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थ्री इडियट्स का घटिया वर्जन है ‘रफ बुक’

भारतीय शिक्षा प्रणाली को लेकर अब तक कई फिल्में बन चुकी हैं. कुछ वर्ष पहले राज कुमार हिरानी व विधु विनोद चोपड़ा शिक्षा प्रणाली पर कटाक्ष करने वाली बेहतरीन फिल्म ‘‘थ्री इडियट्स’’ लेकर आए थे. अब शिक्षा प्रणाली पर ही कटाक्ष करने वाली फिल्म ‘‘रफ बुक’’ लेकर आए हैं फिल्मकार अनंत नारायण महादेवन. अति सुंदर लोकेशन पर फिल्मायी गयी फिल्म ‘‘रफ बुक’’ में फिल्मकार ने वर्तमान परिवेश में रखते हुए मोबाइल व गूगल सर्च की बात करते हुए शिक्षा के मायने समझाने का प्रयास किया है, पर वह अपनी इस फिल्म में इस अति संजीदा विषय पर कुछ नया नहीं कह पाए.

फिल्म की कहानी के केंद्र में फिजिक्स यानी कि भौतिक शास्त्र की शिक्षक संतोषी (तनिष्ठा चटर्जी) हैं. वह पुस्तक प्रेमी हैं. जिनके पति प्रदीप (विनय जैन) इंकम टैक्स विभाग में हैं. वह एक स्कूल में फिजिक्स पढ़ा रही हैं. सब कुछ ठीक चल रहा होता है. मगर अचानक संतोषी की जिंदगी में तूफान आ जाता है, जब उनके घर में इनकम टैक्स का छापा पड़ता है और उनकी किताबों के पीछे उनके पति प्रदीप द्वारा छिपाए गई नकद रकम बरामद होती है. इससे वह आहत होकर अपने पति प्रदीप को तलाक देने का निर्णय लेकर अपनी मां (सुहासिनी मुले) के पास चली जाती हैं, जहां उनकी मां छोटे बच्चों को पढ़ाती हैं. पर संतोषी की मां उसे समझाकर वापस शहर भेज देती है कि स्थितियों को सुधारने का प्रयास किए बिना हार मान लेना गलत है.

तब संतोषी पुनः वापस शहर आ जाती है. इस बार उसकी यात्रा बहुत कठिन दौर से गुजरती है. पर इस बार उसे दूसरे कालेज में नौकरी मिलती है. जहां उसे 12वीं कक्षा के उन विद्यार्थियों को पढ़ाने का जिम्मा मिलता है, जो कि 40 से 45 नंबर से पास होते आए हैं ,जिनकी पढ़ने में रूचि ही नही है. इस कालेज के प्रिंसिपल सहानी (कैजाद काटवाल) की शिक्षा को लेकर अलग सोच है. वह चाहते हैं कि हर साल उनक स्कूल के ही विद्यार्थी टॉप पर आए. इसीलिए उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा परीक्षा में पाए गए नंबरों के अनुसार अलग अलग डिवीजन बनाए हैं.

संतोषी की कक्षा में सुहेल (सुहेल कपूर) चार्मिंग लड़का है, पर वहीं कक्षा में बदमाशी करने वालों का नेता है. पहले ही दिन वह गूगल करके बताता है कि संतोषी का अपने पति से तलाक का मुकदमा चल रहा है. इसे सकारात्मक ढंग से लेते हुए संतोषी इन विद्यार्थियों को किताबी कीड़ा बनाने की बजाय मनोरंजन के साथ पढ़ाना शुरू करती है और फिर उन्हे लगता है कि इन्हे तो बेसिक ही नही पता है. तो वह उन्हे बेसिक पढ़ाना शुरू करती हैं, जिसके चलते उन्हे कालेज से निकाल दिया जाता है. पर अब तक विद्यार्थी समझ चुके होते है कि उन्हे किस तरह पढ़ाई करनी है, तो वह सब प्रिंसिपल साहनी के विरोध के  बावजूद संतोषी के पास कोचिंग लेने आ जाते हैं.

संतोषी के दूसरे मित्र, जो कि शिक्षक हैं, इन विद्यार्थियों को दूसरे विषय पढ़ाना शुरू करते हैं. अंत में पता चलता है कि प्रिसिंपल साहनी को अपने जिस विद्यार्थी पर कालेज का नाम रोशन करने का गर्व था, उसे आईआईटी में प्रवेश नहीं मिलता, जबकि संतोषी के पास पढ़ने वाले सभी बच्चे आईआईटी में प्रवेश पा जाते हैं.

फिल्मकार अनंत नारायण महादेवन इस बात को लेकर खुश हैं कि उनकी यह फिल्म कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में धूम मचा चुकी है, पर बाक्स आफिस पर यह फिल्म दर्शक जुटानें में सफल हो पाएगी, ऐसा नहीं लगता.

फिल्म में संतोषी व उनके पति प्रदीप की कथा का औचित्य समझ से परे हैं. इंटरवल से पहले फिल्म थोड़ी सी रोचक है, पर इंटरवल के बाद सब गडमड सा हो जाता है. शिक्षा प्रणाली जैसे संजीदा विषय पर बनी कई फिल्मों के मुकाबले यह फिल्म काफी कमजोर है. वह शिक्षा प्रणाली की कमियों, शिक्षकों की आपसी रंजिश व प्रतिस्पर्धा, स्कूल व कालेज प्रबंधक की धन कमाने की लालसा, शिक्षा के बाजारीकरण जैसे मुद्दों को बहुत सतही स्तर पर छूते हुए निकल जाते हैं. जिस परिणामतः फिल्म दर्शकों पर कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाती.

तनिष्ठा चटर्जी ने बेहतरीन अभिनय किया है. राम कपूर को जाया किया गया है. बाकी कलाकारो का अभिनय भी ठीक ही रहा. जे सी चौधरी व आकाश चौधरी निर्मित फिल्म ‘‘रफ बुक’’ के लेखक संजय चौहान, निर्देशक अनंत नारायण महादेवन तथा कलाकार हैं- तनिष्ठा चटर्जी, विनय जैन, सुहासिनी मुले, राम कपूर, जयति भाटिया, जाय सेन गुप्ता, दीपिका अमीन, कैजाद कोटवासल, विवेक वासवनी व अन्य.

ट्विटर का अपने यूजर्स को नायाब तोहफा

सोशल नेटवर्किंग साइट्स के बीच कॉम्पीटिशन काफी टफ है. बाजार में बने रहने के लिए इन्हें खुद से ही प्रतिस्पर्धा करना होता है कि ये क्या कुछ अच्छा दे कर अपने यूजर्स को जोड़े रख सकते हैं. इन सब में  फायदा कॉमन यूजर्स का ही होता है.

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने भी इसी दिशा में ये सराहनीय कदम उठाया है.ट्विटर अपने प्रयोगकर्ताओं को ज्यादा लंबी अवधि के वीडियो पोस्ट करने की सुविधा देने जा रहा है. पहले ट्विटर पर 30 सेकेंड की समय सीमा वाले वीडियो साझा किए जा सकते थे लेकिन अब यह समय सीमा बढ़ाकर 140 सेकेंड कर दी गई है.

कंपनी ने यह कदम ज्यादा उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए उठाया है. इसके अलावा कंपनी को वीडियो के मामले में अपनी प्रतिद्वंद्वी फेसबुक से भी कड़ी टक्कर मिल रही है. कंपनी उपभोक्ताओं को ऐसे वीडियो से धन कमाने में भी सहायता कर सकती है.

अंजू बॉबी ने केरल खेल परिषद से दिया इस्तीफा

केरल के खेल मंत्री ई. पी. जयाराजन और उनके पार्टी सहयोगियों के साथ विवाद में घिरी पूर्व महिला ओलम्पिक खिलाड़ी अंजू बॉबी जॉर्ज ने केरल खेल परिषद के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है.

अंजू ने परिषद की बैठक के बाद कहा, “तकरीबन छह महीने पहले मुझे केरल की पूर्व सरकार ने नियुक्त किया था. हमने जब परिषद में अतीत में हुए भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और शोषण को लेकर ऐसे आचरण आयोग को बनाने का फैसला किया जो इन सब मामलों की जांच कर अपना फैसला सुनाएगा, तभी से हालात बदल गए.”

जयाराजन के खेल मंत्री का पद संभालने के मौके पर अंजू उनसे मिलने गईं तो मंत्री ने उनसे कहा कि उनके कार्यकाल में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है.

अंजू ने कहा, “वाम मोर्चा सरकार (2006-11) के दौरान लाई गई खेल लॉट्री केरल के खेल इतिहास की सबसे बड़ी गड़बड़ी है. परिषद के तहत खेलों के आधारभूत ढांचे के विकास में जो काम किए गए उसमें पूरी तरह से भ्रष्टाचार किया गया. सच को सामने आने देना चाहिए.”

अंजू ने कहा कि एक राजस्व अधिकारी होने और काफी जगह घूमने के कारण वह परिषद की फाइल देख कर हैरान थीं. राज्य के लोगों को पता होना चाहिए की परिषद में क्या हो रहा है.

अंजू ने कहा, “खेल को मारा जा सकता है लेकिन खेल शख्सियतों को नहीं. केरल में खेलों के पितामह माने जाते हैं कर्नल जी.वी.राजा और उन्हें परिषद से आंसू बहाते हुए जाना पड़ा था. हमें नहीं लगता कि पद पर बने रहना चाहिए. इसलिए मैं और परिषद के 12 अन्य अधिकारी इस्तीफा दे रहे हैं.”

अंजू ने कहा कि उनके भाई अजित मारकोसे एक कुशल कोच हैं और उन पर जो भी आरोप लगाए गए, वह गलत हैं. अजित पर आरोप है कि कोच बनने के लिए उन्हें परिषद का समर्थन मिला था.

अंजू ने कहा, “भारतीय एथलेटिक महासंघ ने भी कहा था कि अजित एक योग्य कोच हैं. मैं यह साफ कर देना चाहती हूं कि उनकी नियुक्ति परिषद द्वारा नहीं की गई थी, बल्कि पिछली सरकार ने उन्हें नियुक्त किया था. हालांकि आरोपों के चलते उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया है.”

केरल में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि नई सरकार का देश की जानी मानी खिलाड़ी को परेशान करना और अपने पद से इस्तीफा देने पर मजबूर करना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है.

इन तस्वीरों से फिर विवादों में घिर सकती हैं पूनम पांडे

विवादित बयानों और हॉट तस्वीरों को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाली हॉट एक्ट्रैस पूनम पांडे ने अपने फैंस के लिए अपनी शूटिंग की बोल्ड तस्वीरें पोस्ट की हैं. योग के अलावा मैडम कुछ इस तरह अपना समय बिता रही हैं. उन्होंने अपनी कुछ बोल्ड तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिसे पोस्ट करके वह फिर से चर्चा में आ गई हैं. इन तस्वीरों में वह अलग-अलग पोज में दिख रही हैं. यह  तस्वीरें पूनम के फैंस के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं हैं.

बॉलीवुड में ऐसी कई अभिनेत्रियां हैं, जो विवादों से हमेशा दूर रहीं, लेकिन कई ऐसी भी हैं, जिन्हें उनके विवादों के चलते ही बॉलीवुड में एंट्री मिली. इन्हीं एक्ट्रेसेस में एक नाम पूनम पांडे का भी है. पूनम का नाम मॉडलिंग वर्ल्ड से लेकर बॉलीवुड के गलियारों में हर शख्स जानता है. उन्हें पहचान मिलने की बड़ी वजह उनकी कॉन्ट्रोवर्सीज हैं. पूनम को कॉन्ट्रोवर्सी क्वीन के नाम से भी जाना जाता है.

ग्लैमर वर्ल्ड में आने के बाद पूनम ने कई विवाद खड़े किए. ऐसा लगता है कि विवादों में बने रहना इन्हें काफी पसंद है. उनसे जुड़ी कुछ ऐसी ही कॉन्ट्रोवर्सी से आज हम आपको रूबरू कराएंगे.

पूनम पांडे से जुड़ी ज्यादातर कॉन्ट्रोवर्सी उनके ट्विटर अकाउंट और तस्वीरों को लेकर होती रही हैं. अपने ट्विटर अकांउट पर वो कुछ ऐसी पिक्स अपलोड करती हैं, जो चर्चा का विषय बन जाती हैं. उन्होंने इंडियन क्रिकेट टीम को कई बार शुभकामनाएं देने के लिए अपनी बोल्ड तस्वीरों का सहारा लिया. इतना ही नहीं, वो टीम के खिलाड़ियों को बधाई देने के लिए भी कुछ ऐसी ही तस्वीरें अपलोड करती रही हैं.

किंगफिशर कैलेंडर की मॉडलिंग से करियर की शुरुआत करने वाली पूनम पांडे पहली बार सुर्खियों में उस वक्त आई थीं, जब उन्होंने 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान टीम इंडिया की जीत पर सारे कपड़े उतारने की बात कही थी. टीम इंडिया ने फाइनल जीत लिया, लेकिन पूनम ने अपना वादा पूरा नहीं किया. बाद में उन्होंने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि बीसीसीआई ने उन्हें इस बात की अनुमति नहीं दी. हालांकि, उन्होंने भारत-इंग्लैंड सीरीज के दौरान टीम का हौसला बढ़ाने के लिए अपनी एक बोल्ड तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की. इसमें उन्होंने टीम के लिए शुभकामना संदेश भी लिखा था.

पूनम और विवाद

1. फिल्म नशा के रिलीज़ से पहले ही वायरल थी फिल्म के गाने की सुपर हॉट वीडियो, जिसमे पूनम ने सारी हदें पार कर दी थी और दिखाया था प्यार करने का नया तरीका. ये विडियो यूट्यूब पर काफी पोपुलर हुआ था.

2. जब मद्रास हाई कोर्ट ने शादी से पहले सेक्स करने वाले जोड़ों के लिए फैसला दिया की उन्हें अविवाहित ही माना जायेगा, तब पूनम ने ट्वीट किया था “MadrasHC I am Married then ? Hehehehe LOL”.

3. पूनम ने एक बिकनी कांटेस्ट भी रखवाया था. वास्तव में ये सब पापड़ पूनम फिल्म को हिट करवाने के लिए बेल रही थी. ये कांटेस्ट पूनम ने ट्विटर पर आयोजित किया था .

4. पूनम ने एक नशा कांटेस्ट भी रखवाया था, जिसमे लोगों को बताना था की उन्हें किस चीज़ का नशा है. ये भी फिल्म प्रमोशन का हिस्सा था. लकी विनर्स को पूनम से मिलने का मौका दिया गया था.

5. पूनम पाण्डेय को जब बिग बॉस ७ में आने का न्योता दिया गया तो पूनम ने ३ करोड़ रूपये मांगे. पूनम ने ये भी कहा था की वो कभी भी सूरज पंचोली के साथ किसी भी घर में नही रहने वाली.

6. पूनम की सबसे ज्यादा विवादित रही स्ट्रिपिंग विडियो. इस वीडियो में पूनम ने कपडे उतार दिए थे. ये वीडियो काफी चर्चा में रहा और 2011 का मोस्ट ट्रेंडिंग विडियो भी.

रंगभेद का जहर

रंग, जाति, भाषा, धर्म का भेदभाव हमारी रगों में कूटकूट कर भरा हुआ है. एक तरफ देश के कई इलाकों में काले अफ्रीका से आ कर पढ़ने वालों या छोटामोटा काम करने वालों को बेबात में मारा जा रहा है, तो दूसरी तरफ वैसा ही पीले उत्तरपूर्व से आए लड़केलड़कियों के साथ किया जा रहा है. इस देश का रिवाज है, जो अपना नहीं वह तो दुश्मन है. हमेशा से. छुआछूत उसी की देन है या यह छुआछूत की देन है, जो हिंदू धर्म का पहला हुक्म है. दिल्ली में कांगो से आए 5 साल से यहां रह रहे अफ्रीकी मसुंडा किटाडा ओलिवर को पीटपीट कर महज आटोरिकशा में बैठने पर हुए झगड़े में मार डाला. अफसोस की बात है कि मारने वाले मुसलिम युवा हैं, जो खुद रोते रहते हैं कि भारत में अब उन के साथ पराए, दुश्मन सा बरताव होता है.

यह परायापन हमारे देश के हर महल्ले, हर गली, हर गांव में दिख जाएगा. यहां अगर कोई किसी को अपना मानता है, तो सिर्फ अपने गोत्र या जाति वाले को. चूंकि हर जगह एक ही जाति या गोत्र वाले बहुत मिल जाते हैं, एक आवाज लगते ही मारपीट के लिए भीड़ तैयार हो जाती है जो बिना कारण जाने ही मारने लग जाती है. यह देश असल में बेवकूफों का ही है. चाहे अपने गाल कितने ही बजा लें हम हैं बवालों में रहने वाले. एक ही देवी की पूजा करने वाले भी दसियों गुट मारपीट पर उतारू रहते हैं. तेरामेरा, विदेशी, बाहरी, काला, पीला, गोरा, भेंगा, लंगड़ा न जाने किसकिस तरह से हम अपनों को बांट लेते हैं. बांट ही नहीं लेते, जो अपना नहीं वह दुश्मन बन जाता है. हमारा धर्म, रीतिरिवाज हमें अपने अलावा सब को जालिम बनाने में लगे रहते हैं. औरतों को तो यहां परायों से भी ज्यादा पराया माना जाता है और जो मारपीट रोजाना घरों के दरवाजों के पीछे होती है उस की वजह भी वही है, जिस से अफ्रीकी को मारा गया था.

सरकार ने स्कूलों और दफ्तरों में साथ उठनेबैठने की आदत डालनी चाही, पर उस का लाभ सिर्फ सतही रहा. जहां अपनों का साथ मिला वैसे डरे रहने वाले भी खूंख्वार हो जाते हैं. सरकार के कामकाज पर धर्म, राजनीतिक पार्टियां, खाप, पंडों की जंत्रियां पानी फेर देती हैं और अपनेपराए का फर्क ठूंसठूंस कर भर देती हैं.देश में आने वाले विदेशी यहां आमतौर पर डरेसहमे रहते हैं, क्योंकि यहां तो देशवासी को ही कभी भरोसा नहीं होता. लुटेरे हर जगह होते हैं, पर जिस तरह नसनस में लूट, मारपीट, परायापन यहां है, वह और कहीं शायद नहीं. तभी तो  हम सदियों तक मुट्ठीभर बाहरी लोगों के गुलाम रहे हैं और आज भी ललित मोदी व विजय माल्या जैसों को वापस लाने की हिम्मत नहीं कर पाते.

बेकार ऐप्स से निपटने का आसान तरीका

स्मार्टफोन पर कुछ ऐसे भी ऐप होते हैं जो हमेशा इस्तेमाल नहीं किए जाते हैं.

स्मार्टफोन पर स्टोरेज स्पेस तो ये इस्तेमाल करते ही हैं हर समय अपडेट के लिए डेटा का भी इस्तेमाल करते हैं.

इसलिए इन्हें स्मार्टफोन या टैबलेट पर रहना चाहिए कि नहीं इसके बारे में सोचने की जरुरत है.

कई ऐप ऐसे होते हैं जो तभी काम करते हैं जब वो आपके गूगल अकाउंट को एक्सेस कर सकते हैं. हो सकता है कि कुछ ऐसे भी ऐप हैं जिन्हें डाउनलोड तो कर लिया है पर अब उनकी जरुरत नहीं है.

ये भी हो सकता है कि आप नहीं चाहते हैं कि वो आपके गूगल अकाउंट को अब एक्सेस करें.

ऐसा भी हो सकता है कि जिस कंपनी के ऐप को अपने डाउनलोड किया था उसे किसी और कंपनी ने खरीद लिया हो और आप उससे दूर रहना चाहते हैं.

वजह चाहे जो भी हो, अगर आप चाहते हैं कि वो आपके गूगल अकाउंट से जानकारी नहीं लें तो उसका तरीका बहुत आसान है. बस गूगल के सिक्योरिटी पेज पर जाकर डाउनलोड करते समय उस ऐप को दी गयी इजाजत को अब नकार देना होगा.

ऐसा भी हो सकता है कि गूगल अकाउंट से जानकारी लेने की इजाजत आपने किसी भी ऐप को नहीं दी हो. लेकिन एक बार दोबारा चेक कर लेने में कोई हर्ज नहीं है. आइये इसको चेक करने का तरीका बताते हैं.

  1. स्मार्टफोन पर जो गूगल अकाउंट है उसी अकाउंट से डेस्कटॉप पर लॉग इन कर लीजिए. उसके बाद इस लिंक पर चले जाइए.
  2. यहां पर उन सभी ऐप के बारे में जानकारी मिल जायेगी जो स्मार्टफोन पर डाउनलोड किया हुआ है.
  3. उनमें से जो भी ऐप आप इस्तेमाल नहीं करते हैं और चाहते हैं कि वो गूगल अकाउंट से जानकारी नहीं ले उनके लिए 'रिमूव' के बटन पर क्लिक कर दीजिये.
  4. बस इसके बाद ये ऐप आपके गूगल अकाउंट से जानकारी नहीं ले पाएंगे.
  5. अपने बारे में जानकारी की सुरक्षा के लिए ये बहुत जरूरी है कि समय समय पर आप स्मार्टफोन पर ये चेक जरूर करें.
  6. चूंकि कई बार ऐप को डाउनलोड करते समय हम उन्हें सभी जानकारी लेने की इजाजत दे देते हैं, इसलिए ऐसा करना बहुत बढ़िया आदत होगी.

सेक्स को न करें नजरअंदाज

पिछले वर्ष कुछ शहरों और महानगरों में कराए गए एक शोध के मुताबिक सेक्सुअल असंतुष्टि, नपुंसकता या संतानहीनता के कारण भारत में लगभग 30 फीसदी शादियां टूट रही हैं. सेक्स को हमेशा से टैबू माना जाता रहा है, जबकि यह रिसर्च इस बात को खारिज करती है. तो क्या यह समझा जाए कि भारत में सेक्सुअल क्रांति आ रही है? फिलहाल ऐसा तो नहीं लगता, फिर भी धीरे-धीरे लोग अपनी सेक्सुअल फीलिंग्स को लेकर जागरूक हो रहे हैं. सेक्सुअल नीड्स को नजरअंदाज करने का असर रिश्ते पर अच्छा नहीं पडता. कई बार तो इससे शादियां टूटने के कगार पर पहुंच जाती हैं या टूट भी जाती हैं. इसका कारण यह है कि बेडरूम्स की समस्याएं केवल वहीं तक सीमित नहीं रहतीं, वे जीवन के अन्य पहलुओं को भी प्रभावित करती हैं. दूसरी ओर रिश्तों में समस्याएं एक दिन में नहीं पैदा होतीं, इसके संकेत पहले से मिलने लगते हैं. इन संकेतों को पहचानना और समय रहते अपने रिश्ते को संवार लेना ही समझदारी है. जानें किन वजहों से सेक्स लाइफ प्रभावित हो सकती है.

एक का कंट्रोल

वैवाहिक जिंदगी में सेक्स की अहमियत पर हर दंपती का अलग-अलग मत है और पार्टनर्स ही तय कर सकते हैं कि उनके बीच कब, कहां और कितनी बार सेक्स संबंध बनेंगे. जरूरी यह है कि दोनों को इस संबंध से खुशी मिले और दोनों का इस पर समान कंट्रोल हो. अगर एक व्यक्ति ही यह तय करेगा कि संबंध बनेंगे या नहीं या कब और कैसे बनेंगे तो निश्चित रूप से दूसरे पार्टनर में असंतुष्टि, गुस्सा या निराशा का भाव पनपेगा.

हथियार की तरह इस्तेमाल

सेक्स अपनी मांग मनवाने या इच्छाएं पूरी करने का हथियार नहीं है. इसके माध्यम से इमोशनल ब्लैकमेलिंग करना रिश्ते की सेहत को बिगाड सकता है. गुस्से या शिकायतों की परिणति अगर सेक्स से इंकार में होगी तो रिश्ता टॉक्सिक ही बनेगा. सेक्स कोहथियार नहीं, दोनों की खुशी का जरिया बनना चाहिए. शिकायतों को खुलकर पार्टनर के सामने रखें, बहस करें, संवाद करें लेकिन सेक्स के स्तर पर संवादहीनता से बचें.

जब बहाने बनने लगें

शादी के कुछ साल बीतते-बीतते कपल्स के बीच सेक्स गौण होने लगता है. पहले हफ्ते गुजरते हैं, फिर महीने और कई बार एक साल गुजर जाता है और पार्टनर्स के बीच यह शारीरिक संवाद खोने लगता है. शादी प्लेटोनिक रिलेशनशिप नहीं है. इसमें भावनात्मक और शारीरिक दोनों स्तरों पर जुडाव जरूरी है. 'समय नहीं है, मूड नहीं है, तबीयत खराब रहती है, बच्चे बडे हो रहे हैं, जॉइंट फेमिली है, फ्लैट छोटा है, दोनों की शिफ्ट अलग-अलग है, उम्र बढ रही है, व्यस्तता बहुत हो गई है…. जैसे बहाने लगातार बनने लगें तो यह खतरनाक संकेत है. समय रहते इसे पहचानें. अगर वाकई समय की कमी है तो हर चीज की तरह अपनी सेक्सुअल डेट भी प्लैन करें, लेकिन किसी भी तरह इसके लिए समय निकालें.

पोर्न की लत

इसे लेकर नैतिक बहसें होती रही हैं, लेकिन सेक्सपट्र्स का कहना है कि एक सीमा तक पोर्न देखना रिलेशनशिप के लिए अच्छा है. कई बार लो लिबिडो प्रॉब्लम्स में इससे फायदा हो सकता है, हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. लेकिन पोर्न एक नशा भी है और इसका एडिक्शन रिश्ते को नुकसान भी पहुंचा सकता है. इसके अलावा अगर दोनों पार्टनर्स में से किसी एक को यह बिलकुल नापसंद हो तो जाहिर है, कपल का रिश्ता प्रभावित होगा. पोर्न एडिक्शन कई बार इमोशनल कनेक्शन की कमी की ओर भी इशारा करता है.

पार्टनर बेवफा हो जाए

शादी से बाहर रिलेशनशिप कोई नया ट्रेंड नहीं है. एक्सपर्ट प्रेमा बाली कहती हैं कि 30-40 साल पहले भी ऐसे रिश्ते बनते थे और समाज में एक हद तक इन्हें स्वीकार्यता रही है. भारतीय समाज में कुछ रिश्ते बनाए ही गए हैं जिनमें हंसी-मजाक या फ्लर्ट की गुंजाइश रही है. कई कपल्स (एक्सपट्र्स भी) मानते हैं कि थोडा बहुत इधर-उधर होने से दांपत्य नहीं दरकता, बल्कि कई बार तो कपल्स के रिश्ते में खोया हुआ स्पार्क लौट आता है. दुर्भाग्य से सबके साथ ऐसा नहीं होता और अकसर लोग त्रिशंकु स्थितियों में फंस जाते हैं, जिस कारण या तो शादियां टूटती हैं या बची रह जाएं तो उनमें प्रेम खत्म हो जाता है.

सेक्सुअल बॉण्डिंग के लिए

काउंसलर नमिता पांडा कहती हैं, शादी एक तीन पैर वाले स्टूल की तरह है. एक पैर इमोशनल कनेक्शन है, दूसरा मेंटल कनेक्शन और तीसरा है सेक्सुअल कनेक्शन. इनमें से एक भी पैर टूट जाए तो स्टूल टूट जाता है. यानी शादी में शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक स्तर पर संवाद जरूरी है, इनमें से एक भी स्तर पर संवाद की कमी शादी को खत्म कर सकती है. छोटे-छोटे कदम रख कर रिश्तों की सीढी पर पैर बढाए जा सकते हैं.

1. खुद पर भरोसा रखें

खुद से प्यार करें और भरोसा रखें कि सब अच्छा होगा. दूसरे की आंखों में अपने प्रति प्यार देखना वाकई अच्छा एहसास है, लेकिन खुद से प्यार करना एक आंतरिक भावना है. व्यक्तित्व को संवारना, खुद को अपनी वास्तविकता में देखना, आईने में दिख रही अपनी छवि से प्यार करना, शरीर और मन के आकर्षण को महसूस करना शादी में भी सेक्स डिजायर्स को बरकरार रख सकता है.

2. सेक्स की अहमियत समझें

सेक्स को डर्टी टॉक या बोरिंग कहने से पहले जरा सोचें, स्त्री-पुरुष की इस फिजिकल केमिस्ट्री को लेकर हमारे देश में हजारों साल पहले वात्स्यायन ने 'कामसूत्र की रचना की थी. थकान, दबाव या निराशा से उबरना हो या भावनात्मक-शारीरिक परेशानियों से जूझना हो, कुछ पलों के सेक्स सेशन से न सिर्फ रिलैक्स फीलिंग आती है, बल्कि नई ऊर्जा का भी संचार होता है. कोई भी दंपती इससे इंकार नहीं कर सकता कि दुख, निराशा, गुस्से, कुंठा और अवसाद के पलों में एक अच्छा सेक्स सेशन थेरेपी का काम करता है.

3. फिर से प्यार करें

एक-दूसरे के प्रति आकर्षण को कम न होने दें. उम्र और समय के साथ जिम्मेदारियों का असर चेहरे और शरीर पर पडता है. शादी के 8-10 साल बाद शरीर में कुछ किलो बढने का मतलब यह नहीं है कि सेक्स ड्राइव खो दें. आकर्षण को बनाए रखने के लिए वह सब करें, जो पार्टनर की नजरों में आपको खूबसूरत बनाए. दुनिया भर के कॉस्मेटिक उपचार भी किसी को इतना सुंदर नहीं बना सकते, जितना प्यार भरे दो बोल बना सकते हैं. रिश्ते के लिए इतनी कोशिश तो करनी ही होगी.

4. डिजायर्स को छिपाएं नहीं

कई लोग सेक्स के बारे में अपनी फीलिंग्स छिपाते हैं. पार्टनर के सामने खुल नहीं पाते और कई बार इससे सेक्स संबंध बोझिल होने लगते हैं. अपनी डिजायर्स पार्टनर से शेयर करें, जो अच्छा लग रहा है, उसे बताएं और बुरी फीलिंग्स भी छिपाएं नहीं.

5. सोचें और प्लैन करें

सेक्सुअल इंटीमेसी न सिर्फ जीवन के हर पहलू पर संतुलित रहने में मदद करती है, बल्कि यह हर क्षण को जीना भी सिखाती है. शोध बताते हैं कि शादीशुदा लोग लंबी जिंदगी जीते हैं, क्योंकि यही वह रिश्ता है, जिसमें व्यक्ति को सुरक्षा का एहसास मिलता है. रिश्ते को सदाबहार बनाए रखने के लिए भावनात्मक और सेक्सुअल स्तर पर तालमेल बिठाना जरूरी है. गलतियों को सुधारने की कोशिश करें और एक-दूसरे से इस पर बात करें, तभी रिश्ते में निखार आएगा.

मायावती के ‘स्वामी’ होंगे मुलायम के खेवनहार

स्वामी प्रसाद मौर्य के लिये जो मायावती कल तक दलित की बेटी थी, आज दौलत की बेटी हो गई हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य ने उनपर पैसे लेकर टिकट बांटने का आरोप लगाया. जवाब में जब मायावती ने यह पूछा कि स्वामी प्रसाद मौर्य, उनके बेटे और बेटी को टिकट देने के बदले कितने पैसे दिये, तो स्वामी प्रसाद मौर्य इस बात का जवाब नहीं दे पाये. स्वामी प्रसाद मौर्य पर मायावती सबसे अधिक भरोसा करती थी. स्वामी प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश मे बसपा के सबसे बडे नेता थे. स्वामी प्रसाद मौर्य अंदरखाने समाजवादी पार्टी से दोस्ती बना चुके थे. यही वजह थी कि मुख्य विपक्षी दल होने के बाद भी बसपा समाजवादी सरकार की किसी भी नीति का विरोध नहीं करती थी.

सबसे करीबी होने के कारण बसपा प्रमुख मायावती स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी से हटा नहीं पा रही थी. स्वामी प्रसाद मौर्य चाहते थे कि मायावती उनको हटा दें. जिससे वह दलित वर्ग में सहानुभूति पैदा कर सकें. दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी बसपा को कमजोर कर उसे चुनावी जंग से बाहर करना चाहती थी. ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी 20 साल पुरानी बसपा को छोड़ कर सपा के करीब पहुंच गये.

1996 में बसपा में शामिल होने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने लोकदल से अपनी राजनीति शुरू की थी. 1980 में वह इलाहाबाद में युवा लोकदल के संयोजक बने थे. 1996 के विधानसभा चुनाव के दौरान जनता दल और समाजवादी पार्टी के गठबंधन के विरोध में जनता दल महासचिव का पद छोडकर बसपा में शामिल हुये.

मायावती के साथ उनकी छाया की तरह दिखने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य सार्वजनिक रूप से मायावती के पैर छूते थे. मायावती का विरोध करने वाले सपा नेता मुलायम सिह यादव के लिये अपमान जनक शब्दों का प्रयोग करते थे. अखिलेश सरकार को गुंडों की सरकार बताने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य अब फिर से मुलायम शरण में है.

बसपा नेता मायावती कहती हैं कि स्वामी प्रसाद अपने परिवार को बसपा में एडजस्ट करना चाहते थे. बसपा में परिवारवाद की कोई जगह न देखकर वह पार्टी से बाहर चले गये. स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर समाजवादी पार्टी अति उत्साह में है. उसे लगता है कि स्वामी प्रसाद मौर्य के आने से समाजवादी पार्टी मजबूत होगी और 2017 के विधानसभा चुनाव में उसकी जीत पक्की हो जायेगी. समझने वाली बात यह है कि स्वामी प्रसाद मौर्य का अपना कोई जनाधार नहीं है.

स्वामी प्रसाद मौर्य अगर खुद में जनाधार वाले नेता होते तो अपने बेटे और बेटी को चुनाव जितवा लेते. केवल स्वामी प्रसाद मौर्य ही नहीं, बसपा से अगल हुये तमाम नेताओं का इतिहास देंखे, तो साफ पता चलता है कि जो बसपा को छोड हाथी की सवारी से उतरते है, वह पैदल हो जाते हैं. आरके चौधरी, मसूद अहमद, दीनानाथ भास्कर, बाबू सिंह कुशवाहा, राजबहादुर, अखिलेश दास और जुगुल किशोर जैसे न जाने कितने नाम लिये जा सकते हैं.

विरोधी पार्टी के साथ दोस्ताना सबंध निभाने के चलते सपा स्वामी प्रसाद मौर्य को अपनी पार्टी में जगह दे सकती है. दलित और पिछडों की वैचारिक दूरी के बीच स्वामी प्रसाद मौर्य कब तक सपा के खुले आंगन में सांस ले सकेंगे और कब उनका दम घुटने लगेगा, यह आने वाले समय में पता चल सकेगा. मायावती के लिये अच्छी बात यह है कि जब वह मुसीबत में होती हैं, उनका वोट बैंक पूरी ताकत से साथ देता है.                   

तो इन्होंने कहा चीन को ‘प्रेरणादायक’

आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने प्रतिद्वंद्वी देश चीन को लेकर अहम टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि हमें चीन से प्रतिस्पर्धा करने बजाय उससे 'प्रेरणा' लेनी चाहिए. राजन ने कहा कि उम्मीद है कि भारत 10 से 15 साल बाद उस मुकाम पर पहुंच जाएगा, जहां आज चीन खड़ा है. राजन ने एसोचैम के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, 'मैं मानता हूं कि हमें चीन को प्रेरणा के तौर पर देखना चाहिए. चीन से हम यह सबक सीख सकते हैं कि कैसे कोई देश तीन दशकों में तरक्की कर सकता है यदि उसका इस बात पर पक्का विश्वास हो कि उसे क्या चाहिए.'

आरबीआई चीफ ने भारत के चीन का मुकाबला करने की स्थिति में पहुंचने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में यह बात कही. उन्होंने कहा, 'मैं अकसर देखता हूं कि लोग चीन को कमतर आंकते हैं. निसंदेह चीन की अपनी कुछ समस्याएं हैं. लेकिन बीते तीन दशकों में चीन प्रति व्यक्ति आय के मामले में 7.5 हजार डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है.'

राजन ने कहा कि मैं यह कहने वाला आखिरी व्यक्ति होऊंगा कि हमें भी वह उस रास्ते पर चलने की जरूरत है, जिस पर वे चले हैं. आरबीआई गवर्नर ने कहा, 'हम नहीं चल सकते क्योंकि वह पहले ही इस रास्ते पर है. वह वहां पहले से ही हैं और आगे का रास्ता खुला नहीं है. किसी ने पहले ही उस रास्ते को घेर रखा है.'

राजन ने कहा, 'हम निश्चित तौर पर चीन से प्रेरणा ले सकते हैं, ऐसा संभव है. अभी हम उस स्थिति में हैं, जहां चीन 1990 के आखिर या 2000 के दशक की शुरुआत में था. उम्मीद है कि 10 से 15 साल बाद हम उस स्तर पर होंगे, जहां चीन आज है.' गवर्नर ने कहा कि मैं इस बारे में भविष्यवाणी नहीं करूंगा कि हम चीन से मुकाबले की स्थिति में कब पहुंच पाएंगे, लेकिन उम्मीद है कि हम ऐसा कर पाएंगे.

कोचिंग स्टाफ दे या जिम्मेदारी ले आईओए: हॉकी इंडिया

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने रियो ओलंपिक में पुरुष और महिला हॉकी टीमों के लिए आठ-आठ कोचिंग स्टाफ देने के लिए कहा है. इसके लिए उन्होंने भारतीय ओलंपिक संघ के शीर्ष अधिकारियों को पत्र लिखा है.

बत्रा ने अपने पत्र में लिखा, 'हॉकी इंडिया का मानना है कि पुरुष और महिला हॉकी टीमों में से प्रत्येक को आठ कोचिंग और सहयोगी स्टाफ (कुल 16 कोचिंग और सहयोगी स्टाफ) की जरूरत है.' यह पत्र आईओए के अध्यक्ष एन रामचंद्रन और महासचिव राजीव मेहता को भेजा गया है.

बत्रा ने आगाह किया कि यदि आईओए इस मामले को गंभीरता से नहीं लेता है तो रियो ओलंपिक में टीम के प्रदर्शन के लिये उसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

उन्होंने कहा, 'यदि आईओए स्थिति से समझौता करने की नीति अपनाता है तो हॉकी इंडिया मानेगा कि आईओए ने टीमों के ओलंपिक खेलों के लिये रवाना होने से पहले उन्हें हतोत्साहित करने का फैसला किया है. यदि टीमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं करती हैं तो फिर आईओए को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेने के लिये तैयार रहना चाहिए.'

इसके जवाब में मेहता ने कहा कि सहयोगी स्टाफ के सदस्यों की संख्या क्वालीफाइ करने वाले कुल खिलाड़ियों की संख्या के 40 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है. उन्होंने सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों से 24 जून तक टीमों के साथ जाने वाले अधिकारियों की सूची भेजने के लिए कहा है.

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