले की जांच करने वाले एएसआई अनिल कुमार सिंह ने बताया है कि इस मामले में पीसी एक्ट के तहत निगरानी वाद दर्ज किया गया था और फरार हुए चार सिपाहियों की तलाश की जा रही है.

इस App के जरिए करें मुफ्त कॉल

एक नयी मोबाइल एप्प नानू मोबाइल और लैंडलाइन नंबरों पर मुफ्त कॉल सेवा प्रदान कर रही है. इस सेवा का दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों ने ट्राई और सरकार के समक्ष विरोध किया है.

नानू के प्रमुख मार्टिन नैगेट ने कहा कि यदि आप भारतीय टेलीग्राफ कानून को देखे तो उसके अनुसार आप इंटरनेट पर किसी भी प्रकार के डेटा का ट्रांसमिशन कर सकते हैं जो कि संचार के स्वरूप में हो. यह पूरी तरह वैध है क्योंकि इसका नियमन दूरसंचार लाइसेंस के तहत नहीं होता. अगर आप इस संदर्भ में देखें तो कानून का यह क्षेत्र अस्पष्ट है.

नानू अपनी सेवा का प्रयोग करने वाले लोगों को हर रोज कहीं भी एक सीमा में मुफ्त कॉल करने की सुविधा देता है. यह सेवा मोबाइल और लैंडलाइन दोनों नंबरों पर उपलब्ध है. इस सुविधा का लाभ वो लोग भी उठा सकते हैं जिन्होंने उसकी एप्प को इंस्टाल भी नहीं किया है.

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने नेट निरपेक्षता के मुद्दे पर सलाह लेने की प्रक्रिया शुरू की हुई है और इसमें मोबाइल एप्लीकेशन से कॉल करने की सुविधा पर भी बात की गई है. मई में मोबाइल सेवा प्रदाताओं की संस्था सीओएआई ने दूरसंचार विभाग से कहा था कि वह एप्प के माध्यम से कॉल करना रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाएं क्योंकि यह नियमों के विरूद्ध है.

अनोखा रिकॉर्ड, एक ओवर और 77 रन

यदि किसी से पूछा जाए कि क्रिकेट में एक ओवर में सबसे ज्यादा रन कितने बने तो लगभग हर व्यक्ति 36 रन ही बताएगा. गैरी सोबर्स, रवि शास्त्री या युवराज सिंह द्वारा एक ओवर में लगाए छह छक्कों की बात की जाएगी. लेकिन आप चौंक जाएंगे यह सुनकर की प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ओवर में सबसे ज्यादा रन देने का रिकॉर्ड बर्ट वांस के नाम दर्ज है, जब उन्होंने एक ओवर में 77 रन दिए थे.

क्राइस्टचर्च में 20 फरवरी 1990 को शेल ट्रॉफी में कैंटरबरी और वेलिंग्टन के बीच मैच का अंतिम दिन था. कैंटरबरी को जीत के लिए 291 रन चाहिए थे और उसका स्कोर 8 विकेट पर 196 रन हो चुका था. ली जर्मन और रॉजर फोर्ड क्रीज पर टिके हुए थे. ऐसा लग रहा था कि मैच ड्रॉ हो जाएगा क्योंकि दो ओवर ही बचे हुए थे.

ऐसे में वेलिंगटन के कप्तान ने रणनीति बनाकर बर्ट वांस को गेंद सौंपी,  उन्होंने इससे पहले कभी गेंदबाजी नहीं की थी. वेलिंगटन टीम चाहती थी कि पहली बार गेंदबाजी कर रहे वांस की गेंद पर बल्लेबाज जोखिम उठाकर आउट हो सकते हैं. ली जर्मन 75 रन बना चुके थे और स्ट्राइक पर थे. टीम को जीत के लिए 75 रन चाहिए थे.

बर्ट का ओवर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था और उन्होंने शुरुआती 17 गेंदों में से 16 नोबॉल डाली. स्कोर बोर्ड अपडेट करने वाले समझ नहीं पा रहे थे कि हो क्या रहा है. इसी दौरान छठी गेंद पर जर्मन ने शतक पूरा किया. इस ओवर में कुल 77 रन बने और रिकॉर्ड बना. अब टीम को अंतिम ओवर में जीत के लिए 18 रन चाहिए थे,  इवान ग्रे के इस ओवर में जर्मन ने शुरुआती 5 गेंदों पर 15 रन बनाए, लेकिन वे अंतिम गेंद पर कोई रन नहीं बना पाए और मैच ड्रॉ हो गया.

नेटवर्क प्रॉब्लम! अब नो प्रॉब्लम

क्या हुआ क्यों परेशान हैं आप? अच्छा! अर्जेंट कॉल करना है पर नेटवर्क प्रॉब्लम है. अरे इसमें परेशान होने वाली क्या बात है. आज हम आपको देंगे कुछ ऐसे टिप्स जिनसे आपकी ये परेशानी पूरी तरह से दूर हो जाएगी.

– अपने फोन को 3जी से 2जी में स्विच कीजिए. आपको बता दें स्विच करने से भले ही आपके फोन में नेट धीरे काम करेगा लेकिन आपका फोन का सिग्नल बड़ी ही तेजी से दौड़ेगा.

– ज्यादातर लोग फोन पर कवर लगाकर रखते हैं. वीक सिग्नल आने पर अगर आप फोन से कवर हटा दें तो सिग्नल बेहतर हो सकते हैं.

– एक घरेलु तरीका ये भी है कि सिग्नल वीक होने पर अपने स्मार्टफोन को थोड़ी देर के लिए कांच के ग्लास में रख दें. इससे सिग्नल में सुधार हो जाएगा.

– एक घरेलु तरीका ये भी है कि सिग्नल वीक होने पर अपने स्मार्टफोन को थोड़ी देर के लिए कांच के ग्लास में रख दें. इससे सिग्नल में सुधार हो जाएगा.

– इसके लिए आप सिग्नल बूस्टर लगा सकते हैं. अपने घर या ऑफिस में किसी ऐसी जगह सिग्नल बूस्टर को इंस्टॉल करें जहां सिग्नल अच्छे आते हों.

– अगर किसी एक एरिया में सिग्नल की प्रॉब्लम है तो कृप्या अपने फोन की कॉल्स को दूसरे नंबर पर डाईवर्ट कर दें.

टीम इंडिया के कोच के लिए कोहली की चाहत!

टीम इंडिया के कोच के लिए इंटरव्यू प्रोसेस इन दिनों अपने अंतिम पड़ाव पर है. इस रेस में रवि शास्त्री और अनिल कुंबले की दावेदारी सबसे ज्यादा मजबूत मानी जा रही हैं.

सूत्रों के अनुसार कोलकाता में चल रहे इस चयन प्रकिया में रवि शास्त्री और अनिल कुंबले ने अपनी-अपनी दावेदारी पेश की जिस पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI), सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली की क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) विचार कर रही है.

इसी बीच खबर यह भी आ रही है कि टीम इंडिया के धुरंधर बल्लेबाज विराट कोहली से भी कोच पद के सलाह मांगी गई है. कोहली ने कोच के लिए टीम इंडिया के पूर्व डायरेक्टर रह चुके रवि शास्त्री का समर्थन किया है.

गौरतलब है कि विराट कोहली को टीम इंडिया के तीनों फॉर्मेट के भावी कप्तान के रूप में देखा जा रहा है ऐसे में कोहली का शास्त्री को समर्थन करना उनके दावेदारी को और अधिक मजबूत कर देता है.

आपको बता दें कि इससे पहले रवि शास्त्री भी खुलकर क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के ‘कैप्टन कूल’ महेंद्र सिंह धोनी की जगह विराट कोहली को कप्तान बनाए जाने की बात कह चुके हैं.

तो वहीं इस रेस में दूसरे सबसे अहम दावेदार टीम इंडिया पूर्व कप्तान और दिग्गज गेंदबाज अनिल कुंबले हैं. टीम इंडिया के कोच के लिए इनकी दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है. हरभजन सिंह जैसे दिग्गज खिलाड़ी ने भी टीम इंडिया के कोच पद के लिए कुंबले का समर्थन किया है.

दाल के लिए ‘बाबू’ गए विदेश

महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार कोई विकल्प छोड़ना नहीं चाहती है. घरेलू प्रबंधन को अंजाम देने के साथ सरकार ने विदेश से दाल आयात करने पर तत्परता से कार्रवाई शुरू कर दी है. आयात से जुड़े विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों के दो दल मंगलवार को म्यांमार और मोजांबिक के दौरे पर पहुंचे.

दालों के मूल्य में लगातार तेजी पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने तात्कालिक व दीर्घकालिक उपाय किए हैं. इसके तहत दलहन उत्पादक देशों से सरकार सीधे दाल आयात करने के विकल्प पर कार्य कर रही है. घरेलू बाजारों में दालों के मूल्य 200 रुपये प्रति किलो की दर को छूने लगे हैं. घरेलू मांग व आपूर्ति में लाखों टन के अंतर को देखते हुए जमाखोर और कालाबाजारी करने वाले भी सक्रिय हो गए हैं.

लगातार दो साल के सूखे की विभीषिका के चलते दलहन की पैदावार में गिरावट आई है. दाल आयात और वहां कांट्रेक्ट खेती की संभावनाएं तलाशने के लिए मोजांबिक जाने वाले उच्च स्तरीय दल का नेतृत्व उपभोक्ता मामले मंत्रालय के सचिव हेम पांडे कर रहे हैं. यह जानकारी मंत्रालय के एक बयान में दी गई है. प्रतिनिधि मंडल में कृषि व वाणिज्य मंत्रालय और सरकारी कंपनी एमएमटीसी के उच्चाधिकारी शामिल हैं.

इसी तरह दूसरा दल म्यांमार पहुंचा है. यह दल वहां से दाल आयात करने पर सरकार से वार्ता करेगा. म्यांमार से निर्यात करने वाली कोई एजेंसी नहीं है. यहां से 50 हजार टन का सौदा हो चुका है. भारत दाल आयात करने के लिए अन्य अफ्रीकी देशों में भी संभावनाएं तलाश रहा है. मलावी में दलहन खेती करने का मसौदा तैयार कर लिया गया है. इसके लिए वहां की सरकार तैयार भी है.

महंगाई पर काबू पाने के लिये पिछले सप्ताह वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में तात्कालिक और दीर्घकालिक उपायों पर भी चर्चा हुई थी. पिछले साल देश में निजी क्षेत्र ने कुल 58 लाख टन दालों का आयात किया था, जबकि देश में इनकी पैदावार 170 लाख टन हुई थी. घटती पैदावार व बढ़ती मांग के बीच महंगाई तेजी से सिर उठा रही है. इस पर काबू पाने के सभी तरह के उपाय किए जा रहे हैं.

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