Download App

ऐसा टूल, जो बताएगा क्रिकेट का सटीक स्कोर

दुनिया की टॉप आईटी कंपनियों में शामिल माइक्रोसॉफ्ट ने मौसम से बाधित क्रिकेट मैचों में टारगेट स्कोर्स के अनुमान की ऐक्युरेसी में सुधार के लिए एक नया प्लैटफॉर्म पेश किया है. इससे स्पोर्ट्स से जुड़ी अन्य ऐक्टिविटीज को भी मैनेज किया जा सकता है.

यह प्लैटफॉर्म मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करता है और इसमें डिवेलपर्स को टारगेट स्कोर का अनुमान लगाने के लिए लने की स्थितियां, मौसम और क्रिकेट ग्राउंड के प्रकार जैसे कई पैरामीटर को शामिल करने की सुविधा मिलती है.

माइक्रोसॉफ्ट के कॉरपोरेट वाइस प्रेजिडेंट, जोसफ सिरोश ने कहा, 'हमारा मानना है कि स्पोर्ट्स में मशीन लर्निंग के लिए काफी संभावनाएं हैं. इनमें मैदान पर खिलाड़ी की स्थिति की निगरानी से लेकर चोटों का अनुमान लगाना और पहले से सतर्क कदम उठाना शामिल हैं.'

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ ने बताया कि मौजूदा सिस्टम में टॉप पोजिशन से बल्लेबाज की ताकत को प्रायरिटी दी जाती है और अगर आप ऑर्डर को उल्टा कर देते हैं तो इससे सिस्टम भ्रमित हो सकता है.

उन्होंने कहा, 'प्रत्येक बल्लेबाज को एक रैंकिंग देकर और उस रैंकिंग को सिस्टम में शामिल करने से इस समस्या को दूर किया जा सकता है. इससे टीम की बल्लेबाजी की वास्तविक ताकत का पता चल सकेगा.' श्रीनाथ अभी इंटरनैशनल क्रिकेट काउंसिल के मैच रेफरी हैं.

माइक्रोसॉफ्ट के लिए स्पोर्ट्स के अलावा सरकारी प्रॉजेक्ट्स भी एक अन्य महत्वपूर्ण एरिया है. 

रियो: इस कामदेव से है लड़कियों की खास डिमांड

रियो का रोमांच शुरू हो गया है. ओलंपिक में चीन के 412 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं. इनमें निंग जेटाओ का नाम भी शामिल है, जिन्हें Elle Men मैगजीन ने कवर पेज पर छापा है. 23 साल का ये स्टार स्विमर चीन ही नहीं, पूरी दुनिया में फेमस हो गया है.

वजह है जबरदस्त बॉडी और गुड लुकिंग चेहरा. इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि ओलंपिक ओपनिंग के दौरान निंग पूरी दुनिया में ट्रेंड कर रहे थे. ढेरों लड़कियों ने उन्हें शादी के लिए प्रपोज भी किया है.

लड़कियों की है ये खास डिमांड…

एक लड़की ने फोटो के साथ ट्वीट किया 'I've fallen over', I need to touch your abs to get up. इसके बाद ब्राजील, चीन और साउथ कोरिया सहित कई देशों की लड़कियों ने इसी लाइन को ट्वीट कर अपनी चाहत जाहिर की.

यही नहीं कुछ ने तो उन्हें कामदेव भी बताया है. लिखा ‘गर्ल्स दिल थामकर बैठो. ब्राजील में आग लगाने के लिए कामदेव (निंग) आ रहे हैं.’

साउथ कोरिया में हैं ज्यादा फेमस

एशियन गेम्स के दौरान साउथ कोरिया में निंग काफी फेमस हुए. उस वक्त उन्होंने 50 मीटर और 100 मीटर फ्रीस्टाइल में गोल्ड मेडल जीता था.

लड़कियों ने क्या-क्या ट्वीट किया

· कामदेव से कम नहीं हैं निंग. मैं तो उन्हें देखते ही रह गई. मेरा दिल आ गया है उन पर.

· आर मेरे हैंडसम बनने लायक हैं. मैं आपके लिए आपना दैश छोड़ चीन आ सकता हूं.

· निंग मैं भी आपकी तरह क्यूट हूं. क्यों नहीं हम शादी कर लें.

· गर्ल्स घड़ी का अलार्म लगा लो. निंग पानी ही नहीं, हमारे दिल में आग लगा देंगे.

· क्या निंग जेटाओ ने टी शर्ट उतार दी? तो लगाओ कैमरा अब चीन पर.

· निंग जेटाओ ब्राजील में आग लगाने पहुंचे हैं, गर्ल्स इस कामदेव से बचकर रहना.

· मैं तो ओपनिंग सेरेमनी में सिर्फ उन्हें देखना चाहती थी, लेकिन अनलकी रही.

‘चलते-चलते’ राजन ने नहीं बदली ब्याज दरें

आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में ब्याज दरों को उम्मीद के मुताबिक जस का तस रहने दिया. राजन ने आगाह किया कि आने वाले दिनों में महंगाई सिर उठा सकती है. यह रिव्यू इस लिहाज से खास था कि दरों के बारे में किसी आरबीआई गवर्नर के फैसला करने का यह आखिरी मौका था. अब आगे मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी यह काम किया करेगी. 2013 में करेंसी क्राइसिस के दौरान जुटाए गए एफसीएनआरबी डिपॉजिट्स के मैच्योर होने जैसी घटनाओं को देखते हुए मार्केट रेट्स को स्टेबल रखने के लिए राजन ने पर्याप्त नकदी की आपूर्ति का वादा किया. राजन ने फंड्स के मामले में बैंकिंग सिस्टम को आत्मनिर्भर बनाने के अपने वादे की दिशा में भी कदम बढ़ाया.

राजन ने मार्च 2017 तक महंगाई दर के 5% पर रहने और इस फिस्कल ईयर में जीडीपी ग्रोथ 7.6% होने के अपने अनुमान में बदलाव नहीं किया. रेट कट का फायदा कंज्यूमर्स को पूरी तरह न देने की बैंकों की हरकत के बारे में राजन ने दो टूक बात की. राजन ने कहा, 'नकदी की उपलब्धता के बावजूद बैंकों ने रेट कट का कुछ ही फायदा कस्टमर्स को दिया है.' उन्होंने कहा, 'पहले कुछ बैंकर कहते थे कि नकदी की कमी के चलते वे दरें घटा नहीं रहे हैं. अब कुछ लोगों से मैंने सुना है कि एफसीएनआर रिडेम्प्शन के डर से रेट कट से बैंक हिचक रहे हैं. मुझे शक है कि एफसीएनआर का मामला निपट जाने पर कोई नई चिंता सामने रख दी जाएगी.'

राजन ने अपने अंतिम मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में कहा, 'खाने-पीने की चीजों के दाम में हाल में अचानक आई तेजी ने इस साल के बाकी समय के लिए महंगाई दर में तेजी का रुझान बना दिया है.' आरबीआई ने रेपो रेट को 6.5% और कैश रिजर्व रेशियो को 4% पर रहने दिया. रेपो रेट वह दर है, जिस पर आरबीआई बैंकों को उधार देता है, वहीं सीआरआर बैंकों के डिपॉजिट्स का वह हिस्सा होता है, जो उन्हें आरबीआई के पास रखना होता है. 

बस 399 रुपए में करिए आसमान की सैर

यात्रियों को कम दाम पर सफर कराने के लिए स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एयरलाइंस कंपनी स्पाइसजेट ने एक ऑफर पेश किया. इस ऑफर में टिकट का दाम 399 रुपये रखा गया है. हालांकि इसमें टैक्स और सरचार्ज शामिल नहीं हैं. यह सुविधा सिर्फ कुछ चुनिंदा रूटों के लिए ही है. ग्रेट इंडिपेंडेंस सेल नाम का यह ऑफर 9 अगस्त से 11 अगस्त की रात तक खुला रहेगा. जिसमें 18 अगस्त से लेकर 30 सितंबर तक की टिकट बुक की जा सकेंगी.

इस ऑफर में जो रूट शामिल हैं उनमें अहमदाबाद-मुंबई, अमृतसर-श्रीनगर, बेंगलुरु-चेन्नई, बेंगलुरु-कोच्चि, कोयंबटूर-हैदराबाद, जम्मू-श्रीनगर, मुंबई-गोवा, मुंबई-हैदराबाद की टिकट बुक की जा सकती है. इसके अलावा कुछ चुनिंदा इंटरनैशनल फ्लाइट के किराये की शुरुआत 2999 रुपये से होगी. इसमें भी टैक्स और सरचार्ज अलग से देने होगें. विदेशी फ्लाइट्स वाले ऑफर में दुबई-दिल्ली और दुबई-मुंबई का टिकट बुक किए जा सकते हैं.

इस नई सेल के तहत टिकट बुक करने के लिए स्पाइसजेट की वेबसाइट पर जाना होगा. कंपनी के ऐप से भी टिकट बुक किया जा सकता है. इस ऑफर के तहत बुक की जाने वाले टिकटें रिफंडेबल हैं. टिकटें पहले आओ पहले पाओ के आधार पर मिलेंगीं. हालांकि यह ऑफर ग्रुप बुकिंग या किसी दूसरे ऑफर के साथ काम नहीं करेगा. इसके साथ ही यह ऑफर सिर्फ नॉन स्टॉप फ्लाइट्स के लिए होगा.

36 साल बाद ओलंपिक के प्ले ऑफ में इंडियन हॉकी टीम

ओलंपिक का चौथा दिन हॉकी, बॉक्सिंग और आर्चरी के लिहाज से भारत के लिए अच्छा रहा. इंडियन हॉकी टीम ने अर्जेंटीना को 2-1 से हराकर 36 साल बाद पहली बार प्ले ऑफ मुकाबलों में एंट्री कर ली.

बॉक्सिंग में विकास यादव ने अमेरिकी बॉक्सर को हरा दूसरे दौर में जगह बनाई. आर्चरी में तीरंदाज अतनु दास तीसरे दौर में पहुंच गए. हालांकि रोइंग और शूटिंग से बुरी खबर आई.

रोइंग में दत्तू भोकानाल सिंगल स्कल्स इवेंट के क्वार्टरफाइनल-4 में चौथे स्थान पर रहकर बाहर हो गए. जबकि शूटिंग में हीना सिद्धू का ओलंपिक सफर भी खत्म हो गया.

हॉकी में शानदार कामयाबी…

हॉकी में भारतीय टीम ने अर्जेंटीना को 2-1 से हराकर प्ले ऑफ में जगह बनाई. 1980 के बाद ये पहला मौका है जब भारतीय टीम प्ले ऑफ में पहुंची है. भारत के लिए पहला गोल आठवें मिनट में कंगुजम ने किया. इसके बाद दूसरा गोल कोथाजीत खडंगबम ने 35वें मिनट में किया. अर्जेंटीना की ओर से एकमात्र गोल गोंजालो पिलेट ने 49वें मिनट में किया.

भारत ने सात साल बाद अर्जेंटीना को हराया है. भारत ने आखिरी बार 2009 में अर्जेंटीना को हराया था. भारत का अगला मुकाबला हॉलैंड से होगा.

बॉक्सिंग में भारत की जीत से शुरुआत

विकास कृष्ण ने 75 किलोग्राम वेट कैटेगरी में अपना पहला मुकाबला शानदार तरीके से जीत लिया. राउंड ऑफ 64 में उन्होंने अमेरिकी बॉक्सर चार्ल्स कॉनवेल को 3-0 से हरा दिया.

मुकाबले का फैसला जजों के दिए रिजल्ट के आधार पर हुआ. जिसमें विकास ने 84 के मुकाबले 87 अंकों से मैच जीत लिया. अब अगले दौर में राउंड ऑफ 32 में विकास का मुकाबला 13 अगस्त को होगा.

आर्चरी में अतनु दास राउंड 16 में पहुंचे

भारतीय तीरंदाज अतनु दास आर्चरी के मेन्स इंडिविजुअल इवेंट में तीसरे दौर में पहुंच गए हैं. उन्होंने दो घंटे के अंदर लगातार दो राउंड के मैच जीते.राउंड ऑफ 32 में उन्होंने क्यूबा के तीरंदाज एड्रियन प्यूंटेस को 6-4 से हराकर तीसरे राउंड में जगह बनाई.

अतनु ने क्यूबाई तीरंदाज से अपना मुकाबला 28-26, 29-26, 26-27, 27-28, 29-28 से जीता. इससे पहले राउंड ऑफ 64 में उन्होंने नेपाल के बहादुर मुक्तान को 6-0 से हराकर दूसरे राउंड में जगह बनाई थी. अब प्री-क्वार्टरफाइनल यानी राउंड-16 में अतनु का सामना कोरिया के ली स्युंगयुन से होगा. यह मुकाबला 12 अगस्त को होगा.

सुजीत सरकार की फिल्म ‘पिंक’ का ट्रेलर रिलीज

सुजीत सरकार की फिल्म ‘पिंक’ की ट्रेलर रिलीज हो गई है. यह उनकी 5वीं फिल्म है जिसे उन्होंने बखूबी पर्दे पर उतारने की कोशिश की है. दो बार नेशनल अवार्ड विजेता अनिरुद्ध चौधरी ने इसका निर्देशन किया है.

यह पहले बांग्ला में बनने वाली थी लेकिन सुजीत सरकार को इसकी कहानी, जिसे रितेश शाह ने लिखा है बहुत ही अलग और दिलचस्प लगी. इसलिए उन्होंने इसे हिंदी में बनाने का संकल्प लिया क्योंकि उन्हें लगा कि आज के परिवेश में यह ऐसी कहानी है जो पूरे देश में दिखाए जाने की जरुरत है.

इस फिल्म में वकील की मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता अमिताभ बच्चन का कहना है कि उनका चरित्र सहानुभूति दिखाने वाला है. देश की परिस्थिति को दिखाते हुए इसे बनाया गया है.

निर्देशक का कहना है कि ऐसी फिल्म बनाने की इच्छा बहुत सालों से थी जब सुजीत सरकार ने इसे हरी झंडी दिखाई, तो मेरा काम आसान हुआ. अभिनेत्री तापसी पन्नू का कहना है कि वह दिल्ली की हैं और यह कहानी उनके दिल के करीब है. उन्होंने यह भी कहा कि अमिताभ बच्चन के साथ भूमिका निभाना उनके लिए बड़ी बात थी.

‘पिंक’ नाम की वजह अमिताभ बच्चन बताते है कि ‘पिंक’ ‘वीमेन एम्पावरमेंट’ को दर्शाता है. महिलाओं को शक्ति मिले इसलिए पिंक को चुना गया है इसके जरिये महिलाओं को जागृत करने की इच्छा है. उनके अंदर जो शक्ति है, उसे पहचाने और उसका प्रयोग करें.

समाज में महिलाओं का बहुत निरादर होता है, इसलिए वे अपने पैरों पर खड़े होकर बल को पहचाने. महिलाओं की शक्ति हर देश में करीब 50 प्रतिशत है. उनको ये फिल्म समर्पित है.

इस फिल्म में कई ‘हार्ड लाइन’ संवाद है जिसके बारे में पूछे जाने पर अमिताभ ने कहा कि यह सही है कि फिल्मों में ऐसी संवाद पहले कही नहीं गई है, लेकिन अगर ये संवाद कोर्ट रूम के दृश्य को सपोर्ट करे, तो गलत नहीं है. फिल्म को देखने के बाद आपको ये सारें संवाद सही लगेंगे.

तो ऐसे सीखी नरगिस और कृषिका ने मराठी भाषा

इरोस इंटरनेशनल की आगामी म्यूजिकल ड्रामा फिल्म "बैंजो" में अभिनेत्री नरगिस फाकरी न्यूयॉर्क स्थित ड़ीजे का किरदार निभा रही हैं, पर नरगिस के लिए मराठी समझ पाना बहुत ही मुश्किल था. रितेश इस फिल्म में अहम भूमिका में नज़र आएंगे.

फिल्म  के सेट पर मौजूद अभिनेता रितेश देशमुख, निर्देशक रवि जाधव, के साथ साथ क्रू मेंबर्स भी  मराठी में बात किया करते थे और नरगिस के लिए मराठी समझ पाना इतना आसान नहीं था. नरगिस के अलावा फिल्म के  सेट पर मौजूद फिल्म की प्रोड्यूसर कृषिका लुल्ला को भी मराठी समझने में  बहुत ही मुश्किल होती थी. पर सेट पर उपस्थित लोग जब मराठी में बात करते थे, तो कृषिका और नरगिस उनकी भाषा पर ध्यान देती थी, जिससे इन्हें मराठी सीखने में थोड़ी आसानी हुई.

इस बारे में नरगिस का कहना है की सेट पर रितेश और रवि सर के साथ साथ ज्यादातर लोग मराठी में ही बात करते थे, जिसकी वजह से मेरी मराठी सीखने की उत्सुकता और भी बढ़ गयी, इसीलिए जब भी कोई मराठी में बात करता था तो मैं प्रोडक्शन के लोगो से उसका मतलब पूछती थी, जिसकी वजह से मैंने मराठी के कुछ कॉमन वर्ड्स सीखे.

मोमल ने इस तरह किया पाकिस्तानी कलाकारों का बचाव

आनंद एल राय निर्मित और मुदस्सर अजीज निर्देशित हास्य फिल्म ‘‘हैप्पी भाग जाएगी’’ से बौलीवुड में एक और पाकिस्तानी अदाकारा  मोमल शेख ने कदम रखा है. यूं तो मोमल शेख पाकिस्तानी टीवी सीरियलों में बहुत बड़ा नाम हैं. उनके पिता जावेद शेख भारत व पाकिस्तान दोनो ही देशों की फिल्मों व सीरियलों में अभिनय कर चुके हैं. उनका भाई भी अभिनेता है.

पर मोमल ने पहली बार बौलीवुड में कदम रखने के साथ साथ पहली बार फिल्म में अभिनय किया है. वह बौलीवुड में बहुत बडा मुकाम हासिल करने को लेकर उत्साहित हैं. जबकि हकीकत यह है कि उनसे पहले भी बौलीवुड से कई पाकिस्तानी कलाकार जुड़े. मगर मावरा होकाने, इमरान अब्बास व अली जफर जैसे कई कलाकार असफल रहे. मगर यह सच जानने के बावजूद मोमल का अपना आत्मविश्वास डगमगाता नहीं है. बल्कि वह तो पाकिस्तानी कलाकारों के पक्ष में ही बात करती हैं.

जी हां! मोमल शेख साफ साफ कहती हैं-‘‘यह सब तकदीर की बात है. फवाद खान खूबसूरत होने के साथ साथ बेहतरीन कलाकार हैं. उनके प्रशंसक भारत व पाकिस्तान के अलावा कई देशों में काफी हैं, इसलिए वह सफल हैं. मावरा होकाने की पहली बौलीवुड फिल्म बाक्स आफिस पर भले ही असफल रही, मगर लोगों ने उसके काम को बहुत पसंद किया. मैने खुद उसकी फिल्म देखी और मुझे उसकी परफार्मेंस पसंद आयी. वह बहुत बेहतरीन अदाकारा है. उसके अभिनय में मुझे कहीं कोई कमी नजर नहीं आती. मेरी जानकारी के अनुसार उसके पास कुछ अच्छी फिल्में हैं. माहिरा खान भी अच्छी अदाकारा है, जिसने शाहरुख खान के साथ बौलीवुड फिल्म ‘रईस’ की है. मैं पूरे यकीन के साथ कह सकती हूं कि फिल्म ‘हैप्पी भाग जाएगी’ के प्रदर्शन के बाद भारतीय दर्शक भी मेरी अभिनय प्रतिभा के मुरीद हो जाएंगे.’’

VIDEO: ‘मैरिटल रेप’ पर बनी ये फिल्म आपके रोंगटे खड़े कर देगी

‘वैदिकी हिंसा, हिंसा न भवति' इस बात से भी कुछ ऐसी ही ध्वनि आ रही है कि अगर कोई दूसरा व्यक्ति महिला की इच्छा के बिना उससे संभोग करता है तो वो बलात्कार है और अपराध है लेकिन अगर खुद का पति ऐसा करता है तो वो बलात्कार नहीं है.

डिजिटल मीडिया एंड एंटरटेनमेंट कंपनी सिली मॉन्क्स की यूट्यूब पर नई लघु फिल्म 'नेनू आमे' (आई एम..शी!) काफी चर्चा बटोर रही है. फिल्म में कार्यस्थल और घर में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार, दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न पर प्रकाश डाला गया है, जिसे देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे.

साउथ फिल्मों की अभिनेत्री  सौम्या बोलाप्रगादा ने इस फिल्म को बनाया है. इस शॉर्ट फिल्म को सौम्या ने लिखा भी है और निर्देशन भी किया है. इस फिल्म में कोई भी डायलॉग नहीं है, लेकिन इसमें शादी के बाद घर में एक महिला के साथ होने वाली हिंसा और दुष्कर्म को दिखाया गया है.

सौम्या ने बताया, "यह शिवानी द्वारा निभाई गई 12 मिनट 32 सेकंड की कहानी है. मैं महिलाओं के मुद्दे उठाना चाहती थी और मुझे लगता है कि यह फिल्म इसमें सक्षम है." इस लघु फिल्म में संजीत, भगत और बिनायक दास भी हैं.

यहां क्लिक कर देखें ये रोंगटे खड़े कर देने वाली फिल्म…

watch a hard hitting short film on marital rape i am she is released

भारत में पति को परमेश्वर माना जाता है, इस बात की पुष्टि अब सरकार ने भी कर दी है. हाल ही में राज्यसभा में मैरिटल रेप यानि शादीशुदा रेप के बारे में एक सवाल के जवाब में सरकार ने कहा था कि भारत में मैरिटल रेप की अवधारणा को लागू नहीं किया जा सकता है और सरकार का इसे अपराधों की श्रेणी में लाने का कोई इरादा नहीं है.

महिला एंव बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने राज्यसभा में कहा कि भले ही पश्चिमी देशों में मैरिटल रेप की अवधारणा प्रचलित हो लेकिन भारत में गरीबी, शिक्षा के स्तर और धार्मिक मान्यताओं के कारण शादीशुदा रेप की अवधारणा फिट नहीं बैठती, इसलिए इसे भारत में लागू नहीं किया जा सकता है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि एक तरफ तो सरकारें रेप के खिलाफ कड़े कानून बनाने के लिए कमर कसे हुए हैं तो वहीं दूसरी और घर की चाहरदीवारी में किसी अपने द्वारा किए जाने वाले रेप के प्रति सरकार उदासीन क्यों बनीं हुई है? आखिर क्यों सरकार पतियों द्वारा की जाने वाली घरेलू यौन हिंसा को अपराध मानने को तैयार नहीं है?

पति परमेश्वर रेप नहीं करते? भले ही इस देश में सदियों से पतियों को परमेश्वर मानने की धारणा प्रचलित रही हो लेकिन व्यवहारिक तौर पर ये बात पूरी तरह सच नहीं है. बल्कि इससे सिर्फ महिला-पुरुष असमानता को बढ़ावा देने और पुरुष प्रधान समाज द्वारा महिलाओं को दोयम दर्जे का शामिल करने की कोशिशें दिखती हैं. खैर, सरकार इस बात से इत्तेफाक नहीं रखती और इसलिए उसने भारत में शादीशुदा रेप की अवधारणा को मानने से इनकार कर दिया.

सरकार भले ही देश में शादीशुदा रेप की बात से इनकार करके अपना पल्ला झाड़ ले लेकिन इस देश में हर दिन होने वाले वैवाहिक रेप की हकीकत को छुपा पाना उसके वश की बात नहीं है. ऐसा भारत की एजेंसियां नहीं बल्कि खुद संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट कहती है, जिसके मुताबिक भारत में हर वर्ष शादीशुदा रेप के करीब 75 फीसदी मामले होते हैं.

सरकार शादी के जिस रिश्ते को पवित्र करार दे रही है, उसी की आड़ में घर की चाहरदीवारी के अंदर पत्नी के साथ होने वाले रेप के इतने बड़े आकंड़ें सच में डराने वाले हैं. लेकिन हैरानी की बात ये है कि यूएन द्वारा भारत को मैरिटल रेप को क्रिमिनल कैटिगरी में शामिल किए जाने की सलाह के बावजूद सरकार का रवैया जस का तस है. हमारे देश का कानून और संविधान दोनों ही इस मामले में महिलाओं की मदद करने के नाम पर हाथ खड़े कर देते है.

संविधान की धारा 375 अपवाद (2) के मुताबिक, 'किसी आदमी द्वारा अपनी पत्नी, पत्नी के 15 से कम उम्र की न होने पर, के साथ बनाया गया सेक्शुअल इंटरकोर्स रेप नहीं है.' संविधान की इस धारा को लेकर काफी विवाद है और इसे हटाए जाने की मांग उठ रही है. यह बड़ी अजीब बात है कि जिस देश में लड़की की शादी की उम्र 18 साल है और जहां नाबालिग लड़की द्वारा उसकी सहमति होने पर भी बनाया गया संबंध रेप की श्रेणी में आता है, उसी देश में शादी के नाम पर किसी पुरुष को अपनी नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने की इजाजत कानून क्यों और कैसे देता है, क्या यह कानून का दोहरा रवैया नहीं है?

पिछले साल अप्रैल में मैरिटल रेप के मामले में राज्यसभा में एक सांसद द्वारा दिए गए आंकड़ें चौंकाने वाला सच सामने लाते हैं. इसके मुताबिक देश के 5 में से एक पुरुष अपनी पत्नी को जबरन सेक्स के लिए मजबूर करते हैं और देश में कुल रेप में से करीब 9-15 फीसदी मैरिटल रेप के कारण होते हैं.

हाल ही में इस मामले में इंदिरा जयसिंह द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट में मैरिटल रेप के अपराधीकरण की सिफारिश की है. इतना ही नहीं जस्टिस वर्मा आयोग द्वारा मैरिटल रेप को अपराधों की श्रेणी में शामिल किए जाने की सिफारिशों के बावजूद सरकार ने इस मामले में अपना रुख नहीं बदला है. यानी सरकार चाहे यूपीए की हो या एनडीए की, मैरिटल रेप से निजात दिलाने में महिलाओं की मदद करने वाला कोई नहीं है.

मतलब आने वाले दिनों में भी शादी की पवित्रता के नाम पर पतियों द्वारा किया जाने वाला रेप पवित्र ही बना रहेगा!

दरअसल बलात्कार पितृसत्तात्मक उत्पीड़न और शोषण की निशानी है और यहीं ये सवाल भी उठता है कि क्या सेक्सुअलिटी की मुक्ति और औपचारिक विवाह संबंधों से आजादी से महिलाओं की आजादी संभव है. लेकिन वैवाहिक बलात्कार से पहले विवाह नामक संस्था पर बहस जरूरी है. आधुनिक आर्थिक और पेशेवर जीवन के दबाव ने नौजवान महिलाओं और पुरूषों को ये अधिकार दिया है कि वो सहजीवन या लिव इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं. केवल समान रूप से आजाद महिला और पुरूष ही एक गैर दमनकारी और मुक्त यौन संबंधों का आधार बना सकते हैं. सवाल ये है कि इसे कैसे हासिल किया जाए. क्या सिर्फ राजनैतिक प्रस्ताव या कानून बना देने से ये संभव हो जाएगा. इसका एक ही जवाब हो सकता है- नहीं.

इसके लिये राजनैतिक प्रस्तावों या कानून से ज्यादा जरूरी है महिला सशक्तिकरण. जब एक महिला वैवाहिक जीवन में यौन संबंधों को स्वीकारती है तो वो समाज में स्वीकृत है भले ही वो अनिच्छा और अनमने ढंग से ऐसा कर रही हो. लेकिन अगर वो विवाह संबंधों के बाहर जाकर ऐसा करने का प्रयास करती है तो इसे अनैतिक और अपराध माना जाता है. ये सामंतवादी नजरिया है जो स्त्री को संपत्ति की दृष्टि से देखता है. हमें ये समझना होगा कि समाज में व्याप्त इस सामंतवादी पुरातनपंथी नजरिये को एक झटके में नहीं बदला जा सकता है.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें