Download App

अब इस बात पर तारीफ तो बनती है

बहुत अच्छा, शाबाश, परफेक्ट, इसी तरह अपनी कोशिश जारी रखो… बेहद मामूली लगने वाले तारीफ के इन शब्दों में ऐसी जादुई शक्ति होती है कि ये पल भर में दूसरों का हौसला बढा सकते हैं. फिर भी अकसर लोग दूसरों की तारीफ करने में बहुत कंजूसी बरतते हैं. प्रशंसा किसी भी व्यक्ति के मन-मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालती है. इससे उसके मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वह सामने आने वाली हर चुनौती का सामना बहुत आसानी से कर लेता है. जीवन के सभी रिश्तों में मधुरता बनाए रखने के लिए भी दूसरों की तारीफ करना बहुत जरूरी है.

दांपत्य जीवन में मधुरता

अपनी तारीफ सुनकर खुश होना एक सहज मानवीय प्रवृत्ति है. इतना ही नहीं, इससे प्रशंसा करने वाले के प्रति हमारे मन में प्यार और सम्मान की भावना पैदा होती है. मिसाल के तौर पर हर घर में पत्नी रोज खाना बनाती है और पति को ऐसा लगता है कि इसमें कौन सी बडी बात है? वह तो अपनी जिम्मेदारी निभा रही है, लेकिन ऐसा सोचना गलत है. जिस तरह सब्जी में नमक तेज होने पर आपका मूड ऑफ होता है, उसी तरह जब कभी पत्नी स्वादिष्ट खाना बनाए तो आपको तहेदिल से उसकी तारीफ करनी चाहिए. यही बात पत्नियों पर भी समान रूप से लागू होती है. अगर पति-पत्नी एक-दूसरे की सच्ची प्रशंसा करें तो इससे उनके आपसी रिश्ते में प्यार बना रहता है.

परवरिश का पहला उसूल

पेरेंटिंग का पहला नियम यही है कि बच्चों के हर सार्थक प्रयास की प्रशंसा जरूर करनी चाहिए. इससे वे अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित होते हैं. खास तौर पर अगर दूसरों के सामने बच्चों की प्रशंसा की जाए तो इससे उनका आत्मविश्वास बढता है. प्रशंसा के दो शब्द एनर्जी बूस्टर की तरह काम करते हैं. अगर आप बच्चों के हर अच्छे कार्य के लिए शाबाशी देंगे तो वे जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए प्रेरित होंगे और बेहतर ढंग से सीखने का प्रयास करेंगे. इसी तरह अगर उनकी टीचर शाबाशी से बच्चों का मनोबल बढाती हैं तो पेरेंट्स-टीचर मीटिंग में आप उन्हें धन्यवाद देना न भूलें. तारीफ के साथ बच्चे को उसकी गलती का एहसास दिलाना भी बहुत जरूरी है, ताकि उसके व्यक्तित्व का विकास सही ढंग से संभव हो.

प्रोफेशनल लाइफ में प्रशंसा

अगर आप अपने ऑफिस में अधिकारी हैं तो अधीनस्थ कर्मचारियों को उनकी गलतियों से आगाह करना आपकी जिम्मेदारी है, पर इसके साथ ही किसी अच्छे कार्य के लिए उनकी प्रशंसा में कोताही न बरतें. अपनी तारीफ सुनकर उनका उत्साह बढेगा और वे पहले से कहीं ज्य़ादा मेहनत और लगन से काम करेंगे. इसी तरह अगर कभी आपके सीनियर आपको कोई अच्छा सुझाव दें या आपका मार्गदर्शन करें तो उन्हें धन्यवाद देना न भूलें. इसके अलावा आपको अपने सहकर्मियों की अच्छी परफॉर्मेंस और कार्य-कुशलता की भी प्रशंसा करनी चाहिए. इससे ऑफिस में कामकाज का माहौल खुशनुमा बना रहता है, पर ध्यान रहे तारीफ हमेशा सच्ची होनी चाहिए, वरना वह चापलूसी में बदल जाती है.

सामाजिक संबंधों के लिए

अगर आपके पास-पडोस में रहने वाला कोई व्यक्ति अपना कीमती वक्त निकाल कर आपकी मदद करने की कोशिश करता है तो भी आपको उसका शुक्रगुजार होना चाहिए. अगर आपका कोई रिश्तेदार या दोस्त आपको गिफ्ट देता है तो उस व्यक्ति को फोन करके उपहार में दी गई वस्तु की प्रशंसा करना न भूलें. तारीफ करने के मामले में अपने अहं को आडे न आने दें. अच्छे कार्यों के लिए अपने घरेलू सहायक की भी उदारता से प्रशंसा करें. अगर आप दूसरों की सच्ची प्रशंसा करेंगे तो इससे वे न केवल खुश होंगे, बल्कि उनकी नजरों में आपकी इज्ज़त भी बढ जाएगी. आपके व्यक्तित्व पर भी इसका सकारात्मक असर दिखाई देगा.

फेसबुक लॉग आउट कर देखें पॉर्न वरना…

अगर आप किसी अडल्ट कंटेंट वाली वेबसाइट पर जा रहे हैं तो सबसे पहले फेसबुक लॉग आउट कर दें. हो सकता है कि आपको ट्रैक किया जा रहा हो. इसकी संभावना तब और बढ़ जाती है, जब उस पॉर्न साइट पर फेसबुक का प्लगइन लगा हो. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि फेसबुक लगातार ये ट्रैक करता है कि आप कौन-सी वेबसाइट्स सर्फ कर रहे हैं. इस इंफॉर्मेशन के बेसिस पर ही फेसबुक आपकी पसंद नापसंद पता करता है और आपको ऐड दिखाता है. ये आपके लिए सिक्युरिटी और प्राइवेसी का भी मामला है, जिसको अनदेखी नहीं करना चाहिए.

कैसे बचें-

अगर आप चाहते कि फेसबुक ऐड्स के लिए आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री को ट्रैक न किया जाए, तो इसका भी एक रास्ता है. आप पॉर्न वेबसाइट्स सर्फ करने से पहले फेसबुक लॉग आउट कर दें. लेकिन, फेसबुक फिर भी पता लगा लेगा कि आप किसी पॉर्न साइट पर थे, यह अलग बात है कि वह उसके हिसाब से आपको ऐड नहीं दिखाएगा. इसलिए बेहतर होगा कि आप ऐसा कुछ करने से पहले फेसबुक लॉग आउट कर लें.

क्या कहती है रिपोर्ट

'द सन' की रिपोर्ट के मुताबिक 7 साल पहले फेसबुक ने कहा था कि Like और Share बटन को यूजर्स को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. 2011 में फेसबुक ने कहा, हम सोशल प्लगइन्स की जानकारी को 90 दिनों में डिलीट कर देते हैं और उसे किसी को नहीं बेचते. लेकिन बाद में सोशल मीडिया साइट ने अपना मन बदलते हुए Like, Share और Login With Facebook विजट से यूजर्स पर नजर रखना शुरू कर दिया. जब कभी आप कोई Like या Share बटन वाला ऐप या वेबसाइट इस्तेमाल करते हैं तो उस डेटा को ALAMY नाम की फर्म कैप्चर करती है.

क्या है फेसबुक की पॉलिसी

फेसबुक की डेटा पॉलिसी में साफ लिखा है, 'हम उस वक्त इन्फर्मेशन कलेक्ट करते हैं, जब आप उन थर्ड पार्टी ऐप्स या वेबसाइट्स पर जाते हैं, जो हमारी सर्विसेज (लाइक बटन या फेसबुक लॉगइन) इस्तेमाल करती हैं. उन वेबसाइट्स या ऐप्स पर हमारी सर्विसेज के इस्तेमाल की जानकारी शामिल होती है.

एंड्रॉइड में है ज्यादा खतरा

– एंड्रॉइड का एनक्रिप्शन iOS के मुकाबले काफी वीक है.

– iOS के मुकाबले एंड्रॉइड स्मार्टफोन से पर्सनल डिटेल, बैंकिंग डिटेल और अन्य इंफॉर्मेशन हैक होने का खतरा ज्यादा होता है.

– एक रिपोर्ट के मुताबिक एंड्रॉइड स्मार्टफोन्स पर पॉर्न देखने वालों का पर्सेंटेज सबसे ज्यादा है.

– टोटल 49.9 पर्सेंट एंड्रॉइड यूजर्स पॉर्न देखते हैं और यही काउंट iOS में 40.2 पर्सेंट हैं.

– विंडोज यूजर्स की बात की जाए तो ये नंबर सिर्फ 6 पर्सेंट है दूसरी तरफ ब्लैकबेरी यूजर्स सिर्फ 1.4 पर्सेंट.

सिर्फ 444 रुपए में करिए आसमान की सैर

हवाई सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों के बीच कम किराये की जंग को तेज करते हुए स्पाइसजेट ने एक नयी योजना के तहत कुछ निश्चित स्थानों की दूरी तक हवाई सेवा का प्रयोग करने के लिए 444 रुपये के बेस किराये की पेशकश की है. यह योजना कंपनी के घरेलू नेटवर्क की सीमित सीटों पर सीमित अवधि के लिए है. अभी कुछ समय पहले ही कंपनी ने ‘मानसून बोनांजा सेल' की घोषणा की थी.

इस संबंध में एयर पैसेंजर्स एसोसिशन ऑफ इंडिया ने विमानन क्षेत्र के नियामक डीजीसीए को एक पत्र लिखकर यह जानकारी मांगी है कि क्या वह एयरलाइनों द्वारा दी जा रही ऐसी ‘फर्जी' योजनाओं पर कार्रवाई करने का विचार कर रही है.

स्पाइसजेट ने बताया कि पांच दिन की इस सेल के तहत बुकिंग 26 जून की मध्यरात्रि तक होगी. इस योजना के तहत एक जुलाई से 30 सितंबर के बीच की यात्रा के लिए बुकिंग कराई जा सकती है. इस योजना में जम्मू-श्रीनगर, अहमदाबाद मुंबई, मुंबई-गोवा, दिल्ली-देहरादून और दिल्ली-अमृतसर मार्गों के साथ अन्य कुछ और मार्गों पर भी हवाई यात्रा की जा सकती है.

मवेशियों का चारा हजम कर गए अफसर

भारत का बुंदेलखंड इलाका हर साल सूखे जैसी कुदरती मार का बुरी तरह से शिकार होता है. इस बार यह कहर और ज्यादा है. इसी कारण यहां पर किसानों की खुदकुशी भी खूब हो रही है. पिछले 2 सालों से लगातार सूखे के कारण यहां के तकरीबन 85 फीसदी खेत खाली रह गए. जिन खेतों में बोआई हुई भी उन्हें वहां के मवेशी चर गए. वहां के सभी खेत व पगडंडियां सूख चुकी हैं. चारा न मिल पाने के कारण बहुत सारे पशु दम तोड़ रहे हैं. बदहाली का आलम यह है कि दुधारू पशुओं को भी किसान अब औनेपौने दामों में बेच रहे हैं या फिर लावारिस छोड़ रहे हैं, जिस से अंत में पशुओं को दर्दनाक मौत ही मिल रही है.

इन हालात को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने हुक्म दिया है कि कैंप लगा कर किसानों को अनाज और पशुओं को चारा बांटा जाए. मगर सच यह है कि जिन जगहों पर जितना चारा पहुंचना चाहिए था, पहुंच ही नहीं पाया या बांदा सहित दूसरे हिस्सों में टेंडर द्वारा भूसा खरीदने के कारण समय पर भूसा खरीद नहीं हो सकी. वैसे विभागीय अफसर कागजी कार्यवाही में पूरा काम कर चुके हैं और किसी भी चूक से साफ इनकार कर रहे हैं. कुल मिला कर मीडिया के द्वारा आई रिपोर्ट के अनुसार पशुओं का चारा अफसर हजम कर रहे हैं, जिस के कारण बड़ी संख्या में पशु मर रहे हैं.

किस हाल में जानवर और किसान

इस बार भारी सूखे के चलते तकरीबन 85 फीसदी खेत खाली रह गए. जिन खेतों में बोआई की गई, उन्हें पशुओं ने चर डाला. अब जब कि हर जगह चारे की कमी पड़ गई है, तो पशुओं को लावारिस छोड़ा जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक पूरे बुंदेलखंड में 1 करोड़ पशुओं पर मुसीबत आ गई है. हालत यह है कि किसान मोटा मुनाफा देने वाले दुधारू पशुओं को भी औनेपौने दामों पर बेच रहे हैं. बहुत सारे किसानों की डेरियों में ताले लग चुके हैं.

संकट से निबटने को सरकारी मदद

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव सुरेश चंद्रा ने वित्तीय साल 2015-16 में सूखे की चपेट में आए बुंदेलखंड के सभी 7 जिलों के लिए सरकारी खजाने से 7 करोड़ रुपए (हर जिले को 1 करोड़ रुपए) जारी किए. यह रकम पशुओं के लिए चारा और दाना खरीदने को दी गई थी, जिस से पशु भूख और प्यास से न मर सकें. सख्त निर्देश है कि इस रकम का इस्तेमाल दूसरे किसी काम में नहीं होना चाहिए. राहत राशि की पावती और लाभार्थी के पहचान प्रमाण के रूप में रसीद पर स्थानीय लेखपाल व ग्राम प्रधान के हस्ताक्षर करा कर इसे रिकार्ड में सुरक्षित किया जाए. साथ ही बांटी गई रकम ग्राम सभा के नोटिस बोर्ड पर दर्ज की जाए. यह भी निर्देश है कि आपदा समिति लगातार इस पर नजर रखे.

कहां गई सरकारी मदद

भूखप्यास के कारण पशु दम न तोड़ सकें, इस के लिए बुंदेलखंड के 7 जिलों में सरकारी प्रयासों से क्या चल रहा है? इस का मध्य फरवरी तक हमीरपुर जिले में हुए कामों से अंदाजा लगा सकते हैं. इस जिले में कुल 25 केंद्र बनाए गए हैं, इन में से आधा दर्जन केंद्रों में तो भूसा ही नहीं भेजा गया था. जिन केंद्रों पर भेजा गया, वहां पर मौरंग और मिट्टी के सहारे वजन बढ़ाए जाने की शिकायतें लगातार आती रहीं. यही नहीं जिले के ज्यादातर केंद्रों पर तोल से कम भूसा देने और खरीद की रसीद अधिक दिखाए जाने के आरोप लगातार लगते रहे हैं. ताज्जुब की बात तो यह है कि जिले के इंगोहटा पौथिया केंद्र पर भूसा पहुंचा ही नहीं. समेरपुर ब्लाक के मुंडेरा केंद्र पर मंडी समिति में 200 जानवर थे. नियमानुसार 12 क्विंटल भूसा पहुंचना था, मगर मात्र 2 क्विंटल ही पहुंच पाया था. इस की शिकायत ग्राम प्रधान संगीता ने जिलाधिकारी से की थी. सिसोलर ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान विजय शंकर ने आरोप लगाया कि उन के केंद्र पर भूसा ले कर गई गाड़ी के चालक ने 40 क्विंटल की रसीद दिखाई जबकि भूसा 25 से 30 क्विंटल ही था. इसी प्रकार इचौली केंद्र में 41 क्विंटल 5 किलोग्राम की रसीद दिखाई थी, लेकिन भूसा 30 क्विंटल ही निकला. इस तरह हुई धांधलियों की एक लंबी सूची है. यह तो उदाहरण भर है, जबकि हालात इस से भी ज्यादा खराब हैं. बुंदेलखंड राहत पैकेज के नाम पर केंद्र सरकार ने भी 3606 करोड़ रुपए दिए हैं. वहीं दूसरी ओर इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड राहत के लिए लुभावना बजट बनाया है. बुंदेलखंड व विंध्य क्षेत्र में सतह आधारित ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं के लिए बजट में 500 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं. मगर ऐसी ही लूटखसोट बनी रही तो इन रकमों के सही इस्तेमाल से पशुओं व किसानों की दशा नहीं सुधर सकती.

क्या बोले जिम्मेदार

इस संबंध में हमीरपुर के मुख्य पशुचिकित्साधिकारी जेएन पांडेय इन बातों से पल्ला झाड़ते हुए कहते हैं कि सेंटरों पर भूसा पहुंचा दिया गया है. जहां पर भूसा कम होता है, वहीं पर भेजा जा रहा है. इसी तरह झांसी मंडल के अतिरिक्त पशुपालन निदेशक डा. प्रकाश चंद वर्मा ने भूसा धांधली को सिरे से खारिज करते हुए कहा, ‘दरअसल, यह भूसा केवल सीमांत और खेतिहर किसानों के जानवरों के लिए है. बड़े किसानों को इस का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिस की वजह से हल्ला मचाया जा रहा है.’

कैसे होगा सुधार

केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से जो योजनाएं बनाई गई हैं, केवल वही सही तरीके से लागू हो जाएं तो बुंदेलखंड की सूरत बदल सकती है. असल समस्या तो यही है कि योजनाएं तो बन रही हैं, मगर सही तरीके से लागू नहीं हो पा रही हैं. पशुओं के चारे और दवाओं में हेराफेरी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से सख्ती से पेश आ कर कठोर दंड देना चाहिए जिस से फिर ऐसी धांधली सुनने को न मिले. बुंदेलखंड में सूखा जरूर पड़ता है, मगर एक अनुमान के मुताबिक वहां 600 मिलीमीटर सालाना बरसात होती है. बरसात के इस पानी को अच्छी तरह से इकट्ठा करने की कोशिश होनी चाहिए, जिस से जल स्तर बेहतर बन सके. जल स्तर बेहतर होने पर सिंचाई के अभाव में फसलें सूखेंगी नहीं. और जब फसलें नहीं सूखेंगी तो हर तरह की तबाही खुदबखुद थम जाएगी.

थानेदार का बंपर ड्रा

थानेदार साहब की पत्नी की फरमाइशें रोजाना बढ़ती जा रही थीं. वे परेशान थे, आखिर करें तो क्या करें? इधर लोगों में बहुत जागरूकता आ गई थी. थोड़ी भी आड़ीटेढ़ी बात होती कि ‘मानवाधिकार आयोग’ को फैक्स कर देते थे. कुछ उठाईगीर तो आजकल मोबाइल फोन पर रेकौर्डिंग कर के उन्हें सुना भी देते थे. एक बार तो थानेदार साहब अपनी फेसबुक पर थे कि अचानक एक वीडियो दिखा. उन्हें लगा कि यह तो किस्सा कहीं देखा है. उस वीडियो की असलियत यही थी कि थानेदार साहब एक शख्स को पंखा बना कर लात, जूतों, डंडे से मार रहे थे. थोड़ी देर बाद जब जूम कर के कैमरा थानेदार के चेहरे पर गया, तो पता चला कि अरे, यह तो वे खुद ही हैं. कुछ महीने पहले उन्होंने एक अपराधी को जेब काटने पर मारा था और उस से जेबकटी का अपना हिस्सा मांगा था. पर उस ने नहीं दिया था, तब उसे पंखे पर लटका कर पिटाई की थी.

यह वीडियो वही था. इसी के चलते उन का तबादला हो गया था. वे तो शानदार सैटिंग वाले थे, हमेशा मंदिर में भिखारी से ले कर पुजारी और भगवान को चढ़ावा चढ़ाते थे, जिस की बदौलत लाइन हाजिर नहीं हो पाए थे. बात वैसे इतनी सी थी कि एक जेबकटी की रिपोर्ट आई थी. रिपोर्ट करने वाले बंदे ने बताया कि 6 हजार रुपए निकाले गए थे. बाजार का दिन था और उस दिन जेबकटाई का ठेका पोटा को दिया गया था. उसे पकड़ कर जब पूछा गया, तो उस ने कसम खा कर कहा था कि कुल जमा 8 सौ रुपए थे. अब सच्चा कौन था और झूठा कौन था, पता नहीं. बस, यही बात पता करने के लिए उसे पंखे पर लटका कर कुटाई की थी और सच की खोज को आम कर देने के चलते थानेदार साहब बदनाम हो गए थे.

बाद में पता चला कि जिस की जेब कटी थी, वही झूठ बोला था. उस की घर वाली ने साड़ी खरीदने के लिए रुपए जेब से निकाल लिए थे. थानेदार साहब की बहुत इच्छा हुई कि पोटा से माफी मांग लें. लेकिन वरदी के घमंड के चलते वे ऐसा नहीं कर पाए, क्योंकि पोटा ने बारबार कहा था, ‘सर, बेईमानी के काम में ईमानदारी बहुत जरूरी है. मैं ईमानदारी से बता रहा हूं.’ लेकिन जो होना था, वह हो ही गया था. पर आज तक वे जान ही नहीं पाए थे कि आखिर किस ने वीडियो शूट किया था, क्योंकि आजकल तो पैन में भी शूटिंग की सहूलियत आने लगी है. जो नया थाना मिला था, वहां के भूखेनंगे, अमीर सब अच्छे दिनों की औलाद थे. उम्मीद से भरे हुए. महात्मा गांधी की बातों पर चलने वाले कि मामला आपस में सुलझा लो बेहतर है, इसलिए रिपोर्टारिपोर्टी कुछ होती नहीं थी. थानेदार साहब को हैरत थी कि आखिर ऐसी अहिंसक जगह पर थाना खोलने की जरूरत क्या थी? जिंदगी में अगर आप एक बार जो खर्चा करने लगें, उस पर लगाम लगाना अगले जन्म में ही मुमकिन है. पत्नीजी को जो खर्च की आदतें लग गई थीं, वे कम होने का नाम ही नहीं लेती थीं. रिश्तेदार भी भिखारियों की तरह आ कर जीजाजी, मामाजी कहते हुए महीनों तक पड़े रहते थे. ऐसे में माली हालत भिखारियों जैसी हो जाना जायज थी.

थानेदार साहब ने पुराने घाघ अपने हवलदार को बुला कर पूछा, ‘‘यहां कुछ महीने और रहा, तो पैंटशर्ट उतार कर तीरथ जाना होगा.’’ हवलदार ने उन्हें तसल्ली दी और अच्छे दिनों का वास्ता देते हुए कहा, ‘‘इतंजार का फल मीठा होता है. आप इंतजार करें.’’ बिल्ली के भाग्य से छींका टूट भी गया. मामला कुछ ऐसा हुआ कि कहीं एक लड़के और लड़की का चोंच लड़ाने का मामला था. कहानी में अमीरीगरीबी की जगह जातपांत आ गई. लड़की वालों ने कहा कि ‘प्राण जाए पर जाति न जाए’ और लड़के को प्यार से बुला कर समझाया, मनाया और जब उस के दिमाग में बात नहीं गई, तो एक लट्ठ जो दिया तो वह मजनू ऐसा गिरा कि खड़ा ही नहीं हो पाया.

उसी दिन एक रिपोर्ट और आई कि एक घर में सेठसेठानी के यहां 2 लोगों ने बंदूक की नोक पर लूटमार कर ली थी. दोनों की रिपोर्ट आ गई और थानेदार साहब ने जांच के लिए एक हवलदार को लगा दिया. इधर पिछले हफ्ते घरवाली ने नोटिस दे दिया था कि अगर कुछ कमाई नहीं की, तो वह मायके चली जाएगी. उसी समय यह सुनहरे 2 केस हो गए. थानेदार साहब ने हवलदार को अपने कमरे में बुला कर खास हिदायत दी, ‘‘पहले लूट वाले केस को सुलझाते हैं. हत्या वाला तो आईने की तरह साफ है.’’ हवलदार थानेदार से ज्यादा शातिर था और उस ने करतब दिखाना शुरू कर दिया. जहां डकैती हुई थी, उस गांव के और उस गांव से लगे 10 गांवों के उठाईगीरों, गुंडों के अलावा शरीफ घरों के एक दर्जन लड़कों को पकड़ लिया. थाने के नाम से उन सब को ठंड लगने लगी थी. दिल्ली से और कुछ के लोकल विधायक, सांसद के फोन आने लगे. जिन के फोन आए, उन्हें एक अलग कमरे में बिठा कर ‘चाय का आर्डर’ करवा दिया. चाय के बाद उन से माफी मांगते हुए एक घंटे और रुक कर कानून की मदद करने की गुजारिश की.

चाय की रिश्वत से ही लड़के मान गए और शांति के साथ मोबाइल पर फिल्में देखने लगे. जिन के फोन नहीं आए थे, उन्हें एकएक कर के कमरे में ले गए और उन्हें बताया गया कि इस मुकदमे की जमानत नहीं होती है और वकील की फीस में 50 हजार खर्च होंगे, फोकट में बदनामी और होगी. टुच्चे पत्रकार चटकारे लेले कर खबर छापेंगे सो अलग. हवलदार ने थानेदार साहब के सामने ऐसा दिल दहला देने वाला सीन पेश किया कि सब की घिग्घी बंध गई. कुछ प्रवचन सुन कर रोने लगे, कुछ थानेदार साहब के पैरों में गधे की तरह लोटपोट हो गए. हैरत की बात यह थी कि 2 आदमियों ने लूटा और बुलाया गया था 80 को. 20 थाने में फोन से छूट गए थे. अब जो रकम थी, वह 60 लोगों से ही वसूल करनी थी. उन के मोबाइल, पैन, चश्मे सब उतार कर गुप्त जांच कर ली गई थी और थानेदार साहब कहीं से 2 नंगे तार ले आए, उन्हें बिजली के स्विच में डालते हुए बोले, ‘‘इसे छुआने के बाद जो 750 वोल्ट का करंट लगेगा, तो देश में आबादी रुक जाने में तुम सहयोगी हो जाओगे.’’ तार देख कर भविष्य की चिंता कर के आखिर वे सबकुछ देने को तैयार हो गए, जिस की मांग रखी गई थी. कुछ कमजोर, नंगे लोग भी थे. कुल जमा तकरीबन 3 लाख रुपए की कमाई हो गई और 20 हजार हवलदार, पत्रकारों को और ऊपर भिजवाने के बाद भी 2 लाख का मुनाफा हो गया था. जो 2 लुटेरे थे, वे अभी भी खोजे जाने बाकी थे. वैसे, पूरी लूट 10-20 हजार रुपए की हुई थी. दूसरा केस तो इश्कमुहब्बत का था. शहर के सब आशिकों को पकड़ कर थाने ले आए और मर्डर केस के बारे में जो मुगलेआजम से ले कर प्रेम कहानी के आखिर तक कहानी सुनाई गई, तो आशिकों ने मां कसम खा कर कहा, ‘वह हमारी बहन जैसी हैं.’ ‘‘तब ही तो सालो, तुम ने अपने जीजा का मर्डर कर दिया,’’ थानेदार साहब ने गुस्से में कहा. सब प्रेमी माथा ठोंकने लगे, ‘कैसे मुंह से बहन शब्द निकल गया. मर्डर केस में मिली उम्रकैद में कैसे जवानी अंधेरे में डूब जाएगी…’

उस महाकाव्य को हवलदार ने पढ़ कर सुनाया, तो सब थरथर कांपने लगे और इस केस में भी थानेदार साहब ने 6 लाख रुपए दक्षिणा में लिए थे. हत्यारे तो पहले से ही पता थे. उन का केस कमजोर करने के नाम पर एकएक लाख रुपए अलग से लिए और मामला मारने का नहीं, बल्कि एक हादसे का बना दिया गया था. जिनजिन को थानेदार साहब ने लूट या हत्या में बुलवाया था और छोड़ दिया था, वह सब उन के गुण गाते थक नहीं रहे थे और कुछ ने जो चाय पी लेने के बाद घर का रास्ता नापा था, वे भी खुश थे. कुछ छोटीमोटी शिकायत हुई भी तो विधायक, सांसद ने वे शिकायतें कचरे के डब्बे में फेंक दीं. वे थानेदार साहब का एहसान भूले नहीं थे कि उन के फोन करते ही थानेदार साहब ने चाय पिला कर उन्हें इज्जत के साथ छोड़ दिया था. थानेदार साहब बहुत खुश थे कि चलो, उन का लकी बंपर ड्रा खुल गया था. वे इंतजार कर रहे थे, ‘काश, ऐसी लौटरी हर महीने खुलती रहे, तो नीचे से ऊपर तक सब खुश रहेंगे. दुनियादारी निभाना इसी को तो कहते हैं.’ थानेदार साहब आजकल बहुत खुश हैं और नई बंपर लौटरी का इंतजार कर रहे हैं.

औनलाइन डेटिंग: रिफ्रैशमेंट का नया फंडा

लाईफ में गम और खुशियां दोनों ही हैं और ये आप पर निर्भर है कि आप लाईफ को किस तरह से एंजौए करते हैं. जब तक गम का स्वाद नहीं चखेंगे तो खुशियों की वैल्यू पता ही नहीं चलेगी. पर आजकल के तनाव भरे माहौल में खुश रहने के लिए कितनी भी कोशिश कर लें मुश्किल है. लेकिन आज की जनरेशन ने खुश रहने के लिए बेहतर तरीका ढूंढ़ निकाला है और वो है औनलाइन डेटिंग.

बैटर रिलेशनशिप के लिए लिखी गई एक बुक के राइटर स्यू औस्टर कहते हैं कि फ्लर्टिंग से न केवल किसी इंसान को अच्छा फील होता है बल्कि उस का स्ट्रैस लेवल भी कम होता है.

दें पौजिटिव ऐनर्जी

किसी से बात कर के मन हलका हो जाता है. वहीं हैक्टिक काम के बीच में आप अचानक रिफ्रैश हो जाते हैं. साथ ही यह आप की लाइफ में एक नया उत्साह खुशी भी लाती है. जिस से आप को पोजिटिव एनर्जी मिलती है.

हौलैंड में 76 कपल्स पर हुई एक स्टडी से यह बात साबित हुई कि ऐसे कपल्स अपनी सैक्स लाइफ को भी खूब ऐंजौय करते हैं. उन की जिंदगी में सैक्स और रोमांस जैसी चीजें खासतौर पर जगह बना लेती है.

औनलाइन डेटिंग से पाएं ड्रीम पार्टनर

औनलाइन डेटिंग से लाइफ तो एंजौए होती ही है साथ ही अगर आप अनमैरिड हैं तो हो सकता है फ्लर्टिंग के दौरान आप को अपना ड्रीम पार्टनर ही मिल जाए. आप उस से अपने मन की बात भी शेयर कर सकते हैं. जो आप औफिस में अपने कलिग्स या फैमिली मैंबर्स से शेयर नहीं कर पाते हैं.

प्रोफेशनल लाइफ हो आसान

यही नहीं, इस से आप अपनी प्रोफेशनल लाइफ में भी अच्छा महसूस करते हैं. एक सर्वे के मुताबिक, मात्र 5 मिनट की औनलाइन फ्लर्टिंग काम में संतुष्टि की भावना देती है. खुश रहने का ये फंडा पसंद है तो देर किस बात की. सिर्फ एक क्लिक पर बैठेबिठाए अपने मूड को रिफ्रैश कर डालिए. जिंदगी को खुशियों से भर डालिए.

लाइफ की सेकेंड इनिंग

यों तो उम्र का हर मोड़ खूबसूरत होता है. लेकिन आमतौर पर ओल्ड एज को लेकर लोग अच्छे विचार नहीं रखते. जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है, बुढ़ापे की चिंता सताने लगती है. लेकिन कई लोग इसे जिंदगी की नई शुरुआत मानते हैं. उन का मानना है कि समय के साथ सभी को उम्र के इस अनचाहे दौर से तो गुजरना ही है तो क्यों न जिंदगी के इस दौर को खुल कर जिया जाए.

एक टीवी शो पर कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला. एक पोती अपनी दादी के साथ शो में हिस्सा लेने आई थी. शो के दौरान दादी ने भी शो का हिस्सा बनने की इच्छा जताई. जज उन का उत्साह देख कर उन्हें मना नहीं कर सके. दादी जब स्टेज पर परफार्म करने लगी तो लोग देखते रह गए. दादी का इस उम्र में इतना अच्छा डांस. वाकई काबिलेतारीफ था. दादी ने बताया कि मैं ने बचपन में डांस सीखा था लेकिन परफार्म करने का मौका आज मिला.

यह तो सिर्फ उदाहरण है. ऐसी प्रतिभा हर किसी में होती है. जो समय के साथ धूमिल पड़ जाती है. यंग ऐज में घर की जिम्मेदारी और नौकरी के चक्कर में अक्सर महिलाएं अपने शौक को भूल जाती हैं या नजरअंदाज कर देती हैं इस का कारण और चीजों को प्राथमिकता देता है. घर, बच्चे पति के चक्कर में फंस कर वो अपने सपनों का गला घोंट देती है, पर अब ऐसा नहीं है. अपने सपने और शौक को जिंदगी की सेकेंड इनिंग में पूरा करें जब सभी जिम्मेदारियां पूरी हो जाए अपने उस शौक को जिंदगी के इस मोड़ पर फिर से निखारने का काम करें क्योंकि अगर घर बैठ गए तो बेकार की ऊलजलूल बातों में आप अपना समय गंवा देंगी और घर की घर में ही रह जाएंगी. जिंदगी का ये खास मोड़ जिंदगी को नए नजरिए से देखेन ओर समझने का है. इसलिए जिंदगी की आखिरी सांसों तक घर और बाहर अपना इंर्पोटेंस बनाए रखें क्योंकि जिंदगी न मिलेगी दोबारा, हर पल को जीने का जज्बा रखिए.

काश, सलमान खान जरा संवेदनशील होते…!

माना, सलमान खान ने फिल्म ‘सुलतान’ के लिए कड़ी मेहनत की है. लेकिन अपनी मेहनत जताने का यह भला क्या तरीका हुआ…! यह भी सही है कि बलात्कार की शिकार किसी महिला का दर्द जानने के लिए बलात्कार का शिकार होना जरूरी नहीं. पर इस। बात में कोई दो राय हो नहीं सकती कि कड़ी से कड़ी मेहनत की तुलना कम से कम बलात्कार की शिकार महिला की पीड़ा से तो नहीं ही की जा सकती है. अगर कोई ऐसा करता है तो निश्चित तौर पर वह विकृत मानसिकता वाला ही इंसान होगा.

देश की छवि को लगा धक्का

सलमान के इस बयान से देश की छवि खराब भी हुई है. अमेरिका के अखबार ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने तो यहां तक लिख दिया है कि सलमान खान का बयान भारत की ‘बलात्कारी संस्कृति’ का ही प्रतिनिधित्व करता है. अखबार लिखता है कि भारत में बलात्कार की घटना आए दिन घटती है, लेकिन बलात्कार को लेकर हर रोज आपत्तिजनक बयान भी आते हैं। हाल ही में बौलीवुड स्टार सलमान खान के बयान का श्रेय इसी संस्कृति की देन है. वाशिंगटन पोस्ट ने सलमान खान को बौलीवुड का ‘बैड ब्वौय’ भी कहा है.

वैसे सलमान हैं तो शो बिजनेस की चकाचौंधवाली दुनिया से, लेकिन अपनी ही दुनिया की चकाचौंध से इनकी आंखें चौंधिया गयी हैं. रटा-रटाया डायलौग बकते-बकते इनका दिमाग सुन्न पड़ गया है. अपनी भावना को जाहिर करने के लिए इनके पास शब्द नहीं है. दरअसल, इनके पास कोई सोचने-समझने की ताकत जवाब दे चुकी है. कब, कहां, क्या बोलना चाहिए – इसकी तमीज भी नहीं रह गयी है. लगता है 50 साल में ही सलमान सठिया गए हैं.

कुछ का मानना है कि अपनी फिल्म सुलतान को हिट कराने का यह एक फंडा होगा. लेकिन अगर यह फंडा इस वजह से अपनाया गया है तो अव्वल तो यह बहुत ही घटिया फंडा है. दूसरे इसका उलटा होने का भी खतरा हो सकता है. महिलाएं फिल्म का बायकाट भी तो कर सकती हैं. बल्कि करना ही चाहिए.

पंगे का फंडा

सलमान अब तक कइयों को सबक सीखाते रहे हैं. यह क्या बात हुई कि अकेले सलमान खान सबको सबक सीखाने का ठेके ले रखेंहाल ही में गायक अरिजीत सिंह को सलमान ने सबक सिखाया. बताया जाता है कि सलमान खान की मेजबानी में अवार्ड लेने पहुंचे अरिजीत ने एक नहीं दो-दो गुस्खाफ कर दी थी. एक तो सामान्य पकड़े में पहुंचे, दूसरा अवार्ड फंक्शन में सो गए. जब अरिजीत का नाम पुकारा गया तो किसीने उन्हें नींद जगाया. स्टेज में सलमान ने अरिजीत की क्लास ले ली. पहले तो कहा, तू है विजेता? देखो चप्पल में अवार्ड लेने पहुंच गया. और फिर सलमान ने अरिजीत के अवार्ड फंक्शन में सो जाने पर सवाल उठाया. जवाब में अरिजीत ने हलके-फुलके अंदाज में कहा दिया, ‘आपलोगों ने सुला दिया. यह बात सलमान को नागवार गुजरी. और लगातार अरिजीत को अपमानित करते रहें.

यहां तक कि सुलतान फिल्म में संगीतकार विशाल-शेखर द्वारा संगीतबद्ध किए गाने को फिल्म से निकलवा दिया. इसी कड़ी में ‘किक’ और ‘बजरंगी भाईजान’ का भी नाम आता है. अरिजीत सिंह की एक मासूम-सी गलती पर उन्हें बार-बार सजा दी गयी. वैसे जाने क्यों, सलमान खान कुछ गायकों से पहले भी भिडंत होती रही है. इस फेहरिस्त में सोनू निगम, हिमेश रेश्मिया से लेकर एआर रहमान तक शामिल हैं. रहमान को तो सलमान खान ने औसत दर्जे का संगीतकार तक बता दिया था. इसी तरह विवेक ओबेराय को भी ऐश्वर्या का पक्ष लेने के लिए काफी दिनों सबक सीखाते रहे. जब कभी सलमान खान किसीसे नाराज हुए, उसका कैरियर चौपट करने पर तूल गए. वह अरिजीत सिंह हों या विवेक ओबेराय. वैसे यह सब करके सलमान खान ने अरिजीत सिंह, विवेक ओबेराय और हिमेश रेशमिया से माफी मंगवा चुके हैं.

भाईजान के कारनामे

अब सलमान खान की बारी है. इन्हें भी तो सबक सीखाना चाहिए. ये तो बार-बार बड़ी-बड़ी गलती करते रहे हैं. फिर वह काले हिरण का शिकार हो या नशे में धुत होकर फुटपाथी पर सोये लोगों पर गाड़ी चढ़ देना.

·       1999 में हम साथ-साथ हैं फिल्म की जोधपुर में शूटिंग के दौरान लुप्प्राय काले हिरण का शिकार

·       2002 में नशे में धुत होकर फुटपाथ पर सोये लोगों पर गाड़ी चढ़ा देने का आरोप लगा. इस मामले में एक व्यक्ति मारा गया था और चार घायल हुए थे. निचली अदालत ने इन्हें दोषी पाया था और पांच साल की सजा सुनायी थ. फिर मुंबई हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया.

·       2002 में ऐश्वर्या राय को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के लिए सुर्खियों में आए. रात तीन बजे तक ऐश्वर्या के घर का दरवाजा पीटना, 13 माले से कूद कर जान देने की धमकी, आए दिन मार-पीट. एक बार तो ऐश्वर्या एक अवार्ड फंक्शन टूटे हाथ के साथ पहुंची थीं.

·       2003 ऐश्वर्या के लिए सलमान खान से भिड़नेवाले विवेक ओबेराय के साथ उलझने के कारण एक बार फिर से सुर्खियों में आए. इसी साल 1 अप्रैल को टीवी में पूरे देश के सामने विवेक ओबेराय ने सलमान और ऐश्वर्या का झगड़ा आम किया. इसके बाद सलमान ने विवेक को एक रात में 41 बार फोन किया और जान से मारने की धमकी दी.

·       2008 में कटरीना कैफ की जन्मदिन की पार्टी में शाहरूख खान के साथ मारपीट.

·       2010 में 28/11 के हमले पर एक पाकिस्तानी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में सलमान खान में कह डाला कि पहले ही हमारे यहां हमले होते रहे हैं. लेकिन इस बार अमीर लोग निशाने पर आए तो सब जगह हायतौबा मच गयी. सलमान के इस बयान की खूब निंदा हुई.

·       2013 बिग बौस का संचालन के दौरान एक प्रतिभागी को लेकर सलमान खान पर पक्षपात करने का आरोप लग चुका है. मामला जब बहुत तूल पकड़ा तो सलमान खान ने बिग बौस के अगले सीरिज से अलग रहने का बयान दिया. पर ऐसा हुआ नहीं.

·       2014 में मोदी की सरकार बनने पर सलमान ने मोदी की तारीख के पुल बांधने लगे. उन्होंने मोदी को महान शख्सियत बताया था. और मकर संक्रांति पर मोदी के साथ पतंग की उड़या. इस पर देश का मुसलमान वर्ग खफा हो गया और मुसलमानों के एक बड़े तबके ने ‘जय हो’ का बहिष्कार किया. 

करें सलमान, भरें सलीम

सलमान खान की गलतियों पर पिता सलीम खान माफी मांगते रहे हैं. गोया 50 साल के बच्चे की गलती पर पिता का माफी मांगना कहां तक जायज है. पब में एक पार्टी के दौरान सलमान खान ने हलकी-सी बहस के दौरान रणवीर कपूर को थप्पड़ मारा, हालांकि उस समय रणवीर कपूर का फिल्मी सफर शुरू नहीं किया था. रणवीर पार्टी छोड़ कर तुरंत निकल गए. सलीम खान को जब इसकी खबर हुई तो वे ऋषि कपूर के घर पहुंच गए माफी मांगने. बलात्कारवाले बयान के लिए भी सलीम खान पूरे परिवार की ओर से माफी मांगने चले आते हैं. काश, उन्होंने अपने बेटे को ऐसी ‘तबीयत’ देते कि बार-बार उन्हें माफी मांगने की जरूरत नहीं पड़ती! या फिर ऐसी परिवरिश दी होती ताकि सलमान जरा संवेदनशील बनते! हालांकि उनके संवेदनशीलता का ढिंढ़ोरा खूब पीटा जाता है. उनके समाजिक कार्यों का बखान मीडि़या में बढ़-चढ़ कर किया जाता है. उन्हें दानवीर कर्ण की तरह पेश किया जाता है. पर नजर आता कुछ ओर है.

स्टार्टअप्स के लिए 10,000 करोड़ के फंड को मंजूरी

सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी है. इस फंड का इस्तेमाल स्टार्टअप्स को सपोर्ट करने में किया जाएगा, जिसका मकसद 18 लाख लोगों के लिए रोजगार पैदा कराना है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस फंड के पूर्ण इस्तेमाल के जरिये करीब 18 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सकेगा. 10,000 करोड़ रुपये के एक फंड से 60,000 करोड़ रुपये का इक्विटी निवेश और इससे दोगुना डेट इनवेस्टमेंट हासिल किया जा सकेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया. बयान में कहा गया है, 'मंत्रिमंडल ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) में स्टार्टअप के लिए फंड तैयार करने की मंजूरी दे दी है. यह फंड ऑल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड्स (एआईएफ) में योगदान करेगा, जो सेबी के पास रजिस्टर्ड है. बाद में एआईएफ स्टार्टअप की फाइनैंसिंग करेगा. यह सरकार द्वारा जनवरी में घोषित स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान के अनुरूप है.

यह फंड 14 और 15वें फाइनेंस कमिशन के साइकल के दौरान बनाया जाएगा, जो योजना की प्रगति और फंड की उपलब्धता पर निर्भर करेगा. 2015-16 में एफएफएस के फंड के लिए पहले ही 500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जबकि 600 करोड़ रुपये 2016-17 में उपलब्ध कराए जाएंगे. बयान में कहा गया है कि डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) द्वारा सकल बजटीय समर्थन के जरिए ग्रांट का भी प्रावधान किया है. डीआईपीपी स्टार्टअप इंडिया कार्रवाई योजना के तहत परफॉर्मेंस की निगरानी और समीक्षा करेगा.

इसमें आगे कहा गया है कि रोज-ब-रोज के ऑपरेशनल मैनेजमेंट के लिए सिडबी की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाएगा. परफॉर्मेंस की निगरानी और अमल को कार्रवाई योजना से जोड़ा जाएगा, जिससे समय पर काम को अंजाम दिया जा सके. स्टार्टअप्स को डोमेस्टिक पूंजी उपलब्ध नहीं होने और परंपरागत बैंक फाइनैंसिंग में अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है. इस लिहाज से यह बेहद अहम है.

मैरी कॉम का सपना टूटा, रियो में ‘नो एन्ट्री’

पांच बार की महिला विश्व चैम्पियन और लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय मुक्केबाज मैरी कॉम इस साल रियो ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाएंगी, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ (आईओसी) ने मैरी कॉम के लिए वाइल्ड कार्ड की गुज़ारिश को नकार दिया है.

आईओसी के मुताबिक पिछले दो ओलंपिक खेलों में जिस देश के आठ या उससे ज़्यादा मुक्केबाज़ शामिल हुए थे, उन्हें वाइल्ड कार्ड नहीं दिया जाएगा. पिछले दोनों ही खेलों में भारत के आठ या आठ से ज्यादा मुक्केबाज शामिल थे, इसलिए मैरी कॉम की वाइल्ड कार्ड की गुज़ारिश को ठुकराया गया.

भारतीय मुक्केबाज़ी एडहॉक कमेटी के चेयरमैन किशन नारसी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघ के इस फैसले को हमें मानना ही होगा.

इस नए नियम के पीछे अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ का मकसद यह है कि नए मुल्कों में इस खेल को और बढ़ावा मिले. और वाइल्ड कार्ड उन्हीं देशों के मुक्केबाज़ों को दिया जाए, जिन्हें पिछले कुछ खेलों में ज़्यादा नुमाइंदगी नहीं मिली है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें