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रियो ओलंपिक: पोते की जीत की खुशी में दादी की मौत

रियो ओलंपिक 2016 में जश्न हादसे की वजह बन जाएगा ऐसा किसी ने शायद ही सोचा होगा. कांस्य पदक जीतने वाले एक खिलाड़ी की दादी मां जीत की खुशी बर्दाश्त नहीं कर सकीं और उनकी मौत हो गई.

रियो ओलंपिक में थाइलैंड के आर्मी एथलीट सिन्फेट क्रुआएथॉन्ग ने 56 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में कांस्य पदक जीता था. सिन्फेट की दादी उनका यह मुकाबला टीवी पर लाइव देख रही थीं. 20 वर्षीय सिन्फेट ने जैसे ही कांस्य पदक जीता तो उनके घर पर सेलिब्रेशन शुरू हो गया.

हालांकि, खुशियां ज्यादा देर तक नहीं टिकीं और दादी की मौत हो गई. सूत्रों की मानें तो शुरुआती चरण में तो लग रहा था कि दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ है. हालांकि, अस्पताल की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही पुलिस ने कुछ कह पाने की बात कही है.

एक पुलिस ऑफिसर ने बताया कि इस मामले में देखना होगा कि उनकी मौत, खुशी की वजह से ज्यादा उत्साहित होने की वजह से हुई है या फिर उनकी बीमारी इसकी वजह रही है. रियो में अपने पोते का गेम शुरू होने से पहले दादी ने कहा था कि मैं उसके लिए चीयर्स करती हूं.

मैं अपने पोते को लड़ने के लिए आशीर्वाद देती हूं. उनके आशीर्वाद की वजह से ही उनका पोता रियो ओलंपिक में पदक जीत सका.

सितंबर में होगी देश की सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी

देश की सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी 29 सितंबर से शुरू हो रही है. आधार मूल्य के हिसाब से इस नीलामी में 5.63 लाख करोड़ रुपये की रेडियो तरंगों को बिक्री के लिए पेश किया जाएगा.

4जी सेवाओं के लिए सभी बैंडों की नीलामी

दूरसंचार सचिव जेएस दीपक ने आवेदन आमंत्रित करने का नोटिस (एनआईए) जारी करते हुए कहा, ‘बिखराव और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के मुद्दों को हल करने के लिए बड़ी मात्रा में स्पेक्ट्रम को नीलामी के लिए रखा गया है और नियमों को बोलियां लगाने वालों के अनुकूल बनाया गया है.’ सरकार सभी बैंड, 700 मेगाहट्र्ज, 800 मेगाहट्र्ज, 900 मेगाहट्र्ज, 1800 मेगाहट्र्ज, 2100 मेगाहट्र्ज तथा 2300 मेगाहट्र्ज बैंड में कुल 2,354.55 मेगाहट्र्ज मोबाइल सेवा स्पेक्ट्रम बिक्री के लिए पेश करेगी.

30 दिन के भीतर स्पेक्ट्रम दे दिया जाएगा

नीलामी के लिए पेश किए जाने वाले कुल स्पेक्ट्रम में से 197 मेगाहट्र्ज 1800 मेगाहट्र्ज बैंड तथा 37.5 मेगाहट्र्ज 800 मेगाहट्र्ज (सीडीएमए) बैंड में होगा. सरकार को चालू वित्त वर्ष में 2,354.55 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी से 64,000 करोड़ रुपये तथा दूरसंचार सेवाओं पर विभिन्न शुल्कों और सेवाओं से 98,995 करोड़ रुपये प्राप्त होने की उम्मीद है. सरकार ने पहली बार वादा किया है कि सफल बोली दाताओं द्वारा अग्रिम भुगतान के 30 दिन के भीतर उन्हें स्पेक्ट्रम दे दिया जाएगा.

दस दिन के भीतर 25 प्रतिशत राशि जमा करानी होगी

ऐसी दूरसंचार कंपनियां जो 700, 800 और 900 मेगाहट्र्ज में सफल बोली लगाएंगी उन्हें नीलामी समाप्त होने के 10 दिन के भीतर 25% राशि जमा करानी होगी. शेष भुगतान उन्हें दस सालाना किस्तों में करना होगा. इसमें पहले दो साल उन्हें कोई भुगतान नहीं करना होगा. शेष बैंडों में कम से कम 50% राशि का भुगतान करना होगा. सरकार ने किस्तों पर ब्याज को भी पहले के 10 प्रतिशत से घटाकर 9.3% कर दिया है.

700 मेगाहट्र्ज बैंड की नीलामी पहली बार 

यह पहली बार है जबकि 700 मेगाहट्र्ज बैंड स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए रखा जा रहा है. इस बैंड को काफी महंगा माना जाता है. इसमें 3जी सेवाएं प्रदान करने की लागत 2100 मेगाहट्र्ज से एक-तिहाई बैठती है. यदि 700 मेगाहट्र्ज में समूचा स्पेक्ट्रम आधार मूल्य पर बिक जाता है तो इससे ही अकेले सरकार को चार लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा. दूरसंचार विभाग 13 अगस्त को बोली पूर्व सम्मेलन आयोजित कर रहा है जिसमें एनआईए को लेकर चीजें साफ की जाएंगी.

गुडविल एम्बैसडर सलमान को नहीं पता जिमनास्ट दीपा का नाम

एक तरफ पूरा देश ऊपर वाले से प्रार्थना कर रहा है कि 14 अगस्त को भारतीय जिमनास्ट दीपा करमाकर को फाइनल मुकाबले में गोल्ड मेडल हासिल हो, वहीं दूसरी ओर भारतीय ओलंपिक संघ के गुडविल एम्बैसडर सलमान खान को देश की इस रीयल स्टार का सही नाम ही नहीं पता.

दीपा करमाकर  जिम्नास्टिक के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनीं हैं. अपने छोटे भाई सोहेल खान की फिल्म ‘फ्रीकी अली’ के ट्रेलर लॉन्चिंग के दौरान सलमान खान भारतीय जिमनास्ट को पहले दीपा की जगह 'दीपिका' बोल गये लेकिन जब मीडिया वालों ने उन्हें टोका तब वो दीपा को 'दीप्ति' करमाकर कह उठे.

सलमान को क्यों बनाया गया गुडविल एम्बैसडर

सलमान खान की ये गलती उन लोगों के लिए अब शोर मचाने के लिए काफी है जिन्हें सलमान खान के भारतीय ओलंपिक संघ का गुडविल एम्बैसडर बनाये जाने पर खासा एतराज था. जिनका कहना था कि जिस व्यक्ति को खेल की एबीसीडी नहीं पता वो भला गुडविल एम्बैसडर कैसे बन सकता है.

दीपा करमाकर ने रचा इतिहास

गौरतलब है कि 52 वर्षो के बाद ओलंपिक खेलों की जिम्नास्टिक स्पर्धा में पहली भारतीय महिला एथलीट के तौर पर प्रवेश करने वाली दीपा अब 14 अगस्त को इंडिया के लिए मेडल जीतने वाली पहली इंडियन भी बन सकती हैं.

पांच क्वालिफिकेशन सबडिवीजन स्पर्धा में 8वें स्थान पर दीपा

जिम्नास्टिक की सभी पांच क्वालिफिकेशन सबडिवीजन स्पर्धा के समापन के बाद वॉल्ट में आठवें स्थान पर रहीं. दीपा ने क्वालिफाइंग स्पर्धा के वॉल्ट में 14.850 अंक हासिल किया.

जब हृतिक रोशन और पूजा हेगड़े दोनों हुए आश्चर्यचकित

आशुतोष गोवारीकर की 12 अगस्त को प्रदर्शित हो रही फिल्म ‘‘मोहनजो दाड़ो’’ में हृतिक रोशन व  पूजा हेगड़े की जोड़ी नजर आने वाली है. यूं तो पूजा हेगड़े तमिल व तेलगू की तीन सुपरहिट फिल्में कर चुकी हैं, मगर हिंदी में यह उनकी पहली फिल्म है.

हृतिक रोषन से पहली मुलाकात का जिक्र करते हुए पूजा हेगड़े ने कहा-‘‘मैं बचपन से ही हृतिक रोशन की फैन रही हूं. वह मेरे पसंदीदा हीरो रहे हैं. जब उनकी पहली फिल्म ‘कहो ना प्यार है’, रिलीज हुई थी, तब तक मैने कभी फिल्में देखी नहीं थी. पर जब मैं अपनी कजिन के घर गयी थी, उसने कहा था कि यह हॉट हीरो है और इसका नाम हृतिक रोशन है. कजिन ने मुझे उनका पोस्टर दिखाया था. उसके बाद मैंने उनकी फिल्म देखी और मैं उनकी फैन बन गयी.

हृतिक से मिलने से पहले मेरी सोच यह थी कि वह जिस तरह से परदे पर नजर आते हैं, निजी जिंदगी में वह उससे हटकर होंगे, पर जब मिली तो कोई फर्क नहीं था. जबकि हृतिक रोशन ने सोच रखा था कि मैं दक्षिण भारत के किसी गांव से आयी हूं. जब पहली बार हमारी बातचीत हुई और मैंने बताया कि मैं मुंबई के बांद्रा इलाके में रहती हूं, तो उन्हें भी आश्चर्य हुआ था.’’

जीएसटी बिल पारित, डेवेलपर्स आशावान

पिछले हफ्ते राज्यसभा ने जीएसटी बिल के संशोधनों को पारित करते हुए लोकसभा के हाथों में सौंप दिया था और यही उम्मीद की जा रही थी कि लोकसभा में पेश होते ही यह पारित हो जायेगा. पूरे 443 सांसदों ने मंजूरी देकर जीएसटी पर हामी भरी. इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी स्पीच में जीएसटी का मतलब ‘ग्रेट स्टेप्स टुवर्ड्स ट्रांसपेरेंसी’ बताते हुए इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा कदम बताया और कहा अब राज्यों की जीएसटी पर तत्परता से काम करने की बारी है.

जीएसटी के पारित होने पर जानिए क्या कहना है डेवलपर्स का-

1. राकेश यादव, चेयरमैन, अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप

राज्यसभा से पारित होने के बाद हर डेवलपर की नज़र लोकसभा पर ही टिकी हुई थी कि वह अंतिम फैसला कब तक सुनाती है और आखिरकार इस फैसले के बाद देश का ही नहीं बल्कि रियल्टी सेक्टर का भी विकास तेज़ी से देखने को मिलेगा.

2. विकास सहनी, सीएमडी, प्रॉपर्टी गुरु

जीएसटी के आने से देश के व्यापर में पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रधानमंत्री ने भी इस बात पर बहुत जोर डाला. रियल्टी सेक्टर की वर्तमान हालत को देखें तो बेशक 1 अप्रैल 2017 से लागू होने वाले जीएसटी से पारदर्शिता बढ़ेगी जो सेक्टर के ग्राहकों के अन्दर भरोसा जगाने में सहायक साबित होगी.

3. राहुल चमोला, एमडी, वन लीफ ग्रुप

रियल एस्टेट में लगभग 17 प्रकार के अप्रत्यक्ष कर लगते हैं, जिनके चलते कीमतें ज्यादा हो जाती है. जीएसटी की दर तय होना अभी बाकी है पर हमें उम्मीद है कि जीएसटी की दर संपत्ति की कीमतों में गिरावट लाएगी.

4. अशोक गुप्ता, सीएमडी, अजनारा इंडिया लिमिटेड

वर्ष के शुरुआत में रियल एस्टेट बिल के पारित होने के बाद अब यह रियल्टी सेक्टर के लिए दूसरी बड़ी खबर है. सरकार की नई नीतियां व पहल निश्चित ही रियल्टी सेक्टर के अन्दर जल्द ही बड़ा बदलवा लाने में सक्षम होगी, हालांकि सिंगल विंडो पर भी सरकार को जल्दी ही फैसला लेना चाहिए.

क्‍यों होता है आईफोन और आईपैड गर्म?

कई बार आपने देखा होगा कि अचानक से आपका आईफोन या आईपैड भयानक तरीके से गर्म हो जाता है. ऐसे में आपको उसे हैंडल करने में दिक्‍कत भी होती होगी. खासकर जब आप कोई जरूरी काम कर रहे हों.

कई बार ये डिवाइस इतनी ज्‍यादा हीट हो जाती हैं कि फट जाती हैं. ऐसे में आपको बेहद सावधानी बरतने की आवश्‍यकता है. जानिए कि किस प्रकार आप इस समस्‍या से निजात पा सकते हैं और अपनी डिवाइस को हीट होने से बचा सकते हैं:

एआरएम चिप

एप्‍पल की डिवाइस में एआरएम चिप होती है जो जल्‍दी से हीट हो जाती है और जिसकी वजह से पूरी डिवाइस गर्म हो जाती है.

कवर बेकार

अगर आप कवर निकाल कर उसे ठंडा करने की कोशिश करते हैं तो ऐसा करना बेकार है. इससे बेहतर कि फोन को चलाना बंद कर दें और उसे रख दें.

हैवी गेम यूजर

जी हां, फोन पर हाई प्रेशर यानि आपके द्वारा हैवी गेम खेले जाने की वजह से ऐसा होता है.

क्‍या करें

फोन को इस प्रकार बनाया जाता है कि 35 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान उसका होने पर वह चल जाएगा. लेकिन अगर इससे ज्‍यादा होता है तो वह अपने आप काम करना बंद कर देगा और मैसेज शो कर देगा.

हमेशा गर्म

अगर फोन हमेशा गर्म रहता है तो उसे सर्विस सेंटर में दिखा लें. हो सकता है कि उसके हार्डवेयर या आईओएस में दिक्‍कत हो.

मेहनत का कोई शौर्टकट नहीं होता: टीना डाबी

जिंदगी में अगर ठान लिया कि हमें यह मुकाम हासिल करना है, तो ऐसा कोई कारण नहीं कि सफलता न मिले. लेकिन इस के लिए हमें कड़ी मेहनत, फोकस व संयम की जरूरत पड़ती है. इन्हीं सब के बूते टीना डाबी ने पहली बार में ही यूपीएससी में टौप कर सब को चौंका दिया. महज 22 वर्ष की उम्र में अपने पहले ही प्रयास में देश की सब से प्रतिष्ठित यूपीएससी की परीक्षा में टौप करना गौरव की बात होती है. दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा रही टीना डाबी अपनी मां को प्रेरणा बताते हुए कहती हैं कि वे अपनी मां के मार्गदर्शन के कारण ही इस मुकाम तक पहुंची हैं. बता दें कि टीना की मां हेमाली ने बेटी की पढ़ाई के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी. पिता जसवंत डाबी दूरसंचार विभाग में अधिकारी हैं.

टीना की इस सफलता पर उन की मां का कहना है कि उन की बेटी उन की हीरो है. टीना के पिता इस रिजल्ट से काफी गौरवान्वित हैं. उन का कहना है कि महज 22 साल की उम्र में टीना ने पहली कोशिश में ही जो मुकाम हासिल किया है वह उन के लिए गर्व और आश्चर्य की बात है. आइए जानते हैं, टीना की सफलता की कहानी उन्हीं की जबानी :

जब आप को यूपीएससी में टौप करने की सूचना मिली, तब कैसा महसूस हुआ?

मुझे बेहद खुशी हुई. यह मेरे जीवन का सर्वश्रेष्ठ दिन रहा. सब से अधिक खुशी इस बात की रही कि मैं ने अपने मातापिता के सपने को पूरा किया.

हर सफलता के पीछे जहां आप की मेहनत सब से बड़ा रोल निभाती है, वहीं आप का कोई न कोई रोल मौडल भी होता है. आप अपना रोल मौडल किसे मानती हैं?

इस सफलता का श्रेय मैं खुद को देने के साथसाथ अपनी मां को देती हूं. मेरी मां मेरी आदर्श हैं. वे चाहती थीं कि मैं राजनीति विज्ञान की पढ़ाई करूं. मैं ने इस का चुनाव किया और परीक्षा पास की. यह मेरा मुख्य विषय था. मां ने शुरू से ही मुझे आगे बढ़ाया और कहा कि मैं सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करूं, आईएएस बनूं.

परिवार से कितना सपोर्ट मिला?

परिवार के सपोर्ट के बिना मेरे लिए यह सफलता प्राप्त करना मुश्किल था. मेरी सफलता के पीछे परिवार के साथसाथ धैर्य, फोकस और अनुशासन का भी बहुत बड़ा हाथ है.

आखिर आप ने हरियाणा को ही क्यों चुना?

मैं हमेशा से चुनौतीपूर्ण राज्य में काम करना चाहती थी इसलिए मैं ने हरियाणा को चुना. हम जानते हैं कि वहां युवक और युवतियों का अनुपात काफी कम है, इसलिए मैं वहां महिला सशक्तिकरण के लिए अपना योगदान देना चाहती हूं.

आप की सफलता की बात सोशल साइट्स पर खूब वायरल हुई. साथ ही यह भी कि तैयारी के दौरान आप ने करीब एक साल तक अपना फेसबुक अकाउंट डिऐक्टिवेट रखा? इस बात में कितनी सचाई है?

हां, यह सच है. मुझे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना था, इसलिए मैं सोशल मीडिया से भी दूर हो गई थी, लेकिन रिजल्ट आने के बाद मैं ने अपना फेसबुक अकाउंट फिर से ऐक्टिवेट कर दिया. लेकिन ऐसा नहीं था कि इस दौरान मैं ने अपनेआप को एक कमरे में बंद कर लिया हो.

दोस्तों से मिलनाजुलना होता रहा या वह भी बंद था?

मैं 15-20 दिन में अपने दोस्तों से मिलने जाती थी व शौपिंग भी करती थी.

अपनी तैयारी के बारे में भी कुछ बताइए?

कामयाबी के लिए धैर्य रखना बहुत जरूरी है. साथ ही परीक्षा में सफलता के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति का होना भी जरूरी है. जैसा कि आप को पता ही होगा कि मैं ने श्रीराम कालेज औफ कौमर्स, दिल्ली से राजनीति विज्ञान में ग्रैजुएशन की. मैं ने 20 साल की आयु में ही ग्रैजुएशन कर ली थी, लेकिन 21 साल का न होने के कारण मैं यूपीएससी की परीक्षा में नहीं बैठ सकती थी. इसी वजह से एक साल तक कोचिंग ली और 2015 में सिविल सेवा की परीक्षा के लिए आवेदन किया. अगर हम कठिन परिश्रम करें और पूरी लगन से लक्ष्य पर टिके रहें, तो सफलता अवश्य मिलती है.

आप की सफलता में आप के कालेज का कितना योगदान है?

कोई किसी भी कालेज से पढ़े, वह हमेशा अपने कालेज को बैस्ट ही बताता है. हम जो अपनी कालेज लाइफ में पढ़ते हैं, वह हमारे साथ जीवनभर रहता है. पर मैं कहूंगी कि लेडी श्रीराम कालेज के छात्रों की नींव काफी मजबूत होती है.

जो युवकयुवतियां सिविल सेवा की तैयारी कर रहे हैं, उन के लिए क्या संदेश देना चाहेंगी?

सिविल सेवा में सफलता के लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होती है. आप को धैर्य रखना पड़ता है. पूरे साल परीक्षा चलती रहती है, इस दौरान आप को मानसिक रूप से हमेशा तैयार रहना पड़ता है.

इस परीक्षा की तैयारी कर रहे युवकयुवतियों को एक दिन भी गंवाना नहीं चाहिए. मेहनत करें क्योंकि मेहनत का कोई शौर्टकट नहीं होता.               

खरीदार और उस के अधिकार

जब कोई इनसान बाजार से किसी भी चीज को खरीदता है, तब वह उपभोक्ता यानी खरीदार कहलाता है. हम सभी उपभोक्ता हैं, क्योंकि रोज ही हम अपने इस्तेमाल की कोई न कोई चीज खरीदते रहते हैं. इन चीजों में दूध, सब्जी, कापी, पैंसिल, कपड़े, फर्नीचर व बिजली का सामान जैसी बहुत सी चीजें आती हैं. उपभोक्ता इन चीजों को खरीदने के लिए पैसा, समय, ताकत व दिमाग आदि का इस्तेमाल करता है. रोजाना इस्तेमाल में आने वाली चीजें हम बाजार में कई जगहों से खरीद सकते हैं जैसे कि दुकान, फुटपाथ, बाजार, थोक की दुकान या केंद्रीय भंडार.

उपभोक्ता आमतौर पर बाजार की सही जानकारी नहीं रखते, जैसे कि कौन सी नईनई चीजें बाजार में बिक रही हैं, कौन सी चीज कहां अच्छी व सस्ती मिल सकती है. बेचने वाला खरीदने वाले की इस नादानी का फायदा उठाता है और गलत तरीके इस्तेमाल करता है जैसे कि कम तोलना, सही चीज न देना, मिलावट करना आदि. इस तरह से बेचने वाला तो ज्यादा फायदा कमाता है, लेकिन उपभोक्ता अपना पैसा खर्च कर के भी पूरी तसल्ली नहीं पाता. इसलिए बाजार से किसी चीज को खरीदते समय उपभोक्ता को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जैसे किसी एक चीज की अलगअलग कीमतें होना, चीजों का बाजार में न मिलना, मिलावट होना, गलत मापतोल होना, घटिया किस्म होना आदि.

ऐसे में जरूरत है कि खरीदारों को उन के अधिकारों  प्रति जागरूक किया जाए और चीजों के बारे में पूरी जानकारी दी जाए ताकि वे धोखाधड़ी का शिकार न हो सकें. उन को अपने अधिकारों व कर्तव्यों की सही जानकारी होनी चाहिए.

खरीदार के अधिकार

– सुरक्षा का अधिकार

– जानकारी का अधिकार

– चयन का अधिकार

– सुनवाई का अधिकार

– क्षतिपूर्ति का अधिकार

– उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार

– सूचना का अधिकार

– स्वस्थ वातावरण का अधिकार

उपभोक्ता यानी खरीदारों के अधिकारों के अलावा कुछ कर्तव्य भी हैं. उन को चाहिए कि अपने कर्तव्यों के प्रति सावधान रहें, दिमाग से खरीदारी करें व अधिकारों का गलत इस्तेमाल न करें.

खरीदार के कर्तव्य

– उचित कीमत व गुणवत्ता वाली चीजें खरीदना.

– खरीदारी से पहले मापतोल की जांच करना.

– लेबल को ठीक तरह से पढ़ना.

– झूठे व लुभावने विज्ञापनों से बचना.

– वस्तु का बिल, नकद रसीद, गारंटी आदि लेना.

– वस्तुओं को अच्छी दुकानों से खरीदना.

– काला बाजार से चीजें न खरीदना.

– सरकारी मान्यता वाली वस्तुओं का इस्तेमाल करना.

– अधिकारों की जानकारी होना.

आज का खरीदार कम आमदनी, ज्यादा दाम और दुकानदारों के खराब रवैए से दुखी रहता है. चीजों में मिलावट करना और ग्राहक को वस्तु के बारे में गलत बताना जैसी बातें आम हैं. उत्पादक ज्यादा से ज्यादा फायदा कमाना चाहते हैं और इस से खरीदार को क्या नुकसान होगा इस बारे में वे बिल्कुल नहीं सोचते.

अब खरीदारों को नुकसान न हो इस के लिए सरकार ने कई कार्यक्रम शुरू किए हैं. ग्राहकों को जागरूक करने के लिए सरकार अखबार, टीवी व रेडियो में कई विज्ञापन दे रही है. इन विज्ञापनों में बताया जाता है कि उपभोक्ता के क्या अधिकार हैं व उन के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार क्या कर सकती है.

‘जागो ग्राहक जागो’  सरकार द्वारा चलाया गया ऐसा ही एक कार्यक्रम है, जिस में उपभोक्ता को जानकारी दी जाती है कि अगर उन के साथ धोखाधड़ी होती है तो वे कहां और कैसे शिकायत कर सकते हैं और सरकार किस प्रकार दोषी दुकानदार को सजा दे सकती है.

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है. इस के लिए 3 स्तरीय न्याय दिलाने वाली प्रणाली शुरू की गई है. कई स्तरों पर उपभोक्ता मंच बनाए गए हैं. ये मंच उपभोक्ता के अधिकारों और हितों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं. हर जिले, राज्य व केंद्र में मंच या आयोग बनाए गए हैं, जहां उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. जिला स्तर पर 20 लाख से 1 करोड़ रुपए तक के मुआवजे की शिकायत सुनी जाती है और राष्ट्रीय स्तर पर 1 करोड़ रुपए से ऊपर के मुआवजे की सुनवाई होती है. सुप्रीम कोर्ट में आखिरी सुनवाई होती है. इस नियम के तहत आयोग में 3 महीने के भीतर शिकायत पर कार्यवाही कर के फैसला सुनाने की व्यवस्था की गई है. न्यायालय में शिकायत के लिए कोई फीस नहीं भरनी पड़ती.

लिहाजा उपभोक्ता संरक्षण और उस के अधिकारों को जान कर उपभोक्ता धोखाधड़ी के शिकार होने से बच सकते हैं और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकते हैं.     

– डा. रजिया परवेज

किसानों के सवाल, कृषि मंत्री के जवाब

फेसबुक के जरीए केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने देश के किसानों से सीधे बात की. इस दौरान किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह पर सवालों की बौछार कर दी. कुछ सवाल सरकार के कामों की तारीफ वाले थे, तो कुछ सवाल योजनाओं के जमीन पर न उतरने से जुड़े थे. कुछ किसानों ने सरकार को योजना लागू करने के सुझाव भी दिए. 1 घंटे की फेसबुक चर्चा में राधामोहन सिंह से 417 सवाल पूछे गए, जिन में से 3 सौ से ज्यादा सवालों के जवाब उन्होंने तुरंत दिए.

राधामोहन सिंह का कहना है कि इस चर्चा से वे काफी खुश हैं. फेसबुक के जरीए किसानों से बातचीत का सिलसिला वे हर महीने जारी रखेंगे. इस के अलावा वे जल्दी ही ट्विटर के जरीए भी बातचीत का सिलसिला शुरू करने वाले हैं.

किसानों के मन में उठे भ्रम को दूर करने की कोशिश में राधामोहन सिंह ने हर सवाल का जवाब देने की कोशिश की, लेकिन योजनाओं के जमीन पर न उतर पाने वाले सवाल पर वे थोड़ा गंभीर जरूर हुए.

उत्तर प्रदेश  के कुशीनगर के वशिष्ठ सिंह ने राधामोहन सिंह से सीधे सवाल दागा कि क्या वजह है कि केंद्र की कृषि योजनाओं की जानकारी जिले में नहीं मिल पा रही है?

वहीं एक दूसरे प्रश्नकर्ता पुष्पेंद्र सिंह ने मंत्री महोदय से सवाल किया कि केंद्र की योजनाएं जमीन पर क्यों नहीं उतर पा रही हैं?

इस सवाल के बारे में राधामोहन सिंह ने कहा कि कृषि योजनाओं के लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों पर है. आंध्र प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में कृषि योजनाओं की रफ्तार बेहद तेज है. वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार सरीखे राज्यों में योजनाओं की रफ्तार अच्छी नहीं है. उन्होंने कम रफ्तार वाले राज्यों से योजनाओं की गति बढ़ाने की बात कही. उन का कहना है कि कृषि योजनाओं को लागू करना राज्यों की रुचि पर निर्भर है.

राधामोहन सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्त्वाकांक्षी योजना मृदा हेल्थ कार्ड के बंटवारे का काम काफी धीमा है. इस मामले में कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकार को चिट्ठी लिखी है.

राधामोहन सिंह ने कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव से इस बारे में बात की है. उन्होंने हर किसान के हाथ में ‘मृदा हेल्थ कार्ड’ देने का भरोसा दिलाया है.  

चीन से मुंह की खाई

परमाणु सामग्री को बेचने वाले देशों में शामिल होने के लिए इस बार नरेंद्र मोदी ने एड़ी से चोटी का जोर लगा दिया, पर चीन से बुरी तरह मुंह की खाई. चीन अड़ा रहा कि वे देश, जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, इस न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप के सदस्य नहीं बन सकते और अपने देश में बनाए गए परमाणु उपकरण दूसरों को नहीं बेच सकेंगे. नरेंद्र मोदी ने इस मामले को इस ढंग से लिया मानो सोमनाथ का मंदिर बनवाना हो और बनवाना है तो बनवाना ही है. उन्होंने न केवल पहले कई देशों की यात्रा की, बल्कि अमेरिका को पूरी तरह मना लिया. पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश और पिछले भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुए समझौते के बाद यह काम कठिन न था और अमेरिका खुद चीन के बढ़ते प्रभाव से चिंतित है, फिर भी अमेरिका हजारों टैलीफोन कालों के बावजूद दक्षिणी कोरिया में जमा हुए देशों में बहुतों को मना लेने के बाद भी चीन को टस से मस न कर पाया.

परमाणु सामग्री बेचने का हक पाने के बाद देश का यह उद्योग बहुत पनप सकता है. और क्षेत्रों में हम चाहे कैसे भी हों, परमाणु और स्पेस टैक्नोलौजी में हमारे वैज्ञानिक दुनिया के वैज्ञानिकों का मुकाबला कर रहे हैं. हालांकि उत्तरी कोरिया, दक्षिणी अफ्रीका, इजरायल, पाकिस्तान, ईरान आदि के पास भी यह तकनीक है, पर इन से दुनिया के दूसरे देश डरते हैं. लेकिन भारत पर अभी सब को भरोसा है कि वह कभी आक्रामक न होगा और अपनी सरहदें पार न करेगा. फिर भी चीन ने भारत को इस विशिष्ट ग्रुप में घुसने न दे कर साबित कर दिया है कि विदेश नीति नाचगानों और गर्मजोशी के साथ झप्पी मारने पर निर्धारित नहीं होती, बल्कि अपने हितों पर निर्भर होती है. चीन का हित यह है कि भारत को न परमाणु सामग्री मिले और न वह बेच पाए, क्योंकि चीन के दूसरे सब से बड़े पड़ोसी भारत से उस का सीमा विवाद गहरा है.

चीन की नाराजगी का कारण यह भी है कि तिब्बती राजाओं ने सदियों पूर्व हिमालय के इस पार की पहाडि़यों पर अकसर राज किया है और भारत के मैदानी इलाकों के राजाओं ने इन पहाड़ी क्षेत्रों को केवल पूजनीय बना कर छोड़ रखा था. इतिहास का हवाला दे कर चीन बहुत सा इलाका मांगता रहता है, पर वह आणुविक युद्ध का खतरा मोल नहीं लेना चाहता. चीन और भारत दोनों एशियाई देश 30 साल पहले एक से गरीब थे. चीन हालांकि कभी भारत की तरह गुलाम नहीं रहा, पर चीनी कुलियों और भारतीय कुलियों में फर्क नहीं रहा. आज भारत काफी पीछे है और चीन कोई मौका नहीं देना चाहता कि भारत दौड़ में उस के पास आ जाए. विदेश नीति में गहरी चोट लगा कर चीन को कुछ और मिले न मिले, उस ने भारत व नरेंद्र मोदी को औकात तो दिखा दी.

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